07-03-2026, 04:33 PM
"पिताजी ने कुछ ज़मीन छोड़ दी थी और उन्होने वो सारी ज़मीन और प्रॉपर्टी सरकार को दे दी। सारा कुछ बेचने के बाद हुमारे पास जो भी रकम आई वो सब स्विस बॅंक मे जमा करा दी गयी।", उन्होने एक पेपर मेनका की तरफ बढ़ाया, "इसमे वो अकाउंट नंबर और उनके कोड्स हैं जिन्हे बताने पर तुम्हे बॅंक अकाउंट ऑपरेट करने की इजाज़त देता है।",मेनका ने पेपर ले लिया पर वो अभी भी हैरत से अपने ससुर को देख रही थी।
"राजकुल ग्रूप के हर साल के प्रॉफिट से कुछ पैसा निकाल लिया जाता है जिसे की अकाउंट्स बुक मे नही दिखाया जाता। अभी भी जो डील हुई है उसमे भी 30 करोड़ हमे अलग से मिले हैं। ये सारा पैसा भी इन बाँक्स मे जमा है।", उन्होने बाकी पेपर्स भी उसके हाथों मे दे दिए, "ये उन प्रॉपर्टीस के पेपर्स हैं जो हमने बाद मे खरीदी हैं। इनमे से कोई भी हमारे नाम से नही है।"
"इस वक़्त तुम्हारे हाथों मे जो काग़ज़ात हैं, मेनका, उनकी कीमत जानती हो कितनी है?",मेनका ने बस ना मे सर हिला दिया।
" 350 करोड़।"
"क्या?!!",मेनका का मुँह हैरत से खुल गया।
"राजासाहब,आपने अपने देश से पैसे चुरा कर ये जमा किया है।", उसने काग़ज़ अपने ससुर के हाथों मे रख दिए। "क्या फायदा है इस दौलत का और क्या करेंगे आप इतनी दौलत का? साडी बाहर बॅंक मे पड़ी है या आपके नाम से नही है...और अपने दिल पे हाथ रख के कहिए क्या आपको सच मे इन पैसों की ज़रूरत है?"
"मेनका, ये पैसे किसी बुरे दिन हमारे काम आ सकते हैं।"
"अगर बुरे दिन आएँगे तो क्या गॅरेंटी है की आपके ये पैसे भी सलामत रहेंगे?"
"राजासाहब, हमारे पास वैसे ही बहुत दौलत है। इन पैसों को तो आपको दान कर देना चाहिए था। कम से कम लोगों की दुआ तो मिलती।", मेनका चुप हो गयी। राजासाहब ने सोचा नही था कि वो इस तरह से नाराज़ हो जाएगी, पर क्या ग़लत कह रही थी। आज इतनी दौलत है पर उसे भोगने वाला कौन है। एक बेटा मर चुका है और दूसरा पता नही कब वापस आएगा। राजासाहब सर झुकाए बैठे रहे और मेनका भी वैसे ही खामोश उनकी गोद मे बैठी रही।
उन्होने उसका हाथ अपने हाथों मे थाम लिया,"। हमने ये सारी बात आपको इसलिए बताई थी क्योंकि हमे आप पे जितना भरोसा हो गया है उतना कभी किसी पे नही हुआ। हमे नही पता कि उपर वाले ने हमारी कितनी उम्र लिखी है।", मेनका कुछ कहने को हुई पर उन्होने अपनी उंगली उसके होठों पे रख दी,"। हमारे बाद अगर कोई राजकुल का ध्यान रख सकता है तो वो केवल आप हैं।"
"पर हम आज आपको एक वचन देते हैं। अपने जीते जी हम ये सारा काला पैसा दान कर देंगे।"
"हमारा दिल दुखाने का इरादा नही था।",मेनका की आवाज़ थोड़ी भर्रा गयी।
"हमारा दिल पैसे की बात से दुखा भी नही। तुमने तो हमारी आँखे खोल दी। सच मे, क्या फ़ायदा है ऐसी दौलत का जो किसी काम ही ना आ पाए। इसीलिए तो आपको वचन दिया है कि इसे दान कर देंगे। दिल तो हमारा दूसरी बात से दुखा है।",मेनका के चेहरे पर परेशानी छा गयी,"क्या कह दिया हमने?प्लीज़ बताइए।।",उसने उनके चेहरे को हाथों मे ले लिया।
राजासाहब के चेहरे पे गंभीरता आ गयी थी,"। तुम गुस्से मे हमे फिर से आप बुलाने लगी थी।"
अभी आगे लिखा जा रहा है....
"राजकुल ग्रूप के हर साल के प्रॉफिट से कुछ पैसा निकाल लिया जाता है जिसे की अकाउंट्स बुक मे नही दिखाया जाता। अभी भी जो डील हुई है उसमे भी 30 करोड़ हमे अलग से मिले हैं। ये सारा पैसा भी इन बाँक्स मे जमा है।", उन्होने बाकी पेपर्स भी उसके हाथों मे दे दिए, "ये उन प्रॉपर्टीस के पेपर्स हैं जो हमने बाद मे खरीदी हैं। इनमे से कोई भी हमारे नाम से नही है।"
"इस वक़्त तुम्हारे हाथों मे जो काग़ज़ात हैं, मेनका, उनकी कीमत जानती हो कितनी है?",मेनका ने बस ना मे सर हिला दिया।
" 350 करोड़।"
"क्या?!!",मेनका का मुँह हैरत से खुल गया।
"राजासाहब,आपने अपने देश से पैसे चुरा कर ये जमा किया है।", उसने काग़ज़ अपने ससुर के हाथों मे रख दिए। "क्या फायदा है इस दौलत का और क्या करेंगे आप इतनी दौलत का? साडी बाहर बॅंक मे पड़ी है या आपके नाम से नही है...और अपने दिल पे हाथ रख के कहिए क्या आपको सच मे इन पैसों की ज़रूरत है?"
"मेनका, ये पैसे किसी बुरे दिन हमारे काम आ सकते हैं।"
"अगर बुरे दिन आएँगे तो क्या गॅरेंटी है की आपके ये पैसे भी सलामत रहेंगे?"
"राजासाहब, हमारे पास वैसे ही बहुत दौलत है। इन पैसों को तो आपको दान कर देना चाहिए था। कम से कम लोगों की दुआ तो मिलती।", मेनका चुप हो गयी। राजासाहब ने सोचा नही था कि वो इस तरह से नाराज़ हो जाएगी, पर क्या ग़लत कह रही थी। आज इतनी दौलत है पर उसे भोगने वाला कौन है। एक बेटा मर चुका है और दूसरा पता नही कब वापस आएगा। राजासाहब सर झुकाए बैठे रहे और मेनका भी वैसे ही खामोश उनकी गोद मे बैठी रही।
उन्होने उसका हाथ अपने हाथों मे थाम लिया,"। हमने ये सारी बात आपको इसलिए बताई थी क्योंकि हमे आप पे जितना भरोसा हो गया है उतना कभी किसी पे नही हुआ। हमे नही पता कि उपर वाले ने हमारी कितनी उम्र लिखी है।", मेनका कुछ कहने को हुई पर उन्होने अपनी उंगली उसके होठों पे रख दी,"। हमारे बाद अगर कोई राजकुल का ध्यान रख सकता है तो वो केवल आप हैं।"
"पर हम आज आपको एक वचन देते हैं। अपने जीते जी हम ये सारा काला पैसा दान कर देंगे।"
"हमारा दिल दुखाने का इरादा नही था।",मेनका की आवाज़ थोड़ी भर्रा गयी।
"हमारा दिल पैसे की बात से दुखा भी नही। तुमने तो हमारी आँखे खोल दी। सच मे, क्या फ़ायदा है ऐसी दौलत का जो किसी काम ही ना आ पाए। इसीलिए तो आपको वचन दिया है कि इसे दान कर देंगे। दिल तो हमारा दूसरी बात से दुखा है।",मेनका के चेहरे पर परेशानी छा गयी,"क्या कह दिया हमने?प्लीज़ बताइए।।",उसने उनके चेहरे को हाथों मे ले लिया।
राजासाहब के चेहरे पे गंभीरता आ गयी थी,"। तुम गुस्से मे हमे फिर से आप बुलाने लगी थी।"
अभी आगे लिखा जा रहा है....


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