दिल्ली पहुँचकर हमने डोमिनोज जाकर खाना खाया और फिर सदफ़ को उसके घर की गली में छोड़ आया। उस रात हमने तीन बजे तक बातें की हम दोनों खुश थे और कल ट्यूशन में मिलने का इंतजार कर रहे थे।
अगले दिन सुबह नौ बजे उठकर में फटाफट नहाने गया और दस बजे ट्यूशन पहुँच गया सदफ पहले से ही वहाँ थी हमारे दोस्तों को हमारे बारे में अभी कुछ भी नहीं पता था। ट्यूशन खत्म होने के बाद मुझे सदफ से मिलना था पर मेरे दोस्तों ने मुझे घेर लिया और हम सब चाय की टपरी पर चले गए हम सबकी बकचोदिया ऐसे ही चल रही थी कि अभिनव बोला बहनचोद आज किसी ने सदफ की चाल देखी थी क्या , कुछ ज्यादा गांड़ नहीं मटका रही थी आज । ऐसा लग रहा था कि सुबह ही चूद कर आई हो।
ये सुनते ही मेरा चेहरा सफेद पड़ गया , मैने बात टालने के लिए कहा मुझे क्या पता में तो लेट आया था आज। पर जो साला इसकी चूत मारेगा साला लक्की होगा। मेरे न चाहते हुए भी उस दिन हम सभी ने एक शर्त लगाई कि जो भी पहले इसको पेलेगा या इसको वीडियो कॉल पर नंगी करेगा वो एक साल तक किसी भी पार्टी में कोई कॉन्ट्री नहीं करेगा। मुझे न चाहते हुए भी सबके सामने हाँ करनी पड़ी। पर मैं सदफ को पहले ही सब बताने वाला था, इसलिए डरने की बात थी ही नहीं।
इधर सदफ मुझे बार बार कॉल कर रही थी दोस्तों को विदा कर मैं सदफ़ को कॉलेज छोड़ने के लिए उसकी गली के बाहर पहुँच गया करीब पांच मिनट बाद सदफ आकर कार में बैठ गई उसको देखते ही मैं उसी में खो गया सफेद रंग की कुर्ती में सदफ़ स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा लग रही थी उसकी जुल्फें सुंदरता में चार चांद लगा रही थी।
मैने कार स्टार्ट की और हम कॉलेज के लिए चल दिये। सदफ़ मेरे लिए आलू के पराठे लेकर आई थी जिसे हम दोनों ने कॉलेज के गार्डन में बैठकर एक दूसरे को बड़े प्यार से खिलाये। हम दोनों ही कल जो भी हुआ था उसके बारे मे बात नहीं कर रहे थे। सदफ़ का मूड अच्छा था इसलिए मैने आज हुई बात उसको नहीं बताई। पर मेरा मन उसको बेहताशा चुमने का कर रहा था। अब सबके सामने तो कर नहीं सकते थे तो हम दोनों कॉलेज में घूमने लगे कि कही पर जगह मिल जाए। बहुत प्रयास करने पर भी हमे कोई जगह नहीं मिली। तो मैने सदफ को घूमने चलने को बोला।
हम दो लेक्चर अटेंड कर कॉलेज से चल दिये। सदफ होटल जाना नहीं चाहती थी तो थोड़ी देर कार में घूमने के बाद मैने उसको उसके घर छोड़ दिया। मैं भी किसी काम से दिल्ली से तीन दिन के लिए बाहर चला गया।
काम में ज्यादा व्यस्त होने के कारण मैं सदफ से बात नहीं कर पाया। वापस आया तो सदफ का व्यवहार थोड़ा सा अजीब था वो साथ होते हुए भी साथ नहीं थी। ट्यूशन में भी उसने कुछ खास बात नहीं की। कॉलेज छोड़ते समय भी कार में वो चुप ही थी। पर बिज़नेस के काम की वजह से में सदफ पर ध्यान नहीं दे पा रहा था और एक हफ्ता बीत गया।
इन दिनों में सदफ से बस कॉलेज ओर ट्यूशन में ही बात हो पा रही थी। मेरा ध्यान उस पर था ही नहीं। इधर मेरा दोस्त अभिनव सदफ को फंसाने में लगा पड़ा था। मुझे पता भी नहीं था कि दोनों कब बातचीत करने लगे थे। ऐसे करते करते एक महीना गुज़र गया। सदफ अभिनव के साथ ही कॉलेज जाने लगी थी । एक दिन अभिनव ने मुझे फोन किया और बताया कि सदफ को आज उसने किस किया । पहले तो मुझे यकीन नहीं हुआ पर मेरी सदफ से बात हुए दो महीने हो चुके थे तो कुछ भी हो सकता था।
अभिनव ने आज सदफ को अपने घर बुलाया था। सच्चाई जानने के मैं पहले से ही उसके घर में छुप गया था। शाम में सदफ अभिनव के घर आई दोनों ने आराम से बैठकर कॉफी पी ओर आराम से बातें करने लगें। मैं पूरा खुश था कि अभिनव पागल बना रहा था मेरा दोनों को देख कर कुछ नहीं लग रहा था।
थोड़ी देर में दोनों बैठकर लैपटॉप पर मूवी देखने लगे, मूवी देखते देखते दोनों धीरे धीरे एक दूसरे के करीब आ रहे थे, अभिनव ने अपने हाथ को सदफ के कंधे पर रखा हुआ था। दोनों आराम से मजे लेते हुए मूवी देख रहे थे , मूवी देखते हुए दोनों को एक घंटा ही हुआ था अभिनव के हाथ सदफ के जिस्म पर घूम रहे थे, सदफ ने अब तक अभिनव को रोका नहीं था। ये देख अभिनव ने अपने होंठों को सदफ के होंठों पर रख दिया और सदफ को चूमने लगा। सदफ ने उसको रोका नहीं बस थोड़ा सा कसमसाई।
अभिनव सदफ के होंठों को चूम रहा था और मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था। अभिनव के हाथ सदफ की चूचियों को दबा रहे थे और सदफ सिसकारियां ले रही थी। अभिनव ने सदफ के सूट को उतरने की कोशिश की पर सदफ ने उसके हाथ को हटा दिया। पर अभिनव भी सदफ को चोदने के मूड में था। उसने फिर से सदफ के सूट को ऊपर उठाया लेकिन सदफ ने फिर से उसको झटक दिया। और दोनों अलग हो गए, पर अभिनव ने उसको अपनी और खींचा और उसके निपल्स को मसल दिया सदफ की चीख निकल गई आराम से,,, आह। और सदफ पीछे हट गई। दोनों ने आराम से बैठ कर मूवी देखी और फिर अपने घर चली गई। उसके निकलते ही मैं बाहर आया मुझे देखते ही अभिनव ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा कि देख लिया सब अब वो दिन दूर नहीं जब मेरा लन्ड इसकी चूत फाड़ेगा। मैं कुछ बता नहीं सकता था इसलिए मैं भी अपने घर आ गया।
घर आकर मैंने सदफ़ को कॉल किया पर उसने कॉल नहीं उठाई। मैं समझ चुका था कि वो अब इंटेस्टेड नहीं है
अगले दिन सुबह नौ बजे उठकर में फटाफट नहाने गया और दस बजे ट्यूशन पहुँच गया सदफ पहले से ही वहाँ थी हमारे दोस्तों को हमारे बारे में अभी कुछ भी नहीं पता था। ट्यूशन खत्म होने के बाद मुझे सदफ से मिलना था पर मेरे दोस्तों ने मुझे घेर लिया और हम सब चाय की टपरी पर चले गए हम सबकी बकचोदिया ऐसे ही चल रही थी कि अभिनव बोला बहनचोद आज किसी ने सदफ की चाल देखी थी क्या , कुछ ज्यादा गांड़ नहीं मटका रही थी आज । ऐसा लग रहा था कि सुबह ही चूद कर आई हो।
ये सुनते ही मेरा चेहरा सफेद पड़ गया , मैने बात टालने के लिए कहा मुझे क्या पता में तो लेट आया था आज। पर जो साला इसकी चूत मारेगा साला लक्की होगा। मेरे न चाहते हुए भी उस दिन हम सभी ने एक शर्त लगाई कि जो भी पहले इसको पेलेगा या इसको वीडियो कॉल पर नंगी करेगा वो एक साल तक किसी भी पार्टी में कोई कॉन्ट्री नहीं करेगा। मुझे न चाहते हुए भी सबके सामने हाँ करनी पड़ी। पर मैं सदफ को पहले ही सब बताने वाला था, इसलिए डरने की बात थी ही नहीं।
इधर सदफ मुझे बार बार कॉल कर रही थी दोस्तों को विदा कर मैं सदफ़ को कॉलेज छोड़ने के लिए उसकी गली के बाहर पहुँच गया करीब पांच मिनट बाद सदफ आकर कार में बैठ गई उसको देखते ही मैं उसी में खो गया सफेद रंग की कुर्ती में सदफ़ स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा लग रही थी उसकी जुल्फें सुंदरता में चार चांद लगा रही थी।
मैने कार स्टार्ट की और हम कॉलेज के लिए चल दिये। सदफ़ मेरे लिए आलू के पराठे लेकर आई थी जिसे हम दोनों ने कॉलेज के गार्डन में बैठकर एक दूसरे को बड़े प्यार से खिलाये। हम दोनों ही कल जो भी हुआ था उसके बारे मे बात नहीं कर रहे थे। सदफ़ का मूड अच्छा था इसलिए मैने आज हुई बात उसको नहीं बताई। पर मेरा मन उसको बेहताशा चुमने का कर रहा था। अब सबके सामने तो कर नहीं सकते थे तो हम दोनों कॉलेज में घूमने लगे कि कही पर जगह मिल जाए। बहुत प्रयास करने पर भी हमे कोई जगह नहीं मिली। तो मैने सदफ को घूमने चलने को बोला।
हम दो लेक्चर अटेंड कर कॉलेज से चल दिये। सदफ होटल जाना नहीं चाहती थी तो थोड़ी देर कार में घूमने के बाद मैने उसको उसके घर छोड़ दिया। मैं भी किसी काम से दिल्ली से तीन दिन के लिए बाहर चला गया।
काम में ज्यादा व्यस्त होने के कारण मैं सदफ से बात नहीं कर पाया। वापस आया तो सदफ का व्यवहार थोड़ा सा अजीब था वो साथ होते हुए भी साथ नहीं थी। ट्यूशन में भी उसने कुछ खास बात नहीं की। कॉलेज छोड़ते समय भी कार में वो चुप ही थी। पर बिज़नेस के काम की वजह से में सदफ पर ध्यान नहीं दे पा रहा था और एक हफ्ता बीत गया।
इन दिनों में सदफ से बस कॉलेज ओर ट्यूशन में ही बात हो पा रही थी। मेरा ध्यान उस पर था ही नहीं। इधर मेरा दोस्त अभिनव सदफ को फंसाने में लगा पड़ा था। मुझे पता भी नहीं था कि दोनों कब बातचीत करने लगे थे। ऐसे करते करते एक महीना गुज़र गया। सदफ अभिनव के साथ ही कॉलेज जाने लगी थी । एक दिन अभिनव ने मुझे फोन किया और बताया कि सदफ को आज उसने किस किया । पहले तो मुझे यकीन नहीं हुआ पर मेरी सदफ से बात हुए दो महीने हो चुके थे तो कुछ भी हो सकता था।
अभिनव ने आज सदफ को अपने घर बुलाया था। सच्चाई जानने के मैं पहले से ही उसके घर में छुप गया था। शाम में सदफ अभिनव के घर आई दोनों ने आराम से बैठकर कॉफी पी ओर आराम से बातें करने लगें। मैं पूरा खुश था कि अभिनव पागल बना रहा था मेरा दोनों को देख कर कुछ नहीं लग रहा था।
थोड़ी देर में दोनों बैठकर लैपटॉप पर मूवी देखने लगे, मूवी देखते देखते दोनों धीरे धीरे एक दूसरे के करीब आ रहे थे, अभिनव ने अपने हाथ को सदफ के कंधे पर रखा हुआ था। दोनों आराम से मजे लेते हुए मूवी देख रहे थे , मूवी देखते हुए दोनों को एक घंटा ही हुआ था अभिनव के हाथ सदफ के जिस्म पर घूम रहे थे, सदफ ने अब तक अभिनव को रोका नहीं था। ये देख अभिनव ने अपने होंठों को सदफ के होंठों पर रख दिया और सदफ को चूमने लगा। सदफ ने उसको रोका नहीं बस थोड़ा सा कसमसाई।
अभिनव सदफ के होंठों को चूम रहा था और मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था। अभिनव के हाथ सदफ की चूचियों को दबा रहे थे और सदफ सिसकारियां ले रही थी। अभिनव ने सदफ के सूट को उतरने की कोशिश की पर सदफ ने उसके हाथ को हटा दिया। पर अभिनव भी सदफ को चोदने के मूड में था। उसने फिर से सदफ के सूट को ऊपर उठाया लेकिन सदफ ने फिर से उसको झटक दिया। और दोनों अलग हो गए, पर अभिनव ने उसको अपनी और खींचा और उसके निपल्स को मसल दिया सदफ की चीख निकल गई आराम से,,, आह। और सदफ पीछे हट गई। दोनों ने आराम से बैठ कर मूवी देखी और फिर अपने घर चली गई। उसके निकलते ही मैं बाहर आया मुझे देखते ही अभिनव ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा कि देख लिया सब अब वो दिन दूर नहीं जब मेरा लन्ड इसकी चूत फाड़ेगा। मैं कुछ बता नहीं सकता था इसलिए मैं भी अपने घर आ गया।
घर आकर मैंने सदफ़ को कॉल किया पर उसने कॉल नहीं उठाई। मैं समझ चुका था कि वो अब इंटेस्टेड नहीं है


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