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Adultery Adventure of sam and neha
#21
हम दोनों खिड़की से अभी भी देख रहे थे।


सैंडी अंदर चली गई—अलोक की कलाई पकड़े हुए, उसकी चाल अभी भी लहराती हुई, जैसे कोई फूल हवा में तैर रहा हो।

अब सिर्फ़ डेविड और विशाल खड़े थे—हमारी तरफ पीठ करके।

उनकी पीठ चौड़ी, कंधे भारी।

दोनों की गांड बड़ी, मोटी—एक काली, दूसरी भूरी।

बालों से भरी हुई—घने, काले, घुंघराले।

उनकी टाँगें थोड़ी खुली हुईं—जैसे कोई पावर पोज़ में खड़े हों।

और बीच में... गैप से... दोनों के लुंड का सिर झाँक रहा था।

डेविड का—मोटा, भारी, पर्पल हेड, नीचे लटकता हुआ, लेकिन अभी भी हाफ हार्ड।

विशाल का—लंबा, मोटा, हेड गोल, लेकिन वजन से नीचे की तरफ झुका हुआ।

दोनों के लुंड इतने भारी लग रहे थे कि कपड़े के बिना भी नीचे लटक रहे थे—जैसे कोई भारी फल डाल पर लटका हो।

हर छोटी हरकत में हल्का सा हिल रहे थे—भारी, वजनदार, असली।

मेरा लुंड... पीछे से कभी कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता।

मेरा छोटा, हल्का, फोरस्किन वाला—पीछे से देखने पर कोई नहीं कहेगा कि ये है।

कोई ग्लिम्प्स भी नहीं।

कोई वजन नहीं।

डी के अंदर चले जाने के बाद बालकनी में मेरा मन अब वहाँ नहीं था।

मेरा पूरा ध्यान नेहा पर था।

मैंने उसके कंधे पकड़े—हल्के से, लेकिन फर्म।

उसे बिस्तर की तरफ घुमाने की कोशिश की—एक छोटा सा इशारा, "चलो... बिस्तर पर..."

लेकिन नेहा हिली नहीं।

वो खड़ी रही—जैसे जम गई हो।

उसकी साँसें अभी भी तेज़, लेकिन अब रुक-रुक कर।

उसकी आँखें अभी भी बालकनी पर टिकी हुईं—अलोक के जाने के बाद भी।

वो शॉक में थी।

मेरा लुंड पहले से ही बाहर था—हार्ड, फड़कता हुआ, सीधा खड़ा।

उसकी आँखें अभी भी बालकनी की तरफ थीं

मैंने उसके कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया—आवाज़ भारी, गर्म, लेकिन बहुत धीमी।

"क्या हुआ बेबी... चलो... बिस्तर पर।

देख... मेरा लुंड... कितना सख्त हो गया है।

मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ... अभी... अभी।"

उसका चेहरा थोड़ा लाल, होंठ कटे हुए, आँखें आधी बंद—जैसे वो अभी भी उस सीन को दिमाग में दोहरा रही हो।

वो इतनी देर तक मेरे साथ थी—सैंडी को देखते हुए, मेरे लुंड को पकड़े हुए, मेरी उँगलियाँ उसकी चूत पर।

वो कभी नहीं रुकी।

वो कभी नहीं बोली—"बस करो"।

वो मेरे साथ थी—पूरी तरह।

क्यूरियॉसिटी थी—लेकिन वो मेरे साथ थी।

अगर मैं अब उसे जबरदस्ती बिस्तर पर ले जाता... या उसकी नज़र खिड़की से हटाता... तो वो सोचेगी कि मैं वहाँ सिर्फ़ सैंडी के लिए था।

सैंडी की बॉडी के लिए।

सैंडी के खेल के लिए।

न कि उसके लिए।

न कि हम दोनों के लिए।

अब दोनों—डेविड और विशाल—रेलिंग पर झुके हुए थे, ठीक वैसे ही जैसे पहले सैंडी झुकी थी।

डेविड पूरी तरह नंगा था—उसका लुंड अभी भी हाफ हार्ड, लटकता हुआ

विशाल की टी-शर्ट थी, लेकिन नीचे कुछ नहीं—उसका लुंड भी बाहर, भारी, लटकता हुआ।

दोनों की टाँगें थोड़ी खुली

एक पल सन्नाटा रहा।

फिर... दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा।
फिर ज़ोर से हँसे—एक गहरी, भारी, दोस्ताना हँसी।

डेविड ने अपना हाथ ऊपर उठाया—हाई फाइव।

विशाल ने भी।

दोनों के हाथ जोर से टकराए—एक तेज़, गूंजता हुआ आवाज़।

"हाई-फाइव!"

विशाल ने रेलिंग पर हाथ रखकर सिर झटका और ज़ोर से हँसा—एक गहरी, भारी हँसी जो कमरे तक गूंज गई।

"भेनचोद... KLPD हो गया... कितना मज़ा आ रहा था यार!"

डेविड ने भी हँसा—उसकी हँसी में वो गंदी, संतुष्ट वाली धुन थी।

उसने अपना लुंड अभी भी हाफ हार्ड पकड़ा, हल्के से हिलाया और पीले दाँत चमकाते हुए बोला—

"हाहाहा... हाँ यार... कोई बात नहीं... 1-2 घंटे बाद... वो सब हमारी होगी।

"अरे टेक हर सम रेस्ट भेनचोद... भेन की लोड़ी कल रात से जागी हुई है।"

"हम्म... और अब अलोक भाई उसे रियल थका देंगे... लेकिन यार... सच में... ऐसी माल... कमाल की है।"

डेविड और विशाल अब रेलिंग पर पीठ टिकाकर खड़े थे—लेकिन अब हमारी तरफ मुंह करके।

विशाल ने पहले बोलना शुरू किया—आवाज़ में अभी भी हँसी, लेकिन गंदी, भारी।

"भेनचोद... कल रात का सीन याद है?

सैंडी को चारों तरफ से भरा हुआ... तूने उसके मुँह में डाला, मैंने चूत में... अलोक भाई गांड में।

तीन लुंड एक साथ... वो रंडी चीख रही थी, लेकिन आहें भर रही थी 'और... और जोर से'।"

डेविड ने हँसा—

उसने अपना लुंड हल्के से पकड़ा, ऊपर-नीचे किया—जैसे याद करके फिर हार्ड हो रहा हो।

"हाँ यार... उसके स्तन... कितने परफेक्ट थे।

मैंने दोनों हाथों से पकड़े थे—गोल, भारी, लेकिन इतने सॉफ्ट कि हाथ में फिसल रहे थे।

निप्पल्स सख्त... मैंने पिंच किए तो वो चीखी 'आह्ह... हाँ...'।

फिर मैंने एक को मुँह में लिया—चूसा, काटा... वो काँप गई।

तूने देखा नहीं?

उसकी चूत मेरे लुंड पर सिकुड़ रही थी... जैसे कह रही हो 'और अंदर... और जोर से'।"

विशाल ने फिर हँसा—अब और जोर से।

"और तेरा लुंड उसके चेहरे पर... कितना सेक्सी लग रहा था यार।

नेहा अभी भी खिड़की की तरफ मुड़ी हुई थी—उसकी आँखें बालकनी पर जमी हुईं, पलक झपकाना भूल गई लगती थी।

वो हर मूवमेंट देख रही थी—डेविड और विशाल के लुंड को, कैसे वो हल्के-हल्के हिल रहे थे जब वो सैंडी की बात कर रहे थे।

उनकी बातें उसके कानों में गूंज रही थीं—कल रात के सीन, सैंडी के स्तनों का एहसास, डेविड के लुंड का उसके चेहरे पर टैप करना, तीन लुंड एक साथ।

मैं उसके सामने था—उसकी आँखें अभी भी बालकनी पर, लेकिन उसका बदन मेरे सामने।

मैंने उसके गले पर होंठ रख दिए—धीरे से, गर्म साँसें उसकी स्किन पर।

उसकी गर्दन पर किस किया—एक के बाद एक, जीभ से हल्का सा चाटा।

उसकी साँस रुक गई।

उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी—तेज़, अनियमित।

मैंने धीरे से नीचे जाना शुरू किया।

उसके स्तन बाहर—गोरे, गोल, निप्पल्स सख्त, हवा से ठिठुरे हुए।

मैंने एक स्तन मुँह में लिया—चूसा, जीभ घुमाई, निप्पल को हल्के से दाँतों से दबाया।

नेहा की आह निकली—बहुत धीमी, लेकिन गहरी।

"आह्ह... सैम..."

लेकिन अब नेहा का ध्यान सिर्फ़ उन दो लुंडों पर था

वो सुन रही थी।

"कल रात... उसके मुँह में... तीन लुंड... वो चीख रही थी..."

"उसकी चूत... कितनी टाइट... रस बह रहा था..."

वो दुनिया—जो उसने कभी नहीं सोची थी कि अस्तित्व में है।

गंदी, बेशर्म, आज़ाद।

मेरा मुँह अब उसके नाभि पर आ गया।

मैंने नाभि को जीभ से चाटा—गोल-गोल, हल्के से दबाव।

उसकी नाभि गहरी थी, गर्म, नरम।

मैंने उसे अच्छा ध्यान दिया—जीभ अंदर डाली, चाटा, चूसा।

धीरे से... मैंने उसकी पैंटी के इलास्टिक पर हाथ रखा।

उसे नीचे सरकाया—धीमे, लेकिन लगातार।

उसकी पैंटी जांघों से सरकती हुई नीचे गई—उसकी चूत अब पूरी बाहर।

गीली, सूजी हुई, क्लिट चमकती हुई।

मैं घुटनों पर बैठ गया—उसके सामने, उसकी चूत ठीक मेरे मुँह के सामने।

नेहा की जांघें अभी भी हल्की-हल्की काँप रही थीं।

उसने खुद ही जांघें थोड़ी और चौड़ी कीं—बिना कुछ कहे, बस एक छोटा सा मूवमेंट।

उसकी चूत अब पूरी तरह मेरे सामने थी—गीली, सूजी हुई, क्लिट चमकती हुई।

उसकी खुशबू मेरे नाक में घुसी—गर्म, मीठी, उसकी अपनी।

उसकी आँखें अभी भी बालकनी पर टिकी हुई थीं—वो देख रही थी, सुन रही थी।

विशाल ने अपना हाथ डेविड के चेहरे पर ले जाकर वो महिला वाला फैंसी गॉगल उतारने की कोशिश की।

"भेनचोद... ये गॉगल उतार... चूतिया लग रहा है।"

डेविड ने हँसते हुए हाथ हटाया—गॉगल अभी भी आँखों पर था।

कितने दिनों बाद मिला है ऐसा ताज़ा माल... याद है ना?"

"हाँ यार... लेकिन... याद है ना... पिछली बार वाला... वो कश्मीरी कपल?"

विशाल ने जोर से हँसा—उसकी हँसी गूंज गई।
"आह्ह... वो कश्मीरी... समीर और उसकी नई-नई बीवी।

हमारे कुक की नई बहू... अलोक भाई ने कैसे पकड़ा था उन्हें।

दोनों चिकने... दोनों की आँखें बड़ी-बड़ी... जैसे कभी किसी ने छुआ ही नहीं हो।"

डेविड ने अपना लुंड हल्के से पकड़ा—फड़क उठा।

"हाँ... और दोनों ने साथ में... लुंड चूसा।

पति-पत्नी... एक साथ... मेरे लुंड पर जीभ फेर रहे थे।

वो बीवी... गोरी, नाजुक... और समीर... उसका पति... नीचे से चूस रहा था... बॉल्स पर जीभ।

भेनचोद... वो सीन... कभी नहीं भूलता।

"हाँ भाई... पति-पत्नी दोनों जब एक लुंड चूसते हैं... मज़ा दोगुना हो जाता है।

"भेनचोद... अलोक भाई जानता है... औरत को कैसे यूज़ करना है।

विशाल ने दोस्ताना अंदाज़ में डेविड के कंधे पर एक हल्का-सा मुक्का मारा—जोर से नहीं, लेकिन इतना कि डेविड का शरीर हिल गया।

"मादरचोद मोटे... तेरी वजह से वो दोनों हमारे घर से निकल गए... तूने उन्हें शादी के बाद एक रात भी नहीं छोड़ा... हर रात वहाँ था जब वो घर में थे... अब वो भोली बीवी सोचती होगी... बड़े शहर में ऐसे ही चलता है।"

नेहा की उँगलियाँ मेरे बालों में उलझी हुईं—धीरे-धीरे, लेकिन कसकर।

वो मुझे और नीचे खींच रही थी—बिना एक शब्द बोले, बस इशारे से।

उसकी जांघें मेरे कंधों पर दब रही थीं

मैं घुटनों पर था—उसकी चूत ठीक मेरे मुँह के सामने।

मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालीं—गीली, गर्म, आसानी से अंदर चली गईं।

उँगलियाँ अंदर-बाहर—धीमे से तेज़, गहरे से और गहरे।

उसकी चूत मेरी उँगलियों पर सिकुड़ रही थी—रस बह रहा था, मेरी हथेली पर गिर रहा था।

मैंने जीभ निकाली—क्लिट पर रखी, गोल-गोल, हल्का सा चूसते हुए।

"भेनचोद... लेकिन ये सैंडी तो फॉर्च्यून है... भेन की लोड़ी से मन नहीं भरता।
क्या वो अभी रूम में है?

चल... देखते हैं... अलोक भाई कैसे चोदता है उसे।"

डेविड ने दाँत चमकाते हुए हँसा।

वो तो चले गये होंगे। ... भेनचोद अपना बेड पूरा पसीने, कम, पेशाब से भीगा हुआ है... पूरा गीला।

वो लोग... शायद सूट में चले गए होंगे।


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Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-02-2026, 04:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 17-02-2026, 10:06 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 04:47 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 06:31 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 19-02-2026, 10:42 PM
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RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 24-02-2026, 12:04 PM
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RE: Adventure of sam and neha - by BHOG LO - 25-02-2026, 01:21 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 28-02-2026, 02:02 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 28-02-2026, 04:06 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:20 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:24 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 07-03-2026, 12:08 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 09-03-2026, 12:27 PM
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RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 02:13 PM
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RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 25-03-2026, 08:11 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:15 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:25 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:27 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 02-04-2026, 12:57 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:30 PM
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RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:58 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 09-04-2026, 03:45 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Glenlivet - 09-04-2026, 07:33 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 09-04-2026, 07:59 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 12-04-2026, 01:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:02 PM
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RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:25 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - Yesterday, 12:00 AM



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