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Misc. Erotica सम्मान और बदला: Hindi Version Of Honor and Vengeance
शेर की सुलगती रात
 
शेर ने जैसे ही अपने उस छोटे और तंग कमरे का दरवाज़ा बंद किया, उसकी आँखों में वह शरीफ़ाना पर्दा हट गया और उसकी जगह हवस ने ले ली।

 
शेर का पूरा बदन गुस्से से कांप रहा था। उसके दिमाग में सरताज का चेहरा आ रहा था, जिसने ऐन मौके पर रंग में भंग डाल दिया था।
 
शेर [दांत पीसते हुए, बुदबुदाते हुए]:
 
"मादरचोद... रंडी का बच्चा सरताज! साला भड़वा सिक्युरिटीवाला! बस दो मिनट... सिर्फ दो मिनट और मिल जाते तो मैं उस मेमसाब के गुलाबी कुएँ में अपना सारा ज़हर उतार देता। साला कुतिया का जड़ा, जब देखो तब अपनी वर्दी की पूंछ हिलाता हुआ बीच में घुस आता है। साले तेरी माँ की चूत में रिवॉल्वर डाल दूँ, तूने आज मेरी जन्नत का दरवाज़ा बंद कर दिया। हरामज़ादा, गश्ती का औलाद... तू उधर थाने में अपनी गांड़ मरवाता रहता तो क्या बिगड़ जाता? साले तेरी बोटी-बोटी काट के कुत्तों को खिला दूँ, तूने शेर के मुँह से शिकार छीन लिया।"

 
कमरे में घुप्प अंधेरा था। शेर ने लाइट नहीं जलाई। वह सीधा अपनी पुरानी चारपाई पर जाकर लेट गया। पूरा कमरा उसकी तेज़ और भारी साँसों से गूँज रहा था। उसका दिमाग अभी भी उसी बेडरूम में अटका हुआ था, जहाँ उसने आज इतिहास रचा था।

 
उसने अपनी आँखें बंद कीं और अपनी पैंट की ज़िप खोली। जैसे ही उसका हाथ अपने 7 इंच के उस सख्त और बेचैन लंड पर गया, उसके बदन में बिजली सी दौड़ गई। वह पत्थर की तरह कड़ा हो चुका था, जिसे थामते ही शेर के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई। वह धीरे-धीरे उसे सहलाने लगा, और हर झटके के साथ आज के उन जादुई पलों को फिर से जीने लगा।

 
शेर ने अपने मन में फिर से वही नज़ारा बुना—मीरा मैडम की वह पीली साड़ी, वह गहरा और मखमली पेट, और वह गहरी नाभि जिसमें उसकी ज़बान ने आज गोता लगाया था। उसे याद आया कि कैसे उसके हाथ उन भारी और दूधिया स्तनों पर फिसले थे। वह अहसास इतना ताज़ा था कि शेर को लगा जैसे उसकी उंगलियों में अभी भी मीरा के जिस्म की मलाईदार कोमलता और उन गुलाबी कलियों की सख्ती महसूस हो रही है।

 
उसने अपने लंड को ज़ोर से भींचा और फुसफुसाया:
 
"उफ़... मेमसाब... क्या माल हो तुम। आज तो बस ज़बान से चखा है, पर कसम खुदा की... तुम्हारी उस गुलाबी दरार का ज़ायका शहद से भी मीठा था। वो पसीने की नम खुशबू... वो चिकनी जांघें... आज तो इस शेर ने अपनी सल्तनत कायम कर दी।"

 
वह बिस्तर पर पड़ा-पड़ा तड़प रहा था। वह उन पलों को याद कर रहा था जब उसने ब्रा के हुक खोले थे और वे दो गोरे पहाड़ आज़ाद होकर उसके सामने छलक पड़े थे। उसने अपनी आँखें मूँद लीं और कल्पना की कि वह फिर से वहीं है, अपना मुँह उन भारी स्तनों में छिपाए हुए उन्हें पागलों की तरह चूस रहा है। उसका हाथ अब और तेज़ चलने लगा।

 
उसे याद आया कि कैसे उसने मीरा मैडम की पैंटी हटाई थी और वह गुलाबी, चिकना खज़ाना उसकी नज़रों के सामने था।

 
उसका हाथ उसके लंड पर और तेज़ चलने लगा जब उसने उस पल को याद किया जब उसकी उंगलियां उन नीचे वाले गुलाबी होंठों पर रेंग रही थीं।
 
शेर (यादों में खोया हुआ):
 
"उफ़... वो रेशमी कोमलता। मेरी उंगलियां जब उन भीगे हुए गुलाबी होंठों के बीच फिसली थीं, तो लगा जैसे मलाई के बीच हाथ डाल दिया हो। वो दरार... कितनी गर्म और रसीली थी। मेरी उंगलियां उन गुलाबी किनारों को सहला रही थीं, उन्हें धीरे-धीरे खोल रही थीं। मैंने जब अपनी बीच वाली उंगली उस छोटी सी गुलाबी कली पर रगड़ी थी, तो मेमसाब कैसे बिजली की तरह तड़पी थीं। उनके जिस्म का वो रस मेरी उंगलियों पर चिपक गया था… वो महक... वो फिसलन..."

 
उसने कल्पना की कि उसकी उंगलियां अभी भी उन गुलाबी होंठों को चौड़ा कर रही हैं, उनके बीच की गहराई को नाप रही हैं।

 
लेकिन इसी बीच, एक कड़वी याद उसके ज़हन में बिजली की तरह कौंधी, और उसकी रफ़्तार थोड़ी कम हो गई। उसे याद आया कि जब वह मीरा के जिस्म के साथ खेल रहा था, जब उसकी उंगलियां उसकी जांघों को सहला रही थीं और उसका मुँह उसकी चूत पर था, तब मीरा के होंठों से क्या निकला था।

 
उसने हताशा में अपने दांत पीसे। उस चरम उत्तेजना के समय भी मीरा ने शेर का नाम नहीं लिया था। उसने बड़ी हसरत से सोचा था कि शायद आज वह उसे अपनी बाहों में भर लेगी, लेकिन मीरा तो उस गहरे नशे में भी 'सरताज... सरताज...' ही पुकार रही थी।

 
शेर का आंतरिक संवाद :
"साला... सब कुछ मैंने किया। ज़न्नत मैंने दिखाई। उसकी चूत की आग को अपनी उंगलियों से मैंने सहलाया, पर नाम उस सिक्युरिटीवाले का? क्यों मेमसाब... क्या इस नौकर के स्पर्श में इतनी ताकत नहीं कि आप अपना होश खो बैठें? आज मैं आपके बदन का मालिक था, सरताज तो बस फोन पर गिड़गिड़ा रहा था।"

 
उसे यह बात अंदर ही अंदर खाए जा रही थी। उसे लग रहा था जैसे उसने किला तो जीत लिया, पर झंडा अभी भी सरताज का ही लहरा रहा है। उसकी हवस के साथ-साथ अब एक ज़हरीली ईर्ष्या भी पैदा हो रही थी। वह चाहता था कि अगली बार जब वह उसे छुए, तो मीरा की आँखें खुलें और वह सरताज को नहीं, बल्कि शेर को पुकारे।

 
शेर [मन ही मन]:
"अभी तो तूने उस वर्दीवाले के वहम में टांगें फैलाई हैं, मीरा मैडम। पर वो दिन दूर नहीं जब मैं तुझे इस कदर तोड़ूँगा कि तेरे दिमाग से उस सरताज का नाम मिट जाएगा। उस दिन तेरी ज़बान पर सिर्फ 'शेर' का नाम होगा। तू चीखेगी, चिल्लाएगी और कहेगी—'शेर, और तेज़... शेर, मुझे बर्बाद कर दे!' बस उस दिन का इंतज़ार है।"

 
उसका हाथ अब वहशीपन की हद तक तेज़ हो चुका था। वह खुद को मीरा के ऊपर महसूस कर रहा था, यह सोचकर कि वह उसे अपनी मर्दानगी के नीचे रौंद रहा है। जैसे ही वह अपने चरम  पर पहुँचा, उसने अपनी मुट्ठी को और कस लिया और एक दबी हुई दहाड़ के साथ अपना सारा लावा बाहर निकाल दिया।

 
वह हाँफते हुए बिस्तर पर ढह गया। कमरे की हवा उसकी भारी साँसों और हवस की गंध से भर चुकी थी। आज की तरक्की से वह खुश तो था, पर अधूरी प्यास ने उसे और भी खतरनाक बना दिया था।

 
चारपाई पर लेटे-लेटे, हाँफते हुए शेर की आँखों में एक नई और ज़्यादा ज़हरीली चमक उभरी। उसने अपनी लंड से लिपटे चिपचिपे रस को बेपरवाही से पोंछा और छत की ओर ताकने लगा। आज की नींद वाली दवा ने उसे मौका तो दिया, पर एक कमी रह गई थी—मीरा होश में नहीं थी। और जब तक वह होश में रहकर शेर के लंड के लिए नहीं तड़पेगी, तब तक शेर का बदला और उसकी हवस अधूरी रहेंगी।

 
उसने अपने सिर के नीचे हाथ रखा और एक कुटिल मुस्कान के साथ अपने अगले दांव के बारे में सोचने लगा।

शेर का नया पैंतरा: 'आग लगाने वाली दवा'

शेर [मन ही मन]:
"वो नींद वाली दवा तो सिर्फ ट्रेलर थी। अब असली खेल शुरू होगा। साला, उस नींद में तो वो भड़वे सरताज का नाम जप रही थी, पर अब जो मैं उसे पिलाऊँगा, उससे नींद कोसों दूर भाग जाएगी। एक ऐसी दवा... जो रगों में खून नहीं, लावा दौड़ाती है। जो चूत के भीतर ऐसी खुजली और प्यास पैदा करती है कि औरत को अपने सामने खड़ा हर मर्द सांड नज़र आने लगता है।"

 
इस दवा को पीने के बाद इंसान होश में तो रहता है, पर उसका अपने शरीर पर काबू नहीं रहता। उसे बस 'वो' चाहिए होता है।

 
शेर चारपाई पर चित्त लेटा हुआ अपनी गंदी छत को घूर रहा था, और उसके दिमाग में शैतानी साजिश की परतें खुल रही थीं। वह जानता था कि अगर उसने एक साथ भारी खुराक दे दी, तो मीरा को शक हो जाएगा या उसकी तबीयत बिगड़ सकती है। उसने अपने लंड पर हाथ फेरते हुए एक लंबी और गहरी सांस ली।

 
शेर [मन ही मन, कुटिलता के साथ]:
"जल्दबाजी नहीं शेर... जल्दबाजी काम बिगाड़ देती है। अगर मेमसाब को ज़रा भी भनक लग गई, तो वो वर्दी वाला कुत्ता मेरी खाल उधेड़ देगा। मुझे तो कतरे-कतरे से ज़हर भरना है। थोड़ा-थोड़ा करके उनके खून में हवस का नशा घोलूँगा। इतना कम कि उन्हें लगे कि ये गर्मी मौसम की है, या उनके खुद के बदलते मिज़ाज की।"

 
उसने तय किया कि वह हर दिन दवा की मात्रा रत्ती-रत्ती बढ़ाएगा।

शेर [आंतरिक संवाद]:
"कल जब वो हरामज़ादा सरताज घर पर होगा, तब मैं बस एक चुटकी दवा डालूँगा। उतनी ही, जिससे मेमसाब का जी थोड़ा घबराने लगे, उनके बदन में एक अनजानी सी सिहरन दौड़े। वो सरताज के पास जाएँगी, उससे चिपकेंगी, पर वो साला थका-हारा सिक्युरिटीवाला उनकी उस सुलगती प्यास को बुझा नहीं पाएगा। और जब वो नायाब बदन प्यासा रह जाएगा, तब उनकी नज़रें घर में मौजूद दूसरे मर्द पर पड़ेगी—मुझ पर। वो देखेंगी कि ये नौकर कितना जवान और तगड़ा है।"

 
असली खेल तब शुरू होना था जब सरताज किसी लंबे टूर या नाइट ड्यूटी पर जाने वाला हो।

शेर [दांत पीसते हुए और सरताज को गाली देते हुए]:
"जा साले मादरचोद सरताज, तू हफ्ते भर के लिए बाहर जा। तेरी गैर-मौजूदगी में मैं दवा की खुराक दोगुनी कर दूँगा। जब तू दूर होगा और तेरी ये रेशमी बीवी कमरे में अकेली तड़प रही होगी, तब उसका ये वफादार कुत्ता अपनी मर्दानगी का जलवा दिखाएगा। तू साला सरहद पर या मुजरिमों के पीछे भागता रह, यहाँ तेरी अमानत की गुलाबी दरार मेरे 7 इंच के लट्ठा के लिए प्यासी होकर खुलेगी।"

 
उसने अपनी आँखों के सामने वो नज़ारा बुना जहाँ मीरा धीरे-धीरे अपनी इज़्ज़त और लोक-लाज भूल रही है।

शेर [वहशी मुस्कान]:
"रोज़ थोड़ी-थोड़ी दवा उनके जिस्म की आग बढ़ाएगी। उनके स्तनों में भारीपन बढ़ेगा, उनकी जांघों के बीच की नमी हर गुज़रते दिन के साथ और चिपचिपी होती जाएगी। वो खुद को शीशे में देखेंगी और अपनी ही हवस से डरेंगी। और जब वो पूरी तरह टूट जाएंगी, जब उनका सब्र बांध तोड़ देगा, तब मैं अपनी मुस्कान के साथ उनके सामने खड़ा होऊँगा। उस दिन वो सरताज का नाम नहीं लेंगी, उस दिन वो मेरी पैंट की चैन की तरफ लपकेंगी।"

 
शेर ने अपनी उंगलियों को अपनी जांघ पर ऐसे चलाया जैसे वह मीरा की पैंटी के किनारे को सहला रहा हो।

शेर [फुसफुसाते हुए]:

"धीरे-धीरे... मेमसाब। अभी तो सिर्फ उंगली ने चखा है। रोज़ एक कतरा दवा, और रोज़ आपकी इज़्ज़त की एक परत गिरेगी। जिस दिन सरताज उस लंबे दौरे पर जाएगा, उस रात आप खुद मुझे अपने बेडरूम में बुलाएंगी। कहेंगी—'शेर, मुझे बहुत गर्मी लग रही है, मुझे सहला दो।' और तब ये शेर आपको दिखाएगा कि असली राजा कौन है।"
Deepak Kapoor
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https://xossipy.com/thread-72031.html -- सम्मान और बदला
https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह --किरदार निभाना




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RE: सम्मान और बदला: Hindi Version Of Honor and Vengeance - by Deepak.kapoor - 02-03-2026, 04:19 PM



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