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Incest खेल ससुर बहु का
मेनका ने वैसे ही मुँह छुपाए हुए सर हिला कर मना कर दिया।

"
प्लीज़, तुम्हे हमारी कसम।" उन्होने उसके हाथ उसके चेहरे से हटा दिए।


मेनका ने बहुत धीरे से कहा,"यश।" मैत्री की पेशकश

"एक बार और, मेरी जान,प्लीज़।" राजासाहब ने बेताबी से उसके गाल चूम लिए।


इस बार मेनका ने अपनी आँखें खोल अपने प्रेमी की आँखों मे देखा,"आइ लव यू,,,,यश।"

इस बात ने तो राजासाहब को खुशी से पागल कर दिया  और  वो उसके जिस्म पर टूट पड़े। उसके गुलाबी निपल्स अब उनकी जीभ और होठों की रहम पर थे। "एयेए...ह...ह्ह्म्म" मेनका का बदन कमान की तरह मूड गया और छाती बिस्तर से उपर उठ गयी।
उसने अपने ससुर के सर को अपने सीने पर कस के भींच लिया। राजासाहब ने एक चूची मुँह मे ली और दूसरी को हाथ मे और लगे उन्हे चूसने और दबाने। मेनका का जिस्म पूरी तरह से जोश मे डूब गया था और अब तो वो झड़ने ही वाली थी। राजासाहब ने चूचियो की पोज़िशन बदल दी, पहले बाई मुँह मे थी, अब दाई आ गयी, पर उनका चूसा जाना  और  दबाया जाना वैसे ही जारी रहा। मेनका ने हाथ नीचे ले जाकर पायजामा के उपर से ही अपने ससुर के खड़े लंड को पकड़ लिया  और  मसलने लगी। थोड़ी ही देर बाद मेनका का जिस्म अकड़ा  और  उसने अपनी जीभ दांतो तले दबा ली- उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था।

राजासाहब पलंग पर खड़े हो गये और अपना पायजामा भी उतार दिया  और  अपनी बहू के सामने पूरे नंगे हो गये। वो झुक कर घुटनो पर खड़े हुए- उनका इरादा फिर से अपनी बहू के उपर चढ़ने का था, पर तभी मेनका की नज़र अपने ससुर के लंड पर पड़ी जिसने उसे पागल कर दिया था।

वो झट से उठी और अपने ससुर के लंड को अपने मुँह मे ले लिया  और  चूसने लगी। अब राजासाहब बिस्तर पर अपने घुटनो पे खड़े थे और  मेनका बैठ कर उनके लंड को चूस रही थी, साथ-साथ उसके हाथ लंड  और  नीचे लटक रहे अंडो को सहला  और  हिला रहे थे। राजासाहब ने अपने हाथ उसके सर पर रख दिए  और  खुद भी  हौले-हौले कमर हिला कर उसके मुँह को चोदने लगे। मेनका ने अपने हाथ उनके लंड पर से हटा लिए और पिछे ले जाकर उनकी गांड को पकड़ लिया। अपने नाखूनओ से वो हल्के-हलके उनकी गांड सहलाने लगी। राजासाहब को बहुत मज़ा आ रहा था। उनकी पकड़ अपनी बहू के सर पर और मज़बूत हो गयी  और  वो थोड़ी और तेज़ी के साथ उसके मुँह को चोदने लगे। मेनका को तो ये लंड वैसे ही बहुत प्यारा लगता था। उसका तो दिल करता था की बस हर वक़्त वो इस से खेलती रहे। उसने भी राजासाहब की गांड  और  मज़बूती से पकड़ अपना मुँह उनकी जाँघो के बीच थोड़ा और घुसा दिया। राजासाहब झड़ने ही वाले थे पर उनका इरादा आज मेनका के मुँह मे अपना पानी छोड़ने का नही था।

उन्होने अपना लंड मेनका के मुँह से बाहर खींच लिया तो मेनका ने सवालिया नज़रो से उन्हे देखा। राजासाहब ने उसकी बाँहे पकड़ उसे उपर उठा लिया, अब वो  भी अपने ससुर जैसे उनके सामने घुटनो पे खड़े थी। राजासाहब ने अपने हाथ उसकी कमर पे लपेट दिए  और उसे चूमने लगे। जवाब मे मेनका ने भी अपने ससुर की कमर के गिर्द अपने हाथ कस दिए। राजासाहब का प्री-कम से गीला लंड, दोनो के जिस्मो के बीच उसके पेट पे दबा हुआ था। चूमते हुए दोनो के हाथ एक-दूसरे की कमर से फिसल कर नीचे एक-दूसरे की गांडो से खेलने लगे। जहा राजासाहब अपनी बहू की गांड के फांको को जम के मसल रहे थे वही मेनका उनकी गांड पे अपने नाखूनओ के निशान छोड़ रही थी। मैत्री की लेखनी

राजासाहब वैसे ही घुटनो पे खड़ी मेनका के होठों को छोड़ नीचे आ उसकी चुचियों को चूसने लगे। थोड़ी देर चूसने के बाद वो और नीचे आए, उसके पेट को चूमा  और  फिर उस से भी नीचे उसकी चूत पे एक किस ठोक दी। मेनका नीचे हो कर  बैठने ही वाली थी की राजासाहब झट से उसके घुटनो के बीच लेट गये  और  उसकी कमर पकड़ उसे अपने मुँह पर बिठा लिया।

अब राजासाहब चित लेते थे  और  मेनका उनके मुँह पर बैठी थी। राजासाहब ने आँखे उठा कर अपनी बहू को देखा, उसके चेहरे पर हैरत और जोश की मिलीजुली  मुस्कान थी। हाथ आयेज ला उन्होने उसकी चुत की फांको को फैलाया  और  अपनी  जीभ उसके अंदर डाल दी और चाटने लगे।"...ऊओ...ऊओह...।",
 
मेनका की आँखे बंद हो गयी, उसने अपने ससुर के सर को सहारे के लिए पकड़ लिया  और  अपनी कमर हिलाने लगी। राजासाहब उसकी चूत चाट ते हुए अपने हाथ उसकी कमर से हटा उपर ले जा उसकी चुचियाँ दबाने लगे। मेनका के लिए ये बहुत ज़्यादा था और वो दुबारा झड़ गयी पर राजासाहब ने उसकी चूत चाटना नही छोड़ा। वो उसी तरह अपने हाथों से उसकी चूचिया दबाते रहे, उसके निपल्स मसलते रहे। उन्होने अपनी बहू की चूत मे से जीभ तब तक नही निकाली जब तक की वो दो बार  और  नही झड़ गयी।

आखरी बार झड़ते ही मेनका निढाल हो आगे गिर गयी तो राजासाहब उसकी जांघों मे से सर निकाल उठ बैठे। मेनका पेट के बल लेट गहरी साँसे ले रही थी। राजासाहब अपने हाथों से उसकी पीठ  और  गांड सहलाने लगे। थोड़ी देर सहलाने के बाद उन्होने अपने होठ उसकी गांड पर रख दिए और वहाँ पर जम कर चूमा, चटा  और  चूसा। चूस-चूस कर उसकी गांड की फांको  और  जांघों के पिछले हिस्से पर  उन्होने लव बाइट्स छोड़ दिए।

फिर उन्होने ने उसे कमर से पलट कर सीधा किया  और  उसकी जांघों पे चूमने  और  चूसने लगे। मेनका के बदन पर कल की लव बाइट्स के निशान अभी भी ताज़ा थे, राजासाहब ने उन मे कुछ और निशान जोड़ दिए। उसकी जांघों से उनके होठ  उसकी चूत पर आए और जितना भी पानी अभी उसकी चूत ने छोड़ा था, उसे पी गये। राजासाहब का अगला निशाना मेनका की नाभि थी। उनकी जीभ उसकी नही की गहराई  नापने कागी तो मेनका फिर से गरम होने लगी। उसका दिल कर रहा था कि बस अब उसके ससुर उसकी चूत मे अपना लंड डाल दे। उसने हाथ बढ़ा कर अपने ससुर के बाल पकड़ कर खींचे,"इधर आइए ना..."।

राजासाहब उपर आकर उस पर लेट गये और उसकी चूचिया चूसने लगे। थोड़ी देर बाद उठे कर मेनका की जांघों पे हाथ रखा तो उसने खुद ही उन्हे फैला दिया। राजासाहब ने अपना लंड एक झटके मे ही उसकी चूत मे दाखिल कर दिया।
"ऊओ...ऊव्ववव!।" मेनका का सर पीछे मूड गया,छाती हवा मे उठ गयी  और  कमर खुद बा खुद झटके खाने लगी। राजासाहब ने भी बहुत देर तक अपने उपर काबू रखा था। अब उन्होने भी जम कर उसकी चुदाई शुरू कर दी।

"आ...न्न्ह...आ...आन्न्न्नह! कमरे मे मेनका की आनहें गूंजने लगी तो राजासाहब के धक्कों की रफ़्तार और भी बढ़ गयी।

उन्होने अपने होठ उसकी छाती पे और कस दिए और ज़ोर से चूसने लगे, फिर अपना लंड पूरा बाहर निकाल कर ज़ोर के धक्कों के साथ फिर अंदर पेलने लगे। मैत्री की रचना

हर धक्के के साथ मेनका उनके लंड के टोपे को अपनी कोख पे लगता महसूस कर रही  थी  और  उसे इतना मज़ा आ रहा था की पुछो मत। तभी राजासाहब ने वैसे ही उसकी चूची चूस्ते हुए फिर से एक ज़ोर का धक्का मारा तो उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, वो उचक कर अपने ससुर से चिपक गयी उनका जिस्म भी झटके खाने लगा  और  उसने उनके लंड से च्छूटता पानी अपनी चूत मे भरता महसूस किया।

दोस्तों आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ

तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत.
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - Yesterday, 01:15 PM



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