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Adultery Adventure of sam and neha
#20
दो खूबसूरत औरतें मेरे सामने थीं। दोनों स्पेशल ।


एक मेरे साथ थी—मेरी नेहा।

उसकी टी-शर्ट में स्तन हल्के से सहला रहा था , निप्पल्स सख्त, उसकी पैंटी मेरी उँगलियों से भीग रही थी।

वो देख रही थी—बालकनी की तरफ

उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, चमकती हुईं।

वो एक पल के लिए भी नहीं हिचकिचाई।

न रुकी।

न शरमाई।

न कहा—"सैम... ये क्या कर रहे हो?

एक औरत को ऐसे देख रहे हो मेरे सामने?"

वो बस देख रही थी।

जैसे हम पॉर्न देखते हैं।

बस... ये पॉर्न लाइव था।

असली।

और ज़्यादा इंटेंस।

ज़्यादा करीब।

ज़्यादा खतरनाक।

वो मेरे लुंड को महसूस कर रही थी—उसकी गांड पर दबाव, उसकी चूत पर मेरी उँगलियाँ।

वो मेरे साथ थी—पूरी तरह।

उसने एक पल के लिए भी नहीं सोचा कि ये गलत है।

वो बस... क्यूरियस थी।

क्या हो रहा है।

क्यों हो रहा है।

कैसे हो रहा है।

दूसरी औरत बालकनी में थी—सैंडी।

एक 25 साल की इन्फ्लुएंसर, फेमस, परफेक्ट बॉडी वाली।

शर्ट में, हवा में लहराती हुई।

उसकी शर्ट के बटन खुले थे—स्तन आधे से ज़्यादा खुले, निप्पल्स हवा से सख्त।

गुलाबी पैंटी, ट्रायंगल ।

वो डेविड और विशाल के बीच में थी—तीनों इतने करीब कि उनकी साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।

वो खेल रही थी—हँस रही थी, धक्का मार रही थी, सिगरेट शेयर कर रही थी।

उसकी हँसी में कोई शर्म नहीं थी।

कोई डर नहीं था।

सैंडी की सबसे दिलचस्प बात यही है—वो "नो" नहीं कहती।

खासकर जब ऑर्डर अलोक, डेविड या विशाल की तरफ से आता है।

मैंने देखा—डेविड ने उसका हाथ पकड़ा, धीरे से नीचे ले गया।

अपनी क्रॉच की तरफ।

छोटे अंडरवियर के ऊपर।

सैंडी की उँगलियाँ उसके लुंड पर रख दी गईं।

एक सेकंड के लिए वो हिचकिचाई—हाथ हल्का सा पीछे खींचने लगा।

शायद रिस्क का ख्याल आया।

शायद सोचा—क्या कोई देख रहा है?

शायद सोचा—ये बहुत ज़्यादा हो रहा है।

लेकिन डेविड ने उसे यकीन दिलाया।

उसने चारों तरफ देखा—कोई नहीं।

फिर उसने सैंडी की आँखों में देखा—एक छोटी, भरोसे वाली नज़र।

"सेफ है... कोई नहीं है।"

सैंडी ने हाथ नहीं खींचा।

फिर... वो रगड़ने लगी।

धीमे-धीमे।

उँगलियाँ अंडरवियर के ऊपर से लुंड पर सरक रही थीं—लंबाई, मोटाई, फड़कन—सब महसूस कर रही थी।

उसका हाथ जादू कर रहा था।

फिर सैंडी ने विशाल की तरफ मुड़ी।

उसने फिर वही स्मोक रूटीन दोहराया—सिगरेट उसके होंठों पर रखी।

विशाल ने कश लिया—गहरा, लंबा।

फिर सैंडी आगे झुकी।

उसने धुआँ विशाल के मुँह में छोड़ा—धीरे से, होंठों से होंठ छूते हुए।

विशाल ने साँस खींची—सैंडी के होंठों से।

धुआँ दोनों के चेहरों के चारों तरफ फैल गया।

शायद विशाल को थोड़ा जलन हुई थी—क्योंकि 5 मिनट लेट हो गया था।

अब वो मेकअप कर रहा था

वो जल्दी में था—अपना हिस्सा लेने के लिए।

मेंने सोचा अलग में विशाल की जगह होता तो शायद में भी यही करता। .. ये सोचते हुए मेने नेहा स्तन के जोर से दबा दिए।

हमारा एंगल से सैंडी और डेविड साफ़ दिख रहे थे—विशाल उनके पीछे था

डेविड और सैंडी अब बहुत करीब थे—उनकी साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।

डेविड के दोनों हाथ सैंडी की कमर पर थे—नंगी स्किन पर।

उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर सरक रही थीं—शर्ट को ऊपर धकेलते हुए।

शर्ट का निचला हिस्सा अब उठ चुका था—सैंडी की कमर पूरी नंगी।

उसकी गुलाबी पैंटी अब पूरी तरह दिख रही थी

सैंडी का एक हाथ अब डेविड के बॉल्स पर था—अंडरवियर के ऊपर से।

डेविड के छोटे अंडरवियर से उसका लुंड का सिर बाहर झाँक रहा था।

पर्पल, गोल, मशरूम जैसा।

शर्ट का निचला हिस्सा उठता जा रहा था—धीमे, लेकिन लगातार।

सैंडी की कमर पूरी नंगी हो चुकी थी, फिर पेट का निचला हिस्सा, फिर... नीचे से स्तनों का निचला कर्व दिखने लगा।

सैंडी ने सिर हिलाया—न में।

उसके होंठ मुस्कुरा रहे थे।

डेविड ने नहीं रोका।

उसके हाथ और ऊपर सरके—शर्ट अब इतनी ऊपर थी कि नीचे से उसके स्तनों का निचला हिस्सा साफ़ दिख रहा था।

गोल, भारी, अभी भी कल रात के निशानों से हल्के लाल।

निप्पल्स अभी छुपे हुए थे—बस थोड़ा सा और ऊपर...

तभी सैंडी ने डेविड के कान में कुछ फुसफुसाया।

बहुत धीरे—हमने नहीं सुना।

लेकिन डेविड ने सुना।

उसका हाथ रुक गया।

फिर वो पीछे हटा—बहुत थोड़ा।

उसने सैंडी की ठोड़ी पकड़ी—हल्के से, लेकिन प्यार से।

फिर उसके गाल पर दो हल्के थप्पड़ मारे—प्लेफुल, लेकिन थोड़े से डरावने।

"स्मार्ट गर्ल... स्मार्ट गर्ल।"

डेविड ने सैंडी की शर्ट को छोड़ दिया—अब वो खुद ही आगे बढ़ रहा था।

उसकी उँगलियाँ शर्ट के सामने वाले बटनों पर गईं।

एक... दो... तीन...

वो बटन जल्दी-जल्दी खोल रहा था—कोई हिचकिचाहट नहीं।

सैंडी ने हल्के से सिर हिलाया—जैसे कह रही हो "धीरे से"।

शायद वो कह रही थी—"अगर पूरी टॉपलेस हो गई तो कवर करना मुश्किल हो जाएगा।"

लेकिन डेविड रुका नहीं।

बटन खुलते गए—एक के बाद एक।

शर्ट अब पूरी तरह खुल चुकी थी—बस कंधों पर लटकी हुई।

सैंडी की पीठ सड़क की तरफ थी—रेलिंग से सटी हुई।

जो कोई भी सड़क से देखता... वो सिर्फ़ उसकी पीठ देखता।

कोई नहीं समझ पाता कि सामने क्या हो रहा है।

सैंडी के दोनों हाथ अब काम कर रहे थे।

एक हाथ डेविड के अं लुंड पर

उसकी उँगलियाँ कपड़े के ऊपर से लुंड को पकड़े हुए—सख्त, मोटा, फड़कता हुआ।

डेविड की साँसें भारी हो गईं—उसका पेट ऊपर-नीचे होने लगा।

दूसरा हाथ... विशाल की तरफ।

विशाल का तौलिया अब फर्श पर गिर चुका था—उसका लुंड बाहर, हार्ड, सैंडी की उँगलियों में।

वो भी रगड़ रही थी—एक ही रिदम में, दोनों हाथ एक साथ।

दोनों पुराने, बदसूरत, मोटे आदमी—एक तरफ डेविड, दूसरी तरफ विशाल।

सैंडी बीच में—युवा, हॉट, परफेक्ट बॉडी वाली।

उसकी शर्ट अब पूरी खुल चुकी थी—स्तन खुले, हवा में हिल रहे, निप्पल्स सख्त।

डेविड के हाथ अब उसके स्तनों पर थे—नरम, धीमे मसल रहा था।

उँगलियाँ निप्पल्स पर घुमाता हुआ

नेहा की साँसें अभी भी तेज़ थीं।

उसकी आँखें बालकनी की तरफ टिकी हुई थीं—सैंडी के खुले स्तनों पर, डेविड के हाथों पर

वो सब देख रही थी—चुपचाप, लेकिन बहुत ध्यान से

तभी... नेहा ने खुद ही अपनी टी-शर्ट के किनारे पकड़े।

धीरे से, उसने टी-शर्ट को ऊपर सरकाया—पेट से, फिर कमर से, फिर छाती से।

उसके स्तन बाहर आ गए—छोटे, गोल, परफेक्ट शेप के।

वो पूरी तरह से सिर्फ़ पैंटी में थी—अब कमरे में।

नेहा ने मेरी तरफ देखा।

वो जानती थी कि सैंडी की तरह उसके भी स्तन हैं—शायद छोटे, लेकिन उतने ही हॉट, उतने ही परफेक्ट।

शायद बेहतर।

सैंडी दोनों हाथ रिदम में चल रहे थे—एक डेविड पर, एक विशाल पर।

तभी विशाल का एक हाथ पीछे गया।

सैंडी की गांड पर।

उसने धीरे से मसलना शुरू किया—गोल-गोल, फर्म दबाव के साथ।

सैंडी ने डेविड की तरफ देखा।

फिर मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती मुस्कान।

उसने अपना एक हाथ डेविड के अंडरवियर के किनारे पर ले जाकर अंदर डाला।

एक उँगली—धीरे से

सैंडी ने फिर आँख मारी—विंक।

फिर धीरे से अंडरवियर को नीचे सरकाया।

डेविड का लुंड बाहर आया—मोटा, लंबा, पर्पल हेड, फड़कता हुआ।

डेविड ने मुस्कुराया।

क्यों रोकता?

वो तो चाह रहा था।

नेहा जैसे कोई कॉम्पिटिशन में नेहा जैसे कोई कॉम्पिटिशन में अपना हाथ पीछे ले गई। . मेरे लंड पर

मेरी पैंट का बटन पहले ही खुला था—लुंड बाहर निकल चुका था, हार्ड, फड़कता हुआ।

वो उसे पकड़ लिया

नेहा अभी भी खिड़की से सैंडी को देख रही थी।

उसकी आँखें सैंडी के हाथ पर टिकी हुई थीं—वो हाथ जो डेविड के लुंड को पकड़े हुए था।

धीमे-धीमे ऊपर-नीचे कर रही थी।

उँगलियाँ लुंड की लंबाई पर सरक रही थीं

सैंडी का ग्रिप फर्म था—पाम पूरी तरह लपेटे हुए

वो धीरे-धीरे शेक कर रही थी

वो सब कॉपी कर रही थी

वो सैंडी की तरह ग्रिप बनाने की कोशिश कर रही थी।

पाम पूरी तरह लपेटने की कोशिश।

लेकिन... मेरे लुंड की मोटाई कम थी।

उसकी हथेली पूरी तरह नहीं लपेट पा रही थी।

ग्रिप ढीली पड़ रही थी—सैंडी की तरह टाइट नहीं बन पा रही थी।


डेविड का लुंड... बड़ा, मजबूत, भारी।

पर्पल हेड—चमकता हुआ, बिना फोरस्किन के, साफ़, गोल, मशरूम जैसा।

नेहा की उँगलियाँ मेरे लुंड पर थीं।

वो कोशिश कर रही थी—सैंडी की तरह।

पाम लपेटने की कोशिश।

धीमे-धीमे शेक करने की कोशिश।

वो महसूस कर रही थी—फर्क।

लेकिन... उसने एक पल के लिए भी मुझे इन्फीरियर महसूस नहीं होने दिया।

वो कोशिश कर रही थी।

बार-बार।

सैंडी की तरह।

नेहा भी मेरे लुंड को दोनों हाथों से पकड़ने की कोशिश कर रही थी।

एक हाथ से ऊपर-नीचे, दूसरे से बॉल्स को हल्का सा दबाते हुए।

मुझे लग रहा था—वो सोच रही है।

कैसे होगा... इतने मोटे लुंड को पकड़ना।

कैसे होगा... इतने भारी बॉल्स को हाथ में लेना।

कैसे होगा... वो पर्पल हेड को जीभ से छूना।

कैसे होगा... वो मोटाई को अंदर लेना।

उसकी आँखें सैंडी के हाथ पर थीं—कैसे वो सफेद उँगलियाँ काले लुंड पर इतनी खूबसूरत लग रही थीं।

कंट्रास्ट।

ब्लैक एंड व्हाइट।

परफेक्ट।

डेविड के हाथ अब सैंडी के स्तनों पर पूरी तरह कब्ज़ा कर चुके थे।

वो दोनों स्तनों को मसल रहा था—नरम लेकिन फर्म दबाव के साथ।

उँगलियाँ निप्पल्स पर गईं—पहले हल्के से घुमाईं, फिर धीरे-धीरे पिंच किया।

सैंडी की आह निकली—"आआह्ह..."

एक छोटी, गहरी, लेकिन मज़े वाली आह।

निप्पल्स पिंच होते ही उसकी आँखें बंद हो गईं—लेकिन मुस्कान नहीं गई।

जब उसने मुँह खोला—"आह्ह..."—विशाल ने तुरंत मौका देखा।

उसने अपना दो उँगलियाँ सैंडी के मुँह में डाल दीं।

वो उँगलियाँ... गंदी, रफ़, मज़दूर वाली।

बड़े-बड़े, मोटे, नाखून थोड़े बढ़े हुए, स्किन पर मेहनत की काली लकीरें।

सैंडी ने एक पल भी हिचकिचाई नहीं।

उसने दोनों उँगलियाँ मुँह में ले लीं—गहरे तक।

जीभ से चाटा, होंठों से चूसा।

फिर सिर आगे-पीछे करने लगी—जैसे वो कोई लुंड हो।

उसकी आँखें विशाल की आँखों में टिकी हुईं।

विंक किया।

मुस्कुराई—बिना किसी हिचकिचाहट के।

उसने उँगलियाँ और अंदर धकेलीं—सैंडी ने गले तक ले लिया।

फिर बाहर निकालीं—धीरे से, जीभ से चाटते हुए।

मैंने देखा—ये लोग थक नहीं रहे।

कल रात सैंडी को रूम में चोदा।

आज सुबह बालकनी में खेल रहे हैं।

शायद शाम को लिफ्ट में।

शायद रात को पूल साइड।

शायद हर कोने में।

शायद हर जगह।

क्योंकि ये लोग—डेविड और विशाल—नए "माल" के आदी हैं।

अलोक की कृपा से हर बार नया माल मिलता है।

इतने कुतिए चोद चुके हैं कि अब एक ही औरत को एक ही जगह पर चोदने में मज़ा नहीं आता।

अब वो नया थ्रिल चाहते हैं।

नई जगह।

नया कोना।

नया रिस्क।

नया एंगल।

नया खेल।

सैंडी उनके लिए परफेक्ट "माल" है।

जो "नो" नहीं कहती।

जो ऑर्डर पर सब करती है।

जो हँसती है।

जो खेलती है।

जो हर कोने में, हर जगह, हर तरीके से तैयार रहती है।

नेहा अभी भी खिड़की से पूरी तरह टिकी हुई थी—उसकी आँखें पलक झपकाए बिना बालकनी पर।

उसका हाथ मेरे लुंड पर था—धीमे, लगातार ऊपर-नीचे

मेरा एक हाथ उसके स्तनों को मसल रहा था, निप्पल्स को अंगूठे से हल्के से खींच रहा था।

दूसरा हाथ उसकी पैंटी के नीचे—उसकी चूत पर उँगलियाँ गोल-गोल

विशाल अब

गीली उँगलियाँ—सैंडी के मुँह से निकाली हुईं, उसकी थूक से चमकती हुईं—धीरे से सैंडी के चेहरे पर सरकाईं।

गाल पर, होंठों पर, ठोड़ी पर।

सैंडी का चेहरा अब चमक रहा था—उसकी अपनी थूक से।

मैंने धीरे से अपनी उँगलियाँ उसकी पैंटी से बाहर निकालीं।

दो उँगलियाँ—पूरी तरह गीली, चमकती हुईं।

उसकी चूत का रस उन पर चिपका हुआ था—साफ़, गाढ़ा, गर्म।

मैंने उँगलियाँ उसके सामने लाईं—बिल्कुल वैसी ही तरह जैसे विशाल ने सैंडी के मुँह से उँगलियाँ निकालकर उसके चेहरे पर लगाई थीं।

मैंने कुछ नहीं कहा।

बस उँगलियाँ उसके होंठों के पास ले गया—धीरे से, बिना दबाव डाले।

उसकी साँसें मेरी उँगलियों पर लगीं—गर्म, तेज़।

नेहा समझ गई।

वो जानती थी कि मैं क्या चाहता हूँ।

वो जानती थी कि मैं उसे टेस्ट कर रहा हूँ—उसी तरह जैसे सैंडी ने किया।

एक पल की साइलेंस।

फिर... नेहा ने होंठ खोले।

उसने मेरी उँगलियाँ मुँह में ले लीं—धीरे से, लेकिन पूरी तरह।

उसकी जीभ मेरी उँगलियों पर सरकी—अपना ही रस चाट रही थी।

ये पहली बार था—हमारी छह महीने की शादी में।

उसने अपना रस पहले भी चखा होगा—मेरे लुंड से, जब वो मुझे मुँह देती थी, पोज़िशन बदलते-बदलते, बीच में चूसते हुए।

लेकिन उँगली से... कभी नहीं।

आज... आज उसने किया।

बिना पूछे।

बिना हिचकिचाहट के।

बस... हीट ऑफ द मोमेंट में।

सब कुछ चल रहा था, लेकिन नेहा का ध्यान एक सेकंड के लिए भी नहीं हटा।

वो बालकनी की हर छोटी हरकत को देख रही थी—जैसे कोई लाइव शो हो

डेविड का लुंड अब पूरी तरह बाहर था

सैंडी के हाथ में था—धीमे-धीमे शेक कर रही थी।

क्योंकि दोनों इतने करीब थे—डेविड का पेट सैंडी के पेट से दबा हुआ—उसका लुंड का सिर बार-बार सैंडी की जांघों से छू जा रहा था।

हर बार छूने पर एक छोटी सी चमकदार लाइन—प्रीकम का।

सैंडी की परफेक्ट, गोरी, चिकनी जांघों पर वो चमक फैल रही थी।

हर बार जब लुंड का सिर थोड़ा दूर होता, एक पतली, चिपचिपी धागा जैसी लाइन दिखती—प्रीकम की।

सैंडी की जांघें अब गीली चमक रही थीं

विशाल ने अपना हाथ नीचे ले जाकर सैंडी की पैंटी पर रख दिया।

उसकी उँगलियाँ पैंटी के ऊपर से चूत पर रगड़ने लगीं

नेहा की वो पहली आवाज़—लंबे समय के बाद—कमरे में गूंजी।

"हम्म्म... 4 हैंड्स..."

वो बस इतना बोली।

फिर चुप।

वो कुछ कहना चाह रही थी।

मैं जानता था।

उसकी साँसें रुक-रुक कर चल रही थीं।

उसकी चूत मेरी उँगलियों पर और गीली हो रही थी।

उसकी जांघें हल्की-हल्की काँप रही थीं।

वो सोच रही थी—4 हाथ।

एक साथ।

दो स्तनों पर—मसलते हुए, निप्पल्स पिंच करते हुए।

दो नीचे—गांड मसलते हुए, चूत रगड़ते हुए।

और दो लुंड—उसके हाथों में।

वो कभी दो हाथों से आगे नहीं गई थी।

मेरे।

मेरे दो हाथ—उसके स्तनों पर, उसकी चूत पर।

लेकिन 4... एक साथ...

वो कल्पना कर रही थी।

कैसे लगेगा... इतने हाथ।

इतना स्पर्श।

इतना दबाव।

इतना मज़ा।

और मैं... मैं भी सोच रहा था।

कल रात सैंडी ने 10 हाथ महसूस किए थे।

मेरे भी।

अलोक के, विशाल के, डेविड के, वेटर के।

10 हाथ—उसके बदन पर, उसके स्तनों पर, उसकी चूत पर, उसकी गांड पर, उसके मुँह में।

वो सब कुछ सह रही थी—और मज़े ले रही थी।

विशाल ने अब सैंडी की पैंटी के किनारे पर उँगलियाँ डाल दीं।

धीरे से, लेकिन बिना हिचकिचाहट के।

उसकी मोटी, रफ़ उँगलियाँ पैंटी के नीचे सरक गईं—सैंडी की चूत पर।

वो अंदर काम कर रहा था—धीमे गोल-गोल, क्लिट पर दबाव, फिर नीचे की तरफ।

हल्की सी आह।

फिर उसने खुद को एडजस्ट किया—जांघें थोड़ी और चौड़ी कर लीं।

पैंटी अब और तन गई—कपड़ा इतना खिंचा कि लग रहा था फट जाएगा।

विशाल की उँगली अब और गहराई से अंदर जा रही थी—छेद की तरफ।

पैंटी का इलास्टिक खिंचकर चीख रहा था

लेकिन सैंडी ने खुद को और चौड़ा किया—उसकी जांघें अब पूरी फैली हुईं।

विशाल ने उसके कान में कुछ फुसफुसाया—बहुत करीब, होंठ उसके कान से छूते हुए।

"कितनी गीली हो गई है तू... रंडी..."

शायद यही कहा होगा।

सैंडी ने हल्के से सिर हिलाया—मुस्कुराई, आँखें बंद।

विशाल की उँगलियाँ अब पूरी तरह सैंडी की पैंटी के नीचे थीं—अंदर काम कर रही थीं।

वो जोर-जोर से कोशिश कर रहा था—उँगलियाँ छेद की तरफ धकेल रहा था

डेविड ने अब अपना लुंड का सिर पकड़ा।

उसकी उँगलियाँ प्रीकम से भरी हुईं—सैंडी की जांघों पर फैला हुआ प्रीकम इकट्ठा कर रहा था।

दो उँगलियाँ—चमकती हुईं, चिपचिपी, गाढ़ी।

वो दोनों ने अपनी उँगलियाँ सैंडी के चेहरे के सामने लाईं।

विशाल की उँगलियाँ—सैंडी की चूत के रस से भरी हुईं, गीली, चमकती हुईं।

डेविड की उँगलियाँ—उसके प्रीकम से भरी हुईं, गाढ़ी, सफेद।

दोनों ने सैंडी की तरफ देखा।

फिर एक-दूसरे की तरफ।

फिर सैंडी की तरफ।

"कौन पहले?" डेविड ने हँसते हुए कहा—आवाज़ में मज़ाक और गंदगी।

"भेनचोद... तू पहले अपनी गंदी उँगलियाँ चटवा ले।" विशाल ने जवाब दिया—दोस्ताना गाली

"अरे रंडी... तू तो पहले से ही गीली हो रही है... मेरी उँगलियाँ चाट... या पहले डेविड की?"

सैंडी मुस्कुरा रही थी—उसकी आँखें दोनों की तरफ।

वो दोनों के लुंड अभी भी उसके हाथों में थे—दोनों सख्त, फड़कते हुए।

सैंडी ने अचानक दोनों लुंड छोड़ दिए।


उसके दोनों हाथ अब सामने थे—दोनों हाथों में दो-दो उँगलियाँ फैली हुईं।

विशाल की उँगलियाँ उसकी चूत के रस से चमक रही थीं—गीली, चिपचिपी।

डेविड की उँगलियाँ उसके प्रीकम से भरी हुईं—गाढ़ी, सफेद, चमकदार।

वो मुस्कुराई—एक मुस्कान।

उसने दोनों हाथो को कलाई से पकड़ लिआ

फिर बारी-बारी से एक हाथ मुँह के पास लाई।

पहले विशाल की उँगलियाँ—अपनी ही चूत का स्वाद।

उसने मुँह खोला।

दो उँगलियाँ अंदर ले लीं—गहरे तक।

जीभ से चाटा, चूसा।

फिर बाहर निकालीं—साफ़, लेकिन अब उसके होंठों पर चमक।

फिर डेविड की उँगलियाँ—उसके प्रीकम का स्वाद।

उसने फिर मुँह खोला।

दो उँगलियाँ अंदर ले लीं—चाटी, चूसी।

फिर बाहर निकालीं—अब दोनों हाथ साफ़।

वो फिर पहले वाली तरफ लौटी—विशाल की उँगलियाँ।

फिर डेविड की।

बारी-बारी।

हर बार थोड़ा और गहरा।

हर बार थोड़ा और चूसते हुए।

उसकी आँखें दोनों की आँखों में टिकी हुईं—बारी-बारी।

वो मुस्कुरा रही थी।

हल्के-हल्के गुदगुदी वाली हँसी निकाल रही थी।

डेविड ऑफ़ विशाल ने अपना दूसरा हाथ सैंडी के कंधे पर रखा

हल्का सा दवाब

फिर... वो धीरे से नीचे झुकी।

शरीर को थोड़ा और नीचे किया।

घुटनों पर बैठ गई—बालकनी में, पूरी तरह खुली हवा में।

अब दोनों लुंड साफ़ दिख रहे थे—डेविड का मोटा, पर्पल हेड वाला, विशाल का भी सख्त, फड़कता हुआ।

सैंडी घुटनों पर थी—उसकी शर्ट कंधों पर लटकी हुई, स्तन खुले, निप्पल्स हवा से सख्त।

सैंडी अब दोनों की तरफ देख रही थी—उसकी आँखों में नकली शिकायत, होंठों पर मुस्कान।

"बहुत काम करवाते हो..."

वो फुसफुसाई—आवाज़ में शरारत, लेकिन इतनी प्यारी कि दोनों हँस पड़े।

डेविड और विशाल की हँसी भारी, गहरी—जैसे कोई पुराना जोक सुना हो।

फिर दोनों और करीब आए।

सैंडी का चेहरा अब ऊपर की तरफ—ठोड़ी उठी हुई, होंठ हल्के से खुले।

उसकी आँखें दोनों की आँखों में बारी-बारी टिकी हुईं—बिना डर, बिना शर्म, बस एक शांत, ग्रेसफुल मुस्कान।

डेविड ने अपना लुंड पहले उठाया।

मोटा, भारी, पर्पल हेड चमकता हुआ।

उसने हल्के से सैंडी के गाल पर टैप किया—एक छोटा, प्लेफुल थप्पड़।

फिर विशाल ने भी—उसका लुंड भी सख्त, फड़कता हुआ।

दोनों लुंड अब सैंडी के चेहरे पर एक साथ टैप कर रहे थे—एक गाल पर, दूसरा दूसरे गाल पर।

हल्के, लेकिन वजनदार।

हर टैप पर सैंडी की आँखें हल्के से बंद होतीं—फिर खुलतीं, मुस्कुरातीं।

वो सब कुछ ग्रेस से ले रही थी—जैसे ये कोई खेल हो, कोई प्यार भरा रिवाज़।

उसकी साँसें तेज़ थीं, लेकिन चेहरा शांत, होंठों पर वही मुस्कान।

नेहा की साँसें अब रुक-रुक कर चल रही थीं।

उसकी जांघें काँप रही थीं—एक हल्का सा, लेकिन साफ़ झटका।

उसकी टाँगें कमज़ोर पड़ रही थीं—जैसे वो किसी भी पल गिर सकती हो।

उसकी चूत मेरी उँगलियों पर पूरी तरह भिगो चुकी थी—एक गर्म लहर।

सैंडी अब हँस रही थी—एक हल्की, गुदगुदी वाली हँसी, जैसे कोई उसे गुदगुदी कर रहा हो।

डेविड और विशाल दोनों उसके चेहरे के बहुत करीब थे।

डेविड का लुंड अब सैंडी के गाल से छू रहा था—हर टैप के साथ एक छोटी सी बूँद प्रीकम निकल रही थी।

वो बूँदें उसके गाल पर गिर रही थीं—छोटी-छोटी, चमकदार, गाढ़ी।

एक बूँद उसके होंठ के कोने पर लगी।

दूसरी उसकी ठोड़ी पर।

तीसरी उसकी नाक के पास।

डेविड हर टैप के साथ थोड़ा और प्रीकम फैला रहा था—जैसे वो उसके चेहरे पर छोटे-छोटे ड्रॉप्स से पेंटिंग कर रहा हो।

विशाल भी पीछे से हँस रहा था।

डेविड अब और प्लेफुल हो गया था।

वो अपना लुंड सैंडी के नाक पर रगड़ रहा था

ठंडी हवा में उसकी नाक पहले से ही लाल हो चुकी थी, अब और लाल हो गई।

फिर डेविड ने लुंड को उसके कान की तरफ ले जाया।

कान के किनारे पर हल्के से टच किया—जैसे गुदगुदी कर रहा हो।

सैंडी ने हँसी—एक छोटी, काँपती हुई हँसी।

उसने सिर हिलाया—"स्टॉप... गुदगुदी हो रही है..."


सैंडी की हँसी अभी भी हवा में गूंज रही थी—हल्की, गुदगुदी वाली, जैसे कोई उसे छूकर छेड़ रहा हो।

"भेनचोद... तुम लोग यहाँ हो... मैं दो बार रूम चेक करके वापस चला गया..."

आवाज़ भारी थी, गुस्से से भरी

अलोक।

डेविड और विशाल एकदम अलग हो गए।

"मादरचोद... तुमको तैयार करने के लिए बोला था... और तुम... यहाँ... बालकनी में... ओपन में... चूतियों, कोई वीडियो बना लेगा तो लोडे लग जाएँगे।"

अलोक का गुस्सा अब सैंडी पर उतरा।

वो सैंडी की तरफ मुड़ा—आँखें सिकुड़ी हुईं, आवाज़ में वो ही कड़वाहट।

"ये दोनों को तो कौन जानता है... तुझे नहीं कोई टेंशन?"

"अरे... बस... मज़ाक कर रहे थे...और .... आपने ' ना ' कहने से मन किआ था "

अलोक ने उसे घूरा।

"मज़ाक?

यहाँ ओपन में?

किसी ने देख लिया तो?

डेविड ने कंधे उचकाए—।

"अरे... कोई नहीं देख रहा... हमने चेक किया था..."

अलोक का गुस्सा अब सैंडी पर उतरा।

वो सैंडी की तरफ मुड़ा—आँखें सिकुड़ी हुईं, आवाज़ में वो ही कड़वाहट।

"ये दोनों को तो कौन जानता है... तुझे नहीं कोई टेंशन?"

सैंडी अभी भी घुटनों पर थी—उसकी शर्ट कंधों पर लटकी हुई

विशाल ने उसके ऊपरी हाथ पकड़े—मोटे, भारी हाथ।

उसने धीरे से खींचा—सैंडी को उठाने में मदद की।

सैंडी उठी—धीमे,

उसकी जांघें अभी भी हल्की सी काँप रही थीं—शायद ठंड से, शायद मज़े से।

उसने शर्ट को ठीक किया—बटन लगाए, लेकिन पूरी तरह नहीं।

वो आगे बढ़ा—उसने सैंडी की कलाई पकड़ी।

फर्म, लेकिन जल्दबाज़ी में।

"चल... अंदर।

उसकी आवाज़ में अभी भी गुस्सा था

सैंडी ने हल्के से हँसी—एक छोटी, लहराती हँसी।

वो अलोक के साथ चली—जैसे कोई फूल हवा में लहरा रहा हो।

हम दोनों खड़े थे—जैसे मूर्ति।

नेहा की साँसें धीमी हो चुकी थीं।

उसकी जांघें अब स्थिर थीं—लेकिन अभी भी हल्की सी काँप रही थीं।

कमरे में सन्नाटा।

फिर... नेहा के मुँह से सिर्फ़ एक शब्द निकला।

"ये... अलोक जी हैं..."
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