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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#73
अब आगे….
दो दिन बाद सरिता सुबह ही लाला जी के साथ गाड़ी में अपने मायके के लिए निकल गई। जाने से पहले वो राजू को बोल दी'' अरे राजू अपनी भाभी का ख्याल रखना ..जो मांगे दे देना और ज्यादा तंग नहीं करना। फिर मेरी तरफ मुंह करके मुझे भी बोल दी..बहू..दो तीन दिन मैं आ जाऊंगा। राजू यहीं रहेगा तुम्हारे पास। बस तुम समय-समय पर देती रहना...


रिशा...क्या दीदी?

सरिता..अरे खाना पीना और क्या..इतना बोल अपनी आंख दबा दी।

रिशा भी मुंह नीचे कर शरमाने लगी

सरिता के जाने के बाद रिशा ने नहाया और जानबूझकर अंदर कुछ नहीं पहना। उसने सिर्फ एक पतली, पारदर्शी नाइटी पहनी, जो बदन के उतार चढाव को और दिखाये और उभारे। उसकी चूचियाँ नाइटी में साफ दिख रही थीं, और निप्पल्स उभरे हुए थे। उसने ऊँची हील की चप्पलें पहनीं और राजू के कमरे में चली गई। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और वो बार-बार उसके लंड के बारे में सोच रही थी।


रिशा जब कमरे में पहुँची तो राजू गहरी नींद में था। उसकी लुंगी आज बेड के नीचे फर्श पर पड़ी थी, और उसका 8 इंच का लंड खड़ा था। रिशा ने उसकी लुंगी उठाकर ड्रेसिंग टेबल पर रख दी। फिर वो बेड पर उसके बगल में बैठ गई और उसके लंड को देखने लगी। उसका लंड इतना मोटा और सख्त था कि रिशा कि चूत में गुदगुदी होने लगी। उसकी साँसें तेज हो गईं, और चूत गीली होने लगी। उसने खुद को रोका, लेकिन उस से रहा नहीं गया। रिशा ने धीरे से उसका लंड पकड़ लिया। “आह…” रिशा के मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली। राजू का लंड गर्म और सख्त था, जैसे कोई लोहे की रॉड। रिशा ने उसे धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया।


अपने लंड पर मेरे हाथ का एहसास होता ही राजू हड्बड़ा के उठ गया। मुझे अपने पास यूं बैठ देख और उसके लंड को सहलाते देख राजू ने झट से पास पड़ा तकिया अपने लंड के ऊपर रख लिया और बोला.."आप ये क्या कर रही हैं भाभी। किसी ने देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी"।

रिशा.."अभी कोई नहीं है यहाँ। हम दोनों अकेले ही हैं . तेरे और मेरे सिवा कौन है जो हमको देख सके. और वैसे भी मैं तो सिर्फ तुझसे ये पूछने आयी थी कि नाश्ते में क्या खायेगा। देखा तो तू तो सोया था पर तेरा लंड जगा हुआ था..खुद को इसको पकड़ के देखने से रोक नहीं पाई। वैसे भी तेरे पास तो मेरे लिए वक्त नहीं है..घूसा रहता है अपनी बड़ी मालिकिन की चूत में। एक ताना सा मरते हुए रिशा बोली”

राजू.." नहीं ऐसी कोई बात नहीं है भाभी। वो तो मालिकिन ने सिक्युरिटी को बताने की धमकी दी थी तो मैं डर गया था। वरना जो बात आप में है वो बड़ी मालिकिन में कहां..ऐसा बोल राजू ने रिशा को अपने पास खींचकर अपनी बाहों में भर लिया”

रिशा..."बस रहने दे ज्यादा मक्खन लगाने की जरूरत नहीं है..मैं सिर्फ जगाने और नाश्ते का पूछने आई थी"

राजू...”झूठ मत बोलो भाभी. एक पतली से नाइटी में और नीचे पूरी नंगी..सच बोलो जगाने आई थी या मरवाने आई थी'' बड़ी बेबकी से ऐसा बोल राजू ने नाइटी के ऊपर से ही रिशा की चूची दबा ली और रिशा के होठों पर रख उन्हें चुसने लगा!



रिशा..."हाय कितना बेशरम है तू राजू ..अपनी बड़ी भाभी से कोई ऐसी बात करता है क्या?

राजू...”सच कहूँ भाभी...आप को देख ना जाने मुझे क्या हो जाता है। दिल के अरमान जगने लगते हैं”.

रिशा..”अरमान के साथ-साथ तेरा सामान भी जगा हुआ है..राजू के लंड की तरफ इशारा कर के रिशा बोली”

राजू..”वो भाभी जवान मर्द का औज़ार तो सुबह सुबह खड़ा ही होता है”

रिशा..”हाय कुर्बान जाउ तेरी जवानी और तेरे औज़ार पे। कब करवाएगा अपनी औज़ार से जन्नत की सैर”

राजू...”ये तो तैयार है भाभी..आओ जाओ और बैठ जाओ इस पर...अपने लंड को मसलता हुआ” राजू बोला

रिशा..”ये सच है राजू कि मैं तुझसे चुदना चाहती हूँ पर ऐसे जल्दी मैं नहीं..मैं इत्मिनान से तेरे से चुदवाना चाहती हूँ”राजू के लंड को मुट्ठी में दबा रिशा बोली



राजू..”अब जो इसको खड़ा किया है..इसका क्या करू। ये पानी फेंके बिना अब ठंडा नहीं होगा"

रिशा..”अगर तू कहे तो मैं हाथ से हिला कर ठंडा कर देती हूं"

राजू...मैं तो कहता हूं भाभी चुदवा लो...आपकी चूत भी सुलग रही है और मेरा लंड भी तड़प रहा है..दोनो का मिलन करवा दो”

रिशा..मेरी मजबूरी को समझ राजू। कामवाली बाई कभी भी आती होगी. मैं नहीं चाहती कि हमारे प्रेम मिलन में कोई बाधा आए... इसिलिये रात को इत्मिनान से चुदाई करना मेरे कमरे में आकर…इतना बोल रिशा राजू का लंड पकड़ मुठियाने लगी।



रिशा ने उसके लंड को तेजी से सहलाना शुरू किया। उसका सुपाड़ा गुलाबी और चमकदार था। रिशा ने अपनी उंगली उसके सुपाड़े पर फिराई, तो राजू सिसकार उठा, “उह… भाभी, क्या मज़ा दे रही हो ..और तेज सहलाओ, भाभी,” !”

राजू ने रिशा की नाइटी खींचकर उतार दी। रिशा अब पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूचियाँ हल्के से हिल रही थीं, और निप्पल्स सख्त हो चुके थे। रिशा ने शरम से आँखें बंद कर लीं। राजू निप्पल्स को अपनी उंगलियों से मसलना लगा। “आह… ओह…” रिशा जोश में सिसकार रही थी। उसकी चूत अब पूरी तरह गीली थी। राजू ने रिशा का चेहरा अपने लंड की ओर किया और बोला, “देखो, भाभी, ये तुम्हारे लिए तैयार है।”

रिशा ने आँखें खोलीं। राजू का लंड अब और बड़ा और सख्त लग रहा था। “इसे मुँह में लो,” राजू ने कहा और रिशा का सिर अपने लंड की ओर खींच लिया। उसका सुपाड़ा रिशा के होंठों से टकराया। “चूसो, भाभी,” उसने कहा। रिशा ने उसके सुपाड़े को अपने मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। “आह… भाभी… उह…” राजू सिसकार रहा था। रिशा उसका लंड गहराई तक चुस रही थी,
और उसकी जीभ उसके सुपाड़े पर गोल-गोल घूम रही थी। राजू ने एक हाथ से सिर को सहलाया और दूसरे से उसकी चूचियों को मसला। “आह राजू… …धीरे कर…” रिशा दर्द और जोश में बुदबुदाई।



राजू... मेरा बस होने वाला है भाभी.. रुकना मत भाभी...पूरा अंदर तक लेकर चूसो.

रिशा ने मुस्कुराकर राजू की तरफ देखा और फिर उसका लंड घप से मुँह में लेकर चूसने लगी।




रिशा भी अब पूरे लंड को मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह कभी चूस रही थी और कभी हाथ से हिला रही थी! बीच बीच में वो राजू के टट्टे भी दबा देती तो राजू दर्द के मारे कराह उठता.

राजू..आह भाभी क्या लंड चूसती हो। बस ऐसे ही चुस्ती रहो और कुछ देर”.

रिशा के मुँह की गरमी राजू सह नहीं पाया और अगले 5 मिनट में ही राजू के लंड ने वीर्य की बौछार कर दी.कुछ वीर्य तो रिशा के गले के नीचे उतर गया और कुछ चेहरे पे गिर गया




पने चेहरे पर गिरा वीर्य रिशा ने उंगलियों से साफ किया और फ़िर अपनी उंगलियों पर लगा राजू का गाड़ा वीर्य रिशा राजू की आंखों में देखती हुई चाटने लगी।



रिशा....हे भगवान...कितना वीर्य भरा है तेरे टट्टो में. तेरे भैया का तो इसका एक चौथाई भी नहीं बनता और वो भी पतला पानी जैसा.. तेरा तो इतना ज्यादा और गाढ़ा माल है. रात में आते हुए मेडिकल शॉप से कंडोम का पैकेट लेते आना...कहीं बच्चा ही ना ठहर जाये तुझसे चुदवा के….चल राजू तू अब दुकान पे जा और मैं भी घर का सारा काम निपट लूं. कामवाली भाई भी आती होगी.

राजू..भाभी आज कामवाली की छुट्टी कर दो ना। मेरा मन नहीं भरा अभी.

रिशा..मन तो मेरा भी नहीं भरा राजू पर किसी को शक नहीं होना चाहिए। रात को जितना चाहे चोद लेना..कुछ नहीं कहूंगी इतना बोल रिशा कमरे से बाहर निकल गई।

वो भी जानती थी कि अगर कुछ देर और रुकी तो वो भी खुद को काबू में नहीं रखेगी। कमरे में पहुंच उसने अपनी नाइटी निकाल फेंकी। चुत बुरी तरह से गीली थी.



रिशा वहीं फ़र्श पे नंगी बैठ चुत में उंगली करने लगी. दस मिनट तक राजू के लंड में बारे में सोचती हुई रिशा चूत में उंगली करती रही।



चूत का पानी निकल जाने पर रिशा कुछ ठंडी हुई.. इतने में जब कामवाली की आवाज़ आई तो रिशा को होश आया। उसने जल्दी से साड़ी पहन ली और किचन में पहुंच गई।
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 27-02-2026, 12:12 PM



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