25-02-2026, 01:03 PM
हम ब्रेकफास्ट हॉल से निकले।
नेहा मेरे साथ चल रही थी—उसका हाथ मेरे हाथ में
वो बात कर रही थी—जैसे हमेशा करती है।
"सैम... कॉफी कैसी थी?
"और दोसा?
वो वाला मसालेदार वाला... बहुत अच्छा था ना?
मैंने हल्के से "हम्म..." कहा।
मुझे तो चटनी सबसे अच्छी लगी।"
मैंने फिर "हाँ..." कहा।
मेरा दिमाग कहीं और था।
मैं उसके साथ था... लेकिन नहीं था।
वो मेरे साथ चल रही थी.... लेकिन मैं... मैं अभी भी कल रात के कमरे में था।
सैंडी की आहें... अलोक... वेटर ... और वो "सूट नंबर 502"।
हम कमरे में पहुँचे।
मैंने दरवाज़ा खोला।
वो मेरी तरफ मुड़ी, मुस्कुराई।
"सैम... आप आज बहुत चुप हैं।
कुछ हुआ है क्या?"
मैंने कहा,
"नहीं... बस... थकान है।
मैं वॉशरूम जा रहा हूँ... फ्रेश होकर आता हूँ।"
मैंने वॉशरूम में 10-15 मिनट लगा दिए।
ठंडा पानी मुंह पर मारा, चेहरा पोंछा, बालों को सुलझाया
दरवाज़ा खुलते ही नेहा बालकनी के दरवाज़े पर खड़ी दिखी।
वो अंदर आ रही थी—हाथ से इशारा कर रही थी—उँगली होंठों पर, बार-बार "श्श्श..." का जेस्चर।
उसकी आँखें चमक रही थीं—एक्साइटमेंट से।
वो छोटे-छोटे स्टेप्स ले रही थी, हाथ हवा में नाचते हुए, जैसे कोई बच्ची कोई राज़ छुपा रही हो।
उसकी टी-शर्ट अभी भी वैसी ही थी—थोड़ी तनी हुई, बाल आगे लटके हुए।
वो मेरे पास आई।
फिर से उँगली होंठों पर।
"श्श्श..."
फिर हाथ से इशारा—बालकनी की तरफ।
फुसफुसाई—बहुत धीरे, लेकिन एक्साइटमेंट से भरी।
"सैम... पास वाले बालकनी में... एक सेलिब्रिटी है।"
मैंने भौंहें उठाईं।
"कौन?"
वो फिर से उँगली होंठों पर।
फिर पर्दा थोड़ा सा सरकाया—बस इतना कि हम दोनों देख सकें।
बालकनी माउंटेन फेसिंग थी—सामने पहाड़, दूर एक सड़क, और बीच में हवा।
दूसरी बालकनी थोड़ी दूर थी—लेकिन खिड़की से साफ़ दिख रही थी।
वो फुसफुसाई,
"देखिए... वो... वो लड़की... वो मॉडल
मैंने देखा।
सैंडी बालकनी में खड़ी थी।
उसने सिर्फ़ एक पुरुष वाली शर्ट पहनी हुई थी—बड़ी, ढीली, शायद अलोक की या डेविड की।
बटन सिर्फ़ 3-4 लगे थे—ऊपर से खुली हुई, नीचे से भी हवा में लहरा रही थी।
उसके बाल हवा में उड़ रहे थे—कुछ चेहरे पर चिपक रहे थे, कुछ हवा में नाच रहे थे।
वो फ्रेश लग रही थी—जैसे अभी नहाकर निकली हो।
सिगरेट होंठों पर थी—धीरे-धीरे कश ले रही थी, धुआँ हवा में उड़ता हुआ।
हवा का एक झोंका आया।
शर्ट पीछे उड़ गई।
उसके स्तन आधे दिख गए—गोल, भारी
उसकी गुलाबी पैंटी साफ़ दिख गई—टाइट, पतली, जांघों के बीच में चिपकी हुई।
उसकी जांघें—लंबी, चिकनी, अभी भी थोड़ी लाल, शायद कल रात के थप्पड़ों से।
वो कुछ भी नहीं लग रही थी जैसी मैंने कल रात देखी थी।
कल रात वो एक रंडी थी—कम से ढकी हुई, आहें भरती हुई, चारों तरफ से भरी हुई।
आज... वो एक डिसइरेबल औरत थी।
एक ऐसी औरत जिसे कोई भी देखकर चाहे।
एक ऐसी औरत जिसे देखकर मन करता है कि वो मेरी हो।
मैं नेहा के ठीक पीछे खड़ा था।
मैंने धीरे से उसके कान में पूछा,
"तुम जानती हो उसे?
कौन है ये?
नेहा ने पीछे मुड़कर मुझे देखा—उसकी आँखें चमक रही थीं।
फुसफुसाई,
"अरे... वो फेमस है... नाम नहीं पता... लेकिन मेरे इंस्टा फीड पर बार-बार आती है।
कई बार स्क्रॉल करते हुए रुक जाती हूँ उसकी फोटोज़ पर।"
"रियली...?"
मैंने फिर सैंडी की तरफ देखा।
वो अब रेलिंग पर झुक रही थी—शर्ट पीछे उड़ गई, पैंटी पूरी दिख रही थी।
उसकी जांघें चमक रही थीं।
वो कुछ नहीं जानती थी कि हम उसे देख रहे हैं।
वो बस खुश थी।
नेहा ने पीछे मुड़कर मुझे देखा।
उसकी गांड पर मेरा हार्ड लुंड महसूस करके वो मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती मुस्कान।
हम दोनों की शादी को अभी छह महीने ही हुए थे।
और इन छह महीनों में एक बात कभी नहीं हुई—जलन।
न मैं कभी नेहा से जलता था, न वो मुझसे।
हम दोनों एक-दूसरे को पूरी आज़ादी देते थे।
मॉल में घूमते हुए अगर कोई लड़की अच्छी लगती, वो मुझे कोहनी मारकर फुसफुसाती,
"देखो ना... तुम्हारे दाएँ तरफ... वो रेड वाली... कितनी अच्छी लग रही है ना?"
वो मुस्कुराती, मेरे हाथ में हाथ डालती और हम आगे बढ़ जाते।
कभी कोई लड़ाई नहीं।
कभी कोई "तुम उसे क्यों देख रहे थे?" नहीं।
हम दोनों एक-दूसरे पर भरोसा करते थे—पूरा, बिना किसी शक के।
हम दोनों कभी भी फोन पर कुछ इरोटिक देखने से शर्माते नहीं थे।
शादी के छह महीने में ये हमारा छोटा-मोटा रूटीन बन चुका था—रात को लाइट्स ऑफ, बेड पर लेटे हुए, नेहा मेरे सीने से चिपकी हुई, फोन मेरे हाथ में।
कभी कोई वीडियो हम साथ देखते।
कभी-कभी हम हँसते भी थे।
"अरे ये क्या... वॉशिंग मशीन में इतनी देर तक ये कैसे अटकी रह सकती है, और इससे पता नहीं चला की इसका स्टेप सन इसकी पीछे से ले गया ! "
फिर वो धीरे से मेरी कमर पर हाथ रखती, और हम दोनों... बस... शुरू हो जाते।
पॉर्न सिर्फ़ बैकग्राउंड बन जाता—हमारा अपना मज़ा ज़्यादा हॉट होता।
तो जब सैंडी मेरे सामने इस तरह खड़ी थी—बालकनी में, लगा जैसे कोई सॉफ्ट पॉर्न चल रहा हो।
हम दोनों बालकनी की खिड़की से सैंडी को देखते रहे।
5 मिनट हो चुके थे।
नेहा मेरे ठीक पीछे खड़ी थी—उसका बदन मेरे बदन से सटा हुआ, उसकी साँसें मेरी गर्दन पर गर्म लग रही थीं।
वो बार-बार फुसफुसा रही थी—एक्साइटमेंट से भरी, लेकिन बहुत धीमी आवाज़ में।
"अरे... वो वाली टीवी कमर्शियल वाली... याद है ना?
'हमारा नया घर' वाला... सिंदूर लगाकर साड़ी में मुस्कुराती हुई।
और इंस्टा रील्स पर भी आती है... ट्रैवल वाली... बीच पर बिकिनी में..."
मैं सुन रहा था... लेकिन मेरा पूरा ध्यान सैंडी पर था।
मेरा लुंड... पहले से ही हार्ड था।
अब मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू की।
मेरा लुंड उसकी गांड पर रगड़ रहा था—धीमे, गहरे स्ट्रोक्स।
पैंट के ऊपर से... लेकिन दबाव बहुत था।
नेहा ने महसूस किया।
तभी सैंडी पलटी।
अब उसकी पीठ बालकनी की रेलिंग पर थी।
वो कोहनियों के बल झुकी हुई थी—शर्ट पीछे सरक गई, स्तन आधे से ज़्यादा खुले।
हवा का झोंका आया—शर्ट और ऊपर उड़ गई।
उसकी गुलाबी पैंटी अब पूरी दिख रही थी—टाइट, पतली, और... ट्रायंगल थोड़ा सूजा हुआ था।
क्लिट की हल्की सी उभार
उसकी जांघें फैली हुईं—चमकती हुई, थोड़ी लाल, शायद कल रात के निशान।
वो अब और परफेक्ट दिख रही थी
हम दोनों खिड़की से सैंडी को देखते रहे।
कोई शब्द नहीं।
बस साँसें—हमारी तेज़, गर्म।
मेरा कमर धीरे-धीरे हिल रहा था—मेरा लुंड उसकी गांड पर रगड़ रहा था, पैंट के ऊपर से, लेकिन गहराई से।
मेरी दाहिनी उँगलियाँ नेहा के शॉर्ट के बटन पर गईं।
एक हल्का सा क्लिक।
बटन खुल गया।
मैंने धीरे से शॉर्ट को नीचे सरकाया—उसकी जांघों से, घुटनों तक।
वो खुद थोड़ा सा ऊपर उठी—शॉर्ट नीचे सरक गया।
अब सिर्फ़ पैंटी।
उसकी पैंटी—सफेद, थोड़ी गीली।
मेरी उँगलियाँ सीधे उसकी क्रॉच पर गईं।
पैंटी के ऊपर से रगड़ना शुरू किया—धीमे, गोल-गोल।
उसकी क्लिट पर हल्का सा दबाव।
उसकी साँसें रुक गईं।
फिर तेज़ हो गईं।
मैंने नेहा की गर्दन पर होंठ रख दिए।
धीरे से किस करना शुरू किया
सब कुछ इतना इरोटिक था कि लग रहा था जैसे कोई सॉफ्ट पॉर्न चल रहा हो—सिर्फ़ हम दोनों के लिए।
बालकनी से सैंडी की वो लहराती शर्ट, उसकी गुलाबी पैंटी का झलकना, हवा में उसके बालों का नाचना... सब कुछ एक लाइव शो की तरह।
मैं अक्सर मजाक करता था—
"चलो कभी स्ट्रिप क्लब चलें... कंट्री लीगल वाले... देखेंगे असली मज़ा।"
नेहा हर बार हँसकर टाल देती।
"अरे... क्या मज़ा... सब तो टीवी और इंटरनेट पर देख सकते हैं।
क्या फर्क पड़ता है?"
मैं कहता—"रियल अलग होता है... वो थ्रिल... वो स्मेल... वो एनर्जी..."
वो हँसकर कहती—"नॉट इंटरेस्टेड।"
लेकिन आज... आज वो देख रही थी।
रियल।
लाइव।
वो महसूस कर रही थी कि रियल में कितना फर्क है।
उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
उसकी गांड मेरे लुंड पर और दब रही थी।
तभी... अचानक... सैंडी की हँसी की आवाज़ आई।
जोरदार।
हँसी नहीं... हँसी का धमाका।
वो हँस रही थी—जैसे कोई बहुत हास्यास्पद बात हुई हो।
उसकी हँसी इतनी तेज़ थी कि हम दोनों चौंक गए।
हमने देखा।
सैंडी अब रेलिंग पर पीठ टिकाए खड़ी थी।
जोर-जोर से, पेट पकड़कर।
फिर... एक पल में... हम समझ गए।
एक आदमी बालकनी में आया—छोटे से अंडरवियर में।
पेट बड़ा, बालों से भरा हुआ—जैसे कोई भालू।
उसने एक फैंसी गॉगल पहन रखा था—महिला वाला, शायद सैंडी का ही।
वो पोज़ बना रहा था—हाथ कमर पर, छाती फुलाकर, गॉगल पर हाथ फेरते हुए।
"कैसा लग रहा हूँ?" वाला जेस्चर।
सैंडी हँसते-हँसते झुक गई।
उसकी हँसी रुक नहीं रही थी।
मैंने तुरंत पहचान लिया।
डेविड।
वही डेविड—जो कल रात सैंडी को रफ तरीके से चोद रहा था।
वही डेविड—जो "भेनचोद" कहकर थप्पड़ मार रहा था।
वही डेविड—जो अब अंडरवियर में, भालू जैसा, महिला गॉगल पहनकर पोज़ बना रहा था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, कन्फ्यूज़।
फुसफुसाई,
"ये... ये कौन है?
क्या हो रहा है?"
उसकी आवाज़ में उत्सुकता थी ।
मैंने एक फेस बनाया—कंधे उचकाए, होंठों को थोड़ा सा सिकोड़ा, जैसे कह रहा हूँ "पता नहीं... देखते हैं क्या होता है"।
मैं खुद भी नहीं जानता था कि क्या जवाब दूँ।
क्या कहता—"वो डेविड है... कल रात वाला... जो सैंडी को रफ तरीके से चोद रहा था"?
तो मैंने बस "देखते हैं" वाला फेस बनाया।
हम दोनों फिर से खिड़की से झाँकने लगे—पर्दा थोड़ा सरका हुआ, बस इतना कि हम देख सकें, लेकिन कोई हमें न देख ले।
बालकनी का माहौल अब पूरी तरह प्लेफुल हो चुका था।
सैंडी अब रेलिंग पर पीठ टिकाए खड़ी थी
डेविड उसके सामने था
वो पोज़ बना रहा था—हाथ कमर पर, छाती फुलाकर, गॉगल पर हाथ फेरते हुए, जैसे कोई मॉडल हो।
सैंडी ने उसकी तरफ देखा।
उसने हाथ से एक सर्कल बनाया
फिर होंठों से बिना आवाज़ के बोला—बहुत साफ़, बहुत शरारती:
"वेरी हैंडसम।"
फिर वो फिर से हँस पड़ी—जोर-जोर से, पेट पकड़कर।
उसकी हँसी इतनी तेज़ थी कि बालकनी में गूंज गई।
उसकी शर्ट और ऊपर उड़ गई—स्तन आधे से ज़्यादा खुले।
वो हँसते-हँसते झुक गई—जैसे हँसी रुक नहीं रही हो।
तभी डेविड उसके बहुत करीब आ गया।
वो छोटे कद का था—मोटा पेट
सैंडी बालकनी की रेलिंग पर पीठ टिकाए झुकी हुई थी—इसलिए उसकी हाइट डेविड के पेट से मैच कर गई।
उसका पेट सैंडी के पेट से छू गया—हल्का सा, लेकिन साफ़।
डेविड ने फेक गुस्से से उसकी गाल पर थप्पड़ मारा—दो बार, हल्के से।
"नॉटी गर्ल... नॉटी गर्ल।"
अगर मैं ये सब किसी पब्लिक प्लेस में देखता—एक छोटे कद का, मोटा आदमी, अंडरवियर में, महिला गॉगल पहने
बहुत हँसता।
ये कॉमेडी थी। प्योर सिलीनेस।
लेकिन यहाँ... हमारी हँसी कहीं नहीं थी। मेरा चेहरा सख्त था।
नेहा का भी—उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, लेकिन मुस्कान गायब।
वो अब समझ रही थी—ये कोई नॉर्मल नहीं है।
ये कुछ स्पेशल है।
मैंने कुछ नहीं कहा।
मेरा लुंड... अब रगड़ना भूल गया था।
लेकिन मेरी उँगलियाँ अभी भी नेहा की पैंटी पर थीं—धीमे, गोल-गोल।
उसकी चूत गीली थी—पैंटी पर साफ़ महसूस हो रहा था।
तभी डेविड ने सैंडी पर और ज़ोर से दबाव डाला।
वो पहले से ही रेलिंग पर पीठ टिकाए झुकी हुई थी—कोई पीछे जाने की जगह नहीं।
डेविड का बड़ा, बालों से भरा पेट सैंडी के पेट से पूरी तरह दब गया।
उसकी नंगी जांघें सैंडी की नंगी जांघों से सटी हुईं ।
दोनों आमने-सामने थे, फेस टू फेस।
मगर पेट की वजह से क्रोच एरिया मिल नहीं आ रहे थे दोनों आमने-सामने थे, फेस टू फेस।
डेविड का लुंड (अभी भी अंडरवियर में) सैंडी की जांघों के बीच दब रहा था, लेकिन पूरी तरह नहीं।
वो बस दबाव डाल रहा था—जोर से, खेल-खेल में।
सैंडी की आह निकली—प्लेफुल, लेकिन थोड़ी सी सच्ची।
"आआई... मैं गिर जाऊँगी!"
डेविड ने सैंडी की जांघों के बीच दबाने की कोशिश की, लेकिन क्रॉच एरिया नहीं मिल रहा था।
दोनों के बीच सिर्फ़ कपड़े थे—उसका छोटा अंडरवियर और सैंडी की गुलाबी पैंटी।
सैंडी की पीठ रेलिंग से और दब गई—कोई पीछे जाने की जगह नहीं।
फिर डेविड रुका।
वो पीछे हटा—बहुत थोड़ा, लेकिन इतना कि दोनों की साँसें अभी भी एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
गर्म, तेज़, भारी।
उसकी आँखें सैंडी की आँखों में टिकी हुईं।
वो धीरे से सैंडी के हाथ की तरफ बढ़ा—जिस हाथ में सिगरेट थी।
उसने सैंडी की उँगलियों से सिगरेट छीन ली।
एक गहरा कश लिया—धुआँ फेफड़ों में भर गया।
फिर सैंडी के चेहरे की तरफ झुका।
सारा धुआँ उसके चेहरे पर फूंक दिया—धीरे से, जानबूझकर।
धुआँ उसके होंठों से होकर गुज़रा, उसकी आँखों में गया, उसके बालों में उलझ गया।
सैंडी ने आँखें बंद कीं।
फिर धीरे से मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती मुस्कान।
उसने धुआँ साँस में खींचा।
सैंडी ने डेविड की तरफ देखा।
उसकी मुस्कान अब और गहरी हो गई—एक शरारती, भूखी मुस्कान।
उसने अपने होंठों को हल्के से दाँतों से काटा—धीरे से, जानबूझकर।
फिर आँख मारी—एक छोटी, लेकिन बहुत गहरी विंक।
डेविड ने सिगरेट उसके होंठों की तरफ बढ़ाई।
सैंडी ने बिना झिझक के होंठ खोले।
डेविड ने सिगरेट उसके होंठों पर रख दी।
सैंडी ने एक गहरा कश लिया—बिना पलक झपकाए।
उसकी आँखें डेविड की आँखों में टिकी हुईं—सीधे, बिना डगमगाए।
धुआँ उसके फेफड़ों में भर गया।
उसकी छाती ऊपर उठी।
उसकी शर्ट और ऊपर सरकी—स्तन आधे से ज़्यादा खुले
वो कश खत्म हुआ।
सैंडी ने धीरे से होंठ डेविड के होंठों की तरफ बढ़ाए।
डेविड ने आगे झुका।
उनके होंठ छू गए—बहुत हल्के से, लेकिन बहुत करीब।
सैंडी ने धुआँ धीरे से उसके मुँह में छोड़ा।
डेविड ने साँस खींची—सैंडी के होंठों से।
धुआँ दोनों के चेहरों के चारों तरफ फैल गया
उनके चेहरे धुएँ में ढक गए—आँखें अभी भी एक-दूसरे में टिकी हुईं।
तभी नेहा की जांघें काँप गईं।
एक हल्का सा, लेकिन साफ़ झटका।
उसकी साँसें रुक गईं।
फिर एक गहरी, लंबी साँस।
उसकी चूत मेरी उँगलियों पर और गीली हो गई।
पैंटी पर एक गर्म लहर।
वो थरथराई—बहुत हल्के से, लेकिन मैंने महसूस किया।
एक मिनी ऑर्गेज़्म।
बस... एक छोटा सा
मैंने उसके कान में फुसफुसाया—बहुत धीरे, लेकिन चिंता से।
"आर यू ऑल राइट बेबी?"
नेहा ने मेरी तरफ नहीं देखा।
उसकी आँखें अभी भी सैंडी और डेविड पर टिकी हुईं।
उसने बस "हम्म्म..." कहा—एक लंबा, गहरा "हम्म्म..."।
मेरा एक हाथ अब नेहा की टी-शर्ट के नीचे चला गया।
ब्रालेस।
उसकी स्किन गर्म, नरम, थोड़ी सी पसीने से चिपचिपी।
मैंने धीरे से उसका एक स्तन पकड़ा—गोल, भारी, लेकिन फिट।
अंगूठे से निप्पल को हल्का सा रगड़ा—वो पहले से ही सख्त था।
नेहा की साँस रुक गई।
उसकी पीठ मेरी छाती से और दब गई।
उसकी गांड मेरे लुंड पर और गहराई से रगड़ रही थी—धीमे, लेकिन लगातार।
हम दोनों की आँखें अभी भी बालकनी पर टिकी हुई थीं।
सैंडी और डेविड...
एक 25 साल की इन्फ्लुएंसर—परफेक्ट बॉडी, टीवी कमर्शियल वाली हॉट लड़की।
और एक मोटा, बदसूरत, बालों से भरा आदमी—छोटे अंडरवियर में, पेट बाहर लटका हुआ।
फिर भी... वो दोनों ऐसे खेल रहे थे जैसे कोई क्यूट टीनएज लवर्स हों।
मैंने नेहा की पैंटी की इलास्टिक पर हाथ सरकाया।
धीरे से
उँगलियाँ कपड़े के नीचे दाखिल हुईं—स्किन गर्म, चिपचिपी।
एक हल्का सा टच... और मैं समझ गया।
वो पूरी तरह गीली थी।
सिर्फ़ गीली नहीं—जैसे पानी बह रहा हो।
उँगलियाँ चिकनी, गर्म, लिक्विड से भरी हुईं।
नेहा... मेरी नेहा... इस सब को देखकर... इतनी गीली हो गई थी।
मैंने उसकी क्लिट को पकड़ा ।
अंगूठे से हल्के से रगड़ा—गोल-गोल, धीमे लेकिन लगातार।
नेहा की साँसें रुक गईं।
उसकी जांघें काँपीं।
उसकी गांड मेरे लुंड पर और दब गई—जानबूझकर, गहरे।
मैंने उँगली नीचे ले जाने की कोशिश की—उसकी छेद की तरफ।
लेकिन इस पोज़िशन में मुश्किल था।
हम दोनों खड़े थे—मैं पीछे से, वो मेरे सामने बालकनी की तरफ देख रही थी।
तभी... बालकनी में एक और आदमी आया।
विशाल।
टी-शर्ट में, तौलिया कमर पर लिपटा हुआ।
बाल गीले—जैसे अभी नहाकर निकला हो।
उसकी टी-शर्ट तनी हुई थी—सीना चौड़ा, कंधे भारी।
वो सैंडी के दाएँ तरफ आया—बहुत करीब।
उसका कंधा सैंडी के कंधे से छू गया।
डेविड अभी भी उसके सामने था—पेट दबा हुआ, साँसें मिल रही थीं।
अब तीनों थे—सैंडी बीच में, डेविड सामने, विशाल दाएँ तरफ।
सैंडी रेलिंग पर पीठ टिकाए झुकी हुई थी—कोई पीछे जाने की जगह नहीं।
वो तीनों इतने करीब थे कि उनकी साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
शर्ट हवा में लहरा रही थी—स्तन आधे से ज़्यादा खुले।
पैंटी पूरी दिख रही थी
मुझे लग रहा था जैसे वो सब अभी फिर से तैयार हो रहे हैं।
सैंडी को।
अलोक के लिए।
अलोक ने जाते-जाते कहा था—"मैं सोने जा रहा था ... लेकिन तुम्हारी बीवी की वजह से सैंडी को आराम नहीं मिलेगा।"
अब लग रहा था वो सच था।
वो तीनों अभी भी खेल रहे थे
विशाल ने सैंडी के कंधे पर हाथ रखा—हल्का सा, लेकिन फर्म।
डेविड ने फिर से सिगरेट सैंडी के होंठों पर रखी।
सैंडी ने कश लिया—गहरा, बिना पलक झपकाए।
फिर वो विशाल की तरफ मुड़ी।
उसने सिर थोड़ा टिल्ट किया।
धुआँ धीरे से विशाल के मुँह में छोड़ा।
विशाल ने साँस खींची—सैंडी के होंठों से।
धुआँ दोनों के चेहरों के चारों तरफ फैल गया।
फिर विशाल ने हँसा—एक गहरी, भारी हँसी।
नेहा की साँसें अब बहुत तेज़ हो गईं।
उसकी चूत मेरी उँगलियों पर और गीली हो गई।
मिनी ऑर्गेज़्म के बाद भी वो अभी भी देख रही थी, बिना रुके।
बालकनी में सैंडी और विशाल का सीन अब और इंटेंस हो गया था।
विशाल ने सैंडी के होंठ पकड़ लिए—दाँतों से।
सैंडी ने धुआँ उसके मुँह में छोड़ा था, लेकिन विशाल ने उसके होंठ छोड़े नहीं।
उसने सैंडी के निचले होंठ को हल्के से काटा—नहीं बहुत ज़ोर से, लेकिन इतना कि सैंडी की आह निकल गई।
सैंडी ने पीछे हटने की कोशिश की—उसके हाथ विशाल के कंधे पर गए, हल्का सा धक्का दिया।
लेकिन विशाल ने छोड़ा नहीं।
उसकी आँखें सैंडी की आँखों में टिकी हुईं—भूखी, खेलते हुए।
धुआँ अभी भी दोनों के चेहरों के चारों तरफ लहरा रहा था
इसी बीच डेविड ने सैंडी का हाथ पकड़ा।
उस हाथ को धीरे से नीचे ले गया—अपनी क्रॉच की तरफ।
अंडरवियर के ऊपर से।
सैंडी की उँगलियाँ उसके लुंड पर रख दी गईं—हार्ड, मोटा, कपड़े के नीचे फड़कता हुआ।
डेविड ने उसका हाथ और दबाया—धीमे, लेकिन लगातार।
सैंडी ने विशाल के कंधे पर थपकी दी—"छोड़ दो"।
शाल ने छोड़ा।
सैंडी ने पीछे हटकर साँस ली
फिर डेविड की तरफ देखा।
फिर चारों तरफ—जैसे चेक कर रही हो कि कोई देख तो नहीं रहा।
फुसफुसाई—बहुत धीरे, लेकिन हमने सुन लिया।
"इट्स रिस्की..."
डेविड ने चारों तरफ देखा।
फिर हँसा—एक गहरी, भारी हँसी।
"नोबडी इज़ हियर... हमने यहाँ कई बार किया है।"
उसने सैंडी का हाथ नहीं छोड़ा।
उसका हाथ अभी भी उसके लुंड पर था—अंडरवियर के ऊपर से।
धीमे-धीमे रगड़ रहा था।
सैंडी ने फिर हँसी—हल्की, शरारती।
लेकिन उसने हाथ नहीं हटाया।
नेहा मेरे साथ चल रही थी—उसका हाथ मेरे हाथ में
वो बात कर रही थी—जैसे हमेशा करती है।
"सैम... कॉफी कैसी थी?
"और दोसा?
वो वाला मसालेदार वाला... बहुत अच्छा था ना?
मैंने हल्के से "हम्म..." कहा।
मुझे तो चटनी सबसे अच्छी लगी।"
मैंने फिर "हाँ..." कहा।
मेरा दिमाग कहीं और था।
मैं उसके साथ था... लेकिन नहीं था।
वो मेरे साथ चल रही थी.... लेकिन मैं... मैं अभी भी कल रात के कमरे में था।
सैंडी की आहें... अलोक... वेटर ... और वो "सूट नंबर 502"।
हम कमरे में पहुँचे।
मैंने दरवाज़ा खोला।
वो मेरी तरफ मुड़ी, मुस्कुराई।
"सैम... आप आज बहुत चुप हैं।
कुछ हुआ है क्या?"
मैंने कहा,
"नहीं... बस... थकान है।
मैं वॉशरूम जा रहा हूँ... फ्रेश होकर आता हूँ।"
मैंने वॉशरूम में 10-15 मिनट लगा दिए।
ठंडा पानी मुंह पर मारा, चेहरा पोंछा, बालों को सुलझाया
दरवाज़ा खुलते ही नेहा बालकनी के दरवाज़े पर खड़ी दिखी।
वो अंदर आ रही थी—हाथ से इशारा कर रही थी—उँगली होंठों पर, बार-बार "श्श्श..." का जेस्चर।
उसकी आँखें चमक रही थीं—एक्साइटमेंट से।
वो छोटे-छोटे स्टेप्स ले रही थी, हाथ हवा में नाचते हुए, जैसे कोई बच्ची कोई राज़ छुपा रही हो।
उसकी टी-शर्ट अभी भी वैसी ही थी—थोड़ी तनी हुई, बाल आगे लटके हुए।
वो मेरे पास आई।
फिर से उँगली होंठों पर।
"श्श्श..."
फिर हाथ से इशारा—बालकनी की तरफ।
फुसफुसाई—बहुत धीरे, लेकिन एक्साइटमेंट से भरी।
"सैम... पास वाले बालकनी में... एक सेलिब्रिटी है।"
मैंने भौंहें उठाईं।
"कौन?"
वो फिर से उँगली होंठों पर।
फिर पर्दा थोड़ा सा सरकाया—बस इतना कि हम दोनों देख सकें।
बालकनी माउंटेन फेसिंग थी—सामने पहाड़, दूर एक सड़क, और बीच में हवा।
दूसरी बालकनी थोड़ी दूर थी—लेकिन खिड़की से साफ़ दिख रही थी।
वो फुसफुसाई,
"देखिए... वो... वो लड़की... वो मॉडल
मैंने देखा।
सैंडी बालकनी में खड़ी थी।
उसने सिर्फ़ एक पुरुष वाली शर्ट पहनी हुई थी—बड़ी, ढीली, शायद अलोक की या डेविड की।
बटन सिर्फ़ 3-4 लगे थे—ऊपर से खुली हुई, नीचे से भी हवा में लहरा रही थी।
उसके बाल हवा में उड़ रहे थे—कुछ चेहरे पर चिपक रहे थे, कुछ हवा में नाच रहे थे।
वो फ्रेश लग रही थी—जैसे अभी नहाकर निकली हो।
सिगरेट होंठों पर थी—धीरे-धीरे कश ले रही थी, धुआँ हवा में उड़ता हुआ।
हवा का एक झोंका आया।
शर्ट पीछे उड़ गई।
उसके स्तन आधे दिख गए—गोल, भारी
उसकी गुलाबी पैंटी साफ़ दिख गई—टाइट, पतली, जांघों के बीच में चिपकी हुई।
उसकी जांघें—लंबी, चिकनी, अभी भी थोड़ी लाल, शायद कल रात के थप्पड़ों से।
वो कुछ भी नहीं लग रही थी जैसी मैंने कल रात देखी थी।
कल रात वो एक रंडी थी—कम से ढकी हुई, आहें भरती हुई, चारों तरफ से भरी हुई।
आज... वो एक डिसइरेबल औरत थी।
एक ऐसी औरत जिसे कोई भी देखकर चाहे।
एक ऐसी औरत जिसे देखकर मन करता है कि वो मेरी हो।
मैं नेहा के ठीक पीछे खड़ा था।
मैंने धीरे से उसके कान में पूछा,
"तुम जानती हो उसे?
कौन है ये?
नेहा ने पीछे मुड़कर मुझे देखा—उसकी आँखें चमक रही थीं।
फुसफुसाई,
"अरे... वो फेमस है... नाम नहीं पता... लेकिन मेरे इंस्टा फीड पर बार-बार आती है।
कई बार स्क्रॉल करते हुए रुक जाती हूँ उसकी फोटोज़ पर।"
"रियली...?"
मैंने फिर सैंडी की तरफ देखा।
वो अब रेलिंग पर झुक रही थी—शर्ट पीछे उड़ गई, पैंटी पूरी दिख रही थी।
उसकी जांघें चमक रही थीं।
वो कुछ नहीं जानती थी कि हम उसे देख रहे हैं।
वो बस खुश थी।
नेहा ने पीछे मुड़कर मुझे देखा।
उसकी गांड पर मेरा हार्ड लुंड महसूस करके वो मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती मुस्कान।
हम दोनों की शादी को अभी छह महीने ही हुए थे।
और इन छह महीनों में एक बात कभी नहीं हुई—जलन।
न मैं कभी नेहा से जलता था, न वो मुझसे।
हम दोनों एक-दूसरे को पूरी आज़ादी देते थे।
मॉल में घूमते हुए अगर कोई लड़की अच्छी लगती, वो मुझे कोहनी मारकर फुसफुसाती,
"देखो ना... तुम्हारे दाएँ तरफ... वो रेड वाली... कितनी अच्छी लग रही है ना?"
वो मुस्कुराती, मेरे हाथ में हाथ डालती और हम आगे बढ़ जाते।
कभी कोई लड़ाई नहीं।
कभी कोई "तुम उसे क्यों देख रहे थे?" नहीं।
हम दोनों एक-दूसरे पर भरोसा करते थे—पूरा, बिना किसी शक के।
हम दोनों कभी भी फोन पर कुछ इरोटिक देखने से शर्माते नहीं थे।
शादी के छह महीने में ये हमारा छोटा-मोटा रूटीन बन चुका था—रात को लाइट्स ऑफ, बेड पर लेटे हुए, नेहा मेरे सीने से चिपकी हुई, फोन मेरे हाथ में।
कभी कोई वीडियो हम साथ देखते।
कभी-कभी हम हँसते भी थे।
"अरे ये क्या... वॉशिंग मशीन में इतनी देर तक ये कैसे अटकी रह सकती है, और इससे पता नहीं चला की इसका स्टेप सन इसकी पीछे से ले गया ! "
फिर वो धीरे से मेरी कमर पर हाथ रखती, और हम दोनों... बस... शुरू हो जाते।
पॉर्न सिर्फ़ बैकग्राउंड बन जाता—हमारा अपना मज़ा ज़्यादा हॉट होता।
तो जब सैंडी मेरे सामने इस तरह खड़ी थी—बालकनी में, लगा जैसे कोई सॉफ्ट पॉर्न चल रहा हो।
हम दोनों बालकनी की खिड़की से सैंडी को देखते रहे।
5 मिनट हो चुके थे।
नेहा मेरे ठीक पीछे खड़ी थी—उसका बदन मेरे बदन से सटा हुआ, उसकी साँसें मेरी गर्दन पर गर्म लग रही थीं।
वो बार-बार फुसफुसा रही थी—एक्साइटमेंट से भरी, लेकिन बहुत धीमी आवाज़ में।
"अरे... वो वाली टीवी कमर्शियल वाली... याद है ना?
'हमारा नया घर' वाला... सिंदूर लगाकर साड़ी में मुस्कुराती हुई।
और इंस्टा रील्स पर भी आती है... ट्रैवल वाली... बीच पर बिकिनी में..."
मैं सुन रहा था... लेकिन मेरा पूरा ध्यान सैंडी पर था।
मेरा लुंड... पहले से ही हार्ड था।
अब मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू की।
मेरा लुंड उसकी गांड पर रगड़ रहा था—धीमे, गहरे स्ट्रोक्स।
पैंट के ऊपर से... लेकिन दबाव बहुत था।
नेहा ने महसूस किया।
तभी सैंडी पलटी।
अब उसकी पीठ बालकनी की रेलिंग पर थी।
वो कोहनियों के बल झुकी हुई थी—शर्ट पीछे सरक गई, स्तन आधे से ज़्यादा खुले।
हवा का झोंका आया—शर्ट और ऊपर उड़ गई।
उसकी गुलाबी पैंटी अब पूरी दिख रही थी—टाइट, पतली, और... ट्रायंगल थोड़ा सूजा हुआ था।
क्लिट की हल्की सी उभार
उसकी जांघें फैली हुईं—चमकती हुई, थोड़ी लाल, शायद कल रात के निशान।
वो अब और परफेक्ट दिख रही थी
हम दोनों खिड़की से सैंडी को देखते रहे।
कोई शब्द नहीं।
बस साँसें—हमारी तेज़, गर्म।
मेरा कमर धीरे-धीरे हिल रहा था—मेरा लुंड उसकी गांड पर रगड़ रहा था, पैंट के ऊपर से, लेकिन गहराई से।
मेरी दाहिनी उँगलियाँ नेहा के शॉर्ट के बटन पर गईं।
एक हल्का सा क्लिक।
बटन खुल गया।
मैंने धीरे से शॉर्ट को नीचे सरकाया—उसकी जांघों से, घुटनों तक।
वो खुद थोड़ा सा ऊपर उठी—शॉर्ट नीचे सरक गया।
अब सिर्फ़ पैंटी।
उसकी पैंटी—सफेद, थोड़ी गीली।
मेरी उँगलियाँ सीधे उसकी क्रॉच पर गईं।
पैंटी के ऊपर से रगड़ना शुरू किया—धीमे, गोल-गोल।
उसकी क्लिट पर हल्का सा दबाव।
उसकी साँसें रुक गईं।
फिर तेज़ हो गईं।
मैंने नेहा की गर्दन पर होंठ रख दिए।
धीरे से किस करना शुरू किया
सब कुछ इतना इरोटिक था कि लग रहा था जैसे कोई सॉफ्ट पॉर्न चल रहा हो—सिर्फ़ हम दोनों के लिए।
बालकनी से सैंडी की वो लहराती शर्ट, उसकी गुलाबी पैंटी का झलकना, हवा में उसके बालों का नाचना... सब कुछ एक लाइव शो की तरह।
मैं अक्सर मजाक करता था—
"चलो कभी स्ट्रिप क्लब चलें... कंट्री लीगल वाले... देखेंगे असली मज़ा।"
नेहा हर बार हँसकर टाल देती।
"अरे... क्या मज़ा... सब तो टीवी और इंटरनेट पर देख सकते हैं।
क्या फर्क पड़ता है?"
मैं कहता—"रियल अलग होता है... वो थ्रिल... वो स्मेल... वो एनर्जी..."
वो हँसकर कहती—"नॉट इंटरेस्टेड।"
लेकिन आज... आज वो देख रही थी।
रियल।
लाइव।
वो महसूस कर रही थी कि रियल में कितना फर्क है।
उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
उसकी गांड मेरे लुंड पर और दब रही थी।
तभी... अचानक... सैंडी की हँसी की आवाज़ आई।
जोरदार।
हँसी नहीं... हँसी का धमाका।
वो हँस रही थी—जैसे कोई बहुत हास्यास्पद बात हुई हो।
उसकी हँसी इतनी तेज़ थी कि हम दोनों चौंक गए।
हमने देखा।
सैंडी अब रेलिंग पर पीठ टिकाए खड़ी थी।
जोर-जोर से, पेट पकड़कर।
फिर... एक पल में... हम समझ गए।
एक आदमी बालकनी में आया—छोटे से अंडरवियर में।
पेट बड़ा, बालों से भरा हुआ—जैसे कोई भालू।
उसने एक फैंसी गॉगल पहन रखा था—महिला वाला, शायद सैंडी का ही।
वो पोज़ बना रहा था—हाथ कमर पर, छाती फुलाकर, गॉगल पर हाथ फेरते हुए।
"कैसा लग रहा हूँ?" वाला जेस्चर।
सैंडी हँसते-हँसते झुक गई।
उसकी हँसी रुक नहीं रही थी।
मैंने तुरंत पहचान लिया।
डेविड।
वही डेविड—जो कल रात सैंडी को रफ तरीके से चोद रहा था।
वही डेविड—जो "भेनचोद" कहकर थप्पड़ मार रहा था।
वही डेविड—जो अब अंडरवियर में, भालू जैसा, महिला गॉगल पहनकर पोज़ बना रहा था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, कन्फ्यूज़।
फुसफुसाई,
"ये... ये कौन है?
क्या हो रहा है?"
उसकी आवाज़ में उत्सुकता थी ।
मैंने एक फेस बनाया—कंधे उचकाए, होंठों को थोड़ा सा सिकोड़ा, जैसे कह रहा हूँ "पता नहीं... देखते हैं क्या होता है"।
मैं खुद भी नहीं जानता था कि क्या जवाब दूँ।
क्या कहता—"वो डेविड है... कल रात वाला... जो सैंडी को रफ तरीके से चोद रहा था"?
तो मैंने बस "देखते हैं" वाला फेस बनाया।
हम दोनों फिर से खिड़की से झाँकने लगे—पर्दा थोड़ा सरका हुआ, बस इतना कि हम देख सकें, लेकिन कोई हमें न देख ले।
बालकनी का माहौल अब पूरी तरह प्लेफुल हो चुका था।
सैंडी अब रेलिंग पर पीठ टिकाए खड़ी थी
डेविड उसके सामने था
वो पोज़ बना रहा था—हाथ कमर पर, छाती फुलाकर, गॉगल पर हाथ फेरते हुए, जैसे कोई मॉडल हो।
सैंडी ने उसकी तरफ देखा।
उसने हाथ से एक सर्कल बनाया
फिर होंठों से बिना आवाज़ के बोला—बहुत साफ़, बहुत शरारती:
"वेरी हैंडसम।"
फिर वो फिर से हँस पड़ी—जोर-जोर से, पेट पकड़कर।
उसकी हँसी इतनी तेज़ थी कि बालकनी में गूंज गई।
उसकी शर्ट और ऊपर उड़ गई—स्तन आधे से ज़्यादा खुले।
वो हँसते-हँसते झुक गई—जैसे हँसी रुक नहीं रही हो।
तभी डेविड उसके बहुत करीब आ गया।
वो छोटे कद का था—मोटा पेट
सैंडी बालकनी की रेलिंग पर पीठ टिकाए झुकी हुई थी—इसलिए उसकी हाइट डेविड के पेट से मैच कर गई।
उसका पेट सैंडी के पेट से छू गया—हल्का सा, लेकिन साफ़।
डेविड ने फेक गुस्से से उसकी गाल पर थप्पड़ मारा—दो बार, हल्के से।
"नॉटी गर्ल... नॉटी गर्ल।"
अगर मैं ये सब किसी पब्लिक प्लेस में देखता—एक छोटे कद का, मोटा आदमी, अंडरवियर में, महिला गॉगल पहने
बहुत हँसता।
ये कॉमेडी थी। प्योर सिलीनेस।
लेकिन यहाँ... हमारी हँसी कहीं नहीं थी। मेरा चेहरा सख्त था।
नेहा का भी—उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, लेकिन मुस्कान गायब।
वो अब समझ रही थी—ये कोई नॉर्मल नहीं है।
ये कुछ स्पेशल है।
मैंने कुछ नहीं कहा।
मेरा लुंड... अब रगड़ना भूल गया था।
लेकिन मेरी उँगलियाँ अभी भी नेहा की पैंटी पर थीं—धीमे, गोल-गोल।
उसकी चूत गीली थी—पैंटी पर साफ़ महसूस हो रहा था।
तभी डेविड ने सैंडी पर और ज़ोर से दबाव डाला।
वो पहले से ही रेलिंग पर पीठ टिकाए झुकी हुई थी—कोई पीछे जाने की जगह नहीं।
डेविड का बड़ा, बालों से भरा पेट सैंडी के पेट से पूरी तरह दब गया।
उसकी नंगी जांघें सैंडी की नंगी जांघों से सटी हुईं ।
दोनों आमने-सामने थे, फेस टू फेस।
मगर पेट की वजह से क्रोच एरिया मिल नहीं आ रहे थे दोनों आमने-सामने थे, फेस टू फेस।
डेविड का लुंड (अभी भी अंडरवियर में) सैंडी की जांघों के बीच दब रहा था, लेकिन पूरी तरह नहीं।
वो बस दबाव डाल रहा था—जोर से, खेल-खेल में।
सैंडी की आह निकली—प्लेफुल, लेकिन थोड़ी सी सच्ची।
"आआई... मैं गिर जाऊँगी!"
डेविड ने सैंडी की जांघों के बीच दबाने की कोशिश की, लेकिन क्रॉच एरिया नहीं मिल रहा था।
दोनों के बीच सिर्फ़ कपड़े थे—उसका छोटा अंडरवियर और सैंडी की गुलाबी पैंटी।
सैंडी की पीठ रेलिंग से और दब गई—कोई पीछे जाने की जगह नहीं।
फिर डेविड रुका।
वो पीछे हटा—बहुत थोड़ा, लेकिन इतना कि दोनों की साँसें अभी भी एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
गर्म, तेज़, भारी।
उसकी आँखें सैंडी की आँखों में टिकी हुईं।
वो धीरे से सैंडी के हाथ की तरफ बढ़ा—जिस हाथ में सिगरेट थी।
उसने सैंडी की उँगलियों से सिगरेट छीन ली।
एक गहरा कश लिया—धुआँ फेफड़ों में भर गया।
फिर सैंडी के चेहरे की तरफ झुका।
सारा धुआँ उसके चेहरे पर फूंक दिया—धीरे से, जानबूझकर।
धुआँ उसके होंठों से होकर गुज़रा, उसकी आँखों में गया, उसके बालों में उलझ गया।
सैंडी ने आँखें बंद कीं।
फिर धीरे से मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती मुस्कान।
उसने धुआँ साँस में खींचा।
सैंडी ने डेविड की तरफ देखा।
उसकी मुस्कान अब और गहरी हो गई—एक शरारती, भूखी मुस्कान।
उसने अपने होंठों को हल्के से दाँतों से काटा—धीरे से, जानबूझकर।
फिर आँख मारी—एक छोटी, लेकिन बहुत गहरी विंक।
डेविड ने सिगरेट उसके होंठों की तरफ बढ़ाई।
सैंडी ने बिना झिझक के होंठ खोले।
डेविड ने सिगरेट उसके होंठों पर रख दी।
सैंडी ने एक गहरा कश लिया—बिना पलक झपकाए।
उसकी आँखें डेविड की आँखों में टिकी हुईं—सीधे, बिना डगमगाए।
धुआँ उसके फेफड़ों में भर गया।
उसकी छाती ऊपर उठी।
उसकी शर्ट और ऊपर सरकी—स्तन आधे से ज़्यादा खुले
वो कश खत्म हुआ।
सैंडी ने धीरे से होंठ डेविड के होंठों की तरफ बढ़ाए।
डेविड ने आगे झुका।
उनके होंठ छू गए—बहुत हल्के से, लेकिन बहुत करीब।
सैंडी ने धुआँ धीरे से उसके मुँह में छोड़ा।
डेविड ने साँस खींची—सैंडी के होंठों से।
धुआँ दोनों के चेहरों के चारों तरफ फैल गया
उनके चेहरे धुएँ में ढक गए—आँखें अभी भी एक-दूसरे में टिकी हुईं।
तभी नेहा की जांघें काँप गईं।
एक हल्का सा, लेकिन साफ़ झटका।
उसकी साँसें रुक गईं।
फिर एक गहरी, लंबी साँस।
उसकी चूत मेरी उँगलियों पर और गीली हो गई।
पैंटी पर एक गर्म लहर।
वो थरथराई—बहुत हल्के से, लेकिन मैंने महसूस किया।
एक मिनी ऑर्गेज़्म।
बस... एक छोटा सा
मैंने उसके कान में फुसफुसाया—बहुत धीरे, लेकिन चिंता से।
"आर यू ऑल राइट बेबी?"
नेहा ने मेरी तरफ नहीं देखा।
उसकी आँखें अभी भी सैंडी और डेविड पर टिकी हुईं।
उसने बस "हम्म्म..." कहा—एक लंबा, गहरा "हम्म्म..."।
मेरा एक हाथ अब नेहा की टी-शर्ट के नीचे चला गया।
ब्रालेस।
उसकी स्किन गर्म, नरम, थोड़ी सी पसीने से चिपचिपी।
मैंने धीरे से उसका एक स्तन पकड़ा—गोल, भारी, लेकिन फिट।
अंगूठे से निप्पल को हल्का सा रगड़ा—वो पहले से ही सख्त था।
नेहा की साँस रुक गई।
उसकी पीठ मेरी छाती से और दब गई।
उसकी गांड मेरे लुंड पर और गहराई से रगड़ रही थी—धीमे, लेकिन लगातार।
हम दोनों की आँखें अभी भी बालकनी पर टिकी हुई थीं।
सैंडी और डेविड...
एक 25 साल की इन्फ्लुएंसर—परफेक्ट बॉडी, टीवी कमर्शियल वाली हॉट लड़की।
और एक मोटा, बदसूरत, बालों से भरा आदमी—छोटे अंडरवियर में, पेट बाहर लटका हुआ।
फिर भी... वो दोनों ऐसे खेल रहे थे जैसे कोई क्यूट टीनएज लवर्स हों।
मैंने नेहा की पैंटी की इलास्टिक पर हाथ सरकाया।
धीरे से
उँगलियाँ कपड़े के नीचे दाखिल हुईं—स्किन गर्म, चिपचिपी।
एक हल्का सा टच... और मैं समझ गया।
वो पूरी तरह गीली थी।
सिर्फ़ गीली नहीं—जैसे पानी बह रहा हो।
उँगलियाँ चिकनी, गर्म, लिक्विड से भरी हुईं।
नेहा... मेरी नेहा... इस सब को देखकर... इतनी गीली हो गई थी।
मैंने उसकी क्लिट को पकड़ा ।
अंगूठे से हल्के से रगड़ा—गोल-गोल, धीमे लेकिन लगातार।
नेहा की साँसें रुक गईं।
उसकी जांघें काँपीं।
उसकी गांड मेरे लुंड पर और दब गई—जानबूझकर, गहरे।
मैंने उँगली नीचे ले जाने की कोशिश की—उसकी छेद की तरफ।
लेकिन इस पोज़िशन में मुश्किल था।
हम दोनों खड़े थे—मैं पीछे से, वो मेरे सामने बालकनी की तरफ देख रही थी।
तभी... बालकनी में एक और आदमी आया।
विशाल।
टी-शर्ट में, तौलिया कमर पर लिपटा हुआ।
बाल गीले—जैसे अभी नहाकर निकला हो।
उसकी टी-शर्ट तनी हुई थी—सीना चौड़ा, कंधे भारी।
वो सैंडी के दाएँ तरफ आया—बहुत करीब।
उसका कंधा सैंडी के कंधे से छू गया।
डेविड अभी भी उसके सामने था—पेट दबा हुआ, साँसें मिल रही थीं।
अब तीनों थे—सैंडी बीच में, डेविड सामने, विशाल दाएँ तरफ।
सैंडी रेलिंग पर पीठ टिकाए झुकी हुई थी—कोई पीछे जाने की जगह नहीं।
वो तीनों इतने करीब थे कि उनकी साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
शर्ट हवा में लहरा रही थी—स्तन आधे से ज़्यादा खुले।
पैंटी पूरी दिख रही थी
मुझे लग रहा था जैसे वो सब अभी फिर से तैयार हो रहे हैं।
सैंडी को।
अलोक के लिए।
अलोक ने जाते-जाते कहा था—"मैं सोने जा रहा था ... लेकिन तुम्हारी बीवी की वजह से सैंडी को आराम नहीं मिलेगा।"
अब लग रहा था वो सच था।
वो तीनों अभी भी खेल रहे थे
विशाल ने सैंडी के कंधे पर हाथ रखा—हल्का सा, लेकिन फर्म।
डेविड ने फिर से सिगरेट सैंडी के होंठों पर रखी।
सैंडी ने कश लिया—गहरा, बिना पलक झपकाए।
फिर वो विशाल की तरफ मुड़ी।
उसने सिर थोड़ा टिल्ट किया।
धुआँ धीरे से विशाल के मुँह में छोड़ा।
विशाल ने साँस खींची—सैंडी के होंठों से।
धुआँ दोनों के चेहरों के चारों तरफ फैल गया।
फिर विशाल ने हँसा—एक गहरी, भारी हँसी।
नेहा की साँसें अब बहुत तेज़ हो गईं।
उसकी चूत मेरी उँगलियों पर और गीली हो गई।
मिनी ऑर्गेज़्म के बाद भी वो अभी भी देख रही थी, बिना रुके।
बालकनी में सैंडी और विशाल का सीन अब और इंटेंस हो गया था।
विशाल ने सैंडी के होंठ पकड़ लिए—दाँतों से।
सैंडी ने धुआँ उसके मुँह में छोड़ा था, लेकिन विशाल ने उसके होंठ छोड़े नहीं।
उसने सैंडी के निचले होंठ को हल्के से काटा—नहीं बहुत ज़ोर से, लेकिन इतना कि सैंडी की आह निकल गई।
सैंडी ने पीछे हटने की कोशिश की—उसके हाथ विशाल के कंधे पर गए, हल्का सा धक्का दिया।
लेकिन विशाल ने छोड़ा नहीं।
उसकी आँखें सैंडी की आँखों में टिकी हुईं—भूखी, खेलते हुए।
धुआँ अभी भी दोनों के चेहरों के चारों तरफ लहरा रहा था
इसी बीच डेविड ने सैंडी का हाथ पकड़ा।
उस हाथ को धीरे से नीचे ले गया—अपनी क्रॉच की तरफ।
अंडरवियर के ऊपर से।
सैंडी की उँगलियाँ उसके लुंड पर रख दी गईं—हार्ड, मोटा, कपड़े के नीचे फड़कता हुआ।
डेविड ने उसका हाथ और दबाया—धीमे, लेकिन लगातार।
सैंडी ने विशाल के कंधे पर थपकी दी—"छोड़ दो"।
शाल ने छोड़ा।
सैंडी ने पीछे हटकर साँस ली
फिर डेविड की तरफ देखा।
फिर चारों तरफ—जैसे चेक कर रही हो कि कोई देख तो नहीं रहा।
फुसफुसाई—बहुत धीरे, लेकिन हमने सुन लिया।
"इट्स रिस्की..."
डेविड ने चारों तरफ देखा।
फिर हँसा—एक गहरी, भारी हँसी।
"नोबडी इज़ हियर... हमने यहाँ कई बार किया है।"
उसने सैंडी का हाथ नहीं छोड़ा।
उसका हाथ अभी भी उसके लुंड पर था—अंडरवियर के ऊपर से।
धीमे-धीमे रगड़ रहा था।
सैंडी ने फिर हँसी—हल्की, शरारती।
लेकिन उसने हाथ नहीं हटाया।


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