24-02-2026, 12:04 PM
मैं जैसे ही बिस्तर पर गिरा, नींद ने मुझे इतनी जोर से पकड़ लिया कि कुछ समझ नहीं आया।
नेहा मेरी बाहों में थी—नंगी, गर्म, मेरी छाती से चिपकी हुई।
उसकी साँसें मेरी स्किन पर धीरे-धीरे पड़ रही थीं।
मैं पूरी तरह थक चुका था—शराब का नशा, रात भर की मेहनत, वो सब कुछ मिलकर बॉडी को भारी बना चुका था।
आँखें बंद हुईं और मैं सो गया... गहरी, बिना किसी सपने वाली नींद में।
अगली बात जो मुझे याद आई—पर्दे की सरसराहट।
सुबह की धूप कमरे में आ रही थी।
नेहा की आवाज़ आई—नरम, प्यार भरी, लेकिन थोड़ी जल्दी वाली।
"वेक अप बेबी..."
मैंने आँखें खोलीं।
"कॉफी तैयार है। और आज चेकआउट भी है... 1 बजे तक।"
मैंने फोन उठाया—9 बज रहे थे।
सिर्फ़ 3 घंटे की नींद मिली थी... वो भी टूटी-फूटी।
नेहा पर्दे के पास खड़ी थी।
लंबी टी-शर्ट पहने हुए—बस ऊपरी जांघों तक आ रही थी।
नीचे से कुछ नहीं दिख रहा था।
ब्रालेस थी—टी-शर्ट के नीचे उसके स्तन साफ़ उभरे हुए थे, निप्पल्स हल्के से प्रिंट हो रहे थे कपड़े पर।
पैंटी है या नहीं... पता नहीं था।
शायद नहीं।
पहला विचार जो दिमाग में आया—कॉफी यहाँ है।
कप टेबल पर रखा था—धुआँ अभी भी उठ रहा था, गर्म लग रही थी।
कौन लाया ये कॉफी?
मैंने धीरे से पूछा—आवाज़ भारी, नींद से कर्कश।
"ये कॉफी... किसने लाई?"
नेहा मुड़ी, मुस्कुराई—वो प्यारी, शांत मुस्कान।
"रूम सर्विस वाला आया था, सैम।
आप सो रहे थे तो मैंने ही ले लिया।"
मेरा दिल एक पल के लिए धड़क गया।
"तुम... इन कपड़ों में?"
नेहा ने हल्के से कंधे उचकाए, जैसे कोई बड़ी बात नहीं।
"हाँ... लंबी टी-शर्ट है ना... सब ठीक था।
वो भी तो स्टाफ है... रोज़ ऐसे ही देखते होंगे।"
वो मेरे पास आई—बेड पर बैठ गई।
उसकी जांघ मेरी जांघ से छू गई—गर्म, नरम।
उसने कॉफी का कप मेरे हाथ में थमाया।
नेहा ने मेरे हाथ में पजामा थमाया—वो लाइट ग्रे वाला, जो मैंने कल पहना था।
"बेबी फास्ट... कॉफी खत्म करो... बफे ब्रेकफास्ट तैयार है।"
उसकी आवाज़ में वही प्यार था—नरम, लेकिन थोड़ी जल्दी वाली।
मैंने पजामा लिया, लेकिन अभी भी बिस्तर पर ही लेटा रहा।
कॉफी का कप हाथ में था—गर्माहट अब भी महसूस हो रही थी।
ब्रेकफास्ट इंक्लूडेड था—और हम मिडिल क्लास वाले कभी नहीं छोड़ते ऐसे ब्रेकफास्ट को।
ये वो छोटी-छोटी खुशियाँ हैं जो ट्रिप को यादगार बनाती हैं—फ्री बफे, ढेर सारे ऑप्शन्स, और वो फीलिंग कि "सब कुछ मिल रहा है बिना एक्स्ट्रा पैसे के"।
मैं कॉफी की चुस्कियाँ ले रहा था—धीरे-धीरे।
कड़वी गर्माहट गले से नीचे उतर रही थी, लेकिन दिमाग अभी भी रात में अटका हुआ था।
फिर अचानक याद आया—कल रात का वो वादा।
अलोक से किया हुआ।
"कल सुबह नेहा से मिलवाओ।"
नेहा ने पजामा निकालकर रख दिया था, लेकिन फिर वो लंबा वाला पजामा पहनने लगी।
उसकी भूख साफ़ झलक रही थी—कल रात हमने ठीक से कुछ खाया ही नहीं था।
बस बीयर और कुछ स्टार्टर्स—भूख लगी होगी उसको भी।
मैंने उसे देखा।
धीरे से कहा,
"ये लंबा पजामा मत पहनो... कुछ छोटा पहनो।"
नेहा ने मेरी तरफ देखा—एक पल के लिए।
कोई सवाल नहीं किया।
बस मुस्कुराई, अलमारी खोली और एक छोटा सा शॉर्ट निकाल लिया।
पहन लिया—वो टाइट वाला, ऊपर से जांघों के बीच तक।
फिर टी-शर्ट उतारी—ब्रालेस थी।
उसने ब्रा की तरफ हाथ बढ़ाया।
मैंने फिर कहा,
"ब्रा मत पहनो... तुम ऐसे ही परफेक्ट लग रही हो।"
नेहा ने हल्के से मुंह बनाया।
फिर टी-शर्ट के नीचे से अपने निप्पल्स की तरफ इशारा किया—कपड़े पर साफ़ उभरे हुए थे।
जैसे कह रही हो—"फिर ये तो दिख रहे हैं।"
मैंने मुस्कुराकर कहा,
"बाल आगे कर लो... कोई नोटिस नहीं करेगा।"
नेहा ने हँसी—वो प्यारी, शरमाती हुई हँसी।
फिर बाल आगे कर लिए—कंधों पर लटका दिए।
अब निप्पल्स थोड़े छुप गए थे।
वो मेरी तरफ देखकर बोली,
"आप जो कहें... सैम।"
मैंने नेहा को देखा।
वो अभी भी टी-शर्ट और शॉर्ट में खड़ी थी—बाल आगे लटके हुए, निप्पल्स कपड़े पर हल्के से उभरे हुए, लेकिन छुपे हुए।
उसने कोई सवाल नहीं किया।
न "क्यों ब्रा नहीं पहनूँ?" पूछा।
न "क्यों आप चाहते हैं कि मैं ऐसे दिखूँ?"
बस मुस्कुराई और जो मैंने कहा, वही कर दिया।
बाल आगे कर लिए।
शॉर्ट पहन लिया।
ब्रा नहीं पहनी।
मैं अंदर से काँप रहा था।
मुझे पता नहीं था कि अगर वो पूछती—"सैम... आज क्या हुआ है आपको?
क्यों चाहते हैं कि आपकी बीवी थोड़ी डिस्प्ले में रहे?"
तो मैं क्या जवाब देता।
क्योंकि सच तो ये था कि मेरे दिमाग में सिर्फ़ एक ही चेहरा था—अलोक।
वो ब्रेकफास्ट हॉल में होगा।
उसके साथ शायद विशाल और डेविड भी।
शायद सैंडी भी—अपने हॉट कपड़ों में, वो वाली टाइट ड्रेस में जो उसकी बॉडी को और हाइलाइट करती है।
मैं चाहता था कि वो सब देखें।
देखें कि मेरे पास क्या है।
सैंडी से बेहतर।
जो सिर्फ़ मेरी है।
मैं चाहता था कि अलोक की आँखें नेहा पर टिकें।
उसकी वो मुस्कान... वो जलन... वो भूख...
मैं चाहता था कि वो समझे—तुमने मुझे सैंडी दी थी, लेकिन मेरे पास पहले से ही कुछ ऐसा है जो तुम कभी नहीं पा सकते।
मैं चाहता था कि विशाल और डेविड भी देखें—तुम्हारा बॉस ने मुझे कोई एहसान नहीं किया सैंडी देकर।
मेरे पास अपनी रंडी है... अपनी कुतिया... और वो सैंडी से कहीं बेहतर है।
और सैंडी... वो भी वहाँ होगी।
अपने सेक्सी कपड़ों में, सबकी नज़रें खींचती हुई।
मैं नहीं चाहता था कि सारी अटेंशन उसी पर जाए।
मैं चाहता था कि नेहा को भी उसका हिस्सा मिले।
मर्दों की नज़रें उस पर भी टिकें।
उसकी टी-शर्ट के नीचे उभरे हुए निप्पल्स को देखें।
उसकी जांघों को देखें।
उसकी पायल को सुनें।
और जलें।
हम कमरे से बाहर निकले।
नेहा मेरे बगल में चल रही थी—टी-शर्ट में, शॉर्ट में, बाल आगे लटके हुए।
उसकी पायल हर कदम पर हल्की सी बज रही थी।
मैंने उसका हाथ पकड़ा—थोड़ा सख्ती से, जैसे कह रहा हूँ "तुम मेरे साथ हो"।
जैसे ही हम कॉरिडोर में निकले, असर दिखना शुरू हो गया।
एक कपल चेक-इन कर रहा था—शायद नए आए होंगे।
लड़के की नज़र नेहा पर पड़ी।
वो एक सेकंड के लिए भूल गया कि मुँह बंद करना है।
उसकी आँखें फैल गईं—नेहा की टी-शर्ट के नीचे उभरे हुए निप्पल्स, शॉर्ट से निकलती जांघें, उसकी चाल... सब कुछ।
उसकी बीवी ने उसे कोहनी मारी, लेकिन वो अभी भी देख रहा था।
मैंने मुस्कुराया—अंदर से एक अजीब सा गर्व और जलन दोनों महसूस हो रहा था।
नेहा 25-26 की लग रही थी—फ्रेश, जवान, परफेक्ट।
और मैं... 35-36 का।
ये एज गैप लोगों को हमेशा अट्रैक्ट करता है—खासकर मर्दों को।
लॉबी में और कुछ लोग थे।
कुछ मर्दों की नज़रें नेहा पर टिक गईं।
एक ने तो सीधे उसके स्तनों की तरफ देखा—फिर जल्दी से नज़र हटाई।
नेहा ने खुद को चेक किया—बार-बार अपनी टी-शर्ट की तरफ देखा, जैसे देख रही हो कि निप्पल्स तो नहीं दिख रहे।
उसने बाल और आगे कर लिए—लेकिन वो उभार अभी भी थोड़ा सा दिख रहा था।
हम लिफ्ट में गए।
लिफ्ट खुली।
हम ब्रेकफास्ट हॉल की तरफ बढ़े।
मैं और नेहा ब्रेकफास्ट हॉल में एंट्री लेते ही वो नया वेटर हमें देखकर रुक गया।
ट्रे हाथ में थी, लेकिन उसकी आँखें हमें स्कैन कर रही थीं—खासकर नेहा को।
उसने धीरे से बगल वाले दूसरे वेटर के कान में कुछ फुसफुसाया।
दोनों ने एक साथ हमें देखा, फिर एक-दूसरे की तरफ मुड़कर मुस्कुराए—वो मुस्कान... वो रहस्य वाली मुस्कान, जो कह रही थी "ये वही है"।
मेरा दिल एक बार फिर धड़क गया।
कल रात वाला वेटर नहीं था ये, लेकिन उसकी बात याद आ गई—
"हम पाँच थे... सब स्टाफ... उसकी पैंटी के साथ खेला..."
क्या ये लोग भी उनमें से हैं?
क्या ये वही पाँच में से कोई हैं?
क्या कल रात के बाद ये लोग नेहा की पैंटी के बारे में बात कर रहे हैं?
या... शायद आज सुबह नेहा को टी-शर्ट में देखकर फिर से वही "खेल" याद आ रहा है?
मेरा लुंड... जो कल रात ने इतना परफॉर्म किया था—शेप और साइज़ के बावजूद—अब फिर से हल्का सा फड़क उठा।
शर्मिंदगी थी, जलन थी, लेकिन साथ ही एक अजीब सा गर्व भी।
शेप छोटा था, साइज़ एवरेज था, लेकिन परफॉर्मेंस... वो मेरी थी।
मैं और नेहा बफे काउंटर की तरफ बढ़े।
मेरी आँखें अब हर तरफ घूम रही थीं—अलोक को ढूँढ रही थीं, विशाल और डेविड को, सबसे ज़्यादा सैंडी को।
मैं चाहता था कि वो दिखे—उसकी ड्रेस, उसकी चाल, वो हॉट लुक जो कल रात था।
मैं चाहता था कि नेहा की तरफ देखकर वो सब जलें—कि मेरे पास जो है, वो सैंडी से बेहतर है।
लेकिन... कोई नहीं दिखा।
न अलोक की टेबल पर वो मुस्कान।
न विशाल-डेविड की हँसी।
न सैंडी की वो सेक्सी ड्रेस।
हॉल में बस नॉर्मल फैमिलीज़, कपल्स, कुछ टूरिस्ट्स।
मैंने ट्रे उठाई।
नेहा मेरे साथ थी—उसकी पायल हर कदम पर बज रही थी।
हम काउंटर पर गए।
पहले कॉफी—दो कप।
फिर पास्ता—थोड़ा सा, रेड सॉस वाला।
फिर पोहा—हल्का मसालेदार।
मिसल पाव—थोड़ा सा, चटनी के साथ।
फिर डोसा—प्लेन, सांभर और चटनी के साथ।
हम दोनों ने छोटे-छोटे पोर्शन लिए—जैसे बच्चे हों, सब कुछ ट्राई करना हो।
हम ब्रेकफास्ट हॉल में एक टेबल पर बैठ गए—विंडो वाली, बाहर का व्यू दिख रहा था।
नेहा ने ट्रे रखी, मेरे सामने बैठ गई।
उसकी टी-शर्ट अभी भी थोड़ी टाइट थी—बाल आगे लटके हुए थे, लेकिन जब वो झुकी तो निप्पल्स का उभार और साफ़ हो गया।
वो खुद को चेक करती रही—हाथ से टी-शर्ट को हल्का सा खींचती, जैसे डर रही हो कि कहीं ज़्यादा न दिख जाए।
मैंने प्लेट में से पोहा उठाया, लेकिन खाने का मन नहीं था।
मेरा चेहरा थोड़ा उदास हो गया था—आपने देख लिया होगा।
दिमाग दो हिस्सों में बँटा हुआ था, जैसे कोई युद्ध चल रहा हो।
एक हिस्सा डर रहा था।
बहुत डर रहा था।
क्या होगा अगर सैंडी यहाँ आ गई?
अगर वो दौड़कर मेरे पास आई और गले लग गई?
"सैम... लास्ट नाइट अमेजिंग था... क्यों चले गए? मैं चाहती थी कि तुम्हारा लुंड मेरी चूत में हो..."
या फिर वो सबके सामने खुलकर कह दे—"कल रात के बाद हमने कितना मज़ा किया... तुम्हारे जाने के बाद..."
मेरा दिल धड़क रहा था।
मैंने नेहा की तरफ देखा—वो पोहा खा रही थी, मुस्कुरा रही थी।
वो कुछ नहीं जानती थी।
दूसरा हिस्सा... वो ठंडा, लॉजिकल हिस्सा... कह रहा था—
"ये प्रोफेशनल हैं।
अलोक जानता है कैसे बिहेव करना है।
सैंडी जानती है लिमिट्स।
वो कभी ऐसा नहीं करेंगे।
वो सबके सामने एक्ट करेंगे जैसे मुझे पहली बार देख रहे हैं।
कोई स्कैंडल नहीं... कोई ड्रामा नहीं।
बस... हाय-हैलो... और बस।"
नेहा ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा,
"बेबी... चटनी ला देंगे ना?
दोसे के साथ भूल गई थी।"
मैंने हल्के से मुस्कुराया।
"जी... अभी लाता हूँ।"
उठा, ट्रे पर प्लेट रखी, और काउंटर की तरफ बढ़ा।
दोसे वाले काउंटर पर हमेशा लाइन लगी रहती है—आज भी वैसा ही था।
5 मिनट लग गए—लाइन धीमी थी, लोग ज्यादा थे।
मैंने पीछे मुड़कर अपनी टेबल की तरफ देखा।
नेहा अब अकेली नहीं थी।
उसके सामने अलोक बैठा था।
वो हँस रही थी—हल्के से, लेकिन सच्ची हँसी।
अलोक कुछ जोक सुना रहा था—उसकी मुस्कान वैसी ही थी, वही कंट्रोल्ड, वही जानकार वाली।
नेहा ने बाल कंधे पर डाले हुए थे, लेकिन जब हँसी तो टी-शर्ट थोड़ी सी सरकी—निप्पल्स का उभार और साफ़ हो गया।
अलोक की नज़र वहाँ गई—एक सेकंड के लिए।
फिर वो फिर से हँसा—जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मेरा दिल एक बार फिर धड़क गया।
लाइन में खड़े-खड़े भी मेरी आँखें उन पर टिकी रही।
वो हँस रही थी।
उसकी पूरी बॉडी हिल रही थी—कंधे, कमर, स्तन—सब कुछ।
टी-शर्ट के नीचे उसके छोटे लेकिन परफेक्ट शेप के स्तन हिल रहे थे, ब्रा नहीं होने की वजह से वो हर हँसी के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे।
जब वो हँसती, तो वो उछलते—एक बार ऊपर, एक बार नीचे।
अलोक की आँखें वहाँ टिकी हुई थीं—एक सेकंड के लिए
लेकिन मैं जानता था—वो देख रहा था।
उसकी वो नज़र... वो वाली नज़र जो "माल" को नापती है।
अलोक... वो बस मुस्कुरा रहा था।
वो वाला आदमी जो हर औरत को "माल" समझता है।
जो मानता है कि औरतें खेलने के लिए हैं—कुतिया की तरह।
जो कल रात सैंडी को रंडी की तरह इस्तेमाल कर रहा था।
और अब... मेरी नेहा उसके सामने हँस रही थी।
मेरा दिमाग
एक तरफ वो आवाज़ थी जो मुझे हमेशा से जानती थी — वो आवाज़ जो कह रही थी:
“सैम, ये गलत है।
तुम अलोक जैसे आदमी को अपनी औरत के सामने नहीं लाते।
तुम उसे बचाते हो।
तुम्हारा काम है नेहा को उन नज़रों से दूर रखना जो उसे ‘माल’ समझती हैं।
तुमने खुद देखा है कि अलोक क्या सोचता है औरतों के बारे में।
वो सैंडी को भी सिर्फ़ एक खिलौना समझता है।
अगर तुम नेहा को उसके सामने ले गए तो तुम खुद उसे ख़तरे में डाल रहे हो।
तुम उसकी रक्षा करने वाले हो, न कि उसका शोकेस।”
लेकिन मेरी नज़रें बार-बार अलोक की टेबल की तरफ जा रही थीं।
मैं खुद से पूछ रहा था — “सैम, तुझे क्या हो रहा है?”
कल रात जब अलोक सैंडी को रफ तरीके से चोद रहा था, मेरे दिमाग में बार-बार नेहा आ रही थी।
उसके बाल खींचे हुए, उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए, उसकी चूत में जोर-जोर से धकेलते हुए।
नेहा की आहें... “आह्ह... और जोर से...”
उसके छोटे-छोटे स्तन हिल रहे हैं, निप्पल्स सख्त, चेहरा पसीने से तर, आँखें आधी बंद।
ये कल्पना मुझे इतना थ्रिल दे रही थी कि मेरा लुंड फिर से हार्ड हो गया था।
वो पुराना वाला थ्रिल.... वो फिर से जाग उठा था।
मैं नहीं समझ पा रहा था कि ये क्यों हो रहा है।
मैं चटनी लेकर जल्दी-जल्दी टेबल की तरफ बढ़ा।
दिमाग में अभी भी वो सवाल घूम रहा था—अलोक वहाँ क्यों बैठा है?
क्यों नेहा उसके साथ हँस रही है?
क्यों वो इतनी सहज लग रही है?
जैसे ही मैं पास पहुँचा, आवाज़ें और साफ़ सुनाई दीं।
"ओह्ह... स्टॉप इट..."
नेहा की आवाज़ थी—हँसी मिक्स कराह वाली।
उसने अलोक के हाथ को टेबल पर हल्का सा थप्पड़ मारा।
लेकिन उसकी आँखें चमक रही थीं।
वो खुश थी।
बहुत खुश।
अलोक मुस्कुरा रहा था—वो वाली मुस्कान, जो कल रात सैंडी को देखते हुए था।
60 साल का आदमी... लेकिन उसकी आँखों में वही भूख।
वही क्रूर चमक।
नेहा को वो "हानलेस" लग रहा था शायद... उम्र की वजह से।
लेकिन मैं जानता था—वो हानलेस नहीं है।
वो ख़तरनाक है।
मैं टेबल पर पहुँचा।
ट्रे हाथ में थी।
नेहा ने मुझे देखा।
"बेबी... ये..."
वो नाम याद करने की कोशिश कर रही थी।
अलोक ने बीच में ही बात काट दी।
"मैंने अभी तक अपना नाम नहीं बताया था।"
टेबल 4-सीटर सोफा वाली थी—दो इस तरफ, दो उस तरफ, आमने-सामने।
मेज बीच में।
मैंने नेहा की तरफ देखा।
उसे इशारा किया कि थोड़ा सा शिफ्ट हो जाए ताकि मैं उसके बगल में बैठ सकूँ।
नेहा ने तुरंत अपनी गांड थोड़ी साइड की।
मैं बैठ गया।
लेकिन जैसे ही मैं बैठा... मेरी गांड नेहा की लंबी टी-शर्ट पर
टी-शर्ट पीछे खिंच गई।
कपड़ा तान गया।
उसके स्तन अब और साफ़ उभर आए—टी-शर्ट के पतले कपड़े पर निप्पल्स पूरी तरह दिखाई दे रहे थे।
गोल, सख्त, हल्के से उभरे हुए।
अलोक की नज़रें वहाँ टिक गईं—एक सेकंड के लिए।
फिर वो फिर से मुस्कुराया—जैसे कुछ हुआ ही न हो।
नेहा ने खुद को थोड़ा एडजस्ट किया।
शर्म से टी-शर्ट को आगे खींच लिया—कपड़ा अब थोड़ा ढीला हो गया, निप्पल्स का उभार कम दिखने लगा।
वो बालों को और आगे कर रही थी, जैसे और छुपाना चाहती हो।
मैंने ट्रे टेबल पर रखी।
चटनी नेहा के सामने सरकाई।
फिर बैठ गया—उसके बगल में।
मैंने अलोक की तरफ देखा।
धीरे से मुस्कुराकर कहा,
"बाय द वे... मैं सैम।"
अलोक ने कॉफी का घूँट लिया।
फिर हाथ बढ़ाया—फर्म, लेकिन दोस्ताना।
"अलोक।"
नेहा ने हल्के से हँसकर कहा,
"नेहा।"
अलोक ने हमें दोनों को देखा—एक गहरी, संतुष्ट मुस्कान के साथ।
"बहुत क्यूट कपल हो तुम दोनों।
मैं अभी नेहा से कह रहा था... कल रिसेप्शन पर मुझे लगा था कि वो एजेंसी से हैं।"
मैंने तुरंत स्नैप किया—आवाज़ में थोड़ा तेज़ी आ गई।
"एजेंसी?"
नेहा ने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखें अभी भी हँसी से चमक रही थीं।
वो थोड़ा आगे झुकी, आवाज़ में वही मासूमियत।
"बेबी... मैंने आपको बताया था ना कल... एक अंकल आए थे, पूछ रहे थे कि क्या मैं एजेंसी से हूँ।
याद है?"
नहीं।
उसने मुझे बताया ही नहीं था।
शायद इसलिए कि उसके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी।
मैंने धीरे से कहा—आवाज़ में थोड़ी सी हल्की सी काँप।
"नहीं... तुमने बताया नहीं था।"
नेहा की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं।
"अरे... सच में?
मुझे लगा था मैंने आपको बता दिया था।
अलोक मुस्कुरा रहा था।
उसकी वो मुस्कान—वही पुरानी वाली, जो कल रात सैंडी को देखते हुए थी।
लेकिन अब वो मुस्कान मेरी तरफ थी।
और उसमें एक अलग सा मज़ा था।
जैसे वो सोच रहा हो—“देख... तेरी बीवी कितनी मासूम है।
उसे पता ही नहीं कि 'एजेंसी' से हम क्या मतलब ले रहे हैं।
वो खुश है... हँस रही है... और सोच रही है कि ये बस एक मज़ाक था।”
उसने मेरी तरफ देखा और बोली,
"बेबी... अलोक सर कह रहे थे कि वो पास में ही एक नया होटल लॉन्च कर रहे हैं।
और उसके लिए कमर्शियल शूट हो रहा है... तो एजेंसी ने कुछ सुपरमॉडल भेजे हैं।
और वो सोच रहे थे कि मैं भी उनमें से हूँ!"
अलोक ने हल्के से मुंह बनाया—एक मासूम, लेकिन जानबूझकर वाली मुस्कान।
"रियली... तुम सच में एक लगती हो।"
उसकी आवाज़ में कोई शरारत नहीं थी—बस एक ईमानदार गलती की तरह।
लेकिन मैं जानता था—वो जानबूझकर कह रहा था।
वो जानता था कि नेहा क्या समझेगी।
और नेहा ने ठीक वैसा ही समझा।
वो हँसी—खुशी से, बिना किसी शक के।
"ओह्ह... आप तो बड़े फ्लर्ट रहे होंगे जवानी में!"
उसने फिर से अलोक के हाथ पर हल्का सा थप्पड़ मारा।
उसका हाथ अलोक के हाथ से छू गया—बस एक सेकंड के लिए।
लेकिन मेरे लुंड ने तुरंत रिएक्ट किया।
एक झटका लगा—जैसे बिजली का करंट।
मेरा लुंड पैंट के अंदर फड़क उठा।
हम दोनों अब पूरी तरह से अजनबी की तरह बिहेव कर रहे थे—जैसे कल रात कभी हुआ ही न हो।
मैंने हॉल में नज़रें घुमाईं—विशाल, डेविड, सैंडी... कोई नहीं था।
बस अलोक अकेला बैठा था—कॉफी का कप हाथ में, वही मुस्कान।
नेहा ने मुझे कोहनी से हल्का सा धक्का दिया।
"सैम... थोड़ा शिफ्ट हो जाइए ना... मुझे कुछ और लेना है बफे से।"
उसकी आवाज़ में वही प्यार था—नरम, लेकिन थोड़ी जल्दी वाली।
मैंने हल्के से सिर हिलाया।
उठा—उसके लिए जगह बनाई।
मैंने नेहा को देखा—वो अब बफे काउंटर की तरफ जा रही थी।
उसकी चाल... धीमी, लेकिन ग्रेसफुल।
उसकी गांड हल्के से हिल रही थी—शॉर्ट के नीचे से उसकी जांघें चमक रही थीं
अलोक देखता रहा... और मेरे लुंड में फिर से वो हल्का सा फड़क उठा।
अलोक ने मेरी तरफ देखा।
उसकी मुस्कान अब पहले से ज़्यादा गहरी थी।
वो धीरे से बोला—आवाज़ में अब वो पुरानी वाली दोस्ताना टोन नहीं थी।
अब उसमें एक तरह की अथॉरिटी थी—जैसे वो मालिक हो, और मैं उसका छोटा-सा साथी।
"तो बॉय... थोड़ी नींद आई?"
मैंने सिर हिलाया।
"येस... थोड़ी।"
उसकी आवाज़ में अब वो "बॉय" शब्द था—जो कल रात से ही चल रहा था।
कल रात तो मैंने इसे इग्नोर कर दिया था... लेकिन अब... अब ये शब्द मेरे सीने में चुभ रहा था।
अलोक ने कॉफी का कप टेबल पर रखा।
उसकी मुस्कान अब और गहरी हो गई थी—वो वाली मुस्कान जो कल रात सैंडी को देखते हुए थी।
वो धीरे से बोला, आवाज़ में एक थकी लेकिन संतुष्ट टोन।
"हम तो एक पल भी नहीं सोए... पूरी रात खेलते रहे।"
उसने आँख मारी—एक छोटी, शरारती विंक।
मैंने हल्के से सिर हिलाया।
"सब कहाँ हैं?"
मेरा सवाल सीधा था।
लेकिन असल में... मैं सिर्फ़ एक ही चेहरे को ढूँढ रहा था।
सैंडी।
उसकी ड्रेस... उसकी चाल... उसकी वो हँसी... उसकी वो बॉडी जो कल रात कम से चमक रही थी।
डेविड और विशाल?
उनको देखने की कोई ख्वाहिश नहीं थी।
उनको देखकर क्या फायदा?
अलोक ने कॉफी का आखिरी घूँट लिया और धीरे से बोला—आवाज़ में थकी लेकिन संतुष्ट वाली टोन।
"वो तीनों सो रहे हैं... नाप ले रहे हैं... एक लगभग गीली, गंदी बेड पर।"
मैंने एक पल के लिए रुक गया।
गंदी बेड?
कल रात... जब मैं गया था... तो वेटर ने नई चादरें बिछाई थीं।
फ्रेश, सफेद, क्रिस्प।
फिर कैसे गंदी हो गई?
कैसे गीली हो गई?
फिर सब साफ़ हो गया।
मैंने कल्पना की—सैंडी... वो परफेक्ट बॉडी वाली मॉडल... टीवी पर "हमारा नया घर" वाली ब्राइड... वो अब एक गंदी, गीली चादर पर लेटी हुई है।
उसके दोनों तरफ दो पुराने, गंदे आदमी—शायद डेविड और विशाल।
उनका पसीना, उनका कम, उनकी साँसें... सब उसकी स्किन पर चिपका हुआ।
उसकी जांघें उनके जांघों से सटी हुईं।
उसके स्तन उनके सीने से दबे हुए।
उसकी कमर पर उनका हाथ—भारी, गंदा, मालिक वाला।
अलोक ने कॉफी का आखिरी घूँट लिया और धीरे से कप टेबल पर रखा।
उसकी आँखें अभी भी नेहा की तरफ थीं—वो बफे काउंटर पर थी, फ्रूट्स ले रही थी, उसकी चाल में वही ग्रेस, पायल की हल्की आवाज़।
अलोक ने मेरी तरफ देखा, मुस्कान अब और गहरी हो गई।
"मैं भी सोना चाहता हूँ... एक और रूम बुक कर रखा है होटल में... लेकिन पता है ना... तुमने वादा किया था।
तो मैंने सोचा... कॉफी पी लूँ... और थोड़ा तुम्हें देख लूँ।"
वो रुका, फिर धीरे से बोला—आवाज़ में एक थकी लेकिन संतुष्ट टोन।
"लेकिन वर्थ था... बहुत वर्थ था।"
फिर उसने मेरी आँखों में देखा—सीधे, बिना झिझक।
"बॉय... वो परफेक्ट है।
उसका फिगर... उम्र... बात करने का तरीका... चलने का अंदाज़... सब कुछ परफेक्ट।
काश... वो भी खरीदी जा सकती।"
उसने हल्के से हँसा—एक गहरी, कड़वी हँसी।
मैंने तुरंत चारों तरफ देखा—नेहा काउंटर पर थी, अभी भी दूर।
वो नहीं सुन रही थी।
मेरा दिल धड़क रहा था।
गुस्सा... शर्म... जलन... सब एक साथ।
मैं उसकी "रक्षक" हूँ—उसकी बीवी का।
और ये आदमी... ये 60 साल का "अंकल"... मेरे सामने बैठा मेरी बीवी को "खरीदा जा सकता" कह रहा है।
अलोक की आवाज़ अब पहले से अलग थी।
कल रात तक वो "बॉय" कहकर भी बात करता था—दोस्ताना, थोड़ा मज़ाकिया, लेकिन सम्मान के साथ।
लेकिन अब... अब उसकी आवाज़ में एक कड़वाहट थी।
एक हल्की सी तीखी धार।
वो कॉफी का कप टेबल पर रखकर मेरी तरफ झुका—आँखों में थोड़ा सा लालपन, थकान, और शायद... थोड़ी सी जलन।
"इस तरह की औरतें रेयर ब्रीड होती हैं, बॉय...
शादी के लिए नहीं बनी होतीं।
तुम उनकी कैलिबर को वेस्ट कर रहे हो... मज़े के लिए।
और वो भी... तुम्हारे एवरेज टूल से।"
पहली बार।
पहली बार उसने मुझे डाउन किया।
कल रात तक वो मुझे "लकी" कह रहा था।
कल रात तक वो नेहा को "परफेक्ट" कह रहा था।
लेकिन अब... "एवरेज टूल"।
ये शब्द सीधे मेरे लुंड पर चोट कर गया।
मैंने कल रात महसूस किया था—मेरा लुंड छोटा था, साइज़ एवरेज था, लेकिन परफॉर्मेंस... वो मेरी थी।
और अब... ये आदमी... ये 60 साल का "अंकल"... मुझे "एवरेज" कह रहा था।
मैं चुप रहा।
मेरा चेहरा सख्त हो गया।
मेरा लुंड... अभी भी हार्ड था।
नेहा मेरी बाहों में थी—नंगी, गर्म, मेरी छाती से चिपकी हुई।
उसकी साँसें मेरी स्किन पर धीरे-धीरे पड़ रही थीं।
मैं पूरी तरह थक चुका था—शराब का नशा, रात भर की मेहनत, वो सब कुछ मिलकर बॉडी को भारी बना चुका था।
आँखें बंद हुईं और मैं सो गया... गहरी, बिना किसी सपने वाली नींद में।
अगली बात जो मुझे याद आई—पर्दे की सरसराहट।
सुबह की धूप कमरे में आ रही थी।
नेहा की आवाज़ आई—नरम, प्यार भरी, लेकिन थोड़ी जल्दी वाली।
"वेक अप बेबी..."
मैंने आँखें खोलीं।
"कॉफी तैयार है। और आज चेकआउट भी है... 1 बजे तक।"
मैंने फोन उठाया—9 बज रहे थे।
सिर्फ़ 3 घंटे की नींद मिली थी... वो भी टूटी-फूटी।
नेहा पर्दे के पास खड़ी थी।
लंबी टी-शर्ट पहने हुए—बस ऊपरी जांघों तक आ रही थी।
नीचे से कुछ नहीं दिख रहा था।
ब्रालेस थी—टी-शर्ट के नीचे उसके स्तन साफ़ उभरे हुए थे, निप्पल्स हल्के से प्रिंट हो रहे थे कपड़े पर।
पैंटी है या नहीं... पता नहीं था।
शायद नहीं।
पहला विचार जो दिमाग में आया—कॉफी यहाँ है।
कप टेबल पर रखा था—धुआँ अभी भी उठ रहा था, गर्म लग रही थी।
कौन लाया ये कॉफी?
मैंने धीरे से पूछा—आवाज़ भारी, नींद से कर्कश।
"ये कॉफी... किसने लाई?"
नेहा मुड़ी, मुस्कुराई—वो प्यारी, शांत मुस्कान।
"रूम सर्विस वाला आया था, सैम।
आप सो रहे थे तो मैंने ही ले लिया।"
मेरा दिल एक पल के लिए धड़क गया।
"तुम... इन कपड़ों में?"
नेहा ने हल्के से कंधे उचकाए, जैसे कोई बड़ी बात नहीं।
"हाँ... लंबी टी-शर्ट है ना... सब ठीक था।
वो भी तो स्टाफ है... रोज़ ऐसे ही देखते होंगे।"
वो मेरे पास आई—बेड पर बैठ गई।
उसकी जांघ मेरी जांघ से छू गई—गर्म, नरम।
उसने कॉफी का कप मेरे हाथ में थमाया।
नेहा ने मेरे हाथ में पजामा थमाया—वो लाइट ग्रे वाला, जो मैंने कल पहना था।
"बेबी फास्ट... कॉफी खत्म करो... बफे ब्रेकफास्ट तैयार है।"
उसकी आवाज़ में वही प्यार था—नरम, लेकिन थोड़ी जल्दी वाली।
मैंने पजामा लिया, लेकिन अभी भी बिस्तर पर ही लेटा रहा।
कॉफी का कप हाथ में था—गर्माहट अब भी महसूस हो रही थी।
ब्रेकफास्ट इंक्लूडेड था—और हम मिडिल क्लास वाले कभी नहीं छोड़ते ऐसे ब्रेकफास्ट को।
ये वो छोटी-छोटी खुशियाँ हैं जो ट्रिप को यादगार बनाती हैं—फ्री बफे, ढेर सारे ऑप्शन्स, और वो फीलिंग कि "सब कुछ मिल रहा है बिना एक्स्ट्रा पैसे के"।
मैं कॉफी की चुस्कियाँ ले रहा था—धीरे-धीरे।
कड़वी गर्माहट गले से नीचे उतर रही थी, लेकिन दिमाग अभी भी रात में अटका हुआ था।
फिर अचानक याद आया—कल रात का वो वादा।
अलोक से किया हुआ।
"कल सुबह नेहा से मिलवाओ।"
नेहा ने पजामा निकालकर रख दिया था, लेकिन फिर वो लंबा वाला पजामा पहनने लगी।
उसकी भूख साफ़ झलक रही थी—कल रात हमने ठीक से कुछ खाया ही नहीं था।
बस बीयर और कुछ स्टार्टर्स—भूख लगी होगी उसको भी।
मैंने उसे देखा।
धीरे से कहा,
"ये लंबा पजामा मत पहनो... कुछ छोटा पहनो।"
नेहा ने मेरी तरफ देखा—एक पल के लिए।
कोई सवाल नहीं किया।
बस मुस्कुराई, अलमारी खोली और एक छोटा सा शॉर्ट निकाल लिया।
पहन लिया—वो टाइट वाला, ऊपर से जांघों के बीच तक।
फिर टी-शर्ट उतारी—ब्रालेस थी।
उसने ब्रा की तरफ हाथ बढ़ाया।
मैंने फिर कहा,
"ब्रा मत पहनो... तुम ऐसे ही परफेक्ट लग रही हो।"
नेहा ने हल्के से मुंह बनाया।
फिर टी-शर्ट के नीचे से अपने निप्पल्स की तरफ इशारा किया—कपड़े पर साफ़ उभरे हुए थे।
जैसे कह रही हो—"फिर ये तो दिख रहे हैं।"
मैंने मुस्कुराकर कहा,
"बाल आगे कर लो... कोई नोटिस नहीं करेगा।"
नेहा ने हँसी—वो प्यारी, शरमाती हुई हँसी।
फिर बाल आगे कर लिए—कंधों पर लटका दिए।
अब निप्पल्स थोड़े छुप गए थे।
वो मेरी तरफ देखकर बोली,
"आप जो कहें... सैम।"
मैंने नेहा को देखा।
वो अभी भी टी-शर्ट और शॉर्ट में खड़ी थी—बाल आगे लटके हुए, निप्पल्स कपड़े पर हल्के से उभरे हुए, लेकिन छुपे हुए।
उसने कोई सवाल नहीं किया।
न "क्यों ब्रा नहीं पहनूँ?" पूछा।
न "क्यों आप चाहते हैं कि मैं ऐसे दिखूँ?"
बस मुस्कुराई और जो मैंने कहा, वही कर दिया।
बाल आगे कर लिए।
शॉर्ट पहन लिया।
ब्रा नहीं पहनी।
मैं अंदर से काँप रहा था।
मुझे पता नहीं था कि अगर वो पूछती—"सैम... आज क्या हुआ है आपको?
क्यों चाहते हैं कि आपकी बीवी थोड़ी डिस्प्ले में रहे?"
तो मैं क्या जवाब देता।
क्योंकि सच तो ये था कि मेरे दिमाग में सिर्फ़ एक ही चेहरा था—अलोक।
वो ब्रेकफास्ट हॉल में होगा।
उसके साथ शायद विशाल और डेविड भी।
शायद सैंडी भी—अपने हॉट कपड़ों में, वो वाली टाइट ड्रेस में जो उसकी बॉडी को और हाइलाइट करती है।
मैं चाहता था कि वो सब देखें।
देखें कि मेरे पास क्या है।
सैंडी से बेहतर।
जो सिर्फ़ मेरी है।
मैं चाहता था कि अलोक की आँखें नेहा पर टिकें।
उसकी वो मुस्कान... वो जलन... वो भूख...
मैं चाहता था कि वो समझे—तुमने मुझे सैंडी दी थी, लेकिन मेरे पास पहले से ही कुछ ऐसा है जो तुम कभी नहीं पा सकते।
मैं चाहता था कि विशाल और डेविड भी देखें—तुम्हारा बॉस ने मुझे कोई एहसान नहीं किया सैंडी देकर।
मेरे पास अपनी रंडी है... अपनी कुतिया... और वो सैंडी से कहीं बेहतर है।
और सैंडी... वो भी वहाँ होगी।
अपने सेक्सी कपड़ों में, सबकी नज़रें खींचती हुई।
मैं नहीं चाहता था कि सारी अटेंशन उसी पर जाए।
मैं चाहता था कि नेहा को भी उसका हिस्सा मिले।
मर्दों की नज़रें उस पर भी टिकें।
उसकी टी-शर्ट के नीचे उभरे हुए निप्पल्स को देखें।
उसकी जांघों को देखें।
उसकी पायल को सुनें।
और जलें।
हम कमरे से बाहर निकले।
नेहा मेरे बगल में चल रही थी—टी-शर्ट में, शॉर्ट में, बाल आगे लटके हुए।
उसकी पायल हर कदम पर हल्की सी बज रही थी।
मैंने उसका हाथ पकड़ा—थोड़ा सख्ती से, जैसे कह रहा हूँ "तुम मेरे साथ हो"।
जैसे ही हम कॉरिडोर में निकले, असर दिखना शुरू हो गया।
एक कपल चेक-इन कर रहा था—शायद नए आए होंगे।
लड़के की नज़र नेहा पर पड़ी।
वो एक सेकंड के लिए भूल गया कि मुँह बंद करना है।
उसकी आँखें फैल गईं—नेहा की टी-शर्ट के नीचे उभरे हुए निप्पल्स, शॉर्ट से निकलती जांघें, उसकी चाल... सब कुछ।
उसकी बीवी ने उसे कोहनी मारी, लेकिन वो अभी भी देख रहा था।
मैंने मुस्कुराया—अंदर से एक अजीब सा गर्व और जलन दोनों महसूस हो रहा था।
नेहा 25-26 की लग रही थी—फ्रेश, जवान, परफेक्ट।
और मैं... 35-36 का।
ये एज गैप लोगों को हमेशा अट्रैक्ट करता है—खासकर मर्दों को।
लॉबी में और कुछ लोग थे।
कुछ मर्दों की नज़रें नेहा पर टिक गईं।
एक ने तो सीधे उसके स्तनों की तरफ देखा—फिर जल्दी से नज़र हटाई।
नेहा ने खुद को चेक किया—बार-बार अपनी टी-शर्ट की तरफ देखा, जैसे देख रही हो कि निप्पल्स तो नहीं दिख रहे।
उसने बाल और आगे कर लिए—लेकिन वो उभार अभी भी थोड़ा सा दिख रहा था।
हम लिफ्ट में गए।
लिफ्ट खुली।
हम ब्रेकफास्ट हॉल की तरफ बढ़े।
मैं और नेहा ब्रेकफास्ट हॉल में एंट्री लेते ही वो नया वेटर हमें देखकर रुक गया।
ट्रे हाथ में थी, लेकिन उसकी आँखें हमें स्कैन कर रही थीं—खासकर नेहा को।
उसने धीरे से बगल वाले दूसरे वेटर के कान में कुछ फुसफुसाया।
दोनों ने एक साथ हमें देखा, फिर एक-दूसरे की तरफ मुड़कर मुस्कुराए—वो मुस्कान... वो रहस्य वाली मुस्कान, जो कह रही थी "ये वही है"।
मेरा दिल एक बार फिर धड़क गया।
कल रात वाला वेटर नहीं था ये, लेकिन उसकी बात याद आ गई—
"हम पाँच थे... सब स्टाफ... उसकी पैंटी के साथ खेला..."
क्या ये लोग भी उनमें से हैं?
क्या ये वही पाँच में से कोई हैं?
क्या कल रात के बाद ये लोग नेहा की पैंटी के बारे में बात कर रहे हैं?
या... शायद आज सुबह नेहा को टी-शर्ट में देखकर फिर से वही "खेल" याद आ रहा है?
मेरा लुंड... जो कल रात ने इतना परफॉर्म किया था—शेप और साइज़ के बावजूद—अब फिर से हल्का सा फड़क उठा।
शर्मिंदगी थी, जलन थी, लेकिन साथ ही एक अजीब सा गर्व भी।
शेप छोटा था, साइज़ एवरेज था, लेकिन परफॉर्मेंस... वो मेरी थी।
मैं और नेहा बफे काउंटर की तरफ बढ़े।
मेरी आँखें अब हर तरफ घूम रही थीं—अलोक को ढूँढ रही थीं, विशाल और डेविड को, सबसे ज़्यादा सैंडी को।
मैं चाहता था कि वो दिखे—उसकी ड्रेस, उसकी चाल, वो हॉट लुक जो कल रात था।
मैं चाहता था कि नेहा की तरफ देखकर वो सब जलें—कि मेरे पास जो है, वो सैंडी से बेहतर है।
लेकिन... कोई नहीं दिखा।
न अलोक की टेबल पर वो मुस्कान।
न विशाल-डेविड की हँसी।
न सैंडी की वो सेक्सी ड्रेस।
हॉल में बस नॉर्मल फैमिलीज़, कपल्स, कुछ टूरिस्ट्स।
मैंने ट्रे उठाई।
नेहा मेरे साथ थी—उसकी पायल हर कदम पर बज रही थी।
हम काउंटर पर गए।
पहले कॉफी—दो कप।
फिर पास्ता—थोड़ा सा, रेड सॉस वाला।
फिर पोहा—हल्का मसालेदार।
मिसल पाव—थोड़ा सा, चटनी के साथ।
फिर डोसा—प्लेन, सांभर और चटनी के साथ।
हम दोनों ने छोटे-छोटे पोर्शन लिए—जैसे बच्चे हों, सब कुछ ट्राई करना हो।
हम ब्रेकफास्ट हॉल में एक टेबल पर बैठ गए—विंडो वाली, बाहर का व्यू दिख रहा था।
नेहा ने ट्रे रखी, मेरे सामने बैठ गई।
उसकी टी-शर्ट अभी भी थोड़ी टाइट थी—बाल आगे लटके हुए थे, लेकिन जब वो झुकी तो निप्पल्स का उभार और साफ़ हो गया।
वो खुद को चेक करती रही—हाथ से टी-शर्ट को हल्का सा खींचती, जैसे डर रही हो कि कहीं ज़्यादा न दिख जाए।
मैंने प्लेट में से पोहा उठाया, लेकिन खाने का मन नहीं था।
मेरा चेहरा थोड़ा उदास हो गया था—आपने देख लिया होगा।
दिमाग दो हिस्सों में बँटा हुआ था, जैसे कोई युद्ध चल रहा हो।
एक हिस्सा डर रहा था।
बहुत डर रहा था।
क्या होगा अगर सैंडी यहाँ आ गई?
अगर वो दौड़कर मेरे पास आई और गले लग गई?
"सैम... लास्ट नाइट अमेजिंग था... क्यों चले गए? मैं चाहती थी कि तुम्हारा लुंड मेरी चूत में हो..."
या फिर वो सबके सामने खुलकर कह दे—"कल रात के बाद हमने कितना मज़ा किया... तुम्हारे जाने के बाद..."
मेरा दिल धड़क रहा था।
मैंने नेहा की तरफ देखा—वो पोहा खा रही थी, मुस्कुरा रही थी।
वो कुछ नहीं जानती थी।
दूसरा हिस्सा... वो ठंडा, लॉजिकल हिस्सा... कह रहा था—
"ये प्रोफेशनल हैं।
अलोक जानता है कैसे बिहेव करना है।
सैंडी जानती है लिमिट्स।
वो कभी ऐसा नहीं करेंगे।
वो सबके सामने एक्ट करेंगे जैसे मुझे पहली बार देख रहे हैं।
कोई स्कैंडल नहीं... कोई ड्रामा नहीं।
बस... हाय-हैलो... और बस।"
नेहा ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा,
"बेबी... चटनी ला देंगे ना?
दोसे के साथ भूल गई थी।"
मैंने हल्के से मुस्कुराया।
"जी... अभी लाता हूँ।"
उठा, ट्रे पर प्लेट रखी, और काउंटर की तरफ बढ़ा।
दोसे वाले काउंटर पर हमेशा लाइन लगी रहती है—आज भी वैसा ही था।
5 मिनट लग गए—लाइन धीमी थी, लोग ज्यादा थे।
मैंने पीछे मुड़कर अपनी टेबल की तरफ देखा।
नेहा अब अकेली नहीं थी।
उसके सामने अलोक बैठा था।
वो हँस रही थी—हल्के से, लेकिन सच्ची हँसी।
अलोक कुछ जोक सुना रहा था—उसकी मुस्कान वैसी ही थी, वही कंट्रोल्ड, वही जानकार वाली।
नेहा ने बाल कंधे पर डाले हुए थे, लेकिन जब हँसी तो टी-शर्ट थोड़ी सी सरकी—निप्पल्स का उभार और साफ़ हो गया।
अलोक की नज़र वहाँ गई—एक सेकंड के लिए।
फिर वो फिर से हँसा—जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मेरा दिल एक बार फिर धड़क गया।
लाइन में खड़े-खड़े भी मेरी आँखें उन पर टिकी रही।
वो हँस रही थी।
उसकी पूरी बॉडी हिल रही थी—कंधे, कमर, स्तन—सब कुछ।
टी-शर्ट के नीचे उसके छोटे लेकिन परफेक्ट शेप के स्तन हिल रहे थे, ब्रा नहीं होने की वजह से वो हर हँसी के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे।
जब वो हँसती, तो वो उछलते—एक बार ऊपर, एक बार नीचे।
अलोक की आँखें वहाँ टिकी हुई थीं—एक सेकंड के लिए
लेकिन मैं जानता था—वो देख रहा था।
उसकी वो नज़र... वो वाली नज़र जो "माल" को नापती है।
अलोक... वो बस मुस्कुरा रहा था।
वो वाला आदमी जो हर औरत को "माल" समझता है।
जो मानता है कि औरतें खेलने के लिए हैं—कुतिया की तरह।
जो कल रात सैंडी को रंडी की तरह इस्तेमाल कर रहा था।
और अब... मेरी नेहा उसके सामने हँस रही थी।
मेरा दिमाग
एक तरफ वो आवाज़ थी जो मुझे हमेशा से जानती थी — वो आवाज़ जो कह रही थी:
“सैम, ये गलत है।
तुम अलोक जैसे आदमी को अपनी औरत के सामने नहीं लाते।
तुम उसे बचाते हो।
तुम्हारा काम है नेहा को उन नज़रों से दूर रखना जो उसे ‘माल’ समझती हैं।
तुमने खुद देखा है कि अलोक क्या सोचता है औरतों के बारे में।
वो सैंडी को भी सिर्फ़ एक खिलौना समझता है।
अगर तुम नेहा को उसके सामने ले गए तो तुम खुद उसे ख़तरे में डाल रहे हो।
तुम उसकी रक्षा करने वाले हो, न कि उसका शोकेस।”
लेकिन मेरी नज़रें बार-बार अलोक की टेबल की तरफ जा रही थीं।
मैं खुद से पूछ रहा था — “सैम, तुझे क्या हो रहा है?”
कल रात जब अलोक सैंडी को रफ तरीके से चोद रहा था, मेरे दिमाग में बार-बार नेहा आ रही थी।
उसके बाल खींचे हुए, उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए, उसकी चूत में जोर-जोर से धकेलते हुए।
नेहा की आहें... “आह्ह... और जोर से...”
उसके छोटे-छोटे स्तन हिल रहे हैं, निप्पल्स सख्त, चेहरा पसीने से तर, आँखें आधी बंद।
ये कल्पना मुझे इतना थ्रिल दे रही थी कि मेरा लुंड फिर से हार्ड हो गया था।
वो पुराना वाला थ्रिल.... वो फिर से जाग उठा था।
मैं नहीं समझ पा रहा था कि ये क्यों हो रहा है।
मैं चटनी लेकर जल्दी-जल्दी टेबल की तरफ बढ़ा।
दिमाग में अभी भी वो सवाल घूम रहा था—अलोक वहाँ क्यों बैठा है?
क्यों नेहा उसके साथ हँस रही है?
क्यों वो इतनी सहज लग रही है?
जैसे ही मैं पास पहुँचा, आवाज़ें और साफ़ सुनाई दीं।
"ओह्ह... स्टॉप इट..."
नेहा की आवाज़ थी—हँसी मिक्स कराह वाली।
उसने अलोक के हाथ को टेबल पर हल्का सा थप्पड़ मारा।
लेकिन उसकी आँखें चमक रही थीं।
वो खुश थी।
बहुत खुश।
अलोक मुस्कुरा रहा था—वो वाली मुस्कान, जो कल रात सैंडी को देखते हुए था।
60 साल का आदमी... लेकिन उसकी आँखों में वही भूख।
वही क्रूर चमक।
नेहा को वो "हानलेस" लग रहा था शायद... उम्र की वजह से।
लेकिन मैं जानता था—वो हानलेस नहीं है।
वो ख़तरनाक है।
मैं टेबल पर पहुँचा।
ट्रे हाथ में थी।
नेहा ने मुझे देखा।
"बेबी... ये..."
वो नाम याद करने की कोशिश कर रही थी।
अलोक ने बीच में ही बात काट दी।
"मैंने अभी तक अपना नाम नहीं बताया था।"
टेबल 4-सीटर सोफा वाली थी—दो इस तरफ, दो उस तरफ, आमने-सामने।
मेज बीच में।
मैंने नेहा की तरफ देखा।
उसे इशारा किया कि थोड़ा सा शिफ्ट हो जाए ताकि मैं उसके बगल में बैठ सकूँ।
नेहा ने तुरंत अपनी गांड थोड़ी साइड की।
मैं बैठ गया।
लेकिन जैसे ही मैं बैठा... मेरी गांड नेहा की लंबी टी-शर्ट पर
टी-शर्ट पीछे खिंच गई।
कपड़ा तान गया।
उसके स्तन अब और साफ़ उभर आए—टी-शर्ट के पतले कपड़े पर निप्पल्स पूरी तरह दिखाई दे रहे थे।
गोल, सख्त, हल्के से उभरे हुए।
अलोक की नज़रें वहाँ टिक गईं—एक सेकंड के लिए।
फिर वो फिर से मुस्कुराया—जैसे कुछ हुआ ही न हो।
नेहा ने खुद को थोड़ा एडजस्ट किया।
शर्म से टी-शर्ट को आगे खींच लिया—कपड़ा अब थोड़ा ढीला हो गया, निप्पल्स का उभार कम दिखने लगा।
वो बालों को और आगे कर रही थी, जैसे और छुपाना चाहती हो।
मैंने ट्रे टेबल पर रखी।
चटनी नेहा के सामने सरकाई।
फिर बैठ गया—उसके बगल में।
मैंने अलोक की तरफ देखा।
धीरे से मुस्कुराकर कहा,
"बाय द वे... मैं सैम।"
अलोक ने कॉफी का घूँट लिया।
फिर हाथ बढ़ाया—फर्म, लेकिन दोस्ताना।
"अलोक।"
नेहा ने हल्के से हँसकर कहा,
"नेहा।"
अलोक ने हमें दोनों को देखा—एक गहरी, संतुष्ट मुस्कान के साथ।
"बहुत क्यूट कपल हो तुम दोनों।
मैं अभी नेहा से कह रहा था... कल रिसेप्शन पर मुझे लगा था कि वो एजेंसी से हैं।"
मैंने तुरंत स्नैप किया—आवाज़ में थोड़ा तेज़ी आ गई।
"एजेंसी?"
नेहा ने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखें अभी भी हँसी से चमक रही थीं।
वो थोड़ा आगे झुकी, आवाज़ में वही मासूमियत।
"बेबी... मैंने आपको बताया था ना कल... एक अंकल आए थे, पूछ रहे थे कि क्या मैं एजेंसी से हूँ।
याद है?"
नहीं।
उसने मुझे बताया ही नहीं था।
शायद इसलिए कि उसके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी।
मैंने धीरे से कहा—आवाज़ में थोड़ी सी हल्की सी काँप।
"नहीं... तुमने बताया नहीं था।"
नेहा की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं।
"अरे... सच में?
मुझे लगा था मैंने आपको बता दिया था।
अलोक मुस्कुरा रहा था।
उसकी वो मुस्कान—वही पुरानी वाली, जो कल रात सैंडी को देखते हुए थी।
लेकिन अब वो मुस्कान मेरी तरफ थी।
और उसमें एक अलग सा मज़ा था।
जैसे वो सोच रहा हो—“देख... तेरी बीवी कितनी मासूम है।
उसे पता ही नहीं कि 'एजेंसी' से हम क्या मतलब ले रहे हैं।
वो खुश है... हँस रही है... और सोच रही है कि ये बस एक मज़ाक था।”
उसने मेरी तरफ देखा और बोली,
"बेबी... अलोक सर कह रहे थे कि वो पास में ही एक नया होटल लॉन्च कर रहे हैं।
और उसके लिए कमर्शियल शूट हो रहा है... तो एजेंसी ने कुछ सुपरमॉडल भेजे हैं।
और वो सोच रहे थे कि मैं भी उनमें से हूँ!"
अलोक ने हल्के से मुंह बनाया—एक मासूम, लेकिन जानबूझकर वाली मुस्कान।
"रियली... तुम सच में एक लगती हो।"
उसकी आवाज़ में कोई शरारत नहीं थी—बस एक ईमानदार गलती की तरह।
लेकिन मैं जानता था—वो जानबूझकर कह रहा था।
वो जानता था कि नेहा क्या समझेगी।
और नेहा ने ठीक वैसा ही समझा।
वो हँसी—खुशी से, बिना किसी शक के।
"ओह्ह... आप तो बड़े फ्लर्ट रहे होंगे जवानी में!"
उसने फिर से अलोक के हाथ पर हल्का सा थप्पड़ मारा।
उसका हाथ अलोक के हाथ से छू गया—बस एक सेकंड के लिए।
लेकिन मेरे लुंड ने तुरंत रिएक्ट किया।
एक झटका लगा—जैसे बिजली का करंट।
मेरा लुंड पैंट के अंदर फड़क उठा।
हम दोनों अब पूरी तरह से अजनबी की तरह बिहेव कर रहे थे—जैसे कल रात कभी हुआ ही न हो।
मैंने हॉल में नज़रें घुमाईं—विशाल, डेविड, सैंडी... कोई नहीं था।
बस अलोक अकेला बैठा था—कॉफी का कप हाथ में, वही मुस्कान।
नेहा ने मुझे कोहनी से हल्का सा धक्का दिया।
"सैम... थोड़ा शिफ्ट हो जाइए ना... मुझे कुछ और लेना है बफे से।"
उसकी आवाज़ में वही प्यार था—नरम, लेकिन थोड़ी जल्दी वाली।
मैंने हल्के से सिर हिलाया।
उठा—उसके लिए जगह बनाई।
मैंने नेहा को देखा—वो अब बफे काउंटर की तरफ जा रही थी।
उसकी चाल... धीमी, लेकिन ग्रेसफुल।
उसकी गांड हल्के से हिल रही थी—शॉर्ट के नीचे से उसकी जांघें चमक रही थीं
अलोक देखता रहा... और मेरे लुंड में फिर से वो हल्का सा फड़क उठा।
अलोक ने मेरी तरफ देखा।
उसकी मुस्कान अब पहले से ज़्यादा गहरी थी।
वो धीरे से बोला—आवाज़ में अब वो पुरानी वाली दोस्ताना टोन नहीं थी।
अब उसमें एक तरह की अथॉरिटी थी—जैसे वो मालिक हो, और मैं उसका छोटा-सा साथी।
"तो बॉय... थोड़ी नींद आई?"
मैंने सिर हिलाया।
"येस... थोड़ी।"
उसकी आवाज़ में अब वो "बॉय" शब्द था—जो कल रात से ही चल रहा था।
कल रात तो मैंने इसे इग्नोर कर दिया था... लेकिन अब... अब ये शब्द मेरे सीने में चुभ रहा था।
अलोक ने कॉफी का कप टेबल पर रखा।
उसकी मुस्कान अब और गहरी हो गई थी—वो वाली मुस्कान जो कल रात सैंडी को देखते हुए थी।
वो धीरे से बोला, आवाज़ में एक थकी लेकिन संतुष्ट टोन।
"हम तो एक पल भी नहीं सोए... पूरी रात खेलते रहे।"
उसने आँख मारी—एक छोटी, शरारती विंक।
मैंने हल्के से सिर हिलाया।
"सब कहाँ हैं?"
मेरा सवाल सीधा था।
लेकिन असल में... मैं सिर्फ़ एक ही चेहरे को ढूँढ रहा था।
सैंडी।
उसकी ड्रेस... उसकी चाल... उसकी वो हँसी... उसकी वो बॉडी जो कल रात कम से चमक रही थी।
डेविड और विशाल?
उनको देखने की कोई ख्वाहिश नहीं थी।
उनको देखकर क्या फायदा?
अलोक ने कॉफी का आखिरी घूँट लिया और धीरे से बोला—आवाज़ में थकी लेकिन संतुष्ट वाली टोन।
"वो तीनों सो रहे हैं... नाप ले रहे हैं... एक लगभग गीली, गंदी बेड पर।"
मैंने एक पल के लिए रुक गया।
गंदी बेड?
कल रात... जब मैं गया था... तो वेटर ने नई चादरें बिछाई थीं।
फ्रेश, सफेद, क्रिस्प।
फिर कैसे गंदी हो गई?
कैसे गीली हो गई?
फिर सब साफ़ हो गया।
मैंने कल्पना की—सैंडी... वो परफेक्ट बॉडी वाली मॉडल... टीवी पर "हमारा नया घर" वाली ब्राइड... वो अब एक गंदी, गीली चादर पर लेटी हुई है।
उसके दोनों तरफ दो पुराने, गंदे आदमी—शायद डेविड और विशाल।
उनका पसीना, उनका कम, उनकी साँसें... सब उसकी स्किन पर चिपका हुआ।
उसकी जांघें उनके जांघों से सटी हुईं।
उसके स्तन उनके सीने से दबे हुए।
उसकी कमर पर उनका हाथ—भारी, गंदा, मालिक वाला।
अलोक ने कॉफी का आखिरी घूँट लिया और धीरे से कप टेबल पर रखा।
उसकी आँखें अभी भी नेहा की तरफ थीं—वो बफे काउंटर पर थी, फ्रूट्स ले रही थी, उसकी चाल में वही ग्रेस, पायल की हल्की आवाज़।
अलोक ने मेरी तरफ देखा, मुस्कान अब और गहरी हो गई।
"मैं भी सोना चाहता हूँ... एक और रूम बुक कर रखा है होटल में... लेकिन पता है ना... तुमने वादा किया था।
तो मैंने सोचा... कॉफी पी लूँ... और थोड़ा तुम्हें देख लूँ।"
वो रुका, फिर धीरे से बोला—आवाज़ में एक थकी लेकिन संतुष्ट टोन।
"लेकिन वर्थ था... बहुत वर्थ था।"
फिर उसने मेरी आँखों में देखा—सीधे, बिना झिझक।
"बॉय... वो परफेक्ट है।
उसका फिगर... उम्र... बात करने का तरीका... चलने का अंदाज़... सब कुछ परफेक्ट।
काश... वो भी खरीदी जा सकती।"
उसने हल्के से हँसा—एक गहरी, कड़वी हँसी।
मैंने तुरंत चारों तरफ देखा—नेहा काउंटर पर थी, अभी भी दूर।
वो नहीं सुन रही थी।
मेरा दिल धड़क रहा था।
गुस्सा... शर्म... जलन... सब एक साथ।
मैं उसकी "रक्षक" हूँ—उसकी बीवी का।
और ये आदमी... ये 60 साल का "अंकल"... मेरे सामने बैठा मेरी बीवी को "खरीदा जा सकता" कह रहा है।
अलोक की आवाज़ अब पहले से अलग थी।
कल रात तक वो "बॉय" कहकर भी बात करता था—दोस्ताना, थोड़ा मज़ाकिया, लेकिन सम्मान के साथ।
लेकिन अब... अब उसकी आवाज़ में एक कड़वाहट थी।
एक हल्की सी तीखी धार।
वो कॉफी का कप टेबल पर रखकर मेरी तरफ झुका—आँखों में थोड़ा सा लालपन, थकान, और शायद... थोड़ी सी जलन।
"इस तरह की औरतें रेयर ब्रीड होती हैं, बॉय...
शादी के लिए नहीं बनी होतीं।
तुम उनकी कैलिबर को वेस्ट कर रहे हो... मज़े के लिए।
और वो भी... तुम्हारे एवरेज टूल से।"
पहली बार।
पहली बार उसने मुझे डाउन किया।
कल रात तक वो मुझे "लकी" कह रहा था।
कल रात तक वो नेहा को "परफेक्ट" कह रहा था।
लेकिन अब... "एवरेज टूल"।
ये शब्द सीधे मेरे लुंड पर चोट कर गया।
मैंने कल रात महसूस किया था—मेरा लुंड छोटा था, साइज़ एवरेज था, लेकिन परफॉर्मेंस... वो मेरी थी।
और अब... ये आदमी... ये 60 साल का "अंकल"... मुझे "एवरेज" कह रहा था।
मैं चुप रहा।
मेरा चेहरा सख्त हो गया।
मेरा लुंड... अभी भी हार्ड था।


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