22-02-2026, 06:08 PM
मेनका ने लंड को हिलाना शुरू कर दिया। उसे अपने हाथ मे इस लंड का एहसास बहुत अच्छा लगता था और इसको छुने भर से ही वो गरम होने लगे थी। राजासाहब ने अपने बाए हाथ को नीचे कर झुकाते हुए मेनका के घुटने पकड़ कर उसकी टांगे सीट पर कर दी, फिर सीधे हो बैठ गये और उसकी साडी उठा कर उसकी कमर तक ले आए। इस सब के दौरान उन्होने कार को ज़रा भी नही लड़खड़ाने दिया। मैत्री की पेशकश
मेनका झुक कर अपने ससुर के लंड को चूसने लगी थी। राजासाहब ने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी पेंटी की साइड मे से अपनी उंगलिया उसकी चूत मे घुसा दी और उसके दाने को रगड़ने लगे। मेनका तो जोश से पागल हो गयी पर राजासाहब की हालत तो और भी खराब थी। उनकी बहू उनके लंड को मसल और चूस रही थी और उनका दिल कर रहा था कि बस कार रोक, उसे लिटा कर उस पर सवार हो जाएँ पर उन्हे मेनका का दिया हुआ चॅलेंज पूरा करना था। राजपुरा बस एक मिनट दूर रह गया था। उन्होने बड़ी मुश्किल से अपने उपर काबू किया था और अपने पानी को छूटने से रोका हुआ था।
राजासाहब अपनी उंगलियों से उसके जी स्पॉट को ढूँढने लगे और जैसे ही उन्होने उसे खोज कर उस पे अपनी उंगली फिराई, मेनका की चूत ने अपना पानी छोड़ दिया,झड़ गयी। मेनका को बहुत मज़ा आ रहा था। वो अभी भी वैसे ही राजासाहब के लंड पर लगी हुई थी पर राजासाहब ने भी सोच लिया था कि महल पहुँच कर ही झड़ेंगे।
मेनका की जीभ राजासाहब के अंडो पर घूमने लगी, झाँटे साफ़ करने के बाद अब वो काफ़ी आसानी से उन गोलों को चूस पा रही थी। कार महल के गेट पर पहुँच गयी थी। दरबान ने राजासाहब की कार के हॉर्न को दूर से ही पहचान लिया और गेट खोल दिया। मेनका ने लंड को वापस मुँह मे लेकर चूसना और हाथों से रगड़ना शुरू कर दिया था। राजासाहब की उंगली ने फिर से उसे जन्नत की सैर करना शुरू कर दिया था।
कार महल के कॉंपाउंड के अंदर दाखिल होकर बस अब मैं गेट तक पहुँचने वाली ही थी जब राजासाहब की उंगलियों की रगड़ से मेनका दुबारा झड़ गयी, उसकी चूत ने राजासाहब की उंगलियों को अच्छे से भिगो दिया। उसने अपनी जांघें भींचते हुए, अपने ससुर की उंगलियो को अपनी चूत मे ही क़ैद कर लिया। उसके होठ उनके लंड को और तेज़ी से चूसने लगे और राजासाहब ने भी अपना पानी उसके मुँह मे छोड़ दिया। मेनका सारा पानी पी गयी और चाट कर पूरा लंड साफ़ कर दिया, फिर उठ कर अपनी साडी और बाल ठीक करने लगी। मैत्री निर्मित
राजासाहब ने कार महल के पोर्च मे रोक दी, अपना लंड पॅंट के अंदर किया और मुस्कुरा कर मेनका की ओर देखा,
"तो हम इम्तिहान मे पास हो गये? कितने नंबर मिले हमे?"
मेनका ने अपना आँचल सर पर ले लिया,
"हां हो गये। 100 मे से 101।",
और दोनो कार से बाहर आ गये।
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आज के लिए बस यही तक कल फिर मिलेंगे
मैत्री की ओर से जय भारत.
मेनका झुक कर अपने ससुर के लंड को चूसने लगी थी। राजासाहब ने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी पेंटी की साइड मे से अपनी उंगलिया उसकी चूत मे घुसा दी और उसके दाने को रगड़ने लगे। मेनका तो जोश से पागल हो गयी पर राजासाहब की हालत तो और भी खराब थी। उनकी बहू उनके लंड को मसल और चूस रही थी और उनका दिल कर रहा था कि बस कार रोक, उसे लिटा कर उस पर सवार हो जाएँ पर उन्हे मेनका का दिया हुआ चॅलेंज पूरा करना था। राजपुरा बस एक मिनट दूर रह गया था। उन्होने बड़ी मुश्किल से अपने उपर काबू किया था और अपने पानी को छूटने से रोका हुआ था।
राजासाहब अपनी उंगलियों से उसके जी स्पॉट को ढूँढने लगे और जैसे ही उन्होने उसे खोज कर उस पे अपनी उंगली फिराई, मेनका की चूत ने अपना पानी छोड़ दिया,झड़ गयी। मेनका को बहुत मज़ा आ रहा था। वो अभी भी वैसे ही राजासाहब के लंड पर लगी हुई थी पर राजासाहब ने भी सोच लिया था कि महल पहुँच कर ही झड़ेंगे।
मेनका की जीभ राजासाहब के अंडो पर घूमने लगी, झाँटे साफ़ करने के बाद अब वो काफ़ी आसानी से उन गोलों को चूस पा रही थी। कार महल के गेट पर पहुँच गयी थी। दरबान ने राजासाहब की कार के हॉर्न को दूर से ही पहचान लिया और गेट खोल दिया। मेनका ने लंड को वापस मुँह मे लेकर चूसना और हाथों से रगड़ना शुरू कर दिया था। राजासाहब की उंगली ने फिर से उसे जन्नत की सैर करना शुरू कर दिया था।
कार महल के कॉंपाउंड के अंदर दाखिल होकर बस अब मैं गेट तक पहुँचने वाली ही थी जब राजासाहब की उंगलियों की रगड़ से मेनका दुबारा झड़ गयी, उसकी चूत ने राजासाहब की उंगलियों को अच्छे से भिगो दिया। उसने अपनी जांघें भींचते हुए, अपने ससुर की उंगलियो को अपनी चूत मे ही क़ैद कर लिया। उसके होठ उनके लंड को और तेज़ी से चूसने लगे और राजासाहब ने भी अपना पानी उसके मुँह मे छोड़ दिया। मेनका सारा पानी पी गयी और चाट कर पूरा लंड साफ़ कर दिया, फिर उठ कर अपनी साडी और बाल ठीक करने लगी। मैत्री निर्मित
राजासाहब ने कार महल के पोर्च मे रोक दी, अपना लंड पॅंट के अंदर किया और मुस्कुरा कर मेनका की ओर देखा,
"तो हम इम्तिहान मे पास हो गये? कितने नंबर मिले हमे?"
मेनका ने अपना आँचल सर पर ले लिया,
"हां हो गये। 100 मे से 101।",
और दोनो कार से बाहर आ गये।
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आज के लिए बस यही तक कल फिर मिलेंगे
मैत्री की ओर से जय भारत.


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