22-02-2026, 06:05 PM
मेनका शुक्र मना रही थी कि पति के जाने के बाद भी उसने कॉंट्रॅसेप्टिव पिल्स खाना नही छोड़ा था, नही तो जैसे उसके ससुर ने उसकी चूत को 3 बार भरा था, वो तो शर्तिया प्रेग्नेंट हो चुकी होती। मैत्री की रचना
शहर के एरपोर्ट पे राजासाहब के स्टाफ मेंबर्ज़ उनकी अगुआई के लिए खड़े थे। शाम घिरने लगी थी और स्टाफ मेंबर्ज़ ने उनसे शहर मे उनके बंगलो पर रुकने को कहा। पर राजासाहब जल्द से जल्द राजपुरा पहुँचना चाहते थे सो उन्होने उनसे अपनी कार ली और मेनका के साथ राजपुरा की ओर चल पड़े। वैसे भी रास्ता बस एक-डेढ घंटे का ही था।
राजासाहब को ड्राइव करना बहुत पसंद था और बहुत मजबूरी मे ही अपने ड्राइवर को ड्राइव करने देते थे। आज तो उन्हे बहुत अच्छा लग रहा था, ड्राइव करते वक़्त उनके साथ उनकी प्रेमिका जो बैठी थी।
कार के शीशे गहरे काले रंग के थे और अंदर का नज़ारा कोई बाहर से देख नही सकता था। इसी बात का फायदा उठाते हुए जैसे ही कार शहर से निकल कर हाइवे पर आई, मेनका खिसक कर राजासाहब से सॅट कर बैठ गयी। उन्होने ने भी अपनी बाईं बाँह के घेरे मे मेनका को समेट लिया। मेनका अपने ससुर के कंधे पे सर रख सामने देखने लगी। करीब एक5-20 मिनिट तक दोनो ऐसे ही बैठे रहे। फिर मेनका को शरारत सूझने लगी। उसने राजासाहब के गाल पर चूम लिया तो राजासाहब ने भी एक पल के लिए रास्ते से नज़र हटा कर उसकी किस का जवाब उसके गालों पर छोड़ दिया।
मेनका ने अपने ससुर की शर्ट के उपर के 2 बटन खोल दिए और उसकी उंगलियाँ उनके सीने के बालों से खेलने लगी। उनके सीने को सहलाते हुए उसने अपने नाखूनों से राजासाहब के निपल्स को छेड़ना शुरू कर दिया।
"क्या कर रही हो? अगर हमारा ध्यान इधर-उधर हुआ तो कही आक्सिडेंट ना हो जाए।"
"यही तो आपका इम्तिहान है, राजासाहब। मैं तो ऐसे ही करती रहूंगी, आप बिना होश खोए कार चला कर दिखाएँ तो मानु।"
"हमे चॅलेंज कर रही हो! ठीक है। जो मर्ज़ी कर लो, हम भी हार नही मानेंगे। अब तो कार महल पर ही रुकेगी।" मैत्री की पेशकश
जवाब मे मेनका ने थोड़ा झुक कर शर्ट के गले से झँकते उनके सीने पर चूम लिया। कार मे ऑटोमॅटिक ट्रॅन्समिशन होने की वजह से राजासाहब को गियर बदलने की ज़रूरत तो थी नही, उनका दाया हाथ स्टियरिंग को और बाया मेनका को संभाले हुए था। मेनका चूमते हुए नीचे उनकी गोद मे पहुँच गयी और उनकी पॅंट का ज़िप खोल दिया और हाथ घुसा कर अपने ससुर के लंड को बाहर निकल लिया। लंड पहले से ही तना हुआ था। मेनका ने उसे हाथ मे थमा और राजासाहब की ओर देख कर मुस्कुराइ। राजासाहब भी मुस्कुरा दिए और फिर अपनी नज़रे रोड पर जमा दी।
आगे बाकी है...........
जय भारत
शहर के एरपोर्ट पे राजासाहब के स्टाफ मेंबर्ज़ उनकी अगुआई के लिए खड़े थे। शाम घिरने लगी थी और स्टाफ मेंबर्ज़ ने उनसे शहर मे उनके बंगलो पर रुकने को कहा। पर राजासाहब जल्द से जल्द राजपुरा पहुँचना चाहते थे सो उन्होने उनसे अपनी कार ली और मेनका के साथ राजपुरा की ओर चल पड़े। वैसे भी रास्ता बस एक-डेढ घंटे का ही था।
राजासाहब को ड्राइव करना बहुत पसंद था और बहुत मजबूरी मे ही अपने ड्राइवर को ड्राइव करने देते थे। आज तो उन्हे बहुत अच्छा लग रहा था, ड्राइव करते वक़्त उनके साथ उनकी प्रेमिका जो बैठी थी।
कार के शीशे गहरे काले रंग के थे और अंदर का नज़ारा कोई बाहर से देख नही सकता था। इसी बात का फायदा उठाते हुए जैसे ही कार शहर से निकल कर हाइवे पर आई, मेनका खिसक कर राजासाहब से सॅट कर बैठ गयी। उन्होने ने भी अपनी बाईं बाँह के घेरे मे मेनका को समेट लिया। मेनका अपने ससुर के कंधे पे सर रख सामने देखने लगी। करीब एक5-20 मिनिट तक दोनो ऐसे ही बैठे रहे। फिर मेनका को शरारत सूझने लगी। उसने राजासाहब के गाल पर चूम लिया तो राजासाहब ने भी एक पल के लिए रास्ते से नज़र हटा कर उसकी किस का जवाब उसके गालों पर छोड़ दिया।
मेनका ने अपने ससुर की शर्ट के उपर के 2 बटन खोल दिए और उसकी उंगलियाँ उनके सीने के बालों से खेलने लगी। उनके सीने को सहलाते हुए उसने अपने नाखूनों से राजासाहब के निपल्स को छेड़ना शुरू कर दिया।
"क्या कर रही हो? अगर हमारा ध्यान इधर-उधर हुआ तो कही आक्सिडेंट ना हो जाए।"
"यही तो आपका इम्तिहान है, राजासाहब। मैं तो ऐसे ही करती रहूंगी, आप बिना होश खोए कार चला कर दिखाएँ तो मानु।"
"हमे चॅलेंज कर रही हो! ठीक है। जो मर्ज़ी कर लो, हम भी हार नही मानेंगे। अब तो कार महल पर ही रुकेगी।" मैत्री की पेशकश
जवाब मे मेनका ने थोड़ा झुक कर शर्ट के गले से झँकते उनके सीने पर चूम लिया। कार मे ऑटोमॅटिक ट्रॅन्समिशन होने की वजह से राजासाहब को गियर बदलने की ज़रूरत तो थी नही, उनका दाया हाथ स्टियरिंग को और बाया मेनका को संभाले हुए था। मेनका चूमते हुए नीचे उनकी गोद मे पहुँच गयी और उनकी पॅंट का ज़िप खोल दिया और हाथ घुसा कर अपने ससुर के लंड को बाहर निकल लिया। लंड पहले से ही तना हुआ था। मेनका ने उसे हाथ मे थमा और राजासाहब की ओर देख कर मुस्कुराइ। राजासाहब भी मुस्कुरा दिए और फिर अपनी नज़रे रोड पर जमा दी।
आगे बाकी है...........
जय भारत


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