22-02-2026, 06:03 PM
"हमे बहुत शॉर्ट नोटीस पर भी काम करने को तैय्यार रहना होगा। आज से तुम यही रहो पर ध्यान रहे, किसी को इस बात का पता नही चलना चाहिए कि तुम यहा हो।" जब्बार कह तो कल्लन से रहा था पर उसकी नज़रे मलिका पर थी जो कि बड़े सोफे पर लेट कर उनकी बातें सुन रही थी।
"अब क्या करना है?" कल्लन अपना खाली ग्लास फिर भरने के लिए उठा।
"उस छोटी मछली को चारा डालना है।" जब्बार मलिका की तरफ देख कर कुटिलता से मुस्कुराया।
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अब आगे........
डील साइन करने के बाद राजासाहब और मेनका वापस होटेल आए। थोड़ी देर बाद ही उन्हे राजपुरा के लिए रवाना होना था। इसबार राजासाहब ने प्लेन चार्टर नही किया था, बल्कि एरलाइन फ्लाइट से जाने वाले थे। चेक आउट करते वक़्त मेनका फिर उन्हे रिसेप्षन पे छोड़ शॉपिंग एरिया मे चली गयी।
"ऐसा क्या है शॉपिंग सेंटर मे जो बार-बार वहा जा रही हो?" कार तेज़ी से एरपोर्ट की तरफ बढ़ रही थी।
"ये तो आपको घर चल कर ही पता चलेगा।" मेनका शरारत से मुस्कुराइ। राजासाहब का दिल किया कि उसी वक़्त उसे बाहों मे भींच कर प्यार करने लगे पर आगे ड्राइवर बैठा था। बड़ी मुश्किल से अपने जज़्बातों को उन्होने काबू मे किया।
एरपोर्ट मे चेक-इन काउंटर की ओर जाते हुए मेडिसिन स्टोर की विंडो मे लगे कॉंडम का पोस्टर देख राजासाहब के दिमाग़ मे एक ख़याल आया।" अरे, कल रात हम से एक गड़बड़ हो गयी?"
"क्या?"
"हम-"
"नमस्कार, राजासाहब।" राजासाहब के जवाब देने के पहले एक लगभग 60 साल का काफ़ी अमीर दिखने वाला आदमी उनके सामने आ खड़ा हुआ।
"अरे, सपरू साहब! कैसे हैं आप? यहा कैसे आए?"
"बस आपकी दुआ है, राजासाहब। हमारी बेटी यही ब्याही है, उसी से मिलने आए थे, अब वापस देल्ही जा रहे हैं।"
"इनसे मिलिए, ये कुँवारानी हैं? और ये सपरू साहब हैं। हमारी तरह काग़ज़ और चीनी के व्यापारी पर इनका कारोबार हमसे कहीं ज़्यादा बड़ा और फैला हुआ है।"
मेनका ने उन्हे नमस्कार किया तो जवाब मे उन्होने भी हाथ जोड़ दिए।, "राजासाहब तो हमे शर्मिंदा कर रहे हैं। इनकी बातों पर मत जाइए। हम तो इनके सहभागी बनने को बेताब थे पर तक़दीर ने हमारा साथ नही दिया।"
"हाँ,सपरू साहब। इस बात का मलाल तो हमे भी रहेगा कि आप और हम बिज़नेस पार्ट्नर्स नही बन पाए। अगर आपकी कंपनी का पैसा उस चाइनीस डील मे नही फँसता तो आज हमे इन विदेशियो से डील करने की कोई ज़रूरत नही पड़ती।"
"सब उपरवाले की मर्ज़ी है राजासाहब! पर क्या मालूम? हो सकता है आगे चल के वो हमारा रिश्ता और मज़बूती से जोड़ दे।"
"बहुत खूब कही, सपरू साहब आपने।" तभी अनाउन्स्मेंट हुई और दोनो एक दूसरे से विदा ले अलग-2 दिशाओ मे चले गये।
प्लेन मे बैठे मेनका ने एक मॅगज़ीन के पन्ने पलट ते हुए राजासाहब से पूछा,"आप एरपोर्ट पे किस गड़बड़ का ज़िक्र कर रहे थे?"
राजासाहब थोड़े परेशान दिखे, "वो, हम, कल रात हमने...कोई...कोई प्रोटेक्षन इस्तेमाल नही किया और कही तुम प्रेग्नेंट!!-"
"आप उस बात की चिंता मत कीजिए। आपने नही मैने किया था।" धीरे से हँसती हुई, वो वापस मॅगज़ीन पढ़ने लगी। राजासाहब को तसल्ली हुई।
"अब क्या करना है?" कल्लन अपना खाली ग्लास फिर भरने के लिए उठा।
"उस छोटी मछली को चारा डालना है।" जब्बार मलिका की तरफ देख कर कुटिलता से मुस्कुराया।
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अब आगे........
डील साइन करने के बाद राजासाहब और मेनका वापस होटेल आए। थोड़ी देर बाद ही उन्हे राजपुरा के लिए रवाना होना था। इसबार राजासाहब ने प्लेन चार्टर नही किया था, बल्कि एरलाइन फ्लाइट से जाने वाले थे। चेक आउट करते वक़्त मेनका फिर उन्हे रिसेप्षन पे छोड़ शॉपिंग एरिया मे चली गयी।
"ऐसा क्या है शॉपिंग सेंटर मे जो बार-बार वहा जा रही हो?" कार तेज़ी से एरपोर्ट की तरफ बढ़ रही थी।
"ये तो आपको घर चल कर ही पता चलेगा।" मेनका शरारत से मुस्कुराइ। राजासाहब का दिल किया कि उसी वक़्त उसे बाहों मे भींच कर प्यार करने लगे पर आगे ड्राइवर बैठा था। बड़ी मुश्किल से अपने जज़्बातों को उन्होने काबू मे किया।
एरपोर्ट मे चेक-इन काउंटर की ओर जाते हुए मेडिसिन स्टोर की विंडो मे लगे कॉंडम का पोस्टर देख राजासाहब के दिमाग़ मे एक ख़याल आया।" अरे, कल रात हम से एक गड़बड़ हो गयी?"
"क्या?"
"हम-"
"नमस्कार, राजासाहब।" राजासाहब के जवाब देने के पहले एक लगभग 60 साल का काफ़ी अमीर दिखने वाला आदमी उनके सामने आ खड़ा हुआ।
"अरे, सपरू साहब! कैसे हैं आप? यहा कैसे आए?"
"बस आपकी दुआ है, राजासाहब। हमारी बेटी यही ब्याही है, उसी से मिलने आए थे, अब वापस देल्ही जा रहे हैं।"
"इनसे मिलिए, ये कुँवारानी हैं? और ये सपरू साहब हैं। हमारी तरह काग़ज़ और चीनी के व्यापारी पर इनका कारोबार हमसे कहीं ज़्यादा बड़ा और फैला हुआ है।"
मेनका ने उन्हे नमस्कार किया तो जवाब मे उन्होने भी हाथ जोड़ दिए।, "राजासाहब तो हमे शर्मिंदा कर रहे हैं। इनकी बातों पर मत जाइए। हम तो इनके सहभागी बनने को बेताब थे पर तक़दीर ने हमारा साथ नही दिया।"
"हाँ,सपरू साहब। इस बात का मलाल तो हमे भी रहेगा कि आप और हम बिज़नेस पार्ट्नर्स नही बन पाए। अगर आपकी कंपनी का पैसा उस चाइनीस डील मे नही फँसता तो आज हमे इन विदेशियो से डील करने की कोई ज़रूरत नही पड़ती।"
"सब उपरवाले की मर्ज़ी है राजासाहब! पर क्या मालूम? हो सकता है आगे चल के वो हमारा रिश्ता और मज़बूती से जोड़ दे।"
"बहुत खूब कही, सपरू साहब आपने।" तभी अनाउन्स्मेंट हुई और दोनो एक दूसरे से विदा ले अलग-2 दिशाओ मे चले गये।
प्लेन मे बैठे मेनका ने एक मॅगज़ीन के पन्ने पलट ते हुए राजासाहब से पूछा,"आप एरपोर्ट पे किस गड़बड़ का ज़िक्र कर रहे थे?"
राजासाहब थोड़े परेशान दिखे, "वो, हम, कल रात हमने...कोई...कोई प्रोटेक्षन इस्तेमाल नही किया और कही तुम प्रेग्नेंट!!-"
"आप उस बात की चिंता मत कीजिए। आपने नही मैने किया था।" धीरे से हँसती हुई, वो वापस मॅगज़ीन पढ़ने लगी। राजासाहब को तसल्ली हुई।


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