22-02-2026, 12:15 PM
वेटर चला गया था।
दरवाज़ा बंद हो चुका था।
कमरा अब सिर्फ़ हमारी साँसों से भर गया था—चार आदमी, और सैंडी बीच में।
हम सब फर्श पर थे—सैंडी हमारे चारों तरफ घिरी हुई, पीठ के बल लेटी, बदन पर हमारा कम चमक रहा था।
वो अभी भी मुस्कुरा रही थी।
हल्की-हल्की गिगल कर रही थी—जैसे कोई बच्ची मज़ाक के बाद हँस रही हो।
उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे उसके बदन पर घूम रही थीं—नाभि में भरा अलोक का कम, स्तनों पर फैला विशाल और डेविड का, चेहरे पर मेरा।
वो उँगली से कम उठाती, फिर उसे जीभ पर रखकर चाटती।
हर बार अलग स्वाद चखती हुई—जैसे किसी रेयर वाइन को टेस्ट कर रही हो।
कभी वो अपनी उँगली को होंठों पर रखकर चूसती, कभी जीभ से चाटती।
फिर हँस पड़ती—एक छोटी, शरारती हँसी।
"हम्म... सबका अलग-अलग स्वाद है..."
वो हँसती रही।
हम देखते रहे।
एक यंग लड़की—परफेक्ट बॉडी, टीवी कमर्शियल मॉडल, किसी की बेटी, किसी की बहन, किसी की होने वाली बीवी या माँ।
और अब... फर्श पर लेटी हुई, चार आदमियों के कम से ढकी हुई।
उसकी उँगलियाँ अभी भी घूम रही थीं—नाभि से स्तनों तक, चेहरे तक।
फिर वो उँगली मुँह में डालकर चूसती।
फिर फिर हँसती।
"अलोक सर का... सबसे ज़्यादा... गाढ़ा और गरम..."
वो हँसी।
"विशाल का... थोड़ा मीठा..."
फिर डेविड की तरफ देखकर हँसी।
"और डेविड सर का... बहुत तेज़..."
फिर मेरी तरफ देखी—उसकी आँखें मेरी आँखों में।
उसने उँगली से मेरे कम को चेहरा से उठाया।
जीभ पर रखा।
चाटा।
फिर मुस्कुराई—बहुत गहरी मुस्कान।
"सबसे... अलग।
अलोक सबसे पहले फर्श से उठा।
धीरे से सोफे पर बैठ गया।
एक नई सिगरेट जलाई।
गहरा कश लिया।
धुआँ छोड़ा—धीरे-धीरे, जैसे सब कुछ कंट्रोल में हो।
फिर उसने डेविड और विशाल की तरफ देखा।
आवाज़ में वही मालिक वाली टोन—शांत लेकिन कमांड वाली।
"उसे बाथरूम ले जाओ... साफ़ करो... और अगले राउंड के लिए तैयार करो।"
डेविड ने हँसा—उसकी हँसी में जानवर जैसा जोश।
वो तुरंत खड़ा हो गया।
सैंडी को उठाया—एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी, दूसरे से जांघें।
उसने उसे अपने कंधे पर लाद लिया—जैसे कोई फूल उठा रहा हो।
डेविड छोटे कद का था, पेट बड़ा था, लेकिन ताकत बहुत थी।
सैंडी हल्की सी चीखी—"ओह्ह..."—फिर गिगल कर दी।
उसके बदन पर लगा हमारा कम अब डेविड की स्किन से चिपक रहा था—चिपचिपा, गर्म।
लेकिन डेविड को कोई फर्क नहीं पड़ा।
वो हँसता हुआ बाथरूम की तरफ बढ़ा।
विशाल उसके पीछे-पीछे चला—लुंड अभी भी हाथ में, मुस्कुराता हुआ।
बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला छूट गया।
अंदर से शावर की आवाज़ आई—पानी तेज़ी से बहने लगा।
फिर हँसी।
गिगल।
"ओह्ह... उफ्फ..."
"रंडी... "
"भेनचोद..."
थप्पड़ की आवाज़ें—फट्ट... फट्ट...
सैंडी की गिगल और कराहें मिक्स हो रही थीं।
पहली बार... मुझे जलन हुई।
डेविड और विशाल की वजह से।
एक ड्राइवर... एक बॉडीगार्ड...
लो लेवल के लोग...
और वो सैंडी के साथ बाथरूम में थे।
शावर के नीचे।
उसे साफ़ कर रहे थे।
उसे छू रहे थे।
उसे हँसा रहे थे।
मैं सोचने लगा—काश मैं अलोक का हेल्पर होता।
काश वो मुझे ऑर्डर देता—"जा... उसे साफ़ कर के ला।"
मैं उसके साथ बाथरूम में जाता।
उसे शावर के नीचे ले जाता।
उसके बदन पर लगा कम धोता।
उसे फिर से छूता।
उसे और देखता।
उसकी बॉडी... और करीब से।
लेकिन मैं... मैं बस सोफे पर बैठा था।
अलोक सिगरेट पी रहा था।
मैंने ग्लास उठाया—बचा हुआ ड्रिंक एक घूँट में पी लिया।
अलोक ने अपनी सिगरेट का पैकेट मेरी तरफ बढ़ाया।
मैंने एक ली, होंठों पर रखी।
उसने लाइटर जलाकर आगे किया।
मैंने गहरा कश लिया—धुआँ फेफड़ों में भर गया, फिर धीरे से बाहर छोड़ा।
सिर में हल्की चक्कर सी आई, लेकिन अब नशा उतर रहा था।
"पार्टी कैसी लगी?" अलोक ने पूछा, आवाज़ में वही पुरानी वाली मुस्कान।
मैंने धीरे से कहा—आवाज़ थकी हुई, लेकिन सच्ची।
"ओह्ह... कभी ऐसा कुछ देखा ही नहीं... सर, आप कितनी बार करते हैं ये सब?"
अलोक ने हँसा—एक गहरी, थकी हुई हँसी।
"पता नहीं बॉय... ये माल पर डिपेंड करता है।"
उसने "माल" शब्द पर ज़ोर दिया—जैसे कोई आम चीज़ हो।
"ओह..."
"मॉडल्स, एयरहोस्टेस, फिल्म वालियाँ... गिनती ही नहीं पता।
कभी-कभी हफ्ते में दो-तीन... कभी महीने में एक।
बस... जब मन करे।"
मैं चुप रहा।
मेरी आँखें बाथरूम के दरवाज़े पर टिकी हुई थीं।
अंदर से अभी भी हल्की गिगल और पानी की आवाज़ आ रही थी।
मैं एक बार फिर सैंडी को नंगी देखना चाहता था—उसकी बॉडी, उसके स्तन, उसकी चूत... बस एक आखिरी बार।
लेकिन वो लोग अभी भी अंदर थे—डेविड और विशाल।
हँसी, थप्पड़, कराहें—सब सुनाई दे रहा था।
मैंने ग्लास रखा।
"अब... मुझे जाना चाहिए।
बहुत लेट हो गया।
नेहा जाग गई तो परेशान हो जाएगी।"
अलोक ने सिर हिलाया।
"ठीक है... लेकिन पक्का है ना?
तू चाहे तो अभी भी रुक सकता है... नेहा को सोने दे।"
मैंने हल्के से मुस्कुराया।
"नहीं सर... मैं जाना चाहता हूँ।"
फिर एक पल रुका।
"और... हैप्पी बर्थडे फिर से।
थैंक्यू... इस रात के लिए।
मैं कभी नहीं भूलूँगा।"
अलोक ने मुस्कुराकर कहा,
"गिफ्ट कहाँ है मेरा?"
मैंने हल्के से हँसा।
"जो चाहें... बोलिए।"
उसने मेरी आँखों में देखा।
फिर एक साँस में बोला,
"कल सुबह नेहा से मिलवाओ।"
मेरा दिल धड़क गया।
"वो... वो ऐसी नहीं है... वो सैंडी जैसी नहीं है।"
अलोक ने जोर से हँसा।
"पता है बॉय... वो सैंडी से कहीं बेहतर है।
मैंने सब देखा है—मॉडल्स, एयरहोस्टेस, फिल्म वाली... लेकिन नेहा... वो अलग है।
बेड पर भी... वो सब कुछ बेहतर करेगी।
मैं जानता हूँ।
मैं सिर्फ़ मिलना चाहता हूँ... प्लेटोनिक।
हैलो... बस।
कुछ और नहीं।"
मैं चुप रहा।
उसकी पायल... मंगलसूत्र... उसकी मुस्कान।
मैंने कहा,
"ठीक है... कल ब्रेकफास्ट पर।"
अलोक ने सिर हिलाया।
"गुड बॉय।"
मैं उठा।
बाथरूम से अभी भी हँसी और पानी की आवाज़ आ रही थी।
सैंडी अभी भी अंदर थी—नंगी, शावर के नीचे।
मैं एक बार फिर देखना चाहता था... लेकिन नहीं।
मैंने दरवाज़ा खोला।
बाहर निकल गया।
कमरे में नेहा सो रही थी।
मैंने दरवाज़ा बंद किया।
चाबी लगाई।
उसके पास लेट गया।
दरवाज़ा बंद हो चुका था।
कमरा अब सिर्फ़ हमारी साँसों से भर गया था—चार आदमी, और सैंडी बीच में।
हम सब फर्श पर थे—सैंडी हमारे चारों तरफ घिरी हुई, पीठ के बल लेटी, बदन पर हमारा कम चमक रहा था।
वो अभी भी मुस्कुरा रही थी।
हल्की-हल्की गिगल कर रही थी—जैसे कोई बच्ची मज़ाक के बाद हँस रही हो।
उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे उसके बदन पर घूम रही थीं—नाभि में भरा अलोक का कम, स्तनों पर फैला विशाल और डेविड का, चेहरे पर मेरा।
वो उँगली से कम उठाती, फिर उसे जीभ पर रखकर चाटती।
हर बार अलग स्वाद चखती हुई—जैसे किसी रेयर वाइन को टेस्ट कर रही हो।
कभी वो अपनी उँगली को होंठों पर रखकर चूसती, कभी जीभ से चाटती।
फिर हँस पड़ती—एक छोटी, शरारती हँसी।
"हम्म... सबका अलग-अलग स्वाद है..."
वो हँसती रही।
हम देखते रहे।
एक यंग लड़की—परफेक्ट बॉडी, टीवी कमर्शियल मॉडल, किसी की बेटी, किसी की बहन, किसी की होने वाली बीवी या माँ।
और अब... फर्श पर लेटी हुई, चार आदमियों के कम से ढकी हुई।
उसकी उँगलियाँ अभी भी घूम रही थीं—नाभि से स्तनों तक, चेहरे तक।
फिर वो उँगली मुँह में डालकर चूसती।
फिर फिर हँसती।
"अलोक सर का... सबसे ज़्यादा... गाढ़ा और गरम..."
वो हँसी।
"विशाल का... थोड़ा मीठा..."
फिर डेविड की तरफ देखकर हँसी।
"और डेविड सर का... बहुत तेज़..."
फिर मेरी तरफ देखी—उसकी आँखें मेरी आँखों में।
उसने उँगली से मेरे कम को चेहरा से उठाया।
जीभ पर रखा।
चाटा।
फिर मुस्कुराई—बहुत गहरी मुस्कान।
"सबसे... अलग।
अलोक सबसे पहले फर्श से उठा।
धीरे से सोफे पर बैठ गया।
एक नई सिगरेट जलाई।
गहरा कश लिया।
धुआँ छोड़ा—धीरे-धीरे, जैसे सब कुछ कंट्रोल में हो।
फिर उसने डेविड और विशाल की तरफ देखा।
आवाज़ में वही मालिक वाली टोन—शांत लेकिन कमांड वाली।
"उसे बाथरूम ले जाओ... साफ़ करो... और अगले राउंड के लिए तैयार करो।"
डेविड ने हँसा—उसकी हँसी में जानवर जैसा जोश।
वो तुरंत खड़ा हो गया।
सैंडी को उठाया—एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी, दूसरे से जांघें।
उसने उसे अपने कंधे पर लाद लिया—जैसे कोई फूल उठा रहा हो।
डेविड छोटे कद का था, पेट बड़ा था, लेकिन ताकत बहुत थी।
सैंडी हल्की सी चीखी—"ओह्ह..."—फिर गिगल कर दी।
उसके बदन पर लगा हमारा कम अब डेविड की स्किन से चिपक रहा था—चिपचिपा, गर्म।
लेकिन डेविड को कोई फर्क नहीं पड़ा।
वो हँसता हुआ बाथरूम की तरफ बढ़ा।
विशाल उसके पीछे-पीछे चला—लुंड अभी भी हाथ में, मुस्कुराता हुआ।
बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला छूट गया।
अंदर से शावर की आवाज़ आई—पानी तेज़ी से बहने लगा।
फिर हँसी।
गिगल।
"ओह्ह... उफ्फ..."
"रंडी... "
"भेनचोद..."
थप्पड़ की आवाज़ें—फट्ट... फट्ट...
सैंडी की गिगल और कराहें मिक्स हो रही थीं।
पहली बार... मुझे जलन हुई।
डेविड और विशाल की वजह से।
एक ड्राइवर... एक बॉडीगार्ड...
लो लेवल के लोग...
और वो सैंडी के साथ बाथरूम में थे।
शावर के नीचे।
उसे साफ़ कर रहे थे।
उसे छू रहे थे।
उसे हँसा रहे थे।
मैं सोचने लगा—काश मैं अलोक का हेल्पर होता।
काश वो मुझे ऑर्डर देता—"जा... उसे साफ़ कर के ला।"
मैं उसके साथ बाथरूम में जाता।
उसे शावर के नीचे ले जाता।
उसके बदन पर लगा कम धोता।
उसे फिर से छूता।
उसे और देखता।
उसकी बॉडी... और करीब से।
लेकिन मैं... मैं बस सोफे पर बैठा था।
अलोक सिगरेट पी रहा था।
मैंने ग्लास उठाया—बचा हुआ ड्रिंक एक घूँट में पी लिया।
अलोक ने अपनी सिगरेट का पैकेट मेरी तरफ बढ़ाया।
मैंने एक ली, होंठों पर रखी।
उसने लाइटर जलाकर आगे किया।
मैंने गहरा कश लिया—धुआँ फेफड़ों में भर गया, फिर धीरे से बाहर छोड़ा।
सिर में हल्की चक्कर सी आई, लेकिन अब नशा उतर रहा था।
"पार्टी कैसी लगी?" अलोक ने पूछा, आवाज़ में वही पुरानी वाली मुस्कान।
मैंने धीरे से कहा—आवाज़ थकी हुई, लेकिन सच्ची।
"ओह्ह... कभी ऐसा कुछ देखा ही नहीं... सर, आप कितनी बार करते हैं ये सब?"
अलोक ने हँसा—एक गहरी, थकी हुई हँसी।
"पता नहीं बॉय... ये माल पर डिपेंड करता है।"
उसने "माल" शब्द पर ज़ोर दिया—जैसे कोई आम चीज़ हो।
"ओह..."
"मॉडल्स, एयरहोस्टेस, फिल्म वालियाँ... गिनती ही नहीं पता।
कभी-कभी हफ्ते में दो-तीन... कभी महीने में एक।
बस... जब मन करे।"
मैं चुप रहा।
मेरी आँखें बाथरूम के दरवाज़े पर टिकी हुई थीं।
अंदर से अभी भी हल्की गिगल और पानी की आवाज़ आ रही थी।
मैं एक बार फिर सैंडी को नंगी देखना चाहता था—उसकी बॉडी, उसके स्तन, उसकी चूत... बस एक आखिरी बार।
लेकिन वो लोग अभी भी अंदर थे—डेविड और विशाल।
हँसी, थप्पड़, कराहें—सब सुनाई दे रहा था।
मैंने ग्लास रखा।
"अब... मुझे जाना चाहिए।
बहुत लेट हो गया।
नेहा जाग गई तो परेशान हो जाएगी।"
अलोक ने सिर हिलाया।
"ठीक है... लेकिन पक्का है ना?
तू चाहे तो अभी भी रुक सकता है... नेहा को सोने दे।"
मैंने हल्के से मुस्कुराया।
"नहीं सर... मैं जाना चाहता हूँ।"
फिर एक पल रुका।
"और... हैप्पी बर्थडे फिर से।
थैंक्यू... इस रात के लिए।
मैं कभी नहीं भूलूँगा।"
अलोक ने मुस्कुराकर कहा,
"गिफ्ट कहाँ है मेरा?"
मैंने हल्के से हँसा।
"जो चाहें... बोलिए।"
उसने मेरी आँखों में देखा।
फिर एक साँस में बोला,
"कल सुबह नेहा से मिलवाओ।"
मेरा दिल धड़क गया।
"वो... वो ऐसी नहीं है... वो सैंडी जैसी नहीं है।"
अलोक ने जोर से हँसा।
"पता है बॉय... वो सैंडी से कहीं बेहतर है।
मैंने सब देखा है—मॉडल्स, एयरहोस्टेस, फिल्म वाली... लेकिन नेहा... वो अलग है।
बेड पर भी... वो सब कुछ बेहतर करेगी।
मैं जानता हूँ।
मैं सिर्फ़ मिलना चाहता हूँ... प्लेटोनिक।
हैलो... बस।
कुछ और नहीं।"
मैं चुप रहा।
उसकी पायल... मंगलसूत्र... उसकी मुस्कान।
मैंने कहा,
"ठीक है... कल ब्रेकफास्ट पर।"
अलोक ने सिर हिलाया।
"गुड बॉय।"
मैं उठा।
बाथरूम से अभी भी हँसी और पानी की आवाज़ आ रही थी।
सैंडी अभी भी अंदर थी—नंगी, शावर के नीचे।
मैं एक बार फिर देखना चाहता था... लेकिन नहीं।
मैंने दरवाज़ा खोला।
बाहर निकल गया।
कमरे में नेहा सो रही थी।
मैंने दरवाज़ा बंद किया।
चाबी लगाई।
उसके पास लेट गया।


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