21-02-2026, 05:35 PM
सैंडी अभी भी दीवार से सटी खड़ी थी—नंगी, टॉवल ज़मीन पर पड़ा हुआ, बदन पर वेटर की लार की चमक अभी भी बाकी थी।
वो चुप थी।
आँखें नीचे, साँसें धीमी लेकिन गहरी।
उसका चेहरा शांत था—कोई गुस्सा नहीं, कोई शर्म नहीं, बस एक तरह की खामोशी।
मेरा दिमाग अब पूरी तरह उस पर अटक गया था।
वो बेलाकिर है।
इंस्टा पर मिलियंस फॉलोअर्स।
लंदन, पेरिस, दुबई—महंगे होटल्स, लग्ज़री कार्स, प्राइवेट पार्टियाँ।
रिच किड्स उसे DM करते होंगे—फ्लर्ट, ऑफर, "चलो मिलते हैं"।
कई को रिप्लाई भी मिलता होगा।
कई को मिलने का मौका भी।
वो उनके लिए सपना है—एक हाई-क्लास, सेक्सी, अनअटेनेबल लड़की।
फिर परिवार की फोटोज़—माँ-बाप के साथ, बहन-भाई के साथ, त्योहारों में।
एक दिन वो किसी से सेटल होगी।
ग्रैंड वेडिंग—साड़ी में, सिंदूर लगाकर, मंगलसूत्र पहनकर।
उसका पति बहुत खुश होगा—सोचेगा "मैंने बेलाकिर को पाया"।
लेकिन आज... वो यहाँ है।
एक सस्ते होटल के कमरे में।
एक वेटर ने उसकी चूत सूँघी।
ड्राइवर ने उसे रफ तरीके से चोदा—बाइट मार्क्स दिए।
बॉडीगार्ड ने उसके मुँह में डाला।
और अलोक... अलोक ने सब डिसाइड किया।
वो उसकी प्रॉपर्टी है।
वो कहेगा तो सैंडी "हाँ" कहेगी।
वो कहेगा तो "नो" नहीं कह सकती।
मैं उसे देखता रहा।
वो चुप थी।
शायद वो भी यही सोच रही हो।
"एक दिन मैं किसी अमीर लड़के से शादी करूँगी... घर बसाऊँगी... बच्चे होंगे... लेकिन आज... आज मैं यहाँ हूँ।
एक वेटर के सामने नंगी खड़ी हूँ।
एक ड्राइवर और बॉडीगार्ड के कम से सनी हुई हूँ।
और अलोक भाई जो कहेंगे... वो करूँगी।
कमरे में एक गहरी खामोशी छा गई थी—सिर्फ़ साँसों की हल्की आवाज़ और सिगरेट का धुआँ ऊपर उठता हुआ।
फिर विशाल ने अचानक जोर से हँसा—एक गंदी, जानवर जैसी हँसी।
"साले वेटर... तू तो आज सपना देख रहा है!"
डेविड ने भी साथ दिया—उसकी हँसी और ऊँची।
"हाँ भाई... तूने देख लिया... अब जा, घर जा... कल सुबह ड्यूटी पर आ जाना।"
अलोक ने भी हल्के से हँसा—लेकिन उसकी हँसी अलग थी।
मैं चुप रहा—चेहरा सख्त, सीधा।
सैंडी ने भी सिर्फ़ मुस्कुराया—एक हल्की, थकी हुई मुस्कान, लेकिन कोई हँसी नहीं।
उसकी आँखें नीचे थीं।
फिर वो धीरे से टेबल की तरफ बढ़ी।
हर कदम के साथ उसका बदन हिल रहा था—नंगी जांघें, स्तन हल्के से उछलते हुए, गांड की मूवमेंट।
वो बिना रुके वोदका की बॉटल उठाई।
बोतल मुँह में लगाई।
गटक... गटक... गटक...
सीधे बोतल से, नीट।
कोई ग्लास नहीं।
जैसे वो कुछ भूलना चाहती हो—जल्दी से, बहुत जल्दी।
या शायद... हिम्मत जुटाना चाहती हो।
मुझे नहीं पता।
वो बोतल नीचे रखी।
फिर धीरे से सबकी तरफ मुड़ी—अलोक, विशाल, डेविड, वेटर... और मुझे।
उसकी आँखें मेरी आँखों से मिलीं—एक पल के लिए।
फिर वो सबके बीच में आई।
वेटर अभी भी रास्ते में खड़ा था।
सैंडी उसके सामने से गुज़री—उसका नंगा बदन वेटर के ठीक सामने।
वेटर की साँसें रुक गईं—आँखें उसके स्तनों पर, फिर नीचे।
लेकिन वो हिला नहीं।
बस देखता रहा।
जैसे ही सैंडी उसके पास से गुज़री, वो रुकी।
एक सेकंड के लिए।
फिर झुकी—उसके होंठ वेटर के होंठों पर रख दिए।
एक छोटा सा, हल्का सा किस—बस 1 सेकंड का।
नरम, गर्म ।
फिर उसका हाथ नीचे गया—वेटर के पैंट के ऊपर से उसके बुल्ज पर।
एक हल्का सा कप—जैसे क्यूरियॉसिटी से चेक कर रही हो—"ये कितना है?"
वेटर की साँस रुक गई।
उसकी आँखें बंद हो गईं—मज़े में।
सैंडी ने मुस्कुराकर उसे देखा।
फिर बिना कुछ कहे आगे बढ़ी—वेटर के पास से गुज़रकर, सीधे मेरी तरफ।
वो मेरे ठीक सामने आई।
ग्रेसफुल तरीके से घुटनों पर बैठ गई।
दोनों हाथ सिर के पीछे ले गई—बाल अरेंज करने लगी।
उसके स्तन अब और ऊपर उठे—चमकते हुए, वेटर की लार से गीले, निप्पल्स हार्ड।
मैं बस देखता रहा—उसकी आँखें मेरी आँखों में।
उसकी मुस्कान—एक छोटी, शरारती, लेकिन थकी हुई।
मैं जानता था वो क्या करने वाली है।
वो पहले वाली जगह पर वापस आना चाहती थी—जो हम कर रहे थे, जब वेटर ने दस्तक दी थी।
वो धीरे से मेरे पैरों के बीच आई।
उसके हाथ मेरी जांघों पर रखे—गर्म, नरम।
उसकी साँसें मेरे पजामा पर लग रही थीं।
मेरा लुंड फिर से हार्ड हो रहा था तेज़ी से।
वो ऊपर देखी—मेरी आँखों में।
फिर धीरे से पजामा के किनारे पर हाथ रखा।
एक झटके में—पूरा नीचे खींच दिया।
मेरा लुंड फिर से बाहर आ गया—खुला, हवा में, अभी भी हार्ड लेकिन थोड़ा सा थका हुआ।
वेटर अभी भी रास्ते में खड़ा था—ट्रे हाथ में, आँखें मेरी तरफ।
उसने देखा।
एक पल के लिए उसकी आँखें मेरे लुंड पर टिकीं।
मुझे लगा... जैसे वो पिटी वाली मुस्कान दे रहा हो।
एक छोटी सी, छुपी हुई मुस्कान—जैसे सोच रहा हो,
"ये क्या है.. छोटआ सआ ?
ये सोच मेरे दिमाग में आई—और मेरा लुंड और सख्त हो गया।
एक अजीब सा जोश—गुस्सा, शर्म, और एक्साइटमेंट सब मिलकर।
सैंडी अब मेरे लुंड के हेड पर सीधी पहुँच गई।
कोई गेंदें नहीं चाटी इस बार।
सीधे हेड—जीभ से टच किया, होंठों से लपेटा।
उसकी जीभ गोल-गोल घूम रही थी—धीरे, लेकिन टेक्नीक से।
बिना हाथ के—सिर्फ़ मुँह।
कभी हेड को मुँह में लिया—हल्का सक्शन, जीभ से खेलती हुई।
कभी बाहर निकालकर पूरा शाफ्ट चाटा—नीचे से ऊपर, लंबे स्ट्रोक में।
कभी हेड को होंठों से दबाया—धीरे-धीरे।
फिर हेड बॉबिंग शुरू हुई—ऊपर-नीचे, गहराई तक।
उसका मुँह गर्म, गीला, टाइट।
हर बार नीचे जाते हुए हल्की सी गैगिंग की आवाज़—लेकिन वो रुकी नहीं।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—विंक किया।
मैं बस देखता रहा।
मेरा सिर पीछे गिर गया।
एक गहरी आह निकली—"आह्ह... सैंडी..."
मेरा दिमाग अब सिर्फ़ एक चीज़ पर फोकस था—मेरा लुंड।
आँखें बंद थे।
सैंडी की जीभ... उसके होंठ... उसका मुँह... सब कुछ महसूस हो रहा था।
वो अब और तेज़ी से कर रही थी—हेड बॉबिंग, जीभ घुमाकर, कभी पूरा अंदर लेकर, कभी सिर्फ़ हेड चूसकर।
उसकी साँसें मेरे पेट पर लग रही थीं—गर्म, तेज़।
उसके बाल मेरी जांघों पर गिर रहे थे।
मुझे लग रहा था वो जल्दी से काम खत्म करना चाहती है।
शायद इसलिए कि अलोक ने इस बार कोई ऑर्डर नहीं दिया था—वो खुद से कर रही थी।
या शायद इसलिए कि मैं ही एकमात्र ऐसा था जिसने अभी तक उसे "प्ले" नहीं किया था।
या शायद... इसलिए कि मैंने उससे कभी रफ़ बात नहीं की, कभी "कुतिया" नहीं कहा, कभी जोर से नहीं पकड़ा।
मैंने हमेशा "प्लीज़" कहा, "थैंक्यू" कहा।
शायद वो मुझे "पॉलिट" फील कर रही थी।
मैंने आँखें खोलीं।
एक हल्की सी कुड़कुड़ी के साथ—जैसे कोई सपना टूट रहा हो।
फिर नज़र गई—वेटर पर।
उसके हाथ में ट्रे नहीं थी।
ट्रे टेबल पर रखी हुई थी।
उसका लुंड बाहर था—पैंट से निकालकर हाथ में पकड़ा हुआ।
वो पीछे खड़ा था—सैंडी से दूर, लेकिन साफ़ दिख रहा था।
उसका लुंड मेरा से बड़ा था—मोटा, काला, नसों से भरा।
वो बस देख रहा था—सैंडी को, उसके मुँह को मेरे लुंड पर, उसके स्तनों को हिलते हुए।
और अपना लुंड रगड़ रहा था—धीरे-धीरे, लेकिन लगातार।
पाँचवाँ लुंड कमरे में।
और पाँचवाँ... मुझसे बड़ा।
सैंडी को कुछ पता नहीं था—उसका मुँह मेरे लुंड पर था, आँखें बंद, फोकस सिर्फ़ मुझे कम करने पर।
वो नहीं जानती थी कि वेटर पीछे खड़ा है—उसका लुंड हाथ में, उसे देखकर रगड़ रहा है।
सैंडी अब पूरी डेडिकेशन से काम कर रही थी—उसकी जीभ मेरे लुंड के हेड पर घूम रही थी, होंठों से हल्का सक्शन दे रही थी, कभी पूरा अंदर लेकर, कभी सिर्फ़ टिप चूसकर।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं—भूखी, लेकिन कंट्रोल्ड।
वो जानती थी कि मुझे जल्दी खत्म करना है।
अलोक अभी भी सोफे पर बैठा था—मेरे बगल में।
उसने वेटर की तरफ देखा, जो अब ट्रे टेबल पर रखकर दूर खड़ा था, अपना लुंड हाथ में पकड़े हुए, धीरे-धीरे रगड़ रहा था।
अलोक ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए पूछा,
"तो तेरी जॉब मज़ेदार है... क्या तुझे ऐसे सीन अक्सर देखने को मिलते हैं?"
वेटर ने हल्के से हँसा—आवाज़ में खुशी और शर्म दोनों।
"नहीं सर... अक्सर नहीं... लेकिन आज तो मेरा लकी डे है।"
उसने अपना लुंड और जोर से रगड़ा।
अलोक ने मुस्कुराकर पूछा,
"क्यों? मेरी कुतिया की वजह से?"
वेटर ने सिर हिलाया—आँखें सैंडी पर।
"येस सर... और दूसरी कुतिया..."
वो बीच में रुक गया—जैसे बोलते-बोलते डर गया हो।
डेविड ने बीच में कूद पड़ा—उसकी आवाज़ में उत्सुकता और गंदी हँसी।
"बोल ना भेन के लोड़े... आज और कौन-कौन सी कुतिया देखी है तूने?"
वेटर ने एक पल के लिए रुका।
मेरा दिल एक पल के लिए रुक गया।
वेटर की आँखें मेरी आँखों में टिकी हुई थीं—एक सेकंड के लिए सब कुछ साइलेंट हो गया।
कमरे में सिर्फ़ सैंडी की साँसें सुनाई दे रही थीं—मेरे लुंड पर उसके मुँह की गर्मी अभी भी महसूस हो रही थी, लेकिन अब वो भी रुक गई थी।
उसकी आँखें ऊपर उठीं—मेरी तरफ देख रही थीं, जैसे पूछ रही हो "क्या करूँ?"
उसका मुँह अभी भी मेरा लुंड लिए हुए था, लेकिन वो हिल नहीं रही थी।
वेटर ने धीरे से पूछा—आवाज़ में उत्सुकता और डर दोनों।
"क्या मैं बोलूँ...?"
मैंने तुरंत सिर हिलाया—ना में।
बहुत तेज़ी से, लेकिन बहुत हल्के से—जैसे कोई देख न ले।
मैंने सोचा शायद कोई नोटिस नहीं करेगा।
लेकिन कमरे में सबकी आँखें मुझ पर थीं।
अलोक।
विशाल।
डेविड।
और सैंडी—मेरा लुंड मुँह में लिए हुए, ऊपर देख रही थी।
सब देख रहे थे।
वेटर ने मेरी "ना" देखी।
वो रुक गया।
उसकी आँखें नीचे झुक गईं—जैसे कोई बच्चा डाँट खा गया हो।
लेकिन वो रुका नहीं—अपना लुंड अभी भी हाथ में पकड़े हुए था, धीरे-धीरे रगड़ रहा था।
डेविड ने बीच में कूदने की कोशिश की—उसकी आवाज़ में उत्सुकता।
"अरे बोल ना साले... क्या राज़ है?"
लेकिन कोई और कुछ नहीं बोला।
अलोक ने सिगरेट का कश लिया।
धुआँ ऊपर फेंका।
फिर धीरे से कहा—आवाज़ में वही कंट्रोल, वही मालिक वाली टोन।
"बस... जो नहीं कहना चाहता... वो मत बोल।
गेस्ट है।
रिस्पेक्ट करो।"
डेविड और विशाल चुप हो गए।
कोई ज़ोर नहीं दिया।
कोई चिल्लाया नहीं।
अलोक ने उन्हें अच्छे से सिखा रखा था—गेस्ट के सामने कैसे बिहेव करना है।
पैसे वाले आदमी की बात—सब मानते हैं।
सैंडी ने धीरे से मुँह हटाया।
मेरा लुंड बाहर आया—गीला, चमकता हुआ।
उठी—ग्रेसफुल तरीके से, जैसे कोई नाच रही हो।
मैंने सोचा—अब खत्म।
बस... अब जा सकता हूँ।
लेकिन वो मेरी गोद में आ गई।
मेरी जांघों पर बैठ गई—नंगी, गर्म, हल्की सी काँपती हुई।
उसके हाथ मेरे बालों में गए—उँगलियाँ धीरे से सहलाने लगीं।
फिर झुकी—उसके होंठ मेरे होंठों पर।
गहरा किस।
बहुत गहरा।
उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली—धीरे-धीरे, लेकिन भूख के साथ।
उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे—गर्म, नरम, अभी भी वेटर की लार से गीले।
मैंने जवाब दिया—बिना सोचे, हाथ उसकी कमर पर रख दिए।
किस खत्म हुआ।
वो पीछे हटी—थोड़ा सा।
फिर मेरे सिर को अपनी गर्दन पर गाइड किया।
मैंने किस करना शुरू किया—गर्दन पर, हल्के से चाटा।
उसकी स्किन गर्म थी—पसीने और लार की खुशबू।
वो हल्का सा कराही—"आह्ह..."
फिर वो सीना ऊपर किया।
एक स्तन मेरे मुँह के सामने लाया।
मैंने लिया—चूसा, जीभ घुमाई, हल्का सा काटा।
दूसरा स्तन—वही।
उसकी आहें अब और गहरी—"उफ्फ... सैम..."
वो मेरे नाम को फुसफुसा रही थी—धीरे से, लेकिन बहुत सेक्सी।
मैं पागल हो रहा था।
उसके स्तन... इतने परफेक्ट, इतने गर्म... मैं चाट रहा था, चूस रहा था, खेल रहा था।
उसकी आहें मेरे कान में गूंज रही थीं—मुझे और क्रेजी बना रही थीं।
फिर वो मेरे कान के पास आई—होंठ मेरे कान से लगे।
फुसफुसाई—बहुत धीरे, बहुत गर्म।
"मुझे जानना है... क्या हुआ?"
मैं रुक गया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—भूखी, उत्सुक।
मैंने वेटर की तरफ देखा।
वो अभी भी खड़ा था—दूर से, लेकिन आँखें हम पर।
उसने पलक झपकाई—एक छोटी सी, हाँ वाली।
जैसे कह रहा हो—"बोल दो... मैंने देखा है... सब जानता हूँ।"
मेरा दिमाग घूम गया।
सैंडी... ये सब... ये किस... ये स्तन... ये आहें...
ये सब... एक तरह की रिश्वत लग रही थी।
वो मुझे "खरीद" रही थी—जानकारी के लिए।
जानना चाहती थी कि वेटर क्या कहने वाला था।
सैंडी अब मेरी गर्दन पर किस कर रही थी—धीरे-धीरे, गर्म होंठों से, जीभ हल्की सी छूती हुई।
उसकी साँसें मेरी स्किन पर गर्म लग रही थीं।
तभी वेटर ने एक साँस में बोल दिया—जैसे रुक नहीं पा रहा हो।
"मैंने सर की बीवी को सुबह देखा था... नंगी... सिर्फ़ लाल पैंटी में।"
कमरा एकदम सन्नाटे में डूब गया।
सैंडी रुक गई—उसके होंठ मेरी गर्दन पर जम गए।
उसकी साँसें भी रुक गईं।
सबकी नज़रें वेटर पर टिक गईं।
अलोक, विशाल, डेविड—तीनों की आँखें फैल गईं।
उनके लुंड हाथ में थे—सब हार्ड, फड़कते हुए।
अलोक ने सिगरेट नीचे रखा।
आवाज़ सख्त, लेकिन उत्सुक।
"बताओ... डिटेल्स?"
वेटर ने गले की हल्की खराश ली।
फिर बोलने लगा—आवाज़ में एक अजीब सा जोश।
"सुबह कॉफी देने गया था... कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला था।
अंदर बाथरूम का दरवाज़ा भी खुला था।
वो... सर की बीवी... शावर ले रही थीं।
सिर्फ़ लाल पैंटी में।
ऊपर से कुछ नहीं।
उसके बूब्स... पूरी तरह खुले थे।
गोल, भारी, निप्पल्स गुलाबी... पानी से चमक रहे थे।
वो बाल धो रही थीं... हाथ ऊपर... बूब्स और ऊपर उठे हुए।
मैं बस खड़ा देखता रहा... 10 सेकंड... 15 सेकंड...
अलोक ने सिगरेट का एक लंबा कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका और धीरे से बोला—आवाज़ में एक अजीब सा मज़ाक और जलन मिला हुआ।
"तो फिर तू आज हमसे ज़्यादा लकी है... मैं तो बस सोच रहा हूँ... काश मैं भी उसे ऐसे देख पाता... जैसे तूने देखा।"
सबकी नज़रें वेटर पर थीं—विशाल और डेविड ने "हम्म..." किया, जैसे याद कर रहे हों।
सुबह रिसेप्शन पर नेहा—मंगलसूत्र चमकता हुआ, चूड़ियाँ हिलती हुई।
उनके दिमाग में वही इमेज घूम रही थी—और अब वो इमेज "नंगी, सिर्फ़ लाल पैंटी में" के साथ मिक्स हो गई थी।
सबके चेहरों पर एक ही एक्सप्रेशन—भूख, जलन, और एक काला मज़ा।
सबके लुंड फिर से हाथ में थे—धीरे-धीरे रगड़ रहे थे।
सैंडी अब फिर घुटनों पर बैठ गई।
मेरा लुंड उसके मुँह में फिर से ले लिया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—नॉटी, शरारती मुस्कान।
जैसे कह रही हो—"देख... टेबल टर्न हो गया।
तुम्हारी फैमिली वुमन अब बात का विषय है... कैसा लग रहा है?"
मैं अब भी रफ खेलना नहीं चाहता था सैंडी के साथ।
लेकिन आज रात का सब कुछ—वेटर की बातें, नेहा का नाम, वो इमेजिनेशन, वो जलन—सब कुछ मेरे अंदर एक आग बना रहा था।
गुस्सा... शर्म... सब मिलकर मुझे कंट्रोल से बाहर कर रहे थे।
मैंने पहली बार उसका सिर पकड़ा—दोनों हाथों से, बालों में उँगलियाँ फंसाकर।
सख्ती से।
नहीं बहुत ज़ोर से
फिर एक झटके में—मेरा लुंड उसके मुँह में पूरा धकेल दिया।
गहराई तक।
उसकी नाक मेरे निचले पेट से दब गई।
उसकी साँसें रुक गईं—नाक से हल्की सी आवाज़ आई, लेकिन वो विरोध नहीं कर रही थी।
मैं धक्के देता रहा।
धीरे-धीरे नहीं—जोर से, गुस्से में।
30 सेकंड... 45 सेकंड... 60 सेकंड...
उसका गला भरा हुआ था—मैं महसूस कर रहा था उसकी गर्मी, उसकी जीभ, उसकी साँसों की कोशिश।
उसकी आँखें पानी से भर गईं—काजल बह रहा था, लेकिन वो रुकी नहीं।
उसके हाथ मेरी जांघों पर थे—कभी कसकर पकड़ते, कभी हल्के से थपथपाते।
फिर उसने मेरी जांघों पर थपकी दी—यूनिवर्सल सिग्नल।
"बस... छोड़ दो।"
मैंने तुरंत छोड़ा।
उसका सिर पीछे हटा।
वो जोर-जोर से साँस ले रही थी—मुँह से लार बह रही थी, आँखें लाल, लेकिन मुस्कुरा रही थी।
सैंडी अब ज़मीन पर थी—डॉगी स्टाइल में।
घुटनों और हाथों के बल, कमर थोड़ी झुकी हुई, गांड ऊपर उठी हुई।
वो मेरी तरफ देख रही थी—आँखें चमकती हुईं, होंठ हल्के खुले।
फिर धीरे से गर्दन घुमाई—सबकी तरफ देखा।
अलोक, विशाल, डेविड, वेटर—सब पर नज़र घुमाई।
फिर धीरे से पैर थोड़े फैलाए—जांघों में गैप बनाया।
चूत अब थोड़ी दिख रही थी—गीली, सूजी हुई, अभी भी कम से चमकती हुई।
फिर एक हाथ पीछे ले गई—अपनी ही गांड पर जोर से थप्पड़ मारा।
फट्ट!
आवाज़ कमरे में गूंज गई।
उसकी गांड हिली—लाल निशान बन गया।
ये सिग्नल था।
वो हीट में थी।
भूखी थी।
किसी को चाहिए था—अब।
डेविड तुरंत खड़ा हो गया—लुंड हाथ में पकड़े, आँखें भूखी।
उसने एक कदम आगे बढ़ाया।
लेकिन अलोक ने उँगली उठाई—एक छोटा सा इशारा।
"मेरी बारी है अब।"
डेविड रुक गया—हँसा, लेकिन पीछे हट गया।
अलोक ने धीरे से मेरी तरफ देखा।
"बॉय... तू तैयार है?"
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस अपनी गांड को सोफे के किनारे पर शिफ्ट किया।
सैंडी मेरे सामने थी—डॉगी में, गांड ऊपर
उसने अपना लुंड पकड़ा—मोटा, सख्त, तैयार।
धीरे से सैंडी की चूत पर रखा।
एक झटके में—पूरा अंदर।
सैंडी की आह निकली—"आह्ह्ह..."
उसका बदन झटका खा गया।
अलोक ने धक्का देना शुरू किया—जोर से, गहराई से।
हर थ्रस्ट में सैंडी का सिर मेरी तरफ झुकता—उसके होंठ मेरे लुंड के पास।
मैंने उसके बाल और सख्त पकड़े।
उसका मुँह फिर से मेरे लुंड पर आ गया।
वो चूसने लगी—अलोक के धक्कों के साथ रिदम में।
कमरा फिर से आवाज़ों से भर गया—गीली आवाज़ें, आहें, थप्पड़, साँसें।
विशाल और डेविड देख रहे थे—लुंड हाथ में, मुस्कुराते हुए।
वेटर दूर खड़ा था अपना लुंड फिर से रगड़ रहा था।
सैंडी अब बीच में थी—दोनों तरफ से।
अलोक पीछे से, मैं सामने से।
उसकी आहें अब लगातार—"आह्ह... हाँ... और... और..."
वो चुप थी।
आँखें नीचे, साँसें धीमी लेकिन गहरी।
उसका चेहरा शांत था—कोई गुस्सा नहीं, कोई शर्म नहीं, बस एक तरह की खामोशी।
मेरा दिमाग अब पूरी तरह उस पर अटक गया था।
वो बेलाकिर है।
इंस्टा पर मिलियंस फॉलोअर्स।
लंदन, पेरिस, दुबई—महंगे होटल्स, लग्ज़री कार्स, प्राइवेट पार्टियाँ।
रिच किड्स उसे DM करते होंगे—फ्लर्ट, ऑफर, "चलो मिलते हैं"।
कई को रिप्लाई भी मिलता होगा।
कई को मिलने का मौका भी।
वो उनके लिए सपना है—एक हाई-क्लास, सेक्सी, अनअटेनेबल लड़की।
फिर परिवार की फोटोज़—माँ-बाप के साथ, बहन-भाई के साथ, त्योहारों में।
एक दिन वो किसी से सेटल होगी।
ग्रैंड वेडिंग—साड़ी में, सिंदूर लगाकर, मंगलसूत्र पहनकर।
उसका पति बहुत खुश होगा—सोचेगा "मैंने बेलाकिर को पाया"।
लेकिन आज... वो यहाँ है।
एक सस्ते होटल के कमरे में।
एक वेटर ने उसकी चूत सूँघी।
ड्राइवर ने उसे रफ तरीके से चोदा—बाइट मार्क्स दिए।
बॉडीगार्ड ने उसके मुँह में डाला।
और अलोक... अलोक ने सब डिसाइड किया।
वो उसकी प्रॉपर्टी है।
वो कहेगा तो सैंडी "हाँ" कहेगी।
वो कहेगा तो "नो" नहीं कह सकती।
मैं उसे देखता रहा।
वो चुप थी।
शायद वो भी यही सोच रही हो।
"एक दिन मैं किसी अमीर लड़के से शादी करूँगी... घर बसाऊँगी... बच्चे होंगे... लेकिन आज... आज मैं यहाँ हूँ।
एक वेटर के सामने नंगी खड़ी हूँ।
एक ड्राइवर और बॉडीगार्ड के कम से सनी हुई हूँ।
और अलोक भाई जो कहेंगे... वो करूँगी।
कमरे में एक गहरी खामोशी छा गई थी—सिर्फ़ साँसों की हल्की आवाज़ और सिगरेट का धुआँ ऊपर उठता हुआ।
फिर विशाल ने अचानक जोर से हँसा—एक गंदी, जानवर जैसी हँसी।
"साले वेटर... तू तो आज सपना देख रहा है!"
डेविड ने भी साथ दिया—उसकी हँसी और ऊँची।
"हाँ भाई... तूने देख लिया... अब जा, घर जा... कल सुबह ड्यूटी पर आ जाना।"
अलोक ने भी हल्के से हँसा—लेकिन उसकी हँसी अलग थी।
मैं चुप रहा—चेहरा सख्त, सीधा।
सैंडी ने भी सिर्फ़ मुस्कुराया—एक हल्की, थकी हुई मुस्कान, लेकिन कोई हँसी नहीं।
उसकी आँखें नीचे थीं।
फिर वो धीरे से टेबल की तरफ बढ़ी।
हर कदम के साथ उसका बदन हिल रहा था—नंगी जांघें, स्तन हल्के से उछलते हुए, गांड की मूवमेंट।
वो बिना रुके वोदका की बॉटल उठाई।
बोतल मुँह में लगाई।
गटक... गटक... गटक...
सीधे बोतल से, नीट।
कोई ग्लास नहीं।
जैसे वो कुछ भूलना चाहती हो—जल्दी से, बहुत जल्दी।
या शायद... हिम्मत जुटाना चाहती हो।
मुझे नहीं पता।
वो बोतल नीचे रखी।
फिर धीरे से सबकी तरफ मुड़ी—अलोक, विशाल, डेविड, वेटर... और मुझे।
उसकी आँखें मेरी आँखों से मिलीं—एक पल के लिए।
फिर वो सबके बीच में आई।
वेटर अभी भी रास्ते में खड़ा था।
सैंडी उसके सामने से गुज़री—उसका नंगा बदन वेटर के ठीक सामने।
वेटर की साँसें रुक गईं—आँखें उसके स्तनों पर, फिर नीचे।
लेकिन वो हिला नहीं।
बस देखता रहा।
जैसे ही सैंडी उसके पास से गुज़री, वो रुकी।
एक सेकंड के लिए।
फिर झुकी—उसके होंठ वेटर के होंठों पर रख दिए।
एक छोटा सा, हल्का सा किस—बस 1 सेकंड का।
नरम, गर्म ।
फिर उसका हाथ नीचे गया—वेटर के पैंट के ऊपर से उसके बुल्ज पर।
एक हल्का सा कप—जैसे क्यूरियॉसिटी से चेक कर रही हो—"ये कितना है?"
वेटर की साँस रुक गई।
उसकी आँखें बंद हो गईं—मज़े में।
सैंडी ने मुस्कुराकर उसे देखा।
फिर बिना कुछ कहे आगे बढ़ी—वेटर के पास से गुज़रकर, सीधे मेरी तरफ।
वो मेरे ठीक सामने आई।
ग्रेसफुल तरीके से घुटनों पर बैठ गई।
दोनों हाथ सिर के पीछे ले गई—बाल अरेंज करने लगी।
उसके स्तन अब और ऊपर उठे—चमकते हुए, वेटर की लार से गीले, निप्पल्स हार्ड।
मैं बस देखता रहा—उसकी आँखें मेरी आँखों में।
उसकी मुस्कान—एक छोटी, शरारती, लेकिन थकी हुई।
मैं जानता था वो क्या करने वाली है।
वो पहले वाली जगह पर वापस आना चाहती थी—जो हम कर रहे थे, जब वेटर ने दस्तक दी थी।
वो धीरे से मेरे पैरों के बीच आई।
उसके हाथ मेरी जांघों पर रखे—गर्म, नरम।
उसकी साँसें मेरे पजामा पर लग रही थीं।
मेरा लुंड फिर से हार्ड हो रहा था तेज़ी से।
वो ऊपर देखी—मेरी आँखों में।
फिर धीरे से पजामा के किनारे पर हाथ रखा।
एक झटके में—पूरा नीचे खींच दिया।
मेरा लुंड फिर से बाहर आ गया—खुला, हवा में, अभी भी हार्ड लेकिन थोड़ा सा थका हुआ।
वेटर अभी भी रास्ते में खड़ा था—ट्रे हाथ में, आँखें मेरी तरफ।
उसने देखा।
एक पल के लिए उसकी आँखें मेरे लुंड पर टिकीं।
मुझे लगा... जैसे वो पिटी वाली मुस्कान दे रहा हो।
एक छोटी सी, छुपी हुई मुस्कान—जैसे सोच रहा हो,
"ये क्या है.. छोटआ सआ ?
ये सोच मेरे दिमाग में आई—और मेरा लुंड और सख्त हो गया।
एक अजीब सा जोश—गुस्सा, शर्म, और एक्साइटमेंट सब मिलकर।
सैंडी अब मेरे लुंड के हेड पर सीधी पहुँच गई।
कोई गेंदें नहीं चाटी इस बार।
सीधे हेड—जीभ से टच किया, होंठों से लपेटा।
उसकी जीभ गोल-गोल घूम रही थी—धीरे, लेकिन टेक्नीक से।
बिना हाथ के—सिर्फ़ मुँह।
कभी हेड को मुँह में लिया—हल्का सक्शन, जीभ से खेलती हुई।
कभी बाहर निकालकर पूरा शाफ्ट चाटा—नीचे से ऊपर, लंबे स्ट्रोक में।
कभी हेड को होंठों से दबाया—धीरे-धीरे।
फिर हेड बॉबिंग शुरू हुई—ऊपर-नीचे, गहराई तक।
उसका मुँह गर्म, गीला, टाइट।
हर बार नीचे जाते हुए हल्की सी गैगिंग की आवाज़—लेकिन वो रुकी नहीं।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—विंक किया।
मैं बस देखता रहा।
मेरा सिर पीछे गिर गया।
एक गहरी आह निकली—"आह्ह... सैंडी..."
मेरा दिमाग अब सिर्फ़ एक चीज़ पर फोकस था—मेरा लुंड।
आँखें बंद थे।
सैंडी की जीभ... उसके होंठ... उसका मुँह... सब कुछ महसूस हो रहा था।
वो अब और तेज़ी से कर रही थी—हेड बॉबिंग, जीभ घुमाकर, कभी पूरा अंदर लेकर, कभी सिर्फ़ हेड चूसकर।
उसकी साँसें मेरे पेट पर लग रही थीं—गर्म, तेज़।
उसके बाल मेरी जांघों पर गिर रहे थे।
मुझे लग रहा था वो जल्दी से काम खत्म करना चाहती है।
शायद इसलिए कि अलोक ने इस बार कोई ऑर्डर नहीं दिया था—वो खुद से कर रही थी।
या शायद इसलिए कि मैं ही एकमात्र ऐसा था जिसने अभी तक उसे "प्ले" नहीं किया था।
या शायद... इसलिए कि मैंने उससे कभी रफ़ बात नहीं की, कभी "कुतिया" नहीं कहा, कभी जोर से नहीं पकड़ा।
मैंने हमेशा "प्लीज़" कहा, "थैंक्यू" कहा।
शायद वो मुझे "पॉलिट" फील कर रही थी।
मैंने आँखें खोलीं।
एक हल्की सी कुड़कुड़ी के साथ—जैसे कोई सपना टूट रहा हो।
फिर नज़र गई—वेटर पर।
उसके हाथ में ट्रे नहीं थी।
ट्रे टेबल पर रखी हुई थी।
उसका लुंड बाहर था—पैंट से निकालकर हाथ में पकड़ा हुआ।
वो पीछे खड़ा था—सैंडी से दूर, लेकिन साफ़ दिख रहा था।
उसका लुंड मेरा से बड़ा था—मोटा, काला, नसों से भरा।
वो बस देख रहा था—सैंडी को, उसके मुँह को मेरे लुंड पर, उसके स्तनों को हिलते हुए।
और अपना लुंड रगड़ रहा था—धीरे-धीरे, लेकिन लगातार।
पाँचवाँ लुंड कमरे में।
और पाँचवाँ... मुझसे बड़ा।
सैंडी को कुछ पता नहीं था—उसका मुँह मेरे लुंड पर था, आँखें बंद, फोकस सिर्फ़ मुझे कम करने पर।
वो नहीं जानती थी कि वेटर पीछे खड़ा है—उसका लुंड हाथ में, उसे देखकर रगड़ रहा है।
सैंडी अब पूरी डेडिकेशन से काम कर रही थी—उसकी जीभ मेरे लुंड के हेड पर घूम रही थी, होंठों से हल्का सक्शन दे रही थी, कभी पूरा अंदर लेकर, कभी सिर्फ़ टिप चूसकर।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं—भूखी, लेकिन कंट्रोल्ड।
वो जानती थी कि मुझे जल्दी खत्म करना है।
अलोक अभी भी सोफे पर बैठा था—मेरे बगल में।
उसने वेटर की तरफ देखा, जो अब ट्रे टेबल पर रखकर दूर खड़ा था, अपना लुंड हाथ में पकड़े हुए, धीरे-धीरे रगड़ रहा था।
अलोक ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए पूछा,
"तो तेरी जॉब मज़ेदार है... क्या तुझे ऐसे सीन अक्सर देखने को मिलते हैं?"
वेटर ने हल्के से हँसा—आवाज़ में खुशी और शर्म दोनों।
"नहीं सर... अक्सर नहीं... लेकिन आज तो मेरा लकी डे है।"
उसने अपना लुंड और जोर से रगड़ा।
अलोक ने मुस्कुराकर पूछा,
"क्यों? मेरी कुतिया की वजह से?"
वेटर ने सिर हिलाया—आँखें सैंडी पर।
"येस सर... और दूसरी कुतिया..."
वो बीच में रुक गया—जैसे बोलते-बोलते डर गया हो।
डेविड ने बीच में कूद पड़ा—उसकी आवाज़ में उत्सुकता और गंदी हँसी।
"बोल ना भेन के लोड़े... आज और कौन-कौन सी कुतिया देखी है तूने?"
वेटर ने एक पल के लिए रुका।
मेरा दिल एक पल के लिए रुक गया।
वेटर की आँखें मेरी आँखों में टिकी हुई थीं—एक सेकंड के लिए सब कुछ साइलेंट हो गया।
कमरे में सिर्फ़ सैंडी की साँसें सुनाई दे रही थीं—मेरे लुंड पर उसके मुँह की गर्मी अभी भी महसूस हो रही थी, लेकिन अब वो भी रुक गई थी।
उसकी आँखें ऊपर उठीं—मेरी तरफ देख रही थीं, जैसे पूछ रही हो "क्या करूँ?"
उसका मुँह अभी भी मेरा लुंड लिए हुए था, लेकिन वो हिल नहीं रही थी।
वेटर ने धीरे से पूछा—आवाज़ में उत्सुकता और डर दोनों।
"क्या मैं बोलूँ...?"
मैंने तुरंत सिर हिलाया—ना में।
बहुत तेज़ी से, लेकिन बहुत हल्के से—जैसे कोई देख न ले।
मैंने सोचा शायद कोई नोटिस नहीं करेगा।
लेकिन कमरे में सबकी आँखें मुझ पर थीं।
अलोक।
विशाल।
डेविड।
और सैंडी—मेरा लुंड मुँह में लिए हुए, ऊपर देख रही थी।
सब देख रहे थे।
वेटर ने मेरी "ना" देखी।
वो रुक गया।
उसकी आँखें नीचे झुक गईं—जैसे कोई बच्चा डाँट खा गया हो।
लेकिन वो रुका नहीं—अपना लुंड अभी भी हाथ में पकड़े हुए था, धीरे-धीरे रगड़ रहा था।
डेविड ने बीच में कूदने की कोशिश की—उसकी आवाज़ में उत्सुकता।
"अरे बोल ना साले... क्या राज़ है?"
लेकिन कोई और कुछ नहीं बोला।
अलोक ने सिगरेट का कश लिया।
धुआँ ऊपर फेंका।
फिर धीरे से कहा—आवाज़ में वही कंट्रोल, वही मालिक वाली टोन।
"बस... जो नहीं कहना चाहता... वो मत बोल।
गेस्ट है।
रिस्पेक्ट करो।"
डेविड और विशाल चुप हो गए।
कोई ज़ोर नहीं दिया।
कोई चिल्लाया नहीं।
अलोक ने उन्हें अच्छे से सिखा रखा था—गेस्ट के सामने कैसे बिहेव करना है।
पैसे वाले आदमी की बात—सब मानते हैं।
सैंडी ने धीरे से मुँह हटाया।
मेरा लुंड बाहर आया—गीला, चमकता हुआ।
उठी—ग्रेसफुल तरीके से, जैसे कोई नाच रही हो।
मैंने सोचा—अब खत्म।
बस... अब जा सकता हूँ।
लेकिन वो मेरी गोद में आ गई।
मेरी जांघों पर बैठ गई—नंगी, गर्म, हल्की सी काँपती हुई।
उसके हाथ मेरे बालों में गए—उँगलियाँ धीरे से सहलाने लगीं।
फिर झुकी—उसके होंठ मेरे होंठों पर।
गहरा किस।
बहुत गहरा।
उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली—धीरे-धीरे, लेकिन भूख के साथ।
उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे—गर्म, नरम, अभी भी वेटर की लार से गीले।
मैंने जवाब दिया—बिना सोचे, हाथ उसकी कमर पर रख दिए।
किस खत्म हुआ।
वो पीछे हटी—थोड़ा सा।
फिर मेरे सिर को अपनी गर्दन पर गाइड किया।
मैंने किस करना शुरू किया—गर्दन पर, हल्के से चाटा।
उसकी स्किन गर्म थी—पसीने और लार की खुशबू।
वो हल्का सा कराही—"आह्ह..."
फिर वो सीना ऊपर किया।
एक स्तन मेरे मुँह के सामने लाया।
मैंने लिया—चूसा, जीभ घुमाई, हल्का सा काटा।
दूसरा स्तन—वही।
उसकी आहें अब और गहरी—"उफ्फ... सैम..."
वो मेरे नाम को फुसफुसा रही थी—धीरे से, लेकिन बहुत सेक्सी।
मैं पागल हो रहा था।
उसके स्तन... इतने परफेक्ट, इतने गर्म... मैं चाट रहा था, चूस रहा था, खेल रहा था।
उसकी आहें मेरे कान में गूंज रही थीं—मुझे और क्रेजी बना रही थीं।
फिर वो मेरे कान के पास आई—होंठ मेरे कान से लगे।
फुसफुसाई—बहुत धीरे, बहुत गर्म।
"मुझे जानना है... क्या हुआ?"
मैं रुक गया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—भूखी, उत्सुक।
मैंने वेटर की तरफ देखा।
वो अभी भी खड़ा था—दूर से, लेकिन आँखें हम पर।
उसने पलक झपकाई—एक छोटी सी, हाँ वाली।
जैसे कह रहा हो—"बोल दो... मैंने देखा है... सब जानता हूँ।"
मेरा दिमाग घूम गया।
सैंडी... ये सब... ये किस... ये स्तन... ये आहें...
ये सब... एक तरह की रिश्वत लग रही थी।
वो मुझे "खरीद" रही थी—जानकारी के लिए।
जानना चाहती थी कि वेटर क्या कहने वाला था।
सैंडी अब मेरी गर्दन पर किस कर रही थी—धीरे-धीरे, गर्म होंठों से, जीभ हल्की सी छूती हुई।
उसकी साँसें मेरी स्किन पर गर्म लग रही थीं।
तभी वेटर ने एक साँस में बोल दिया—जैसे रुक नहीं पा रहा हो।
"मैंने सर की बीवी को सुबह देखा था... नंगी... सिर्फ़ लाल पैंटी में।"
कमरा एकदम सन्नाटे में डूब गया।
सैंडी रुक गई—उसके होंठ मेरी गर्दन पर जम गए।
उसकी साँसें भी रुक गईं।
सबकी नज़रें वेटर पर टिक गईं।
अलोक, विशाल, डेविड—तीनों की आँखें फैल गईं।
उनके लुंड हाथ में थे—सब हार्ड, फड़कते हुए।
अलोक ने सिगरेट नीचे रखा।
आवाज़ सख्त, लेकिन उत्सुक।
"बताओ... डिटेल्स?"
वेटर ने गले की हल्की खराश ली।
फिर बोलने लगा—आवाज़ में एक अजीब सा जोश।
"सुबह कॉफी देने गया था... कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला था।
अंदर बाथरूम का दरवाज़ा भी खुला था।
वो... सर की बीवी... शावर ले रही थीं।
सिर्फ़ लाल पैंटी में।
ऊपर से कुछ नहीं।
उसके बूब्स... पूरी तरह खुले थे।
गोल, भारी, निप्पल्स गुलाबी... पानी से चमक रहे थे।
वो बाल धो रही थीं... हाथ ऊपर... बूब्स और ऊपर उठे हुए।
मैं बस खड़ा देखता रहा... 10 सेकंड... 15 सेकंड...
अलोक ने सिगरेट का एक लंबा कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका और धीरे से बोला—आवाज़ में एक अजीब सा मज़ाक और जलन मिला हुआ।
"तो फिर तू आज हमसे ज़्यादा लकी है... मैं तो बस सोच रहा हूँ... काश मैं भी उसे ऐसे देख पाता... जैसे तूने देखा।"
सबकी नज़रें वेटर पर थीं—विशाल और डेविड ने "हम्म..." किया, जैसे याद कर रहे हों।
सुबह रिसेप्शन पर नेहा—मंगलसूत्र चमकता हुआ, चूड़ियाँ हिलती हुई।
उनके दिमाग में वही इमेज घूम रही थी—और अब वो इमेज "नंगी, सिर्फ़ लाल पैंटी में" के साथ मिक्स हो गई थी।
सबके चेहरों पर एक ही एक्सप्रेशन—भूख, जलन, और एक काला मज़ा।
सबके लुंड फिर से हाथ में थे—धीरे-धीरे रगड़ रहे थे।
सैंडी अब फिर घुटनों पर बैठ गई।
मेरा लुंड उसके मुँह में फिर से ले लिया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—नॉटी, शरारती मुस्कान।
जैसे कह रही हो—"देख... टेबल टर्न हो गया।
तुम्हारी फैमिली वुमन अब बात का विषय है... कैसा लग रहा है?"
मैं अब भी रफ खेलना नहीं चाहता था सैंडी के साथ।
लेकिन आज रात का सब कुछ—वेटर की बातें, नेहा का नाम, वो इमेजिनेशन, वो जलन—सब कुछ मेरे अंदर एक आग बना रहा था।
गुस्सा... शर्म... सब मिलकर मुझे कंट्रोल से बाहर कर रहे थे।
मैंने पहली बार उसका सिर पकड़ा—दोनों हाथों से, बालों में उँगलियाँ फंसाकर।
सख्ती से।
नहीं बहुत ज़ोर से
फिर एक झटके में—मेरा लुंड उसके मुँह में पूरा धकेल दिया।
गहराई तक।
उसकी नाक मेरे निचले पेट से दब गई।
उसकी साँसें रुक गईं—नाक से हल्की सी आवाज़ आई, लेकिन वो विरोध नहीं कर रही थी।
मैं धक्के देता रहा।
धीरे-धीरे नहीं—जोर से, गुस्से में।
30 सेकंड... 45 सेकंड... 60 सेकंड...
उसका गला भरा हुआ था—मैं महसूस कर रहा था उसकी गर्मी, उसकी जीभ, उसकी साँसों की कोशिश।
उसकी आँखें पानी से भर गईं—काजल बह रहा था, लेकिन वो रुकी नहीं।
उसके हाथ मेरी जांघों पर थे—कभी कसकर पकड़ते, कभी हल्के से थपथपाते।
फिर उसने मेरी जांघों पर थपकी दी—यूनिवर्सल सिग्नल।
"बस... छोड़ दो।"
मैंने तुरंत छोड़ा।
उसका सिर पीछे हटा।
वो जोर-जोर से साँस ले रही थी—मुँह से लार बह रही थी, आँखें लाल, लेकिन मुस्कुरा रही थी।
सैंडी अब ज़मीन पर थी—डॉगी स्टाइल में।
घुटनों और हाथों के बल, कमर थोड़ी झुकी हुई, गांड ऊपर उठी हुई।
वो मेरी तरफ देख रही थी—आँखें चमकती हुईं, होंठ हल्के खुले।
फिर धीरे से गर्दन घुमाई—सबकी तरफ देखा।
अलोक, विशाल, डेविड, वेटर—सब पर नज़र घुमाई।
फिर धीरे से पैर थोड़े फैलाए—जांघों में गैप बनाया।
चूत अब थोड़ी दिख रही थी—गीली, सूजी हुई, अभी भी कम से चमकती हुई।
फिर एक हाथ पीछे ले गई—अपनी ही गांड पर जोर से थप्पड़ मारा।
फट्ट!
आवाज़ कमरे में गूंज गई।
उसकी गांड हिली—लाल निशान बन गया।
ये सिग्नल था।
वो हीट में थी।
भूखी थी।
किसी को चाहिए था—अब।
डेविड तुरंत खड़ा हो गया—लुंड हाथ में पकड़े, आँखें भूखी।
उसने एक कदम आगे बढ़ाया।
लेकिन अलोक ने उँगली उठाई—एक छोटा सा इशारा।
"मेरी बारी है अब।"
डेविड रुक गया—हँसा, लेकिन पीछे हट गया।
अलोक ने धीरे से मेरी तरफ देखा।
"बॉय... तू तैयार है?"
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस अपनी गांड को सोफे के किनारे पर शिफ्ट किया।
सैंडी मेरे सामने थी—डॉगी में, गांड ऊपर
उसने अपना लुंड पकड़ा—मोटा, सख्त, तैयार।
धीरे से सैंडी की चूत पर रखा।
एक झटके में—पूरा अंदर।
सैंडी की आह निकली—"आह्ह्ह..."
उसका बदन झटका खा गया।
अलोक ने धक्का देना शुरू किया—जोर से, गहराई से।
हर थ्रस्ट में सैंडी का सिर मेरी तरफ झुकता—उसके होंठ मेरे लुंड के पास।
मैंने उसके बाल और सख्त पकड़े।
उसका मुँह फिर से मेरे लुंड पर आ गया।
वो चूसने लगी—अलोक के धक्कों के साथ रिदम में।
कमरा फिर से आवाज़ों से भर गया—गीली आवाज़ें, आहें, थप्पड़, साँसें।
विशाल और डेविड देख रहे थे—लुंड हाथ में, मुस्कुराते हुए।
वेटर दूर खड़ा था अपना लुंड फिर से रगड़ रहा था।
सैंडी अब बीच में थी—दोनों तरफ से।
अलोक पीछे से, मैं सामने से।
उसकी आहें अब लगातार—"आह्ह... हाँ... और... और..."


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)