21-02-2026, 01:05 PM
शेर दरवाजे के पास खड़ा होकर एक आखिरी बार उस मखमली, गोरे बदन को निहारने लगा।
शेर (मन ही मन, शैतानी मुस्कान के साथ): "आज तो सिर्फ चखा है, मैडम जी... मेरी जीभ ने तुम्हारी चूत का स्वाद चख लिया... मेरे हाथों ने तुम्हारे चुचियों को दबाया... लेकिन असली मजा अभी बाकी है। जिस दिन ये 7 इंच का लट्ठा तुम्हारे भीतर पूरा उतरेगा... उस दिन तुम सरताज को सच में भूल जाओगी।"
वह दबे पांव कमरे से बाहर निकला। दरवाजा वैसे ही बंद किया जैसे पहले था। रसोई में जाकर अनार के जूस का खाली गिलास धोया, उसे रैक में रख दिया। कोई सबूत नहीं बचा।
जब वह गलियारे में खड़ा हुआ, तो उसके चेहरे पर एक शैतानी जीत की चमक थी। बाहर से वह वही सीधा-सादा, वफादार नौकर लग रहा था—जो अपने मालिक के आने का इंतजार कर रहा था। लेकिन अंदर से... अंदर से वह अब एक शिकारी था, जिसने अपने शिकार को चख लिया था… और अब पूरी तरह हड़पने का इंतजार कर रहा था।
शेर (मन ही मन, शैतानी मुस्कान के साथ): "आज तो सिर्फ चखा है, मैडम जी... मेरी जीभ ने तुम्हारी चूत का स्वाद चख लिया... मेरे हाथों ने तुम्हारे चुचियों को दबाया... लेकिन असली मजा अभी बाकी है। जिस दिन ये 7 इंच का लट्ठा तुम्हारे भीतर पूरा उतरेगा... उस दिन तुम सरताज को सच में भूल जाओगी।"
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Deepak Kapoor
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