21-02-2026, 06:42 AM
मै बिहार के एक गाँव मे अपने माँ पापा और तीन भाई बहन के साथ रहता हूँ हम एक मध्यवर्गीय परिवार से है जहाँ मेरे पिता एक छोटे मोटे जॉब करते है जिससे हमारे घर का खर्च भी सही से नही चल पाता है इसलिए मेरी माँ संगीता सिंह ने घर के आर्थिक स्थित को देखते हुए पापा से काम करने के लिए बोली वैसे भी वह शादी से पहले अपने ही गाँव के छोटे से प्राइवेट कॉलेज मे पढ़ाने जाती थी पर शादी की बाद छोड़ दिया था लेकिन घर की स्थित देखकर वह फिर से पढ़ाने जाने का सोचने लगी पर उनका घर मतलब मायका दूर था इसलिए वह हम जहाँ अभी रहते है वही के प्राइवेट कॉलेज मे पढ़ाने का सोचा जब पापा ने उनको पढ़ाने जाने के लिए बोल दिये तो वह एक कॉलेज मे बात करके पढ़ाने जाने लगी माँ ज्यादा पढ़ी लिखी नही है फिर भी छोटे बच्चे नर्सरी से पांचवी के बच्चों को पढ़ाने लगी
मैने भी अपने पढ़ाई की शुरुआत माँ के कॉलेज से ही किया है तब मै रोज माँ के कॉलेज जाता था कॉलेज मे मै माँ को सब जो बुलाते थे वही बोलकर बुलाता था कॉलेज मे सब माँ को संगीता मैम कहकर बुलाते थे मै भी उनकी यही कह के बुलाता था मेरी माँ संगीता सिंह देखने मे ज्यादा गोरी नही थी पर काफी आकर्षक लुक था उनका शरीर और चेहरा ऐसा था की उनके उपर से नजर ही नही हटता था गाँव मे बहुत चर्चे होते थे माँ के खासकर जब से वह कॉलेज मे पढ़ाने जाने लगी तब लोग उनको रोज आते जाते देखते थे उनकी खूबसूरती को देखकर गदराए बदन को देखकर आहे भरते थे माँ भी खूब अच्छे से सजधज के जाती थी माँ हर रोज साड़ी ब्लाउज पहनकर जाती थी जो होते तो साधारण ही थे पर कहते है ना एक खूबसूरत महिला चाहे कैसा भी कपड़ा पहन ले वह हर कपड़े मे माल है तो माल ही लगेगी मेरे कॉलेज के बहुत से लड़के माँ की खूबसूरती पर फिदा थे हम जैसे जैसे बड़े हुए मेरे क्लास के भी लड़के माँ की खूब तारीफ करने लगे
एक लड़का था रौनक जो देखने मे थोड़ा बदमाश टाइप का था पढ़ने मे भी ज्यादा खास नही था वह माँ का बहुत बड़ा दिवाना था उसने एक बार माँ से अपने प्यार का इजहार भी कर दिया था तब माँ ने उसे पहले बहुत डांटा फिर बहुत प्यार से समझाया की देखो इन सब मै समय बर्बाद मत करो अभी तुम्हारे पढ़ने की उम्र है इसलिए खूब अच्छे से पढ़ो और एक अच्छा और काबिल आदमी बनो तब तुम जिसे चाहोगे वह तुम्हारा हो जाएगा मेरी माँ संगीता जितनी खूबसूरत थी उतनी ही अच्छी टीचर भी थी वह बहुत ही अच्छे से सब को पढ़ाती थी काफी ज्यादा गुस्सा नही करती थी पढ़ाते समय पर कुछ लोगो को उनका कॉलेज मे पढ़ाना अच्छा नही लगता था इसलिए माँ के बारे मे बहुत गलत अफवाह उड़ाते थे की संगीता मैम का चक्कर है कॉलेज के टीचर के साथ तो कभी किसी स्टूडेंट के साथ पर मै जब तक गाँव मे रहा तब तक कभी ऐसा नही देखा वहाँ से आने के बाद क्या हुआ मुझे नही पता मै अभी गाँव से दूर शहर मे रूम लेकर रहता हूँ
यहाँ मै अपने कॉलेज के साथ सरकारी नौकरी की तैयारी करता हूँ क्योकि मै समझ गया हूँ की एक गरीब परिवार को आगे बढ़ाना है अच्छा खाना घर कपड़ा चाहिए तो नौकरी करनी ही पड़ेगी अब गरीब लड़के के पास सरकारी नौकरी का अच्छा वैकल्पिक मार्ग होता है मेहनत से पढ़ाई करो और सरकारी नौकरी लो तब पुरे परिवार की हालात और स्थिति मे सुधार होगा लेकिन सरकारी नौकरी लेना इतना भी आसान नही होता है बहुत सारा मेहनत करने के बाद थोड़ा बहुत लक साथ देता है तब सरकारी नौकरी लगती है नही तो हर साल करोड़ो लड़के सरकारी नौकरी के चक्कर मे अपनी जवानी को बर्बाद कर रहे है उनमे से एक मै भी हूँ मेरे घर की स्थित मुझे पता है मै बहुत मेहनत करता हूँ पर फिर भी मुझे नौकरी नही लग रही है अब इस महंगाई के दौर मे घर चलाना और भी मुश्किल हो गया है घर मे सिर्फ पापा ही कमाने वाले है जिससे घर का ही खर्च पूरा नही हो पाता है तो हमे कैसे पढ़ाते


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