20-02-2026, 11:00 PM
मैं नशे में था... बहुत ज्यादा।
सिर घूम रहा था, आँखें धुंधली, बॉडी गर्म, और लुंड इतना हार्ड कि दर्द हो रहा था।
हैलुसिनेशन जैसा फील हो रहा था—सब कुछ असली और नकली के बीच झूल रहा था।
मैंने सामने देखा... और सैंडी की जगह नेहा दिखी।
बेड पर पीठ के बल लेटी हुई—मेरी नेहा।
उसके पैर फैले हुए, डेविड—वो काला, बदसूरत, बड़ा पेट वाला आदमी—उसके ऊपर था।
उसका मोटा, काला, मजबूत लुंड नेहा की चूत में जोर-जोर से धंस रहा था—रफ, बेरहम, हर थ्रस्ट में नेहा की बॉडी हिल रही थी।
उसके स्तन उछल रहे थे, निप्पल्स लाल, बदन पर पसीना चमक रहा था।
नेहा का सिर एक तरफ टेढ़ा हो गया था—विशाल की गोद में।
विशाल बैठा हुआ था, उसका लुंड नेहा के गाल से टकरा रहा था।
नेहा ने सिर्फ़ उसका सुपारा मुँह में लिया था—पोज़िशन ऐसी थी कि ज्यादा अंदर नहीं जा सकता था।
लेकिन वो चूस रही थी... धीरे-धीरे, जीभ घुमाकर।
फकिंग अब और रफ हो गई थी।
डेविड ने नेहा की कमर पकड़ी, जोर से धक्का दिया—हर थ्रस्ट में नेहा की आह निकल रही थी।
"आह्ह... हाँ... और जोर से..."
उसकी आवाज़ ऊँची, टूटी हुई, लेकिन भूखी।
बाइट मार्क्स उसके गले पर, कंधों पर, स्तनों पर—लाल, नीले।
हिक्कीज़ फैली हुई।
मैं बस देखता रहा।
मेरा दिमाग चीख रहा था—"ये नेहा है... मेरी नेहा... मेरी इज्ज़तदार, सम्मानित बीवी।"
और उसी समय... एक और आवाज़ कह रही थी—"अगर नेहा ये सब कर सकती है... तो क्या वो दो मर्दों को एक साथ मैनेज कर सकती है?"
मेरा हाथ अपने आप पजामा के ऊपर से लुंड पर चला गया।
मैंने स्ट्रोक करना शुरू किया—धीरे-धीरे, लेकिन जोर से।
लुंड फड़क रहा था, गर्म, सख्त।
गुस्सा आ रहा था—बहुत गुस्सा।
लेकिन वो गुस्सा... एक अजीब से जोश में बदल रहा था।
अलोक ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक चिंता सी झलक रही थी, लेकिन मुस्कान अभी भी थी।
"बॉय... कुछ तो बोलो... मैंने कुछ ऐसा कहा क्या जो तुम्हें बुरा लगा?
सॉरी अगर मैंने कुछ ऐसा बोल दिया जो तुम नहीं सुनना चाहते थे।"
मैंने उसकी तरफ देखा... फिर धीरे से उसकी लंड की तरफ नज़र गई।
वो अभी भी बाहर था, हवा में खड़ा, और अब और भी सख्त, मोटा, नसों से भरा लग रहा था।
जैसे वो मेरी बातों से... मेरी नेहा की बातों से... और ज्यादा एक्साइट हो गया हो।
उसकी लंड की नसें फूली हुईं, हेड गहरा लाल, जैसे वो मेरी बातों का मज़ा ले रहा हो।
मैं जानता हूँ ये फीलिंग।
मैं खुद जानता हूँ कि आदमी कैसे एंजॉय करता है जब किसी और की औरत की बात की जाती है।
मेरी पूरी भूली-बिसरी जवानी मेरे सामने फ्लैश हो गई
अब वही सब मेरे साथ हो रहा था।
मैंने हल्की, झुकी हुई आवाज़ में कहा,
"नो... नो... इट्स ओके।"
मैंने खुद को झुकाकर रखा—जैसे कोई छोटा लड़का बात कर रहा हो।
क्योंकि सच में... वो मेरी बीवी को उसके दोस्तों के साथ कुतिया की तरह इस्तेमाल करने की बात कर रहा था।
वो उसे टॉय समझ रहा था।
नाइट का मज़ा।
पैसे की चीज़।
फिर भी... मेरा लुंड फड़क रहा था।
मैं गुस्से में होना चाहिए था
अलोक ने फिर मेरी तरफ देखा।
इस बार उसकी नज़र मेरे पजामा के ऊपर से मेरे लुंड पर टिक गई—जहाँ मेरा हाथ स्ट्रोक कर रहा था, धीरे-धीरे लेकिन लगातार।
उसकी आँखों में एक चमक आई, मुस्कान फैल गई।
"ओह्ह... तो तुम्हें मेरी बातों से बुरा नहीं लगा... बल्कि इंटरेस्टिंग लग रहा है।"
उसकी आवाज़ में कोई जजमेंट नहीं था—बस एक तरह का संतुष्टि का एहसास, जैसे वो पहले से जानता हो कि ये होने वाला था।
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस स्ट्रोक जारी रखा—धीमा, लेकिन तेज़ होता जा रहा था।
मेरा लुंड पजामा के कपड़े से दब रहा था, गर्म, फड़कता हुआ।
दिमाग में गुस्सा, जलन, शर्म... सब कुछ था।
लेकिन शरीर... शरीर सिर्फ़ एक चीज़ चाह रहा था।
बेड पर अब सब कुछ तेज़ हो चुका था।
डेविड का स्पीड अब पहले से कहीं ज्यादा था—जोर-जोर से, बेरहम धक्के।
उसका मोटा काला लुंड सैंडी की चूत में पूरी तरह डूब-उतर रहा था, हर थ्रस्ट में गीली आवाज़ें निकल रही थीं।
सैंडी अब ऑर्गेज़्म के कगार पर थी—उसकी बॉडी काँप रही थी, पैर फैले हुए, कमर ऊपर उठी हुई।
"येस... येस... यीएसएसएसएस... ओह गॉड...!"
उसकी आवाज़ कमरे में गूंज गई—ऊँची, टूटी हुई, पूरी तरह सरेंडर।
उसका सिर विशाल की गोद से हट गया, आँखें बंद, मुँह खुला, साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं।
विशाल ने अपना लुंड उसके गाल पर और तेज़ी से रगड़ना शुरू किया—उसका हाथ बालों में, उँगलियाँ कसकर पकड़े हुए।
वो भी अब किनारे पर था—उसका लुंड फड़क रहा था, प्रीकम फैल रहा था उसके चेहरे पर।
अलोक ने मेरी आँखों में सीधे देखा, फिर धीरे से, लेकिन साफ़-साफ़ बोला—आवाज़ में एक मीठी-कड़वी चुभन थी।
"बॉय... बताओ ना... क्या तुम अपनी बीवी को ऐसे देखना चाहोगे... किसी और के साथ?"
वो रुका, मेरे पजामा पर मेरे हाथ की मूवमेंट को देखा—जो अब तेज़ हो चुकी थी, लगभग अनकंट्रोल।
"कैसी है वो बेड पर?
मैं दाँव लगा सकता हूँ... वो सैंडी से भी बेहतर लेगी।
पूरी रात... हम तीनों को... और वो भी खुशी-खुशी।
उसकी हर बात मेरे सीने में चाकू की तरह उतर रही थी।
मैं जानता था वो मुझे प्रोवोक कर रहा है।
वो मेरे लुंड की स्ट्रोकिंग की स्पीड देखकर सब समझ रहा था।
वो जान रहा था कि मैं तीन बार झड़ चुका हूँ आज... फिर भी रुक नहीं पा रहा।
अगर मैंने इतनी मेहनत न की होती नेहा के साथ... तो अब तक पजामा में ही झड़ चुका होता।
लेकिन अब... सब कुछ बेड पर फोकस हो गया था।
डेविड का स्पीड अब पहले से कहीं ज्यादा था—जानवर जैसा।
उसका मोटा काला लुंड सैंडी की चूत में पूरी ताकत से धंस-उतर रहा था।
हर थ्रस्ट में सैंडी की बॉडी उछल रही थी—स्तन हिल रहे थे, पसीना उड़ रहा था, चादर गीली हो चुकी थी।
उसकी आहें अब चीख में बदल गई थीं—टूटी हुई, गले से निकलती हुई।
"आह्ह्ह... येस... येस... और जोर से... फाड़ दो मुझे... ओह गॉड... मैं... आ रही हूँ...!"
सैंडी का ऑर्गेज़्म अब पीक पर था।
उसकी चूत डेविड के लुंड को कसकर पकड़ रही थी—पल्स कर रही थी, गर्म तरल बह रहा था।
उसकी बॉडी पूरी तरह काँप रही थी—पैर फैले, कमर ऊपर उठी, आँखें पीछे की तरफ, मुँह खुला।
एक लंबी, गहरी चीख निकली—"आआआआह्ह्ह्ह्ह... येस... यीएसएसएसएस...!"
डेविड ने एक आखिरी, जानवर जैसा धक्का दिया।
उसका लुंड बाहर निकला—फड़कता हुआ, और गाढ़ा कम उसके पेट पर, स्तनों पर गिरा।
सैंडी अभी भी काँप रही थी—ऑर्गेज़्म की लहरें अभी भी उसके बदन में दौड़ रही थीं।
वो सिर विशाल की गोद से हटा, लेकिन विशाल ने उसके बाल पकड़े।
उसने अपना लुंड उसके मुँह पर रगड़ा—तेज़ी से।
"चूस... सब ले..."
सैंडी ने मुँह खोला—विशाल का लुंड अंदर गया, गला तक।
वो चूस रही थी—अभी भी काँपती हुई, आँसू आँखों से बह रहे थे, लेकिन वो रुकी नहीं।
विशाल का भी अब क्लाइमेक्स आ रहा था—उसका लुंड फड़क रहा था, हाथ उसके बालों में कसकर।
"आह्ह... ले... सब ले..."
विशाल ने झड़ दिया—गाढ़ा, गर्म कम उसके मुँह में।
सैंडी ने सब सोख लिया—एक बूंद भी बाहर नहीं गिरने दी।
फिर धीरे से जीभ निकालकर चाटा—जैसे आखिरी स्वाद ले रही हो।
कमरा अब पूरी तरह से तीन लोगों की तेज़-तेज़ साँसों से भर गया था।
डेविड, विशाल और सैंडी—बेड पर बिखरे हुए, पसीने से तर, बॉडीज़ अभी भी हल्के-हल्के काँप रही थीं।
स्टॉर्म के बाद की शांति—धीरे-धीरे साँसें धीमी हो रही थीं, आवाज़ें कम हो रही थीं, और साइलेंस धीरे-धीरे कमरे पर छा रही थी।
सैंडी सबसे पहले होश में आई।
वो धीरे से उठी—बेड से उतरी, खड़ी हो गई।
कुछ सेकंड के लिए बस खड़ी रही—जैसे हमें कुछ दिखा रही हो।
उसका चेहरा पसीने से चमक रहा था, सिल्की बाल चेहरे पर चिपके हुए—शायद पसीने से, शायद चिपचिपे कम से।
उसकी चूत से कम लीक हो रहा था—गाढ़ा, सफेद, धीरे-धीरे उसकी जांघों पर बह रहा था।
वो अभी भी नंगी थी—परफेक्ट बॉडी, रेड मार्क्स, हिक्कीज़, दाँतों के निशान—सब कुछ चमक रहा था।
वो अलोक की तरफ देखी।
"क्या मैं बाथरूम जा सकती हूँ?" उसने पूछा—उसी क्यूट, क्लासी आवाज़ में।
जैसे कोई बच्ची माँ से परमिशन माँग रही हो।
अलोक के पास इतना कंट्रोल था—सैंडी पर, इस पल पर, सब पर।
अलोक ने बस "हम्म..." कहा—एक छोटी सी आवाज़, लेकिन कमांड वाली।
सैंडी मुड़ी।
उसकी परफेक्ट गांड हिलती हुई बाथरूम की तरफ गई—हर कदम के साथ जांघों पर कम की बूंदें गिर रही थीं, बाल हिल रहे थे, बॉडी अभी भी थकी हुई लेकिन ग्रेसफुल।
बाथरूम का दरवाज़ा बंद हुआ—क्लिक की आवाज़ आई।
और जैसे ही वो आवाज़ आई—कमरा क्रुअल हँसी से भर गया।
डेविड ने जोर से हँसा—गहरी, जानवर जैसी हँसी।
विशाल ने भी साथ दिया—हाथ से लुंड पकड़े हुए, अभी भी हल्का सा फड़क रहा था।
अलोक ने पीछे टेक लगाई, सिगरेट जलाई, एक कश लिया और धुआँ छोड़ा।
विशाल ने बेड से उठते हुए कहा, आवाज़ में एक गंदी हँसी मिली हुई,
"साले मोटे... भेन के लोड़े... कहीं ये कांड कर देगा एक दिन।"
डेविड ने जोर से हँसा—उसकी हँसी कमरे में गूंज गई, जैसे कोई जानवर गुर्रा रहा हो।
"कुछ नहीं होता... वो और ले लेगी... बहुत लेगी।"
दोनों बेड से उठे, नंगे-धड़ंगे सोफे की तरफ आए।
सिगरेट जलाईं—एक साथ तीनों ने।
धुआँ कमरे में फैल गया, मिक्स हो गया पसीने, कम और सैंडी की खुशबू के साथ।
डेविड ने सिगरेट का एक कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए बोला,
"ये वाली पिछले वाली से कहीं बेहतर है... बहुत ज़्यादा।"
मैंने नोटिस किया—उन दोनों की आवाज़ में वो देसी एक्सेंट था, भारी, गँवार वाला।
अलोक की तरह नहीं—अलोक की बातें क्लास्ड, इंग्लिश मिक्स, अमीर वाली।
ये दोनों... जैसे कोई लोकल, रफ लड़के हों—जो पैसे से नहीं, बल्कि दोस्ती और मज़े से यहाँ हैं।
विशाल ने सिगरेट पीते हुए कहा,
"अलोक भाई ने इस बार डबल पे किया है पिछले से।"
डेविड ने हँसा,
"हाँ... क्योंकि ये वाला माल पहले से ही टूटने को तैयार था।"
दोनों फिर हँसे—एक क्रुअल, दोस्तों वाली हँसी।
जैसे ये सब उनके लिए रेगुलर अफेयर हो—हर हफ्ते या हर महीने एक नई लड़की, एक नया मज़ा।
पैसे अलोक देता है, वो लोग एंजॉय करते हैं, और लड़की... बस जाती है।
अलोक चुपचाप सिगरेट पी रहा था, धुआँ ऊपर फेंक रहा था।
उसकी आँखें मेरी तरफ उठीं—एक छोटी सी मुस्कान।
जैसे वो सब पढ़ रहा हो मेरे चेहरे पर।
15 मिनट की बेकार चिटचैट के बाद—सिगरेट के कश, हल्की हँसी, पुरानी बातें—मेरा लुंड अब धीरे-धीरे सॉफ्ट हो रहा था।
वो जोश, वो आग... अब ठंडी पड़ रही थी।
थकान साफ़ महसूस हो रही थी—शरीर भारी, सिर भारी, पजामा अंदर से चिपचिपा और गीला।
मैंने सोचा—अब बस।
इन लोगों के साथ मैं दोस्त नहीं हूँ।
विशाल और डेविड की तरह नहीं—जो अलोक के साथ सालों से ऐसे ही मज़े लेते हैं, लड़कियों को शेयर करते हैं, हँसते हैं।
मैं तो बस एक स्ट्रेंजर हूँ—एक रात का मेहमान।
मुझे कोई अथॉरिटी नहीं है कि मैं कहूँ—"भाई, सैंडी को एक बार फिर छूने दो... उसके स्तन दबाने दो... एक किस और ले लूँ..."
मुझे पता भी नहीं कि वो उसे कितना पे कर रहे हैं, क्या प्रॉमिस किया है, क्या कंट्रोल है।
वो सिर्फ़ अलोक की तरफ देखती है—परमिशन के लिए।
मेरा "बनिया दिमाग" अब पूरी तरह जाग चुका था।
नशा उतर रहा था, थकान साफ़ महसूस हो रही थी, लेकिन ये हिसाब-किताब वाला दिमाग रुक ही नहीं रहा था।
मैं सोच रहा था—ये तीनों... अलोक, विशाल, डेविड... ये सब मिलकर सैंडी को कितना पे कर रहे होंगे?
अलोक ने डबल पे किया है, ये तो सुना।
लेकिन क्या ये तीनों अलग-अलग चिप इन कर रहे हैं?
या अलोक अकेला सब कवर कर रहा है, और बाकी दो बस मुफ्त में एंजॉय कर रहे हैं?
या फिर... अगर मैंने अलोक से कहा—"भाई, सैंडी को एक बार फिर छूने दो"—तो क्या वो कहेगा—"ठीक है... लेकिन टिप दे दे... या अगली बार तेरी वाली को शेयर कर देना।"
विशाल और डेविड अब पूरी तरह रिलैक्स हो चुके थे—सोफे पर लेटे, सिगरेट पीते हुए, जैसे कोई आम बातचीत हो रही हो।
उनकी आवाज़ें देसी, गँवार वाली—कोई क्लास नहीं, बस रफ और गंदी।
विशाल ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए बोला,
"यार... इस वाली की चूत... उफ्फ... क्या टाइट थी।
जैसे कभी किसी ने इस्तेमाल ही न किया हो।
और वो गीली... गर्म... जैसे कोई भट्टी हो।
पिछली वाली तो ढीली पड़ गई थी... लेकिन ये... ये तो अभी भी कस रही थी।"
डेविड ने जोर से हँसा, अपना मोटा पेट हिलाते हुए।
"और वो बूब्स... भाई... कितने परफेक्ट।
दबाने पर उछलते हैं... निप्पल्स इतने सख्त... जैसे कोई बटन हो।
मैंने पिंच किया तो वो कराह दी... लेकिन रुकी नहीं।
ऐसी औरतें ही चाहिए—जो दर्द भी एंजॉय करें।
टेक्नीक बस एक है—जोर से पकड़ो, जोर से चोदो... और उन्हें पता चले कि मर्द कौन है।"
वो दोनों ऐसे बात कर रहे थे जैसे कोई रेसिपी बता रहे हों—कोई शर्म नहीं, कोई झिझक नहीं।
बस मज़े लेते हुए डिस्क्राइब कर रहे थे—चूत की टाइटनेस, बूब्स का उछाल, कैसे पिंच करना, कैसे काटना, कैसे धक्का देना।
मैं सुन रहा था—बिना कुछ बोले।
आँखें बार-बार बाथरूम के दरवाज़े पर टिक रही थीं।
सैंडी अंदर थी—शायद साफ़ हो रही थी, पानी की आवाज़ आ रही थी।
मैं सोच रहा था—बस एक बार फिर देख लूँ... उसकी बॉडी... उसकी चूत से बहता कम... उसके स्तन... एक बार फिर छू लूँ... या बस देख लूँ।
ये दोनों "चूतिया" बस बकबक कर रहे थे—अलोक चुप था।
वो सिगरेट पी रहा था, धुआँ ऊपर फेंक रहा था, जैसे सब सुन रहा हो लेकिन उसकी कोई परवाह नहीं।
उसकी क्लास अलग थी—वो बोलता कम था, लेकिन जब बोलता था तो बात सीधे दिल में उतर जाती थी।
बाथरूम का दरवाज़ा खुला।
सैंडी बाहर आई—नहाकर, साफ़-सुथरी, बाल गीले, पानी की बूंदें अभी भी उसकी स्किन पर चमक रही थीं।
कमर पर सिर्फ़ एक छोटा सा टॉवल लपेटा हुआ था—जो मुश्किल से ढक रहा था।
उसके स्तन पूरी तरह खुले थे—भारी, गोल, निप्पल्स अभी भी हल्के लाल, लेकिन अब साफ़ और चमकते हुए।
वो धीरे से खड़ी हुई, हमें देखकर मुस्कुराई—एक प्यारी, क्लासी मुस्कान, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
उसने अलोक की तरफ देखा, अंगूठा ऊपर करके दिखाया—थम्स अप।
जैसे कह रही हो—"सब ठीक है... तैयार हूँ।"
अलोक ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ा।
"ड्रिंक्स बना... रिलैक्स हो जा।
और खुद के लिए भी बना ले... तुझे भी चाहिए होगा।"
सैंडी ने हल्के से सिर हिलाया—कोई विरोध नहीं।
वो बार की तरफ बढ़ी—टॉवल अभी भी कमर पर, स्तन हिलते हुए, गांड हल्की सी हिल रही थी।
मैंने घड़ी देखी—लगभग 2 बज चुके थे।
थकान अब हड्डियों तक उतर आई थी।
"नो... नो... मुझे अब जाना चाहिए।
बहुत लेट हो गया।"
अलोक ने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखें मेरी आँखों में।
"बॉय... रुक जा।
एक ड्रिंक और।
मैं जानता हूँ... तेरे पास अपनी सैंडी है...
और वो इससे भी बेहतर है।
यंग, मैरिड
लेकिन एक ड्रिंक... बस एक।
फिर जा।"
वो मुस्कुराया—एक गहरी, मतलब वाली मुस्कान।
"रिलैक्स हो जा... कोई जल्दी नहीं।
रात अभी बाकी है... और तूने आज बहुत कुछ देखा।
एक ड्रिंक पी... फिर सोच लेना।"
सैंडी अब ड्रिंक्स बना रही थी—ग्लासेस में बर्फ डाल रही थी, बॉटल खोल रही थी।
उसके स्तन हर मूवमेंट के साथ हिल रहे थे—खुले, चमकते हुए।
वो मुझे देखकर फिर मुस्कुराई—एक छोटी सी, न्योता वाली मुस्कान।
मैं खड़ा था—पैर भारी, दिमाग घूमता हुआ।
सैंडी ड्रिंक्स लेकर वापस आई—चार ग्लास, बर्फ चमकती हुई, अम्बर कलर की लिक्विड।
वो पहले मेरे सामने आई, मुस्कुराकर एक ग्लास मेरे हाथ में थमाया।
"सर... ये लीजिए।"
फिर बाकी तीनों को दी—अलोक, विशाल, डेविड।
आखिर में खुद के लिए एक ग्लास लिया।
फिर बिना कुछ कहे मेरे और अलोक के बीच सोफे पर बैठ गई।
उसका कंधा मेरे कंधे से सटा।
उसकी जांघ मेरी जांघ से छू गई—गर्म, नरम, अभी भी नहाने के बाद थोड़ी गीली।
मेरा कोहनी हल्के से उसके स्तन से टकराई—वो भारी, गोल, बिना ब्रा के, अभी भी हल्के से हिल रहे थे।
मैंने साँस रोकी।
उसकी खुशबू—साबुन की, लेकिन अभी भी उसकी अपनी, औरत वाली—मेरी नाक में घुस गई।
एक सेकंड भी नहीं बीता कि अलोक ने धीरे से कहा,
"नहीं... यहाँ नहीं।"
सैंडी तुरंत समझ गई।
कोई सवाल नहीं, कोई झिझक नहीं।
वो उठी—टॉवल अभी भी कमर पर।
फिर धीरे से ज़मीन पर झुकी—चारों हाथ-पैरों पर।
कुत्ती की तरह।
सिर अलोक की गोद की तरफ।
उसकी क्रॉच के ठीक बीच में मुँह ले गई।
अलोक ने पैर थोड़े फैलाए।
सैंडी ने जीभ निकाली—धीरे से उसकी जांघों के जोड़ पर चाटना शुरू किया।
फिर नीचे—बॉल्स पर जीभ घुमाई, हल्के से चूसा।
अलोक की साँसें तेज़ हो गईं।
उसने अपना ग्लास उठाया—सैंडी का ग्लास मेरे और उसके बीच सोफे पर रखा था।
वो झुका, ग्लास से एक घूँट लिया।
फिर सैंडी की तरफ झुका—उसके मुँह में ग्लास ले जाकर थोड़ा सा ड्रिंक डाला।
सैंडी ने पी लिया—जीभ बाहर निकालकर चाटते हुए, आँखें अलोक की तरफ।
फिर फिर से चाटना शुरू—अब और गहराई से।
मैं बस देखता रहा।
उसकी बॉडी हर मूवमेंट के साथ हिल रही थी—स्तन लटक रहे थे, गांड ऊपर उठी हुई।
विशाल और डेविड सोफे पर लेटे थे—सिगरेट पीते हुए, हँसते हुए, लेकिन आँखें सैंडी पर।
विशाल सोफे से उठ खड़ा हुआ।
उसका लुंड अभी भी हल्का सा लटक रहा था, पसीने से चमकता हुआ।
डेविड ने जोशीली आवाज़ में पूछा,
"कहाँ जा रहा है साले?"
विशाल ने हँसते हुए कहा,
"साले मूते जा रहा हूँ!"
वो बाथरूम की तरफ बढ़ा।
बेड को क्रॉस करते हुए उसने नीचे देखा—चादर पर पसीना, कम, गीले धब्बे—सब फैला हुआ था।
उसने रुककर डेविड की तरफ देखा और बोला,
"डेविड... भेन के लोड़े... देख क्या गंदगी मचा रखी है!
अब कहाँ सोएँगे हम?"
डेविड ने जोर से हँसा—उसकी हँसी कमरे में गूंज गई।
उसने अपना मोटा लुंड हाथ में पकड़ा, हल्के से रगड़ा—जैसे उसे फिर से जगाना चाहता हो।
"कौन सोना चाहता है साले?
मैं तो अभी खत्म भी नहीं हुआ... अभी तो शुरूआत है!"
वो जोर से हँसा, लुंड को और जोर से मसलते हुए।
"ये अभी फिर तैयार हो जाएगा... देखना।
सैंडी अब पूरी तरह डिटर्माइंड थी—जैसे कोई ऑर्डर पूरा करने का मिशन हो।
वो अलोक की गेंदों को चाट रही थी—धीरे-धीरे, जीभ घुमाकर, जैसे कोई मीठी चीज़ हो।
उसकी जीभ गर्म, गीली, और बहुत स्किलफुल—अलोक की साँसें तेज़ हो रही थीं, लेकिन वो कंट्रोल में था।
तभी मैंने महसूस किया—सैंडी का हाथ मेरी जांघ पर आ गया।
हल्का सा, लेकिन फर्म।
उसकी उँगलियाँ मेरी जांघ के अंदरूनी हिस्से पर सरक रही थीं—धीरे-धीरे, लेकिन जानबूझकर।
मेरा लुंड तुरंत हार्ड हो गया—एक झटके में।
पजामा के कपड़े से दब रहा था, फड़क रहा था।
मैं साँस रोककर बैठा रहा—जैसे कोई स्टैच्यू।
उसने सैंडी के बालों में उँगलियाँ फेरी—जैसे कोई पालतू कुतिया को सहला रहा हो।
फिर मुझे देखकर आँख मारी—विंक।
जैसे कह रहा हो—"देख... ये सब तेरे लिए है... बस एंजॉय कर।"
सैंडी ने अलोक को छोड़ा।
फिर धीरे से, कुतिया की तरह क्रॉल करते हुए मेरी तरफ आई।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—भूखी, लेकिन कंट्रोल्ड।
वो मेरे पैरों के बीच आ गई—घुटनों पर।
मेरा पजामा अभी भी पहना हुआ था—गीला, चिपचिपा।
वो अपना सिर मेरे पजामा के ऊपर लुंड वाली जगह पर रख दिया।
धीरे-धीरे रगड़ने लगी—चेहरे से, गालों से, होंठों से।
फिर नाक से सूँघा—गहरी साँस ली, जैसे मेरी खुशबू ले रही हो।
उसकी साँसें गर्म थीं—पजामा के कपड़े से मेरे लुंड तक पहुँच रही थीं।
फिर उसने दाँतों से मेरे लुंड को पकड़ा—पजामा के ऊपर से।
हल्का सा दबाया—न काटा, न दर्द हुआ, बस एक कंट्रोल्ड ग्रिप।
उसने ऊपर देखा—मेरी आँखों में देखकर विंक किया।
मेरा हाथ अब उसके स्तनों पर चला गया।
धीरे से दबाया—नरम, गर्म, भारी।
उँगलियों से सहलाया, फिर निप्पल्स को हल्के से पिंच किया—बहुत सॉफ्टली, जैसे कोई कीमती चीज़ हो।
"आह्ह..." उसकी मुँह से एक छोटी सी आह निकली—मीठी, दबी हुई।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं—भूखी, लेकिन खुश।
वो अभी भी कमर पर टॉवल लपेटे हुए थी, लेकिन वो टॉवल अब ज्यादा देर नहीं टिकने वाला था।
तभी विशाल बाथरूम से लौटा।
वो सीधे सैंडी के पीछे गया—प्लेफुल तरीके से टॉवल को एक झटके में खींच लिया।
फिर ज़ोर से उसकी गांड पर थप्पड़ मारा—फट्ट!
सैंडी थोड़ा सा झटकी, लेकिन मुड़ी और देखा कि कौन था।
विशाल जोर से हँसा।
सैंडी ने पीछे मुड़कर उसे देखा, फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई—एक शरारती, सेक्सी मुस्कान।
फिर धीरे से ऊपर आई—अब पूरी तरह नंगी।
उसने मेरे पजामा के किनारे को दाँतों से पकड़ा।
बिना हाथ इस्तेमाल किए—धीरे-धीरे नीचे खींचने लगी।
मैंने अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई—उसे मदद करने के लिए।
पजामा नीचे सरका।
मेरा लुंड बाहर आ गया—खुला, हवा में।
न ज्यादा सख्त, न ज्यादा बड़ा या मोटा।
बस... नॉर्मल।
मैं अंदर से शर्मिंदा था।
हमेशा शर्म आती थी—इन बूढ़े आदमियों के सामने इसे दिखाने में।
मैं नहीं चाहता था कि अलोक, विशाल, डेविड इसे देखें।
मैं हमेशा सोचता था—मेरा ये छोटा-सा लुंड... ये इन सबके सामने क्या करेगा?
लेकिन सैंडी ने इसे देखा—और उसके चेहरे पर एक तरह की राहत आई।
जैसे कह रही हो—"ये तो कुछ नहीं... जो मैंने अभी तक झेला, उसके सामने ये तो छोटी बात है।"
उसने बाकी लोगों की तरफ देखा—उनकी आँखों में हल्की हँसी थी, लेकिन कोई डायरेक्ट इंसल्ट नहीं।
वो सिर्फ़ देख रहे थे।
फिर सैंडी ने मेरी तरफ देखा।
उसकी जीभ बाहर निकली—धीरे से मेरी गेंदों पर टच किया।
गर्म, नम, नरम जीभ।
एक गहरी, गर्म साँस मेरी स्किन पर लगी।
मैं सिहर गया।
मेरा लुंड तुरंत फिर से हार्ड हो गया—फड़क उठा।
वो जीभ से मेरी गेंदों को चाट रही थी—धीरे-धीरे, प्यार से, लेकिन भूख के साथ।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—विंक किया।
जैसे कह रही हो—"देखो... ये छोटा सा भी कितना पावरफुल है।"
अलोक ने मेरी तरफ सिगरेट का पैकेट बढ़ाया।
मैंने एक सिगरेट निकाली, होंठों पर रखी।
उसने लाइटर जलाकर आगे किया—मैंने गहरा कश लिया।
धुआँ फेफड़ों में गया, सिर में एक हल्की चक्कर सी आई।
मैंने आँखें बंद कर लीं।
सैंडी की जीभ अब मेरी गेंदों पर थी—गर्म, गीली, धीरे-धीरे चक्कर काट रही थी।
उसकी साँसें मेरी स्किन पर पड़ रही थीं—गर्म, तेज़।
मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड हो चुका था—पजामा के कपड़े से ऊपर उठा हुआ, फड़क रहा था।
"ओओओओह्ह्ह्ह... सैंडी..."
ये शब्द मेरे होंठों से अनजाने में निकल गए—एक लंबी, दबी हुई आह।
मैंने आँखें बंद रखीं, सिर्फ़ महसूस कर रहा था—उसकी जीभ का हर टच, उसकी साँसों की गर्मी, उसकी मुस्कान जो मैं महसूस कर सकता था।
और तभी—
धड़ाम धड़ाम धड़ाम!
मेन गेट पर ज़ोर-ज़ोर से दस्तक हुई।
मेरा दिल एकदम रुक गया।
सिर घूम रहा था, आँखें धुंधली, बॉडी गर्म, और लुंड इतना हार्ड कि दर्द हो रहा था।
हैलुसिनेशन जैसा फील हो रहा था—सब कुछ असली और नकली के बीच झूल रहा था।
मैंने सामने देखा... और सैंडी की जगह नेहा दिखी।
बेड पर पीठ के बल लेटी हुई—मेरी नेहा।
उसके पैर फैले हुए, डेविड—वो काला, बदसूरत, बड़ा पेट वाला आदमी—उसके ऊपर था।
उसका मोटा, काला, मजबूत लुंड नेहा की चूत में जोर-जोर से धंस रहा था—रफ, बेरहम, हर थ्रस्ट में नेहा की बॉडी हिल रही थी।
उसके स्तन उछल रहे थे, निप्पल्स लाल, बदन पर पसीना चमक रहा था।
नेहा का सिर एक तरफ टेढ़ा हो गया था—विशाल की गोद में।
विशाल बैठा हुआ था, उसका लुंड नेहा के गाल से टकरा रहा था।
नेहा ने सिर्फ़ उसका सुपारा मुँह में लिया था—पोज़िशन ऐसी थी कि ज्यादा अंदर नहीं जा सकता था।
लेकिन वो चूस रही थी... धीरे-धीरे, जीभ घुमाकर।
फकिंग अब और रफ हो गई थी।
डेविड ने नेहा की कमर पकड़ी, जोर से धक्का दिया—हर थ्रस्ट में नेहा की आह निकल रही थी।
"आह्ह... हाँ... और जोर से..."
उसकी आवाज़ ऊँची, टूटी हुई, लेकिन भूखी।
बाइट मार्क्स उसके गले पर, कंधों पर, स्तनों पर—लाल, नीले।
हिक्कीज़ फैली हुई।
मैं बस देखता रहा।
मेरा दिमाग चीख रहा था—"ये नेहा है... मेरी नेहा... मेरी इज्ज़तदार, सम्मानित बीवी।"
और उसी समय... एक और आवाज़ कह रही थी—"अगर नेहा ये सब कर सकती है... तो क्या वो दो मर्दों को एक साथ मैनेज कर सकती है?"
मेरा हाथ अपने आप पजामा के ऊपर से लुंड पर चला गया।
मैंने स्ट्रोक करना शुरू किया—धीरे-धीरे, लेकिन जोर से।
लुंड फड़क रहा था, गर्म, सख्त।
गुस्सा आ रहा था—बहुत गुस्सा।
लेकिन वो गुस्सा... एक अजीब से जोश में बदल रहा था।
अलोक ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक चिंता सी झलक रही थी, लेकिन मुस्कान अभी भी थी।
"बॉय... कुछ तो बोलो... मैंने कुछ ऐसा कहा क्या जो तुम्हें बुरा लगा?
सॉरी अगर मैंने कुछ ऐसा बोल दिया जो तुम नहीं सुनना चाहते थे।"
मैंने उसकी तरफ देखा... फिर धीरे से उसकी लंड की तरफ नज़र गई।
वो अभी भी बाहर था, हवा में खड़ा, और अब और भी सख्त, मोटा, नसों से भरा लग रहा था।
जैसे वो मेरी बातों से... मेरी नेहा की बातों से... और ज्यादा एक्साइट हो गया हो।
उसकी लंड की नसें फूली हुईं, हेड गहरा लाल, जैसे वो मेरी बातों का मज़ा ले रहा हो।
मैं जानता हूँ ये फीलिंग।
मैं खुद जानता हूँ कि आदमी कैसे एंजॉय करता है जब किसी और की औरत की बात की जाती है।
मेरी पूरी भूली-बिसरी जवानी मेरे सामने फ्लैश हो गई
अब वही सब मेरे साथ हो रहा था।
मैंने हल्की, झुकी हुई आवाज़ में कहा,
"नो... नो... इट्स ओके।"
मैंने खुद को झुकाकर रखा—जैसे कोई छोटा लड़का बात कर रहा हो।
क्योंकि सच में... वो मेरी बीवी को उसके दोस्तों के साथ कुतिया की तरह इस्तेमाल करने की बात कर रहा था।
वो उसे टॉय समझ रहा था।
नाइट का मज़ा।
पैसे की चीज़।
फिर भी... मेरा लुंड फड़क रहा था।
मैं गुस्से में होना चाहिए था
अलोक ने फिर मेरी तरफ देखा।
इस बार उसकी नज़र मेरे पजामा के ऊपर से मेरे लुंड पर टिक गई—जहाँ मेरा हाथ स्ट्रोक कर रहा था, धीरे-धीरे लेकिन लगातार।
उसकी आँखों में एक चमक आई, मुस्कान फैल गई।
"ओह्ह... तो तुम्हें मेरी बातों से बुरा नहीं लगा... बल्कि इंटरेस्टिंग लग रहा है।"
उसकी आवाज़ में कोई जजमेंट नहीं था—बस एक तरह का संतुष्टि का एहसास, जैसे वो पहले से जानता हो कि ये होने वाला था।
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस स्ट्रोक जारी रखा—धीमा, लेकिन तेज़ होता जा रहा था।
मेरा लुंड पजामा के कपड़े से दब रहा था, गर्म, फड़कता हुआ।
दिमाग में गुस्सा, जलन, शर्म... सब कुछ था।
लेकिन शरीर... शरीर सिर्फ़ एक चीज़ चाह रहा था।
बेड पर अब सब कुछ तेज़ हो चुका था।
डेविड का स्पीड अब पहले से कहीं ज्यादा था—जोर-जोर से, बेरहम धक्के।
उसका मोटा काला लुंड सैंडी की चूत में पूरी तरह डूब-उतर रहा था, हर थ्रस्ट में गीली आवाज़ें निकल रही थीं।
सैंडी अब ऑर्गेज़्म के कगार पर थी—उसकी बॉडी काँप रही थी, पैर फैले हुए, कमर ऊपर उठी हुई।
"येस... येस... यीएसएसएसएस... ओह गॉड...!"
उसकी आवाज़ कमरे में गूंज गई—ऊँची, टूटी हुई, पूरी तरह सरेंडर।
उसका सिर विशाल की गोद से हट गया, आँखें बंद, मुँह खुला, साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं।
विशाल ने अपना लुंड उसके गाल पर और तेज़ी से रगड़ना शुरू किया—उसका हाथ बालों में, उँगलियाँ कसकर पकड़े हुए।
वो भी अब किनारे पर था—उसका लुंड फड़क रहा था, प्रीकम फैल रहा था उसके चेहरे पर।
अलोक ने मेरी आँखों में सीधे देखा, फिर धीरे से, लेकिन साफ़-साफ़ बोला—आवाज़ में एक मीठी-कड़वी चुभन थी।
"बॉय... बताओ ना... क्या तुम अपनी बीवी को ऐसे देखना चाहोगे... किसी और के साथ?"
वो रुका, मेरे पजामा पर मेरे हाथ की मूवमेंट को देखा—जो अब तेज़ हो चुकी थी, लगभग अनकंट्रोल।
"कैसी है वो बेड पर?
मैं दाँव लगा सकता हूँ... वो सैंडी से भी बेहतर लेगी।
पूरी रात... हम तीनों को... और वो भी खुशी-खुशी।
उसकी हर बात मेरे सीने में चाकू की तरह उतर रही थी।
मैं जानता था वो मुझे प्रोवोक कर रहा है।
वो मेरे लुंड की स्ट्रोकिंग की स्पीड देखकर सब समझ रहा था।
वो जान रहा था कि मैं तीन बार झड़ चुका हूँ आज... फिर भी रुक नहीं पा रहा।
अगर मैंने इतनी मेहनत न की होती नेहा के साथ... तो अब तक पजामा में ही झड़ चुका होता।
लेकिन अब... सब कुछ बेड पर फोकस हो गया था।
डेविड का स्पीड अब पहले से कहीं ज्यादा था—जानवर जैसा।
उसका मोटा काला लुंड सैंडी की चूत में पूरी ताकत से धंस-उतर रहा था।
हर थ्रस्ट में सैंडी की बॉडी उछल रही थी—स्तन हिल रहे थे, पसीना उड़ रहा था, चादर गीली हो चुकी थी।
उसकी आहें अब चीख में बदल गई थीं—टूटी हुई, गले से निकलती हुई।
"आह्ह्ह... येस... येस... और जोर से... फाड़ दो मुझे... ओह गॉड... मैं... आ रही हूँ...!"
सैंडी का ऑर्गेज़्म अब पीक पर था।
उसकी चूत डेविड के लुंड को कसकर पकड़ रही थी—पल्स कर रही थी, गर्म तरल बह रहा था।
उसकी बॉडी पूरी तरह काँप रही थी—पैर फैले, कमर ऊपर उठी, आँखें पीछे की तरफ, मुँह खुला।
एक लंबी, गहरी चीख निकली—"आआआआह्ह्ह्ह्ह... येस... यीएसएसएसएस...!"
डेविड ने एक आखिरी, जानवर जैसा धक्का दिया।
उसका लुंड बाहर निकला—फड़कता हुआ, और गाढ़ा कम उसके पेट पर, स्तनों पर गिरा।
सैंडी अभी भी काँप रही थी—ऑर्गेज़्म की लहरें अभी भी उसके बदन में दौड़ रही थीं।
वो सिर विशाल की गोद से हटा, लेकिन विशाल ने उसके बाल पकड़े।
उसने अपना लुंड उसके मुँह पर रगड़ा—तेज़ी से।
"चूस... सब ले..."
सैंडी ने मुँह खोला—विशाल का लुंड अंदर गया, गला तक।
वो चूस रही थी—अभी भी काँपती हुई, आँसू आँखों से बह रहे थे, लेकिन वो रुकी नहीं।
विशाल का भी अब क्लाइमेक्स आ रहा था—उसका लुंड फड़क रहा था, हाथ उसके बालों में कसकर।
"आह्ह... ले... सब ले..."
विशाल ने झड़ दिया—गाढ़ा, गर्म कम उसके मुँह में।
सैंडी ने सब सोख लिया—एक बूंद भी बाहर नहीं गिरने दी।
फिर धीरे से जीभ निकालकर चाटा—जैसे आखिरी स्वाद ले रही हो।
कमरा अब पूरी तरह से तीन लोगों की तेज़-तेज़ साँसों से भर गया था।
डेविड, विशाल और सैंडी—बेड पर बिखरे हुए, पसीने से तर, बॉडीज़ अभी भी हल्के-हल्के काँप रही थीं।
स्टॉर्म के बाद की शांति—धीरे-धीरे साँसें धीमी हो रही थीं, आवाज़ें कम हो रही थीं, और साइलेंस धीरे-धीरे कमरे पर छा रही थी।
सैंडी सबसे पहले होश में आई।
वो धीरे से उठी—बेड से उतरी, खड़ी हो गई।
कुछ सेकंड के लिए बस खड़ी रही—जैसे हमें कुछ दिखा रही हो।
उसका चेहरा पसीने से चमक रहा था, सिल्की बाल चेहरे पर चिपके हुए—शायद पसीने से, शायद चिपचिपे कम से।
उसकी चूत से कम लीक हो रहा था—गाढ़ा, सफेद, धीरे-धीरे उसकी जांघों पर बह रहा था।
वो अभी भी नंगी थी—परफेक्ट बॉडी, रेड मार्क्स, हिक्कीज़, दाँतों के निशान—सब कुछ चमक रहा था।
वो अलोक की तरफ देखी।
"क्या मैं बाथरूम जा सकती हूँ?" उसने पूछा—उसी क्यूट, क्लासी आवाज़ में।
जैसे कोई बच्ची माँ से परमिशन माँग रही हो।
अलोक के पास इतना कंट्रोल था—सैंडी पर, इस पल पर, सब पर।
अलोक ने बस "हम्म..." कहा—एक छोटी सी आवाज़, लेकिन कमांड वाली।
सैंडी मुड़ी।
उसकी परफेक्ट गांड हिलती हुई बाथरूम की तरफ गई—हर कदम के साथ जांघों पर कम की बूंदें गिर रही थीं, बाल हिल रहे थे, बॉडी अभी भी थकी हुई लेकिन ग्रेसफुल।
बाथरूम का दरवाज़ा बंद हुआ—क्लिक की आवाज़ आई।
और जैसे ही वो आवाज़ आई—कमरा क्रुअल हँसी से भर गया।
डेविड ने जोर से हँसा—गहरी, जानवर जैसी हँसी।
विशाल ने भी साथ दिया—हाथ से लुंड पकड़े हुए, अभी भी हल्का सा फड़क रहा था।
अलोक ने पीछे टेक लगाई, सिगरेट जलाई, एक कश लिया और धुआँ छोड़ा।
विशाल ने बेड से उठते हुए कहा, आवाज़ में एक गंदी हँसी मिली हुई,
"साले मोटे... भेन के लोड़े... कहीं ये कांड कर देगा एक दिन।"
डेविड ने जोर से हँसा—उसकी हँसी कमरे में गूंज गई, जैसे कोई जानवर गुर्रा रहा हो।
"कुछ नहीं होता... वो और ले लेगी... बहुत लेगी।"
दोनों बेड से उठे, नंगे-धड़ंगे सोफे की तरफ आए।
सिगरेट जलाईं—एक साथ तीनों ने।
धुआँ कमरे में फैल गया, मिक्स हो गया पसीने, कम और सैंडी की खुशबू के साथ।
डेविड ने सिगरेट का एक कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए बोला,
"ये वाली पिछले वाली से कहीं बेहतर है... बहुत ज़्यादा।"
मैंने नोटिस किया—उन दोनों की आवाज़ में वो देसी एक्सेंट था, भारी, गँवार वाला।
अलोक की तरह नहीं—अलोक की बातें क्लास्ड, इंग्लिश मिक्स, अमीर वाली।
ये दोनों... जैसे कोई लोकल, रफ लड़के हों—जो पैसे से नहीं, बल्कि दोस्ती और मज़े से यहाँ हैं।
विशाल ने सिगरेट पीते हुए कहा,
"अलोक भाई ने इस बार डबल पे किया है पिछले से।"
डेविड ने हँसा,
"हाँ... क्योंकि ये वाला माल पहले से ही टूटने को तैयार था।"
दोनों फिर हँसे—एक क्रुअल, दोस्तों वाली हँसी।
जैसे ये सब उनके लिए रेगुलर अफेयर हो—हर हफ्ते या हर महीने एक नई लड़की, एक नया मज़ा।
पैसे अलोक देता है, वो लोग एंजॉय करते हैं, और लड़की... बस जाती है।
अलोक चुपचाप सिगरेट पी रहा था, धुआँ ऊपर फेंक रहा था।
उसकी आँखें मेरी तरफ उठीं—एक छोटी सी मुस्कान।
जैसे वो सब पढ़ रहा हो मेरे चेहरे पर।
15 मिनट की बेकार चिटचैट के बाद—सिगरेट के कश, हल्की हँसी, पुरानी बातें—मेरा लुंड अब धीरे-धीरे सॉफ्ट हो रहा था।
वो जोश, वो आग... अब ठंडी पड़ रही थी।
थकान साफ़ महसूस हो रही थी—शरीर भारी, सिर भारी, पजामा अंदर से चिपचिपा और गीला।
मैंने सोचा—अब बस।
इन लोगों के साथ मैं दोस्त नहीं हूँ।
विशाल और डेविड की तरह नहीं—जो अलोक के साथ सालों से ऐसे ही मज़े लेते हैं, लड़कियों को शेयर करते हैं, हँसते हैं।
मैं तो बस एक स्ट्रेंजर हूँ—एक रात का मेहमान।
मुझे कोई अथॉरिटी नहीं है कि मैं कहूँ—"भाई, सैंडी को एक बार फिर छूने दो... उसके स्तन दबाने दो... एक किस और ले लूँ..."
मुझे पता भी नहीं कि वो उसे कितना पे कर रहे हैं, क्या प्रॉमिस किया है, क्या कंट्रोल है।
वो सिर्फ़ अलोक की तरफ देखती है—परमिशन के लिए।
मेरा "बनिया दिमाग" अब पूरी तरह जाग चुका था।
नशा उतर रहा था, थकान साफ़ महसूस हो रही थी, लेकिन ये हिसाब-किताब वाला दिमाग रुक ही नहीं रहा था।
मैं सोच रहा था—ये तीनों... अलोक, विशाल, डेविड... ये सब मिलकर सैंडी को कितना पे कर रहे होंगे?
अलोक ने डबल पे किया है, ये तो सुना।
लेकिन क्या ये तीनों अलग-अलग चिप इन कर रहे हैं?
या अलोक अकेला सब कवर कर रहा है, और बाकी दो बस मुफ्त में एंजॉय कर रहे हैं?
या फिर... अगर मैंने अलोक से कहा—"भाई, सैंडी को एक बार फिर छूने दो"—तो क्या वो कहेगा—"ठीक है... लेकिन टिप दे दे... या अगली बार तेरी वाली को शेयर कर देना।"
विशाल और डेविड अब पूरी तरह रिलैक्स हो चुके थे—सोफे पर लेटे, सिगरेट पीते हुए, जैसे कोई आम बातचीत हो रही हो।
उनकी आवाज़ें देसी, गँवार वाली—कोई क्लास नहीं, बस रफ और गंदी।
विशाल ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए बोला,
"यार... इस वाली की चूत... उफ्फ... क्या टाइट थी।
जैसे कभी किसी ने इस्तेमाल ही न किया हो।
और वो गीली... गर्म... जैसे कोई भट्टी हो।
पिछली वाली तो ढीली पड़ गई थी... लेकिन ये... ये तो अभी भी कस रही थी।"
डेविड ने जोर से हँसा, अपना मोटा पेट हिलाते हुए।
"और वो बूब्स... भाई... कितने परफेक्ट।
दबाने पर उछलते हैं... निप्पल्स इतने सख्त... जैसे कोई बटन हो।
मैंने पिंच किया तो वो कराह दी... लेकिन रुकी नहीं।
ऐसी औरतें ही चाहिए—जो दर्द भी एंजॉय करें।
टेक्नीक बस एक है—जोर से पकड़ो, जोर से चोदो... और उन्हें पता चले कि मर्द कौन है।"
वो दोनों ऐसे बात कर रहे थे जैसे कोई रेसिपी बता रहे हों—कोई शर्म नहीं, कोई झिझक नहीं।
बस मज़े लेते हुए डिस्क्राइब कर रहे थे—चूत की टाइटनेस, बूब्स का उछाल, कैसे पिंच करना, कैसे काटना, कैसे धक्का देना।
मैं सुन रहा था—बिना कुछ बोले।
आँखें बार-बार बाथरूम के दरवाज़े पर टिक रही थीं।
सैंडी अंदर थी—शायद साफ़ हो रही थी, पानी की आवाज़ आ रही थी।
मैं सोच रहा था—बस एक बार फिर देख लूँ... उसकी बॉडी... उसकी चूत से बहता कम... उसके स्तन... एक बार फिर छू लूँ... या बस देख लूँ।
ये दोनों "चूतिया" बस बकबक कर रहे थे—अलोक चुप था।
वो सिगरेट पी रहा था, धुआँ ऊपर फेंक रहा था, जैसे सब सुन रहा हो लेकिन उसकी कोई परवाह नहीं।
उसकी क्लास अलग थी—वो बोलता कम था, लेकिन जब बोलता था तो बात सीधे दिल में उतर जाती थी।
बाथरूम का दरवाज़ा खुला।
सैंडी बाहर आई—नहाकर, साफ़-सुथरी, बाल गीले, पानी की बूंदें अभी भी उसकी स्किन पर चमक रही थीं।
कमर पर सिर्फ़ एक छोटा सा टॉवल लपेटा हुआ था—जो मुश्किल से ढक रहा था।
उसके स्तन पूरी तरह खुले थे—भारी, गोल, निप्पल्स अभी भी हल्के लाल, लेकिन अब साफ़ और चमकते हुए।
वो धीरे से खड़ी हुई, हमें देखकर मुस्कुराई—एक प्यारी, क्लासी मुस्कान, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
उसने अलोक की तरफ देखा, अंगूठा ऊपर करके दिखाया—थम्स अप।
जैसे कह रही हो—"सब ठीक है... तैयार हूँ।"
अलोक ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ा।
"ड्रिंक्स बना... रिलैक्स हो जा।
और खुद के लिए भी बना ले... तुझे भी चाहिए होगा।"
सैंडी ने हल्के से सिर हिलाया—कोई विरोध नहीं।
वो बार की तरफ बढ़ी—टॉवल अभी भी कमर पर, स्तन हिलते हुए, गांड हल्की सी हिल रही थी।
मैंने घड़ी देखी—लगभग 2 बज चुके थे।
थकान अब हड्डियों तक उतर आई थी।
"नो... नो... मुझे अब जाना चाहिए।
बहुत लेट हो गया।"
अलोक ने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखें मेरी आँखों में।
"बॉय... रुक जा।
एक ड्रिंक और।
मैं जानता हूँ... तेरे पास अपनी सैंडी है...
और वो इससे भी बेहतर है।
यंग, मैरिड
लेकिन एक ड्रिंक... बस एक।
फिर जा।"
वो मुस्कुराया—एक गहरी, मतलब वाली मुस्कान।
"रिलैक्स हो जा... कोई जल्दी नहीं।
रात अभी बाकी है... और तूने आज बहुत कुछ देखा।
एक ड्रिंक पी... फिर सोच लेना।"
सैंडी अब ड्रिंक्स बना रही थी—ग्लासेस में बर्फ डाल रही थी, बॉटल खोल रही थी।
उसके स्तन हर मूवमेंट के साथ हिल रहे थे—खुले, चमकते हुए।
वो मुझे देखकर फिर मुस्कुराई—एक छोटी सी, न्योता वाली मुस्कान।
मैं खड़ा था—पैर भारी, दिमाग घूमता हुआ।
सैंडी ड्रिंक्स लेकर वापस आई—चार ग्लास, बर्फ चमकती हुई, अम्बर कलर की लिक्विड।
वो पहले मेरे सामने आई, मुस्कुराकर एक ग्लास मेरे हाथ में थमाया।
"सर... ये लीजिए।"
फिर बाकी तीनों को दी—अलोक, विशाल, डेविड।
आखिर में खुद के लिए एक ग्लास लिया।
फिर बिना कुछ कहे मेरे और अलोक के बीच सोफे पर बैठ गई।
उसका कंधा मेरे कंधे से सटा।
उसकी जांघ मेरी जांघ से छू गई—गर्म, नरम, अभी भी नहाने के बाद थोड़ी गीली।
मेरा कोहनी हल्के से उसके स्तन से टकराई—वो भारी, गोल, बिना ब्रा के, अभी भी हल्के से हिल रहे थे।
मैंने साँस रोकी।
उसकी खुशबू—साबुन की, लेकिन अभी भी उसकी अपनी, औरत वाली—मेरी नाक में घुस गई।
एक सेकंड भी नहीं बीता कि अलोक ने धीरे से कहा,
"नहीं... यहाँ नहीं।"
सैंडी तुरंत समझ गई।
कोई सवाल नहीं, कोई झिझक नहीं।
वो उठी—टॉवल अभी भी कमर पर।
फिर धीरे से ज़मीन पर झुकी—चारों हाथ-पैरों पर।
कुत्ती की तरह।
सिर अलोक की गोद की तरफ।
उसकी क्रॉच के ठीक बीच में मुँह ले गई।
अलोक ने पैर थोड़े फैलाए।
सैंडी ने जीभ निकाली—धीरे से उसकी जांघों के जोड़ पर चाटना शुरू किया।
फिर नीचे—बॉल्स पर जीभ घुमाई, हल्के से चूसा।
अलोक की साँसें तेज़ हो गईं।
उसने अपना ग्लास उठाया—सैंडी का ग्लास मेरे और उसके बीच सोफे पर रखा था।
वो झुका, ग्लास से एक घूँट लिया।
फिर सैंडी की तरफ झुका—उसके मुँह में ग्लास ले जाकर थोड़ा सा ड्रिंक डाला।
सैंडी ने पी लिया—जीभ बाहर निकालकर चाटते हुए, आँखें अलोक की तरफ।
फिर फिर से चाटना शुरू—अब और गहराई से।
मैं बस देखता रहा।
उसकी बॉडी हर मूवमेंट के साथ हिल रही थी—स्तन लटक रहे थे, गांड ऊपर उठी हुई।
विशाल और डेविड सोफे पर लेटे थे—सिगरेट पीते हुए, हँसते हुए, लेकिन आँखें सैंडी पर।
विशाल सोफे से उठ खड़ा हुआ।
उसका लुंड अभी भी हल्का सा लटक रहा था, पसीने से चमकता हुआ।
डेविड ने जोशीली आवाज़ में पूछा,
"कहाँ जा रहा है साले?"
विशाल ने हँसते हुए कहा,
"साले मूते जा रहा हूँ!"
वो बाथरूम की तरफ बढ़ा।
बेड को क्रॉस करते हुए उसने नीचे देखा—चादर पर पसीना, कम, गीले धब्बे—सब फैला हुआ था।
उसने रुककर डेविड की तरफ देखा और बोला,
"डेविड... भेन के लोड़े... देख क्या गंदगी मचा रखी है!
अब कहाँ सोएँगे हम?"
डेविड ने जोर से हँसा—उसकी हँसी कमरे में गूंज गई।
उसने अपना मोटा लुंड हाथ में पकड़ा, हल्के से रगड़ा—जैसे उसे फिर से जगाना चाहता हो।
"कौन सोना चाहता है साले?
मैं तो अभी खत्म भी नहीं हुआ... अभी तो शुरूआत है!"
वो जोर से हँसा, लुंड को और जोर से मसलते हुए।
"ये अभी फिर तैयार हो जाएगा... देखना।
सैंडी अब पूरी तरह डिटर्माइंड थी—जैसे कोई ऑर्डर पूरा करने का मिशन हो।
वो अलोक की गेंदों को चाट रही थी—धीरे-धीरे, जीभ घुमाकर, जैसे कोई मीठी चीज़ हो।
उसकी जीभ गर्म, गीली, और बहुत स्किलफुल—अलोक की साँसें तेज़ हो रही थीं, लेकिन वो कंट्रोल में था।
तभी मैंने महसूस किया—सैंडी का हाथ मेरी जांघ पर आ गया।
हल्का सा, लेकिन फर्म।
उसकी उँगलियाँ मेरी जांघ के अंदरूनी हिस्से पर सरक रही थीं—धीरे-धीरे, लेकिन जानबूझकर।
मेरा लुंड तुरंत हार्ड हो गया—एक झटके में।
पजामा के कपड़े से दब रहा था, फड़क रहा था।
मैं साँस रोककर बैठा रहा—जैसे कोई स्टैच्यू।
उसने सैंडी के बालों में उँगलियाँ फेरी—जैसे कोई पालतू कुतिया को सहला रहा हो।
फिर मुझे देखकर आँख मारी—विंक।
जैसे कह रहा हो—"देख... ये सब तेरे लिए है... बस एंजॉय कर।"
सैंडी ने अलोक को छोड़ा।
फिर धीरे से, कुतिया की तरह क्रॉल करते हुए मेरी तरफ आई।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—भूखी, लेकिन कंट्रोल्ड।
वो मेरे पैरों के बीच आ गई—घुटनों पर।
मेरा पजामा अभी भी पहना हुआ था—गीला, चिपचिपा।
वो अपना सिर मेरे पजामा के ऊपर लुंड वाली जगह पर रख दिया।
धीरे-धीरे रगड़ने लगी—चेहरे से, गालों से, होंठों से।
फिर नाक से सूँघा—गहरी साँस ली, जैसे मेरी खुशबू ले रही हो।
उसकी साँसें गर्म थीं—पजामा के कपड़े से मेरे लुंड तक पहुँच रही थीं।
फिर उसने दाँतों से मेरे लुंड को पकड़ा—पजामा के ऊपर से।
हल्का सा दबाया—न काटा, न दर्द हुआ, बस एक कंट्रोल्ड ग्रिप।
उसने ऊपर देखा—मेरी आँखों में देखकर विंक किया।
मेरा हाथ अब उसके स्तनों पर चला गया।
धीरे से दबाया—नरम, गर्म, भारी।
उँगलियों से सहलाया, फिर निप्पल्स को हल्के से पिंच किया—बहुत सॉफ्टली, जैसे कोई कीमती चीज़ हो।
"आह्ह..." उसकी मुँह से एक छोटी सी आह निकली—मीठी, दबी हुई।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं—भूखी, लेकिन खुश।
वो अभी भी कमर पर टॉवल लपेटे हुए थी, लेकिन वो टॉवल अब ज्यादा देर नहीं टिकने वाला था।
तभी विशाल बाथरूम से लौटा।
वो सीधे सैंडी के पीछे गया—प्लेफुल तरीके से टॉवल को एक झटके में खींच लिया।
फिर ज़ोर से उसकी गांड पर थप्पड़ मारा—फट्ट!
सैंडी थोड़ा सा झटकी, लेकिन मुड़ी और देखा कि कौन था।
विशाल जोर से हँसा।
सैंडी ने पीछे मुड़कर उसे देखा, फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई—एक शरारती, सेक्सी मुस्कान।
फिर धीरे से ऊपर आई—अब पूरी तरह नंगी।
उसने मेरे पजामा के किनारे को दाँतों से पकड़ा।
बिना हाथ इस्तेमाल किए—धीरे-धीरे नीचे खींचने लगी।
मैंने अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई—उसे मदद करने के लिए।
पजामा नीचे सरका।
मेरा लुंड बाहर आ गया—खुला, हवा में।
न ज्यादा सख्त, न ज्यादा बड़ा या मोटा।
बस... नॉर्मल।
मैं अंदर से शर्मिंदा था।
हमेशा शर्म आती थी—इन बूढ़े आदमियों के सामने इसे दिखाने में।
मैं नहीं चाहता था कि अलोक, विशाल, डेविड इसे देखें।
मैं हमेशा सोचता था—मेरा ये छोटा-सा लुंड... ये इन सबके सामने क्या करेगा?
लेकिन सैंडी ने इसे देखा—और उसके चेहरे पर एक तरह की राहत आई।
जैसे कह रही हो—"ये तो कुछ नहीं... जो मैंने अभी तक झेला, उसके सामने ये तो छोटी बात है।"
उसने बाकी लोगों की तरफ देखा—उनकी आँखों में हल्की हँसी थी, लेकिन कोई डायरेक्ट इंसल्ट नहीं।
वो सिर्फ़ देख रहे थे।
फिर सैंडी ने मेरी तरफ देखा।
उसकी जीभ बाहर निकली—धीरे से मेरी गेंदों पर टच किया।
गर्म, नम, नरम जीभ।
एक गहरी, गर्म साँस मेरी स्किन पर लगी।
मैं सिहर गया।
मेरा लुंड तुरंत फिर से हार्ड हो गया—फड़क उठा।
वो जीभ से मेरी गेंदों को चाट रही थी—धीरे-धीरे, प्यार से, लेकिन भूख के साथ।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—विंक किया।
जैसे कह रही हो—"देखो... ये छोटा सा भी कितना पावरफुल है।"
अलोक ने मेरी तरफ सिगरेट का पैकेट बढ़ाया।
मैंने एक सिगरेट निकाली, होंठों पर रखी।
उसने लाइटर जलाकर आगे किया—मैंने गहरा कश लिया।
धुआँ फेफड़ों में गया, सिर में एक हल्की चक्कर सी आई।
मैंने आँखें बंद कर लीं।
सैंडी की जीभ अब मेरी गेंदों पर थी—गर्म, गीली, धीरे-धीरे चक्कर काट रही थी।
उसकी साँसें मेरी स्किन पर पड़ रही थीं—गर्म, तेज़।
मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड हो चुका था—पजामा के कपड़े से ऊपर उठा हुआ, फड़क रहा था।
"ओओओओह्ह्ह्ह... सैंडी..."
ये शब्द मेरे होंठों से अनजाने में निकल गए—एक लंबी, दबी हुई आह।
मैंने आँखें बंद रखीं, सिर्फ़ महसूस कर रहा था—उसकी जीभ का हर टच, उसकी साँसों की गर्मी, उसकी मुस्कान जो मैं महसूस कर सकता था।
और तभी—
धड़ाम धड़ाम धड़ाम!
मेन गेट पर ज़ोर-ज़ोर से दस्तक हुई।
मेरा दिल एकदम रुक गया।


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