20-02-2026, 07:07 PM
(This post was last modified: 20-02-2026, 07:09 PM by maitripatel. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
बिना उसके जवाब का इंतेज़ार किए, वो बार पर आके ड्रिंक तैयार करने लगी। तभी कल्लन ने उसे पीछे से अपने मज़बूत बाज़ुओं मे जाकड़ लिया और टॉप के उपर से ही उसकी छातिया मसलने लगा। मैत्री की रचना
"औच्च!...आ....ज़ालिम ज़रा आराम से। तो तुझमे भी आग है। मैने तो सोचा था कि तू तो बर्फ की तरह ठंडा है। एयेए....अहह।" कल्लन ने उसके गले मे काट लिया। अब उसके हाथ मलिका के टॉप के अंदर उसकी बूब्स और उन पर बने कड़े हो चुके निपल्स को मसल रहे थे।
मलिका ने एक हाथ पीछे ले जाकर कल्लन के गले मे डाल दिया और अपना चेहरे घुमा कर उसे चूमने लगी, दूसरा हाथ उसने उस की पॅंट की ज़िप पर रख दिया। "उफ़फ्फ़...बहुत बड़ा लगता है तेरा।" उसके होठों को छोड़ते हुए मलिका बोली और पॅंट की ज़िप खोल लंड को बाहर निकाल लिया। उसने सर नीचे कर देखा, सचमुच कल्लन का लंड बहुत बड़ा था।
बड़े लंड मलिका की कमज़ोरी थी। जब्बार का लंड बहुत मोटा था पर लंबाई कुछ खास नही थी। जब्बार की ख़ासियत थी उसका स्टॅमिना, जो कि मलिका जैसी हर वक़्त गरम रहने वाली लड़की की प्यास बुझाने मे बहुत काम आता था। पर मलिका की नज़रों मे बड़े लड की बात ही कुछ और थी और वो कभी भी ऐसे लंडो को अपनी चूत मे लेने से नही चूकती थी। उसे एक लंड से संतोष भी कहा मिलता था|
उसने अपने हाथ से कल्लन के लंड को रगड़ना शुरू कर दिया, लंड देख ते ही उसकी चूत गीली हो गयी थी। कल्लन अब आपे से बाहर हो गया। उसने मलिका के दाये घुटने को मोडते हुए, उसकी जाँघ उठा कर बार पर रख दिया और वैसे ही खड़े-खड़े अपना लंड उसकी चिकनी चूत मे पेल दिया।
"आआ.....ईिईययईईए! फाड़ देगा क्या? थोड़ा धीरे घुसा ना। ऊओवव्व!" उसकी बातें कल्लन को और दीवाना कर रही थी और उसने अपना पूरा लंड उसके अंदर घुसा दिया और धक्के मारने लगा। "हा....अन्न....ऐसे ..ही....ज़ोर से....है....और...ज़ोर से मेरी चूत को मार...ना।"
मलिका भी अपनी गांड हिला कर उसका पूरा साथ दे रही थी, उसकी एक बाँह कल्लन की गर्दन को घेरे थी और दूसरी बाँह पर उसके बदन को सहारा दे रही थी। कल्लन का एक हाथ उसकी चूचिया मसल रहा था और दूसरे की उंगलिया चूत के दाने को रगड़ रही थी, होठ कभी उसके चेहरे, कभी होठ चूचियों पे घूम रहे थे। बहुत ज़ोर की चुदाई चल रही थी।
"ट्र्न्न्न!", कॉल बेल चीख उठी तो दोनो चौंक गये और मलिका की चूत ने पानी छोड़ दिया। कल्लन की कमर ने भी 2-3 झटके खाए और उसका लंड मलिका की चूत मे पिचकारी मार के झड़ गया।
मलिक ने बार से एक नॅपकिन उठाया और कल्लन से अलग हो गई। दरवाज़े तक जाते हुए उसने अपनी जांघों पर बह आए कल्लन के और अपने पानी को साफ़ कर लिया। दरवाज़े पर जब्बार था।
अंदर आया तो उसने देखा की कल्लन सोफे पर बैठा ड्रिंक कर रहा था। थोड़ी देर पहले मचे वासना के तूफान का नाम ओ निशान उसके चेहरे पर नही था।
"क्यू बुलाया था?" उसने जब्बार से पूछा। मैत्री की पेशकश
"एक छोटी-सी मछली हाथ लगी है जिसके ज़रिए हम बड़ी मछली तक पहुँच सकते हैं।" उसने मलिका के हाथ से ड्रिंक लेते हुए जवाब दिया।,
"हमे बहुत शॉर्ट नोटीस पर भी काम करने को तैय्यार रहना होगा। आज से तुम यही रहो पर ध्यान रहे, किसी को इस बात का पता नही चलना चाहिए कि तुम यहा हो।" जब्बार कह तो कल्लन से रहा था पर उसकी नज़रे मलिका पर थी जो कि बड़े सोफे पर लेट कर उनकी बातें सुन रही थी।
"अब क्या करना है?" कल्लन अपना खाली ग्लास फिर भरने के लिए उठा।
"उस छोटी मछली को चारा डालना है।" जब्बार मलिका की तरफ देख कर कुटिलता से मुस्कुराया।
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आज के लिए बस यही तक
फिर मिलेंगे...............एक्नाये एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से
जय भारत
"औच्च!...आ....ज़ालिम ज़रा आराम से। तो तुझमे भी आग है। मैने तो सोचा था कि तू तो बर्फ की तरह ठंडा है। एयेए....अहह।" कल्लन ने उसके गले मे काट लिया। अब उसके हाथ मलिका के टॉप के अंदर उसकी बूब्स और उन पर बने कड़े हो चुके निपल्स को मसल रहे थे।
मलिका ने एक हाथ पीछे ले जाकर कल्लन के गले मे डाल दिया और अपना चेहरे घुमा कर उसे चूमने लगी, दूसरा हाथ उसने उस की पॅंट की ज़िप पर रख दिया। "उफ़फ्फ़...बहुत बड़ा लगता है तेरा।" उसके होठों को छोड़ते हुए मलिका बोली और पॅंट की ज़िप खोल लंड को बाहर निकाल लिया। उसने सर नीचे कर देखा, सचमुच कल्लन का लंड बहुत बड़ा था।
बड़े लंड मलिका की कमज़ोरी थी। जब्बार का लंड बहुत मोटा था पर लंबाई कुछ खास नही थी। जब्बार की ख़ासियत थी उसका स्टॅमिना, जो कि मलिका जैसी हर वक़्त गरम रहने वाली लड़की की प्यास बुझाने मे बहुत काम आता था। पर मलिका की नज़रों मे बड़े लड की बात ही कुछ और थी और वो कभी भी ऐसे लंडो को अपनी चूत मे लेने से नही चूकती थी। उसे एक लंड से संतोष भी कहा मिलता था|
उसने अपने हाथ से कल्लन के लंड को रगड़ना शुरू कर दिया, लंड देख ते ही उसकी चूत गीली हो गयी थी। कल्लन अब आपे से बाहर हो गया। उसने मलिका के दाये घुटने को मोडते हुए, उसकी जाँघ उठा कर बार पर रख दिया और वैसे ही खड़े-खड़े अपना लंड उसकी चिकनी चूत मे पेल दिया।
"आआ.....ईिईययईईए! फाड़ देगा क्या? थोड़ा धीरे घुसा ना। ऊओवव्व!" उसकी बातें कल्लन को और दीवाना कर रही थी और उसने अपना पूरा लंड उसके अंदर घुसा दिया और धक्के मारने लगा। "हा....अन्न....ऐसे ..ही....ज़ोर से....है....और...ज़ोर से मेरी चूत को मार...ना।"
मलिका भी अपनी गांड हिला कर उसका पूरा साथ दे रही थी, उसकी एक बाँह कल्लन की गर्दन को घेरे थी और दूसरी बाँह पर उसके बदन को सहारा दे रही थी। कल्लन का एक हाथ उसकी चूचिया मसल रहा था और दूसरे की उंगलिया चूत के दाने को रगड़ रही थी, होठ कभी उसके चेहरे, कभी होठ चूचियों पे घूम रहे थे। बहुत ज़ोर की चुदाई चल रही थी।
"ट्र्न्न्न!", कॉल बेल चीख उठी तो दोनो चौंक गये और मलिका की चूत ने पानी छोड़ दिया। कल्लन की कमर ने भी 2-3 झटके खाए और उसका लंड मलिका की चूत मे पिचकारी मार के झड़ गया।
मलिक ने बार से एक नॅपकिन उठाया और कल्लन से अलग हो गई। दरवाज़े तक जाते हुए उसने अपनी जांघों पर बह आए कल्लन के और अपने पानी को साफ़ कर लिया। दरवाज़े पर जब्बार था।
अंदर आया तो उसने देखा की कल्लन सोफे पर बैठा ड्रिंक कर रहा था। थोड़ी देर पहले मचे वासना के तूफान का नाम ओ निशान उसके चेहरे पर नही था।
"क्यू बुलाया था?" उसने जब्बार से पूछा। मैत्री की पेशकश
"एक छोटी-सी मछली हाथ लगी है जिसके ज़रिए हम बड़ी मछली तक पहुँच सकते हैं।" उसने मलिका के हाथ से ड्रिंक लेते हुए जवाब दिया।,
"हमे बहुत शॉर्ट नोटीस पर भी काम करने को तैय्यार रहना होगा। आज से तुम यही रहो पर ध्यान रहे, किसी को इस बात का पता नही चलना चाहिए कि तुम यहा हो।" जब्बार कह तो कल्लन से रहा था पर उसकी नज़रे मलिका पर थी जो कि बड़े सोफे पर लेट कर उनकी बातें सुन रही थी।
"अब क्या करना है?" कल्लन अपना खाली ग्लास फिर भरने के लिए उठा।
"उस छोटी मछली को चारा डालना है।" जब्बार मलिका की तरफ देख कर कुटिलता से मुस्कुराया।
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जय भारत


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