20-02-2026, 02:14 PM
नेहा ने क्लीनिंग का काम खत्म किया, धीरे से उठी—टॉपलेस, बदन पसीने से चमकता हुआ, स्तन अभी भी भारी-भरकम साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।
उसकी आँखें मेरी तरफ—वो आज पावरहाउस थी, जैसे कोई आग लगी हो अंदर।
मैं बस उसे देखता रहा—1.5 घंटे बीत चुके थे, 7:30 से 9 बज गए, और हमारा ये "शो" अभी भी चल रहा था।
आमतौर पर तो आधे घंटे में खत्म हो जाता था—पहले ड्रिंक, फिर कम्फर्टेबल होकर सीधे सेक्स।
लेकिन आज कुछ और था।
मैं जानता था मैं क्यों इतना एक्साइटेड था—लेकिन नेहा? वो आज अलग लेवल पर थी।
मैंने खुद को रोक नहीं पाया।
उसके पास गया, दोनों हाथों से उसके चेहरे को पकड़ा और गहरा किस किया।
हमारी जीभें मिलीं—तेज़, भूखी, लड़ती हुई।
मैं अपने ही कम का स्वाद महसूस कर रहा था उसके मुँह में—नमकीन, गाढ़ा, गर्म—लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
बल्कि और जोश आ रहा था।
एक हाथ उसकी गांड पर—कसकर दबाया, मसलता हुआ, दूसरा हाथ उसकी जींस के क्रॉच पर गया।
उँगलियाँ बाहर से ही रगड़ने लगीं—धीरे-धीरे, फिर जोर से।
उसकी जींस गीली हो चुकी थी वहाँ, गर्माहट महसूस हो रही थी।
मैंने जींस का बटन खोलने की कोशिश की—उँगलियाँ अंदर डालकर ज़िप नीचे करने लगा।
तभी नेहा ने किस तोड़ा।
पीछे हटी, मेरी आँखों में देखा—होंठ सूजे, साँसें तेज़।
"बेबी... वेट..." वो फुसफुसाई, आवाज़ में थकान और मुस्कान दोनों।
"मैं भूखी हूँ... और कुछ बियर चाहिए।"
मैंने हल्के से हँसा,
लेकिन अंदर से सोच रहा था—अब मेरी बारी है।
उसने मुझे इतना दिया है, अब मुझे उसे ऑर्गेज़्म देना है।
उसे तड़पाना है, चिल्लाना है, मेरे नाम से पुकारना है।
नेहा ने मेरी सोच पढ़ ली जैसे।
वो मुस्कुराई, मेरे सीने पर हाथ रखा, और बोली,
"मैं अभी-अभी तुम्हें ब्लो करके खत्म कर चुकी हूँ... अब मुझे रिलैक्स होने दे।"
फिर मेरी कमर में हाथ डाला, मुझे बेड की तरफ खींचा।
"बियर लाओ... साथ में कुछ खाने को।
फिर... जो करना है, वो धीरे-धीरे करेंगे।
आज रात अभी लंबी है।"
मैंने उसे देखा—वो अभी भी टॉपलेस थी, जींस का बटन खुला हुआ, आँखों में वही भूख।
मैंने रिसेप्शन पर कॉल किया और ऑर्डर दे दिया—कुछ स्नैक्स, दो कोल्ड बियर
15 मिनट बाद दरवाज़े पर नॉक हुई।
मैं अभी भी बेड के पास खड़ा था, नेहा बेड पर लेटी हुई—टॉपलेस, स्तन अभी भी हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे, चेहरा पसीने और मेरे निशानों से चमकता हुआ।
सब कुछ फिर से फ्लैश हो गया मेरे दिमाग में—सुबह वाला वेटर, जो नेहा को देखकर थोड़ा अटपटा हो गया था।
क्या वही आएगा?
मेरा दिल धड़कने लगा।
मैंने नेहा की तरफ देखा, घबराते हुए कहा,
"कोई दरवाज़े पर है... कुछ पहन ले ना!"
नेहा ने बस मुस्कुराई—एक शरारती, तेज़ मुस्कान।
उठकर बैठ गई, दोनों हाथ पीछे करके बेड पर टिकाए, स्तन और भी उभर आए।
"बेबी... मैं ऐसे ही दरवाज़ा खोल सकती हूँ... क्या प्रॉब्लम है?"
फिर आँख मारकर, टॉन्ग बाहर निकालकर चाटते हुए बोली, "देखना चाहता है क्या वो कैसे रिएक्ट करता है?"
मेरा लिम्प डिक एकदम जाग गया—फिर से हल्का सा खड़ा होने लगा।
वो उठी, धीरे-धीरे दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगी—टॉपलेस, जींस का बटन अभी भी खुला हुआ, कमर नंगी।
हर कदम के साथ उसके स्तन हिल रहे थे, और मेरी साँसें रुक रही थीं।
क्या ये सच में हो रहा है?
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था—एक्साइटमेंट, डर, और जोश का मिक्स।
तभी नेहा रुकी, मुड़ी, मुझे देखकर हँसी—एक पूरी तरह मास्टर वाली हँसी।
फिर तेज़ी से बाथरूम की तरफ दौड़ी, दरवाज़ा बंद करते हुए आखिरी शब्द बोले,
"जा... खोल दे बेबी!"
दरवाज़ा बंद हो गया।
मैं अकेला खड़ा था—नंगा, दिल धड़कता हुआ, और डिक फिर से हल्का सा पल्स कर रहा था।
दरवाज़े पर फिर नॉक हुई—"साब... ऑर्डर..."
मैंने जल्दी से एक टॉवल लपेटा कमर पर, साँसें संभालीं, और दरवाज़ा खोला।
वही वेटर था—सुबह वाला।
उसने ट्रे आगे बढ़ाई, लेकिन नज़रें मेरे पीछे कमरे में घूम रही थीं—शायद नेहा को ढूँढ रहा था।
मैंने ट्रे ली, टिप दी, और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया।
अंदर मुड़ा तो बाथरूम का दरवाज़ा खुला था।
नेहा बाहर आई—अभी भी टॉपलेस, लेकिन अब एक छोटा सा टॉवल लपेटा कमर पर।
वो हँसते हुए मेरे पास आई, ट्रे से बियर की बोतल उठाई, और मेरे होंठों पर चूम लिया।
"डर गए थे ना?" वो फुसफुसाई, "लेकिन देखा... मैं कितनी शरारती हूँ आज।"
मैंने उसे बाहों में खींचा, बियर की बोतल उसके हाथ से छीनी, और कहा,
"तू आज पागल कर रही है मुझे... लेकिन अब बारी मेरी है।
बियर पी... खा... क्योंकि उसके बाद तुझे चिल्लाने का मौका मिलेगा।"
नेहा ने बियर का एक घूँट लिया, ठंडक महसूस करते हुए आँखें बंद कीं।
फिर मेरी तरफ देखा—आँखों में वही भूख।
"तो आओ... शुरू करो।
मैं तैयार हूँ... पूरी तरह।"
हम दोनों अब टॉवल में लिपटे हुए थे—मैंने कमर पर एक, नेहा ने भी छोटा सा टॉवल लपेटा हुआ था, जो मुश्किल से उसकी जांघों तक ढक रहा था।
टीवी ऑन था—कोई सॉफ्ट म्यूजिक चल रहा था, लाइट्स डिम, कमरा अभी भी हमारी गर्मी और बियर की ठंडक से भरा हुआ।
मैंने बेड पर बैठकर बियर की बोतल उठाई, एक घूँट लिया, ठंडक गले से नीचे उतरी।
नेहा मेरे बगल में बैठ गई, अपनी बोतल मेरे होंठों पर रखी—मैंने पीया, फिर उसने।
हम दोनों हँसते हुए एक-दूसरे को देख रहे थे।
फिर बिना कुछ कहे, मैंने उसे खींचकर किस करना शुरू किया।
धीरे-धीरे, गहराई से—हमारी जीभें फिर से लड़ने लगीं, बियर का स्वाद मिला हुआ।
मेरा एक हाथ उसके टॉवल के ऊपर से उसके स्तनों पर गया—नरम, गर्म, अभी भी थोड़े सूजे हुए।
मैंने हल्के से मसला, निप्पल्स को उँगलियों से घुमाया।
नेहा ने आह भरी, सिर पीछे करके—उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
अचानक वो शरारत से हँसी, बोतल उठाई, और थोड़ा सा बियर अपने स्तनों पर डाल दिया।
ठंडी बूंदें उसके निप्पल्स से नीचे सरकने लगीं—चमकती हुई, सेक्सी।
वो मेरी तरफ देखकर बोली,
"क्या कर सकते हो... चाटोगे?"
मैंने बिना जवाब दिए झुक गया।
जीभ से पहले निप्पल को छुआ—ठंडा बियर और उसकी गर्म स्किन का मिक्स।
फिर पूरी तरह चाटने लगा—एक स्तन से दूसरा, बूंद-बूंद चाटते हुए।
नेहा की हँसी अब आहों में बदल गई—वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थी, सिर दबा रही थी।
मैं नीचे सरकता गया—बियर की बूंदें उसके पेट तक पहुँच गई थीं।
उसकी नाभि गहरी थी—मैंने जीभ डालकर वहाँ से पी लिया, जैसे कोई कीमती शराब हो।
नेहा हँस पड़ी—प्लेफुल, शरारती हँसी।
"और नीचे... देखो क्या हो रहा है।"
उसने फिर बोतल उठाई, थोड़ा और बियर डाला—इस बार सीधे अपने पेट से नीचे, टॉवल के किनारे तक।
बूंदें उसकी जांघों पर सरक रही थीं, और अब उसकी पुसी तक पहुँच रही थीं—गीली, चमकती।
मैं नीचे झुका, टॉवल थोड़ा सा हटाया।
उसकी पुसी पहले से ही गीली थी—बियर की बूंदों से और भी चमक रही थी।
मैंने जीभ से चाटना शुरू किया—धीरे से, बियर का स्वाद, उसकी अपनी खुशबू का मिक्स।
नेहा अब जोर से हँस रही थी—प्लेफुल, लेकिन एक्साइटेड।
"आह्ह... बेबी... ऐसे ही... चाटो... सब पी लो..."
वो एक हाथ से सिगरेट जला रही थी—एक कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका, दूसरा हाथ मेरे सिर पर।
दूसरी तरफ से वो उठाकर खा रही थी—मुँह में डालती, चबाती, और बीच-बीच में आहें भरती।
स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, ईटिंग—और मैं उसके नीचे, उसकी पुसी को चाटता हुआ।
मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड हो चुका था—टॉवल के नीचे फड़क रहा था।
नेहा ने नीचे देखा, मुस्कुराई।
" फिर तैयार हो गया... लेकिन पहले मुझे... मुझे जीभ से ही ..."
वो पैर फैलाकर लेट गई—बियर की बोतल साइड में, सिगरेट होंठों पर, आँखें मेरी तरफ।
नेहा के पैरों को और फैलाया, उसकी पुसी अब पूरी तरह मेरे सामने—गीली, गर्म, बियर की बूंदों और अपनी एक्साइटमेंट से चमकती हुई।
मैंने पहले जीभ से शुरू किया—क्लिटोरिस पर हल्के सर्कल बनाते हुए, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई।
नेहा की बॉडी तुरंत रिएक्ट कर गई, कमर ऊपर उठी।
"आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही..." वो मॉन करने लगी, मेरा नाम लेते हुए—सैम।
उसकी आवाज़ में हमेशा वाली इज्ज़त थी—कभी "तू" नहीं, हमेशा "तुम" या "आप"।
मैंने जीभ को और गहरा किया, लेकिन अब एक उँगली भी जोड़ी—धीरे से अंदर डाली।
उसकी पुसी इतनी गीली थी कि उँगली आसानी से सरक गई।
मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया—धीरे, लेकिन उँगली को कर्व करके उस स्पॉट को टच करते हुए।
नेहा ने तुरंत महसूस किया।
"सैम... हाँ... थोड़ा दायें... स्लाइट राइट... ओह्ह... येस... वो स्पॉट... ठीक वही..."
मैंने उसकी बात मानी—उँगली को थोड़ा दायें शिफ्ट किया, प्रेशर बढ़ाया।
जीभ अभी भी क्लिट पर काम कर रही थी—तेज़ फ्लिक्स, सर्कल्स, और कभी-कभी हल्का सक्शन।
नेहा के मॉन्स अब और जोरदार हो गए।
"सैम... अब दो उँगलियाँ... प्लीज़... दो... गू डीप..."
मैंने दूसरी उँगली भी डाली—दोनों साथ में, धीरे से अंदर-बाहर।
उसकी पुसी ने उन्हें टाइटली पकड़ लिया, गर्म और गीली।
मैंने स्पीड बढ़ाई—उँगलियाँ अब तेज़ी से मूव कर रही थीं, कर्व्ड करके G-स्पॉट को बार-बार हिट करते हुए।
जीभ क्लिट पर फिक्स—तेज़, कंसिस्टेंट।
नेहा अब बिस्तर की चादर पकड़कर चिल्ला रही थी—मेरा नाम जोर-जोर से, लेकिन इज्ज़त से।
"सैम... ओह्ह फक... सैम... गू डीप... हाँ... येस... ठीक वैसा ही... मत रुकना... फास्टर... सैम... मैं... आ रही हूँ..."
उसकी कमर अब पूरी तरह ऊपर उठ चुकी थी, पैर काँप रहे थे।
मैंने उँगलियों की स्पीड और प्रेशर और बढ़ाया—दोनों उँगलियाँ अंदर तक, बाहर निकालते हुए क्लिट को जीभ से साथ में।
नेहा की साँसें रुक गईं, बॉडी टाइट हो गई।
"सैम... येस... येस... सैम... आह्ह्ह्ह...!"
वो जोर से झड़ गई—इंटेंस, लंबा ऑर्गेज़्म।
उसकी पुसी मेरी उँगलियों पर पल्स कर रही थी, गर्म तरल निकल रहा था—मैंने उँगलियाँ अंदर रखीं, धीरे-धीरे मूव करते हुए उसे पूरा एक्सपीरियंस देने के लिए।
जीभ अभी भी हल्के से क्लिट को छू रही थी, ओवरसेंसिटिव लेकिन एक्स्ट्रा प्लेज़र के लिए।
नेहा की बॉडी हिल रही थी, आँखें बंद, मुँह खुला, साँसें तेज़-तेज़।
कई सेकंड बाद वो धीरे-धीरे नीचे आई।
आँखें खोलीं—पानी से भरी, चमकती हुई।
मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई, आवाज़ काँपती हुई लेकिन खुश।
"सैम... आपने... मुझे आज तोड़ दिया... इतना इंटेंस... दो उँगलियाँ... जीभ... सब कुछ... परफेक्ट..."
नेहा मुझे ऊपर खींचकर चूम रही थी, उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी—गहरा, गीला किस।
मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था, टॉवल अभी भी कमर पर लिपटा हुआ, लेकिन मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड, उसके पेट से टकरा रहा था।
उसने मेरे कान में फुसफुसाया, आवाज़ में वही इज्ज़त और शरारत मिली हुई,
"सैम... आप बताइए... अब क्या करना चाहते हैं? मैं तैयार हूँ... पूरी तरह आपकी।"
मैंने उसके होंठ फिर से चूमे, लेकिन दिमाग में एक विचार बार-बार आ रहा था—वो वेटर।
सुबह वाला वही लड़का, जो दरवाज़ा खोलते ही नेहा को टॉपलेस देखकर थोड़ा हक्का-बक्का हो गया था।
अब अगर वो बाहर खड़ा हो... अगर वो किसी तरह झाँक रहा हो... या कल्पना कर रहा हो कि अंदर क्या हो रहा है...
ये विचार मेरे अंदर एक अलग ही आग लगा रहा था।
क्या होगा अगर वो सुन रहा हो? हमारी आहें, नेहा का मेरा नाम पुकारना...
ये सोचते ही मेरा लुंड और सख्त हो गया, और मैंने नेहा को और जोर से दबाया।
"नेहा... अगर वो वेटर अभी भी बाहर हो... और सोच रहा हो कि हम क्या कर रहे हैं..." मैंने उसके कान में कहा, आवाज़ भारी।
नेहा ने हल्के से हँसी, आँखें चमकती हुईं।
"सैम... आप भी ना... वो सोचे तो सोचे... इससे क्या फर्क पड़ता है? बल्कि... इससे और मज़ा आएगा ना?"
वो मेरी कमर पर पैर लपेटकर मुझे और करीब खींच रही थी।
मैंने टॉवल हटाया—दोनों के।
अब हम दोनों पूरी तरह नंगे, एक-दूसरे से चिपके।
मैंने अपना लुंड उसके पुसी के ऊपर रखा—धीरे से रगड़ा, लेकिन अंदर नहीं डाला अभी।
नेहा की साँसें तेज़ हो गईं।
"सैम... प्लीज़... अंदर डालिए..."
मैंने धीरे से धक्का दिया—पहला इंच अंदर गया, वो टाइट, गर्म, गीली।
नेहा ने आह भरी—"आह्ह... सैम... हाँ... धीरे..."
मैंने और गहराई तक धकेला—पूरा अंदर।
हम दोनों एक साथ आह भरे।
फिर मैंने मूवमेंट शुरू किया—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।
हर थ्रस्ट के साथ दिमाग में वही विचार—अगर वो वेटर बाहर हो... अगर वो सुन रहा हो...
ये सोच मेरे जोश को दोगुना कर रही थी।
मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से, नेहा की कमर पकड़कर।
नेहा अब मॉन कर रही थी—"सैम... ओह्ह... सैम... और जोर से... हाँ..."
मैंने उसके स्तनों को मसलते हुए कहा,
"नेहा... सोचो... अगर वो देख रहा हो... हम दोनों को... ऐसे..."
नेहा ने आँखें बंद कीं, मुस्कुराई—"तो देखने दो... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... सैम... आप और तेज़..."
मैंने स्पीड बढ़ाई—कमरा सिर्फ हमारी साँसों, थप्पड़ जैसी आवाज़ों, और नेहा के मॉन्स से भर गया।
वो विचार—वेटर का सोचना—मुझे और एक्साइटेड कर रहा था, और नेहा को और ज़्यादा प्लेज़र दे रहा था।
मैंने नेहा के बालों को धीरे से, लेकिन मजबूती से पकड़ा—सॉफ्टली, जैसे कोई प्यार भरी कमांड हो।
वो मेरी तरफ देख रही थी—आँखों में सवाल था, लेकिन विरोध बिल्कुल नहीं।
उसने बस हल्के से मुस्कुराई, जैसे कह रही हो, "जो आप चाहें, सैम... मैं आपकी हूँ।"
मैंने उसे खींचकर दरवाज़े की तरफ ले गया—दोनों पूरी तरह नंगे, कमरे की डिम लाइट में हमारी बॉडीज़ चमक रही थीं।
उसके कदम मेरे साथ चल रहे थे, बिना किसी रुकावट के।
दरवाज़े के ठीक सामने पहुँचकर मैंने उसे झुकाया—उसके गाल ठंडे दरवाज़े से रगड़ रहे थे, साँसें तेज़ हो गईं।
मैंने उसके बालों को अपनी मुट्ठी में और सख्त किया, लेकिन दर्द नहीं—बस कंट्रोल।
मैंने अपना लुंड उसके पुसी पर टच किया—वो पहले से ही गीली, गर्म।
नेहा ने खुद अपने पैर थोड़े फैलाए—बिना कुछ कहे, बस मुझे इनवाइट करने के लिए।
एक झटके में मैंने पूरा अंदर डाल दिया।
"आआआह्ह्ह..."
हम दोनों की एक साथ आह निकली—उसकी आवाज़ ऊँची, मेरी भारी।
उसकी पुसी ने मुझे टाइटली पकड़ लिया, जैसे कभी छोड़ना ही न हो।
फिर रिदम शुरू हुआ—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।
हर थ्रस्ट के साथ उसका सिर हल्का-हल्का दरवाज़े से टकरा रहा था—नरम, लेकिन रिदम में।
"आह्ह... सैम... ओह्ह..." वो मॉन कर रही थी, नाम लेते हुए, इज्ज़त से।
"आप... और गहरा... प्लीज़..."
मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से धक्के, कमर पकड़कर।
दरवाज़ा हल्का-हल्का हिल रहा था, बाहर से सुनाई दे रहा होगा।
मेरा दिमाग फिर उसी विचार में चला गया—वो वेटर... या कोई और... बाहर खड़ा हो... सुन रहा हो हमारी हर आवाज़।
नेहा की आहें, मेरी साँसें, थप्पड़ जैसी आवाज़ जब मेरा लुंड अंदर-बाहर हो रहा था।
क्या वो कल्पना कर रहा होगा कि हम दोनों यहाँ... ऐसे... दरवाज़े के ठीक पीछे?
ये सोचते ही मेरा जोश दोगुना हो गया।
मैंने उसके बाल और सख्त पकड़े, सिर थोड़ा पीछे खींचा—उसकी गर्दन एक्सपोज़ हो गई।
मैंने उसके कान में फुसफुसाया,
"नेहा... सोचो... अगर कोई बाहर हो... सुन रहा हो... हम दोनों को..."
नेहा ने आँखें बंद कीं, होंठ काटे, फिर मुस्कुराई—आवाज़ काँपती हुई,
"सैम... तो सुनने दीजिए... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... आप और जोर से... प्लीज़..."
मैंने स्पीड बढ़ाई—अब हर थ्रस्ट में पूरा बल।
उसका गाल दरवाज़े से रगड़ रहा था, सिर हल्का-हल्का टकरा रहा था, आहें अब और ऊँची।
"सैम... आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही... मत रुकिए..."
मैं बाहर की तरफ सोच रहा था—अगर कोई सच में सुन रहा है... तो सुन ले... ये हमारा पल है।
ये विचार मुझे और एक्साइटेड कर रहा था—और नेहा को भी।
उसकी पुसी अब और टाइट हो रही थी, जैसे ऑर्गेज़्म की तरफ बढ़ रही हो।
मैंने एक हाथ उसके क्लिट पर रखा—उँगलियों से रगड़ते हुए, जबकि लुंड अंदर-बाहर।
नेहा चिल्लाई—"सैम... ओह्ह... मैं... फिर से... आ रही हूँ..."
हम दोनों तेज़ी से क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ रहे थे—दरवाज़े के ठीक पीछे, पूरी तरह एक्सपोज़्ड फीलिंग के साथ।
XXXXXX
दूसरी बार, सिर्फ़ पिछले 2 घंटों में... मैंने इतनी जल्दी दोबारा झड़ना कभी नहीं देखा था।
पहले तो कभी-कभी घंटों लग जाते थे रिकवर होने में, लेकिन आज... नेहा की वो खूबसूरती, उसकी हरकतें, वो सरेंडर, वो दरवाज़े के पास वाली पोज़िशन—सब कुछ मिलकर मुझे पागल कर रहा था।
या शायद वो वेटर का विचार... वो सोच कि कोई बाहर खड़ा सुन रहा है, कल्पना कर रहा है कि हम क्या कर रहे हैं... वो एक्साइटमेंट मेरे अंदर आग की तरह फैल रहा था।
मैं नहीं जानता क्या था असली वजह—नेहा की खूबसूरती, उसकी आज की वाइल्डनेस, या वो फैंटसी कि कोई और हमारी प्राइवेसी में झाँक रहा है।
लेकिन जो भी था, वो कमाल का था।
अब घड़ी में 11 बज चुके थे।
नेहा फ्रेश होकर आई—बाथरूम से निकलकर, हल्के से गीले बाल, बॉडी पर सिर्फ़ एक पतला टॉवल लपेटा हुआ, जो मुश्किल से ढक रहा था।
वो बेड पर आई, मेरे पास लेट गई, मुझे टाइटली हग किया।
उसकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ीं—गर्म, थकी हुई, लेकिन संतुष्ट।
उसने गहरी साँस ली और फुसफुसाई,
"आई लव इट, बेबी... आज सब कुछ... परफेक्ट था।"
कुछ ही मिनटों में उसकी साँसें गहरी और रेगुलर हो गईं।
वो गहरी नींद में सो गई—चेहरा शांत, होंठ हल्के खुले, एक हाथ मेरी छाती पर।
लेकिन मेरी आँखों से नींद दूर थी।
मैं छत की तरफ देखता रहा, दिमाग में वही विचार घूम रहे थे।
वो वेटर...
जब हम बाहर गए थे, या जब नेहा शावर ले रही थी... क्या वो कमरे में अकेला था?
क्या उसने नेहा के अंडरगारमेंट्स को छुआ?
उसकी ब्रा, पैंटी—जो बेड पर पड़ी थीं, गंध लेने के लिए, या शायद और कुछ...
कितनी बार उसने हाथ में लिया होगा, कितनी बार उसने खुद को सहलाया होगा, नेहा की ब्रा को सूँघते हुए, या कल्पना करते हुए कि वो नेहा के स्तनों को छू रहा है।
उसकी वो डार्क ब्राउन आँखें, वो गाल, वो होंठ... क्या वो सोच रहा होगा कि नेहा के निप्पल्स कितने सॉफ्ट होंगे?
और कितने लोगों को बताया होगा उसने?
अपने दोस्तों को, या रिसेप्शन पर बैठे दूसरे स्टाफ को—
"यार, आज एक जोड़ा आया... औरत की बॉडी... उफ्फ... उसके बूब्स... इतने परफेक्ट..."
शायद वो हँसते हुए डिटेल्स दे रहा हो—नेहा का टॉपलेस होना
शायद वो कल्पना कर रहा हो कि नेहा उसके सामने घुटनों पर बैठी हो, या दरवाज़े के पीछे हमारी हर आवाज़ सुनकर वो खुद को छू रहा हो।
ये सब सोचते-सोचते मेरा लुंड फिर से हल्का सा पल्स करने लगा।
नींद नहीं आ रही थी—बल्कि एक अजीब सा जोश था।
नेहा सो रही थी, लेकिन मेरा दिमाग अभी भी उस फैंटसी में डूबा हुआ था।
क्या कल सुबह वो वेटर फिर आएगा?
क्या वो नेहा को देखकर मुस्कुराएगा, या शरमाएगा?
या शायद वो कुछ और प्लान कर रहा हो...
मैंने नेहा को और करीब खींचा—उसकी गर्म बॉडी मेरे से चिपकी हुई।
उसकी आँखें मेरी तरफ—वो आज पावरहाउस थी, जैसे कोई आग लगी हो अंदर।
मैं बस उसे देखता रहा—1.5 घंटे बीत चुके थे, 7:30 से 9 बज गए, और हमारा ये "शो" अभी भी चल रहा था।
आमतौर पर तो आधे घंटे में खत्म हो जाता था—पहले ड्रिंक, फिर कम्फर्टेबल होकर सीधे सेक्स।
लेकिन आज कुछ और था।
मैं जानता था मैं क्यों इतना एक्साइटेड था—लेकिन नेहा? वो आज अलग लेवल पर थी।
मैंने खुद को रोक नहीं पाया।
उसके पास गया, दोनों हाथों से उसके चेहरे को पकड़ा और गहरा किस किया।
हमारी जीभें मिलीं—तेज़, भूखी, लड़ती हुई।
मैं अपने ही कम का स्वाद महसूस कर रहा था उसके मुँह में—नमकीन, गाढ़ा, गर्म—लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
बल्कि और जोश आ रहा था।
एक हाथ उसकी गांड पर—कसकर दबाया, मसलता हुआ, दूसरा हाथ उसकी जींस के क्रॉच पर गया।
उँगलियाँ बाहर से ही रगड़ने लगीं—धीरे-धीरे, फिर जोर से।
उसकी जींस गीली हो चुकी थी वहाँ, गर्माहट महसूस हो रही थी।
मैंने जींस का बटन खोलने की कोशिश की—उँगलियाँ अंदर डालकर ज़िप नीचे करने लगा।
तभी नेहा ने किस तोड़ा।
पीछे हटी, मेरी आँखों में देखा—होंठ सूजे, साँसें तेज़।
"बेबी... वेट..." वो फुसफुसाई, आवाज़ में थकान और मुस्कान दोनों।
"मैं भूखी हूँ... और कुछ बियर चाहिए।"
मैंने हल्के से हँसा,
लेकिन अंदर से सोच रहा था—अब मेरी बारी है।
उसने मुझे इतना दिया है, अब मुझे उसे ऑर्गेज़्म देना है।
उसे तड़पाना है, चिल्लाना है, मेरे नाम से पुकारना है।
नेहा ने मेरी सोच पढ़ ली जैसे।
वो मुस्कुराई, मेरे सीने पर हाथ रखा, और बोली,
"मैं अभी-अभी तुम्हें ब्लो करके खत्म कर चुकी हूँ... अब मुझे रिलैक्स होने दे।"
फिर मेरी कमर में हाथ डाला, मुझे बेड की तरफ खींचा।
"बियर लाओ... साथ में कुछ खाने को।
फिर... जो करना है, वो धीरे-धीरे करेंगे।
आज रात अभी लंबी है।"
मैंने उसे देखा—वो अभी भी टॉपलेस थी, जींस का बटन खुला हुआ, आँखों में वही भूख।
मैंने रिसेप्शन पर कॉल किया और ऑर्डर दे दिया—कुछ स्नैक्स, दो कोल्ड बियर
15 मिनट बाद दरवाज़े पर नॉक हुई।
मैं अभी भी बेड के पास खड़ा था, नेहा बेड पर लेटी हुई—टॉपलेस, स्तन अभी भी हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे, चेहरा पसीने और मेरे निशानों से चमकता हुआ।
सब कुछ फिर से फ्लैश हो गया मेरे दिमाग में—सुबह वाला वेटर, जो नेहा को देखकर थोड़ा अटपटा हो गया था।
क्या वही आएगा?
मेरा दिल धड़कने लगा।
मैंने नेहा की तरफ देखा, घबराते हुए कहा,
"कोई दरवाज़े पर है... कुछ पहन ले ना!"
नेहा ने बस मुस्कुराई—एक शरारती, तेज़ मुस्कान।
उठकर बैठ गई, दोनों हाथ पीछे करके बेड पर टिकाए, स्तन और भी उभर आए।
"बेबी... मैं ऐसे ही दरवाज़ा खोल सकती हूँ... क्या प्रॉब्लम है?"
फिर आँख मारकर, टॉन्ग बाहर निकालकर चाटते हुए बोली, "देखना चाहता है क्या वो कैसे रिएक्ट करता है?"
मेरा लिम्प डिक एकदम जाग गया—फिर से हल्का सा खड़ा होने लगा।
वो उठी, धीरे-धीरे दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगी—टॉपलेस, जींस का बटन अभी भी खुला हुआ, कमर नंगी।
हर कदम के साथ उसके स्तन हिल रहे थे, और मेरी साँसें रुक रही थीं।
क्या ये सच में हो रहा है?
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था—एक्साइटमेंट, डर, और जोश का मिक्स।
तभी नेहा रुकी, मुड़ी, मुझे देखकर हँसी—एक पूरी तरह मास्टर वाली हँसी।
फिर तेज़ी से बाथरूम की तरफ दौड़ी, दरवाज़ा बंद करते हुए आखिरी शब्द बोले,
"जा... खोल दे बेबी!"
दरवाज़ा बंद हो गया।
मैं अकेला खड़ा था—नंगा, दिल धड़कता हुआ, और डिक फिर से हल्का सा पल्स कर रहा था।
दरवाज़े पर फिर नॉक हुई—"साब... ऑर्डर..."
मैंने जल्दी से एक टॉवल लपेटा कमर पर, साँसें संभालीं, और दरवाज़ा खोला।
वही वेटर था—सुबह वाला।
उसने ट्रे आगे बढ़ाई, लेकिन नज़रें मेरे पीछे कमरे में घूम रही थीं—शायद नेहा को ढूँढ रहा था।
मैंने ट्रे ली, टिप दी, और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया।
अंदर मुड़ा तो बाथरूम का दरवाज़ा खुला था।
नेहा बाहर आई—अभी भी टॉपलेस, लेकिन अब एक छोटा सा टॉवल लपेटा कमर पर।
वो हँसते हुए मेरे पास आई, ट्रे से बियर की बोतल उठाई, और मेरे होंठों पर चूम लिया।
"डर गए थे ना?" वो फुसफुसाई, "लेकिन देखा... मैं कितनी शरारती हूँ आज।"
मैंने उसे बाहों में खींचा, बियर की बोतल उसके हाथ से छीनी, और कहा,
"तू आज पागल कर रही है मुझे... लेकिन अब बारी मेरी है।
बियर पी... खा... क्योंकि उसके बाद तुझे चिल्लाने का मौका मिलेगा।"
नेहा ने बियर का एक घूँट लिया, ठंडक महसूस करते हुए आँखें बंद कीं।
फिर मेरी तरफ देखा—आँखों में वही भूख।
"तो आओ... शुरू करो।
मैं तैयार हूँ... पूरी तरह।"
हम दोनों अब टॉवल में लिपटे हुए थे—मैंने कमर पर एक, नेहा ने भी छोटा सा टॉवल लपेटा हुआ था, जो मुश्किल से उसकी जांघों तक ढक रहा था।
टीवी ऑन था—कोई सॉफ्ट म्यूजिक चल रहा था, लाइट्स डिम, कमरा अभी भी हमारी गर्मी और बियर की ठंडक से भरा हुआ।
मैंने बेड पर बैठकर बियर की बोतल उठाई, एक घूँट लिया, ठंडक गले से नीचे उतरी।
नेहा मेरे बगल में बैठ गई, अपनी बोतल मेरे होंठों पर रखी—मैंने पीया, फिर उसने।
हम दोनों हँसते हुए एक-दूसरे को देख रहे थे।
फिर बिना कुछ कहे, मैंने उसे खींचकर किस करना शुरू किया।
धीरे-धीरे, गहराई से—हमारी जीभें फिर से लड़ने लगीं, बियर का स्वाद मिला हुआ।
मेरा एक हाथ उसके टॉवल के ऊपर से उसके स्तनों पर गया—नरम, गर्म, अभी भी थोड़े सूजे हुए।
मैंने हल्के से मसला, निप्पल्स को उँगलियों से घुमाया।
नेहा ने आह भरी, सिर पीछे करके—उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
अचानक वो शरारत से हँसी, बोतल उठाई, और थोड़ा सा बियर अपने स्तनों पर डाल दिया।
ठंडी बूंदें उसके निप्पल्स से नीचे सरकने लगीं—चमकती हुई, सेक्सी।
वो मेरी तरफ देखकर बोली,
"क्या कर सकते हो... चाटोगे?"
मैंने बिना जवाब दिए झुक गया।
जीभ से पहले निप्पल को छुआ—ठंडा बियर और उसकी गर्म स्किन का मिक्स।
फिर पूरी तरह चाटने लगा—एक स्तन से दूसरा, बूंद-बूंद चाटते हुए।
नेहा की हँसी अब आहों में बदल गई—वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थी, सिर दबा रही थी।
मैं नीचे सरकता गया—बियर की बूंदें उसके पेट तक पहुँच गई थीं।
उसकी नाभि गहरी थी—मैंने जीभ डालकर वहाँ से पी लिया, जैसे कोई कीमती शराब हो।
नेहा हँस पड़ी—प्लेफुल, शरारती हँसी।
"और नीचे... देखो क्या हो रहा है।"
उसने फिर बोतल उठाई, थोड़ा और बियर डाला—इस बार सीधे अपने पेट से नीचे, टॉवल के किनारे तक।
बूंदें उसकी जांघों पर सरक रही थीं, और अब उसकी पुसी तक पहुँच रही थीं—गीली, चमकती।
मैं नीचे झुका, टॉवल थोड़ा सा हटाया।
उसकी पुसी पहले से ही गीली थी—बियर की बूंदों से और भी चमक रही थी।
मैंने जीभ से चाटना शुरू किया—धीरे से, बियर का स्वाद, उसकी अपनी खुशबू का मिक्स।
नेहा अब जोर से हँस रही थी—प्लेफुल, लेकिन एक्साइटेड।
"आह्ह... बेबी... ऐसे ही... चाटो... सब पी लो..."
वो एक हाथ से सिगरेट जला रही थी—एक कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका, दूसरा हाथ मेरे सिर पर।
दूसरी तरफ से वो उठाकर खा रही थी—मुँह में डालती, चबाती, और बीच-बीच में आहें भरती।
स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, ईटिंग—और मैं उसके नीचे, उसकी पुसी को चाटता हुआ।
मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड हो चुका था—टॉवल के नीचे फड़क रहा था।
नेहा ने नीचे देखा, मुस्कुराई।
" फिर तैयार हो गया... लेकिन पहले मुझे... मुझे जीभ से ही ..."
वो पैर फैलाकर लेट गई—बियर की बोतल साइड में, सिगरेट होंठों पर, आँखें मेरी तरफ।
नेहा के पैरों को और फैलाया, उसकी पुसी अब पूरी तरह मेरे सामने—गीली, गर्म, बियर की बूंदों और अपनी एक्साइटमेंट से चमकती हुई।
मैंने पहले जीभ से शुरू किया—क्लिटोरिस पर हल्के सर्कल बनाते हुए, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई।
नेहा की बॉडी तुरंत रिएक्ट कर गई, कमर ऊपर उठी।
"आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही..." वो मॉन करने लगी, मेरा नाम लेते हुए—सैम।
उसकी आवाज़ में हमेशा वाली इज्ज़त थी—कभी "तू" नहीं, हमेशा "तुम" या "आप"।
मैंने जीभ को और गहरा किया, लेकिन अब एक उँगली भी जोड़ी—धीरे से अंदर डाली।
उसकी पुसी इतनी गीली थी कि उँगली आसानी से सरक गई।
मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया—धीरे, लेकिन उँगली को कर्व करके उस स्पॉट को टच करते हुए।
नेहा ने तुरंत महसूस किया।
"सैम... हाँ... थोड़ा दायें... स्लाइट राइट... ओह्ह... येस... वो स्पॉट... ठीक वही..."
मैंने उसकी बात मानी—उँगली को थोड़ा दायें शिफ्ट किया, प्रेशर बढ़ाया।
जीभ अभी भी क्लिट पर काम कर रही थी—तेज़ फ्लिक्स, सर्कल्स, और कभी-कभी हल्का सक्शन।
नेहा के मॉन्स अब और जोरदार हो गए।
"सैम... अब दो उँगलियाँ... प्लीज़... दो... गू डीप..."
मैंने दूसरी उँगली भी डाली—दोनों साथ में, धीरे से अंदर-बाहर।
उसकी पुसी ने उन्हें टाइटली पकड़ लिया, गर्म और गीली।
मैंने स्पीड बढ़ाई—उँगलियाँ अब तेज़ी से मूव कर रही थीं, कर्व्ड करके G-स्पॉट को बार-बार हिट करते हुए।
जीभ क्लिट पर फिक्स—तेज़, कंसिस्टेंट।
नेहा अब बिस्तर की चादर पकड़कर चिल्ला रही थी—मेरा नाम जोर-जोर से, लेकिन इज्ज़त से।
"सैम... ओह्ह फक... सैम... गू डीप... हाँ... येस... ठीक वैसा ही... मत रुकना... फास्टर... सैम... मैं... आ रही हूँ..."
उसकी कमर अब पूरी तरह ऊपर उठ चुकी थी, पैर काँप रहे थे।
मैंने उँगलियों की स्पीड और प्रेशर और बढ़ाया—दोनों उँगलियाँ अंदर तक, बाहर निकालते हुए क्लिट को जीभ से साथ में।
नेहा की साँसें रुक गईं, बॉडी टाइट हो गई।
"सैम... येस... येस... सैम... आह्ह्ह्ह...!"
वो जोर से झड़ गई—इंटेंस, लंबा ऑर्गेज़्म।
उसकी पुसी मेरी उँगलियों पर पल्स कर रही थी, गर्म तरल निकल रहा था—मैंने उँगलियाँ अंदर रखीं, धीरे-धीरे मूव करते हुए उसे पूरा एक्सपीरियंस देने के लिए।
जीभ अभी भी हल्के से क्लिट को छू रही थी, ओवरसेंसिटिव लेकिन एक्स्ट्रा प्लेज़र के लिए।
नेहा की बॉडी हिल रही थी, आँखें बंद, मुँह खुला, साँसें तेज़-तेज़।
कई सेकंड बाद वो धीरे-धीरे नीचे आई।
आँखें खोलीं—पानी से भरी, चमकती हुई।
मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई, आवाज़ काँपती हुई लेकिन खुश।
"सैम... आपने... मुझे आज तोड़ दिया... इतना इंटेंस... दो उँगलियाँ... जीभ... सब कुछ... परफेक्ट..."
नेहा मुझे ऊपर खींचकर चूम रही थी, उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी—गहरा, गीला किस।
मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था, टॉवल अभी भी कमर पर लिपटा हुआ, लेकिन मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड, उसके पेट से टकरा रहा था।
उसने मेरे कान में फुसफुसाया, आवाज़ में वही इज्ज़त और शरारत मिली हुई,
"सैम... आप बताइए... अब क्या करना चाहते हैं? मैं तैयार हूँ... पूरी तरह आपकी।"
मैंने उसके होंठ फिर से चूमे, लेकिन दिमाग में एक विचार बार-बार आ रहा था—वो वेटर।
सुबह वाला वही लड़का, जो दरवाज़ा खोलते ही नेहा को टॉपलेस देखकर थोड़ा हक्का-बक्का हो गया था।
अब अगर वो बाहर खड़ा हो... अगर वो किसी तरह झाँक रहा हो... या कल्पना कर रहा हो कि अंदर क्या हो रहा है...
ये विचार मेरे अंदर एक अलग ही आग लगा रहा था।
क्या होगा अगर वो सुन रहा हो? हमारी आहें, नेहा का मेरा नाम पुकारना...
ये सोचते ही मेरा लुंड और सख्त हो गया, और मैंने नेहा को और जोर से दबाया।
"नेहा... अगर वो वेटर अभी भी बाहर हो... और सोच रहा हो कि हम क्या कर रहे हैं..." मैंने उसके कान में कहा, आवाज़ भारी।
नेहा ने हल्के से हँसी, आँखें चमकती हुईं।
"सैम... आप भी ना... वो सोचे तो सोचे... इससे क्या फर्क पड़ता है? बल्कि... इससे और मज़ा आएगा ना?"
वो मेरी कमर पर पैर लपेटकर मुझे और करीब खींच रही थी।
मैंने टॉवल हटाया—दोनों के।
अब हम दोनों पूरी तरह नंगे, एक-दूसरे से चिपके।
मैंने अपना लुंड उसके पुसी के ऊपर रखा—धीरे से रगड़ा, लेकिन अंदर नहीं डाला अभी।
नेहा की साँसें तेज़ हो गईं।
"सैम... प्लीज़... अंदर डालिए..."
मैंने धीरे से धक्का दिया—पहला इंच अंदर गया, वो टाइट, गर्म, गीली।
नेहा ने आह भरी—"आह्ह... सैम... हाँ... धीरे..."
मैंने और गहराई तक धकेला—पूरा अंदर।
हम दोनों एक साथ आह भरे।
फिर मैंने मूवमेंट शुरू किया—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।
हर थ्रस्ट के साथ दिमाग में वही विचार—अगर वो वेटर बाहर हो... अगर वो सुन रहा हो...
ये सोच मेरे जोश को दोगुना कर रही थी।
मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से, नेहा की कमर पकड़कर।
नेहा अब मॉन कर रही थी—"सैम... ओह्ह... सैम... और जोर से... हाँ..."
मैंने उसके स्तनों को मसलते हुए कहा,
"नेहा... सोचो... अगर वो देख रहा हो... हम दोनों को... ऐसे..."
नेहा ने आँखें बंद कीं, मुस्कुराई—"तो देखने दो... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... सैम... आप और तेज़..."
मैंने स्पीड बढ़ाई—कमरा सिर्फ हमारी साँसों, थप्पड़ जैसी आवाज़ों, और नेहा के मॉन्स से भर गया।
वो विचार—वेटर का सोचना—मुझे और एक्साइटेड कर रहा था, और नेहा को और ज़्यादा प्लेज़र दे रहा था।
मैंने नेहा के बालों को धीरे से, लेकिन मजबूती से पकड़ा—सॉफ्टली, जैसे कोई प्यार भरी कमांड हो।
वो मेरी तरफ देख रही थी—आँखों में सवाल था, लेकिन विरोध बिल्कुल नहीं।
उसने बस हल्के से मुस्कुराई, जैसे कह रही हो, "जो आप चाहें, सैम... मैं आपकी हूँ।"
मैंने उसे खींचकर दरवाज़े की तरफ ले गया—दोनों पूरी तरह नंगे, कमरे की डिम लाइट में हमारी बॉडीज़ चमक रही थीं।
उसके कदम मेरे साथ चल रहे थे, बिना किसी रुकावट के।
दरवाज़े के ठीक सामने पहुँचकर मैंने उसे झुकाया—उसके गाल ठंडे दरवाज़े से रगड़ रहे थे, साँसें तेज़ हो गईं।
मैंने उसके बालों को अपनी मुट्ठी में और सख्त किया, लेकिन दर्द नहीं—बस कंट्रोल।
मैंने अपना लुंड उसके पुसी पर टच किया—वो पहले से ही गीली, गर्म।
नेहा ने खुद अपने पैर थोड़े फैलाए—बिना कुछ कहे, बस मुझे इनवाइट करने के लिए।
एक झटके में मैंने पूरा अंदर डाल दिया।
"आआआह्ह्ह..."
हम दोनों की एक साथ आह निकली—उसकी आवाज़ ऊँची, मेरी भारी।
उसकी पुसी ने मुझे टाइटली पकड़ लिया, जैसे कभी छोड़ना ही न हो।
फिर रिदम शुरू हुआ—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।
हर थ्रस्ट के साथ उसका सिर हल्का-हल्का दरवाज़े से टकरा रहा था—नरम, लेकिन रिदम में।
"आह्ह... सैम... ओह्ह..." वो मॉन कर रही थी, नाम लेते हुए, इज्ज़त से।
"आप... और गहरा... प्लीज़..."
मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से धक्के, कमर पकड़कर।
दरवाज़ा हल्का-हल्का हिल रहा था, बाहर से सुनाई दे रहा होगा।
मेरा दिमाग फिर उसी विचार में चला गया—वो वेटर... या कोई और... बाहर खड़ा हो... सुन रहा हो हमारी हर आवाज़।
नेहा की आहें, मेरी साँसें, थप्पड़ जैसी आवाज़ जब मेरा लुंड अंदर-बाहर हो रहा था।
क्या वो कल्पना कर रहा होगा कि हम दोनों यहाँ... ऐसे... दरवाज़े के ठीक पीछे?
ये सोचते ही मेरा जोश दोगुना हो गया।
मैंने उसके बाल और सख्त पकड़े, सिर थोड़ा पीछे खींचा—उसकी गर्दन एक्सपोज़ हो गई।
मैंने उसके कान में फुसफुसाया,
"नेहा... सोचो... अगर कोई बाहर हो... सुन रहा हो... हम दोनों को..."
नेहा ने आँखें बंद कीं, होंठ काटे, फिर मुस्कुराई—आवाज़ काँपती हुई,
"सैम... तो सुनने दीजिए... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... आप और जोर से... प्लीज़..."
मैंने स्पीड बढ़ाई—अब हर थ्रस्ट में पूरा बल।
उसका गाल दरवाज़े से रगड़ रहा था, सिर हल्का-हल्का टकरा रहा था, आहें अब और ऊँची।
"सैम... आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही... मत रुकिए..."
मैं बाहर की तरफ सोच रहा था—अगर कोई सच में सुन रहा है... तो सुन ले... ये हमारा पल है।
ये विचार मुझे और एक्साइटेड कर रहा था—और नेहा को भी।
उसकी पुसी अब और टाइट हो रही थी, जैसे ऑर्गेज़्म की तरफ बढ़ रही हो।
मैंने एक हाथ उसके क्लिट पर रखा—उँगलियों से रगड़ते हुए, जबकि लुंड अंदर-बाहर।
नेहा चिल्लाई—"सैम... ओह्ह... मैं... फिर से... आ रही हूँ..."
हम दोनों तेज़ी से क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ रहे थे—दरवाज़े के ठीक पीछे, पूरी तरह एक्सपोज़्ड फीलिंग के साथ।
XXXXXX
दूसरी बार, सिर्फ़ पिछले 2 घंटों में... मैंने इतनी जल्दी दोबारा झड़ना कभी नहीं देखा था।
पहले तो कभी-कभी घंटों लग जाते थे रिकवर होने में, लेकिन आज... नेहा की वो खूबसूरती, उसकी हरकतें, वो सरेंडर, वो दरवाज़े के पास वाली पोज़िशन—सब कुछ मिलकर मुझे पागल कर रहा था।
या शायद वो वेटर का विचार... वो सोच कि कोई बाहर खड़ा सुन रहा है, कल्पना कर रहा है कि हम क्या कर रहे हैं... वो एक्साइटमेंट मेरे अंदर आग की तरह फैल रहा था।
मैं नहीं जानता क्या था असली वजह—नेहा की खूबसूरती, उसकी आज की वाइल्डनेस, या वो फैंटसी कि कोई और हमारी प्राइवेसी में झाँक रहा है।
लेकिन जो भी था, वो कमाल का था।
अब घड़ी में 11 बज चुके थे।
नेहा फ्रेश होकर आई—बाथरूम से निकलकर, हल्के से गीले बाल, बॉडी पर सिर्फ़ एक पतला टॉवल लपेटा हुआ, जो मुश्किल से ढक रहा था।
वो बेड पर आई, मेरे पास लेट गई, मुझे टाइटली हग किया।
उसकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ीं—गर्म, थकी हुई, लेकिन संतुष्ट।
उसने गहरी साँस ली और फुसफुसाई,
"आई लव इट, बेबी... आज सब कुछ... परफेक्ट था।"
कुछ ही मिनटों में उसकी साँसें गहरी और रेगुलर हो गईं।
वो गहरी नींद में सो गई—चेहरा शांत, होंठ हल्के खुले, एक हाथ मेरी छाती पर।
लेकिन मेरी आँखों से नींद दूर थी।
मैं छत की तरफ देखता रहा, दिमाग में वही विचार घूम रहे थे।
वो वेटर...
जब हम बाहर गए थे, या जब नेहा शावर ले रही थी... क्या वो कमरे में अकेला था?
क्या उसने नेहा के अंडरगारमेंट्स को छुआ?
उसकी ब्रा, पैंटी—जो बेड पर पड़ी थीं, गंध लेने के लिए, या शायद और कुछ...
कितनी बार उसने हाथ में लिया होगा, कितनी बार उसने खुद को सहलाया होगा, नेहा की ब्रा को सूँघते हुए, या कल्पना करते हुए कि वो नेहा के स्तनों को छू रहा है।
उसकी वो डार्क ब्राउन आँखें, वो गाल, वो होंठ... क्या वो सोच रहा होगा कि नेहा के निप्पल्स कितने सॉफ्ट होंगे?
और कितने लोगों को बताया होगा उसने?
अपने दोस्तों को, या रिसेप्शन पर बैठे दूसरे स्टाफ को—
"यार, आज एक जोड़ा आया... औरत की बॉडी... उफ्फ... उसके बूब्स... इतने परफेक्ट..."
शायद वो हँसते हुए डिटेल्स दे रहा हो—नेहा का टॉपलेस होना
शायद वो कल्पना कर रहा हो कि नेहा उसके सामने घुटनों पर बैठी हो, या दरवाज़े के पीछे हमारी हर आवाज़ सुनकर वो खुद को छू रहा हो।
ये सब सोचते-सोचते मेरा लुंड फिर से हल्का सा पल्स करने लगा।
नींद नहीं आ रही थी—बल्कि एक अजीब सा जोश था।
नेहा सो रही थी, लेकिन मेरा दिमाग अभी भी उस फैंटसी में डूबा हुआ था।
क्या कल सुबह वो वेटर फिर आएगा?
क्या वो नेहा को देखकर मुस्कुराएगा, या शरमाएगा?
या शायद वो कुछ और प्लान कर रहा हो...
मैंने नेहा को और करीब खींचा—उसकी गर्म बॉडी मेरे से चिपकी हुई।


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