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Adultery Adventure of sam and neha
#6
मैंने लिफ्ट का बटन बहुत जल्दी-जल्दी दबाया, बार-बार, जैसे कोई और सेकंड बर्दाश्त न हो।मुझे वेट नहीं हो पा रहा था, इम्पेशेंटली नेहा का हाथ थामे खड़ा था, उसकी हथेली मेरी पसीने से गीली हो रही थी, लेकिन वो मुस्कुरा रही थी—एक नरम, शरारती स्माइल, जैसे वो मेरी इस बेचैनी का मजा ले रही हो।



उसने कभी मुझे इतना ईगर नहीं देखा था, उसकी आँखों में चमक थी, जैसे वो जानती हो कि मेरे अंदर क्या तूफान चल रहा है।रूम चौथी मंजिल पर था, और मैं सारे सीन से थक चुका था—लॉबी के वो घूरते चेहरे, वो गॉसिप, वो विंक—सब कुछ मेरे दिमाग में घूम रहा था, लेकिन अब सिर्फ एक ही चीज चाहिए थी: नेहा को अकेले पकड़ना।


लिफ्ट अभी भी नहीं आई, और मैं सोचने लगा—क्या इंतजार करूँ या नेहा को हाथ पकड़कर सीढ़ियों से भाग जाऊँ?मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि सीढ़ियाँ चढ़ने की थकान भी महसूस नहीं हो रही थी, बस वो इच्छा थी कि जितनी जल्दी हो सके, दरवाजा बंद करूँ और उसकी साँसों की गर्मी महसूस करूँ।


नेहा ने मेरी उँगलियों को हल्का सा दबाया, जैसे कह रही हो—“जल्दी करो, मैं भी तैयार हूँ।”मैंने फैसला कर लिया—लिफ्ट का इंतजार नहीं, सीढ़ियाँ ही सही, और नेहा का हाथ थामे मैं तेज़ कदमों से सीढ़ियों की तरफ बढ़ा .

हम लिफ्ट के पास खड़े रहे, मैंने सीढ़ियों का प्लान छोड़ दिया क्योंकि लिफ्ट तीसरी मंजिल पर रुकी हुई थी और अब नीचे की तरफ मूव करना शुरू कर दी थी।मैंने फैसला किया कि वेट कर लूँ, नेहा का हाथ अभी भी मेरी मुट्ठी में था, उसकी उँगलियाँ हल्के-हल्के मेरी हथेली पर खेल रही थीं, जैसे वो मेरी बेचैनी को और बढ़ा रही हो।

तभी रिसेप्शन से एक जोरदार “हायyyyy” की आवाज़ आई, इतनी तेज़ और चंचल कि मेरी नज़र खुद-ब-खुद वहाँ चली गई।एक बहुत अट्रैक्टिव यंग लड़की, करीब 25 की उम्र की, हाई हील्स में तेज़ कदमों से आ रही थी—बहुत छोटी स्कर्ट, जो हर स्टेप पर ऊपर सरक रही थी, और टाइट टैंक टॉप जो उसके कर्व्स को परफेक्टली हाइलाइट कर रहा था, उसके बाल खुले, होंठों पर ब्राइट लिपस्टिक, और वो कॉन्फिडेंस जो हवा में महसूस हो रहा था।
वो उसी बूढ़े आदमी की तरफ जा रही थी जिसने पहले नेहा से बात की थी, दोनों हाथ मिलाने वाले थे, उसकी स्माइल में कुछ शरारत थी, जैसे कोई पुराना खेल फिर शुरू होने वाला हो।मैं एक सेकंड के लिए रुक गया, वो लड़की का ग्लिम्प्स लेने की कोशिश कर रहा था—उसकी स्कर्ट का हेम, टैंक टॉप से झलकती स्किन, हाई हील्स की क्लिक-क्लिक—लेकिन तभी लिफ्ट का “टिंग” हुआ, दरवाज़ा खुल गया।

मेरा दिमाग दो हिस्सों में बँट गया—एक तरफ वो सेक्सी गर्ल का सीन देखने की इच्छा, दूसरी तरफ नेहा को रूम में ले जाकर सब कुछ अनलीश करने की जलन।मैंने नेहा का हाथ और सख्ती से पकड़ा, उसकी तरफ देखा—उसकी आँखों में वही चमक थी, जैसे वो कह रही हो “चलो, अब बस रूम ही चाहिए”—और मैंने वो ग्लिम्प्स छोड़ दिया, लिफ्ट में घुस गया।

लिफ्ट ऊपर चढ़ रही थी, मेरी साँसें अभी भी तेज़, नेहा मेरे बगल में खड़ी थी, उसकी बॉडी की गर्मी मुझे छू रही थी।चौथी मंजिल पर दरवाज़ा खुला, मैंने नेहा को अंदर खींचा, चाबी लगाई, और दरवाज़ा बंद करते ही वो सारी दुनिया बाहर रह गई—अब सिर्फ हम दोनों, और वो तनाव जो अब फूटने को तैयार था।

रूम में घुसते ही मैंने चारों तरफ नज़र दौड़ाई, हर कोने को स्कैन करते हुए—क्या कोई ट्रेस है?वेटर ने क्या किया होगा? नेहा की यूज़्ड ब्रा और पैंटी कहाँ रखी होगी? शायद छिपाकर, या खेल-खेल में कुछ किया होगा... लेकिन सब कुछ परफेक्टली नीट एंड क्लीन था, जैसे हम पहली बार किसी फ्रेश रूम में एंटर कर रहे हों।


बेडशीट्स क्रिस्प, तौलिए फोल्डेड, फ्लोर स्पॉटलेस—कुछ भी सस्पिशियस नहीं, कोई गंध नहीं, कोई निशान नहीं।मुझे रिलीव्ड होना चाहिए था, खुश होना चाहिए था... लेकिन इसके बजाय एक हल्की सी डिसअपॉइंटमेंट महसूस हुई, जैसे कोई उम्मीद टूट गई हो।


मैं इतना ईगर था रूम में आने का—नेहा के कपड़े फाड़कर उतारने का, आज लव नहीं, हार्ड फक करने का प्लान था, रफ, इंटेंस, बिना रुकावट के।लेकिन अब वो सारी एक्साइटमेंट जैसे हवा में उड़ गई, बॉडी में वो आग ठंडी पड़ रही थी, साँसें अभी भी तेज़ लेकिन वो जलन कम हो गई।


नेहा ने दरवाज़ा बंद किया, मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में अभी भी वही चमक थी।मैं बिस्तर पर बैठ गया, हाथों में सिर थामे—क्या हुआ? वो सारे सीन, वो घूरती नज़रें, वो गॉसिप... सब कुछ बाहर रह गया, और अब ये खाली, परफेक्ट रूम मुझे और खाली सा लगा।


फिर भी, नेहा मेरे पास आई, उसने मेरी कमर पर हाथ रखा, धीरे से मेरे कान में फुसफुसाई—“क्या हुआ? अभी भी उतना ही गर्म हो?”उसकी साँस मेरे गले पर लगी


नेहा ने धीरे से अपना हाथ मेरे क्रॉच एरिया पर रखा, उँगलियाँ हल्के से दबाकर मेरे लुंड की हार्डनेस चेक करने लगी... लेकिन वो सॉफ्ट था, पूरी तरह ढीला।उसने मुझे हैरानी से देखा, आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं, जैसे कोई अनजाना सवाल उसके मन में आ गया हो।


"ये तो पब्लिक में इतना हार्ड था... लोग देख भी सकते थे... इतना टाइट... कार में भी, लॉबी में भी... अब क्या हो गया?"उसकी आवाज़ में मिक्स्ड सरप्राइज और थोड़ी चिंता थी, लेकिन आँखों में अभी भी वो शरारती चमक बाकी थी।


मैंने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप कंधे उचकाए, चेहरा बनाया जैसे मुझे खुद नहीं पता क्या हुआ।दिमाग में वो सारे सीन घूम रहे थे—घूरती नज़रें, गॉसिप, वो विंक—लेकिन अब वो आग कहीं ठंडी पड़ गई थी, जैसे सब कुछ बाहर ही रह गया।


नेहा ने हल्के से मुस्कुराया, फिर कहा, "इट्स ओके... मैं इसे फिर से हार्ड कर दूँगी।"उसने पहले मेरी जींस का बटन खोला, ज़िप नीचे की, और एक झटके में जींस और अंडरवियर दोनों को नीचे सरका दिया—मेरा लुंड हवा में बाहर आ गया, एवरेज साइज़, एवरेज मोटाई का, नॉर्मल, जैसा मैं जानता हूँ कि बहुत से लड़कों के पास इम्प्रेसिव साइज़ होते हैं, लेकिन मेरा बस एवरेज है, जैसा मैंने रियल लाइफ में देखा है।


वो मेरे सामने घुटनों पर बैठ गई, उसकी साँसें मेरे लुंड पर लग रही थीं, गर्म और नरम।उसने धीरे से हाथ में लिया, हल्के से सहलाया, जैसे कह रही हो—अभी सब ठीक हो जाएगा, बस थोड़ा टाइम दो।

मैं बेड पर बैठा था, पीठ तकिए से टिकी हुई, और नेहा मेरे सामने घुटनों पर थी—उसने धीरे से अपना टॉप उतारा, एक झटके में ऊपर से निकाला और ज़मीन पर फेंक दिया।वो लाल ब्रा में खड़ी थी, जैसे कोई देवी—उसकी स्किन की चमक, ब्रा के लेस से झलकते उभार, और वो कॉन्फिडेंट लुक जो मुझे हमेशा पागल कर देता था।


मैंने कॉलेज में कुछ अफेयर्स किए थे, लेकिन नेहा जैसी औरत कभी नहीं देखी—वो कभी हिचकिचाती नहीं, ब्लोजॉब देने में बिल्कुल नेचुरल, जैसे ये उसकी आदत हो।पहली बार से ही, वो वर्जिन थी या नहीं, मैं नहीं जानता, लेकिन उसने कभी नहीं बताया कि इतना अच्छा कैसे सक्शन करती है—बस करती रहती है, और मैं बस देखता रह जाता हूँ।


उसने मेरे लुंड को हाथ में लिया, पहले नाक से पास ले जाकर सूँघा, गहरी साँस खींची।"आह्ह... मैं तुम्हारी ये खुशबू बहुत पसंद करती हूँ," उसने कहा, आँखें बंद करके, "सिगरेट जला ... बस लेट जाओ और किंग की तरह एंजॉय करो।"


उसकी साँसें मेरे लुंड पर गर्म-गर्म लग रही थीं, वो धीरे-धीरे जीभ से टिप को छू रही थी, हल्के-हल्के चाटते हुए।मेरा लुंड अब फिर से सख्त होने लगा, वो सॉफ्टनेस धीरे-धीरे गायब हो रही थी—नेहा की आवाज़, उसकी खुशबू, उसका टच सब कुछ वापस जगा रहा था।

उत्तेजना में मेरा लुंड उसके मुँह में गहराई तक चला गया, एक झटके में, जैसे कोई रोक-टोक न हो।एक हाथ में लाइट सिगरेट थी, धुआँ हवा में घुल रहा था, और दूसरे हाथ से मैंने उसके बाल पकड़कर सख्ती से खींचे, उसे और गहराई तक धकेलते हुए—डीप, और डीप, बिना सोचे कि वो कितनी असहज हो रही होगी।


ये पहली बार था... मैं इतना सेल्फिश था, शादी के इस छोटे से समय में पहली बार।मैंने उसकी असुविधा पर ध्यान नहीं दिया, बस अपना प्लेजर, अपना कंट्रोल—उसे फोर्स कर रहा था, जैसे वो मेरी प्रॉपर्टी हो।


लेकिन नेहा ने कोई हिचक नहीं दिखाई, कोई विरोध नहीं।वो रियल स्लेव की तरह एक्ट कर रही थी—आँखें बंद, मुँह पूरी तरह भरा हुआ, मेरी हर पुश को बिना रुके सहन करते हुए, जैसे ये उसकी ड्यूटी हो।


मेरा लुंड उसके गले तक पहुँच गया था, उसकी नाक मेरे लोअर एब्डोमेन को छू रही थी, साँसें तेज़ और गर्म।मैंने नीचे देखा—उसके चेहरे पर वो एक्सप्रेशन, वो सरेंडर—और अचानक बोला, "आँखें खोलो... और मुझे देखो।"


ये मेरे लिए भी शॉक था।हम कभी सेक्स के दौरान इतने वोकल नहीं थे, कभी कमांड नहीं दी, कभी ऑर्डर नहीं—लेकिन आज कुछ अलग था, जैसे वो सारी रोक-टोक टूट गई हो।


नेहा ने धीरे से आँखें खोलीं, उसकी पुतलियाँ मेरी तरफ उठीं—वो नज़रें, वो वेटिंग, वो सबमिशन।उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन कोई शिकायत नहीं—बस एक गहरा, साइलेंट "आई एम युअर्स"।


मैंने सिगरेट का एक कश लिया, धुआँ उसके चेहरे पर छोड़ा, और फिर बाल खींचकर उसे और गहराई में धकेला।वो चोक हुई, लेकिन रुकी नहीं—बस मेरी आँखों में देखती रही, जैसे कह रही हो कि जितना चाहो, उतना कर लो।


अब वो पुरानी वाली आग फिर से भड़क रही थी, और ज्यादा इंटेंस, ज्यादा रफ।मैं जानता था कि आज रात ये सिर्फ शुरुआत है—बाकी सब कुछ और गहरा, और ज्यादा वाइल्ड होने वाला था।


जब मैंने उसे छोड़ा, तो नेहा गहरी-गहरी साँसें ले रही थी, खाँसते हुए, गले से वो कर्कश आवाज़ निकल रही थी।मैंने उसके बाल नहीं छोड़े, अभी भी मुट्ठी में जकड़े हुए थे—उसकी साँसें तेज़, चेहरा लाल, आँखें नम।


30 सेकंड में वो फिर से होश में आई, धीरे से सिर उठाया और मेरी आँखों में देखने लगी—वो नज़रें, वो सरेंडर, वो गहराई।मैंने सिगरेट उसके होंठों के पास ले जाकर रखी, वो कभी-कभी स्मोक करती थी, लेकिन हमेशा असहज लगती थी, जैसे मजबूरी में।


मुझे नहीं पता स्मोकिंग से औरतें और अट्रैक्टिव क्यों लगती हैं, लेकिन मैं कभी-कभी उसे फोर्स करता था एक-दो ड्रैग लेने को—वो ले लेती, लेकिन कभी कम्फर्टेबल नहीं दिखती।इस बार उसने बिना कुछ कहे सिगरेट ले ली, आँखें मेरी हीं में टिकी हुईं—एक गहरी कश ली, धुआँ फेफड़ों में भरकर धीरे-धीरे बाहर छोड़ा।


इस बार वो इतनी नेचुरल, इतनी कम्फर्टेबल लग रही थी—जैसे पहले वो बस एक्टिंग कर रही थी, और अब असली वाली नेहा सामने है।उसका चेहरा, होंठों पर धुएँ की हल्की सी लेयर, वो सेक्सी लुक—दमदार, गॉडडैम सेक्सी।


उसने फिर मेरे लुंड की तरफ देखा—वो अब पूरी तरह गीला था, उसके थूक से कोटेड, टिप से लेकर बॉल्स तक चमक रहा था।वो और पास आई, नाक मेरे लुंड की बेस पर छू गई, और फिर जीभ से मेरी बॉल्स को क्लीन करने लगी—धीरे-धीरे, चाटते हुए, जैसे वो उनका स्वाद ले रही हो।


मैं स्वर्ग में था—उसकी गर्म जीभ, वो गीली सनसनी, उसके बाल अभी भी मेरे हाथ में, सिगरेट का धुआँ हवा में तैर रहा था।हर टच, हर चाट मेरी बॉडी में बिजली दौड़ा रही थी—अब वो पुरानी आग फिर से भड़क चुकी थी, और ज्यादा तेज़, ज्यादा डीप।


नेहा ने एक बार ऊपर देखा, आँखों में वो चमक, होंठों पर हल्की स्माइल—जैसे कह रही हो, “अभी तो बस शुरुआत है।”मैंने उसके बाल और सख्ती से पकड़े, और उसे फिर से ऊपर खींचा—रात अभी लंबी थी, और मैं जानता था कि आज सब कुछ और वाइल्ड होने वाला है।


ओह्ह... नेहा मुझे ऐसे थ्रिल्स दे रही थी जो उसने कभी नहीं दिए थे।

मैं बस उसकी आँखों में देखता रहा, जबकि वो मेरी बॉल्स को चाट रही थी—धीरे-धीरे, जीभ से हर हिस्से को साफ करते हुए, जैसे कोई बिच अपनी मालिक की खुशबू सूँघ रही हो और चाट रही हो।

उसकी आँखें मेरी तरफ उठी हुई थीं, पूरी तरह सरेंडर, पूरी तरह सबमिसिव—वो नज़रें कह रही थीं कि वो मेरी है, सिर्फ मेरी, और जितना चाहूँ उतना यूज़ कर सकता हूँ।

उसकी जीभ गीली, गर्म, मेरी स्किन पर स्लाइड कर रही थी, थूक से चमकते हुए, और हर लिक के साथ मेरी बॉडी में बिजली दौड़ रही थी।

"आआह्ह... इसे अच्छे से क्लीन करो," मैंने उत्तेजना में चिल्लाकर कहा, आवाज़ भारी हो गई थी।

मैंने उसके बाल और सख्ती से पकड़े, सिर को थोड़ा नीचे दबाया—वो और गहराई में चली गई, नाक मेरे बेस पर दब गई, जीभ बॉल्स के नीचे से ऊपर तक घुमा रही थी, जैसे वो हर ड्रॉप को सोख लेना चाहती हो।

उसकी साँसें तेज़ हो गईं, लेकिन वो रुकी नहीं—बस चाटती रही, सूँघती रही, मेरी हर कमांड का पालन करती हुई।

मैंने सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ उसके चेहरे पर फेंका, और देखता रहा—वो कितनी सेक्सी लग रही थी, कितनी वाइल्ड, कितनी मेरी।

अब मेरा लुंड फिर से पूरी तरह हार्ड हो चुका था, पल्स कर रहा था, तैयार था अगले लेवल के लिए।

नेहा ने एक बार ऊपर देखा, होंठ गीले, आँखें चमकती हुईं—जैसे कह रही हो, “अभी और चाहिए? जितना चाहो, उतना लो।”

मैंने उसके बालों को और जोर से पकड़ा, जैसे कोई रस्सी हो जिसे खींचकर मैं उसे कंट्रोल कर रहा हूँ।

नेहा की सिर ऊपर-नीचे होने की रफ्तार बढ़ गई—तेज, गीली, गर्म आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

मेरा लुंड अब पूरी तरह फड़क रहा था, टिप से प्रीकम लगातार टपक रहा था।

हर बार जब वो नीचे जाती, उसका माथा मेरे पेट से टकराता, और प्रीकम की बूंदें उसके गालों पर, नाक के नीचे, आँखों के ठीक नीचे गिर रही थीं।

वो बूंदें चमक रही थीं, जैसे कोई हीरे की तरह उसके चेहरे पर सजा हो।

उसकी डार्क ब्राउन आँखें मेरी तरफ टिकी हुई थीं—पूरी तरह खुली, पूरी तरह भूखी, पूरी तरह मेरी।

मैंने कभी उसे इतना एक्साइटेड नहीं देखा था।

उसकी पुतलियाँ फैली हुई थीं, साँसें तेज, होंठ सूजे हुए और गीले।

वो बस देखती रही, बिना पलक झपकाए, जैसे मेरी आँखों में ही उसकी सारी दुनिया सिमटी हो।

"आह्ह... नेहा... तू आज कितनी गंदी हो गई है..." मैंने भारी आवाज में कहा, और एक और कश सिगरेट का लिया।

धुआँ उसके चेहरे पर फेंका—वो थोड़ा सा सिकुड़ गई, लेकिन रुकी नहीं।

बल्कि और जोश से मेरी बॉल्स को चाटने लगी, जीभ नीचे से ऊपर तक घुमाती हुई, जैसे हर इंच को अपना बना रही हो।

मेरा क्लाइमेक्स अब कंट्रोल से बाहर होने वाला था।

सुबह तो मैंने सोचा था कि आज लंबा खेलूँगा, उसे घंटों तक तड़पाऊँगा... लेकिन ये नेहा... आज कुछ और ही थी।

उसकी आँखें, उसकी जीभ, उसका सरेंडर—सब कुछ मुझे पागल कर रहा था।

मैंने उसका सिर और तेजी से ऊपर-नीचे किया।

"और तेज... हाँ... ऐसे ही... अपनी जीभ निकालकर पूरा साफ कर..."


वो गुर्राई जैसी आवाज निकाल रही थी—नाक से, गले से—लेकिन मेरी हर बात मान रही थी।

मेरा लुंड अब उसके मुंह में आधा घुस चुका था, टिप उसके गले को छू रही थी, और प्रीकम उसकी जीभ पर फैल रहा था।

अचानक मैंने उसके बाल छोड़े, दोनों हाथों से उसके गाल पकड़े।

उसका चेहरा ऊपर उठाया—उसकी आँखें फिर मेरी आँखों में।

प्रीकम उसकी आँखों के नीचे चमक रहा था, होंठ लाल, गाल गीले।

"देख... कितनी सेक्सी लग रही है तू..." मैंने फुसफुसाते हुए कहा।

नेहा ने अचानक मेरी आँखों में देखा—उसकी डार्क ब्राउन आँखें अब और भी गहरी, और भी भूखी लग रही थीं।

वो धीरे से बोली, आवाज़ में एक अलग सी मिठास और कमांड मिली हुई,

"टी-शर्ट उतारो ।"

मैंने बिना सोचे एक सेकंड भी नहीं लगाया। टी-शर्ट उतारी और फेंक दी।

मेरा चेस्ट हेयरलेस था—साफ, चिकना, और हल्के से मैन बूब्स जैसा थोड़ा उभरा हुआ।

नेहा ने मुझे देखा, होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई, जैसे कोई नया खिलौना मिल गया हो।

वो मेरे पास आई, दोनों हाथ मेरी कमर पर रखे, और सीधे मेरे निप्पल्स पर झुक गई।

उसकी जीभ पहले दाएँ निप्पल को छुई—धीरे से चक्कर लगाया, फिर हल्का सा काटा।

"आह्ह..." मेरी मुंह से निकल गई आवाज़।

आज सब कुछ नया लग रहा था—उसकी जीभ गीली, गर्म, और इतनी सॉफ्ट कि मेरी बॉडी में कंपकंपी दौड़ गई।

वो बारी-बारी दोनों निप्पल्स को चूसने लगी, जैसे कोई औरत को चूस रही हो।

एक हाथ से वो मेरे लुंड को सहला रही थी—धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, दूसरा हाथ बॉल्स को मसल रहा था, हल्के से दबा रही थी।

मैं बस सिर पीछे करके, आँखें बंद करके महसूस कर रहा था।

उसकी साँसें मेरे चेस्ट पर पड़ रही थीं, गर्म, तेज।

वो अच्छे 4-5 मिनट तक यहीं रुकी रही—एक निप्पल को चूसती, दूसरा उँगलियों से खेलती, फिर स्विच।

मेरा लुंड अब इतना हार्ड था कि दर्द होने लगा था, प्रीकम लगातार टपक रहा था उसके हाथ पर।

फिर वो रुकी, ऊपर उठी, मेरी आँखों में देखा।

मैंने सिगरेट उसके होंठों के पास ले जाकर रखी।

उसने गहरा कश लिया—धुआँ अंदर खींचा, गाल अंदर धँस गए, फिर मेरे कान के पास आई।

धुआँ मेरे कान में छोड़ते हुए फुसफुसाई,

"कहाँ झड़ना चाहते हो...?"

मेरा दिल धड़क गया।

मैंने पहले भी कई बार उसके मुँह में लिया था, लेकिन ज्यादातर हम सेक्स करते थे और मैं उसके अंदर ही झड़ जाता था।

या फिर आखिरी पल में निकालकर फर्श पर... लेकिन ये... ये सवाल, ये तरीका...

ये कभी नहीं हुआ था।

वो मुझे चॉइस दे रही थी—और वो भी इतनी कैजुअली, इतनी सेक्सी तरीके से।

मैंने उसकी कमर पकड़ी, उसे और करीब खींचा।

उसकी साँसें अभी भी धुएँ से भरी थीं, होंठ गीले।

मैंने भारी आवाज में कहा,

"पहले तो मैं सोच रहा था... तेरे मुँह में... लेकिन अब..."

नेहा ने हल्के से हँसी, फिर मेरे होंठ चूमे—धीरे, गहराई से।

फिर कान में फिर से फुसफुसाई,

"बताओ ना... मैं सब कुछ करूँगी... आज सिर्फ तुम्हारी मर्ज़ी।"

मेरा दिमाग घूम रहा था।

कहाँ झड़ूँ? उसके मुँह में? उसके चेहरे पर? उसके चेस्ट पर? या कहीं और?

उसकी आँखें इंतज़ार कर रही थीं—पूरी तरह मेरी, पूरी तरह तैयार।

मैंने उसकी आँखों में देखते हुए, भारी साँसों के बीच कहा,

"मैं तेरे मुँह में झड़ना चाहता हूँ... सब कुछ... अंदर।"

नेहा ने बस मुस्कुराई—एक गहरी, सेक्सी, विजयी वाली मुस्कान।

फिर धीरे-धीरे नीचे सरकी, मेरे बदन को हर इंच पर किस करते हुए।

पेट पर, नाभि के पास, फिर नीचे... मेरे लुंड की जड़ तक।

हर किस गीली, गर्म, और इतनी धीमी कि मेरी बॉडी काँप रही थी।

अंत में वो फिर से मेरे लुंड के सामने थी।

मैंने उसके बाल फिर से सख्ती से पकड़े—इस बार जैसे वो मेरा खिलौना हो, मेरी पसंद की गुड़िया।

उसका चेहरा अब मेरे कंट्रोल में था।

मैंने उसे गहराई तक धकेला—एक झटके में, पूरा लुंड उसके गले तक।

"घोक... घोक... घोक..."

कमरा सिर्फ इसी आवाज़ से भर गया।

वो भाग नहीं रही थी—बल्कि हिस्सा ले रही थी।

उसकी जीभ मेरे नीचे घूम रही थी, गले से दबाव दे रही थी, जैसे मुझे और गहरा खींच रही हो।

मैं अपनी कमर ऊपर उठा रहा था, रिदम मैच करने के लिए—हर थ्रस्ट में और जोर, और गहराई।

उसकी आँखें चौड़ी हो गई थीं—पानी से भरी, लेकिन बंद नहीं।

वो अभी भी मुझे देख रही थी, जैसे कह रही हो, "और दो... सब कुछ दो।"

मेरा क्लाइमेक्स अब बिल्कुल किनारे पर था।

दिल की धड़कन कान में गूंज रही थी।

अचानक मैंने ग्रिप ढीली की।

खड़ा हो गया।

नेहा घुटनों पर थी, नीचे ज़मीन पर, मुँह पूरी तरह खुला, जीभ थोड़ी बाहर, इंतज़ार में।

उसकी आँखें ऊपर मेरी तरफ—भूखी, तैयार, मेरी।

3... 2... 1...

मैंने झटका दिया।

पहली फुहार—जोर से निकली, आधी उसके चेहरे पर गिरी (गालों पर, होंठों के किनारे), आधी सीधे उसके मुँह में।

फिर बाकी सब—परफेक्टली टारगेटेड, उसके खुले मुँह में।

एक के बाद एक, गाढ़ी, गर्म धारें।

वो सब सोख रही थी—बिना एक बूंद गिराए, जीभ से सब चाटते हुए।

मैं साँसें लेते हुए नीचे देख रहा था।

उसका चेहरा—प्रीकम और अब मेरा कम से चमकता हुआ।

होंठ सूजे, आँखें अभी भी मेरी तरफ।

जैसे ही आखिरी फुहार निकली, मैंने जोर से चिल्लाया—आवाज़ काँप रही थी, लेकिन साफ और कमांडिंग,

"स्वॉलो मत करना... पहले मुझे दिखा... रुक जा!"

नेहा ने तुरंत मान लिया।

वो एकदम स्टैच्यू की तरह फ्रीज हो गई—घुटनों पर बैठी, सिर थोड़ा पीछे, ठोड़ी ऊपर उठाई हुई, मुँह पूरी तरह खुला।

उसकी आँखें मेरी तरफ टिकी हुईं—बड़ी, चमकती, आज्ञाकारी।

मैं नीचे झुका, करीब से देखा।

उसके मुँह में सफेद, गाढ़ा तरल भरा हुआ था—मेरा सब कुछ, अभी-अभी निकला हुआ।

वो हिल नहीं रही थी, साँसें धीमी, लेकिन कंट्रोल में।

जीभ थोड़ी सी बाहर, जैसे वो मुझे दिखा रही हो कि सब कितना है, कितना गाढ़ा, कितना गर्म।

कुछ बूंदें उसके होंठों के किनारे से नीचे सरक रही थीं, लेकिन वो उन्हें चाट नहीं रही थी—बस इंतज़ार कर रही थी।

मैंने हाथ बढ़ाकर उसके गाल पर हल्के से थपकी दी, जैसे कोई अच्छी लड़की को इनाम दे रहा हो।

"बहुत अच्छी... देख कितना भर लिया तूने।"

मैंने अपनी उँगली उसके होंठ के पास ले जाकर एक बूंद उठाई, फिर उसे अपने होंठों पर लगाया—स्वाद लिया।

नेहा अभी भी वैसी ही थी—मुँह खुला, ठोड़ी ऊपर, आँखें मेरी आँखों में।

उसकी साँसें अब और गर्म लग रही थीं, नाक से हल्की-हल्की फड़फड़ाहट।

वो बिना बोले कह रही थी—अब क्या? क्या करूँ?

मैंने धीरे से कहा, आवाज़ अब थोड़ी नरम, लेकिन अभी भी मालिक वाली,

"अब... धीरे-धीरे घूँट ले... मुझे दिखाते हुए।"

उसने पलकें झपकाई—एक बार, जैसे हामी भरी।

फिर धीरे-धीरे गला हिलाया।

मैंने देखा—वो तरल उसके गले से नीचे उतर रहा था, एक-एक बूंद।

उसके होंठ हिल रहे थे, जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, जैसे वो हर स्वाद को एंजॉय कर रही हो।

आखिरी घूँट के साथ उसने होंठ चाटे, फिर जीभ निकालकर दिखाया—साफ, चमकती।

"सब... अंदर चला गया," वो फुसफुसाई, आवाज़ रसीली, थकी हुई, लेकिन खुश।

फिर मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती सी मुस्कान।

"अब... और कुछ चाहिए?"

मैं बस उसकी तरफ देखता रहा—पसीने से तर, चेहरा अभी भी मेरे निशानों से चमकता हुआ।

कमरा अब शांत था, सिर्फ हमारी साँसें और हल्की-हल्की खुशबू।

मैं बस उसे देखता रहा—घुटनों पर बैठी हुई नेहा, चेहरा अभी भी मेरे निशानों से चमकता हुआ, होंठ सूजे हुए, आँखें डार्क ब्राउन और इतनी गहरी कि उनमें डूब जाने का मन कर रहा था।

वो कभी इतनी एक्सी, इतनी इरोटिक नहीं लगी थी जितनी आज लग रही थी।

उसका पूरा बदन पसीने से तर, बाल बिखरे हुए, साँसें अभी भी तेज़—लेकिन उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी, जैसे वो अभी-अभी कोई बड़ा काम पूरा करके बहुत संतुष्ट हो।

वो फिर से मुँह खोला—धीरे से, ठोड़ी ऊपर करके।

अंदर सब साफ था, कोई बूंद नहीं बची।

उसने जीभ निकालकर दिखाया—चमकती, गीली, साफ।

फिर एक छोटी, शरारती सी मुस्कान दी—जैसे कह रही हो, "देखो... सब खत्म कर दिया... तुम्हारा सब कुछ अंदर।"

फिर उसकी नज़र नीचे गई—मेरे लुंड पर, जो अब थोड़ा सॉफ्ट हो रहा था, लेकिन टिप पर अभी भी कुछ बूंदें चमक रही थीं।

बिना एक सेकंड भी वेस्ट किए, वो आगे बढ़ी।

उसकी जीभ पहले टिप को छुई—धीरे से, जैसे कोई कीमती चीज़ को साफ कर रही हो।

फिर पूरी तरह लपेट लिया—जीभ से चारों तरफ घुमाकर, हर बूंद को चाट लिया।

वो साफ-साफ कर रही थी, जैसे ये उसका फाइनल रिचुअल हो।

हर लिक के साथ हल्की-हल्की सक्शन, जैसे आखिरी स्वाद को भी एंजॉय करना चाहती हो।

मैंने सिर पीछे करके आह भरी—"आह्ह... नेहा... तू आज क्या कर रही है..."

मेरा हाथ उसके बालों में फिर से चला गया, लेकिन इस बार सॉफ्टली, बस सहलाते हुए।

वो जारी रही—धीरे-धीरे, प्यार से, मेरे लुंड को पूरी तरह क्लीन करती हुई।

टिप से लेकर बेस तक, बॉल्स तक—सब कुछ।

उसकी जीभ गर्म, नरम, और इतनी स्किलफुल कि मेरी बॉडी में फिर से हल्की कंपकंपी दौड़ने लगी।

आखिर में वो रुकी, ऊपर देखा—होंठ गीले, चेहरा अब और भी ग्लो कर रहा था।

"सब क्लीन... अब बिल्कुल तैयार," वो फुसफुसाई, आवाज़ में एक अलग सी मिठास।

फिर मेरे पेट पर एक हल्का किस किया, जैसे थैंक यू कह रही हो।

मैंने उसे ऊपर खींचा—अपनी बाहों में लिया, दोनों एक-दूसरे से चिपक गए।

उसका बदन गर्म, नरम, और अभी भी काँप रहा था।

मैंने उसके कान में कहा,

"तू आज कुछ और ही लग रही है... जैसे पहली बार हो।"

नेहा ने मेरी छाती पर सिर रखा, हल्के से हँसी।

"शायद... आज मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ... पूरी तरह।"

कमरा अब शांत था—सिर्फ हमारी साँसें, और हल्की-हल्की खुशबू।

लेकिन मैं जानता था... ये अभी खत्म नहीं हुआ।
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