19-02-2026, 01:52 PM
राजासाहब झाड़ कर हान्फ्ते हुए लेट गये। उनका लंड सिकुड रहा था और मेनका उसे चाट कर साफ़ करने लगी। मेनका बहुत हैरान थी,उसने सपने मे भी नही सोचा था कि कभी वो ऐसे किसी लंड को मुँह मे लेगी और उसका पानी भी पी जाएगी, और वो भी अपने ससुर का। ऐसा सोचते ही उसे थोड़ी शर्म भी आ गयी। उसने लंड को अपने मुँह से अलग किया और धीमे से नज़रे उठा कर अपने ससुर से मिलाई।
राजासाहब को ऐसा मज़ा कभी भी महसूस नही हुआ था। उन्होने मेनका को अपनी ओर देखता पाया और हाथ बढ़ा कर उसे खीच कर अपने उपर लिटा लिया,फिर करवट ले उसे अपनी बगल मे किया और बाहों मे भींच कर उसके चेहरे पर चुम्मों की झड़ी लगा दी।फिर उसके चेहरे को अपने हाथों मे लिया और उसकी काली,बड़ी-2 आँखों मे झँकते हुए उनके होठों से निकला,"आइ लव यू...मेनका।" मैत्री की पेशकश
शर्म और खुशी की लाली मेनका के चेहरे पर छा गयी और उसने अपने ससुर के सीने मे मुँह छुपा लिया। थोड़ी ही देर मे दोनो नींद के आगोश मे चले गये।
मेनका की आँख खुली तो उसने पाया कि वो करवट से लेटी हुई है और उसके ससुर भी वैसे ही लेते हैं। उनके होठ उसकी एक चूची से चिपके हुए थे और दूसरी को अपने हाथ से मसल रहा था। उसने खिड़की की ओर देखा तो पर्दे के पीछे अभी भी अंधेरे का एहसास हुआ। तभी राजासाहब ने उसके निपल को ज़ोर से चूस लिया,"ऊओ।।।ओवववव।",मेनका ने आह भरी और राजासाहब को उपर लेती हुई पीठ के बल लेट गयी। राजासाहब के लिया बस इतना इशारा काफ़ी था,उन्होने मेनका की टांगे अपने घुटनो से फैलाई और अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया।
"आ...आह।",मेनका को फिर अपनी चूत मे वो मीठा दर्द महसूस हुआ। उसने अपने ससुर को अपनी बाहों और टांगो मे भीच लिया और उसकी कमर खुद बा खुद हिलने लगी। राजासाहब उसकी चूचियो को छ्ड़, उसके होठों पर झुक गये और एक बार फिर अपनी बहू की चुदाई मे जुट गये।
सवेरे मेनका की नींद खुली तो उसने पाया कि वो बिस्तर पे अकेली नगी पड़ी हुई है,राजासाहब वहा नही थे। उसने घड़ी देखी तो 8 बज रहे थे। वो जल्दी से उठी,एकएक बजे डील साइनिंग के लिए पहुँचना था। वो बिस्तर से उतरने लगी तो उसका ध्यान अपनी चूचियो और जांघों पर गया। राजासाहब ने दोनो जगहों पर अपने होठों के निशान छ्ड़ दिए थे। वो शर्मा गयी पर उसकी नज़रे राजासाहब को ढूँढने लगी।
बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी। वो वैसे ही नंगी उस तरफ चल पड़ी,हाथ लगाया तो पाया कि बाथरूम का दरवाज़ा खुला था। उसे धकेल कर वो अंदर दाखिल हुई तो देखा कि राजासाहब शेव कर रहें हैं,उनकी कमर के गिर्द एक तौलिए के अलावा और कोई कपड़ा नही था।उन्होने घूम कर मेनका की तरफ देखा और मुस्कुरा दिए।
मेनका उनकी तरफ बढ़ने लगी। उसके ससुर की नज़रे उसके जिस्म के एक-एक अंग का मुआयना कर रही थी।उसके गाल शर्म से लाल हो गये,"ऐसे क्या देख रहे हैं?",वो उनके सामने खड़ी हो गयी। मैत्री की लिखावट
।। जय भारत ।।
राजासाहब को ऐसा मज़ा कभी भी महसूस नही हुआ था। उन्होने मेनका को अपनी ओर देखता पाया और हाथ बढ़ा कर उसे खीच कर अपने उपर लिटा लिया,फिर करवट ले उसे अपनी बगल मे किया और बाहों मे भींच कर उसके चेहरे पर चुम्मों की झड़ी लगा दी।फिर उसके चेहरे को अपने हाथों मे लिया और उसकी काली,बड़ी-2 आँखों मे झँकते हुए उनके होठों से निकला,"आइ लव यू...मेनका।" मैत्री की पेशकश
शर्म और खुशी की लाली मेनका के चेहरे पर छा गयी और उसने अपने ससुर के सीने मे मुँह छुपा लिया। थोड़ी ही देर मे दोनो नींद के आगोश मे चले गये।
मेनका की आँख खुली तो उसने पाया कि वो करवट से लेटी हुई है और उसके ससुर भी वैसे ही लेते हैं। उनके होठ उसकी एक चूची से चिपके हुए थे और दूसरी को अपने हाथ से मसल रहा था। उसने खिड़की की ओर देखा तो पर्दे के पीछे अभी भी अंधेरे का एहसास हुआ। तभी राजासाहब ने उसके निपल को ज़ोर से चूस लिया,"ऊओ।।।ओवववव।",मेनका ने आह भरी और राजासाहब को उपर लेती हुई पीठ के बल लेट गयी। राजासाहब के लिया बस इतना इशारा काफ़ी था,उन्होने मेनका की टांगे अपने घुटनो से फैलाई और अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया।
"आ...आह।",मेनका को फिर अपनी चूत मे वो मीठा दर्द महसूस हुआ। उसने अपने ससुर को अपनी बाहों और टांगो मे भीच लिया और उसकी कमर खुद बा खुद हिलने लगी। राजासाहब उसकी चूचियो को छ्ड़, उसके होठों पर झुक गये और एक बार फिर अपनी बहू की चुदाई मे जुट गये।
सवेरे मेनका की नींद खुली तो उसने पाया कि वो बिस्तर पे अकेली नगी पड़ी हुई है,राजासाहब वहा नही थे। उसने घड़ी देखी तो 8 बज रहे थे। वो जल्दी से उठी,एकएक बजे डील साइनिंग के लिए पहुँचना था। वो बिस्तर से उतरने लगी तो उसका ध्यान अपनी चूचियो और जांघों पर गया। राजासाहब ने दोनो जगहों पर अपने होठों के निशान छ्ड़ दिए थे। वो शर्मा गयी पर उसकी नज़रे राजासाहब को ढूँढने लगी।
बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी। वो वैसे ही नंगी उस तरफ चल पड़ी,हाथ लगाया तो पाया कि बाथरूम का दरवाज़ा खुला था। उसे धकेल कर वो अंदर दाखिल हुई तो देखा कि राजासाहब शेव कर रहें हैं,उनकी कमर के गिर्द एक तौलिए के अलावा और कोई कपड़ा नही था।उन्होने घूम कर मेनका की तरफ देखा और मुस्कुरा दिए।
मेनका उनकी तरफ बढ़ने लगी। उसके ससुर की नज़रे उसके जिस्म के एक-एक अंग का मुआयना कर रही थी।उसके गाल शर्म से लाल हो गये,"ऐसे क्या देख रहे हैं?",वो उनके सामने खड़ी हो गयी। मैत्री की लिखावट
।। जय भारत ।।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)