Thread Rating:
  • 10 Vote(s) - 1.6 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Incest खेल ससुर बहु का
मेनका को अपने ससुर का लंड बहुत प्यारा लग रहा था। वो उसे अपने मुलायम हाथों से पकड़ धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसका चेहरा धीरे-2 करके लंड की ओर झुकता जा रहा था। उसने और झुक कर लंड के टोपे को बहुत हल्के से चूम लिया। उसे खुद पर बहुत हैरानी हुई। उसका पति यही चाहता था पर उसे इतनी घिन आती थी,सोचने भर से ही उसे उबकाई आती थी। वो अपने पति से उलझ भी पड़ी थी और साफ़ इनकार कर दिया था उसके लंड को अपने मुँह मे लेने से।

यहाँ से आगे............


पर उसे आज कोई घिन महसूस नही हो रही थी बल्कि आज तो उसे ये सबसे नॅचुरल बात लग रही थी। जिस इंसान ने उसे प्यार, इतना सुख दिया था,उसके लंड को प्यार करना तो एक स्वावाभिक बात थी और फिर ये लंड कितना प्यारा लग रहा था। इतना बड़ा, इतना मोटा,अफ। यही सब सोचते हुए उसने लंड को इस बार थोड़ा और ज़ोर से चूम लिया। राजासाहब की आँखें नशे से बंद हो गयी और उनकी पकड़ अपनी बहू के सर पर और मज़बूत हो गयी। उनकी पत्नी ने ये कभी नही किया था और जिन रंडियों के पास जाते थे,वो तो पैसे के लिए कुछ भी कर सकती थी। ये पहली बार था जब किसी औरत ने अपनी मर्ज़ी से उनके लंड पे मुँह लगाया था।


मेनका ने अपने ससुर की टांगे फैलाई और उनके बीच अपने घुटनो पे बैठ गयी,अपने हाथों मे लंड को पकड़ा और होठ उस पर कस दिए। राजासाहब ने आँखे खोली और सामने का नज़ारा देख कर और गरम हो गये।मेनका का काले बालों से घिरा चेहरा उनके लंड पर झुका था,उसने नज़रे उठाई तो उसके गुलाबी होठों मे लिपटा उनका लंड उन्हे दिखा।घुटने पे झुके होने की वजह से उसकी चौड़ी गांड हवा मे उठ गयी थी। राजासाहब उसके बालों मे उंगलिया फिराते रहे औरजोश से पागल होते रहे।

मेनका ने उनके सुपारे को कस कर चूस लिया तो राजासाहब की आह निकल गयी। अब वो पूरे जोश के साथ उनका लंड चूसने लगी। वो उनका पूरा का पूरा लंड निगल जाना चाहती थी पर वो उसके छोटे से मुँह मे आ नही रहा था। मेनका ने उसे मुँह से निकाला और उसे चूमने लगी। सूपारे के उपर लंड के छेद से चूमती वो लंड की जड़ तक पहुँच गयी। राजासाहब की झाँटे भी उसके होठ छ्छू रही थी। उसने उनके अंडों को हाथ मे ले कर दबाया तो राजासाहब ने जोश मे अपनी कमर उचका दी।

मेनका ने पहले एक और फिर दूसरे अंडे को अपने मुँह मे ले कर चूस लिया। राजासाहब तो पागल हो गये। उन्होने अपनी बहू का सर पकड़ अपने लंड पर दबा दिया। मेनका ने उनके आंडो को छोड़ अबकी लंड की जड़ से चूमना शुरू किया और सूपदे तक पहुँच गयी। इसी तरह चूम कर और चूस कर राजासाहब को पागल कर दिया। वो बेचैनी से अपनी कमर हिला रहे थे। मेनका समझ गयी कि अब उसके ससुर को अपने उपर काबू रखना मुश्किल हो रहा है। उसने अपने मुलायम हाथों से नीचे से लंड को पकड़ाऔर हिलाने लगी। हिलाते हुए उसने अपने होठ लंड के उपर लगा दिया और चूसने लगी। मैत्री की पेशकश

राजासाहब इस दो तरफे हमले से पागल हो गये। उनके आंडो से एक सैलाब चल कर उनके लंड से बाहर निकलने को बेताब होने लगा,उन्होने मेनका के सर को पकड़ अपने लंड पर और दबा दिया,"हम...झड़ने वाले हैं।",उन्हे लग रहा था कि पता नही मेनका उनका पानी अपने मुँह मे लेना चाहे या नही। वो सोच रहे थे कि अब वो अपना मुँह हटा अपने हाथों से उन्हे झाड़वा देगी। मैत्री की लेखनी

पर उनकी आशा के विपरीत मेनका ने अपने होठों की पकड़ और मज़बूत कर दी और और तेज़ी से उनके लंड को चूसने और हिलाने लगी। राजासाहब के सब्र का बाँध टूट गया,उनका शरीर झटके खाने लगा और नीचे से कमर हिला कर उन्होने अपनी बहू के मुँह को अपने पानी से भर दिया। मेनका उनका सारा वीर्या पीने लगी। उसने चूस-2 कर उनके लंड से विर्य की एक-एक बूँद निचोड़ ली।

जय भारत
[+] 1 user Likes maitripatel's post
Like Reply


Messages In This Thread
RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 19-02-2026, 01:37 PM



Users browsing this thread: 9 Guest(s)