9 hours ago
(14-02-2026, 12:23 AM)The_Writer Wrote:अपने वक्षों पर लगातार पड़ते उसके हाथों के दबाव और चुम्बनों से वह कामोत्तेजित होकर कसमसाने लगी… बिना ब्रा का हल्की गुलाबी ब्लाउज, भूरे निप्पल और उसके आसपास के हिस्से लार से बुरी तरह भीग गए... साथ ही हाथों के दबाव और यौन-क्रीड़ा ने ब्लाउज की सिलाई को बेतरतीब ढंग से ख़राब कर दिया है. तंग ब्लाउज में कैद चूचियों के नीचे पड़ते दबाव, गोल - सुडौल चूचियों को ब्लाउज के ऊपर के खुले क्षेत्र से बाहर निकल आने को कह रहे थे. खुले, काले बाल कमर तक नागिन की भांति लहराने लगे. खुले गले का ब्लाउज का कंधे वाला बॉर्डर अब मानो धीरे-धीरे कंधे से ही नीचे उतर जाने को उतावले होने लगे. एक धक्के से उसे सुला दी… उस बंद कमरे में उन दोनों के अलावा और कोई नहीं था और ना ही किसी के होने का सवाल था. उसे लिटा कर वह भी उसके बगल में लेट गई. थोड़ी देर चुप्पी छाई रही. फ़िर वह उठ बैठी; अपने लम्बे बालों को संभाली; पर अब वे उसके चेहरे पर से होकर लटकने. उसे गुदगुदी होने लगी --- उसके हटाने से पहले ही वो हँसते हुए अपने बालों को उसके चेहरे से हटा ली. दोनों एक-दूसरे की आँखों में एकटक देखते रहे – दोनों ही के आँखों में एक-दूसरे के प्रति भूख साफ़ दिख रही थी – पर एक अंतर के साथ ... आशा की आँखों में यौन क्षुधा के साथ-साथ अपनत्व का भाव था— पर, पर उसकी आँखों में सिर्फ़ और सिर्फ़ स्वयं के यौन क्षुधा को तृप्त करने की शीघ्रता थी.......
वाह, क्या वर्णन है! उत्तम!


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