17-02-2026, 10:57 AM
(This post was last modified: 17-02-2026, 10:59 AM by The_Writer. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
खैर, कपड़े लेकर जल्दी से बाथरूम की ओर रवाना हुई और उससे पहले करीब 5 सेकंड के लिए रुक कर बाहर की ओर उभरे अपने पिछवाड़े और कमर पे थोड़ी चर्बी के कारण हो रहे एक कटावदार फोल्ड को हसरत भरी निगाहों से अच्छे से देखी --- फ़िर झट से बाथरूम में घुस गई.
जारी रहेगा....
करीब 20-25 मिनट बाद बाथरूम से निकली...
भीगे बाल, भीगा बदन, बदन पर सिर्फ़ एक टॉवल लिपटा हुआ… जो उसकी चूचियों से शुरू हो कर नीचे जाँघों के मध्य भाग तक पहुँच रही है. गोरी, गदराई भीगे बदन पर वो नीली धारियों वाला सफ़ेद टॉवल वाकई इतना फ़ब रहा है कि जो भी देखे उसके दिल में आग लग जाए.
बाथरूम से निकल कर आईने के सामने फ़िर खड़ी हो गई...
नहाने के बाद एक अलग ही ताज़गी फ़ील कर रही है वह अब. दर्पण में चेहरा खिला-खिला लग रहा है. तीन-चार भीगे लट उसके चेहरे के किनारों पर बिख़र आए हैं; ये देख कर एक बार फ़िर उसे अपने आप पर बहुत प्यार आया. खुद को किशोरावस्था को जस्ट पार करने वाली नवयौवना-सी समझने लगी... और ऐसा ख्याल मन में आते ही एक बेशर्म मुस्कान छा गई होंठों पर… और ऐसा होते ही मानो चार चाँद लग गए गोल गोरे मुखरे पर... गज़ब की कातिल हसीना लगने लगी.
अभी अपनी खूबसूरती में और भी डूबे रहने की तमन्ना थी उसे… पर तभी एक ‘बीप’ की आवाज़ के साथ उसका फ़ोन घर्रा उठा. हमेशा अपने फ़ोन को साउंड के साथ वाईब्रेट मोड पर रखती है आशा… कारण शायद उसे भी नहीं पता. कोई मैसेज आया है — हमेशा मैसेज आते ही उसका फोन का लाइट जल उठता है. और अभी ठीक ऐसा ही हुआ… एक ही आवाज़ से लाइट जल उठी और इसी के साथ आशा की नज़र फ़ोन पर पड़ी. सेकंड भर में सिर्फ एक नहीं, लगातार शायद 2-3 मैसेज आ गए.
लेकिन उसने कोई जल्दी नहीं की. चेहरे और बाँहों में लोशन लगाने के बाद इत्मीनान से ड्रेसिंग टेबल के सामने से उठी और बिस्तर पर पड़े फ़ोन को उठा कर मैसेज चेक करने लगी.
मैसेज चेक करते ही उसका चेहरा छोटा हो गया… दिल बैठने लगा. भूलकर भी भूल से जिसके बारे में नहीं सोचना चाहती थी उसी का मैसेज आया था.
‘हाई स्वीटी, कैसी हो?’ ये पहला मैसेज.
दूसरा मैसेज,
‘क्या कर रही हो…? आई होप मैंने तुम्हें डिस्टर्ब नहीं किया. क्या करूँ, दिल को तुम्हें याद करने से रोक तो नहीं सकता न!!’
तीसरा मैसेज,
‘अच्छा, सुनो ना.. मैं क्या कह रहा था... आज तो तुम कॉलेज आओगी नहीं... इसलिए तुम्हारा दीदार भी होगा नहीं .. एक काम करो, अपना एक अच्छा-सा फ़ोटो भेज दो ना...’
चौथा मैसेज,
‘हैल्लो.. आर यू देयर? यू गेटिंग माय मैसेजेज?’
पाँचवां मैसेज,
‘प्लीज़ डोंट बी रूड.. सेंड अ पिक.. आई एम वेटिंग….’
कुल पाँच मैसेज थे… और ये मैसेजेज़ भेजने वाला था ‘मि० रणधीर सिन्हा’ — आशा के कॉलेज का फाउंडर कम चेयरमैन..! फ़िलहाल प्रिंसिपल की सीट के लिए उपयुक्त कैंडीडेट नहीं मिलने के कारण रणधीर ने ख़ुद ही काम-चलाऊ टाइप प्रिंसिपल की जिम्मेदारियों को सम्भाल रखा है.
रणधीर कैसा पिक माँग रहा है, यह अच्छे से समझ गई वह. रणधीर जैसा इंसान आशा को बिल्कुल भी पसंद नहीं. यहाँ तक कि उसका नाम भी सुनना आशा को पसंद नहीं… पर... पर बेचारी करे भी तो क्या करे?
खैर,
एक छोटे टॉवल से सिर पर बालों को समेट कर बाँधी. ड्रेसिंग टेबल के दर्पण के सामने तिरछा खड़ी हुई… कैमरा ऑन की... 2-3 पिक खींची और भेज दी.
अगले पाँच मिनट तक कोई मैसेज नहीं आया…
ये पिक्स रणधीर के लिए काफ़ी हैं सोच कर मोबाइल रख कर ड्रेस चेंज करने जा ही रही थी कि एक ‘बीप’ की आवाज़ फ़िर हुई. आशा कोसते हुए फ़ोन उठाई,
‘हाई, पिक्स मिला तुम्हारा.. अभी-अभी नहाई हो?? वाओ... सो सुपर्ब स्वीटी.. बट इट्स नॉट इनफ़ यू नो.. आई मेंट सेंड मी समथिंग हॉट… यू नो न; व्हाट आई मीन…??’
लंबी साँस छोड़ते हुए एक ठंडी आह भरी आशा ने — जिस बात का अंदाजा था बिल्कुल वही हुआ ... रणधीर इतने में ही ख़ुश होने वालों में नहीं था — उसे आशा के ‘न्यूड्स’ चाहिए!! आशा को पहले ही अंदाज़ा हो गया था कि रणधीर कैसी पिक्स भेजने की बात कर रहा है. वह तो बस एक असफ़ल प्रयास कर रही थी बात को टालने के लिए. पर ये ‘भवितव्य’ था…
थोड़ा रुक कर वह फ़िर ड्रेसिंग टेबल के सामने गई. सिर पर टॉवल को रहने दी. बदन पर लिपटे टॉवल को धीरे से अलग किया ख़ुद से... फिर तिरछी खड़ी हुई दर्पण के सामने…. अपने पिछवाड़े को थोड़ा और बाहर निकाली, स्तनों का अपने एक हाथ से ज़रा सा ढकी और होंठों को इस तरह गोल की कि जैसे वह किस कर रही हो.
फ़िर दूसरा पिक वो ज़रा सामने से ली... सीधा होकर ... अपनी हथेली और कलाई को सामने से अपने दोनों चूचियों पर कुछ ऐसे रखी जिससे की चूचियाँ, निप्पल सहित हल्का सा ढके पर आधे से ज़्यादा उभर कर ऊपर उठ जाएँ और एक लंबी, गहरी क्लीवेज बन जाए…
फ़िर तीसरा पिक ली,
ये वाला लगभग दूसरे वाले पिक जैसा ही था, पर इसमें वह थोड़ा पीछे होकर मोबाइल को थोड़ा झुकाकर ली… इससे इस पिक में उसका पेट, गोल गहरी नाभि और कमर पर ठीकठाक परिमाण में जमी चर्बी भी नज़र आ गई.
तीनों ही पिक बड़े ज़बरदस्त सेक्सी और हॉट लग रहे थे. एक बार को तो आशा भी गर्व से फूली ना समाई और होंठों के किनारों पर एक गर्वीली मुस्कान बिखर जाने से रोक भी न पाई. आशा गौर से थोड़ी देर अपनी पिक्स को देखती और इतराती रही. फ़िर मन मसोस कर रणधीर को सेंड कर दी.
पिक मिलने के बाद मुश्किल से दो से तीन सेकंड हुए होंगे कि रणधीर का मैसेज आ गया…
एक के बाद एक...
कुल तीन मैसेज…!
पहले दो मैसेज तो स्माइलीज़ और दिल से भरे थे…
तीसरा मैसेज कुछ यूँ था…
‘ऊम्माह्ह्ह... वाओ... आशा डार्लिंग... यू आर जीनियस ... सो सो सो ब्यूटीफुल... अमेजिंग बॉडी यू हैव गोट.. आई लव यू... ऊम्माह्ह्ह्ह.... टेक केयर आशा बेबी.. सी यू टुमॉरो.’
मैसेज पढ़कर भावहीन-सी खड़ी रही वो. मैसेज पढ़कर रणधीर, उसका चेहरा, उसकी उम्र, नाम, कद-काठी, कारनामे, सब उसकी आँखों के आगे तैरने से लगे…. मन घृणा से भर गया… सिर झटकते हुए मोबाइल बिस्तर पर पटकी और चली गई चेंज करने.......
जारी रहेगा....


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)