16-02-2026, 03:13 PM
मां बोली: नहीं बेटा तू जहां से निकला है वहां कैसे कर सकता है?
मैंने अपना हाथ चूत पर रखा, और एक उंगली अंदर कर दी, और उसकी आह निकल गई।
वो बोली: नहीं बेटा, हाथ निकाल ले।
मैं बोला: पहले गर्मी तो निकाल दू मां आपकी।
मैं बस आपकी मदद करना चाहता हूं।
वो बोली: कैसी मदद?
मैं बोला: आपका पानी निकाल कर आपको आराम से सुलाना चाहता हूं।
और मैं उंगली करता रहा। उसकी आंखे बंद होने लगी। मैंने भी मौका देख कर चादर के अंदर जाके अपनी मां की टांगों को उठा कर मुंह डाल दिया। मस्त मोटी-मोटी चिकनी जांघों के बीच अपना सिर डाल कर चूसने लगा चूत का रस।
आह, मैं बता नहीं सकता दोस्तों उस रस को पहली बार चूस रहा था मैं। मेरी मां जो कि पहले से गरम थी, वो भी समझ गई थी कि अब कुछ नहीं कर सकती। अब उसका बेटा बड़ा हो गया था, और अपने पापा की जिम्मेदारी उठाने के लायक हो गया था। तो उसने अपनी मोटी भरी जांघों को उठा कर, मेरे कंधे में रख कर, अपनी चूत में दबा लिया, और मेरे बालों को हाथों से सहलाते हुए सिसकी लेने लगी।
ये सब हम बहुत धीरे-धीरे कर रहे थे। जानते थे कि हम बस में थे, तो हम पूरे नंगे नहीं हो सकते थे। लेकिन चुदाई तो कुछ भी करके हम करेंगे ही बस में। 20 मिनट तक मैंने पूरी चूत को मुंह के अंदर डाल कर चूसा-चाटा। मेरी मां का पानी निकालने को था। तो उसने अपनी गांड उठा कर पूरा पानी मेरे मुंह में डाल दिया। मैं भी पूरी चूत चूस कर आखिरी बूंद तक निकाल कर निचोड़ दिया चूत को।
मैं ऊपर आया और मां को देखा तो मां बोली: छी! तू कैसे वहां का पानी पी गया?
मैं मां के होठों को चूमने आगे बढ़ा तो उसने मना कर दिया।
वो बोली: जब मुंह धोएगा तो ही किस मिलेगी।
मैं भी जबरदस्ती नहीं करना चाहता था, तो मैं बोला: मेरा चूसोगी?
तो मां बोली: मुझे ये नहीं पसंद।
तो मैं बोला: फिर सूखा लंड डालूंगा तो चीखना मत।
वो बोली: थोड़ी देर रुक जा बेटा। अब तो तेरे बस में हूं मैं। थोड़ा वापस कर अपनी मां को प्यार।
मैं फिर मां के दूध चूसने लगा। मां के चेहरे को देख कर ल
मैंने अपना हाथ चूत पर रखा, और एक उंगली अंदर कर दी, और उसकी आह निकल गई।
वो बोली: नहीं बेटा, हाथ निकाल ले।
मैं बोला: पहले गर्मी तो निकाल दू मां आपकी।
मैं बस आपकी मदद करना चाहता हूं।
वो बोली: कैसी मदद?
मैं बोला: आपका पानी निकाल कर आपको आराम से सुलाना चाहता हूं।
और मैं उंगली करता रहा। उसकी आंखे बंद होने लगी। मैंने भी मौका देख कर चादर के अंदर जाके अपनी मां की टांगों को उठा कर मुंह डाल दिया। मस्त मोटी-मोटी चिकनी जांघों के बीच अपना सिर डाल कर चूसने लगा चूत का रस।
आह, मैं बता नहीं सकता दोस्तों उस रस को पहली बार चूस रहा था मैं। मेरी मां जो कि पहले से गरम थी, वो भी समझ गई थी कि अब कुछ नहीं कर सकती। अब उसका बेटा बड़ा हो गया था, और अपने पापा की जिम्मेदारी उठाने के लायक हो गया था। तो उसने अपनी मोटी भरी जांघों को उठा कर, मेरे कंधे में रख कर, अपनी चूत में दबा लिया, और मेरे बालों को हाथों से सहलाते हुए सिसकी लेने लगी।
ये सब हम बहुत धीरे-धीरे कर रहे थे। जानते थे कि हम बस में थे, तो हम पूरे नंगे नहीं हो सकते थे। लेकिन चुदाई तो कुछ भी करके हम करेंगे ही बस में। 20 मिनट तक मैंने पूरी चूत को मुंह के अंदर डाल कर चूसा-चाटा। मेरी मां का पानी निकालने को था। तो उसने अपनी गांड उठा कर पूरा पानी मेरे मुंह में डाल दिया। मैं भी पूरी चूत चूस कर आखिरी बूंद तक निकाल कर निचोड़ दिया चूत को।
मैं ऊपर आया और मां को देखा तो मां बोली: छी! तू कैसे वहां का पानी पी गया?
मैं मां के होठों को चूमने आगे बढ़ा तो उसने मना कर दिया।
वो बोली: जब मुंह धोएगा तो ही किस मिलेगी।
मैं भी जबरदस्ती नहीं करना चाहता था, तो मैं बोला: मेरा चूसोगी?
तो मां बोली: मुझे ये नहीं पसंद।
तो मैं बोला: फिर सूखा लंड डालूंगा तो चीखना मत।
वो बोली: थोड़ी देर रुक जा बेटा। अब तो तेरे बस में हूं मैं। थोड़ा वापस कर अपनी मां को प्यार।
मैं फिर मां के दूध चूसने लगा। मां के चेहरे को देख कर ल


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