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Adultery Kayla The Bitch Slut - Season I
#8
उसका बदन हर सेकंड पसीने और रस से और भी फिसलता जा रहा था। डिक्की की दीवारों पर उसके नाखून खिंच रहे थे, और माहौल में सिर्फ़ तीन चीज़ें थीं -- गरम साँसें, चिपचिपी आवाज़ें, और हवा में तैरती कायला की भीगी गंध।

कुछ ही सेकंड बाद, मोनू भी डिक्की में घुस आया -- घुटनों के बल बैठकर उसने अपना मोटा लंड कायला के मुँह के पास लाया। मोनू, जो सामने था, कायला के सिर के पास बैठ गया -- उसने उसके बालों की मुट्ठी बनाई और गरजकर कहा,"अबे कुतिया... ये मुँह खाली क्यों है? भर इसे!"

कायला ने बिना देर किए होंठ खोले -- लंड धीरे-धीरे गले की गहराई तक फिसल गया। उसके गले की मांसपेशियाँ कस गईं, आँखों से पानी निकल आया -- लेकिन उसने लंड बाहर नहीं निकाला। अब दोनों तरफ़ से उसका जिस्म झूल रहा था -- एक तरफ़ सनी की कमर के ठोकर, दूसरी तरफ़ मोनू की जड़ तक भरी धक्के।

अब गाड़ी की डिक्की में सिर्फ़ दो आवाज़ें थीं--"चप... थप... छपक...", और कायला की भारी सिसकियाँ, जो हर सेकंड और बेकाबू हो रही थीं।

उसके गले की गहराई में लंड जाते ही कायला की आँखों से पानी बह निकला -- मगर उसने एक बार भी पीछे नहीं खींचा।

उसकी नाक दबने लगी, साँस घुट रही थी -- फिर भी होंठ और कसकर बंद, जैसे लंड को जकड़े रखना ही उसका मकसद हो।

कायला की उंगलियाँ डिक्की के किनारे पकड़कर कस गईं -- उसके होंठ खुले, मगर आवाज़ सिर्फ़ टूटी-फूटी साँसों में निकली,

"हह... अह्ह... ओह्ह..."

मोनू ने अपना मोटा लंड कायला के होंठों पर मारा --"ठप्प... ठप्प..." -- फिर खुद ही उसकी ठुड्डी पकड़कर मुँह और खोल दिया और पूरा लंड अंदर धकेल दिया।

अब कायला बीच में फँसी हुई थी --पीछे से सनी की बेधड़क पेलाई, आगे से मोनू की चुसाई -- हर बार सनी धक्का मारता तो मोनू के लंड की जड़ उसके होंठों से टकराती, और कायला का गला और गहराई तक भर जाता।

"छप... ठप... श्लर्प... गप... हाआआ..."

ये आवाज़ें गाड़ी की सुनसान डिक्की में गूंज रही थीं, जैसे किसी ने दीवाली के पटाखों की जगह उसकी चूत और मुँह में असली धमाके भर दिए हों।

सनी नीचे से झुककर उसकी गांड को दबाता, फिर बीच की दरार में उँगलियाँ घुसाकर छेड़ता -- और मोनू ऊपर से उसके गाल पकड़कर लंड और गहराई में धकेलता। कायला की आँखों से पानी बह रहा था, मुँह से लार और रस मिलकर मोनू के लंड पर चमक रहे थे, और नीचे उसकी चूत सनी की मार से बिलकुल कच्ची होकर फिसल रही थी।

सनी का लंड कायला की चूत में पूरी रफ़्तार से आ-जा रहा था -- हर ठोकर पे उसकी गांड ऊपर उठती और फिर मेटल की डिक्की पर धप्प से गिरती, जिससे गाड़ी हल्की-हल्की हिल रही थी।

चूत का रस का चिपचिपा बहाव अब उसकी जाँघों से टपककर डिक्की के फर्श पर जमा हो रहा था।

मोनू गरजकर बोला -- "ले साली... आज तुझे बिना हिला छोड़े नहीं जाने दूँगा... अब तैयारी कर, दोनों तरफ से पटाखा फूटेगा।"

सनी अब पूरे दम से ठोक रहा था -- हर झटके पर कायला की गांड डिक्की की निचली सतह से टकराती और धपाक की आवाज आती। उसकी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि हर धक्के के साथ "छपाक... छपाक..." की तेज़ आवाज निकलती, जैसे पानी में हाथ मार रहे हों।

मोनू ऊपर से उसका मुँह भरे बैठा था -- कभी उसके बाल पकड़कर गहराई में धकेलता, कभी उसकी ठुड्डी उठाकर उसे अपनी आँखों में देखने पर मजबूर करता। "देख मेरी आँखों में, कुतिया... देख, कैसे चूस रही है..."मोनू के लंड से कायला का गला पूरा भरा हुआ था, आवाज बस घुटी-घुटी निकल रही थी। "उम्म्... उम्म्म्... आआन... आआन... उम्म्म्..."

सनी नीचे से उसकी गांड पर थप्पड़ मारता -- "चटाक!" -- फिर और तेज़ ठोकर लगाता, जिससे कायला का पूरा बदन आगे की तरफ खिसकता और मोनू के लंड में और गहराई तक दब जाता।

अब तीनों का रिदम एक जैसा हो चुका था -- सनी का ठोका = मोनू का धक्का = कायला का घुटा हुआ कराहना।उसका बदन पसीने और चूत के रस से पूरी तरह भीग चुका था।

मोनू ने उसके मुँह से लंड निकाला, उसकी ठुड्डी पकड़कर लार टपकने दी -- फिर हँसते हुए बोला, "सनी... अब इसे उल्टा कर देते हैं... आज इसे असली स्टेपनी का मतलब समझा देते हैं।"

मोनू ने ठुड्डी छोड़ते हुए एक हाथ से कायला का बालों का मुट्ठा पकड़ा, और दूसरे हाथ से उसकी गर्दन के पीछे दबाव डालते हुए बोला -- "चल... उठ कुतिया।"कायला की साँसें अभी भी भारी थीं, होंठों पर लार चिपकी हुई थी। वो आधी उठी ही थी कि सनी ने पीछे से उसकी जांघ पकड़कर खींच लिया। कायला अब स्लाइड होकर डिक्की के किनारे आ गई।

सनी ने उसके दोनों हाथ पकड़े, और एक झटके में उसे घुमाया -- अब कायला पाँव ज़मीन पर, कमर झुकाए, सिर और कंधे डिक्की के अंदर। उसकी गांड सनी की तरफ़ पूरी उभरी हुई थी, चूत और गांड दोनों चमक रहे थे।

सनी ने नीचे झुककर उसके कूल्हों को दोनों हाथों से थामा, अंगूठे उसकी गांड के गोल हिस्से में दबे हुए -- "अब मज़ा आएगा..."पीछे से उसका मोटा, गरम लंड कायला की गीली चूत के होंठों पर रगड़ खा रहा था, और हर बार वो हल्के से कराह रही थी।

उधर मोनू, डिक्की के अंदर, उसने कायला का चेहरा अपने लंड के पास खींच लिया। उसने ज़बरदस्ती उसके मुँह में लंड ठूँस दिया -- कायला के होंठ खिंच गए, गाल फूल गए, और गला फिर से भरने लगा।अब पोज़िशन तैयार थी -- सनी पीछे से धंसने लगा, हर धक्के में कायला का सिर मोनू की जाँघों से टकराता, और मोनू का लंड उसके गले में और गहराई तक चला जाता।

डिक्की के अंदर हवा, पसीने की गंध, और "धप-चप-ग्लप" की मिली-जुली आवाज़ें गूंज रही थीं।

सनी ने अपनी पकड़ और कस ली -- दोनों हाथ कायला की कमर पर। मोनू ने उसके बालों की मुट्ठी कसकर खींची, ताकि उसका मुँह लंड से ज़रा भी दूर न जाए।

पहला सिंक हुआ धक्का -- सनी ने ज़ोर से पीछे से धँसाया, और उसी पल मोनू ने अपना लंड उसके गले में एकदम अंदर तक ठूँस दिया। कायला की आँखें फैल गईं, गले से "उह... घ्ह्क्क..." जैसी घुटी हुई आवाज़ निकली, और उसकी नाक से हल्की गरम हवा फूटी।

दूसरा धक्का -- दोनों के कमर के मूवमेंट एकदम टाइम पे, जैसे किसी गंदी लय में बज रहा हो। पीछे से "धप!" -- आगे से "ग्लप!"

उसके शरीर में हर बार झटका ऊपर से नीचे तक फैल जाता, जाँघें थरथरातीं, और चूत से गीला रस टपककर ज़मीन पर गिरता।

सनी अब और तेज़ हो गया -- "अब रुकना मत मोनू...!"

मोनू ने उसकी ठुड्डी दबाकर मुँह और खोला, और अपना लंड और गहराई में डाल दिया, यहाँ तक कि कायला का माथा उसकी नाभि से लग गया। उसके गाल अंदर-बाहर हो रहे थे, आँखें पानी से भर चुकी थीं, लेकिन दोनों मर्दों की लय नहीं टूटी।

तीसरा धक्का -- सनी के टक्कर से कायला की गांड पूरे बल से आगे उछली, और उसी टाइम मोनू ने अपना लंड गले में आख़िरी हद तक ठेल दिया। उसका गला सिकुड़ा, एक गरम लार की धारा मोनू के लंड के नीचे बह निकली और उसकी जाँघ पर गिर गई।

अब कार की डिक्की में सिर्फ तीन चीज़ें गूंज रही थीं -- "धप-ग्लप-चप! ... धप-ग्लप-चप!" और बीच-बीच में कायला की घुटी हुई सिसकियाँ, जो लार, पसीने और चूत के रस में डूबी हुई थीं।

सनी ने पीछे से धक्का मारते-मारते अचानक रुककर कमर पीछे खींची। कायला ने हांफते हुए गहरी सांस ली -- गले से मोनू का लंड अब भी आधा बाहर निकला था, लार उसके होंठों से टपक रही थी।

सनी बोला -- "आज तेरे साथ दिवाली में होली खेलेंगे... सफेद होली... चुदाई का सफेद रंग।!"

उसने दोनों हाथों से कायला की कमर पकड़कर उसे ऊपर खींचा और मोड़ दिया। अब कायला की पीठ डिक्की की दीवार से लग चुकी थी, पैर ज़मीन पर टिके, और उसकी छाती खुलकर मोनू की तरफ थी। गर्दन पीछे झुकी हुई, साँसें उखड़ी हुई, बाल पसीने से चिपके हुए -- बस नंगी त्वचा की गरमी थी।

सनी फिर से उसके सामने आया, लंड हाथ में पकड़कर ऊपर-नीचे करने लगा। कायला की आँखें उसकी नज़रों में अटकी हुई थीं, और अगले ही पल -- "आऽऽ रहा हूँ रंडी!"

सनी ने एक झटके में अपना वीर्य छोड़ दिया -- गर्म, गाढ़ा फव्वारा सीधा उसकी दोनों छातियों पर गिरा। पहली बूँद के लगते ही कायला के होंठ खुल गए, गर्मी ने उसकी त्वचा को जलता सा बना दिया। हर स्प्लैश उसके निप्पलों से नीचे लुढ़कता, पेट पर बहता और नाभि में इकट्ठा हो जाता।

सनी हाँफते हुए पीछे हट गया, लंड अब भी आधा सख़्त। मोनू बिना देर किए उसकी जगह आ गया -- उसने कायला की दोनों छातियाँ पकड़कर ऊपर उठाईं, और खुद को उन उभारों के बीच पोज़िशन किया।

"अब मेरी बारी... सांस रोक कुतिया।"

दो तेज़ स्ट्रोक... और मोनू ने भी अपना गरम लावा छोड़ दिया -- सीधा उसके गले और ठुड्डी पर।

वीर्य की धार उसके गले से फिसलकर पहले से गीली छाती पर आ मिली, जिससे कायला पूरी तरह से पसीने और दो मर्दों के गरम रस में नहा गई।

डिक्की में अब बस तीन चीज़ें रह गई थीं --भारी साँसें, वीर्य की गंध, और कायला की भीगी, चमकती हुई त्वचा।

कायला, अब डिक्की में पड़ी -- आँखें बंद, उसकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी, वीर्य में भीगी हुई। माहौल शांत चारों तरफ़ हल्की ठंडी हवा थी -- मगर उसमें अब भी गाढ़े रस और गर्म मर्दानगी की बू तैर रही थी। सनी और मोनू कार के किनारे टिके खड़े थे -- लंड अब ढीले, मगर गर्मी अभी भी बदन में सुलग रही थी। पसीने की बूंदें उनकी गर्दन और छाती से बहकर पेट तक गिर रही थीं। हवा उनको सुखाने में लगी थी, दोनों अपनी सांसों काबू में कर रहे थे।

मोनू ने गाड़ी के अंदर से एक दुपट्टा उठाया, पहले अपना लंड पोंछा, फिर सनी को दिया। सनी ने भी चुपचाप पोंछा और वही गीला दुपट्टा कायला के नंगे बदन पर फेंक दिया।"कुतिया, साफ कर ले... गुलाब जामुन ले लिए हैं," मोनू ने हँसते हुए कहा। मोनू की आवाज़ ठंडी थी, मगर उसमें आदेश का वजन था।

कायला ने थकी आँखें खोलीं -- बिना जवाब दिए वही दुपट्टा उठाकर अपने सीने, पेट और नाभि से वीर्य पोंछने लगी -- हर जगह से गर्म, चिपचिपी परत हटाती हुई।।दोनों मर्द कुर्ता-पायजामा पहन चुके थे -- सनी ने मुस्कुराकर कहा, "मोनू, सच में आज मज़ा आ गया... दीवाली का पटाखा तूने सही कहा था।"

मोनू ने उसकी ब्रा और चड्डी ज़मीन पर फेंक दी,"अब ये नहीं पहनना तुझे, कुतिया..."और अनारकली सूट और चुड़ीदार उसकी तरफ़ बढ़ाया,"ये डाल और चल अंदर..."

कायला धीरे-धीरे उठी -- पाँवों में थरथराहट और चूत में अब भी बाकी गर्माहट।उसने बिना ब्रा-चड्डी के कपड़े पहने -- पतला कपड़ा उसके गीले बदन से चिपक गया, हर कर्व को उभारता हुआ।। तीनों वापस गाड़ी में बैठे -- इंजन चालू, मगर माहौल भारी।कोई कुछ नहीं बोला, बस थकी साँसें, गरम सन्नाटा, बदन से रिसती वो नशीली गंध और कायला की जाँघों के बीच अब भी हल्की चिपचिपाहट।

गाड़ी डिक्की बंद होने के बाद चुपचाप चल रही थी --अंदर सिर्फ़ हल्की "ह्ह... ह्ह..." वाली थकी साँसें, सीटों पर पसीने और वीर्य की गंध, और पीछे की सीट पर कायला के कपड़ों में अब भी रिसते गरम निशान।

मोनू ड्राइव कर रहा था, सनी साइड में बैठा खिड़की से बाहर देख रहा था, मगर उसकी नज़रें बीच-बीच में रियर-व्यू मिरर से कायला के चेहरे पर जाती थीं -- उसके गाल अब भी लाल थे, बाल उलझे हुए, उसे सुलझाते हुए और होंठ हल्के-हल्के काँप रहे थे।

कुछ ही देर में गाड़ी कायला के घर के गेट पर रुकी। कायला ने दरवाज़ा खोला -- जैसे ही पाँव नीचे रखा, उसकी जाँघों के बीच हल्की सी सरसराहट हुई, याद दिलाते हुए कि अंदर अब भी गर्मी बाकी है।

मोनू ने सीट से झुककर एक पैकेट उसकी ओर बढ़ाया -- "ये मिठाई ले जा... अगली बार फिर आऊँगा, इस बार तेरे घर में। बता देना कब आना है।" कायला ने एक हल्की मुस्कराहट दी -- "पता चल जाएगा तुम्हें... अभी के लिए, हैप्पी दिवाली।"

तभी दरवाज़े पर उसकी मम्मी आ गई -- पूजा की थाली हाथ में, माथे पर हल्का पसनीा।

"चल जल्दी आ, पूजा का टाइम हो रहा है!" -- मम्मी की आवाज़ बिलकुल मासूम, मगर कायला के कानों में वो दूसरी ही धड़कनों के साथ मिल गई।

मोनू ने पैकेट मम्मी की तरफ़ बढ़ाया,

" वन्स अगेन, हैप्पी दिवाली आंटी..." -- एक नज़र कायला पर डालते हुए।

कायला बिना जवाब दिए, वही भीगा दुपट्टा और अंदर अब भी चिपकी गरमाहट के साथ, घर के अंदर चली गई -- सीधे पूजा में शामिल होने।

पीछे मोनू और सनी अपनी-अपनी गाड़ियों में बैठकर अपने घर की पूजा के लिए निकल गए --अब पूरे मोहल्ले में अगरबत्ती और दीपक की खुशबू थी...मगर उनके दिल में जो महक रही थी, वो किसी और ही पूजा का प्रसाद थी --गर्म, गाढ़ा, और सिर्फ़ उनके लिए बना।

घर के अंदर -- अगरबत्ती की महक, दीयों की रोशनी, मम्मी की आवाज़... और बीच में कायला। हाथ में पूजा की थाली थी, पर आँखों में कार की डिक्की का अँधेरा।

पूजा के बाद मोहल्ला पटाखों की आवाज़ और हँसी से गूंज उठा था।बच्चे फुलझड़ी, चकरी और अनार जला रहे थे।

मोनू अपने घर के बाहर था -- मम्मी-पापा, पत्नी और मोहल्ले के लोगों के साथ पटाखे चला रहा था।पास में ही सुनील जी, मोहल्ले के कॉरपोरेटर, लड़ी जलाने की तैयारी कर रहे थे।

कायला भी अपने आँगन में थी, चेहरे पर हल्की थकान, मगर बाहर से सब कुछ सामान्य।भीतर के कपड़ों के नीचे अब भी गर्मी और नमी थी, लेकिन आस-पास की रौशनी और हँसी में वो बस एक और पड़ोसन लग रही थी।दूर से पटाखों की चमक मोनू के चेहरे पर पड़ती थी, मगर उसकी आँखों में कोई कहानी नहीं थी -- बस दिवाली की एक और शाम।
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RE: Kayla The Bitch Slut - Season I - by Captian - 16-02-2026, 04:06 AM
RE: Kayla The Bitch Slut - Season I - by Kayla4uonline - 16-02-2026, 09:35 AM



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