15-02-2026, 10:41 PM
मोनू ने फोन निकाला और कॉल किया --
मोनू: "कायला... आज रात प्लान है। कोई बहाना बनाकर निकल लेना -- और इस बार सनी भी साथ रहेगा... मतलब दोनों मिलकर तेरी दीवाली जलाएँगे।"
उसके होंठों के किनारे हल्की मुस्कान तैर गई, जैसे किसी ने पहले से ही उसके भीतर की आग को पहचान लिया हो।कायला ने फोन काँधे से थामे रखा... झुकी ही रही, आवाज़ धीमी मगर बुझी नहीं।
कायला: "हम्म... ठीक है..."
उस एक "हम्म" में, एक पूरी रात की कराहें, आहें और गीलेपन का वादा छुपा था।
दिवाली की शाम
हर घर में रौशनी थी, लेकिन कुछ घरों के अंदर अंधेरा अब भी बदन में उतरने को तैयार था।
कायला ने अपने सफेद अनारकली सूट में खुद को तैयार किया -- अंदर वही बैंगनी ब्रा और चड्डी। ब्रा के टाइट हुक में दूध हल्के-हल्के उभर आए थे, और चड्डी का पतला कपड़ा उसकी भीगी चूत की दरार में हल्का-सा घुसकर चिपक गया था। नीचे चुस्त सफेद चूड़ीदार उसकी मोटी जाँघों से चिपका हुआ। बदन ढका हुआ था, लेकिन कपड़ों के नीचे गरमी की लहरें पहले से ही दौड़ रही थीं।
बाल सँवारते वक़्त उसकी उंगलियाँ हल्के-हल्के काँप रही थीं... नज़रें झुकी हुईं, मगर दिल की धड़कन ऊपर चढ़ी हुई। काजल की पतली लाइन आँखों में डाली, होंठों पर कुछ नहीं लगाया... फिर शीशे में अपनी ही आँखों में देखते हुए, हल्की सी मुस्कान के साथ जैसे खुद से कहा --
"आज तू फिर से चूसी जाएगी... और इस बार अकेले नहीं।"
सीने से लगती ब्रा के नीचे दूधों में हल्की सिहरन थी... अनारकली का कपड़ा उनकी लचक को महसूस कर रहा था। चुस्त चूड़ीदार के अंदर, चूत की गरमी धीरे-धीरे फैल रही थी, वहाँ हल्की नमी भी ... कपड़ा भीगने लगा था।
उसने जलता दिया उठाया और घर के बाहर रखे दीप सजाने लगी। हर बार जब वो झुकती,दुपट्टा गले से नीचे गिरकर उसके भरे दूधों के सिरों पर चिपक जाता, और हवा के हल्के झोंके में कपड़ा निप्पल की टिप पर कसने लगता। नीचे कपड़े की परतों के बीच से उसकी मोटी, भरी जाँघों की गरमी सीधी ऊपर उठ रही थी।
कायला के घर के सामने, सनी के घर के गेट पर मोनू और सनी खड़े थे। दोनों ने कुर्ता-पायजामा पहना था, लेकिन नज़रों में दीयों की चमक नहीं -- कायला के दूधों और गांड की गरमी थी। सनी की आँखें जैसे उसके हर कदम पर उसकी गांड के झटकों को माप रही थीं, और पायजामे के नीचे उसका उभार बढ़ता जा रहा था।
दिये रखकर वो अंदर आई और मिठाई की थाली उठाने लगी, फिर अपनी मम्मी से कहा --"मम्मी... गुलाब जामुन नहीं हैं मिठाई में। पापा शायद लाना भूल गए।"
मम्मी ने माथा सिकोड़ा,फिर उसने दीयों की एक थाली उठाई और एक कायला को दे दी और बाहर आँगन में निकलते हुए वह बोली -- अब क्या करूँ? तू एक काम कर... फिर बोलीं --"अरे वो तो दो घंटे बाद आएँगे पूजा से पहले... तू ही ले आ, अभी टाइम है।"
कायला ने सिर हिलाया, लेकिन अंदर की धड़कन और तेज़ हो गई, पेट में तितलियाँ उड़ने लगीं।
तभी मोनू और सनी सामने आ गए --मोनू, "नमस्ते आंटी, हैप्पी दिवाली!"
सनी, "हैप्पी दिवाली, आंटी!"
मम्मी मुस्कराकर बोलीं -- "हैप्पी दिवाली बेटा, कैसे हो तुम दोनों?"
दोनों: "बढ़िया हैं, आंटी।"
मोनू ने चालाकी से कहा --" आंटी क्या कायला, मिठाई लेने जा रही हैं क्या? हम भी जा रहे हैं, साथ ले आते हैं।"
मम्मी ने तुरंत हामी भर दी --"हाँ, चले जाओ बेटा... अभी पूजा में टाइम है।"
ये सुनते ही मोनू ने सनी को आँख मारी --"जा, कार निकाल ला फटाफट... आज की मिठाई गरम-गरम चाहिए।"
कायल़ा की मम्मी अंदर जाने लगती और बोलती हैं -- "कायल़ा, तू होके आ, मैं बाकी का काम देखती हूँ, ज्यादा कुछ बचा नहीं है।"
सनी कार लेने गया, तब मोनू कायला के कान के पास झुककर फुसफुसाया -- "थोड़ा धीरे चल... और गांड हिलाना मत भूल... सनी को मज़ा लेने दे पीछे से उसको भी पता चलना चाहिए तू क्या चीज़ है।"
उसकी गरम साँसें कायला की गर्दन से नीचे उतर रही थीं, जैसे कपड़ों के अंदर उसकी रीढ़ की हड्डी तक सरक रही हों।
कायला ने कुछ नहीं कहा... बस अपनी चाल थोड़ी धीमी कर दी। सफेद पायजामा हर क़दम पर उसकी गोल गांड से खिंचने लगा... चाल में हल्का झटका था -- और सनी की निगाह सीधी वहाँ अटक गई।
अब वो रंगोली वाली लड़की नहीं थी -- आज की रात दो लंडों की दीवाली बनने जा रही थी।
मोनू और कायला आगे चल रहे थे, सनी कार लेकर पीछे आ रहा था -- उसकी नजरें कायला की मटकती गांड पर जमी थीं।
सनी ने कार उनके पास रोकी। कायला अंदर बैठी -- पीछे की सीट पर, साथ में मोनू। सनी ड्राइविंग सीट पर। बैठते ही मोनू का हाथ उसके घुटने पर टिक गया,
और उंगलियाँ धीरे-धीरे पायजामे के कपड़े पर घूमने लगीं। कायला की सांसें तेज़ हो गईं, आँखें सड़क पर थीं लेकिन बदन पीछे की सीट पर कैद हो चुका था।
गाड़ी धीमे-धीमे आगे बढ़ी... मगर कायला की साँसें तेज़ हो गईं। वो जानती थी, ये रास्ता मिठाई की दुकान का नहीं -- ये चूत की थाली सजने का रास्ता था।
उसका दिल धड़क रहा था... मिठाई का रस तो बस बहाना था, आज उसकी चूत का असली प्रसाद चढ़ने वाला था।
गाड़ी कुछ ही दूरी चली थी... लेकिन शीशे बंद थे, और अंदर अब साँसें भारी हो चुकी थीं। कायला की चुस्त सफेद चूड़ीदार के नीचे उसकी मोटी जाँघें पसनीे से गीली थीं -- वहाँ से उठती गरमी अब पूरे कार में फैल रही थी, और मोनू की साँसों में घुल रही थी।
कार के अंदर हल्की-सी धुंध जमने लगी थी, और हवा में पसनीे, इत्र और भीगी चूत की मिली-जुली खुशबू तैर रही थी -- इतनी भारी कि सनी भी स्टीयरिंग पर उंगलियां कसने लगा।
मोनू (हल्की मुस्कान के साथ, आँखें कायला के बदन पर गड़ाए): "कायला... मिठाई तो हमारे पास पहले से है... अब तो बस
टेस्ट लेना बाकी है।"
कायला ने सिर झुका लिया, मगर उसकी उँगलियाँ सीट की कुंडी कसने लगीं -- जैसे चुपचाप कह रही हों, "अब और मत रुकाओ।" वो पहले भी मोनू के लंड का मज़ा ले चुकी थी... और जानती थी कि अब जो होने वाला है, वो सीधा उसकी रगों में उतर जाएगा।
उसकी जाँघें हल्के-हल्के आपस में रगड़ने लगीं, जैसे लंड के लिए जगह तैयार कर रही हों।
मोनू ने सीट से झुककर हाथ बढ़ाया -- धीरे से उसकी अनारकली को नीचे से पकड़ा और ऊपर की ओर सरकाया। कायला ने कुछ नहीं कहा... बस आँखें आधी मूँद लीं और हाथ ऊपर कर दिए, जैसे खुद अपने कपड़े से जुदा होने की इजाज़त दे रही हो।
अनारकली अलग हुई, तो मोनू की नज़रें सीधे बैंगनी ब्रा पर पड़ीं। उसने कायला को हल्का सा अपने तरफ घुमाया... उसकी गोरी पीठ पर ब्रा का पतला सा स्ट्रैप था। 'क्लिक' -- दोनों हाथों से मोनू ने स्ट्रैप खोला, और ब्रा पैरों तक आकर रुक गई।
उसने उसके निप्पलों को दोनों अंगूठों से दबाया, हल्का घुमाया, और फिर एक पर होंठ रखकर उसे गर्म-गर्म चूस लिया -- कायला के मुँह से हल्की सिसकारी निकली।
अब कायला के दूध खुले थे -- गुलाबी, तने हुए, जैसे किसी को बुला रहे हों कि आ, चूस के सारा रस पी जा। उसकी साँसें और तेज़ थीं, होंठ हल्के काँप रहे थे।
मोनू ने उसका दुपट्टा, चूड़ीदार और अनारकली एक तरफ संभाल कर रख दिया -- ताकि बाद में पहनने में परेशानी न हो। अब बस बैंगनी चड्डी बाकी थी -- चिपकी हुई, भीगी हुई, गांड और चूत के हर कर्व को जकड़े हुए।
मोनू ने बिना एक पल गँवाए चड्डी भी नीचे खींच दी। कायला अब पीछे की सीट पर पूरी नंगी थी। उसकी चूत हल्की खुली थी -- नमी और गरमी का रंग उसमें घुला हुआ। रस की एक पतली बूँद उसकी जांघ से नीचे लुढ़क रही थी, और मोनू ने झुककर उसे जीभ से पकड़ लिया।
मोनू ने उसकी बाँह पकड़कर उसे झुकने का इशारा किया -- ठीक वैसे ही जैसे पहले उसने उसे कुतिया पोज़ में लिया था। कायला अब सीट पर झुकी हुई थी -- पीछे मोनू, और उसके सामने कायला की बड़ी, चौड़ी गांड... बीच में रस टपकाती चूत।
मोनू झुका -- उसकी जीभ सीधी कायला की चूत पर लगी।
एक लंबा, गीला, धीमी चटाई... ऊपर से नीचे तक।
"छुट्टी के बाद की चूत भी आज कॉलेज खुलवा रही है...", उसने मन में सोचा, होंठों के कोनों पर शरारती मुस्कान तैर गई।
कायला की उँगलियाँ सीट की पकड़ कसने लगीं -- एक धीमी "ह्म्म..." उसके गले से फिसली, जैसे कोई रुक-रुक कर साँस छोड़ रहा हो।
सनी रियरव्यू मिरर में झाँकते-झाँकते अब पैंट के अंदर हाथ घुसेड़ चुका था -- उसकी नज़र कायला की कांपती गांड पर अटक गई थी।
मोनू अब उसके कुल्हों को दोनों हाथों से भरके पकड़ चुका था --पहले चूत, फिर गोल-मोल कुल्हा, फिर बीच की दरार से जीभ फिसलती हुई गांड के छेद तक जा पहुँची।"अबे साली... यहाँ तक गीला है?" -- उसने हँसते हुए, जीभ के सिरे से छेद पर एक लंबी चटाई की ।
कायला के बदन में झटके उठे -- उसकी पीठ हल्की सिकुड़ गई, होंठ और कसकर भीच गए।गाड़ी अब सुनसान रास्ते पर पहुँच चुकी थी, तभी मोनू ने सनी को इशारा किया --"चल, पुराने सुनसान हाइवे पर ले चल... जहाँ कोई नहीं आता। आज वहीं जलाएँगे दीवाली की असली रौशनी।"
कार के मुड़ते ही बाहर का शोर गायब हो गया, बस इंजन की घरघराहट और कायला की भीगी सांसें बाकी रह गईं, अंदर का माहौल अब भाप से भी भारी था -- शीशे बंद, और हवा में कायला के पसीने, भीगी चूत और मोनू की साँसों का मिला-जुला नशा तैर रहा था।
पीछे की सीट पर कायला, आँखें बंद किए, अपना गरम, नंगा बदन पूरी रज़ामंदी के साथ मोनू की जीभ के नीचे रखे थी -- जैसे किसी को अपने अंदर जलाने का न्यौता दे रही हो।
शहर का शोर पीछे छूट चुका था।अब गाड़ी में सिर्फ तीन चीज़ें थीं -- कायला की चूत की भीगी महक, मोनू की गरम साँसें, और सनी की आँखों में जलती भूख।
मोनू झुका हुआ था -- उसकी जीभ कायला की चूत के भीगे होंठों से लेकर गांड के छेद तक हर इंच पर घूम रही थी, हर चटाई में उसकी लार और कायला का रस मिलकर गाढ़ा स्वाद बना रहे थे।
सनी मिरर से सब देख रहा था -- और उसके पायजामे के अंदर लंड ने पत्थर बनकर तंबू तान लिया था, नज़रों से कायला की फड़कती गांड हट ही नहीं रही थी।
एक लंबी चटाई के बाद...के बाद मोनू ने सिर उठाया -- उसकी ठुड्डी कायला के रस से चमक रही थी।उसने कायला को सीधा किया और उसकी आँखों में देखा -- वो आँखें भीगी हुईं, लेकिन उनमें ना शर्म थी, ना डर... बस प्यास और आदेश मानने की आदत।
मोनू ने धीरे-धीरे अपना कुर्ता उतारा... फिर पायजामा... और आख़िर में चड्डी नीचे खींच दी।अंदर से उसका मोटा, लंबा, नसों से भरा लंड बाहर आया -- पहले ही कायला की चूत देखकर सख़्त,गरम,और धड़कता हुआ।
मोनू (धीमे, गरम आवाज़ में): "अब, कुतिया... जैसे आँगन में चूस रही थी... वैसे ही कर।"
कायला ने बिना एक शब्द बोले उसकी नोक पर जीभ का गीला, धीमा चाट मारा -- फिर होंठ खोलकर पूरा लंड मुँह में भर लिया।
"श्लप... चप्प... ह्म्म... चप्प...!" लार की आवाज़ें अब कार के अंदर गूंजने लगीं -- उसका मुँह मोनू की जड़ों तक चला जाता, गाल अंदर धँसते, और आँखें ऊपर उठी रहतीं -- जैसे उसकी हर साँस मोनू की आँखों से बँधी हो।
मोनू की साँसें अब भारी हो रही थीं -- "हाआआ... ऐसे ही... सारा दूध खींच ले, साली..."
कायला बीच-बीच में लंड बाहर निकालती, जीभ से नोक पर गोल-गोल घुमाती, फिर एक झटके में गहराई तक ले जाती।
लार मोनू के लंड से टपककर उसकी जाँघों और सीट पर फैल रही थी -- गीली, गरम, और कायला के होंठों से टूटने को तैयार नहीं।
सनी ने अब गाड़ी को झाड़ियों वाले सुनसान रास्ते में मोड़ दिया -- ऐसा कोना जहाँ से रोड दिखता था, पर कोई उन्हें देख नहीं सकता था।
कार रुकते ही कायला का मुँह अब भी मोनू के लंड पर था -- मोनू हल्के झटकों से उसकी गर्दन को और अंदर धकेल रहा था।
सनी धीरे-धीरे कार से उतरा -- जैसे हर कदम में अपने लंड का बोझ महसूस कर रहा हो।उसने कुर्ता-पायजामा उतारा, और आख़िर में उसकी चड्डी और उसके हटते ही अंदर से बाहर आया लंबा,मोटा,नसों से भरा लंड -- जो कायला के गले की गहराई नापने को तैयार था।
सनी पूरी तरह नंगा हो गया --और अपने कपड़ों को कार में रखा।मोनू तो पहले से ही नंगा था, उसका लंड हवा में फड़क रहा था।
मोनू ने कायला के बाल पकड़कर उसे ऊपर खींचा -- और कार का दरवाज़ा खोलकर नीचे उतारा।अब कायला खुले आसमान के नीचे थी -- पूरी तरह नंगी, चूत और गांड से टपकती हुई, दोनों मर्दों के बीच में।
वो घुटनों के बल बैठी -- बायें तरफ मोनू, दायें तरफ सनी।
दोनों के लंड तने हुए, नसों से उभरे, गर्मी से धड़कते हुए, कायला के चेहरे के बिल्कुल पास।उसकी साँसें अब दोनों लंडों की गरम महक से भर रही थीं -- होंठों पर शरारती, भूखी मुस्कान तैर रही थी।
कायला ने पहले सनी का लंड पकड़ा -- गरम, मोटा, और हल्के से कांपता हुआ।उसने टिप पर जीभ का गोल चक्कर लगाया -- फिर होंठ फैलाकर पूरा लंड गले की गहराई तक उतार दिया।"ग्ल्प... श्लर्प... हाआआ..." -- उसके गले के अंदर लंड घुसने की आवाज़ कार के बाहर गूंज रही थी।
सनी की सांस अटक गई --"ओह्ह्ह... साली... पूरा गटक गई..."
कायला ने मुँह से लंड छोड़ा -- लार की पतली,चमकदार लकीर उसके होंठों से सनी के लंड तक लटक रही थी -- और अगले ही पल वो मोनू की तरफ झुकी।उसका लंड भी गहराई तक मुँह में भर लिया -- जड़ों तक ले जाकर हल्के झटके से छोड़ा, फिर फिर से अंदर।
अब वो बारी-बारी से दोनों का स्वाद ले रही थी --एक बार सनी, एक बार मोनू।उसकी लार और चूत का रस जैसे जीभ से बाहर बह रहा था, दोनों लंडों को चमका रहा था। कभी हल्की, गीली चटाई, कभी तेज़, गहरे ठोकर से गला भरना -- मोनू और सनी दोनों का दम घुट रहा था मज़े में।
मोनू ने कार का पिछला दरवाज़ा खोला -- आधा बैकसीट पर लेटकर बोला,"अब यहाँ आ..., गहराई तक चूस..."
कायला झुकी -- मोनू का मोटा, गरम लंड फिर से उसके मुँह में।उसके होंठ खिंचकर टाइट हो गए, गाल अंदर धँस गए, और आँखें ऊपर उठीं -- मोनू की सांसें अब भारी होने लगीं।
तभी पीछे से सनी आया -- बिना आवाज़ किए।उसने कायला की गांड दोनों हाथों से ऊपर उठाई, और कायला खुद ही अपना पिछला हिस्सा और ऊँचा कर दी।अब उसकी गांड हवा में थी, भीगी हुई चूत पूरी खुली, जैसे किसी को न्योता दे रही हो -- रस की पतली लकीर उसकी जाँघों से नीचे बह रही थी।
सनी ने कुछ नहीं कहा -- बस अपना गरम, धड़कता लंड सीधे चूत के मुँह पर रखा...और एक ही ठोकर में पूरा अंदर घुसा दिया।
"थप... छप... हाआआ... आह्ह्ह!"
भीगी चूत ने बिना रुकावट सनी को पूरा निगल लिया -- अंदर रस के साथ टाइट मांस की पकड़ उसकी जड़ों तक चिपक गई।
अब कायला की हालत --
मुँह में मोनू का मोटा, गर्म लंड...
चूत में सनी का गहरा, तेज़ ठोका...
दोनों तरफ से वो भर चुकी थी --उसकी टूटी-टूटी सिसकियाँ, थरथराता बदन, और ज़मीन पर टपकती लार गवाही दे रही थी कि आज उसकी देह पूरी तरह तोड़ी जा रही है।
मोनू ने बाल पकड़कर मुँह से लंड निकलवाया -- खुद उठकर गाड़ी के बाहर आया। सनी अब भी चूत में घुसा था, अपनी गांड हिलाते हुए अंदर को और खोल रहा था।
सनी का लंड तेजी से उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था, और उसी रफ़्तार से कायला अपना मुँह मोनू के लंड पर ऊपर-नीचे कर रही थी।
मोनू बोला --"रुक जा... अब मेरी बारी है इस कुतिया की चूत फाड़ने की।"
सनी रुक जाता है और एक आख़िरी झटका कायला की चूत में लगाता है, फिर लंड उसकी चूत से बाहर निकलता है -- लंड चूत के रस से चमक रहा है।
मोनू, कायला के बाल पकड़कर उसका मुँह लंड से हटाता है। और उसने कायला को बालों से पकड़कर ही गाड़ी के सामने ले जाता है, फिर हल्के गरम बोनट पर लिटा दिया। बोनट पर पीठ पड़ते ही 'चटाक' की आवाज़ आई -- गरम मेटल का झटका उसके बदन में उतर गया। कायला ने हल्की सिसकी भरी, आँखें बंद, जाँघें ढीली।
उसका बदन पसीने से भीगा हुआ -- भारी, झूलते दूध हर सांस पर काँप रहे थे। गांड लालिमा लिए उठी हुई, और चूत से अब भी गरम रस की धार बह रही थी। गरमी, लार, पसनीा और सेक्स की गंध ने पूरी हवा को गाढ़ा कर दिया था।
मोनू ने कायला की टाँगें दोनों तरफ से पकड़कर चौड़ा फैला दिया -- बोनट के किनारे से उसकी आधी गांड हवा में लटक रही थी, और बीच से रस की पतली, गरम धार टपककर बोनट पर चिपचिपी लकीर बना रही थी।
उसने अपना लंड कायला की चूत के मुँह पर रखा -- गरमी से भाप जैसी निकल रही थी -- और बिना इंतज़ार किए "ठप्!" की आवाज़ के साथ पूरा एक ही झटके में अंदर डाल दिया।
कायला की चीख गले से फिसलकर हवा में घुल गई -- "आह्ह्ह... हाआआ... हाआ...!"
उसके नाखून बोनट पर खुरच गए, पीठ नीचे गरम मेटल से चिपकी हुई, और ऊपर से मोनू का मोटा लंड उसकी गहराई में धड़क रहा था।
मोनू ने पकड़ मज़बूत की -- एक हाथ से उसकी टाँग उठाई, दूसरा हाथ उसकी गर्दन के पास दबाए रखा, और तेज़, गहरे ठोके मारने लगा।
"ठप... ठप... छप... ठप!" -- हर ठोका रस की आवाज़ के साथ टकरा रहा था।
कायला के दूध ऊपर-नीचे झूलते हुए मोनू के हाथ से टकरा रहे थे --उसकी साँसें टूट-टूटकर बाहर आ रही थीं, जैसे हर ठोके पर अंदर से कुछ और खुल रहा हो।
सनी, जो पास खड़ा था, उसकी गांड को नीचे से पकड़कर दबा रहा था, और हर ठोके पर मुस्कुराकर देख रहा था।उसने झुककर कायला के एक दूध को मुँह में ले लिया --"चुस्स्स... स्लर्प..." -- मोनू नीचे से ठोक रहा था, सनी ऊपर से चूस रहा था, और कायला बीच में आंखें बंद किए सिसक रही थी। वो उसके दूधू पे थूक के चाट रहा था ।
सनी उसकी छातियाँ दोनों हाथों में जकड़कर मसल रहा था, फिर झुककर दूध को मुँह में भर लेता है -- "चप... चप...", गरम साँसें उसके निप्पल को गीला कर रही थीं।मोनू के हर ठोके से सनी के मुँह में छातियाँ उछल रही थीं -- और सनी जैसे और भूखा हो रहा था।
सनी ऊपर से उसके दूध चूसते-चूसते अब नीचे सरका, और चूत के पास आकर थप्पड़ मारा।"चटाक!" कायला हल्की काँपी, मगर दोनों मर्दों के बीच पूरी तरह खुली पड़ी रही।
मोनू गरजकर बोला -- "ले साली... अब ये तेरी दिवाली का असली पटाखा फूटेगा!" और उसने ठोकों की रफ़्तार दोगुनी कर दी -- बोनट हिलने लगा, रस चारों तरफ फैल गया, और कायला का बदन काँपता हुआ सिसकियों में टूट रहा था।
मोनू का लंड कायला की चूत में धड़धड़ाते हुए घुस रहा था, जैसे हर झटके में उसके अंदर तक कोई हथौड़ा पड़ रहा हो।कायला की पीठ कार के बोनट से लगी थी, मोनू ने अब उसकी दोनों टाँगें पकड़ हवा में कर रखी थी -- और सनी उसकी छातियों को दोनों हाथों से जकड़े, बार-बार होंठों में दबाकर दूध खींच रहा था।
"चप... चप... ह्म्म..." -- सनी के मुँह और कायला के कराहने की आवाज़ें हवा में घुली थीं।
बोनेट पर मोनू की ठोकरें तेज़ हो चुकी थीं -- सनी ने झुककर उसके कान के पास कहा,"कुतिया, अब तुझे ऐसी जगह ले चलेंगे जहाँ तू साँस भी नहीं ले पाएगी..."उसने अपने हाथ से मोनू को इशारा किया।
मोनू ने बिना कुछ बोले लंड बाहर निकाला -- वो गीलेपन से चमक रहा था, नसें फूली हुईं। वो ड्राइवर सीट तक गया, चाबी घुमाई, और "टक... ठक..." की आवाज़ के साथ डिक्की खुल गई।
बोनट पर लेटी कायला अब भी हांफ रही थी, छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। सनी ने उसके बालों से पकड़कर ऊपर खींचा, मोनू ने कमर से थामा--दोनों के हाथ उसकी गांड और जाँघों के बीच खेलते रहे, चलते-चलते कभी थप्पड़, कभी उँगलियों का हल्का दबाव। दोनों मर्दों ने उसे सहारा दिया -- उसके पैर लड़खड़ा रहे थे, मगर उन्होंने उसे संभालकर डिक्की की तरफ़ ले जाया।
गाड़ी के औज़ार, टायर और हल्की सी धूल के बीच उसकी नंगी पीठ टिकाई गई -- ठंडे मेटल का स्पर्श और पसीने की गर्मी का मिलन उसे और सिहराने लगा।
बोनेट की गरमी से उसका बदन अब भी तपा हुआ था, और हवा लगते ही उसकी भीगी चूत में हल्की सिहरन दौड़ गई।गाड़ी के पीछे पहुँचते ही सनी ने एक हाथ से डिक्की का दरवाज़ा खोला। ढक्कन ऊपर उठा, और अंदर औज़ारों व टायर की गंध वाली, बंद जगह सामने आ गई।
उन्होंने उसे डिक्की में धकेल दिया--औज़ार, टायर और गर्द के बीच उसकी नंगी पीठ टिक गई।कायला अब किसी स्टेपनी की तरह फँसी थी--हर तरफ से भरने और ठोकने के लिए तैयार। उसकी चूत से पानी अब रुक नहीं रहा था, जाँघों के बीच बहकर कार के फर्श तक पहुँच रहा था।
"चल... अब यहाँ तेरा असली टेस्ट होगा..." सनी ने मुस्कुराकर कहा। मोनू ने हँसते हुए उसके बालों की एक लट खींची,"अब तू हमारी स्टेपनी है, कुतिया... ।" कायला की आँखों में कोई जवाब नहीं -- बस गहरी, भीगी प्यास।
सनी ने गाड़ी का ढक्कन को पकड़कर पूरा ऊपर उठाया, और अपने लंड को कायला की चूत के बिलकुल सामने एडजस्ट किया। एक धीमे धकेल के साथ, लंड ने गीली, गर्म राह को चीरते हुए अंदर अपना रास्ता बना लिया -- "थप... छप... थप......" की आवाज़ हर झटके के साथ गूँजने लगी।कायला की "आह... हह... हह..." हवा में गूंज रही थी, कमर हर वार के साथ झटके खा रही थी।
मोनू: "कायला... आज रात प्लान है। कोई बहाना बनाकर निकल लेना -- और इस बार सनी भी साथ रहेगा... मतलब दोनों मिलकर तेरी दीवाली जलाएँगे।"
उसके होंठों के किनारे हल्की मुस्कान तैर गई, जैसे किसी ने पहले से ही उसके भीतर की आग को पहचान लिया हो।कायला ने फोन काँधे से थामे रखा... झुकी ही रही, आवाज़ धीमी मगर बुझी नहीं।
कायला: "हम्म... ठीक है..."
उस एक "हम्म" में, एक पूरी रात की कराहें, आहें और गीलेपन का वादा छुपा था।
दिवाली की शाम
हर घर में रौशनी थी, लेकिन कुछ घरों के अंदर अंधेरा अब भी बदन में उतरने को तैयार था।
कायला ने अपने सफेद अनारकली सूट में खुद को तैयार किया -- अंदर वही बैंगनी ब्रा और चड्डी। ब्रा के टाइट हुक में दूध हल्के-हल्के उभर आए थे, और चड्डी का पतला कपड़ा उसकी भीगी चूत की दरार में हल्का-सा घुसकर चिपक गया था। नीचे चुस्त सफेद चूड़ीदार उसकी मोटी जाँघों से चिपका हुआ। बदन ढका हुआ था, लेकिन कपड़ों के नीचे गरमी की लहरें पहले से ही दौड़ रही थीं।
बाल सँवारते वक़्त उसकी उंगलियाँ हल्के-हल्के काँप रही थीं... नज़रें झुकी हुईं, मगर दिल की धड़कन ऊपर चढ़ी हुई। काजल की पतली लाइन आँखों में डाली, होंठों पर कुछ नहीं लगाया... फिर शीशे में अपनी ही आँखों में देखते हुए, हल्की सी मुस्कान के साथ जैसे खुद से कहा --
"आज तू फिर से चूसी जाएगी... और इस बार अकेले नहीं।"
सीने से लगती ब्रा के नीचे दूधों में हल्की सिहरन थी... अनारकली का कपड़ा उनकी लचक को महसूस कर रहा था। चुस्त चूड़ीदार के अंदर, चूत की गरमी धीरे-धीरे फैल रही थी, वहाँ हल्की नमी भी ... कपड़ा भीगने लगा था।
उसने जलता दिया उठाया और घर के बाहर रखे दीप सजाने लगी। हर बार जब वो झुकती,दुपट्टा गले से नीचे गिरकर उसके भरे दूधों के सिरों पर चिपक जाता, और हवा के हल्के झोंके में कपड़ा निप्पल की टिप पर कसने लगता। नीचे कपड़े की परतों के बीच से उसकी मोटी, भरी जाँघों की गरमी सीधी ऊपर उठ रही थी।
कायला के घर के सामने, सनी के घर के गेट पर मोनू और सनी खड़े थे। दोनों ने कुर्ता-पायजामा पहना था, लेकिन नज़रों में दीयों की चमक नहीं -- कायला के दूधों और गांड की गरमी थी। सनी की आँखें जैसे उसके हर कदम पर उसकी गांड के झटकों को माप रही थीं, और पायजामे के नीचे उसका उभार बढ़ता जा रहा था।
दिये रखकर वो अंदर आई और मिठाई की थाली उठाने लगी, फिर अपनी मम्मी से कहा --"मम्मी... गुलाब जामुन नहीं हैं मिठाई में। पापा शायद लाना भूल गए।"
मम्मी ने माथा सिकोड़ा,फिर उसने दीयों की एक थाली उठाई और एक कायला को दे दी और बाहर आँगन में निकलते हुए वह बोली -- अब क्या करूँ? तू एक काम कर... फिर बोलीं --"अरे वो तो दो घंटे बाद आएँगे पूजा से पहले... तू ही ले आ, अभी टाइम है।"
कायला ने सिर हिलाया, लेकिन अंदर की धड़कन और तेज़ हो गई, पेट में तितलियाँ उड़ने लगीं।
तभी मोनू और सनी सामने आ गए --मोनू, "नमस्ते आंटी, हैप्पी दिवाली!"
सनी, "हैप्पी दिवाली, आंटी!"
मम्मी मुस्कराकर बोलीं -- "हैप्पी दिवाली बेटा, कैसे हो तुम दोनों?"
दोनों: "बढ़िया हैं, आंटी।"
मोनू ने चालाकी से कहा --" आंटी क्या कायला, मिठाई लेने जा रही हैं क्या? हम भी जा रहे हैं, साथ ले आते हैं।"
मम्मी ने तुरंत हामी भर दी --"हाँ, चले जाओ बेटा... अभी पूजा में टाइम है।"
ये सुनते ही मोनू ने सनी को आँख मारी --"जा, कार निकाल ला फटाफट... आज की मिठाई गरम-गरम चाहिए।"
कायल़ा की मम्मी अंदर जाने लगती और बोलती हैं -- "कायल़ा, तू होके आ, मैं बाकी का काम देखती हूँ, ज्यादा कुछ बचा नहीं है।"
सनी कार लेने गया, तब मोनू कायला के कान के पास झुककर फुसफुसाया -- "थोड़ा धीरे चल... और गांड हिलाना मत भूल... सनी को मज़ा लेने दे पीछे से उसको भी पता चलना चाहिए तू क्या चीज़ है।"
उसकी गरम साँसें कायला की गर्दन से नीचे उतर रही थीं, जैसे कपड़ों के अंदर उसकी रीढ़ की हड्डी तक सरक रही हों।
कायला ने कुछ नहीं कहा... बस अपनी चाल थोड़ी धीमी कर दी। सफेद पायजामा हर क़दम पर उसकी गोल गांड से खिंचने लगा... चाल में हल्का झटका था -- और सनी की निगाह सीधी वहाँ अटक गई।
अब वो रंगोली वाली लड़की नहीं थी -- आज की रात दो लंडों की दीवाली बनने जा रही थी।
मोनू और कायला आगे चल रहे थे, सनी कार लेकर पीछे आ रहा था -- उसकी नजरें कायला की मटकती गांड पर जमी थीं।
सनी ने कार उनके पास रोकी। कायला अंदर बैठी -- पीछे की सीट पर, साथ में मोनू। सनी ड्राइविंग सीट पर। बैठते ही मोनू का हाथ उसके घुटने पर टिक गया,
और उंगलियाँ धीरे-धीरे पायजामे के कपड़े पर घूमने लगीं। कायला की सांसें तेज़ हो गईं, आँखें सड़क पर थीं लेकिन बदन पीछे की सीट पर कैद हो चुका था।
गाड़ी धीमे-धीमे आगे बढ़ी... मगर कायला की साँसें तेज़ हो गईं। वो जानती थी, ये रास्ता मिठाई की दुकान का नहीं -- ये चूत की थाली सजने का रास्ता था।
उसका दिल धड़क रहा था... मिठाई का रस तो बस बहाना था, आज उसकी चूत का असली प्रसाद चढ़ने वाला था।
गाड़ी कुछ ही दूरी चली थी... लेकिन शीशे बंद थे, और अंदर अब साँसें भारी हो चुकी थीं। कायला की चुस्त सफेद चूड़ीदार के नीचे उसकी मोटी जाँघें पसनीे से गीली थीं -- वहाँ से उठती गरमी अब पूरे कार में फैल रही थी, और मोनू की साँसों में घुल रही थी।
कार के अंदर हल्की-सी धुंध जमने लगी थी, और हवा में पसनीे, इत्र और भीगी चूत की मिली-जुली खुशबू तैर रही थी -- इतनी भारी कि सनी भी स्टीयरिंग पर उंगलियां कसने लगा।
मोनू (हल्की मुस्कान के साथ, आँखें कायला के बदन पर गड़ाए): "कायला... मिठाई तो हमारे पास पहले से है... अब तो बस
टेस्ट लेना बाकी है।"
कायला ने सिर झुका लिया, मगर उसकी उँगलियाँ सीट की कुंडी कसने लगीं -- जैसे चुपचाप कह रही हों, "अब और मत रुकाओ।" वो पहले भी मोनू के लंड का मज़ा ले चुकी थी... और जानती थी कि अब जो होने वाला है, वो सीधा उसकी रगों में उतर जाएगा।
उसकी जाँघें हल्के-हल्के आपस में रगड़ने लगीं, जैसे लंड के लिए जगह तैयार कर रही हों।
मोनू ने सीट से झुककर हाथ बढ़ाया -- धीरे से उसकी अनारकली को नीचे से पकड़ा और ऊपर की ओर सरकाया। कायला ने कुछ नहीं कहा... बस आँखें आधी मूँद लीं और हाथ ऊपर कर दिए, जैसे खुद अपने कपड़े से जुदा होने की इजाज़त दे रही हो।
अनारकली अलग हुई, तो मोनू की नज़रें सीधे बैंगनी ब्रा पर पड़ीं। उसने कायला को हल्का सा अपने तरफ घुमाया... उसकी गोरी पीठ पर ब्रा का पतला सा स्ट्रैप था। 'क्लिक' -- दोनों हाथों से मोनू ने स्ट्रैप खोला, और ब्रा पैरों तक आकर रुक गई।
उसने उसके निप्पलों को दोनों अंगूठों से दबाया, हल्का घुमाया, और फिर एक पर होंठ रखकर उसे गर्म-गर्म चूस लिया -- कायला के मुँह से हल्की सिसकारी निकली।
अब कायला के दूध खुले थे -- गुलाबी, तने हुए, जैसे किसी को बुला रहे हों कि आ, चूस के सारा रस पी जा। उसकी साँसें और तेज़ थीं, होंठ हल्के काँप रहे थे।
मोनू ने उसका दुपट्टा, चूड़ीदार और अनारकली एक तरफ संभाल कर रख दिया -- ताकि बाद में पहनने में परेशानी न हो। अब बस बैंगनी चड्डी बाकी थी -- चिपकी हुई, भीगी हुई, गांड और चूत के हर कर्व को जकड़े हुए।
मोनू ने बिना एक पल गँवाए चड्डी भी नीचे खींच दी। कायला अब पीछे की सीट पर पूरी नंगी थी। उसकी चूत हल्की खुली थी -- नमी और गरमी का रंग उसमें घुला हुआ। रस की एक पतली बूँद उसकी जांघ से नीचे लुढ़क रही थी, और मोनू ने झुककर उसे जीभ से पकड़ लिया।
मोनू ने उसकी बाँह पकड़कर उसे झुकने का इशारा किया -- ठीक वैसे ही जैसे पहले उसने उसे कुतिया पोज़ में लिया था। कायला अब सीट पर झुकी हुई थी -- पीछे मोनू, और उसके सामने कायला की बड़ी, चौड़ी गांड... बीच में रस टपकाती चूत।
मोनू झुका -- उसकी जीभ सीधी कायला की चूत पर लगी।
एक लंबा, गीला, धीमी चटाई... ऊपर से नीचे तक।
"छुट्टी के बाद की चूत भी आज कॉलेज खुलवा रही है...", उसने मन में सोचा, होंठों के कोनों पर शरारती मुस्कान तैर गई।
कायला की उँगलियाँ सीट की पकड़ कसने लगीं -- एक धीमी "ह्म्म..." उसके गले से फिसली, जैसे कोई रुक-रुक कर साँस छोड़ रहा हो।
सनी रियरव्यू मिरर में झाँकते-झाँकते अब पैंट के अंदर हाथ घुसेड़ चुका था -- उसकी नज़र कायला की कांपती गांड पर अटक गई थी।
मोनू अब उसके कुल्हों को दोनों हाथों से भरके पकड़ चुका था --पहले चूत, फिर गोल-मोल कुल्हा, फिर बीच की दरार से जीभ फिसलती हुई गांड के छेद तक जा पहुँची।"अबे साली... यहाँ तक गीला है?" -- उसने हँसते हुए, जीभ के सिरे से छेद पर एक लंबी चटाई की ।
कायला के बदन में झटके उठे -- उसकी पीठ हल्की सिकुड़ गई, होंठ और कसकर भीच गए।गाड़ी अब सुनसान रास्ते पर पहुँच चुकी थी, तभी मोनू ने सनी को इशारा किया --"चल, पुराने सुनसान हाइवे पर ले चल... जहाँ कोई नहीं आता। आज वहीं जलाएँगे दीवाली की असली रौशनी।"
कार के मुड़ते ही बाहर का शोर गायब हो गया, बस इंजन की घरघराहट और कायला की भीगी सांसें बाकी रह गईं, अंदर का माहौल अब भाप से भी भारी था -- शीशे बंद, और हवा में कायला के पसीने, भीगी चूत और मोनू की साँसों का मिला-जुला नशा तैर रहा था।
पीछे की सीट पर कायला, आँखें बंद किए, अपना गरम, नंगा बदन पूरी रज़ामंदी के साथ मोनू की जीभ के नीचे रखे थी -- जैसे किसी को अपने अंदर जलाने का न्यौता दे रही हो।
शहर का शोर पीछे छूट चुका था।अब गाड़ी में सिर्फ तीन चीज़ें थीं -- कायला की चूत की भीगी महक, मोनू की गरम साँसें, और सनी की आँखों में जलती भूख।
मोनू झुका हुआ था -- उसकी जीभ कायला की चूत के भीगे होंठों से लेकर गांड के छेद तक हर इंच पर घूम रही थी, हर चटाई में उसकी लार और कायला का रस मिलकर गाढ़ा स्वाद बना रहे थे।
सनी मिरर से सब देख रहा था -- और उसके पायजामे के अंदर लंड ने पत्थर बनकर तंबू तान लिया था, नज़रों से कायला की फड़कती गांड हट ही नहीं रही थी।
एक लंबी चटाई के बाद...के बाद मोनू ने सिर उठाया -- उसकी ठुड्डी कायला के रस से चमक रही थी।उसने कायला को सीधा किया और उसकी आँखों में देखा -- वो आँखें भीगी हुईं, लेकिन उनमें ना शर्म थी, ना डर... बस प्यास और आदेश मानने की आदत।
मोनू ने धीरे-धीरे अपना कुर्ता उतारा... फिर पायजामा... और आख़िर में चड्डी नीचे खींच दी।अंदर से उसका मोटा, लंबा, नसों से भरा लंड बाहर आया -- पहले ही कायला की चूत देखकर सख़्त,गरम,और धड़कता हुआ।
मोनू (धीमे, गरम आवाज़ में): "अब, कुतिया... जैसे आँगन में चूस रही थी... वैसे ही कर।"
कायला ने बिना एक शब्द बोले उसकी नोक पर जीभ का गीला, धीमा चाट मारा -- फिर होंठ खोलकर पूरा लंड मुँह में भर लिया।
"श्लप... चप्प... ह्म्म... चप्प...!" लार की आवाज़ें अब कार के अंदर गूंजने लगीं -- उसका मुँह मोनू की जड़ों तक चला जाता, गाल अंदर धँसते, और आँखें ऊपर उठी रहतीं -- जैसे उसकी हर साँस मोनू की आँखों से बँधी हो।
मोनू की साँसें अब भारी हो रही थीं -- "हाआआ... ऐसे ही... सारा दूध खींच ले, साली..."
कायला बीच-बीच में लंड बाहर निकालती, जीभ से नोक पर गोल-गोल घुमाती, फिर एक झटके में गहराई तक ले जाती।
लार मोनू के लंड से टपककर उसकी जाँघों और सीट पर फैल रही थी -- गीली, गरम, और कायला के होंठों से टूटने को तैयार नहीं।
सनी ने अब गाड़ी को झाड़ियों वाले सुनसान रास्ते में मोड़ दिया -- ऐसा कोना जहाँ से रोड दिखता था, पर कोई उन्हें देख नहीं सकता था।
कार रुकते ही कायला का मुँह अब भी मोनू के लंड पर था -- मोनू हल्के झटकों से उसकी गर्दन को और अंदर धकेल रहा था।
सनी धीरे-धीरे कार से उतरा -- जैसे हर कदम में अपने लंड का बोझ महसूस कर रहा हो।उसने कुर्ता-पायजामा उतारा, और आख़िर में उसकी चड्डी और उसके हटते ही अंदर से बाहर आया लंबा,मोटा,नसों से भरा लंड -- जो कायला के गले की गहराई नापने को तैयार था।
सनी पूरी तरह नंगा हो गया --और अपने कपड़ों को कार में रखा।मोनू तो पहले से ही नंगा था, उसका लंड हवा में फड़क रहा था।
मोनू ने कायला के बाल पकड़कर उसे ऊपर खींचा -- और कार का दरवाज़ा खोलकर नीचे उतारा।अब कायला खुले आसमान के नीचे थी -- पूरी तरह नंगी, चूत और गांड से टपकती हुई, दोनों मर्दों के बीच में।
वो घुटनों के बल बैठी -- बायें तरफ मोनू, दायें तरफ सनी।
दोनों के लंड तने हुए, नसों से उभरे, गर्मी से धड़कते हुए, कायला के चेहरे के बिल्कुल पास।उसकी साँसें अब दोनों लंडों की गरम महक से भर रही थीं -- होंठों पर शरारती, भूखी मुस्कान तैर रही थी।
कायला ने पहले सनी का लंड पकड़ा -- गरम, मोटा, और हल्के से कांपता हुआ।उसने टिप पर जीभ का गोल चक्कर लगाया -- फिर होंठ फैलाकर पूरा लंड गले की गहराई तक उतार दिया।"ग्ल्प... श्लर्प... हाआआ..." -- उसके गले के अंदर लंड घुसने की आवाज़ कार के बाहर गूंज रही थी।
सनी की सांस अटक गई --"ओह्ह्ह... साली... पूरा गटक गई..."
कायला ने मुँह से लंड छोड़ा -- लार की पतली,चमकदार लकीर उसके होंठों से सनी के लंड तक लटक रही थी -- और अगले ही पल वो मोनू की तरफ झुकी।उसका लंड भी गहराई तक मुँह में भर लिया -- जड़ों तक ले जाकर हल्के झटके से छोड़ा, फिर फिर से अंदर।
अब वो बारी-बारी से दोनों का स्वाद ले रही थी --एक बार सनी, एक बार मोनू।उसकी लार और चूत का रस जैसे जीभ से बाहर बह रहा था, दोनों लंडों को चमका रहा था। कभी हल्की, गीली चटाई, कभी तेज़, गहरे ठोकर से गला भरना -- मोनू और सनी दोनों का दम घुट रहा था मज़े में।
मोनू ने कार का पिछला दरवाज़ा खोला -- आधा बैकसीट पर लेटकर बोला,"अब यहाँ आ..., गहराई तक चूस..."
कायला झुकी -- मोनू का मोटा, गरम लंड फिर से उसके मुँह में।उसके होंठ खिंचकर टाइट हो गए, गाल अंदर धँस गए, और आँखें ऊपर उठीं -- मोनू की सांसें अब भारी होने लगीं।
तभी पीछे से सनी आया -- बिना आवाज़ किए।उसने कायला की गांड दोनों हाथों से ऊपर उठाई, और कायला खुद ही अपना पिछला हिस्सा और ऊँचा कर दी।अब उसकी गांड हवा में थी, भीगी हुई चूत पूरी खुली, जैसे किसी को न्योता दे रही हो -- रस की पतली लकीर उसकी जाँघों से नीचे बह रही थी।
सनी ने कुछ नहीं कहा -- बस अपना गरम, धड़कता लंड सीधे चूत के मुँह पर रखा...और एक ही ठोकर में पूरा अंदर घुसा दिया।
"थप... छप... हाआआ... आह्ह्ह!"
भीगी चूत ने बिना रुकावट सनी को पूरा निगल लिया -- अंदर रस के साथ टाइट मांस की पकड़ उसकी जड़ों तक चिपक गई।
अब कायला की हालत --
मुँह में मोनू का मोटा, गर्म लंड...
चूत में सनी का गहरा, तेज़ ठोका...
दोनों तरफ से वो भर चुकी थी --उसकी टूटी-टूटी सिसकियाँ, थरथराता बदन, और ज़मीन पर टपकती लार गवाही दे रही थी कि आज उसकी देह पूरी तरह तोड़ी जा रही है।
मोनू ने बाल पकड़कर मुँह से लंड निकलवाया -- खुद उठकर गाड़ी के बाहर आया। सनी अब भी चूत में घुसा था, अपनी गांड हिलाते हुए अंदर को और खोल रहा था।
सनी का लंड तेजी से उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था, और उसी रफ़्तार से कायला अपना मुँह मोनू के लंड पर ऊपर-नीचे कर रही थी।
मोनू बोला --"रुक जा... अब मेरी बारी है इस कुतिया की चूत फाड़ने की।"
सनी रुक जाता है और एक आख़िरी झटका कायला की चूत में लगाता है, फिर लंड उसकी चूत से बाहर निकलता है -- लंड चूत के रस से चमक रहा है।
मोनू, कायला के बाल पकड़कर उसका मुँह लंड से हटाता है। और उसने कायला को बालों से पकड़कर ही गाड़ी के सामने ले जाता है, फिर हल्के गरम बोनट पर लिटा दिया। बोनट पर पीठ पड़ते ही 'चटाक' की आवाज़ आई -- गरम मेटल का झटका उसके बदन में उतर गया। कायला ने हल्की सिसकी भरी, आँखें बंद, जाँघें ढीली।
उसका बदन पसीने से भीगा हुआ -- भारी, झूलते दूध हर सांस पर काँप रहे थे। गांड लालिमा लिए उठी हुई, और चूत से अब भी गरम रस की धार बह रही थी। गरमी, लार, पसनीा और सेक्स की गंध ने पूरी हवा को गाढ़ा कर दिया था।
मोनू ने कायला की टाँगें दोनों तरफ से पकड़कर चौड़ा फैला दिया -- बोनट के किनारे से उसकी आधी गांड हवा में लटक रही थी, और बीच से रस की पतली, गरम धार टपककर बोनट पर चिपचिपी लकीर बना रही थी।
उसने अपना लंड कायला की चूत के मुँह पर रखा -- गरमी से भाप जैसी निकल रही थी -- और बिना इंतज़ार किए "ठप्!" की आवाज़ के साथ पूरा एक ही झटके में अंदर डाल दिया।
कायला की चीख गले से फिसलकर हवा में घुल गई -- "आह्ह्ह... हाआआ... हाआ...!"
उसके नाखून बोनट पर खुरच गए, पीठ नीचे गरम मेटल से चिपकी हुई, और ऊपर से मोनू का मोटा लंड उसकी गहराई में धड़क रहा था।
मोनू ने पकड़ मज़बूत की -- एक हाथ से उसकी टाँग उठाई, दूसरा हाथ उसकी गर्दन के पास दबाए रखा, और तेज़, गहरे ठोके मारने लगा।
"ठप... ठप... छप... ठप!" -- हर ठोका रस की आवाज़ के साथ टकरा रहा था।
कायला के दूध ऊपर-नीचे झूलते हुए मोनू के हाथ से टकरा रहे थे --उसकी साँसें टूट-टूटकर बाहर आ रही थीं, जैसे हर ठोके पर अंदर से कुछ और खुल रहा हो।
सनी, जो पास खड़ा था, उसकी गांड को नीचे से पकड़कर दबा रहा था, और हर ठोके पर मुस्कुराकर देख रहा था।उसने झुककर कायला के एक दूध को मुँह में ले लिया --"चुस्स्स... स्लर्प..." -- मोनू नीचे से ठोक रहा था, सनी ऊपर से चूस रहा था, और कायला बीच में आंखें बंद किए सिसक रही थी। वो उसके दूधू पे थूक के चाट रहा था ।
सनी उसकी छातियाँ दोनों हाथों में जकड़कर मसल रहा था, फिर झुककर दूध को मुँह में भर लेता है -- "चप... चप...", गरम साँसें उसके निप्पल को गीला कर रही थीं।मोनू के हर ठोके से सनी के मुँह में छातियाँ उछल रही थीं -- और सनी जैसे और भूखा हो रहा था।
सनी ऊपर से उसके दूध चूसते-चूसते अब नीचे सरका, और चूत के पास आकर थप्पड़ मारा।"चटाक!" कायला हल्की काँपी, मगर दोनों मर्दों के बीच पूरी तरह खुली पड़ी रही।
मोनू गरजकर बोला -- "ले साली... अब ये तेरी दिवाली का असली पटाखा फूटेगा!" और उसने ठोकों की रफ़्तार दोगुनी कर दी -- बोनट हिलने लगा, रस चारों तरफ फैल गया, और कायला का बदन काँपता हुआ सिसकियों में टूट रहा था।
मोनू का लंड कायला की चूत में धड़धड़ाते हुए घुस रहा था, जैसे हर झटके में उसके अंदर तक कोई हथौड़ा पड़ रहा हो।कायला की पीठ कार के बोनट से लगी थी, मोनू ने अब उसकी दोनों टाँगें पकड़ हवा में कर रखी थी -- और सनी उसकी छातियों को दोनों हाथों से जकड़े, बार-बार होंठों में दबाकर दूध खींच रहा था।
"चप... चप... ह्म्म..." -- सनी के मुँह और कायला के कराहने की आवाज़ें हवा में घुली थीं।
बोनेट पर मोनू की ठोकरें तेज़ हो चुकी थीं -- सनी ने झुककर उसके कान के पास कहा,"कुतिया, अब तुझे ऐसी जगह ले चलेंगे जहाँ तू साँस भी नहीं ले पाएगी..."उसने अपने हाथ से मोनू को इशारा किया।
मोनू ने बिना कुछ बोले लंड बाहर निकाला -- वो गीलेपन से चमक रहा था, नसें फूली हुईं। वो ड्राइवर सीट तक गया, चाबी घुमाई, और "टक... ठक..." की आवाज़ के साथ डिक्की खुल गई।
बोनट पर लेटी कायला अब भी हांफ रही थी, छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। सनी ने उसके बालों से पकड़कर ऊपर खींचा, मोनू ने कमर से थामा--दोनों के हाथ उसकी गांड और जाँघों के बीच खेलते रहे, चलते-चलते कभी थप्पड़, कभी उँगलियों का हल्का दबाव। दोनों मर्दों ने उसे सहारा दिया -- उसके पैर लड़खड़ा रहे थे, मगर उन्होंने उसे संभालकर डिक्की की तरफ़ ले जाया।
गाड़ी के औज़ार, टायर और हल्की सी धूल के बीच उसकी नंगी पीठ टिकाई गई -- ठंडे मेटल का स्पर्श और पसीने की गर्मी का मिलन उसे और सिहराने लगा।
बोनेट की गरमी से उसका बदन अब भी तपा हुआ था, और हवा लगते ही उसकी भीगी चूत में हल्की सिहरन दौड़ गई।गाड़ी के पीछे पहुँचते ही सनी ने एक हाथ से डिक्की का दरवाज़ा खोला। ढक्कन ऊपर उठा, और अंदर औज़ारों व टायर की गंध वाली, बंद जगह सामने आ गई।
उन्होंने उसे डिक्की में धकेल दिया--औज़ार, टायर और गर्द के बीच उसकी नंगी पीठ टिक गई।कायला अब किसी स्टेपनी की तरह फँसी थी--हर तरफ से भरने और ठोकने के लिए तैयार। उसकी चूत से पानी अब रुक नहीं रहा था, जाँघों के बीच बहकर कार के फर्श तक पहुँच रहा था।
"चल... अब यहाँ तेरा असली टेस्ट होगा..." सनी ने मुस्कुराकर कहा। मोनू ने हँसते हुए उसके बालों की एक लट खींची,"अब तू हमारी स्टेपनी है, कुतिया... ।" कायला की आँखों में कोई जवाब नहीं -- बस गहरी, भीगी प्यास।
सनी ने गाड़ी का ढक्कन को पकड़कर पूरा ऊपर उठाया, और अपने लंड को कायला की चूत के बिलकुल सामने एडजस्ट किया। एक धीमे धकेल के साथ, लंड ने गीली, गर्म राह को चीरते हुए अंदर अपना रास्ता बना लिया -- "थप... छप... थप......" की आवाज़ हर झटके के साथ गूँजने लगी।कायला की "आह... हह... हह..." हवा में गूंज रही थी, कमर हर वार के साथ झटके खा रही थी।


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