14-02-2026, 01:44 PM
शिवानी और प्रिंस मुंबई के उस छोटे से किराए के फ्लैट में 6 साल तक रहे। 1BHK – दीवारों पर नमी, रसोई में जगह नहीं, और बच्चों के लिए एक छोटा सा कोना। आरव 13 साल का था जब वो फ्लैट में आए थे – अब 19 साल का हो चुका था। आराध्या 7 से 13 साल की हो गई। शिवानी 32 से 38 साल की, प्रिंस 34 से 40 साल का। ये 6 साल उनके लिए नर्क जैसे थे – लेकिन इसी नर्क में उन्होंने खुद को फिर से बनाया।
शुरुआत में शिवानी का डिप्रेशन गहरा था। वो दिनभर बिस्तर पर रहती, खाना नहीं खाती। प्रिंस बाहर काम करता – कभी टैक्सी, कभी डिलीवरी, कभी छोटे-मोटे रियल एस्टेट ब्रोकरेज। लेकिन काला खान की साजिशों ने उसके नाम पर ब्लैकलिस्ट करवा दिया था – कोई बड़ा क्लाइंट नहीं देता। कर्ज 300 करोड़ तक पहुँच गया। बैंक की नोटिसें आतीं, फोन आते – “प्रॉपर्टी जब्त होगी।” प्रिंस रात को घर लौटता, शिवानी के पास लेटता और कहता, “जान… हम फिर उठेंगे।” लेकिन शिवानी की आँखें खाली थीं।
फिर शिवानी ने फैसला किया – वो अब चुप नहीं बैठेगी। वो प्राइवेट पार्टियों में जाने लगी – हाई-प्रोफाइल, अमीर लोगों की। वहाँ वो पैसा कमाती – कभी 50 हजार, कभी 1 लाख डॉलर। वो अब “शिवानी” नहीं – “रानी” बन गई थी। फैंस और अमीर लोग उसे बुलाते – “रानी जी… आज रात मेरे साथ?” शिवानी जाती – क्योंकि कर्ज चुकाना था, बच्चों की फीस भरनी थी, घर का किराया देना था। वो हर पार्टी में जाती – कभी अकेली, कभी प्रिंस के साथ। प्रिंस अब कुकॉल्ड बन चुका था – वो देखता, और उसे मजा आता। लेकिन शिवानी के लिए ये मजा नहीं – ये जरूरत थी। वो रात को घर लौटती, बच्चों को सोते देखती, और रोती – “मैंने क्या कर दिया बच्चों के साथ?”
प्रिंस ने धीरे-धीरे बिजनेस शुरू किया। एक पुराने दोस्त ने छोटा लोन दिया – 20 लाख। प्रिंस ने पटना में छोटे फ्लैट्स बनाने शुरू किए – 2-3 प्रोजेक्ट्स। वो खुद मजदूरों के साथ काम करता – सुबह 6 से रात 10 तक। धीरे-धीरे प्रोजेक्ट्स बढ़े – 5 करोड़, 10 करोड़। कर्ज कम होने लगा – 300 से 250, फिर 200 करोड़। शिवानी की कमाई से भी कर्ज चुकता रहा। वो अब हफ्ते में 2-3 पार्टियां करती – अमीर लोग, सेलिब्रिटी, विदेशी। वो अब “फुल स्लट” बन चुकी थी – लेकिन ये उसकी पसंद नहीं – ये मजबूरी थी। वो बच्चों से कहती – “मम्मी काम करती है… तुम्हारे लिए।”
आरव अब 19 साल का – कॉलेज में था। वो माँ की जिंदगी देखता – पार्टी से लौटती, थकी हुई, लेकिन पैसे लाती। वो गुस्से से भर जाता – “मम्मी… आप ये क्यों करती हैं?” शिवानी रोती – “बेटा… कर्ज चुकाना है… तुम्हारी पढ़ाई… तुम्हारा भविष्य…” आरव चिल्लाता – “मैं नहीं चाहता आपकी कमाई से पढ़ूँ!” वो घर छोड़कर चला गया – एक दोस्त के पास रहने लगा। शिवानी टूट गई – “प्रिंस… मेरा बेटा… मुझसे नफरत कर रहा है।”
आराध्या अब 13 साल की – वो माँ को समझती थी। वो कहती – “मम्मी… मैं जानती हूँ आप हमारे लिए सब कर रही हो। मैं आपको प्यार करती हूँ।” शिवानी उसे गले लगाती – “बेटी… तू मेरी ताकत है।”
6 साल बीत गए। प्रिंस का बिजनेस धीरे-धीरे उभरा – अब वो 50 करोड़ का टर्नओवर कर रहा था। छोटे प्रोजेक्ट्स से बड़ा बन गया। कर्ज 300 से घटकर 80 करोड़ रह गया। शिवानी की कमाई से भी बहुत कर्ज चुक गया। वो अब पार्टियों में कम जाती – लेकिन जब जाती तो अच्छा पैसा लाती।
एक दिन शिवानी को एक बड़ा ऑफर मिला – एक नई एडल्ट फिल्म। प्रोड्यूसर ने कहा – “शिवानी… तुम्हारी वापसी। 10 करोड़ फीस। बोल्ड सीन – लेकिन स्टोरी मजबूत।” शिवानी ने सोचा – “ये आखिरी बार… कर्ज पूरा चुकाने के लिए।” उसने साइन कर दिया। फिल्म रिलीज हुई – सुपरहिट। 200 करोड़ कमाई। शिवानी फिर स्टार बन गई। कर्ज पूरा हो गया। प्रिंस का बिजनेस अब 100 करोड़ का टर्नओवर कर रहा था। उन्होंने मुंबई में नया घर लिया – बड़ा, लग्जरी।
आरव वापस आया – “मम्मी… मैं समझ गया। आपने हमारे लिए सब किया।” आराध्या ने कहा, “मम्मी… आप सबसे मजबूत हो।” शिवानी ने बच्चों को गले लगाया – “हम सब मिलकर लड़ेंगे।”
शिवानी अब स्टार थी – लेकिन अब वो अपनी शर्तों पर।
शुरुआत में शिवानी का डिप्रेशन गहरा था। वो दिनभर बिस्तर पर रहती, खाना नहीं खाती। प्रिंस बाहर काम करता – कभी टैक्सी, कभी डिलीवरी, कभी छोटे-मोटे रियल एस्टेट ब्रोकरेज। लेकिन काला खान की साजिशों ने उसके नाम पर ब्लैकलिस्ट करवा दिया था – कोई बड़ा क्लाइंट नहीं देता। कर्ज 300 करोड़ तक पहुँच गया। बैंक की नोटिसें आतीं, फोन आते – “प्रॉपर्टी जब्त होगी।” प्रिंस रात को घर लौटता, शिवानी के पास लेटता और कहता, “जान… हम फिर उठेंगे।” लेकिन शिवानी की आँखें खाली थीं।
फिर शिवानी ने फैसला किया – वो अब चुप नहीं बैठेगी। वो प्राइवेट पार्टियों में जाने लगी – हाई-प्रोफाइल, अमीर लोगों की। वहाँ वो पैसा कमाती – कभी 50 हजार, कभी 1 लाख डॉलर। वो अब “शिवानी” नहीं – “रानी” बन गई थी। फैंस और अमीर लोग उसे बुलाते – “रानी जी… आज रात मेरे साथ?” शिवानी जाती – क्योंकि कर्ज चुकाना था, बच्चों की फीस भरनी थी, घर का किराया देना था। वो हर पार्टी में जाती – कभी अकेली, कभी प्रिंस के साथ। प्रिंस अब कुकॉल्ड बन चुका था – वो देखता, और उसे मजा आता। लेकिन शिवानी के लिए ये मजा नहीं – ये जरूरत थी। वो रात को घर लौटती, बच्चों को सोते देखती, और रोती – “मैंने क्या कर दिया बच्चों के साथ?”
प्रिंस ने धीरे-धीरे बिजनेस शुरू किया। एक पुराने दोस्त ने छोटा लोन दिया – 20 लाख। प्रिंस ने पटना में छोटे फ्लैट्स बनाने शुरू किए – 2-3 प्रोजेक्ट्स। वो खुद मजदूरों के साथ काम करता – सुबह 6 से रात 10 तक। धीरे-धीरे प्रोजेक्ट्स बढ़े – 5 करोड़, 10 करोड़। कर्ज कम होने लगा – 300 से 250, फिर 200 करोड़। शिवानी की कमाई से भी कर्ज चुकता रहा। वो अब हफ्ते में 2-3 पार्टियां करती – अमीर लोग, सेलिब्रिटी, विदेशी। वो अब “फुल स्लट” बन चुकी थी – लेकिन ये उसकी पसंद नहीं – ये मजबूरी थी। वो बच्चों से कहती – “मम्मी काम करती है… तुम्हारे लिए।”
आरव अब 19 साल का – कॉलेज में था। वो माँ की जिंदगी देखता – पार्टी से लौटती, थकी हुई, लेकिन पैसे लाती। वो गुस्से से भर जाता – “मम्मी… आप ये क्यों करती हैं?” शिवानी रोती – “बेटा… कर्ज चुकाना है… तुम्हारी पढ़ाई… तुम्हारा भविष्य…” आरव चिल्लाता – “मैं नहीं चाहता आपकी कमाई से पढ़ूँ!” वो घर छोड़कर चला गया – एक दोस्त के पास रहने लगा। शिवानी टूट गई – “प्रिंस… मेरा बेटा… मुझसे नफरत कर रहा है।”
आराध्या अब 13 साल की – वो माँ को समझती थी। वो कहती – “मम्मी… मैं जानती हूँ आप हमारे लिए सब कर रही हो। मैं आपको प्यार करती हूँ।” शिवानी उसे गले लगाती – “बेटी… तू मेरी ताकत है।”
6 साल बीत गए। प्रिंस का बिजनेस धीरे-धीरे उभरा – अब वो 50 करोड़ का टर्नओवर कर रहा था। छोटे प्रोजेक्ट्स से बड़ा बन गया। कर्ज 300 से घटकर 80 करोड़ रह गया। शिवानी की कमाई से भी बहुत कर्ज चुक गया। वो अब पार्टियों में कम जाती – लेकिन जब जाती तो अच्छा पैसा लाती।
एक दिन शिवानी को एक बड़ा ऑफर मिला – एक नई एडल्ट फिल्म। प्रोड्यूसर ने कहा – “शिवानी… तुम्हारी वापसी। 10 करोड़ फीस। बोल्ड सीन – लेकिन स्टोरी मजबूत।” शिवानी ने सोचा – “ये आखिरी बार… कर्ज पूरा चुकाने के लिए।” उसने साइन कर दिया। फिल्म रिलीज हुई – सुपरहिट। 200 करोड़ कमाई। शिवानी फिर स्टार बन गई। कर्ज पूरा हो गया। प्रिंस का बिजनेस अब 100 करोड़ का टर्नओवर कर रहा था। उन्होंने मुंबई में नया घर लिया – बड़ा, लग्जरी।
आरव वापस आया – “मम्मी… मैं समझ गया। आपने हमारे लिए सब किया।” आराध्या ने कहा, “मम्मी… आप सबसे मजबूत हो।” शिवानी ने बच्चों को गले लगाया – “हम सब मिलकर लड़ेंगे।”
शिवानी अब स्टार थी – लेकिन अब वो अपनी शर्तों पर।


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