14-02-2026, 01:33 PM
आराध्या अब 8 साल की हो चुकी थी – कॉलेज में अच्छी थी, लेकिन घर की हालत देखकर चुप रहती। आरव 14 साल का – किशोरावस्था में, गुस्सैल, और माँ-बाप की लड़ाइयों से तंग। मुंबई का छोटा सा किराए का फ्लैट अब परिवार का जेल बन चुका था। प्रिंस का बिजनेस धीरे-धीरे उभर रहा था – छोटे प्रोजेक्ट्स से 2-3 लाख महीना आ रहा था, लेकिन कर्ज अभी भी 180 करोड़ था। शिवानी की एडल्ट फिल्म ‘नाइट ऑफ डिजायर’ की सुपरहिट सफलता ने कुछ पैसा दिया था – लेकिन वो पैसा कर्ज चुकाने में चला गया। शिवानी अब घर पर रहती – छोटे-मोटे काम करती, बच्चों को पढ़ाती, लेकिन उसकी आँखों में अब भी वो पुरानी चमक नहीं थी।
एक शाम प्रिंस घर लौटा – थका हुआ, लेकिन चेहरे पर मुस्कान। “जान… आज एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला। 5 करोड़ का। 6 महीने में पूरा होगा।” शिवानी ने हँसने की कोशिश की – “बहुत अच्छा… लेकिन कर्ज कब चुकाएँगे?” प्रिंस ने कहा, “धीरे-धीरे… सब ठीक हो जाएगा।” लेकिन आरव ने सुना – वो गुस्से से बोला, “पापा… आप हमेशा यही कहते हो। कॉलेज फीस नहीं चुक पाए, दोस्त हँसते हैं। मम्मी रोती रहती हैं। मैं भी अब कॉलेज नहीं जाऊँगा।” शिवानी रो पड़ी – “आरव… बेटा… मम्मी-पापा कोशिश कर रहे हैं।” आरव चिल्लाया – “कोशिश? आपने फिल्में कीं, पैसे कमाए… फिर सब क्यों खो दिया? मैं नहीं चाहता आपकी तरह बनना!” वो कमरे में चला गया, दरवाजा जोर से बंद किया।
आराध्या ने शिवानी की गोद में सिर रखा – “मम्मी… भैया गुस्सा क्यों है?” शिवानी ने उसे गले लगाया – “बेटी… भैया बड़ा हो रहा है। वो समझ रहा है कि घर में क्या हो रहा है।” प्रिंस ने कहा, “जान… आरव सही कह रहा है। हमने गलतियाँ कीं। लेकिन अब हम ठीक कर रहे हैं।” शिवानी बोली, “प्रिंस… मैंने इंडस्ट्री में जो किया… वो मेरी गलती थी। मैंने बच्चों को ये सब सहना पड़ रहा है।” प्रिंस ने गले लगाया – “नहीं… हम दोनों ने साथ मिलकर सामना किया। और अब भी करेंगे।”
लेकिन ड्रामा बढ़ता गया। आरव अब घर में कम बोलता। वो कॉलेज जाता, लेकिन दोस्तों से दूर रहता। एक दिन टीचर ने फोन किया – “आरव क्लास में ध्यान नहीं देता। घर में क्या समस्या है?” प्रिंस ने कहा, “हम संभाल लेंगे।” लेकिन शाम को आरव घर लौटा – आँखें लाल। “मम्मी… कॉलेज में बच्चे कहते हैं कि मम्मी फिल्मों में गंदे सीन करती हैं। मैंने झगड़ा किया… टीचर ने डाँटा।” शिवानी टूट गई – वो रोने लगी। “आरव… मम्मी ने गलतियाँ कीं… लेकिन मम्मी तुम्हें बहुत प्यार करती है।” आरव बोला, “मम्मी… मैं नहीं चाहता कि लोग मम्मी के बारे में ऐसा कहें।” वो कमरे में चला गया।
आराध्या ने शिवानी से पूछा – “मम्मी… भैया क्यों रो रहा है?” शिवानी ने उसे गले लगाया – “बेटी… भैया बड़ा हो रहा है। वो हमारी तकलीफ समझ रहा है।” प्रिंस रात को शिवानी से बोला – “जान… हमें बच्चों के लिए कुछ करना होगा। आरव को अच्छा कॉलेज चाहिए।” शिवानी ने कहा, “प्रिंस… मेरे पास अब कुछ नहीं। फिल्म इंडस्ट्री ने मुझे बाहर कर दिया।” प्रिंस ने कहा, “तो हम छोटे-छोटे काम करेंगे। मैं और मेहनत करूँगा।”
लेकिन काला खान अभी भी पीछे था। उसने प्रिंस के नए प्रोजेक्ट पर दबाव डाला – “प्रिंस… शिवानी को मना कर… वरना ये प्रोजेक्ट भी रुक जाएगा।” प्रिंस ने मना किया। काला खान ने फिर वार किया – प्रिंस के क्लाइंट्स को धमकाया। प्रिंस का प्रोजेक्ट रुक गया। कर्ज और बढ़ गया। शिवानी अब और डिप्रेशन में – वो रात को अकेले रोती, बच्चों को देखकर सोचती – “मैंने उन्हें ये सब क्यों दिया?”
एक रात शिवानी ने प्रिंस से कहा – “प्रिंस… मैं वापस फिल्मों में जाऊँगी। चाहे जो हो जाए। बच्चों के लिए।” प्रिंस ने कहा, “जान… लेकिन अब सावधानी से।” शिवानी ने पुराने दोस्तों से बात की – रोहन ने कहा, “शिवानी… मैं एक छोटी फिल्म प्रोड्यूस कर रहा हूँ। तू कर ले।” शिवानी ने हाँ कहा। फिल्म छोटी थी – लेकिन पैसा अच्छा। शिवानी ने फिर से काम शुरू किया – लेकिन इस बार सावधानी से।
धीरे-धीरे प्रिंस का बिजनेस उभरने लगा – छोटे प्रोजेक्ट्स से। शिवानी की फिल्म रिलीज हुई – अच्छी कमाई हुई। कर्ज कम होने लगा। शिवानी ने बच्चों से कहा – “मम्मी ने गलतियाँ कीं… लेकिन अब हम साथ मिलकर सब ठीक करेंगे।” आरव ने गले लगाया – “मम्मी… मैं तुम्हारे साथ हूँ।” आराध्या ने कहा, “मम्मी… आप सबसे अच्छी हो।”
शिवानी और प्रिंस ने मिलकर फैसला किया – अब वो इंडस्ट्री में रहेंगे, लेकिन अपनी शर्तों पर। शिवानी ने एक नई फिल्म साइन की – लेकिन अब वो प्रोड्यूसर भी थी। काला खान की साजिशें अब कमजोर पड़ रही थीं – क्योंकि शिवानी अब अकेली नहीं थी।
एक शाम प्रिंस घर लौटा – थका हुआ, लेकिन चेहरे पर मुस्कान। “जान… आज एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला। 5 करोड़ का। 6 महीने में पूरा होगा।” शिवानी ने हँसने की कोशिश की – “बहुत अच्छा… लेकिन कर्ज कब चुकाएँगे?” प्रिंस ने कहा, “धीरे-धीरे… सब ठीक हो जाएगा।” लेकिन आरव ने सुना – वो गुस्से से बोला, “पापा… आप हमेशा यही कहते हो। कॉलेज फीस नहीं चुक पाए, दोस्त हँसते हैं। मम्मी रोती रहती हैं। मैं भी अब कॉलेज नहीं जाऊँगा।” शिवानी रो पड़ी – “आरव… बेटा… मम्मी-पापा कोशिश कर रहे हैं।” आरव चिल्लाया – “कोशिश? आपने फिल्में कीं, पैसे कमाए… फिर सब क्यों खो दिया? मैं नहीं चाहता आपकी तरह बनना!” वो कमरे में चला गया, दरवाजा जोर से बंद किया।
आराध्या ने शिवानी की गोद में सिर रखा – “मम्मी… भैया गुस्सा क्यों है?” शिवानी ने उसे गले लगाया – “बेटी… भैया बड़ा हो रहा है। वो समझ रहा है कि घर में क्या हो रहा है।” प्रिंस ने कहा, “जान… आरव सही कह रहा है। हमने गलतियाँ कीं। लेकिन अब हम ठीक कर रहे हैं।” शिवानी बोली, “प्रिंस… मैंने इंडस्ट्री में जो किया… वो मेरी गलती थी। मैंने बच्चों को ये सब सहना पड़ रहा है।” प्रिंस ने गले लगाया – “नहीं… हम दोनों ने साथ मिलकर सामना किया। और अब भी करेंगे।”
लेकिन ड्रामा बढ़ता गया। आरव अब घर में कम बोलता। वो कॉलेज जाता, लेकिन दोस्तों से दूर रहता। एक दिन टीचर ने फोन किया – “आरव क्लास में ध्यान नहीं देता। घर में क्या समस्या है?” प्रिंस ने कहा, “हम संभाल लेंगे।” लेकिन शाम को आरव घर लौटा – आँखें लाल। “मम्मी… कॉलेज में बच्चे कहते हैं कि मम्मी फिल्मों में गंदे सीन करती हैं। मैंने झगड़ा किया… टीचर ने डाँटा।” शिवानी टूट गई – वो रोने लगी। “आरव… मम्मी ने गलतियाँ कीं… लेकिन मम्मी तुम्हें बहुत प्यार करती है।” आरव बोला, “मम्मी… मैं नहीं चाहता कि लोग मम्मी के बारे में ऐसा कहें।” वो कमरे में चला गया।
आराध्या ने शिवानी से पूछा – “मम्मी… भैया क्यों रो रहा है?” शिवानी ने उसे गले लगाया – “बेटी… भैया बड़ा हो रहा है। वो हमारी तकलीफ समझ रहा है।” प्रिंस रात को शिवानी से बोला – “जान… हमें बच्चों के लिए कुछ करना होगा। आरव को अच्छा कॉलेज चाहिए।” शिवानी ने कहा, “प्रिंस… मेरे पास अब कुछ नहीं। फिल्म इंडस्ट्री ने मुझे बाहर कर दिया।” प्रिंस ने कहा, “तो हम छोटे-छोटे काम करेंगे। मैं और मेहनत करूँगा।”
लेकिन काला खान अभी भी पीछे था। उसने प्रिंस के नए प्रोजेक्ट पर दबाव डाला – “प्रिंस… शिवानी को मना कर… वरना ये प्रोजेक्ट भी रुक जाएगा।” प्रिंस ने मना किया। काला खान ने फिर वार किया – प्रिंस के क्लाइंट्स को धमकाया। प्रिंस का प्रोजेक्ट रुक गया। कर्ज और बढ़ गया। शिवानी अब और डिप्रेशन में – वो रात को अकेले रोती, बच्चों को देखकर सोचती – “मैंने उन्हें ये सब क्यों दिया?”
एक रात शिवानी ने प्रिंस से कहा – “प्रिंस… मैं वापस फिल्मों में जाऊँगी। चाहे जो हो जाए। बच्चों के लिए।” प्रिंस ने कहा, “जान… लेकिन अब सावधानी से।” शिवानी ने पुराने दोस्तों से बात की – रोहन ने कहा, “शिवानी… मैं एक छोटी फिल्म प्रोड्यूस कर रहा हूँ। तू कर ले।” शिवानी ने हाँ कहा। फिल्म छोटी थी – लेकिन पैसा अच्छा। शिवानी ने फिर से काम शुरू किया – लेकिन इस बार सावधानी से।
धीरे-धीरे प्रिंस का बिजनेस उभरने लगा – छोटे प्रोजेक्ट्स से। शिवानी की फिल्म रिलीज हुई – अच्छी कमाई हुई। कर्ज कम होने लगा। शिवानी ने बच्चों से कहा – “मम्मी ने गलतियाँ कीं… लेकिन अब हम साथ मिलकर सब ठीक करेंगे।” आरव ने गले लगाया – “मम्मी… मैं तुम्हारे साथ हूँ।” आराध्या ने कहा, “मम्मी… आप सबसे अच्छी हो।”
शिवानी और प्रिंस ने मिलकर फैसला किया – अब वो इंडस्ट्री में रहेंगे, लेकिन अपनी शर्तों पर। शिवानी ने एक नई फिल्म साइन की – लेकिन अब वो प्रोड्यूसर भी थी। काला खान की साजिशें अब कमजोर पड़ रही थीं – क्योंकि शिवानी अब अकेली नहीं थी।


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