14-02-2026, 01:27 PM
काला खान की साजिशों और इंडस्ट्री के काले खेल ने शिवानी और प्रिंस को इतना तोड़ा था कि लगभग सब कुछ खत्म हो चुका था। पटना का विला, मुंबई का घर, कारें, जेवरात – बैंक ने सब जब्त कर लिया। परिवार अब मुंबई के एक छोटे से किराए के 1BHK फ्लैट में रह रहा था – ओशिवारा के एक पुराने मोहल्ले में, जहाँ दीवारों से नमी टपकती थी और रात को शोर से नींद नहीं आती। आरव 13 साल का हो गया था – कॉलेज छोड़ना पड़ा था, वो अब घर पर पढ़ाई करता और छोटे-मोटे काम करता। आराध्या 7 साल की – वो माँ को देखकर चुप रहती, लेकिन रात को रोती – “मम्मी… हम गरीब क्यों हो गए?”
शिवानी का डिप्रेशन गहरा था। वो दिनभर बिस्तर पर लेटी रहती, खाना नहीं खाती, बाल नहीं बनाती। प्रिंस दिन-रात बाहर रहता – कभी टैक्सी चलाता, कभी छोटे-मोटे रियल एस्टेट ब्रोकरेज का काम करता। लेकिन काला खान ने उसके नाम पर ब्लैकलिस्ट करवा दिया था – कोई भी डील नहीं देता। प्रिंस का कर्ज अब 300 करोड़ तक पहुँच गया था। बैंक की नोटिसें आतीं – “प्रॉपर्टी जब्त की जाएगी।” प्रिंस रात को घर लौटता, शिवानी के पास लेटता और कहता, “जान… मैं हार नहीं मानूँगा।” लेकिन उसकी आँखें भी थक चुकी थीं।
फिर एक दिन प्रिंस को एक पुराना दोस्त मिला – नाम था संजय। संजय छोटा बिल्डर था, लेकिन ईमानदार। उसने कहा, “प्रिंस भाई… मैं तुम्हें एक छोटा प्रोजेक्ट दूँगा। पटना में 2 BHK फ्लैट्स का। बजट कम है, लेकिन शुरूआत हो जाएगी।” प्रिंस ने हाँ कहा। वो रोज सुबह 6 बजे निकलता, शाम 10 बजे लौटता। धीरे-धीरे छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स मिलने लगे – 5-10 फ्लैट्स के। प्रिंस ने मेहनत से काम किया – मजदूरों के साथ मिलकर काम किया, क्वालिटी रखी। लोग कहने लगे – “प्रिंस भाई ईमानदार हैं।” कर्ज चुकाने की शुरुआत हुई – पहले 5 लाख, फिर 10 लाख। प्रिंस ने शिवानी से कहा, “जान… धीरे-धीरे सब ठीक हो रहा है।”
शिवानी अब भी डिप्रेशन में थी, लेकिन बच्चों की वजह से वो थोड़ी-थोड़ी बाहर निकलने लगी। वो छोटे-मोटे काम करती – बच्चों को पढ़ाती, घर का काम करती। एक दिन उसने पुराना फोन चेक किया – एक मैसेज आया था – “शिवानी जी… हम एक एडल्ट फिल्म प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। आपका नाम इंडस्ट्री में अभी भी बहुत बड़ा है। अगर आप इंटरेस्टेड हैं… तो बात करें।” भेजने वाला था एक नया प्रोडक्शन हाउस – ‘डार्क लाइट्स प्रोडक्शंस’। शिवानी ने पहले तो इग्नोर किया, लेकिन रात को सोचती रही – “कर्ज इतना है… बच्चे कॉलेज नहीं जा पा रहे… शायद ये रास्ता…” उसने रिप्लाई किया – “बात कर सकती हूँ।”
मीटिंग मुंबई के एक छोटे ऑफिस में हुई। प्रोड्यूसर था राहुल – 40 साल का, स्मार्ट लेकिन ईमानदार। उसने कहा, “शिवानी जी… हम एक एडल्ट फिल्म बना रहे हैं – नाम ‘नाइट ऑफ डिजायर’। बोल्ड सीन होंगे, लेकिन स्टोरी मजबूत है – एक औरत की जिंदगी, उसकी पसंद, उसकी आजादी। बजट 20 करोड़। आपकी फीस 5 करोड़।” शिवानी ने पूछा, “कितने बोल्ड सीन?” राहुल बोला, “4-5 इंटेंस सीन – लेकिन कला के साथ। कोई जबरदस्ती नहीं।” शिवानी ने सोचा – “ये मेरी जिंदगी से मिलती है। और पैसा… कर्ज चुक जाएगा।” उसने साइन कर दिया।
फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। शिवानी ने 6 साल बाद फिर कैमरे के सामने खड़े होने का फैसला किया। हीरो था एक नया एक्टर – रणवीर, 28 साल का, फिट और प्रोफेशनल। सीन थे इंटेंस – एक पार्टी में पहला मिलना, बेडरूम में गहरा इंटीमेसी, शावर में पैशन, और आखिरी सीन में इमोशनल ब्रेकडाउन। शिवानी ने कहा, “रणवीर… ये सीन रियल होने चाहिए।” रणवीर ने हाँ कहा।
एक सीन – बेडरूम। शिवानी लाल लेस में। रणवीर ने उसे बाहों में लिया। चुंबन – गहरा, लंबा। रणवीर की जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई। शिवानी सिसकारी – “आह… रणवीर… गहरा…” रणवीर ने ड्रेस उतार दी। शिवानी नंगी। रणवीर ने स्तनों को दबाया – जोर से। शिवानी चीखी, “आह… दबाओ… मेरे स्तन… फाड़ दो…” रणवीर ने चूसा – काटा। शिवानी की सिसकारियाँ – “उफ्फ… चूसो… मेरे निप्पल्स… दर्द दो…” रणवीर ने चूत पर जीभ डाली – क्लिट चूसा। शिवानी चीखी, “आह… जीभ अंदर… चाटो…” रणवीर ने उँगलियाँ डालीं – चार। शिवानी झड़ गई – पानी बहा। रणवीर ने लंड निकाला – 9 इंच। शिवानी ने मुँह में लिया – चूसा। फिर रणवीर ने चूत में डाला – पूरा। शिवानी चीखी, “आआह्ह… गहरा… फाड़ दो…” रणवीर धक्के मारने लगा – जोरदार। शिवानी चिल्लाई, “रणवीर… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड से भर दो…” रणवीर ने स्पीड बढ़ाई। शिवानी झड़ गई – कई बार। रणवीर ने स्पर्म अंदर छोड़ा।
फिल्म रिलीज हुई – ‘नाइट ऑफ डिजायर’। फिल्म सुपरहिट हो गई – 150 करोड़ कमाई। शिवानी की फीस से कर्ज का बड़ा हिस्सा चुक गया। प्रिंस का बिजनेस धीरे-धीरे उभरने लगा – छोटे प्रोजेक्ट्स मिलने लगे। शिवानी फिर स्टार बन गई – लेकिन इस बार वो अपनी शर्तों पर। आरव ने कहा, “मम्मी… आप फिर स्टार बन गईं।” शिवानी ने गले लगाया – “बेटा… मम्मी कभी नहीं हारी।”
शिवानी अब मजबूत थी – परिवार, काम, और अपनी पसंद। उसकी जिंदगी अब एक नई शुरुआत थी।
शिवानी का डिप्रेशन गहरा था। वो दिनभर बिस्तर पर लेटी रहती, खाना नहीं खाती, बाल नहीं बनाती। प्रिंस दिन-रात बाहर रहता – कभी टैक्सी चलाता, कभी छोटे-मोटे रियल एस्टेट ब्रोकरेज का काम करता। लेकिन काला खान ने उसके नाम पर ब्लैकलिस्ट करवा दिया था – कोई भी डील नहीं देता। प्रिंस का कर्ज अब 300 करोड़ तक पहुँच गया था। बैंक की नोटिसें आतीं – “प्रॉपर्टी जब्त की जाएगी।” प्रिंस रात को घर लौटता, शिवानी के पास लेटता और कहता, “जान… मैं हार नहीं मानूँगा।” लेकिन उसकी आँखें भी थक चुकी थीं।
फिर एक दिन प्रिंस को एक पुराना दोस्त मिला – नाम था संजय। संजय छोटा बिल्डर था, लेकिन ईमानदार। उसने कहा, “प्रिंस भाई… मैं तुम्हें एक छोटा प्रोजेक्ट दूँगा। पटना में 2 BHK फ्लैट्स का। बजट कम है, लेकिन शुरूआत हो जाएगी।” प्रिंस ने हाँ कहा। वो रोज सुबह 6 बजे निकलता, शाम 10 बजे लौटता। धीरे-धीरे छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स मिलने लगे – 5-10 फ्लैट्स के। प्रिंस ने मेहनत से काम किया – मजदूरों के साथ मिलकर काम किया, क्वालिटी रखी। लोग कहने लगे – “प्रिंस भाई ईमानदार हैं।” कर्ज चुकाने की शुरुआत हुई – पहले 5 लाख, फिर 10 लाख। प्रिंस ने शिवानी से कहा, “जान… धीरे-धीरे सब ठीक हो रहा है।”
शिवानी अब भी डिप्रेशन में थी, लेकिन बच्चों की वजह से वो थोड़ी-थोड़ी बाहर निकलने लगी। वो छोटे-मोटे काम करती – बच्चों को पढ़ाती, घर का काम करती। एक दिन उसने पुराना फोन चेक किया – एक मैसेज आया था – “शिवानी जी… हम एक एडल्ट फिल्म प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। आपका नाम इंडस्ट्री में अभी भी बहुत बड़ा है। अगर आप इंटरेस्टेड हैं… तो बात करें।” भेजने वाला था एक नया प्रोडक्शन हाउस – ‘डार्क लाइट्स प्रोडक्शंस’। शिवानी ने पहले तो इग्नोर किया, लेकिन रात को सोचती रही – “कर्ज इतना है… बच्चे कॉलेज नहीं जा पा रहे… शायद ये रास्ता…” उसने रिप्लाई किया – “बात कर सकती हूँ।”
मीटिंग मुंबई के एक छोटे ऑफिस में हुई। प्रोड्यूसर था राहुल – 40 साल का, स्मार्ट लेकिन ईमानदार। उसने कहा, “शिवानी जी… हम एक एडल्ट फिल्म बना रहे हैं – नाम ‘नाइट ऑफ डिजायर’। बोल्ड सीन होंगे, लेकिन स्टोरी मजबूत है – एक औरत की जिंदगी, उसकी पसंद, उसकी आजादी। बजट 20 करोड़। आपकी फीस 5 करोड़।” शिवानी ने पूछा, “कितने बोल्ड सीन?” राहुल बोला, “4-5 इंटेंस सीन – लेकिन कला के साथ। कोई जबरदस्ती नहीं।” शिवानी ने सोचा – “ये मेरी जिंदगी से मिलती है। और पैसा… कर्ज चुक जाएगा।” उसने साइन कर दिया।
फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। शिवानी ने 6 साल बाद फिर कैमरे के सामने खड़े होने का फैसला किया। हीरो था एक नया एक्टर – रणवीर, 28 साल का, फिट और प्रोफेशनल। सीन थे इंटेंस – एक पार्टी में पहला मिलना, बेडरूम में गहरा इंटीमेसी, शावर में पैशन, और आखिरी सीन में इमोशनल ब्रेकडाउन। शिवानी ने कहा, “रणवीर… ये सीन रियल होने चाहिए।” रणवीर ने हाँ कहा।
एक सीन – बेडरूम। शिवानी लाल लेस में। रणवीर ने उसे बाहों में लिया। चुंबन – गहरा, लंबा। रणवीर की जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई। शिवानी सिसकारी – “आह… रणवीर… गहरा…” रणवीर ने ड्रेस उतार दी। शिवानी नंगी। रणवीर ने स्तनों को दबाया – जोर से। शिवानी चीखी, “आह… दबाओ… मेरे स्तन… फाड़ दो…” रणवीर ने चूसा – काटा। शिवानी की सिसकारियाँ – “उफ्फ… चूसो… मेरे निप्पल्स… दर्द दो…” रणवीर ने चूत पर जीभ डाली – क्लिट चूसा। शिवानी चीखी, “आह… जीभ अंदर… चाटो…” रणवीर ने उँगलियाँ डालीं – चार। शिवानी झड़ गई – पानी बहा। रणवीर ने लंड निकाला – 9 इंच। शिवानी ने मुँह में लिया – चूसा। फिर रणवीर ने चूत में डाला – पूरा। शिवानी चीखी, “आआह्ह… गहरा… फाड़ दो…” रणवीर धक्के मारने लगा – जोरदार। शिवानी चिल्लाई, “रणवीर… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड से भर दो…” रणवीर ने स्पीड बढ़ाई। शिवानी झड़ गई – कई बार। रणवीर ने स्पर्म अंदर छोड़ा।
फिल्म रिलीज हुई – ‘नाइट ऑफ डिजायर’। फिल्म सुपरहिट हो गई – 150 करोड़ कमाई। शिवानी की फीस से कर्ज का बड़ा हिस्सा चुक गया। प्रिंस का बिजनेस धीरे-धीरे उभरने लगा – छोटे प्रोजेक्ट्स मिलने लगे। शिवानी फिर स्टार बन गई – लेकिन इस बार वो अपनी शर्तों पर। आरव ने कहा, “मम्मी… आप फिर स्टार बन गईं।” शिवानी ने गले लगाया – “बेटा… मम्मी कभी नहीं हारी।”
शिवानी अब मजबूत थी – परिवार, काम, और अपनी पसंद। उसकी जिंदगी अब एक नई शुरुआत थी।


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