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Incest खेल ससुर बहु का
#90
राजासाहब के लंड का सुपारा बहुत मोटा था, और अब वो उसे हल्के से उसकी चूत मे घुसा रहे थे। दर्द से मेनका की आँखें बंद हो गयी,"आ...हह...",पर राजासाहब ने बड़ी कोमलता से अपने मत्थे को उसके अंदर घुसा दिया।धीरे-2 करके 4 एक/2 इंच लंड अंदर चला गया और वो वैसे ही घुटनो पर बैठे उतने लंड को अंदर बाहर करने लगे। अब मेनका का भी दर्द कम हो गया और उसे मज़ा आने लगा। वो अपने ससुर को देखने लगी और दोनो हाथ बढ़ा कर उनकी कलाईयों को पकड़ लिया। राजासाहब ने हल्के धक्कों के साथ अब अपना लंड और अंदर डालना शुरू किया।

मेनका आज तक केवल अपने पति से चूदी थी और इस से ज़्यादा अंदर उसका लंड कभी गया नही था। उसे फिर दर्द होने लगा। राजासाहब उसके उपर लेट गये और उसे चूमने लगे और बहुत धीमे-धीरे धक्कों के साथ अपना पूरा लंड उसकी चूत मे डाल दिया। थोड़ी देर वो स्थिर रहे और बस कभी उसके होठों तो काफ़ी चूचियो को चूमते रहे। मेनका का दर्द जब ख़तम हो गया तो वो नीचे से हल्के से अपनी कमर हिलाने लगी।

राजासाहब ने अपने बहू के इशारे को समझा और अपनी बाहों पे अपने वजन को लेते हुए उसके बदन से उठ गये।उसकी आँखों मे झाँकते हुए अपना पूरा लंड उन्होने ने बाहर खीच लिया और फिर एक झटके मे अंदर पेल दिया।

"
आ...ईईयईए...",मेनका चिल्लाई, और अपने ससुर को अपने उपर खींच उनसे लिपट गयी, और अपनी टांगे भी उनकी कमर के गिर्द लपेट दी। अब राजासाहब ने धक्के लगा कर उसकी चुदाई शुरू कर दी। मेनका को बहुत मज़ा आ रहा था। उसे बहुत खुशी हो रही थी कि उसने अपने ससुर का इतना बड़ा लंड अपने अंदर ले लिया था। वो उन्हे चूमने लगी। उसकी चूत आज पूरी भरी थी,राजासाहब का लंड उसकी चूत की आनच्छुई गहराइयों को माप रहा था और ये एहसास उसे और भी पागल किए दे रहा था। उसने अपनी कमर नीचे से हिलाना शुरू कर दिया,राजासाहब ने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। तभी मेनका उचक कर उनको पागलों की तरह चूमने लगी,उसकी कमर भी तेज़ी से हिलने लगी और वो फिर झड़ गयी पर राजासाहब अभी भी लगे हुए थे।

मेनका की कसी चूत उनके लंड को पूरा लपेटे हुए थी। अपने पूरे जीवन मे उन्होने ऐसी टाइट चूत नही चोदि थी। उनकी पत्नी की कुँवारी चूत भी ऐसी ना थी।

कमरे मे मेनका की आह और राजासाहब की साँसों का शोर था। मेनका फिर से गरम हो रही थी। इस लंड ने तो उसे पागल कर दिया था। लगता था जैसे उसकी चूत से होता हुआ सीधे उसकी कोख पे धक्के मार रहा है। उसने फिर अपनी कमर नीचे से हिलाना शुरू कर दिया। अपने ससुर के बदन को उसने अपनी बाहों और टाँगों मे क़ैद कर रखा था। वो अब बहुत तेज़ धक्के लगा रहे थे। उसने जोश मे अपने नाख़ून उनकी पीठ मे गाड़ा दिए,उसकी चूत फिर से पानी छोड़ने वाली थी। नीचे से अपनी कमर और तेज़ी से हिलाते हुए,पलंग से उठ कर वो अपने ससुर के होठों को चूमने लगी। बस, वो झड़ने ही वाली थी। राजासाहब को भी अब अपने उपर काबू रखना मुश्किल हो रहा था और वो भी अपनी बहू के चुंबन का जवाब देते हुए और तेज़ी से धक्के लगाने लगे। तभी मेनका का मज़ा चरम सीमा पर पहुँच गया और वो अपने ससुर से चिपक सी गयी,उसके नाख़ून उनकी पीठ मे और धँस गये और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। तभी उसने महसूस किया कि उसके ससुर ने उसके होठों को अपने होठों मे बुरी तरह कस लिया है और उनका बदन भी झटके खाने लगा और उसे अपनी चूत मे कुछ गरम सा महसूस किया। उसके झड़ने के साथ ही उसके ससुर भी झड़ गये थे, और उसकी चूत को अपने वीर्या से लबालब भर दिया था।

थोड़ी देर तक दोनो वैसे ही पड़े अपनी साँस संभालते रहे। फिर राजासाहब उसके उपर से, धीरे से अपना लंड उसकी चूत मे से खीचते हुए उठ गये और बाथरूम चले गये। लंड निकलते ही मेनका को एक ख़ालीपन का एहसास हुआ।

पर आज वो बहुत खुश थी। चुदाई मे इतना मज़ा मिलता है,उसने तो सपने मे भी नही सोचा था।जितनी बार वो आज झड़ी थी उतनी बार तो वो अपनी पूरी शादीशुदा ज़िंदगी मे भी नही झड़ी थी। विश्वा तो उसे बस मज़े के समुंदर के किनारे पे ला कर छोड़ देता था,पर आज पहली बार अपने ससुर के साथ इस समुंदर की गहराई मे कई बार डूब कर उसने पूरा लुफ्त उठाया था।

वो वैसे ही नंगी पड़ी इन ख़यालों मे खोई थी कि बाथरूम का दरवाज़ा खुला और राजासाहब बातरोब पहने बाहर आए। उसने मुस्कुरा कर उन्हे देखा पर वो उसे अनदेखा करते हुए लाउंज की ओर जाने लगे।

बस आज के लिए यही तक कल फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ


तब तक के लिए मैत्री ओर से जय भारत
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 14-02-2026, 01:26 PM



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