14-02-2026, 01:22 PM
राजासाहब अपनी बहू की चूचियों पर टूट पड़े।वो कभी अपने हाथों से उन्हे दबाते ,मसलते तो कभी अपने होठों से चूमते और चूस्ते।उनकी इन हरकतों ने मेनका के सीने को लव बाइट्स से भर दिया। मेनका ने भी उन्हे अपनी बाहों मे कस लिया और उचक कर मानो अपना सीना उनके मुँह मे और घुसाने की कोशिश करने लगी। जब राजासाहब का मुँह उसके सीने से हट ता तो उनकी उंगलियाँ उसके निपल्स को मसालने लगती जो कि अब पूरे कड़े हो गये थे। मेनका अब बहुत गरम हो गयी थी और अपनी जांघें एक साथ रगड़ रही थी। उसकी चूत बहुत गीली हो गयी थी जब राजासाहब ने उसकी एक चूची को अपने हाथ मे भरा और दूसरी को अपने मुँह मे और इतनी ज़ोर से चूस्सा और दबाया कि वो दूसरी बार झड़ गयी। उसके ससुर ने बिना उसकी चूत छुए उसे 2 बार झाड़वा दिया था। वो अब पस्त हो गयी थी। उसने अद्खुलि आँखों से प्यार से अपनी ससुर को देखा।
राजासाहब उसके सीने को छोड़ अपने घुटनो पर उसकी साइड मे बैठ गये। अपने दोनो हाथ की इंडेक्स फिंगर्स को उसकी सीने के बगलों से बहुत हल्के- हल्के फिराते हुए उसकी कमर तक ले आए, और उन्हे उसकी पेंटी के वेयैस्टबंड मे फँसा दिया और फिर हौले से उसे उसकी जांघों से सरकाने लगे। मेनका ने शर्म से आँखें बंद कर ली। अब वो अपने ससुर के सामने पूरी नंगी होने वाली थी। उसकी धड़कने तेज़ हो गयी। उसने महसूस किया कि पेंटी उसकी गांड के नीचे फँस सी रही है तो उसने धीरे से अपनी कमर उठा दी और राजासाहब ने पेंटी उसके जिस्म से अलग कर दी। मैत्री की प्रस्तुति.
राजासाहब मेनका की खूबसूरती निहार रहे थे। मूठ मारते वक़्त जैसी कल्पना की थी मेनका उस से भी कहीं ज़्यादा खूबसूरत थी और उसकी छोटी सी,गुलाबी,बिना बालों की चूत कितनी प्यारी लग रही थी। उन्होने उसके पैर को उठा कर अपने होठों से लगा लिया और चूमते हुए उसकी जाँघ तक पहुँच गये। मेनका कसमसा रही थी। अब उसे बर्दाश्त नही हो रहा था।वो चाहती थी कि बस अब वो उसकी चूत को अपने मुँह से जी भर कर प्यार करे।
राजासाहब ने उसकी दोनो जांघों को जम कर चूमा और चूसा और उसकी चूचियो की तरह भी यहा भी लव नाइट्स के रूप मे अपने होठों के दस्तख़त छोड़ दिए। मेनका की चूत बस गीली हुए चली जा रही थी। राजासाहब उसकी जांघों को फैला कर उनके बीच लेट गये और अपना मुँह उसकी चूत के आस-पास एक दायरे मे फिराने लगे। धीरे- धीरे वो दायरा छोटा होने लगा और उनके होठ पहली बार उसकी चूत से जा लगे। मेनका ने अपनी टांगे उनके कंधे पर रख दी थी। अब वो नीचे से अपनी कमर उचकाने लगी। राजासाहब ने अपनी जीभ उसकी चूत की दरार पे फिराई और धीरे से उसे अंदर सरका दिया।
"उउंम...उन्न्ञनह..!,"मेनका पागल हो गयी, और अपनी कमर और उचकाने लगी अपने हाथों से अपने ससुर के सर को अपनी जांघों मे भींचने लगी। राजासाहब अब पूरे जोश से उसकी चूत चाटने लगे और उसके दाने पे अपनी जीभ फिराने लगे। ऐसा करते ही मेनका फिर झड़ गयी पर राजासाहब ने चाटना नही छोड़ा। मेनका की तो हालत अब बिल्कुल ही खराब हो गयी थी। राजासाहब ने उसकी चूत के थोडा अंदर उसके जी स्पॉट को खोज लिया था और वही कभी जीभ से तो कभी उंगली से उसे रगड़ रहे थे। मेनका की चूत तो पानी छोडती ही जा रही थी, और उसे होश भी नही था, कि अब तक वो कितनी बार झड़ गयी थी। आखरी बार झड़ने के बाद उसने देखा कि राजासाहब उसकी टाँगों के बीच खड़े अपना पायजामा उतार रहे हैं। जैसे ही वो नंगे हुए उसकी आँखें जो अभी तक अधखुली थी आश्चर्य से फैल गयी। मैत्री की रचना.
राजासाहब का 7 एक/2इंच लंबा और काफ़ी मोटा लंड उसके सामने था। राजासाहब घुटनो के बल उसकी टाँगों के बीच बैठे थे। मेनका सोचने लगी कि वो कैसे इतने बड़े लंड को अपने अंदर लेगी। राजासाहब ने उसकी टांगे फैला कर उसके घुटनो को मोड़ दिया और अपना लंड उसकी चूत की दरार पर फिराया तो मेनका ने अपना निचला होठ अपने दातों तले दबा लिया।
राजासाहब उसके सीने को छोड़ अपने घुटनो पर उसकी साइड मे बैठ गये। अपने दोनो हाथ की इंडेक्स फिंगर्स को उसकी सीने के बगलों से बहुत हल्के- हल्के फिराते हुए उसकी कमर तक ले आए, और उन्हे उसकी पेंटी के वेयैस्टबंड मे फँसा दिया और फिर हौले से उसे उसकी जांघों से सरकाने लगे। मेनका ने शर्म से आँखें बंद कर ली। अब वो अपने ससुर के सामने पूरी नंगी होने वाली थी। उसकी धड़कने तेज़ हो गयी। उसने महसूस किया कि पेंटी उसकी गांड के नीचे फँस सी रही है तो उसने धीरे से अपनी कमर उठा दी और राजासाहब ने पेंटी उसके जिस्म से अलग कर दी। मैत्री की प्रस्तुति.
राजासाहब मेनका की खूबसूरती निहार रहे थे। मूठ मारते वक़्त जैसी कल्पना की थी मेनका उस से भी कहीं ज़्यादा खूबसूरत थी और उसकी छोटी सी,गुलाबी,बिना बालों की चूत कितनी प्यारी लग रही थी। उन्होने उसके पैर को उठा कर अपने होठों से लगा लिया और चूमते हुए उसकी जाँघ तक पहुँच गये। मेनका कसमसा रही थी। अब उसे बर्दाश्त नही हो रहा था।वो चाहती थी कि बस अब वो उसकी चूत को अपने मुँह से जी भर कर प्यार करे।
राजासाहब ने उसकी दोनो जांघों को जम कर चूमा और चूसा और उसकी चूचियो की तरह भी यहा भी लव नाइट्स के रूप मे अपने होठों के दस्तख़त छोड़ दिए। मेनका की चूत बस गीली हुए चली जा रही थी। राजासाहब उसकी जांघों को फैला कर उनके बीच लेट गये और अपना मुँह उसकी चूत के आस-पास एक दायरे मे फिराने लगे। धीरे- धीरे वो दायरा छोटा होने लगा और उनके होठ पहली बार उसकी चूत से जा लगे। मेनका ने अपनी टांगे उनके कंधे पर रख दी थी। अब वो नीचे से अपनी कमर उचकाने लगी। राजासाहब ने अपनी जीभ उसकी चूत की दरार पे फिराई और धीरे से उसे अंदर सरका दिया।
"उउंम...उन्न्ञनह..!,"मेनका पागल हो गयी, और अपनी कमर और उचकाने लगी अपने हाथों से अपने ससुर के सर को अपनी जांघों मे भींचने लगी। राजासाहब अब पूरे जोश से उसकी चूत चाटने लगे और उसके दाने पे अपनी जीभ फिराने लगे। ऐसा करते ही मेनका फिर झड़ गयी पर राजासाहब ने चाटना नही छोड़ा। मेनका की तो हालत अब बिल्कुल ही खराब हो गयी थी। राजासाहब ने उसकी चूत के थोडा अंदर उसके जी स्पॉट को खोज लिया था और वही कभी जीभ से तो कभी उंगली से उसे रगड़ रहे थे। मेनका की चूत तो पानी छोडती ही जा रही थी, और उसे होश भी नही था, कि अब तक वो कितनी बार झड़ गयी थी। आखरी बार झड़ने के बाद उसने देखा कि राजासाहब उसकी टाँगों के बीच खड़े अपना पायजामा उतार रहे हैं। जैसे ही वो नंगे हुए उसकी आँखें जो अभी तक अधखुली थी आश्चर्य से फैल गयी। मैत्री की रचना.
राजासाहब का 7 एक/2इंच लंबा और काफ़ी मोटा लंड उसके सामने था। राजासाहब घुटनो के बल उसकी टाँगों के बीच बैठे थे। मेनका सोचने लगी कि वो कैसे इतने बड़े लंड को अपने अंदर लेगी। राजासाहब ने उसकी टांगे फैला कर उसके घुटनो को मोड़ दिया और अपना लंड उसकी चूत की दरार पर फिराया तो मेनका ने अपना निचला होठ अपने दातों तले दबा लिया।


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