14-02-2026, 01:20 PM
शिवानी की आवाज अब चुप हो चुकी थी। ‘अग्नि पथ’ के बाद उसकी हर कोशिश टूट गई। काला खान की साजिशों ने उसे इंडस्ट्री से बाहर कर दिया। फैंस ने छोड़ दिया, मीडिया ने भुला दिया, और ब्रांड्स ने दूर कर लिया। प्रिंस का रियल एस्टेट बिजनेस भी डूब गया – कर्ज 250 करोड़ तक पहुँच गया। बैंक ने पटना का विला और मुंबई का घर दोनों जब्त कर लिए। परिवार अब मुंबई के एक छोटे से किराए के 1BHK फ्लैट में रहता था – ओशिवारा के एक पुराने बिल्डिंग में, जहाँ गलियों में गंदगी और शोर था।
आरव अब 13 साल का था – कॉलेज में अच्छा था, लेकिन घर की हालत देखकर चुप रहता। आराध्या 7 साल की – माँ को देखकर पूछती, “मम्मी… आप क्यों उदास रहती हो?” शिवानी जवाब नहीं दे पाती। वो दिनभर बिस्तर पर लेटी रहती, खाना नहीं खाती, नहाना भूल जाती। डिप्रेशन इतना गहरा था कि वो दिन-रात रोती रहती। प्रिंस छोटे-मोटे काम करता – कभी टैक्सी ड्राइविंग, कभी डिलीवरी। घर में पैसा नहीं था – बिजली बिल, कॉलेज फीस, और किराया – सब कर्ज में। प्रिंस भी टूट चुका था। वो रात को शिवानी के पास लेटता और कहता, “जान… हम फिर उठेंगे।” लेकिन शिवानी की आँखें खाली थीं।
एक दिन शिवानी ने फैसला किया – वो अब बाहर निकलेगी। वो अकेली मुंबई की उन प्राइवेट पार्टियों में जाने लगी – जहां अमीर लोग, सेलिब्रिटी, और हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स मिलते थे। वो अब पैसा नहीं माँगती थी – बस संतुष्टि। वो जानती थी कि ये गलत है, लेकिन डिप्रेशन में वो खुद को सजा दे रही थी। हर हफ्ते एक पार्टी – कभी जुहू के प्राइवेट क्लब में, कभी बांद्रा के पेंटहाउस में।
एक रात – मुंबई के एक सबसे एक्सक्लूसिव प्राइवेट क्लब में। पार्टी थी – सिर्फ 20-25 लोग। लाइट्स डिम, म्यूजिक स्लो, शैंपेन बह रहा था। शिवानी काली ड्रेस में आई – डीप नेक, स्लिट से टाँगें। उसने वाइन ली और कोने में खड़ी हो गई। तभी एक आदमी पास आया – नाम था मार्कस। अफ्रीकी-अमेरिकी, 40 साल का, 6 फीट 6 इंच लंबा, काला रंग, मस्कुलर बॉडी, छोटी दाढ़ी, आँखें गहरी। वो दुबई से आया था – एक बड़ा बिजनेसमैन। उसने शिवानी को देखा और बोला, “तुम… शिवानी हो ना? मैंने तुम्हारी फिल्में देखी हैं।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “हाँ… लेकिन अब वो पुरानी बात है।” मार्कस ने कहा, “तुम आज भी सबसे हॉट हो। मैं तुझे चाहता हूँ… आज रात। पैसे दूँगा – 1 लाख डॉलर।” शिवानी ने सोचा – “ये मेरी सजा है… और मेरी भूख भी।” वो बोली, “चलो… लेकिन इंटेंस होना चाहिए।”
मार्कस ने शिवानी को क्लब के ऊपरी फ्लोर के प्राइवेट सुइट में ले जाया। सुइट बड़ा था – किंग साइज बेड, मिरर दीवारें, लाल लाइट्स। दरवाजा बंद। मार्कस ने शिवानी को दीवार से सटा दिया। चुंबन शुरू – जंगली। उसकी बड़ी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, गले तक। शिवानी सिसकारी, “आह… मार्कस… गहरा… और जोर से…” मार्कस की बड़ी-बड़ी हथेलियाँ शिवानी की कमर पर – दबा रहा था। ड्रेस ऊपर की। शिवानी की पैंटी गीली। मार्कस ने ड्रेस फाड़ दी। शिवानी नंगी। उसके बड़े हाथों ने शिवानी के स्तनों को पकड़ा – इतना जोर से कि शिवानी चीखी, “आह… दबाओ… मेरे स्तन… फाड़ दो…” मार्कस ने मुँह में लिया – चूसने लगा, काटने लगा। दाँत से निप्पल्स खींचे। शिवानी की सिसकारियाँ – “उफ्फ… मार्कस… चूसो… मेरे निप्पल्स… दर्द दो…” मार्कस की दाढ़ी उसके स्तनों पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू, लेकिन चूत से पानी बह रहा था।
मार्कस ने शिवानी को बेड पर पटका। टाँगें फैलाईं। उसकी जीभ चूत पर – क्लिट चूसने लगा। शिवानी चीखी, “आह… मार्कस… जीभ अंदर… चाटो मेरी चूत… रस पी लो…” मार्कस ने उँगलियाँ डालीं – चार, तेज-तेज। शिवानी का शरीर काँप रहा था – “आह… उँगलियाँ… और तेज… मेरी चूत… फाड़ो…” वो झड़ गई – पानी मार्कस के मुँह पर। मार्कस ने पैंट उतारी। लंड बाहर – 13 इंच, सबसे मोटा, काला, नसें फूली। शिवानी की आँखें फैल गईं – “मार्कस… ये… नहीं आएगा…” मार्कस हँसा – “आएगा… और फाड़ेगा।”
मार्कस ने लंड चूत पर रगड़ा – क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी – “डालो… सहन नहीं होता…” मार्कस ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना कि वो चीखी, “आआआह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा…” मार्कस ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की साँसें तेज – “मार्कस… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… गहरा…” मार्कस ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर आर्क हो गया – दर्द और मजा का तूफान। “आह… पूरा… अब धक्के… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…”
मार्कस ने धक्के शुरू किए – स्लो लेकिन बेहद गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। “मार्कस… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” मार्कस ने स्पीड बढ़ाई – अब क्रूर धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज कमरे में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो मार्कस की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “मार्कस… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा। मार्कस नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान – “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी हूँ…”
पोजीशन बदली – शिवानी ऊपर। वो उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “मार्कस… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को निचोड़ रही है… आह… हाँ…” मार्कस नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, निप्पल्स काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी मार्कस के लंड पर।
फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। मार्कस पीछे से। बाल पकड़े। गांड पर थप्पड़ – जोरदार। शिवानी की गांड लाल। “तेरी गांड… आज इसे भी फाड़ूँगा।” मार्कस ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” मार्कस ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” मार्कस ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… मार्कस… मेरी गांड… चोदो… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” मार्कस ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
मार्कस ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेटे। मार्कस ने कहा, “शिवानी… तू सबसे अच्छी है। पैसे… 2 लाख डॉलर।” शिवानी मुस्कुराई – “अगली बार और ज्यादा।” वो उठी, कपड़े पहने। घर लौटी। प्रिंस इंतजार कर रहा था। शिवानी ने सब बताया – “प्रिंस… आज एक अफ्रीकी मर्द ने मुझे चोदा… इतना गहरा… इतना मोटा…” प्रिंस उत्तेजित हो गया – “जान… डिटेल्स…” शिवानी ने बताते हुए प्रिंस को चोदा। दोनों झड़े।
शिवानी की प्यास अब और बढ़ गई थी – मुंबई की सनसनी, फैंस की भूख, और नई-नई बॉडीज।
आरव अब 13 साल का था – कॉलेज में अच्छा था, लेकिन घर की हालत देखकर चुप रहता। आराध्या 7 साल की – माँ को देखकर पूछती, “मम्मी… आप क्यों उदास रहती हो?” शिवानी जवाब नहीं दे पाती। वो दिनभर बिस्तर पर लेटी रहती, खाना नहीं खाती, नहाना भूल जाती। डिप्रेशन इतना गहरा था कि वो दिन-रात रोती रहती। प्रिंस छोटे-मोटे काम करता – कभी टैक्सी ड्राइविंग, कभी डिलीवरी। घर में पैसा नहीं था – बिजली बिल, कॉलेज फीस, और किराया – सब कर्ज में। प्रिंस भी टूट चुका था। वो रात को शिवानी के पास लेटता और कहता, “जान… हम फिर उठेंगे।” लेकिन शिवानी की आँखें खाली थीं।
एक दिन शिवानी ने फैसला किया – वो अब बाहर निकलेगी। वो अकेली मुंबई की उन प्राइवेट पार्टियों में जाने लगी – जहां अमीर लोग, सेलिब्रिटी, और हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स मिलते थे। वो अब पैसा नहीं माँगती थी – बस संतुष्टि। वो जानती थी कि ये गलत है, लेकिन डिप्रेशन में वो खुद को सजा दे रही थी। हर हफ्ते एक पार्टी – कभी जुहू के प्राइवेट क्लब में, कभी बांद्रा के पेंटहाउस में।
एक रात – मुंबई के एक सबसे एक्सक्लूसिव प्राइवेट क्लब में। पार्टी थी – सिर्फ 20-25 लोग। लाइट्स डिम, म्यूजिक स्लो, शैंपेन बह रहा था। शिवानी काली ड्रेस में आई – डीप नेक, स्लिट से टाँगें। उसने वाइन ली और कोने में खड़ी हो गई। तभी एक आदमी पास आया – नाम था मार्कस। अफ्रीकी-अमेरिकी, 40 साल का, 6 फीट 6 इंच लंबा, काला रंग, मस्कुलर बॉडी, छोटी दाढ़ी, आँखें गहरी। वो दुबई से आया था – एक बड़ा बिजनेसमैन। उसने शिवानी को देखा और बोला, “तुम… शिवानी हो ना? मैंने तुम्हारी फिल्में देखी हैं।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “हाँ… लेकिन अब वो पुरानी बात है।” मार्कस ने कहा, “तुम आज भी सबसे हॉट हो। मैं तुझे चाहता हूँ… आज रात। पैसे दूँगा – 1 लाख डॉलर।” शिवानी ने सोचा – “ये मेरी सजा है… और मेरी भूख भी।” वो बोली, “चलो… लेकिन इंटेंस होना चाहिए।”
मार्कस ने शिवानी को क्लब के ऊपरी फ्लोर के प्राइवेट सुइट में ले जाया। सुइट बड़ा था – किंग साइज बेड, मिरर दीवारें, लाल लाइट्स। दरवाजा बंद। मार्कस ने शिवानी को दीवार से सटा दिया। चुंबन शुरू – जंगली। उसकी बड़ी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, गले तक। शिवानी सिसकारी, “आह… मार्कस… गहरा… और जोर से…” मार्कस की बड़ी-बड़ी हथेलियाँ शिवानी की कमर पर – दबा रहा था। ड्रेस ऊपर की। शिवानी की पैंटी गीली। मार्कस ने ड्रेस फाड़ दी। शिवानी नंगी। उसके बड़े हाथों ने शिवानी के स्तनों को पकड़ा – इतना जोर से कि शिवानी चीखी, “आह… दबाओ… मेरे स्तन… फाड़ दो…” मार्कस ने मुँह में लिया – चूसने लगा, काटने लगा। दाँत से निप्पल्स खींचे। शिवानी की सिसकारियाँ – “उफ्फ… मार्कस… चूसो… मेरे निप्पल्स… दर्द दो…” मार्कस की दाढ़ी उसके स्तनों पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू, लेकिन चूत से पानी बह रहा था।
मार्कस ने शिवानी को बेड पर पटका। टाँगें फैलाईं। उसकी जीभ चूत पर – क्लिट चूसने लगा। शिवानी चीखी, “आह… मार्कस… जीभ अंदर… चाटो मेरी चूत… रस पी लो…” मार्कस ने उँगलियाँ डालीं – चार, तेज-तेज। शिवानी का शरीर काँप रहा था – “आह… उँगलियाँ… और तेज… मेरी चूत… फाड़ो…” वो झड़ गई – पानी मार्कस के मुँह पर। मार्कस ने पैंट उतारी। लंड बाहर – 13 इंच, सबसे मोटा, काला, नसें फूली। शिवानी की आँखें फैल गईं – “मार्कस… ये… नहीं आएगा…” मार्कस हँसा – “आएगा… और फाड़ेगा।”
मार्कस ने लंड चूत पर रगड़ा – क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी – “डालो… सहन नहीं होता…” मार्कस ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना कि वो चीखी, “आआआह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा…” मार्कस ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की साँसें तेज – “मार्कस… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… गहरा…” मार्कस ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर आर्क हो गया – दर्द और मजा का तूफान। “आह… पूरा… अब धक्के… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…”
मार्कस ने धक्के शुरू किए – स्लो लेकिन बेहद गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। “मार्कस… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” मार्कस ने स्पीड बढ़ाई – अब क्रूर धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज कमरे में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो मार्कस की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “मार्कस… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा। मार्कस नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान – “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी हूँ…”
पोजीशन बदली – शिवानी ऊपर। वो उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “मार्कस… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को निचोड़ रही है… आह… हाँ…” मार्कस नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, निप्पल्स काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी मार्कस के लंड पर।
फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। मार्कस पीछे से। बाल पकड़े। गांड पर थप्पड़ – जोरदार। शिवानी की गांड लाल। “तेरी गांड… आज इसे भी फाड़ूँगा।” मार्कस ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” मार्कस ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” मार्कस ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… मार्कस… मेरी गांड… चोदो… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” मार्कस ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
मार्कस ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेटे। मार्कस ने कहा, “शिवानी… तू सबसे अच्छी है। पैसे… 2 लाख डॉलर।” शिवानी मुस्कुराई – “अगली बार और ज्यादा।” वो उठी, कपड़े पहने। घर लौटी। प्रिंस इंतजार कर रहा था। शिवानी ने सब बताया – “प्रिंस… आज एक अफ्रीकी मर्द ने मुझे चोदा… इतना गहरा… इतना मोटा…” प्रिंस उत्तेजित हो गया – “जान… डिटेल्स…” शिवानी ने बताते हुए प्रिंस को चोदा। दोनों झड़े।
शिवानी की प्यास अब और बढ़ गई थी – मुंबई की सनसनी, फैंस की भूख, और नई-नई बॉडीज।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)