14-02-2026, 08:19 AM
रोहन मेहरा का अफेयर अब शिवानी की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका था। हर हफ्ते वो पटना आता, और शिवानी उसके साथ घंटों बिताती – कभी टेरेस पर, कभी बेडरूम में, कभी कार में। प्रिंस अब पूरी तरह कुकॉल्ड बन चुका था – वो देखता, और उसे मजा आता। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से शिवानी को कुछ अजीब लग रहा था। उल्टियाँ, थकान, और पीरियड्स लेट। वो चुपके से फार्मेसी गई, प्रेग्नेंसी टेस्ट किट ली। घर लौटकर बाथरूम में टेस्ट किया – दो लाइनें। पॉजिटिव। शिवानी का दिल धड़क उठा। “ये… बच्चा… किसका है? प्रिंस का? या रोहन का?” वो रोने लगी। प्रिंस के साथ वो धीरे-धीरे सेक्स करती थी, लेकिन रोहन के साथ जंगली – बिना प्रोटेक्शन के। टाइमिंग मैच कर रही थी – रोहन का। ड्रामा की शुरुआत। शिवानी सोच रही थी, “प्रिंस को कैसे बताऊँ? वो खुश होगा… लेकिन सच जानकर टूट जाएगा।”
शाम को रोहन आया। आरव दादी के पास था। प्रिंस ने रोहन को देखा – “आइए… आज डिनर साथ।” लेकिन शिवानी ने प्रिंस को बाहर भेज दिया – “प्रिंस… जाओ, कुछ सामान लाओ। मैं रोहन से बात करूँगी।” प्रिंस चला गया – वो जानता था क्या होगा। शिवानी रोहन को बेडरूम में ले गई। “रोहन… मैं प्रेग्नेंट हूँ। तेरा बच्चा है।” रोहन की आँखें चमक उठीं। “सच? तो आज जश्न मनाते हैं… मैं तुझे इतना चोदूँगा कि तू कभी नहीं भूलेगी।”
रोहन ने शिवानी को बाहों में लिया। चुंबन शुरू – गहरा, जंगली। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, गले तक। शिवानी सिसकारी, “आह… रोहन… धीरे… लेकिन गहरा… मैं प्रेग्नेंट हूँ…” रोहन ने कहा, “तो और मजा आएगा… तेरी बॉडी अब और सेक्सी हो गई है।” रोहन ने शिवानी की साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज के हुक खोल दिए। स्तन बाहर – भरे हुए, निप्पल्स सख्त, गर्भावस्था की वजह से और उभरे। रोहन ने दोनों हाथों से दबाए – जोर से। शिवानी चीखी, “आह… दबाओ… मेरे स्तन… फाड़ दो… दर्द दो… लेकिन बच्चे को ध्यान…” रोहन ने मुँह में लिया – चूसने लगा, जीभ से घुमाया, दाँत से हल्के से काटा। शिवानी की पीठ काँप रही थी। “रोहन… चूसो… मेरे निप्पल्स… दूध आने वाला है… चूस लो… आह… हाँ…” रोहन ने जोर से चूसा, जैसे दूध निकाल रहा हो। शिवानी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। वो सोच रही थी, “ये बच्चा रोहन का है… और वो मुझे चूस रहा है…”
रोहन ने शिवानी को बेड पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी लेटी थी – पेट हल्का उभरा, चूत गीली, चमक रही थी। रोहन ने अपनी शर्ट उतारी – चौड़ी छाती, मजबूत बाहें। पैंट उतारी। लंड बाहर – 9 इंच, मोटा, नसें फूली। शिवानी ने देखा, “रोहन… डालो… लेकिन धीरे… बच्चा…” रोहन मुस्कुराया। “धीरे… लेकिन गहरा।” वो शिवानी की टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा – क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी, “डालो… सहन नहीं होता…” रोहन ने धीरे से सिर डाला – फिर आधा अंदर। शिवानी सिसकारी – “आह… गहरा… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… बच्चे के पास…” रोहन ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर काँप गया – “आह… पूरा… अब धक्के… धीरे-धीरे…” रोहन ने धक्के शुरू किए – स्लो, लेकिन बहुत गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। “रोहन… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… लेकिन ध्यान से…” रोहन ने स्पीड बढ़ाई – जोरदार लेकिन कंट्रोल्ड धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो रोहन की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – “रोहन… जोर से… मेरी चूत… तेरे बच्चे की माँ है… चोद… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा। रोहन नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान – “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी हूँ…”
पोजीशन बदली – शिवानी ऊपर। वो उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “रोहन… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को निचोड़ रही है… आह… हाँ…” रोहन नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, निप्पल्स काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी रोहन के लंड पर।
फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। रोहन पीछे से। बाल पकड़े। गांड पर थप्पड़ – हल्के से। “तेरी गांड… आज इसे भी लूँगा।” रोहन ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” रोहन ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” रोहन ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… रोहन… मेरी गांड… चोदो… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” रोहन ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
रोहन ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेटे। रोहन ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… ये बच्चा मेरा है… मैं तुझे मुंबई ले जाऊँगा।” शिवानी रो पड़ी – “नहीं… प्रिंस को बताना है।”
अगले दिन शिवानी ने प्रिंस को बताया – “प्रिंस… मैं प्रेग्नेंट हूँ। रोहन का बच्चा है।” प्रिंस चौंका, लेकिन मुस्कुराया – “जान… मुझे पता था। मैं खुश हूँ। बच्चा मेरा ही होगा।” शिवानी ने गले लगाया। आरव ने पूछा, “मम्मी… क्या हुआ?” शिवानी ने कहा, “बेटा… तेरे लिए एक नया भाई-बहन आने वाला है।” आरव खुश हो गया। लेकिन शिवानी के मन में अब दो प्यार – प्रिंस और रोहन। अफेयर जारी रहा – लेकिन अब प्रिंस की इजाजत से। शिवानी की जिंदगी अब और जंगली हो गई थी।
शाम को रोहन आया। आरव दादी के पास था। प्रिंस ने रोहन को देखा – “आइए… आज डिनर साथ।” लेकिन शिवानी ने प्रिंस को बाहर भेज दिया – “प्रिंस… जाओ, कुछ सामान लाओ। मैं रोहन से बात करूँगी।” प्रिंस चला गया – वो जानता था क्या होगा। शिवानी रोहन को बेडरूम में ले गई। “रोहन… मैं प्रेग्नेंट हूँ। तेरा बच्चा है।” रोहन की आँखें चमक उठीं। “सच? तो आज जश्न मनाते हैं… मैं तुझे इतना चोदूँगा कि तू कभी नहीं भूलेगी।”
रोहन ने शिवानी को बाहों में लिया। चुंबन शुरू – गहरा, जंगली। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, गले तक। शिवानी सिसकारी, “आह… रोहन… धीरे… लेकिन गहरा… मैं प्रेग्नेंट हूँ…” रोहन ने कहा, “तो और मजा आएगा… तेरी बॉडी अब और सेक्सी हो गई है।” रोहन ने शिवानी की साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज के हुक खोल दिए। स्तन बाहर – भरे हुए, निप्पल्स सख्त, गर्भावस्था की वजह से और उभरे। रोहन ने दोनों हाथों से दबाए – जोर से। शिवानी चीखी, “आह… दबाओ… मेरे स्तन… फाड़ दो… दर्द दो… लेकिन बच्चे को ध्यान…” रोहन ने मुँह में लिया – चूसने लगा, जीभ से घुमाया, दाँत से हल्के से काटा। शिवानी की पीठ काँप रही थी। “रोहन… चूसो… मेरे निप्पल्स… दूध आने वाला है… चूस लो… आह… हाँ…” रोहन ने जोर से चूसा, जैसे दूध निकाल रहा हो। शिवानी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। वो सोच रही थी, “ये बच्चा रोहन का है… और वो मुझे चूस रहा है…”
रोहन ने शिवानी को बेड पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी लेटी थी – पेट हल्का उभरा, चूत गीली, चमक रही थी। रोहन ने अपनी शर्ट उतारी – चौड़ी छाती, मजबूत बाहें। पैंट उतारी। लंड बाहर – 9 इंच, मोटा, नसें फूली। शिवानी ने देखा, “रोहन… डालो… लेकिन धीरे… बच्चा…” रोहन मुस्कुराया। “धीरे… लेकिन गहरा।” वो शिवानी की टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा – क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी, “डालो… सहन नहीं होता…” रोहन ने धीरे से सिर डाला – फिर आधा अंदर। शिवानी सिसकारी – “आह… गहरा… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… बच्चे के पास…” रोहन ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर काँप गया – “आह… पूरा… अब धक्के… धीरे-धीरे…” रोहन ने धक्के शुरू किए – स्लो, लेकिन बहुत गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। “रोहन… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… लेकिन ध्यान से…” रोहन ने स्पीड बढ़ाई – जोरदार लेकिन कंट्रोल्ड धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो रोहन की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – “रोहन… जोर से… मेरी चूत… तेरे बच्चे की माँ है… चोद… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा। रोहन नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान – “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी हूँ…”
पोजीशन बदली – शिवानी ऊपर। वो उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “रोहन… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को निचोड़ रही है… आह… हाँ…” रोहन नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, निप्पल्स काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी रोहन के लंड पर।
फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। रोहन पीछे से। बाल पकड़े। गांड पर थप्पड़ – हल्के से। “तेरी गांड… आज इसे भी लूँगा।” रोहन ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” रोहन ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” रोहन ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… रोहन… मेरी गांड… चोदो… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” रोहन ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
रोहन ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेटे। रोहन ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… ये बच्चा मेरा है… मैं तुझे मुंबई ले जाऊँगा।” शिवानी रो पड़ी – “नहीं… प्रिंस को बताना है।”
अगले दिन शिवानी ने प्रिंस को बताया – “प्रिंस… मैं प्रेग्नेंट हूँ। रोहन का बच्चा है।” प्रिंस चौंका, लेकिन मुस्कुराया – “जान… मुझे पता था। मैं खुश हूँ। बच्चा मेरा ही होगा।” शिवानी ने गले लगाया। आरव ने पूछा, “मम्मी… क्या हुआ?” शिवानी ने कहा, “बेटा… तेरे लिए एक नया भाई-बहन आने वाला है।” आरव खुश हो गया। लेकिन शिवानी के मन में अब दो प्यार – प्रिंस और रोहन। अफेयर जारी रहा – लेकिन अब प्रिंस की इजाजत से। शिवानी की जिंदगी अब और जंगली हो गई थी।


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