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Romance शिवानी और प्रिंस की प्रेम कहानी
#33
रोहन मेहरा का आगमन शिवानी की जिंदगी में एक नया अध्याय खोल चुका था। पटना में उनका लग्जरी विला अब और भी चमकदार हो गया था – अब्दुल्लाह के गिफ्ट पैसे से प्रिंस ने नई कारें, विदेशी फर्नीचर और एक प्राइवेट जिम बनवाया था। आरव अब 4 साल का था – कॉलेज जाता, शाम को शिवानी के साथ खेलता। “मम्मी, आज कॉलेज में मैंने पेंटिंग बनाई!” शिवानी उसे गले लगाती, लेकिन उसकी आँखों में अब रोहन की याद आ जाती। रोहन हर हफ्ते पटना आता – “बिजनेस मीटिंग” के बहाने। प्रिंस अब कुकॉल्ड का मजा लेने लगा था – वो जानता था शिवानी रोहन के साथ क्या करती है, और उसे देखकर उत्तेजना होती। लेकिन शिवानी अब रोहन के साथ गहरे अफेयर में थी – वो सिर्फ सेक्स नहीं, बल्कि एक नई पावर गेम थी।
एक शाम रोहन आया – ब्लैक सूट में, महँगी परफ्यूम की खुशबू। आरव ने उसे देखकर “अंकल रोहन!” कहकर गले लगाया। शिवानी ने आरव को दादी के पास भेज दिया – “बेटा, आज मम्मी-पापा की पार्टी है।” आरव खुशी-खुशी चला गया। डिनर के बाद प्रिंस ने कहा, “रोहन जी… आज रात आप हमारे साथ रहिए।” रोहन मुस्कुराया – “शिवानी… तैयार हो?” शिवानी ने हाँ में सिर हिलाया। प्रिंस ने रोहन और शिवानी को बेडरूम में छोड़ दिया – वो बाहर कुर्सी पर बैठा, देखने के लिए।
शिवानी ने लाल साड़ी पहनी थी – लो ब्लाउज, पेटीकोट के नीचे कुछ नहीं। रोहन ने उसे बाहों में लिया। चुंबन शुरू – गहरा, जीभें आपस में लड़ रही थीं। रोहन की जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, गले तक। शिवानी सिसकारी, “आह… रोहन… गहरा… और जोर से…” रोहन ने साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज के हुक खोल दिए। शिवानी के स्तन बाहर – भरे हुए, निप्पल्स सख्त। रोहन ने दोनों हाथों से दबाए – इतना जोर से कि शिवानी चीखी, “आह… दबाओ… मेरे स्तन… फाड़ दो…” रोहन ने मुँह में लिया – चूसने लगा, जीभ से घुमाया, दाँत से काटा। शिवानी की पीठ काँप रही थी। “रोहन… चूसो… मेरे निप्पल्स… दर्द दो… मजा दो…” रोहन ने जोर से चूसा, जैसे दूध निकाल रहा हो। शिवानी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। प्रिंस बाहर से देख रहा था – उसका लंड सख्त हो गया, वो हिलाने लगा।
रोहन ने शिवानी को बेड पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी लेटी थी। रोहन ने अपनी शर्ट उतारी – चौड़ी छाती, मजबूत बाहें। पैंट उतारी। लंड बाहर – 9 इंच, मोटा, नसें फूली। शिवानी ने देखा, “रोहन… डालो… मेरी चूत जल रही है…” रोहन ने शिवानी की टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा – क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी, “डालो… सहन नहीं होता…” रोहन ने धीरे से सिर डाला – फिर एक झटके में पूरा अंदर। शिवानी चीखी – “आआह्ह… गहरा… फाड़ दो मेरी चूत…” रोहन धक्के मारने लगा – जोरदार, गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। “रोहन… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” रोहन ने स्पीड बढ़ाई – अब क्रूर धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो रोहन की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “रोहन… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा। रोहन नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान – “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी हूँ…”
पोजीशन बदली – शिवानी ऊपर। वो उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “रोहन… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को निचोड़ रही है… आह… हाँ…” रोहन नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, निप्पल्स काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी रोहन के लंड पर। प्रिंस बाहर से देख रहा था – “शिवानी… कितनी हॉट लग रही हो…” वो हिलाने लगा। शिवानी ने प्रिंस को देखा – “प्रिंस… देख… रोहन मुझे चोद रहा है… तुझे मजा आ रहा है?” प्रिंस ने हाँ कहा – “हाँ… बहुत…”
फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। रोहन पीछे से। बाल पकड़े। गांड पर थप्पड़ – लाल निशान। “तेरी गांड… आज इसे भी लूँगा।” रोहन ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” रोहन ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” रोहन ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… रोहन… मेरी गांड… चोदो… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” रोहन ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
रोहन ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेटे। रोहन ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू सबसे अच्छी है। मैं हर हफ्ते आऊँगा।” शिवानी मुस्कुराई – “आओ… लेकिन प्रिंस देखेगा।” प्रिंस अंदर आया – शिवानी ने उसे किस किया। “प्रिंस… तुझे मजा आया?” प्रिंस ने हाँ कहा – “हाँ… बहुत।”
रोहन अब हर हफ्ते आता – कभी दिल्ली से, कभी मुंबई से। शिवानी उसके साथ अफेयर में थी – गहरी, जंगली। प्रिंस देखता, और उसे मजा आता। आरव घर में खेलता – “मम्मी… अंकल रोहन कब आएंगे?” शिवानी हँसती – “जल्दी आएंगे बेटा।” लेकिन उसके मन में अब रोहन की यादें – और नई भूख।
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RE: शिवानी और प्रिंस की प्रेम कहानी - by Shivani4u - 14-02-2026, 08:15 AM



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