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Romance शिवानी और प्रिंस की प्रेम कहानी
#30
दुबई की वो रातें अब शिवानी और प्रिंस की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थीं। अब्दुल्लाह का 1 मिलियन डॉलर गिफ्ट – वो पैसा अब उनके बैंक में था। प्रिंस ने कंपनी छोड़ दी थी, और शिवानी के साथ मिलकर पटना में एक बड़ा घर खरीद लिया था – गंगा किनारे, लग्जरी विला, जहां से नदी की लहरें दिखतीं। पैसा इतना था कि दोनों अब सबसे अमीर थे – कारें, गहने, ट्रैवल। लेकिन वो पैसा अब्दुल्लाह का गिफ्ट था, और उसकी शर्त थी – “प्रिंस… तू शिवानी का गुलाम बनेगा। उसके हर आदेश मानना। वो जो कहे, वो कर। मैं कभी-कभी दुबई बुलाऊँगा… और तू देखेगा।” प्रिंस ने हाँ कह दिया था – कुकॉल्ड का मजा उसे अब आने लगा था। शिवानी अब क्वीन थी – घर की मालकिन, और प्रिंस उसका आज्ञाकारी। आरव अब 4 साल का था – शरारती, लेकिन वो माँ के साथ खेलता, और प्रिंस को “पापा” कहकर गले लगाता। शिवानी आरव को देखकर सोचती, “ये मेरा बेटा… लेकिन अब हम अमीर हैं। लेकिन प्रिंस… तू अब मेरे आदेश मान।”
एक शाम शिवानी ने प्रिंस को बुलाया। आरव दादी के पास खेलने गया था। घर में सिर्फ दोनों। शिवानी ने लाल नाइट गाउन पहना था – पारदर्शी, उसके भरे स्तन और गीली चूत साफ दिख रही थी। “प्रिंस… आज रात तू मेरा गुलाम बनेगा। मेरा हर आदेश मान।” प्रिंस की आँखें चमक उठीं – “हाँ जान… तू कह… मैं करूँगा।” शिवानी ने कहा, “पहले… मेरे पैर चाट।” प्रिंस घुटनों पर बैठ गया। शिवानी के पैर चाटने लगा – जीभ से, उँगलियाँ चूसने लगा। शिवानी सिसकारी, “आह… अच्छे से… मेरे पैर… गुलाम…” प्रिंस ने चाटा, मालिश किया। शिवानी ने गाउन ऊपर किया। “अब… मेरी चूत चाट।” प्रिंस ने जीभ डाली – क्लिट चूसने लगा। शिवानी चीखी, “आह… जीभ अंदर… चाटो मेरी चूत… रस पी लो… गुलाम… और तेज…” प्रिंस ने तेज चाटा, उँगलियाँ डालीं – दो, फिर तीन। शिवानी झड़ गई – पानी प्रिंस के मुँह पर। “पी लो… मेरा रस… गुलाम।”
शिवानी ने प्रिंस को बेड पर लिटाया। “अब तू लेट… मैं तेरे ऊपर।” वो प्रिंस के लंड पर बैठी – उछलने लगी। लंड अंदर-बाहर। शिवानी चिल्लाई, “आह… तेरा लंड… मेरी चूत में… लेकिन तू हिलेगा नहीं… मैं चोदूँगी…” प्रिंस लेटा रहा, शिवानी उछल रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। वो प्रिंस के निप्पल्स काट रही थी। “आह… मजा आ रहा है… तू मेरा गुलाम… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ…” शिवानी झड़ गई। प्रिंस ने कहा, “जान… मैं भी…” लेकिन शिवानी ने कहा, “नहीं… अभी नहीं झड़ना… मेरा आदेश।”
शिवानी ने प्रिंस को पलटा। “अब डॉगी में… लेकिन तू हिलेगा नहीं… मैं पीछे से लूँगी।” वो प्रिंस के लंड पर बैठी – रिवर्स काउगर्ल। उछलने लगी। “आह… गहरा… तेरा लंड… मेरी चूत फाड़ रहा है… लेकिन तू गुलाम… देख… मैं तेरे ऊपर हूँ…” शिवानी की गांड प्रिंस के सामने उछल रही थी। वो अपनी उँगली अपनी गांड में डाली – “देख… मैं खुद को चोद रही हूँ… तू देख…” प्रिंस कराह रहा था, लेकिन हिल नहीं रहा। शिवानी फिर झड़ गई – पानी प्रिंस के लंड पर।
अब शिवानी ने आदेश दिया, “अब तू मुझे चोद… लेकिन धीरे-धीरे… गहरा… और मैं कहूँ तभी तेज।” प्रिंस ने शिवानी को लिटाया। टाँगें कंधों पर। लंड डाला – धीरे-धीरे। शिवानी सिसकारी, “आह… गहरा… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… धीरे… अब तेज…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई – जोरदार धक्के। थप-थप। शिवानी चिल्लाई, “हाँ… जोर से… फाड़ दो… लेकिन मेरा आदेश… अब रुक…” प्रिंस रुका। शिवानी तड़पी – “अब फिर… तेज…” प्रिंस ने फिर शुरू – गहरे धक्के। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो प्रिंस की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। “आह… हाँ… अब स्पर्म… अंदर… लेकिन इजाजत से…” प्रिंस ने स्पर्म छोड़ा। शिवानी झड़ गई – साथ में।
रात भर चली। शिवानी ने प्रिंस को बाँधा – रस्सी से। “अब तू बंधा… मैं तेरे ऊपर।” वो उछलती रही, प्रिंस तड़पता रहा। “आह… गुलाम… तेरा लंड… मेरी चूत में… मैं चोद रही हूँ…” शिवानी ने स्ट्रैप-ऑन पहना – प्रिंस की गांड में डाला। प्रिंस चीखा, “आह… जान… दर्द…” शिवानी बोली, “चुप… मेरा आदेश… मजा ले…” वो धक्के मारती रही। प्रिंस को मजा आ रहा था। शिवानी झड़ी – कई बार।
सुबह शिवानी बोली, “प्रिंस… अब हम अमीर हैं… लेकिन तू हमेशा मेरा गुलाम बनेगा।” प्रिंस ने किस किया, “हाँ जान… मुझे मजा आता है।” आरव घर आया – “मम्मी… पापा…” शिवानी ने उसे गले लगाया। “अब हम सब खुश रहेंगे… अमीर… और साथ।”
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RE: शिवानी और प्रिंस की प्रेम कहानी - by Shivani4u - 2 hours ago



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