2 hours ago
दिल्ली की चकाचौंध में शिवानी की जिंदगी अब एक थ्रिलर फिल्म जैसी हो चुकी थी। फरहान का अपार्टमेंट – जहां वो हर रात चुदाई की दावत देता – अब कैद जैसा लगता। फरहान शिवानी को कहता, “तू मेरी है… मेरी * रंडी। मैं तुझे ,., लंड से इतना चोदूँगा कि तू प्रिंस को भूल जाएगी।” लेकिन शिवानी की आँखों में पटना की यादें थीं – प्रिंस की बाहें, आरव की मुस्कान। वो चुपके से प्रिंस को मैसेज करती, लेकिन फरहान का ट्रैकर सब देखता। सस्पेंस की शुरुआत यहीं से हुई – शिवानी को पता चला कि फरहान ने उसके शरीर पर एक छोटा सा ट्रैकर चिपका दिया था – दिल के पास, जहां कोई नहीं देखता। “अगर भागी… तो मैं आरव को मार दूँगा।” फरहान की धमकी। शिवानी रोती, लेकिन उसकी चूत में वो आग जलती रहती – इंटरफेथ का मजा, ,., मर्दों की क्रूरता, * लड़की का अपमान।
एक दिन फरहान ने कहा, “शिवानी… आज एक नया क्लाइंट है। नाम है अब्दुल्लाह। वो दुबई से आया है, एक बड़ा शेख। ,.,, धार्मिक, लेकिन सेक्स का भूखा शेर। वो फरहान का राइवल है – बिजनेस में, और अब तुझे लेकर। वो कह रहा है, ‘तेरी * माल को एक रात देदे, मैं उसे अपनी हवस से तोड़ दूँगा।’ अगर तू उसे खुश कर देगी… तो वो मेरे साथ सौदा करेगा – दिल्ली का बिजनेस आधा-आधा। नहीं तो… वो तुझे किडनैप कर लेगा दुबई।” शिवानी का दिल धड़का – ड्रामा की शुरुआत। अब्दुल्लाह – एक नया ,., राइवल, 45 साल का, लंबा, सफेद दाढ़ी, आँखें आग जैसी, बॉडी जैसे कोई योद्धा। वो फरहान से बदला लेना चाहता था – एक पुरानी दुश्मनी, जहां फरहान ने उसकी एक रंडी चुराई थी। अब अब्दुल्लाह शिवानी को अपना बनाना चाहता था – इंटरफेथ का थ्रिल, एक * लड़की को ,., शेख की हवस से तोड़ना।
शिवानी तैयार हुई – सफेद साड़ी, पारदर्शी ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। उसके निप्पल्स कपड़े से उभर रहे थे, जैसे कोई चुनौती। वो अब्दुल्लाह के होटल सुइट में पहुँची – 7-स्टार, टॉप फ्लोर, जहां से दिल्ली की लाइट्स चमक रही थीं। लेकिन सुइट में गार्ड थे – सस्पेंस बढ़ गया। अब्दुल्लाह ने दरवाजा खोला – सफेद थोब में, दाढ़ी लंबी, आँखें गहरी। “शिवानी… आ गई। फरहान की * रंडी। आज रात तू मेरी बनेगी। मैं तुझे इतनी गहराई से चोदूँगा कि तू अल्लाह का नाम लेगी।” उसकी आवाज में धमकी और हवस दोनों थे। शिवानी काँप गई – “अब्दुल्लाह… ये सिर्फ एक रात है।” अब्दुल्लाह हँसा – “एक रात में तुझे तोड़ दूँगा। फरहान को पता चलेगा – उसकी माल अब मेरी है।”
अब्दुल्लाह ने शिवानी को बालकनी में ले गया – बाहर दिल्ली की ठंडी हवा, नीचे शहर की हलचल। वो शिवानी को रेलिंग से सटा दिया। साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज खोला। स्तन बाहर – अब्दुल्लाह ने दोनों हाथों से दबाए, इतना जोर से कि शिवानी चीखी – “आह… अब्दुल्लाह… दर्द… लेकिन… और जोर से…” अब्दुल्लाह ने मुँह में लिया – चूसने लगा, काटने लगा। दाँत से निप्पल्स खींचे। शिवानी की सिसकारियाँ हवा में गूँज रही थीं। “उफ्फ… अब्दुल्लाह… मेरे निप्पल्स… फाड़ दो… काटो… दर्द दो… मजा आ रहा है…” अब्दुल्लाह की दाढ़ी उसके स्तनों पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू, लेकिन चूत गीली। अब्दुल्लाह ने हाथ नीचे किया – साड़ी ऊपर, चूत पर उँगली। “देख… कितनी गीली… * रंडी… ,., शेख के लिए तड़प रही है।” शिवानी रोते हुए बोली, “हाँ… तड़प रही हूँ… डालो… लेकिन बाहर… कोई देख लेगा…” अब्दुल्लाह हँसा – “देख ले… तू शहर की रंडी है।”
अब्दुल्लाह ने थोब उतारा। लंड बाहर – 11 इंच का, मोटा, काला, नसें फूली, सिर बड़ा। शिवानी की साँस रुक गई। “अब्दुल्लाह… ये… नहीं आएगा… फाड़ देगा…” अब्दुल्लाह ने शिवानी को रेलिंग पर झुकाया – गांड बाहर की तरफ। लंड चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी, “डालो… सहन नहीं होता… लेकिन धीरे…” अब्दुल्लाह ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना कि वो चीखी, “आआआह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा डालो…” अब्दुल्लाह ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की साँसें तेज। “अब्दुल्लाह… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… हर धड़कन… गहरा… और गहरा…” अब्दुल्लाह ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर हिल गया – दर्द और मजा का तूफान। “आह… पूरा… अब धक्के… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…”
अब्दुल्लाह ने धक्के शुरू किए – स्लो लेकिन बेहद गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। बालकनी की रेलिंग हिल रही थी। शिवानी चिल्ला रही थी, “आह… हाँ… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” अब्दुल्लाह ने स्पीड बढ़ाई – अब क्रूर धक्के। थप-थप की आवाज हवा में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो अब्दुल्लाह की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “अब्दुल्लाह… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा, अब्दुल्लाह के लंड पर। अब्दुल्लाह नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान चेहरे पर – दर्द और मजा का परफेक्ट फ्यूजन। “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी * रंडी हूँ… चोद… पूरी रात…”
पोजीशन बदली – अब्दुल्लाह ने शिवानी को गोद में उठाया। स्टैंडिंग में चोदा – बालकनी पर, शहर की लाइट्स के सामने। शिवानी उछल रही थी, “अब्दुल्लाह… देख… दिल्ली देख रही है… तेरी * रंडी चुद रही है… आह… हाँ… गहरा…” अब्दुल्लाह धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को काट रहा था, गर्दन पर दाढ़ी रगड़ रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी नीचे गिरा।
फिर बेड पर – डॉगी स्टाइल। अब्दुल्लाह पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ – इतने जोर से कि निशान पड़ गए। “तेरी गांड… आज इसे भी फाड़ूँगा।” अब्दुल्लाह ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” अब्दुल्लाह ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” अब्दुल्लाह ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… अब्दुल्लाह… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” अब्दुल्लाह ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
अब्दुल्लाह ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा, सबसे लंबा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। अब्दुल्लाह ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई। फरहान को छोड़। मेरे साथ दुबई चलेगी।” शिवानी की आँखों में आँसू – “अब्दुल्लाह… ये रात… सबसे गहरी थी… लेकिन मैं… मैं अब किसी की नहीं। मैं अपनी हूँ।”
शिवानी उठी। कपड़े पहने। अब्दुल्लाह ने 30 लाख नोट्स दिए। “ये तेरे लिए।” शिवानी ने लिए – लेकिन मन में फैसला था। वो दिल्ली छोड़कर पटना लौटने वाली थी। प्रिंस के पास। आरव के पास। लेकिन क्या वो वापस आ पाएगी? या फरहान और अब्दुल्लाह की जंग में फँस जाएगी?
सस्पेंस बढ़ गया – शिवानी ट्रेन में थी, पटना की ओर। लेकिन फरहान को पता चला – वो गुस्से से पागल। “शिवानी… तू भाग रही है? मैं तुझे मार दूँगा।” वो अपने आदमियों को भेजा। ट्रेन में एक आदमी शिवानी के पास आया – “फरहान ने भेजा है। वापस चलो… नहीं तो आरव को मार देंगे।” शिवानी का दिल रुक गया। थ्रिलर – वो ट्रेन से कूदने की कोशिश की, लेकिन आदमी ने पकड़ लिया। ड्रामा – शिवानी चीखी, “छोड़ो… प्रिंस को बुलाओ…” लेकिन आदमी ने फोन किया – फरहान को। “सर… पकड़ लिया।”
लेकिन तभी एक कॉल आया – प्रिंस का। प्रिंस ने शिवानी को ट्रैक किया था – करण की मदद से। “शिवानी… मैं आ रहा हूँ।” ट्रेन स्टेशन पर कंफ्रंटेशन – फरहान के आदमी, प्रिंस, करण। लड़ाई हुई। थ्रिलर – गोली चली, लेकिन शिवानी सुरक्षित। फरहान भागा। अब्दुल्लाह को पता चला – वो दुबई से आया। “शिवानी… तू मेरी है।”
लेकिन शिवानी अब प्रिंस के साथ थी। “प्रिंस… मैंने सब गलत किया… लेकिन अब बस तू।” प्रिंस ने गले लगाया। लेकिन शिवानी की प्यास… वो अब भी जल रही थी।
एक दिन फरहान ने कहा, “शिवानी… आज एक नया क्लाइंट है। नाम है अब्दुल्लाह। वो दुबई से आया है, एक बड़ा शेख। ,.,, धार्मिक, लेकिन सेक्स का भूखा शेर। वो फरहान का राइवल है – बिजनेस में, और अब तुझे लेकर। वो कह रहा है, ‘तेरी * माल को एक रात देदे, मैं उसे अपनी हवस से तोड़ दूँगा।’ अगर तू उसे खुश कर देगी… तो वो मेरे साथ सौदा करेगा – दिल्ली का बिजनेस आधा-आधा। नहीं तो… वो तुझे किडनैप कर लेगा दुबई।” शिवानी का दिल धड़का – ड्रामा की शुरुआत। अब्दुल्लाह – एक नया ,., राइवल, 45 साल का, लंबा, सफेद दाढ़ी, आँखें आग जैसी, बॉडी जैसे कोई योद्धा। वो फरहान से बदला लेना चाहता था – एक पुरानी दुश्मनी, जहां फरहान ने उसकी एक रंडी चुराई थी। अब अब्दुल्लाह शिवानी को अपना बनाना चाहता था – इंटरफेथ का थ्रिल, एक * लड़की को ,., शेख की हवस से तोड़ना।
शिवानी तैयार हुई – सफेद साड़ी, पारदर्शी ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। उसके निप्पल्स कपड़े से उभर रहे थे, जैसे कोई चुनौती। वो अब्दुल्लाह के होटल सुइट में पहुँची – 7-स्टार, टॉप फ्लोर, जहां से दिल्ली की लाइट्स चमक रही थीं। लेकिन सुइट में गार्ड थे – सस्पेंस बढ़ गया। अब्दुल्लाह ने दरवाजा खोला – सफेद थोब में, दाढ़ी लंबी, आँखें गहरी। “शिवानी… आ गई। फरहान की * रंडी। आज रात तू मेरी बनेगी। मैं तुझे इतनी गहराई से चोदूँगा कि तू अल्लाह का नाम लेगी।” उसकी आवाज में धमकी और हवस दोनों थे। शिवानी काँप गई – “अब्दुल्लाह… ये सिर्फ एक रात है।” अब्दुल्लाह हँसा – “एक रात में तुझे तोड़ दूँगा। फरहान को पता चलेगा – उसकी माल अब मेरी है।”
अब्दुल्लाह ने शिवानी को बालकनी में ले गया – बाहर दिल्ली की ठंडी हवा, नीचे शहर की हलचल। वो शिवानी को रेलिंग से सटा दिया। साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज खोला। स्तन बाहर – अब्दुल्लाह ने दोनों हाथों से दबाए, इतना जोर से कि शिवानी चीखी – “आह… अब्दुल्लाह… दर्द… लेकिन… और जोर से…” अब्दुल्लाह ने मुँह में लिया – चूसने लगा, काटने लगा। दाँत से निप्पल्स खींचे। शिवानी की सिसकारियाँ हवा में गूँज रही थीं। “उफ्फ… अब्दुल्लाह… मेरे निप्पल्स… फाड़ दो… काटो… दर्द दो… मजा आ रहा है…” अब्दुल्लाह की दाढ़ी उसके स्तनों पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू, लेकिन चूत गीली। अब्दुल्लाह ने हाथ नीचे किया – साड़ी ऊपर, चूत पर उँगली। “देख… कितनी गीली… * रंडी… ,., शेख के लिए तड़प रही है।” शिवानी रोते हुए बोली, “हाँ… तड़प रही हूँ… डालो… लेकिन बाहर… कोई देख लेगा…” अब्दुल्लाह हँसा – “देख ले… तू शहर की रंडी है।”
अब्दुल्लाह ने थोब उतारा। लंड बाहर – 11 इंच का, मोटा, काला, नसें फूली, सिर बड़ा। शिवानी की साँस रुक गई। “अब्दुल्लाह… ये… नहीं आएगा… फाड़ देगा…” अब्दुल्लाह ने शिवानी को रेलिंग पर झुकाया – गांड बाहर की तरफ। लंड चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी, “डालो… सहन नहीं होता… लेकिन धीरे…” अब्दुल्लाह ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना कि वो चीखी, “आआआह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा डालो…” अब्दुल्लाह ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की साँसें तेज। “अब्दुल्लाह… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… हर धड़कन… गहरा… और गहरा…” अब्दुल्लाह ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर हिल गया – दर्द और मजा का तूफान। “आह… पूरा… अब धक्के… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…”
अब्दुल्लाह ने धक्के शुरू किए – स्लो लेकिन बेहद गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। बालकनी की रेलिंग हिल रही थी। शिवानी चिल्ला रही थी, “आह… हाँ… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” अब्दुल्लाह ने स्पीड बढ़ाई – अब क्रूर धक्के। थप-थप की आवाज हवा में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो अब्दुल्लाह की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “अब्दुल्लाह… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा, अब्दुल्लाह के लंड पर। अब्दुल्लाह नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान चेहरे पर – दर्द और मजा का परफेक्ट फ्यूजन। “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी * रंडी हूँ… चोद… पूरी रात…”
पोजीशन बदली – अब्दुल्लाह ने शिवानी को गोद में उठाया। स्टैंडिंग में चोदा – बालकनी पर, शहर की लाइट्स के सामने। शिवानी उछल रही थी, “अब्दुल्लाह… देख… दिल्ली देख रही है… तेरी * रंडी चुद रही है… आह… हाँ… गहरा…” अब्दुल्लाह धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को काट रहा था, गर्दन पर दाढ़ी रगड़ रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी नीचे गिरा।
फिर बेड पर – डॉगी स्टाइल। अब्दुल्लाह पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ – इतने जोर से कि निशान पड़ गए। “तेरी गांड… आज इसे भी फाड़ूँगा।” अब्दुल्लाह ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” अब्दुल्लाह ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” अब्दुल्लाह ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… अब्दुल्लाह… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” अब्दुल्लाह ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
अब्दुल्लाह ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा, सबसे लंबा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। अब्दुल्लाह ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई। फरहान को छोड़। मेरे साथ दुबई चलेगी।” शिवानी की आँखों में आँसू – “अब्दुल्लाह… ये रात… सबसे गहरी थी… लेकिन मैं… मैं अब किसी की नहीं। मैं अपनी हूँ।”
शिवानी उठी। कपड़े पहने। अब्दुल्लाह ने 30 लाख नोट्स दिए। “ये तेरे लिए।” शिवानी ने लिए – लेकिन मन में फैसला था। वो दिल्ली छोड़कर पटना लौटने वाली थी। प्रिंस के पास। आरव के पास। लेकिन क्या वो वापस आ पाएगी? या फरहान और अब्दुल्लाह की जंग में फँस जाएगी?
सस्पेंस बढ़ गया – शिवानी ट्रेन में थी, पटना की ओर। लेकिन फरहान को पता चला – वो गुस्से से पागल। “शिवानी… तू भाग रही है? मैं तुझे मार दूँगा।” वो अपने आदमियों को भेजा। ट्रेन में एक आदमी शिवानी के पास आया – “फरहान ने भेजा है। वापस चलो… नहीं तो आरव को मार देंगे।” शिवानी का दिल रुक गया। थ्रिलर – वो ट्रेन से कूदने की कोशिश की, लेकिन आदमी ने पकड़ लिया। ड्रामा – शिवानी चीखी, “छोड़ो… प्रिंस को बुलाओ…” लेकिन आदमी ने फोन किया – फरहान को। “सर… पकड़ लिया।”
लेकिन तभी एक कॉल आया – प्रिंस का। प्रिंस ने शिवानी को ट्रैक किया था – करण की मदद से। “शिवानी… मैं आ रहा हूँ।” ट्रेन स्टेशन पर कंफ्रंटेशन – फरहान के आदमी, प्रिंस, करण। लड़ाई हुई। थ्रिलर – गोली चली, लेकिन शिवानी सुरक्षित। फरहान भागा। अब्दुल्लाह को पता चला – वो दुबई से आया। “शिवानी… तू मेरी है।”
लेकिन शिवानी अब प्रिंस के साथ थी। “प्रिंस… मैंने सब गलत किया… लेकिन अब बस तू।” प्रिंस ने गले लगाया। लेकिन शिवानी की प्यास… वो अब भी जल रही थी।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)