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Romance शिवानी और प्रिंस की प्रेम कहानी
#27
दिल्ली की चमचमाती रातें अब शिवानी की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थीं। फरहान का लग्जरी अपार्टमेंट – जहां से दिल्ली की स्काईलाइन दिखती, वो जगह अब शिवानी का कैदखाना और जुनून का अड्डा दोनों थी। फरहान – वो ,., किंगपिन – शिवानी को हर रात चोदता, लेकिन वो चुदाई अब रूटीन हो गई थी। शिवानी की चूत में वो आग अब भी जल रही थी, जो कभी बुझती नहीं। वो सोचती, “फरहान… तू अच्छा है… लेकिन मुझे और चाहिए। गहरा दर्द… वो थ्रिल जो जान ले ले। और इंटरफेथ का वो मजा… * लड़की ,., लंडों से चुदते हुए… वो अपमान और मजा का मिश्रण।” लेकिन फरहान ने शिवानी को सख्ती से बाँध रखा था – “तू मेरी रंडी है। बाहर किसी से मिली तो आरव को ले लूँगा।” सस्पेंस की शुरुआत यहीं से हुई। शिवानी को पता चला – फरहान ने उसके फोन में ट्रैकर लगाया था। वो हर कदम देख रहा था।
एक शाम फरहान ने कहा, “शिवानी… आज एक नया क्लाइंट है। नाम है असलम। मेरा पुराना राइवल। वो कराची से आया है, लेकिन दिल्ली में बिजनेस है। वो तुझे देखकर बोला है – ‘तेरी * रंडी को एक रात देदे, मैं उसे तोड़ दूँगा।’ अगर तू उसे खुश कर देगी… तो वो मेरे साथ सौदा करेगा। नहीं तो… वो तुझे चुरा लेगा।” शिवानी का दिल धड़का। असलम – एक और ,.,, पाकिस्तानी बैकग्राउंड, दिल्ली के डार्क वर्ल्ड का खिलाड़ी। वो फरहान का राइवल था – ड्रग्स और प्रॉस्टिट्यूशन की जंग में। असलम ने फरहान को चैलेंज किया था – “शिवानी को भेज। अगर वो मेरी हो गई… तो तेरा बिजनेस मुंबई में बंद।” सस्पेंस बढ़ गया – शिवानी जानती थी, अगर असलम जीता… तो फरहान उसे मार देगा। या असलम उसे ले जाएगा। थ्रिलर का खेल शुरू हो गया।
शिवानी तैयार हुई – लाल साड़ी, पारदर्शी ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। उसके निप्पल्स कपड़े से उभर रहे थे, कमर पतली, कूल्हे भरे। वो असलम के होटल सुइट में पहुँची – 5-स्टार, टॉप फ्लोर, जहां से दिल्ली की लाइट्स चमक रही थीं। असलम ने दरवाजा खोला – 40 साल का, काला रंग, मोटी दाढ़ी, आँखें शिकारी जैसी, बॉडी बॉडीबिल्डर जैसी। “शिवानी… आ गई। फरहान की * माल। आज रात तू मेरी बनेगी।” उसकी आवाज में धमकी थी। शिवानी काँप गई, लेकिन उसकी चूत में सिहरन दौड़ गई। “असलम… ये सिर्फ एक रात है।” असलम हँसा – “एक रात में तुझे इतना चोदूँगा कि तू फरहान को भूल जाएगी।”
असलम ने शिवानी को खींचकर बालकनी में ले गया – बाहर दिल्ली की हवा, नीचे शहर की लाइट्स। वो शिवानी को रेलिंग से सटा दिया। साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज खोला। स्तन बाहर – असलम ने दोनों हाथों से दबाए, इतना जोर से कि शिवानी चीखी – “आह… असलम… दर्द… लेकिन… और जोर से…” असलम ने मुँह में लिया – चूसने लगा, काटने लगा। दाँत से निप्पल्स खींचे। शिवानी की सिसकारियाँ हवा में गूँज रही थीं। “उफ्फ… असलम… मेरे निप्पल्स… फाड़ दो… काटो… दर्द दो… मजा आ रहा है…” असलम की दाढ़ी उसके स्तनों पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू, लेकिन चूत गीली। असलम ने हाथ नीचे किया – साड़ी ऊपर, चूत पर उँगली। “देख… कितनी गीली… * रंडी… ,., लंड के लिए तड़प रही है।” शिवानी रोते हुए बोली, “हाँ… तड़प रही हूँ… डालो… लेकिन बाहर… कोई देख लेगा…” असलम हँसा – “देख ले… तू शहर की रंडी है।”
असलम ने पैंट उतारी। लंड बाहर – 12 इंच का, सबसे मोटा, काला, नसें फूली, सिर बड़ा। शिवानी की साँस रुक गई। “असलम… ये… नहीं आएगा… फाड़ देगा…” असलम ने शिवानी को रेलिंग पर झुकाया – गांड बाहर की तरफ। लंड चूत पर रगड़ा – हवा में, लाइट्स में। “आएगा… और फाड़ेगा…” असलम ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी चीखी – “आआआह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा डालो…” असलम ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना गहरा कि वो रोने लगी, लेकिन मजा इतना कि वो खुद पीछे धक्का देने लगी। “असलम… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… हर धड़कन… गहरा… और गहरा…” असलम ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर हिल गया – दर्द और मजा का तूफान। “आह… पूरा… अब धक्के… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…”
असलम ने धक्के शुरू किए – स्लो लेकिन बेहद गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। बालकनी की रेलिंग हिल रही थी। शिवानी चिल्ला रही थी, “आह… हाँ… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” असलम ने स्पीड बढ़ाई – अब क्रूर धक्के। थप-थप की आवाज हवा में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो असलम की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “असलम… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा, असलम के लंड पर। असलम नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान चेहरे पर – दर्द और मजा का परफेक्ट फ्यूजन। “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी * रंडी हूँ… चोद… पूरी रात…”
पोजीशन बदली – असलम ने शिवानी को गोद में उठाया। स्टैंडिंग में चोदा – बालकनी पर, शहर की लाइट्स के सामने। शिवानी उछल रही थी, “असलम… देख… दिल्ली देख रही है… तेरी * रंडी चुद रही है… आह… हाँ… गहरा…” असलम धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को काट रहा था, गर्दन पर दाढ़ी रगड़ रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी नीचे गिरा।
फिर बेड पर – डॉगी स्टाइल। असलम पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ – इतने जोर से कि निशान पड़ गए। “तेरी गांड… आज इसे भी फाड़ूँगा।” असलम ने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” असलम ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” असलम ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… असलम… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” असलम ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
असलम ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा, सबसे लंबा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। असलम ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई। फरहान को छोड़। मेरे साथ मुंबई चलेगी।” शिवानी की आँखों में आँसू – “असलम… ये रात… सबसे गहरी थी… लेकिन मैं… मैं अब किसी की नहीं। मैं अपनी हूँ।”
शिवानी उठी। कपड़े पहने। असलम ने 20 लाख नोट्स दिए। “ये तेरे लिए।” शिवानी ने लिए – लेकिन मन में फैसला था। वो दिल्ली छोड़कर पटना लौटने वाली थी। प्रिंस के पास। आरव के पास। लेकिन क्या वो वापस आ पाएगी? या फरहान और असलम की जंग में फँस जाएगी?
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RE: शिवानी और प्रिंस की प्रेम कहानी - by Shivani4u - 2 hours ago



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