13-02-2026, 10:54 PM
Season I - Episode II
रात का वक़्त था। आसमान पर आधा चाँद, और मोहल्ले की गली में पीली स्ट्रीटलाइट्स की टिमटिमाती रोशनी।
कायला के मम्मी-पापा बाहर गए थे, और घर में गाढ़ा सन्नाटा पसरा था।
उस सन्नाटे में, एक गूंगी, गाढ़ी भूख उसके अंदर साँस लेने लगी -- वही, जो मिश्रा जी के साथ पहली बार के बाद से कभी शांत नहीं हुई थी।
कायला के जिस्म में एक खिंचाव-सा उठा -- जैसे उसके भीतर मादा कुतिया की आत्मा पलट रही हो,जिसे न इज़्ज़त चाहिए न इजाज़त।
धीरे-धीरे उसने कपड़े उतारने शुरू किए -- हर परत उतरते ही साँसें भारी होती गईं।
नंगी होने के बाद, अलमारी से पुराना चमड़े का पट्टा निकाला, गले में बाँधा।
आईने में खुद को देखा -- भारी, झूलते उरोज; गोल, मांस से भरी गांड हवा में; जाँघों के बीच चमकती, गीली चूत; और चेहरा... जैसे किसी मालिक की पालकायला मादा, पूरी तरह पेश।
चारों हाथ-पाँव पर झुककर वो आँगन की तरफ बढ़ी। ठंडी मिट्टी ने घुटनों को चूम लिया, रात की हवा ने नंगी चमड़ी पर सनसनाहट दौड़ा दी।
नीम के पुराने पेड़ के पास जाकर रुक गई -- गर्दन में पट्टा, भारी छातियाँ नीचे झूलतीं, गांड उठी हुई, और चूत से गरम भाप जैसी महक उठती हुई।
तभी गली का एक आवारा कुत्ता अधखुले गेट से अंदर झाँकने लगा।
उसकी आँखें नंगी मादा के जिस्म पर टिक गईं -- और वो ज़ोर-ज़ोर से भौंकने लगा।
गेट की दरार से कायला की गोरी चमड़ी पीली रोशनी में चमक रही थी, बाकी सब छाया में छुपा था।
यही शोर सुनकर सामने वाले घर से मोनू बाहर निकला -- 35 साल का, लंबा-चौड़ा, फिट मगर थोड़ा भारी, शादीशुदा, और आँखों में भूखी चमक।
उसने पहले कुत्ते को लात मारकर भगाया, फिर आधा खुला गेट देखकर धीरे-धीरे अंदर झाँका।
गेट से झाँकते ही उसकी साँस अटक गई --
अंधेरे में पहले बस पीठ और दूधों की झलक दिखी, फिर आँखें मिलते ही उसने साफ़ देखा -- कायला, नंगी... चारों हाथ-पाँव पर, भारी गांड हवा में, हल्की खुली चूत, गर्दन में पट्टा, और ठंडी हवा में काँपती।
मोनू के होंठों पर वही शिकारी मुस्कान थी।
लंड पैंट में धड़क रहा था, जैसे कह रहा हो -- "बस निकाल मुझे..."
गेट को उसने धीरे से खोला, चर्रर्र की आवाज़ गूँजी, और वो फिसलते कदमों से पेड़ की तरफ बढ़ा।
उसकी नज़र कायला के गले में बँधे पट्टे से नीचे सरकी -- भारी, झूलते दूध, पसलियों से नीचे गोल पेट, और फिर हवा में उठी हुई कायला की गांड, जिसके नीचे चमकती गीली दरार में हल्की चाँदनी पड़ रही थी।
पास पहुँचते ही उसने पट्टे की जंजीर को उँगलियों में लपेटा, हल्के झटके से खींचा।
कायला की गर्दन आगे को आई, और कायला चारों पाँवों पर रेंगते हुए उसकी तरफ सरक गई।
दोनों की नज़रें मिलीं -- कायला की आँखें पूरी तरह भीगी हुई, जैसे कह रही हों "जो चाहो करो".
मोनू झुककर कायला के कान के पास आया --
"अरे वाह... कायला कुतिया बनके घूम रही है यहाँ... ये पट्टा किसने बाँधा?"
कायला के कान में उसकी गर्म साँस उतरी, और कायला ने अनजाने में होंठ काट लिए।
वो कायला को देखने का मज़ा ले रहा था, और साथ-साथ कायला को छूने की शुरुआत।
पहले उँगलियाँ कायला के गले से होते हुए कंधे पर गईं -- हल्के-हल्के, जैसे तुझे चिढ़ा रहा हो।
फिर कंधे से नीचे सरकते हुए, हथेली कायला के भारी दूधों तक पहुँची।
उसने एक-एक दूध को पूरी हथेली में भरकर तौला, जैसे उनका वज़न महसूस कर रहा हो।
अंगूठों से निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घूमाया, फिर धीरे-धीरे दबाव बढ़ाता गया --
पहले हल्की पकड़, फिर मसलना, और फिर चुटकी लेकर निप्पल मरोड़ना।
कायला की साँसें भारी होने लगीं, और कायला के होंठों से हल्की कराह निकली।
मोनू ने निप्पल को होंठों में लिया, पहले जीभ से चाटा, फिर हल्के दाँतों से दबाया।
उसकी जीभ बार-बार टिप पर रुकती, जिससे कायला के पूरे जिस्म में झटके दौड़ते।
इसी बीच, उसका दूसरा हाथ कायला की पीठ के नीचे सरकने लगा।
पहले कायला की गांड के गोल हिस्सों को दबाया, फिर हथेली से गाल अलग कर दरार में उँगलियाँ ले गया।
कायला की गरम दरार पर उँगली की हल्की रगड़ हुई, और चूत से चिपचिपा रस अंगूठे पर लग गया।
वो मुस्कुराया --
"ऑफिस जाती है तो कुछ दिखाई नहीं देता, सब कुछ ढका हुआ..." उसने धीरे से कहा, निप्पल को फिर से चूसते हुए,
"आज तो सब नंगा सामने है... और इतना गीला... जैसे पहले से मेरा इंतज़ार कर रही हो।"
उसने उँगली चूत में हल्के से डाली -- पहले सिर्फ टिप, फिर धीरे-धीरे आधी, फिर पूरी।
उँगली अंदर-बाहर होने लगी, और हर बार बाहर निकलते ही रस की पतली लकीर कायला की जाँघ पर गिरने लगी।
मोनू ने दूसरी उँगली भी डाल दी, और अब वो दोनों को अंदर गहराई में घुमाते हुए, कायला के रस को फैलाने लगा।
कायला पीछे की तरफ हल्का-सा झुक गई, जैसे उसकी उँगलियों को और जगह दे रही हो।
वो बीच-बीच में कायला की गांड पर थपकी भी देता, जिससे तेरा पूरा बदन हिल जाता।
उसकी दो उँगलियाँ कायला की चूत में गहरे तक धँसी हुई थीं।
हर धक्का अंदर तक जा रहा था, और हर बार बाहर आने पर रस की पतली, गरम परत उसकी उँगलियों पर चिपक जाती।
मोनू का अंगूठा बीच-बीच में कायला के चूत के ऊपर वाले हिस्से को हल्के-हल्के रगड़ देता, जिससे कायला के शरीर में छोटे-छोटे झटके उठते।
फिर उसने दूसरी हाथ को कायला की गांड की दरार के ऊपर लाकर बस वहीं रगड़ना शुरू किया --
गांड के छेद के ठीक ऊपर उसकी उँगली का दबाव, लेकिन अंदर नहीं डाली...
बस गीलेपन को फैला रहा था, जैसे धीरे-धीरे कायला को तैयार कर रहा हो।
कायला के होंठों से एक लंबी कराह निकली --
"म्म्म... आह..."
कायला की जाँघें अनजाने में और खुलने लगीं।
मोनू ने कायला की चूत में डली दोनों उँगलियों को एक आखिरी बार गहरे तक धकेला, फिर धीरे-धीरे बाहर निकाला।
रस से चमकती उसकी उँगलियाँ चाँदनी में गीले शीशे जैसी लग रही थीं।
उसने उन्हें आँखों के सामने उठाकर देखा, फिर कायला के कान के पास झुककर फुसफुसाया --
"देख... मेरी कुतिया कितनी गीली है...तू"
उसकी गीली उँगलियाँ अब कायला के निप्पल पर आ गईं -- ठंडे रस की नमी और गर्म उँगली का स्पर्श, दोनों ने मिलकर कायला को और काँपा दिया।
वो हल्के से मुस्कुराया, और फिर से हाथ नीचे ले गया, जैसे तय कर रहा हो कि अब अगला कदम उठाना है या कायला को और छेड़ना है।
मोनू ने पैंट की बेल्ट खोली, फिर ज़िप नीचे खिसकाकर पैंट और चड्डी को पूरी तरह टखनों तक गिरा दिया।
अब उसका मोटा, गरम, आधा खड़ा लंड आज़ाद होकर बाहर था -- ऊपर की नसें हल्की-हल्की धड़क रही थीं, और नीचे भारी, गरम अंडकोष हल्का-हल्का झूल रहे थे।
वो एक कदम आगे आया, लंड कायला के होंठों से बस एक इंच दूर।
कायला की नज़र उसके लंड से ऊपर उसकी आँखों में गई, और फिर वापस नीचे उतर आई।
कायला धीरे-धीरे दोनों हाथों से उसे थामती है -- एक हाथ लंड पर ऊपर-नीचे सरकता हुआ, दूसरा हाथ नीचे अंडकोष को सहलाता हुआ।
मोनू ने हल्की कराह निकाली, "हाँ... ऐसे ही..."
कायला झुककर पहले अंडकोष को चूमती है, फिर उन्हें एक-एक करके मुँह में लेकर जीभ से चारों ओर गीला करती है।
कायला की गरम साँस और जीभ की नमी से उसके अंडकोष भारी और और भी गरम हो जाते हैं।
फिर कायला ऊपर आती है, लंड के नीचे से टिप तक जीभ फेरते हुए, जैसे पूरी लंबाई को नाप रही हो।
टिप पर पहुँचकर उसे गोल-गोल चाटती है, और धीरे से मुँह में खींच लेती है।
पहले आधा, फिर पूरा -- होंठ कसकर, जीभ चारों तरफ घूमती हुई।
लार कायला के होंठों के कोनों से बहकर ठुड्डी तक आ रही है, और मोनू के भारी अंडकोष अब कायला की ठुड्डी से टकराकर झूल रहे हैं, हर बार गहरी ठोकर के साथ।
मोनू ने कायला के बालों की मुट्ठी पकड़ी, और धकेलना शुरू किया --
हर बार लंड कायला के गले की गहराई तक धँसता, कायला की आँखों में पानी आ जाता, और मुँह से चप-चप-चप की आवाज़ गूँजती।
"चूस... ऐसे जैसे मेरी आखिरी साँस बचानी हो..." वो दाँत भींचकर फुसफुसाता है।
कायला थोड़ी देर बाद लंड मुँह से निकालती है, होंठ लाल और गीले, और कहती है --
"आह... मोनू... जोर से सांस ...लेती है"
मोनू बस मुस्कुराता है, और लंड को कायला के होंठों पर फिर रखता है --
"अभी तो बस शुरुआत है, कुतिया... इसे पूरा गीला कर..."
मोनू ने कायला के होंठों पर लंड टिकाया, आँखों में सीधी नज़र डालते हुए हल्के से अंदर धकेला।
इस बार वो गला तक नहीं ले गया -- बस इतना कि कायला गरम, कसकर पकड़े होंठों से उसे गीला करती रहे।
कायला की जीभ हर बार नीचे की नस पर सरकती, और मोनू की साँस भारी होती जा रही थी।
कुछ धक्कों के बाद उसने खुद ही बाहर खींच लिया, और गरम, गीले लंड को कायला के होंठों और गाल पर हल्के-हल्के रगड़ने लगा।
लार और उसकी गरमी कायला के चेहरे पर फैल गई।
वो झुककर कायला के कान में फुसफुसाया --
"कुतिया... क़िस्मत में जो होता है... सब मिलता है... और कायला की क़िस्मत में मैं हूँ।"
उसने लंड की टिप को फिर कायला के होंठों पर दबाया, जैसे तुझसे फिर मुँह में लेने की माँग कर रहा हो, और कायला के बाल अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ लिए।
जैसे ही रिदम तेज़ हुआ, फोन बजा -- स्क्रीन पर "Mummy"।
मोनू ने कायला के बाल कसकर पकड़ लिए, इशारा किया -- मुँह से मत निकालना, और कॉल उठा ली।
आवाज़ एकदम सीधी-सादी -- "हाँ मम्मी..."
मम्मी: "कहाँ है मोनू? पापा बुला रहे हैं।"
मोनू (कमर धीरे-धीरे चलाते हुए): "अरे... इधर गुप्ता अंकल के घर में एक कुत्ता घुस आया था..."
मम्मी: "तो?"
मोनू (कायला के सिर को और नीचे धकेलते हुए): "सोचा देख लूँ... फिर सुना कि गुप्ता अंकल घर पे नहीं हैं... उनकी लड़की अकेली थी... तो कुत्ते को भगा रहा था।"
मम्मी: "अच्छा, कब आ रहा है?"
मोनू (गहरी साँस दबाते हुए): "बस थोड़ी देर में... यहाँ का काम निपटा के..."
नीचे कायला लार से उसका लंड भिगो रही थी, और गले में उतरते हर धक्के के साथ हल्की कराह रोकने की कोशिश कर रही थी।
मम्मी: "ठीक है, जल्दी आना... पापा पूछ रहे थे।"
मोनू (होंठों पर मुस्कान): "जी मम्मी... आता हूँ..."
कॉल कटते ही उसने कायला के बाल छोड़कर तुझे खड़ा किया, पलटा, और चारों हाथ-पाँव पर झुका दिया।
"अब चूत में ले मेरी...कुतिया" -- और एक झटके में पूरी तरह अंदर अंदर घुसना चाहा। पर नाकाम
फिर मोनू ने कायला की कमर पकड़कर और झुका दिया -- अब कायला की गांड एकदम ऊपर उठी हुई थी, और चूत पूरी तरह खुली हुई।
उसने एक हाथ से पेड़ का तना पकड़कर बैलेंस बनाया, दूसरे से अपना मोटा लंड पकड़ा।
वो हल्का झुका, अपने होंठों से कायला के कान के पास फुसफुसाया --
"पीछे से आसान नहीं होता... तेरी जैसी टाइट चूत में घुसाने के लिए सही तैयारी चाहिए..."
उसने लंड पर थूक गिराया, फिर हाथ से पूरी लंबाई पर मल दिया -- चिकनाई और गर्माहट एक साथ।
फिर उँगलियों में थोड़ा थूक लेकर कायला की चूत के होंठों पर लगाया, और धीरे-धीरे उँगली अंदर सरकाई।
"म्म्म... ये देख... कैसे पकड़ रही है मेरी उँगली..."
कायला हल्की सी कराह निकाली, और मोनू ने उँगली से कायला के अंदर गोल-गोल घुमाकर नमी फैला दी।
अब उसने लंड का टिप कायला के चूत के मुहाने पर रखा, हल्के-हल्के दबाया --
पहले बस थोड़ा सा अंदर, फिर एकदम झटके से पूरी गहराई तक धँसा दिया।
कायला की कमर एकदम आगे को धकेली, मुँह से आह्ह की आवाज़ निकली।
"बस... अब देख कैसे फिसलता है..."
वो धीमे-धीमे बाहर खींचता और फिर पूरे बल से अंदर मारता -- हर बार 'थप-थप' की गीली आवाज़ के साथ।
लंड कायला के अंदर इतना गीला हो चुका था कि हर स्लाइड में एक गरम, चिकना एहसास फैल जाता।
मोनू ने लंड बाहर निकाला और कायला को और झुकाया, कायला के दोनों हाथ ज़मीन पर टिके हुए, गांड हवा में।
उसने कायला के पीठ के नीचे से हाथ बढ़ाकर दूध को मसलते हुए, दूसरे हाथ में थूक भरी और अपने मोटे, धड़कते लंड पर मल दी।
फिर उसने एक भरपूर थूक कायला की चूत के मुँह पर टपकाई, उँगली से हल्के-हल्के घुमा कर गीलापन फैला दिया।
"अब देख, कुतिया..." वो फुसफुसाया, और लंड का सिरा कायला की चूत के चेद पर रख दिया।
पहले हल्के-हल्के रगड़ा, ताकि कायला और भीग जाए, फिर एक झटके में आधा लंड अंदर डाल दिया।
कायला की चीख सी निकल पड़ी -- आह्ह...... मम्मी, पर रात में ये कहीं दीवारों के बीच दब गयी।
मोनू ने पकड़ बनाए रखी, हल्का-सा बाहर खींचा, फिर और अंदर धकेला।
धीरे-धीरे पूरा लंड कायला के अंदर डूब गया, और उसकी जाँघें, जिन पर हल्के बाल थे, कायला की चिकनी गांड से टकराईं।
उस रगड़ में पसीने की गरमी और बालों की चुभन थी -- कायला सिहर गई।
फिर शुरू हुआ असली खेल --
"थप-थप-थप"... हर धक्के पर उसकी जाँघें कायला की गांड से टकरातीं, रस की बूंदें नीचे गिरतीं, और हवा में गीली ताल गूँजती।
मोनू के हाथ कभी कायला के दूध दबाते, कभी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारते, और कभी उँगलियाँ चूत के मुँह पर दबाते।
"इतनी टाइट चूत है कायला की ... लगता है पहली बार खुल रही है आज पूरा," उसने कराहते हुए कहा।
"अह्ह्ह्ह.............. आराम से," कायला हाँफते हुए बोली।
उसके हर ठोके के साथ, लंड फिसलकर और गहराई में जाता, फिर गीली आवाज़ के साथ बाहर आता।
पसीना उसकी छाती से टपककर कायला की पीठ पर गिरता, और दोनों की साँसें तेज़ से तेज़ होती जातीं।
मोनू का चेहरा कायला के गले के पास आ गया, उसकी सांसें गरम और टूटती हुई।
आखिरी कुछ धक्के इतने गहरे थे कि लगता था पूरा पेट भर देगा।
अचानक वो लंड बाहर खींचता है, और बिना वक्त गँवाए एक झटके में कायला को पकड़कर पलट देता है।
कायला का सीना पेड़ से सट जाता है -- भारी, पसीने से चमकते उरोज तने के खुरदरेपन से दब जाते हैं, निप्पल उस छूअन से और भी सख्त हो जाते हैं।
मोनू पीछे से कमर पकड़ता है, लंड को जड़ तक तानता है, और गरम, गाढ़ा वीर्य कायला की गांड और जांघों के बीच गिरा देता है।
गर्मी का एक लहर सा अहसास फैल जाता है -- मोटी, गरम बूँदें नीचे सरककर कायला की टांगों के बीच से बहने लगती हैं।
वो हाथ से वीर्य कायला की गांड पर फैला देता है -- धीरे, जैसे अपने नाम का निशान छोड़ रहा हो।
फिर कायला के कान के पास झुककर फुसफुसाता है,
"अब याद रख... ये चूत मेरी है।"
तभी दूर से एक कार रुकने की आवाज़ आती है -- कपूर अंकल लौट आए हैं। अचानक दूर से कार का हॉर्न सुनाई दिया।
कपूर अंकल अपनी कार से उतरे और सीधे घर की तरफ चले गए। कायला के घर के सामने रहते हैं इनका बेटा है सनी।
मोनू झट से पैंट ऊपर करता है, कायला को देख मुस्कुराता है,
"दीवाली आने वाली है... अब कायला मेरी पटाखा है... कैसे फूटेगी, ये उस दिन बताऊँगा।"
वो गली के मोड़ पर मुड़कर अपने घर की तरफ चलता है।
कायला वहीं पेड़ से सटी, अभी भी सांसें संभालने की कोशिश में, हल्की कांपती खड़ी है।
उधर मोनू के घर के गेट पर घंटी बजने की टन-टन आवाज़ सुनाई देती है।
उसकी मम्मी की ऊँची आवाज़ साफ सुनाई देती है --
"बहुत देर कर दी... आधा घंटा पहले कॉल किया था! चल, पापा बुला रहे हैं।"
दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आती है... और सब चुप।
कायला धीरे-धीरे घर के अंदर जाती है, सोफे पर गिरती है, और थकान, पसीना, और वीर्य की मिली-जुली गरमी में बेसुध होकर सो जाती है।
रात का वक़्त था। आसमान पर आधा चाँद, और मोहल्ले की गली में पीली स्ट्रीटलाइट्स की टिमटिमाती रोशनी।
कायला के मम्मी-पापा बाहर गए थे, और घर में गाढ़ा सन्नाटा पसरा था।
उस सन्नाटे में, एक गूंगी, गाढ़ी भूख उसके अंदर साँस लेने लगी -- वही, जो मिश्रा जी के साथ पहली बार के बाद से कभी शांत नहीं हुई थी।
कायला के जिस्म में एक खिंचाव-सा उठा -- जैसे उसके भीतर मादा कुतिया की आत्मा पलट रही हो,जिसे न इज़्ज़त चाहिए न इजाज़त।
धीरे-धीरे उसने कपड़े उतारने शुरू किए -- हर परत उतरते ही साँसें भारी होती गईं।
नंगी होने के बाद, अलमारी से पुराना चमड़े का पट्टा निकाला, गले में बाँधा।
आईने में खुद को देखा -- भारी, झूलते उरोज; गोल, मांस से भरी गांड हवा में; जाँघों के बीच चमकती, गीली चूत; और चेहरा... जैसे किसी मालिक की पालकायला मादा, पूरी तरह पेश।
चारों हाथ-पाँव पर झुककर वो आँगन की तरफ बढ़ी। ठंडी मिट्टी ने घुटनों को चूम लिया, रात की हवा ने नंगी चमड़ी पर सनसनाहट दौड़ा दी।
नीम के पुराने पेड़ के पास जाकर रुक गई -- गर्दन में पट्टा, भारी छातियाँ नीचे झूलतीं, गांड उठी हुई, और चूत से गरम भाप जैसी महक उठती हुई।
तभी गली का एक आवारा कुत्ता अधखुले गेट से अंदर झाँकने लगा।
उसकी आँखें नंगी मादा के जिस्म पर टिक गईं -- और वो ज़ोर-ज़ोर से भौंकने लगा।
गेट की दरार से कायला की गोरी चमड़ी पीली रोशनी में चमक रही थी, बाकी सब छाया में छुपा था।
यही शोर सुनकर सामने वाले घर से मोनू बाहर निकला -- 35 साल का, लंबा-चौड़ा, फिट मगर थोड़ा भारी, शादीशुदा, और आँखों में भूखी चमक।
उसने पहले कुत्ते को लात मारकर भगाया, फिर आधा खुला गेट देखकर धीरे-धीरे अंदर झाँका।
गेट से झाँकते ही उसकी साँस अटक गई --
अंधेरे में पहले बस पीठ और दूधों की झलक दिखी, फिर आँखें मिलते ही उसने साफ़ देखा -- कायला, नंगी... चारों हाथ-पाँव पर, भारी गांड हवा में, हल्की खुली चूत, गर्दन में पट्टा, और ठंडी हवा में काँपती।
मोनू के होंठों पर वही शिकारी मुस्कान थी।
लंड पैंट में धड़क रहा था, जैसे कह रहा हो -- "बस निकाल मुझे..."
गेट को उसने धीरे से खोला, चर्रर्र की आवाज़ गूँजी, और वो फिसलते कदमों से पेड़ की तरफ बढ़ा।
उसकी नज़र कायला के गले में बँधे पट्टे से नीचे सरकी -- भारी, झूलते दूध, पसलियों से नीचे गोल पेट, और फिर हवा में उठी हुई कायला की गांड, जिसके नीचे चमकती गीली दरार में हल्की चाँदनी पड़ रही थी।
पास पहुँचते ही उसने पट्टे की जंजीर को उँगलियों में लपेटा, हल्के झटके से खींचा।
कायला की गर्दन आगे को आई, और कायला चारों पाँवों पर रेंगते हुए उसकी तरफ सरक गई।
दोनों की नज़रें मिलीं -- कायला की आँखें पूरी तरह भीगी हुई, जैसे कह रही हों "जो चाहो करो".
मोनू झुककर कायला के कान के पास आया --
"अरे वाह... कायला कुतिया बनके घूम रही है यहाँ... ये पट्टा किसने बाँधा?"
कायला के कान में उसकी गर्म साँस उतरी, और कायला ने अनजाने में होंठ काट लिए।
वो कायला को देखने का मज़ा ले रहा था, और साथ-साथ कायला को छूने की शुरुआत।
पहले उँगलियाँ कायला के गले से होते हुए कंधे पर गईं -- हल्के-हल्के, जैसे तुझे चिढ़ा रहा हो।
फिर कंधे से नीचे सरकते हुए, हथेली कायला के भारी दूधों तक पहुँची।
उसने एक-एक दूध को पूरी हथेली में भरकर तौला, जैसे उनका वज़न महसूस कर रहा हो।
अंगूठों से निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घूमाया, फिर धीरे-धीरे दबाव बढ़ाता गया --
पहले हल्की पकड़, फिर मसलना, और फिर चुटकी लेकर निप्पल मरोड़ना।
कायला की साँसें भारी होने लगीं, और कायला के होंठों से हल्की कराह निकली।
मोनू ने निप्पल को होंठों में लिया, पहले जीभ से चाटा, फिर हल्के दाँतों से दबाया।
उसकी जीभ बार-बार टिप पर रुकती, जिससे कायला के पूरे जिस्म में झटके दौड़ते।
इसी बीच, उसका दूसरा हाथ कायला की पीठ के नीचे सरकने लगा।
पहले कायला की गांड के गोल हिस्सों को दबाया, फिर हथेली से गाल अलग कर दरार में उँगलियाँ ले गया।
कायला की गरम दरार पर उँगली की हल्की रगड़ हुई, और चूत से चिपचिपा रस अंगूठे पर लग गया।
वो मुस्कुराया --
"ऑफिस जाती है तो कुछ दिखाई नहीं देता, सब कुछ ढका हुआ..." उसने धीरे से कहा, निप्पल को फिर से चूसते हुए,
"आज तो सब नंगा सामने है... और इतना गीला... जैसे पहले से मेरा इंतज़ार कर रही हो।"
उसने उँगली चूत में हल्के से डाली -- पहले सिर्फ टिप, फिर धीरे-धीरे आधी, फिर पूरी।
उँगली अंदर-बाहर होने लगी, और हर बार बाहर निकलते ही रस की पतली लकीर कायला की जाँघ पर गिरने लगी।
मोनू ने दूसरी उँगली भी डाल दी, और अब वो दोनों को अंदर गहराई में घुमाते हुए, कायला के रस को फैलाने लगा।
कायला पीछे की तरफ हल्का-सा झुक गई, जैसे उसकी उँगलियों को और जगह दे रही हो।
वो बीच-बीच में कायला की गांड पर थपकी भी देता, जिससे तेरा पूरा बदन हिल जाता।
उसकी दो उँगलियाँ कायला की चूत में गहरे तक धँसी हुई थीं।
हर धक्का अंदर तक जा रहा था, और हर बार बाहर आने पर रस की पतली, गरम परत उसकी उँगलियों पर चिपक जाती।
मोनू का अंगूठा बीच-बीच में कायला के चूत के ऊपर वाले हिस्से को हल्के-हल्के रगड़ देता, जिससे कायला के शरीर में छोटे-छोटे झटके उठते।
फिर उसने दूसरी हाथ को कायला की गांड की दरार के ऊपर लाकर बस वहीं रगड़ना शुरू किया --
गांड के छेद के ठीक ऊपर उसकी उँगली का दबाव, लेकिन अंदर नहीं डाली...
बस गीलेपन को फैला रहा था, जैसे धीरे-धीरे कायला को तैयार कर रहा हो।
कायला के होंठों से एक लंबी कराह निकली --
"म्म्म... आह..."
कायला की जाँघें अनजाने में और खुलने लगीं।
मोनू ने कायला की चूत में डली दोनों उँगलियों को एक आखिरी बार गहरे तक धकेला, फिर धीरे-धीरे बाहर निकाला।
रस से चमकती उसकी उँगलियाँ चाँदनी में गीले शीशे जैसी लग रही थीं।
उसने उन्हें आँखों के सामने उठाकर देखा, फिर कायला के कान के पास झुककर फुसफुसाया --
"देख... मेरी कुतिया कितनी गीली है...तू"
उसकी गीली उँगलियाँ अब कायला के निप्पल पर आ गईं -- ठंडे रस की नमी और गर्म उँगली का स्पर्श, दोनों ने मिलकर कायला को और काँपा दिया।
वो हल्के से मुस्कुराया, और फिर से हाथ नीचे ले गया, जैसे तय कर रहा हो कि अब अगला कदम उठाना है या कायला को और छेड़ना है।
मोनू ने पैंट की बेल्ट खोली, फिर ज़िप नीचे खिसकाकर पैंट और चड्डी को पूरी तरह टखनों तक गिरा दिया।
अब उसका मोटा, गरम, आधा खड़ा लंड आज़ाद होकर बाहर था -- ऊपर की नसें हल्की-हल्की धड़क रही थीं, और नीचे भारी, गरम अंडकोष हल्का-हल्का झूल रहे थे।
वो एक कदम आगे आया, लंड कायला के होंठों से बस एक इंच दूर।
कायला की नज़र उसके लंड से ऊपर उसकी आँखों में गई, और फिर वापस नीचे उतर आई।
कायला धीरे-धीरे दोनों हाथों से उसे थामती है -- एक हाथ लंड पर ऊपर-नीचे सरकता हुआ, दूसरा हाथ नीचे अंडकोष को सहलाता हुआ।
मोनू ने हल्की कराह निकाली, "हाँ... ऐसे ही..."
कायला झुककर पहले अंडकोष को चूमती है, फिर उन्हें एक-एक करके मुँह में लेकर जीभ से चारों ओर गीला करती है।
कायला की गरम साँस और जीभ की नमी से उसके अंडकोष भारी और और भी गरम हो जाते हैं।
फिर कायला ऊपर आती है, लंड के नीचे से टिप तक जीभ फेरते हुए, जैसे पूरी लंबाई को नाप रही हो।
टिप पर पहुँचकर उसे गोल-गोल चाटती है, और धीरे से मुँह में खींच लेती है।
पहले आधा, फिर पूरा -- होंठ कसकर, जीभ चारों तरफ घूमती हुई।
लार कायला के होंठों के कोनों से बहकर ठुड्डी तक आ रही है, और मोनू के भारी अंडकोष अब कायला की ठुड्डी से टकराकर झूल रहे हैं, हर बार गहरी ठोकर के साथ।
मोनू ने कायला के बालों की मुट्ठी पकड़ी, और धकेलना शुरू किया --
हर बार लंड कायला के गले की गहराई तक धँसता, कायला की आँखों में पानी आ जाता, और मुँह से चप-चप-चप की आवाज़ गूँजती।
"चूस... ऐसे जैसे मेरी आखिरी साँस बचानी हो..." वो दाँत भींचकर फुसफुसाता है।
कायला थोड़ी देर बाद लंड मुँह से निकालती है, होंठ लाल और गीले, और कहती है --
"आह... मोनू... जोर से सांस ...लेती है"
मोनू बस मुस्कुराता है, और लंड को कायला के होंठों पर फिर रखता है --
"अभी तो बस शुरुआत है, कुतिया... इसे पूरा गीला कर..."
मोनू ने कायला के होंठों पर लंड टिकाया, आँखों में सीधी नज़र डालते हुए हल्के से अंदर धकेला।
इस बार वो गला तक नहीं ले गया -- बस इतना कि कायला गरम, कसकर पकड़े होंठों से उसे गीला करती रहे।
कायला की जीभ हर बार नीचे की नस पर सरकती, और मोनू की साँस भारी होती जा रही थी।
कुछ धक्कों के बाद उसने खुद ही बाहर खींच लिया, और गरम, गीले लंड को कायला के होंठों और गाल पर हल्के-हल्के रगड़ने लगा।
लार और उसकी गरमी कायला के चेहरे पर फैल गई।
वो झुककर कायला के कान में फुसफुसाया --
"कुतिया... क़िस्मत में जो होता है... सब मिलता है... और कायला की क़िस्मत में मैं हूँ।"
उसने लंड की टिप को फिर कायला के होंठों पर दबाया, जैसे तुझसे फिर मुँह में लेने की माँग कर रहा हो, और कायला के बाल अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ लिए।
जैसे ही रिदम तेज़ हुआ, फोन बजा -- स्क्रीन पर "Mummy"।
मोनू ने कायला के बाल कसकर पकड़ लिए, इशारा किया -- मुँह से मत निकालना, और कॉल उठा ली।
आवाज़ एकदम सीधी-सादी -- "हाँ मम्मी..."
मम्मी: "कहाँ है मोनू? पापा बुला रहे हैं।"
मोनू (कमर धीरे-धीरे चलाते हुए): "अरे... इधर गुप्ता अंकल के घर में एक कुत्ता घुस आया था..."
मम्मी: "तो?"
मोनू (कायला के सिर को और नीचे धकेलते हुए): "सोचा देख लूँ... फिर सुना कि गुप्ता अंकल घर पे नहीं हैं... उनकी लड़की अकेली थी... तो कुत्ते को भगा रहा था।"
मम्मी: "अच्छा, कब आ रहा है?"
मोनू (गहरी साँस दबाते हुए): "बस थोड़ी देर में... यहाँ का काम निपटा के..."
नीचे कायला लार से उसका लंड भिगो रही थी, और गले में उतरते हर धक्के के साथ हल्की कराह रोकने की कोशिश कर रही थी।
मम्मी: "ठीक है, जल्दी आना... पापा पूछ रहे थे।"
मोनू (होंठों पर मुस्कान): "जी मम्मी... आता हूँ..."
कॉल कटते ही उसने कायला के बाल छोड़कर तुझे खड़ा किया, पलटा, और चारों हाथ-पाँव पर झुका दिया।
"अब चूत में ले मेरी...कुतिया" -- और एक झटके में पूरी तरह अंदर अंदर घुसना चाहा। पर नाकाम
फिर मोनू ने कायला की कमर पकड़कर और झुका दिया -- अब कायला की गांड एकदम ऊपर उठी हुई थी, और चूत पूरी तरह खुली हुई।
उसने एक हाथ से पेड़ का तना पकड़कर बैलेंस बनाया, दूसरे से अपना मोटा लंड पकड़ा।
वो हल्का झुका, अपने होंठों से कायला के कान के पास फुसफुसाया --
"पीछे से आसान नहीं होता... तेरी जैसी टाइट चूत में घुसाने के लिए सही तैयारी चाहिए..."
उसने लंड पर थूक गिराया, फिर हाथ से पूरी लंबाई पर मल दिया -- चिकनाई और गर्माहट एक साथ।
फिर उँगलियों में थोड़ा थूक लेकर कायला की चूत के होंठों पर लगाया, और धीरे-धीरे उँगली अंदर सरकाई।
"म्म्म... ये देख... कैसे पकड़ रही है मेरी उँगली..."
कायला हल्की सी कराह निकाली, और मोनू ने उँगली से कायला के अंदर गोल-गोल घुमाकर नमी फैला दी।
अब उसने लंड का टिप कायला के चूत के मुहाने पर रखा, हल्के-हल्के दबाया --
पहले बस थोड़ा सा अंदर, फिर एकदम झटके से पूरी गहराई तक धँसा दिया।
कायला की कमर एकदम आगे को धकेली, मुँह से आह्ह की आवाज़ निकली।
"बस... अब देख कैसे फिसलता है..."
वो धीमे-धीमे बाहर खींचता और फिर पूरे बल से अंदर मारता -- हर बार 'थप-थप' की गीली आवाज़ के साथ।
लंड कायला के अंदर इतना गीला हो चुका था कि हर स्लाइड में एक गरम, चिकना एहसास फैल जाता।
मोनू ने लंड बाहर निकाला और कायला को और झुकाया, कायला के दोनों हाथ ज़मीन पर टिके हुए, गांड हवा में।
उसने कायला के पीठ के नीचे से हाथ बढ़ाकर दूध को मसलते हुए, दूसरे हाथ में थूक भरी और अपने मोटे, धड़कते लंड पर मल दी।
फिर उसने एक भरपूर थूक कायला की चूत के मुँह पर टपकाई, उँगली से हल्के-हल्के घुमा कर गीलापन फैला दिया।
"अब देख, कुतिया..." वो फुसफुसाया, और लंड का सिरा कायला की चूत के चेद पर रख दिया।
पहले हल्के-हल्के रगड़ा, ताकि कायला और भीग जाए, फिर एक झटके में आधा लंड अंदर डाल दिया।
कायला की चीख सी निकल पड़ी -- आह्ह...... मम्मी, पर रात में ये कहीं दीवारों के बीच दब गयी।
मोनू ने पकड़ बनाए रखी, हल्का-सा बाहर खींचा, फिर और अंदर धकेला।
धीरे-धीरे पूरा लंड कायला के अंदर डूब गया, और उसकी जाँघें, जिन पर हल्के बाल थे, कायला की चिकनी गांड से टकराईं।
उस रगड़ में पसीने की गरमी और बालों की चुभन थी -- कायला सिहर गई।
फिर शुरू हुआ असली खेल --
"थप-थप-थप"... हर धक्के पर उसकी जाँघें कायला की गांड से टकरातीं, रस की बूंदें नीचे गिरतीं, और हवा में गीली ताल गूँजती।
मोनू के हाथ कभी कायला के दूध दबाते, कभी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारते, और कभी उँगलियाँ चूत के मुँह पर दबाते।
"इतनी टाइट चूत है कायला की ... लगता है पहली बार खुल रही है आज पूरा," उसने कराहते हुए कहा।
"अह्ह्ह्ह.............. आराम से," कायला हाँफते हुए बोली।
उसके हर ठोके के साथ, लंड फिसलकर और गहराई में जाता, फिर गीली आवाज़ के साथ बाहर आता।
पसीना उसकी छाती से टपककर कायला की पीठ पर गिरता, और दोनों की साँसें तेज़ से तेज़ होती जातीं।
मोनू का चेहरा कायला के गले के पास आ गया, उसकी सांसें गरम और टूटती हुई।
आखिरी कुछ धक्के इतने गहरे थे कि लगता था पूरा पेट भर देगा।
अचानक वो लंड बाहर खींचता है, और बिना वक्त गँवाए एक झटके में कायला को पकड़कर पलट देता है।
कायला का सीना पेड़ से सट जाता है -- भारी, पसीने से चमकते उरोज तने के खुरदरेपन से दब जाते हैं, निप्पल उस छूअन से और भी सख्त हो जाते हैं।
मोनू पीछे से कमर पकड़ता है, लंड को जड़ तक तानता है, और गरम, गाढ़ा वीर्य कायला की गांड और जांघों के बीच गिरा देता है।
गर्मी का एक लहर सा अहसास फैल जाता है -- मोटी, गरम बूँदें नीचे सरककर कायला की टांगों के बीच से बहने लगती हैं।
वो हाथ से वीर्य कायला की गांड पर फैला देता है -- धीरे, जैसे अपने नाम का निशान छोड़ रहा हो।
फिर कायला के कान के पास झुककर फुसफुसाता है,
"अब याद रख... ये चूत मेरी है।"
तभी दूर से एक कार रुकने की आवाज़ आती है -- कपूर अंकल लौट आए हैं। अचानक दूर से कार का हॉर्न सुनाई दिया।
कपूर अंकल अपनी कार से उतरे और सीधे घर की तरफ चले गए। कायला के घर के सामने रहते हैं इनका बेटा है सनी।
मोनू झट से पैंट ऊपर करता है, कायला को देख मुस्कुराता है,
"दीवाली आने वाली है... अब कायला मेरी पटाखा है... कैसे फूटेगी, ये उस दिन बताऊँगा।"
वो गली के मोड़ पर मुड़कर अपने घर की तरफ चलता है।
कायला वहीं पेड़ से सटी, अभी भी सांसें संभालने की कोशिश में, हल्की कांपती खड़ी है।
उधर मोनू के घर के गेट पर घंटी बजने की टन-टन आवाज़ सुनाई देती है।
उसकी मम्मी की ऊँची आवाज़ साफ सुनाई देती है --
"बहुत देर कर दी... आधा घंटा पहले कॉल किया था! चल, पापा बुला रहे हैं।"
दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आती है... और सब चुप।
कायला धीरे-धीरे घर के अंदर जाती है, सोफे पर गिरती है, और थकान, पसीना, और वीर्य की मिली-जुली गरमी में बेसुध होकर सो जाती है।


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