2 hours ago
दिल्ली में शिवानी की जिंदगी अब एक अलग ही रंग ले चुकी थी। फरहान ने उसे एक लग्जरी अपार्टमेंट में रखा था – हाई-फ्लोर, गंगा जैसी नदी का व्यू, लेकिन वो नदी अब पटना की याद दिलाती थी। फरहान शिवानी को रोज चोदता – कभी बेड पर, कभी बालकनी में, कभी कार में। लेकिन शिवानी की प्यास कभी कम नहीं होती। वो सोचती, “फरहान अच्छा है… लेकिन मुझे और चाहिए… और गहरा… और ज्यादा लोग… और वो दर्द जो मजा दे।” फरहान को पता था – शिवानी अब उसकी रंडी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी कमाई का स्रोत थी। वो उसे हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स के लिए भेजता – लेकिन शिवानी अब सिर्फ पैसों के लिए नहीं, अपनी भूख के लिए करती थी।
एक शाम फरहान ने कहा, “शिवानी… आज एक स्पेशल क्लाइंट है। नाम है रेहान खान। मेरा पुराना राइवल। वो मुंबई से आया है। कह रहा है कि वो तुझे एक रात में तोड़ देगा। अगर तू उसे खुश कर देगी… तो वो मेरा बिजनेस छोड़ देगा। लेकिन अगर नहीं… तो वो तुझे चुरा लेगा।” शिवानी की आँखें चमक उठीं। “रेहान खान? वो कौन?” फरहान ने बताया, “मेरा पुराना दुश्मन। अहमद का भी साथी था। अब मुंबई का सबसे बड़ा दलाल। उसका लंड… सबसे बड़ा और क्रूर माना जाता है। वो औरतों को तोड़ता है। लेकिन तू… तू उससे लड़ सकती है।”
शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “ठीक है। आज रात… मैं उसे तोड़ूँगी।” फरहान ने उसे एक प्राइवेट पेंटहाउस का पता दिया – मुंबई स्टाइल, लेकिन दिल्ली में। रात 10 बजे शिवानी वहाँ पहुँची। काली साड़ी, लो बैक ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। रेहान ने दरवाजा खोला – 38 साल का, लंबा, चौड़ा सीना, घनी दाढ़ी, आँखें लाल – नशे और भूख से। वो शिवानी को देखकर हँसा। “शिवानी… फरहान की क्वीन। आज तू मेरी होगी।”
रेहान ने शिवानी को अंदर खींचा। कमरा बड़ा था – बड़ा बेड, मिरर दीवारों पर, लाइट्स रेड। रेहान ने दरवाजा बंद किया। “पहले… तुझे चखूँगा।” वो शिवानी को दीवार से सटा दिया। चुंबन – जंगली, दाँत कट रहे थे। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, गले तक। शिवानी की साँस रुक गई। रेहान की दाढ़ी उसके गालों, गर्दन पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन चूत गीली हो गई। “रेहान… धीरे…” लेकिन रेहान ने साड़ी का पल्लू फाड़ दिया। ब्लाउज के हुक तोड़ दिए। शिवानी के स्तन बाहर – निप्पल्स सख्त, लाल। रेहान ने एक स्तन हाथ में लिया, इतना जोर से दबाया कि शिवानी चीखी – “आह… दर्द… लेकिन… और…” रेहान ने मुँह में लिया – चूसने लगा, दाँत से काटा, जैसे खा रहा हो। शिवानी की पीठ दीवार से रगड़ रही थी। “रेहान… चूसो… मेरे निप्पल्स… फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो…”
रेहान ने शिवानी को बेड पर पटका। साड़ी पूरी फाड़ दी। शिवानी नंगी लेटी थी। रेहान ने अपनी शर्ट उतारी – उसके सीने पर टैटू, मस्कुलर बॉडी। पैंट उतारी। लंड बाहर – 11 इंच का, सबसे मोटा, काला, नसें फूली, सिर बड़ा। शिवानी की आँखें फैल गईं। “रेहान… ये… इतना बड़ा… नहीं आएगा…” रेहान हँसा। “आएगा… और फाड़ेगा।” वो शिवानी की टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी, “डालो… सहन नहीं होता… लेकिन धीरे…” रेहान ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना कि वो चीखी, “आआआह्ह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा…” रेहान ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की साँसें तेज। “रेहान… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… हर धड़कन…” रेहान ने धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर आर्क हो गया – दर्द और मजा का परफेक्ट बैलेंस। “आह… पूरा… गहरा… अब धक्के… जोर से…”
रेहान ने धक्के शुरू किए – स्लो, लेकिन बहुत गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। “रेहान… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” रेहान ने स्पीड बढ़ाई – अब जंगली धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज कमरे में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो रेहान की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “रेहान… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा। रेहान नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें नम, लेकिन मुस्कान – “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी रंडी हूँ… चोद… पूरी रात…”
पोजीशन बदली – शिवानी ऊपर। वो उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “रेहान… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को निचोड़ रही है… आह… हाँ…” रेहान नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, निप्पल्स काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी रेहान के लंड पर।
फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। रेहान पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ – जोरदार। शिवानी की गांड लाल। “तेरी गांड… आज इसे भी लूँगा।” उसने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” रेहान ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” रेहान ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… रेहान… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” रेहान ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
रेहान ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा, सबसे लंबा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। रेहान ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई। फरहान को छोड़। मेरे साथ मुंबई चलेगी।” शिवानी की आँखों में आँसू – “रेहान… ये रात… सबसे गहरी थी… लेकिन मैं… मैं अब किसी की नहीं। मैं अपनी हूँ।”
शिवानी उठी। कपड़े पहने। रेहान ने 20 लाख नोट्स दिए। “ये तेरे लिए।” शिवानी ने लिए – लेकिन मन में फैसला था। वो दिल्ली छोड़कर पटना लौटने वाली थी। प्रिंस के पास। आरव के पास। लेकिन क्या वो वापस आ पाएगी? या फरहान और रेहान की जंग में फँस जाएगी?
एक शाम फरहान ने कहा, “शिवानी… आज एक स्पेशल क्लाइंट है। नाम है रेहान खान। मेरा पुराना राइवल। वो मुंबई से आया है। कह रहा है कि वो तुझे एक रात में तोड़ देगा। अगर तू उसे खुश कर देगी… तो वो मेरा बिजनेस छोड़ देगा। लेकिन अगर नहीं… तो वो तुझे चुरा लेगा।” शिवानी की आँखें चमक उठीं। “रेहान खान? वो कौन?” फरहान ने बताया, “मेरा पुराना दुश्मन। अहमद का भी साथी था। अब मुंबई का सबसे बड़ा दलाल। उसका लंड… सबसे बड़ा और क्रूर माना जाता है। वो औरतों को तोड़ता है। लेकिन तू… तू उससे लड़ सकती है।”
शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “ठीक है। आज रात… मैं उसे तोड़ूँगी।” फरहान ने उसे एक प्राइवेट पेंटहाउस का पता दिया – मुंबई स्टाइल, लेकिन दिल्ली में। रात 10 बजे शिवानी वहाँ पहुँची। काली साड़ी, लो बैक ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। रेहान ने दरवाजा खोला – 38 साल का, लंबा, चौड़ा सीना, घनी दाढ़ी, आँखें लाल – नशे और भूख से। वो शिवानी को देखकर हँसा। “शिवानी… फरहान की क्वीन। आज तू मेरी होगी।”
रेहान ने शिवानी को अंदर खींचा। कमरा बड़ा था – बड़ा बेड, मिरर दीवारों पर, लाइट्स रेड। रेहान ने दरवाजा बंद किया। “पहले… तुझे चखूँगा।” वो शिवानी को दीवार से सटा दिया। चुंबन – जंगली, दाँत कट रहे थे। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, गले तक। शिवानी की साँस रुक गई। रेहान की दाढ़ी उसके गालों, गर्दन पर रगड़ रही थी – दर्द इतना कि शिवानी की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन चूत गीली हो गई। “रेहान… धीरे…” लेकिन रेहान ने साड़ी का पल्लू फाड़ दिया। ब्लाउज के हुक तोड़ दिए। शिवानी के स्तन बाहर – निप्पल्स सख्त, लाल। रेहान ने एक स्तन हाथ में लिया, इतना जोर से दबाया कि शिवानी चीखी – “आह… दर्द… लेकिन… और…” रेहान ने मुँह में लिया – चूसने लगा, दाँत से काटा, जैसे खा रहा हो। शिवानी की पीठ दीवार से रगड़ रही थी। “रेहान… चूसो… मेरे निप्पल्स… फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो…”
रेहान ने शिवानी को बेड पर पटका। साड़ी पूरी फाड़ दी। शिवानी नंगी लेटी थी। रेहान ने अपनी शर्ट उतारी – उसके सीने पर टैटू, मस्कुलर बॉडी। पैंट उतारी। लंड बाहर – 11 इंच का, सबसे मोटा, काला, नसें फूली, सिर बड़ा। शिवानी की आँखें फैल गईं। “रेहान… ये… इतना बड़ा… नहीं आएगा…” रेहान हँसा। “आएगा… और फाड़ेगा।” वो शिवानी की टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर दबाव। शिवानी तड़प रही थी, “डालो… सहन नहीं होता… लेकिन धीरे…” रेहान ने सिर डाला – धीरे-धीरे। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द इतना कि वो चीखी, “आआआह्ह्ह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा…” रेहान ने आधा अंदर किया, रुका। शिवानी की साँसें तेज। “रेहान… महसूस कर… तेरा लंड मेरी चूत में… हर नस… हर धड़कन…” रेहान ने धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। शिवानी का शरीर आर्क हो गया – दर्द और मजा का परफेक्ट बैलेंस। “आह… पूरा… गहरा… अब धक्के… जोर से…”
रेहान ने धक्के शुरू किए – स्लो, लेकिन बहुत गहरे। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। “रेहान… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को प्यार कर रही है… अब तेज… फाड़ दो…” रेहान ने स्पीड बढ़ाई – अब जंगली धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज कमरे में गूँज रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो रेहान की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “रेहान… जोर से… मेरी चूत… तेरे लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, पानी बहा। रेहान नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें नम, लेकिन मुस्कान – “फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो… मैं तेरी रंडी हूँ… चोद… पूरी रात…”
पोजीशन बदली – शिवानी ऊपर। वो उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “रेहान… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को निचोड़ रही है… आह… हाँ…” रेहान नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, निप्पल्स काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी रेहान के लंड पर।
फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। रेहान पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ – जोरदार। शिवानी की गांड लाल। “तेरी गांड… आज इसे भी लूँगा।” उसने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” रेहान ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… फाड़ रहा है… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” रेहान ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… रेहान… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” रेहान ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन वो चिल्ला रही थी, “स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म… आह…”
रेहान ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा, सबसे लंबा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। रेहान ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई। फरहान को छोड़। मेरे साथ मुंबई चलेगी।” शिवानी की आँखों में आँसू – “रेहान… ये रात… सबसे गहरी थी… लेकिन मैं… मैं अब किसी की नहीं। मैं अपनी हूँ।”
शिवानी उठी। कपड़े पहने। रेहान ने 20 लाख नोट्स दिए। “ये तेरे लिए।” शिवानी ने लिए – लेकिन मन में फैसला था। वो दिल्ली छोड़कर पटना लौटने वाली थी। प्रिंस के पास। आरव के पास। लेकिन क्या वो वापस आ पाएगी? या फरहान और रेहान की जंग में फँस जाएगी?


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