2 hours ago
शिवानी की नई जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी थी। विक्रम के अंडर में काम करते हुए उसे हर हफ्ते 10-15 क्लाइंट मिलते – अमीर आदमी, जो उसकी बॉडी के लिए लाखों फेंकते। पैसा आ रहा था, लेकिन शिवानी की प्यास कभी कम नहीं हुई। वो रात को घर लौटती, प्रिंस सो रहा होता, और वो बाथरूम में जाकर खुद को उँगलियों से संतुष्ट करती। “प्रिंस… तू अच्छा है… लेकिन मुझे और ज्यादा चाहिए… और गहरा… और जोरदार…” आरव दादी के पास था, प्रिंस काम में व्यस्त। शिवानी अब शहर की सबसे महंगी रंडी बन चुकी थी – लेकिन उसके अंदर की वो औरत, जो प्यार और जुनून चाहती थी, अभी भी तड़प रही थी।
एक रात विक्रम ने शिवानी को फोन किया। “शिवानी… आज एक स्पेशल क्लाइंट है। नाम है फरहान। 35 साल का, ,.,, शहर का सबसे बड़ा राइवल दलाल। वो मुझे चैलेंज कर रहा है – कह रहा है कि तू मेरी सबसे अच्छी रंडी है, लेकिन वो तुझे चुरा लेगा। आज रात उसके साथ जा। लेकिन याद रख… तू मेरी है।” शिवानी का दिल धड़का। फरहान – वो नाम सुना था। अहमद का पुराना साथी, जावेद का दोस्त। फरहान अब पटना के डार्क वर्ल्ड का किंग था – ड्रग्स, प्रॉस्टिट्यूशन, और ब्लैकमनी का खेल। वो विक्रम का राइवल था, और शिवानी को लेकर दोनों के बीच जंग चल रही थी। फरहान ने विक्रम को मैसेज किया था – “शिवानी को भेज। एक रात में उसे अपनी बना लूँगा। 10 लाख दूँगा… अगर वो मेरी हो गई तो।”
शिवानी तैयार हुई – ब्लैक साड़ी, ट्रांसपेरेंट ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। उसकी सेक्सी फिगर – 5 फीट की ऊँचाई, पतली कमर, भरे कूल्हे, उभरी छाती – सब उभर रही थी। वो फरहान के प्राइवेट विला में पहुँची – गंगा किनारे, बड़ा घर, गार्ड बाहर। फरहान ने दरवाजा खोला – लंबा कद, मस्कुलर बॉडी, घनी दाढ़ी, आँखें गहरी और डरावनी लेकिन सेक्सी। “आओ शिवानी… मैं इंतजार कर रहा था।” उसकी आवाज भारी थी। शिवानी अंदर आई। घर में मंद रोशनी, अगरबत्ती की खुशबू, और बेडरूम में बड़ा बेड। फरहान ने दरवाजा बंद किया। “विक्रम ने भेजा? लेकिन आज रात तू मेरी हो जाएगी। मैं तेरी प्यास इतनी गहराई से बुझाऊँगा कि तू कभी वापस नहीं जाना चाहेगी।”
शिवानी शर्मा गई, लेकिन उसकी चूत गीली हो गई। “फरहान… ये सिर्फ एक रात है। पैसा दो और…” फरहान ने उसे दीवार से सटा दिया। “पैसा? मैं तुझे दुनिया दे सकता हूँ। लेकिन पहले… तुझे महसूस कराऊँगा।” वो शिवानी का चेहरा अपने हाथों में लिया। चुंबन शुरू – धीमा, लेकिन गहरा। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, खेलने लगी। शिवानी की साँसें तेज। फरहान की दाढ़ी उसके गालों पर रगड़ रही थी – एक नई सेंसेशन, दर्द और मजा का मिश्रण। शिवानी ने जवाब दिया – उसकी जीभ फरहान की जीभ से लड़ने लगी। चुंबन लंबा चला – मिनटों तक। फरहान के हाथ शिवानी की कमर पर, फिर कूल्हों पर। वो दबा रहा था – जोर से, जैसे वो उसकी बॉडी को जीत रहा हो। शिवानी की सिसकारी निकली, “उफ्फ… फरहान… धीरे…”
फरहान ने साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज के हुक खोल दिए। शिवानी के स्तन बाहर – गुलाबी निप्पल्स, सख्त। फरहान ने एक स्तन हाथ में लिया, दबाया। “कितने नरम… लेकिन सख्त निप्पल्स… तेरे शरीर में आग है शिवानी…” वो मुँह में लिया – चूसने लगा, जीभ से घुमाया, दाँत से हल्के से काटा। शिवानी चीखी, “आह… फरहान… चूसो जोर से… मेरे निप्पल्स फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो…” फरहान ने जोर से चूसा, जैसे दूध निकाल रहा हो। शिवानी की पीठ दीवार से सटी, शरीर काँप रहा था। फरहान का दूसरा हाथ शिवानी की चूत पर – साड़ी के ऊपर से। वो रगड़ रहा था। शिवानी की पैंटी गीली हो चुकी थी। “फरहान… वहाँ… रगड़ो… उँगली डालो…”
फरहान ने साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी खड़ी थी। फरहान ने उसे बेड पर धक्का दिया। शिवानी लेटी। फरहान उसके ऊपर – लेकिन अभी नहीं चोद रहा था। वो शिवानी के शरीर पर किस करता रहा – गर्दन से शुरू, छाती, पेट, फिर टाँगों के बीच। उसकी दाढ़ी हर जगह रगड़ रही थी – दर्द और टिक्लिंग का मिश्रण। फरहान ने शिवानी की चूत पर साँसें छोड़ीं – गर्म साँसें। शिवानी तड़प उठी, “फरहान… चाटो… जीभ डालो…” फरहान ने जीभ से छुआ – क्लिटोरिस पर। धीरे-धीरे चाटने लगा। शिवानी की सिसकारियाँ तेज – “आह… हाँ… वहाँ… चूसो… मेरी क्लिट… उफ्फ… और गहरा…” फरहान ने जीभ अंदर डाली, क्लिट चूसने लगा जैसे कोई जूस हो। उसने दो उँगलियाँ डालीं – अंदर-बाहर, कर्व्ड करके G-स्पॉट पर हिट कर रहा था। शिवानी का शरीर आर्क हो गया – “फरहान… उँगलियाँ… तेज… मैं झड़ रही हूँ… आआह्ह…” वो झड़ गई – पानी फरहान के मुँह पर। फरहान ने सब चाट लिया। “तेरा रस… कितना मीठा… मैं तेरी चूत का गुलाम बन जाऊँगा।”
फरहान उठा। अपनी पैंट उतारी। लंड बाहर – 10 इंच का, मोटा, नसें फूली, सिर लाल और चमकदार। शिवानी ने देखा, उसकी आँखें फैल गईं। “फरहान… इतना बड़ा… डालो… लेकिन धीरे…” फरहान मुस्कुराया। “धीरे? नहीं… आज गहरा… इंटेंस…” वो शिवानी की टाँगें कंधों पर रखा। लंड चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर। शिवानी तड़प रही थी, “डालो ना… सहन नहीं होता…” फरहान ने धीरे से सिर डाला – फिर एक झटके में आधा अंदर। शिवानी चीखी – “आआह्ह… दर्द… लेकिन… और… पूरा डालो…” फरहान ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द, लेकिन गहरा मजा। फरहान रुका – लंड अंदर, हिलाए बिना। शिवानी की आँखें उसकी आँखों में – “फरहान… तेरा लंड… मेरी चूत में… महसूस कर रही हूँ… हर नस…” फरहान ने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए – गहरे, लेकिन स्लो। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की सिसकारियाँ – “आह… हाँ… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को निचोड़ रही है… जोर से… अब तेज…”
फरहान ने स्पीड बढ़ाई – अब जंगली धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो फरहान की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “फरहान… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… मैं तेरी रंडी हूँ… चोद… और तेज… आह… हाँ… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, फरहान के लंड को निचोड़ा। फरहान नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान चेहरे पर – दर्द और मजा का परफेक्ट मिश्रण। फरहान ने पोजीशन बदली – शिवानी को ऊपर। शिवानी उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “फरहान… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को खा रही है… आह… हाँ…” फरहान नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। शिवानी की छाती उसके मुँह में – वो चूस रहा था, काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी फरहान के लंड पर।
फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। फरहान पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़। “तेरी गांड… कितनी सेक्सी… आज इसे भी लूँगा।” उसने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” फरहान ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” फरहान ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… फरहान… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” फरहान ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन मुस्कान। “फरहान… स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म…”
फरहान ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। फरहान ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई ना?” शिवानी की आँखों में आँसू – “हाँ… लेकिन ये सिर्फ रात है… विक्रम को मत बताना।” लेकिन फरहान हँसा – “विक्रम? वो मेरा आदमी है। मैंने तुझे चेक किया… अब तू मेरी रंडी है। शहर की क्वीन… लेकिन मेरी।”
शिवानी चौंक गई। फरहान विक्रम का राइवल नहीं था – वो उसका बॉस था। सब साजिश थी। शिवानी रो पड़ी – लेकिन उसके शरीर में संतुष्टि थी। “फरहान… अब क्या?” फरहान ने कहा, “अब तू मेरे साथ दिल्ली चलेगी। नई जिंदगी… और ज्यादा पैसा… और ज्यादा चुदाई। प्रिंस को छोड़। आरव को ले लेंगे।”
शिवानी का दिल टूटा – लेकिन उसकी प्यास ने हाँ कह दिया। वो घर लौटी। प्रिंस सो रहा था। वो नोट छोड़कर चली गई – “माफ कर देना… मैं जा रही हूँ। आरव को देखना।” फरहान के साथ दिल्ली। अब शिवानी दिल्ली की सबसे महंगी रंडी बन चुकी थी – फरहान की। लेकिन क्या ये अंत है? या प्रिंस आएगा वापस लाने?
एक रात विक्रम ने शिवानी को फोन किया। “शिवानी… आज एक स्पेशल क्लाइंट है। नाम है फरहान। 35 साल का, ,.,, शहर का सबसे बड़ा राइवल दलाल। वो मुझे चैलेंज कर रहा है – कह रहा है कि तू मेरी सबसे अच्छी रंडी है, लेकिन वो तुझे चुरा लेगा। आज रात उसके साथ जा। लेकिन याद रख… तू मेरी है।” शिवानी का दिल धड़का। फरहान – वो नाम सुना था। अहमद का पुराना साथी, जावेद का दोस्त। फरहान अब पटना के डार्क वर्ल्ड का किंग था – ड्रग्स, प्रॉस्टिट्यूशन, और ब्लैकमनी का खेल। वो विक्रम का राइवल था, और शिवानी को लेकर दोनों के बीच जंग चल रही थी। फरहान ने विक्रम को मैसेज किया था – “शिवानी को भेज। एक रात में उसे अपनी बना लूँगा। 10 लाख दूँगा… अगर वो मेरी हो गई तो।”
शिवानी तैयार हुई – ब्लैक साड़ी, ट्रांसपेरेंट ब्लाउज, अंदर कुछ नहीं। उसकी सेक्सी फिगर – 5 फीट की ऊँचाई, पतली कमर, भरे कूल्हे, उभरी छाती – सब उभर रही थी। वो फरहान के प्राइवेट विला में पहुँची – गंगा किनारे, बड़ा घर, गार्ड बाहर। फरहान ने दरवाजा खोला – लंबा कद, मस्कुलर बॉडी, घनी दाढ़ी, आँखें गहरी और डरावनी लेकिन सेक्सी। “आओ शिवानी… मैं इंतजार कर रहा था।” उसकी आवाज भारी थी। शिवानी अंदर आई। घर में मंद रोशनी, अगरबत्ती की खुशबू, और बेडरूम में बड़ा बेड। फरहान ने दरवाजा बंद किया। “विक्रम ने भेजा? लेकिन आज रात तू मेरी हो जाएगी। मैं तेरी प्यास इतनी गहराई से बुझाऊँगा कि तू कभी वापस नहीं जाना चाहेगी।”
शिवानी शर्मा गई, लेकिन उसकी चूत गीली हो गई। “फरहान… ये सिर्फ एक रात है। पैसा दो और…” फरहान ने उसे दीवार से सटा दिया। “पैसा? मैं तुझे दुनिया दे सकता हूँ। लेकिन पहले… तुझे महसूस कराऊँगा।” वो शिवानी का चेहरा अपने हाथों में लिया। चुंबन शुरू – धीमा, लेकिन गहरा। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई, खेलने लगी। शिवानी की साँसें तेज। फरहान की दाढ़ी उसके गालों पर रगड़ रही थी – एक नई सेंसेशन, दर्द और मजा का मिश्रण। शिवानी ने जवाब दिया – उसकी जीभ फरहान की जीभ से लड़ने लगी। चुंबन लंबा चला – मिनटों तक। फरहान के हाथ शिवानी की कमर पर, फिर कूल्हों पर। वो दबा रहा था – जोर से, जैसे वो उसकी बॉडी को जीत रहा हो। शिवानी की सिसकारी निकली, “उफ्फ… फरहान… धीरे…”
फरहान ने साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज के हुक खोल दिए। शिवानी के स्तन बाहर – गुलाबी निप्पल्स, सख्त। फरहान ने एक स्तन हाथ में लिया, दबाया। “कितने नरम… लेकिन सख्त निप्पल्स… तेरे शरीर में आग है शिवानी…” वो मुँह में लिया – चूसने लगा, जीभ से घुमाया, दाँत से हल्के से काटा। शिवानी चीखी, “आह… फरहान… चूसो जोर से… मेरे निप्पल्स फाड़ दो… दर्द दो… मजा दो…” फरहान ने जोर से चूसा, जैसे दूध निकाल रहा हो। शिवानी की पीठ दीवार से सटी, शरीर काँप रहा था। फरहान का दूसरा हाथ शिवानी की चूत पर – साड़ी के ऊपर से। वो रगड़ रहा था। शिवानी की पैंटी गीली हो चुकी थी। “फरहान… वहाँ… रगड़ो… उँगली डालो…”
फरहान ने साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी खड़ी थी। फरहान ने उसे बेड पर धक्का दिया। शिवानी लेटी। फरहान उसके ऊपर – लेकिन अभी नहीं चोद रहा था। वो शिवानी के शरीर पर किस करता रहा – गर्दन से शुरू, छाती, पेट, फिर टाँगों के बीच। उसकी दाढ़ी हर जगह रगड़ रही थी – दर्द और टिक्लिंग का मिश्रण। फरहान ने शिवानी की चूत पर साँसें छोड़ीं – गर्म साँसें। शिवानी तड़प उठी, “फरहान… चाटो… जीभ डालो…” फरहान ने जीभ से छुआ – क्लिटोरिस पर। धीरे-धीरे चाटने लगा। शिवानी की सिसकारियाँ तेज – “आह… हाँ… वहाँ… चूसो… मेरी क्लिट… उफ्फ… और गहरा…” फरहान ने जीभ अंदर डाली, क्लिट चूसने लगा जैसे कोई जूस हो। उसने दो उँगलियाँ डालीं – अंदर-बाहर, कर्व्ड करके G-स्पॉट पर हिट कर रहा था। शिवानी का शरीर आर्क हो गया – “फरहान… उँगलियाँ… तेज… मैं झड़ रही हूँ… आआह्ह…” वो झड़ गई – पानी फरहान के मुँह पर। फरहान ने सब चाट लिया। “तेरा रस… कितना मीठा… मैं तेरी चूत का गुलाम बन जाऊँगा।”
फरहान उठा। अपनी पैंट उतारी। लंड बाहर – 10 इंच का, मोटा, नसें फूली, सिर लाल और चमकदार। शिवानी ने देखा, उसकी आँखें फैल गईं। “फरहान… इतना बड़ा… डालो… लेकिन धीरे…” फरहान मुस्कुराया। “धीरे? नहीं… आज गहरा… इंटेंस…” वो शिवानी की टाँगें कंधों पर रखा। लंड चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर। शिवानी तड़प रही थी, “डालो ना… सहन नहीं होता…” फरहान ने धीरे से सिर डाला – फिर एक झटके में आधा अंदर। शिवानी चीखी – “आआह्ह… दर्द… लेकिन… और… पूरा डालो…” फरहान ने पूरा अंदर कर दिया। शिवानी की चूत स्ट्रेच हो गई – दर्द, लेकिन गहरा मजा। फरहान रुका – लंड अंदर, हिलाए बिना। शिवानी की आँखें उसकी आँखों में – “फरहान… तेरा लंड… मेरी चूत में… महसूस कर रही हूँ… हर नस…” फरहान ने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए – गहरे, लेकिन स्लो। हर धक्के में पूरा बाहर, फिर पूरा अंदर। शिवानी की सिसकारियाँ – “आह… हाँ… गहरा… महसूस कर… मेरी चूत तेरे लंड को निचोड़ रही है… जोर से… अब तेज…”
फरहान ने स्पीड बढ़ाई – अब जंगली धक्के। बेड हिल रहा था। थप-थप की आवाज। शिवानी की छाती उछल रही थी। वो फरहान की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी – खून निकल आया। “फरहान… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… मैं तेरी रंडी हूँ… चोद… और तेज… आह… हाँ… मैं झड़ रही हूँ…” शिवानी झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़ी, फरहान के लंड को निचोड़ा। फरहान नहीं रुका – और तेज। शिवानी की आँखें बंद, मुस्कान चेहरे पर – दर्द और मजा का परफेक्ट मिश्रण। फरहान ने पोजीशन बदली – शिवानी को ऊपर। शिवानी उछलने लगी – लंड अंदर-बाहर। “फरहान… देख… मैं तेरे लंड पर नाच रही हूँ… मेरी चूत… तेरे लंड को खा रही है… आह… हाँ…” फरहान नीचे से धक्के मार रहा था, शिवानी के कूल्हे पकड़े। शिवानी की छाती उसके मुँह में – वो चूस रहा था, काट रहा था। शिवानी फिर झड़ गई – पानी फरहान के लंड पर।
फिर डॉगी – शिवानी घुटनों पर। फरहान पीछे से। बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़। “तेरी गांड… कितनी सेक्सी… आज इसे भी लूँगा।” उसने लुब्रिकेंट लगाया – उँगली से शिवानी की गांड में। शिवानी सिसकारी, “हाँ… उँगली… और अंदर… तैयार कर…” फरहान ने लंड सिर डाला – धीरे-धीरे पूरा अंदर। शिवानी दर्द से चीखी – “आह… दर्द… लेकिन… मत रुको… पूरा… फाड़ दो मेरी गांड…” फरहान ने धक्के शुरू – गहरे, तेज। शिवानी की चीखें मजा में – “उफ्फ… फरहान… मेरी गांड… तेरे लंड के लिए बनी है… जोर से… थप्पड़ मारो… बाल खींचो… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” फरहान ने स्पीड बढ़ाई – हर धक्के में उसका शरीर शिवानी की गांड से टकराता। शिवानी का शरीर पसीने से तर, आँखें नम, लेकिन मुस्कान। “फरहान… स्पर्म… मेरी गांड में… भर दो… गरम स्पर्म…”
फरहान ने जोर का धक्का मारा – गरम स्पर्म शिवानी की गांड में छोड़ दिया। शिवानी काँप उठी – उसका सबसे गहरा ऑर्गेज्म। दोनों थक कर लेट गए। फरहान ने शिवानी को गले लगाया – “शिवानी… तू मेरी हो गई ना?” शिवानी की आँखों में आँसू – “हाँ… लेकिन ये सिर्फ रात है… विक्रम को मत बताना।” लेकिन फरहान हँसा – “विक्रम? वो मेरा आदमी है। मैंने तुझे चेक किया… अब तू मेरी रंडी है। शहर की क्वीन… लेकिन मेरी।”
शिवानी चौंक गई। फरहान विक्रम का राइवल नहीं था – वो उसका बॉस था। सब साजिश थी। शिवानी रो पड़ी – लेकिन उसके शरीर में संतुष्टि थी। “फरहान… अब क्या?” फरहान ने कहा, “अब तू मेरे साथ दिल्ली चलेगी। नई जिंदगी… और ज्यादा पैसा… और ज्यादा चुदाई। प्रिंस को छोड़। आरव को ले लेंगे।”
शिवानी का दिल टूटा – लेकिन उसकी प्यास ने हाँ कह दिया। वो घर लौटी। प्रिंस सो रहा था। वो नोट छोड़कर चली गई – “माफ कर देना… मैं जा रही हूँ। आरव को देखना।” फरहान के साथ दिल्ली। अब शिवानी दिल्ली की सबसे महंगी रंडी बन चुकी थी – फरहान की। लेकिन क्या ये अंत है? या प्रिंस आएगा वापस लाने?


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