2 hours ago
जावेद की गिरफ्तारी और क्लब वाले अपमान के बाद शिवानी का मन पूरी तरह टूट चुका था। प्रिंस उसे प्यार करता था, लेकिन वो प्यार अब बोझ लगने लगा था। हर रात जब प्रिंस उसे छूता, शिवानी को लगता – “ये सब कुछ नहीं है। मेरी चूत को और ज्यादा चाहिए… और जोरदार… और ज्यादा लोग… और पैसा… सम्मान नहीं, बस भूख मिटानी है।” आरव अब दादी के पास रहने लगा था – प्रिंस ने कहा था, “बच्चे को सेफ रखना है।” शिवानी अकेली रह गई। घर में सिर्फ वो और अपनी प्यास।
एक रात शिवानी ने फैसला किया। वो पटना के सबसे डार्क इलाके में गई – वो गलियाँ जहाँ रात को पैसा और सेक्स का खेल चलता है। वहाँ एक नया आदमी मिला – नाम था विक्रम सिंह। 45 साल का, मोटा, अमीर, पटना का सबसे बड़ा दलाल और प्रॉपर्टी डीलर। विक्रम शहर की सारी हाई-क्लास रंडियों का मालिक था। वो शिवानी को देखते ही आँखें चमक उठीं। “कौन हो तुम? इतनी हॉट… लेकिन नई लग रही हो।”
शिवानी ने सिर झुकाकर कहा, “मैं… पैसा चाहती हूँ। बहुत पैसा। मेरी बॉडी… जो चाहो, ले लो। लेकिन मेरी शर्त – कोई नाम नहीं, कोई सवाल नहीं। बस चोदो… और पैसे दो।” विक्रम हँसा। “अच्छा? तो सुन… शहर की सबसे महंगी रंडी बनना है? तो पहले मुझे साबित कर। आज रात मेरे क्लब में – 10 आदमी हैं। सब अमीर। सब हाई-प्रोफाइल। अगर तू सबको खुश कर देगी… तो तू मेरी हो जाएगी। हर महीने 5 लाख… और हर कस्टमर से अलग-अलग।”
शिवानी का दिल तेज धड़का। लेकिन उसने हाँ कह दिया। “ठीक है। आज रात… सबके सामने… मैं तुम्हारी रंडी बनूँगी।”
क्लब – वही पुराना क्लब, लेकिन अब प्राइवेट रूम में। अंदर 10 आदमी – बिजनेसमैन, पॉलिटिशियन, सिक्युरिटी ऑफिसर (करण नहीं था, लेकिन उसके जैसे कई)। सब नशे में, सब भूखे। विक्रम ने शिवानी को स्टेज पर बुलाया। “ये है शिवानी… पटना की नई क्वीन। आज रात ये सबकी है। जो सबसे ज्यादा पैसे देगा… वो पहले लेगा।”
शिवानी ने ब्लैक लेस की ड्रेस पहनी थी – छोटी, टाइट। विक्रम ने ड्रेस फाड़ दी। शिवानी नंगी खड़ी थी – गोरी स्किन, भरे स्तन, सख्त निप्पल्स, गीली चूत, गोल गांड। सबकी साँसें रुक गईं। शिवानी ने खुद को छुआ – स्तनों को दबाया, चूत पर हाथ फेरा। “आओ… चोदो मुझे… सब मिलकर… मैं तुम सबकी रंडी हूँ।”
पहला आदमी – एक मोटा बिजनेसमैन। उसने शिवानी को सोफे पर पटका। लंड निकाला – मोटा, लेकिन छोटा। शिवानी ने मुँह में लिया, चूसा। फिर चूत में डाला। धक्के मारने लगा। शिवानी चिल्लाई, “आह… जोर से… फाड़ दो… पैसा दो… और चोदो…” वो झड़ गई। आदमी ने स्पर्म अंदर छोड़ा। 50 हजार नोट्स फेंके।
दूसरा – एक पॉलिटिशियन। उसने शिवानी को घुटनों पर बिठाया। मुँह में लंड डाला। गले तक। शिवानी गैगिंग कर रही थी। “चूस… रंडी… अच्छे से…” शिवानी ने तेज चूसा। फिर वो शिवानी को डॉगी में किया। गांड में लंड डाला। शिवानी चीखी, “आह… गांड फाड़ दो… जोर से… हाँ… पैसा और दो…” वो धक्के मारता रहा। शिवानी की गांड लाल हो गई। स्पर्म अंदर। 1 लाख नोट्स।
तीसरा – एक युवा बिजनेसमैन। उसने शिवानी को गोद में उठाया। स्टैंडिंग में चोदा। शिवानी उछल रही थी। “हाँ… गहरा… मेरी चूत… भर दो…” नेहा और रिया जैसी लड़कियाँ भी थीं – वो सबको चाट रही थीं। लेकिन शिवानी सेंटर में थी। चौथा आदमी ने शिवानी की चूत में लंड डाला, पाँचवें ने मुँह में। डबल। शिवानी चीख रही थी, “आह… दोनों… फाड़ दो… मेरी चूत… मुँह… सब भर दो…” छठा आदमी ने गांड में। ट्रिपल पेनेट्रेशन। शिवानी पागल हो गई। “उफ्फ… तीन लंड… मेरे अंदर… आह… जोर से… धक्के दो… मैं शहर की रंडी हूँ… चोदो मुझे… पैसा दो…”
सब मिलकर – एक के बाद एक। शिवानी की चूत, गांड, मुँह – सब भरे रहे। पानी बहता रहा। स्पर्म बहता रहा। वो कई बार झड़ी – इतनी बार कि गिनती नहीं। क्लब में तालियाँ। विक्रम देख रहा था। “ये लड़की… गोल्ड माइन है।”
आखिर में विक्रम खुद आया। उसका लंड सबसे बड़ा। शिवानी को स्टेज पर लिटाया। सब देख रहे थे। विक्रम ने लंड चूत में डाला – पूरा। शिवानी चीखी, “आआह्ह… विक्रम… फाड़ दो… मेरी चूत… शहर की सबसे महंगी रंडी… तेरी है…” विक्रम धक्के मारने लगा – जंगली, बेरहम। शिवानी की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। “जोर से… गांड भी… दोनों… ट्रिपल… हाँ… स्पर्म अंदर… भर दो…” विक्रम ने चूत में झड़ा। फिर गांड में। फिर मुँह में। शिवानी सब पी गई।
रात खत्म हुई। शिवानी पसीने, स्पर्म और पानी से तर। नोट्स बिखरे हुए। विक्रम ने कहा, “तू अब मेरी हो। हर हफ्ते 10 क्लाइंट। 10 लाख महीना।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “ठीक है… लेकिन मेरी शर्त – कोई नाम नहीं। बस चोदो और पैसे दो।”
घर लौटी। प्रिंस सो रहा था। शिवानी बाथरूम में गई। नहाई। लेकिन उसकी आँखों में अब नई चमक थी। “ये जिंदगी… ये प्यास… ये पैसा… अब यही मेरी जिंदगी है।”
अगले दिन विक्रम ने नया क्लाइंट दिया – एक बड़ा पॉलिटिशियन। शिवानी तैयार हुई। लेकिन मन में एक छोटा सा डर – प्रिंस को पता चलेगा तो? आरव को? लेकिन वो डर अब मजा बन चुका था।
शिवानी अब पटना की सबसे महंगी रंडी बन चुकी थी। शहर की गलियाँ उसकी कहानी सुनातीं। लेकिन प्रिंस को अभी भी पता नहीं था। या पता था… और वो चुप था?
एक रात शिवानी ने फैसला किया। वो पटना के सबसे डार्क इलाके में गई – वो गलियाँ जहाँ रात को पैसा और सेक्स का खेल चलता है। वहाँ एक नया आदमी मिला – नाम था विक्रम सिंह। 45 साल का, मोटा, अमीर, पटना का सबसे बड़ा दलाल और प्रॉपर्टी डीलर। विक्रम शहर की सारी हाई-क्लास रंडियों का मालिक था। वो शिवानी को देखते ही आँखें चमक उठीं। “कौन हो तुम? इतनी हॉट… लेकिन नई लग रही हो।”
शिवानी ने सिर झुकाकर कहा, “मैं… पैसा चाहती हूँ। बहुत पैसा। मेरी बॉडी… जो चाहो, ले लो। लेकिन मेरी शर्त – कोई नाम नहीं, कोई सवाल नहीं। बस चोदो… और पैसे दो।” विक्रम हँसा। “अच्छा? तो सुन… शहर की सबसे महंगी रंडी बनना है? तो पहले मुझे साबित कर। आज रात मेरे क्लब में – 10 आदमी हैं। सब अमीर। सब हाई-प्रोफाइल। अगर तू सबको खुश कर देगी… तो तू मेरी हो जाएगी। हर महीने 5 लाख… और हर कस्टमर से अलग-अलग।”
शिवानी का दिल तेज धड़का। लेकिन उसने हाँ कह दिया। “ठीक है। आज रात… सबके सामने… मैं तुम्हारी रंडी बनूँगी।”
क्लब – वही पुराना क्लब, लेकिन अब प्राइवेट रूम में। अंदर 10 आदमी – बिजनेसमैन, पॉलिटिशियन, सिक्युरिटी ऑफिसर (करण नहीं था, लेकिन उसके जैसे कई)। सब नशे में, सब भूखे। विक्रम ने शिवानी को स्टेज पर बुलाया। “ये है शिवानी… पटना की नई क्वीन। आज रात ये सबकी है। जो सबसे ज्यादा पैसे देगा… वो पहले लेगा।”
शिवानी ने ब्लैक लेस की ड्रेस पहनी थी – छोटी, टाइट। विक्रम ने ड्रेस फाड़ दी। शिवानी नंगी खड़ी थी – गोरी स्किन, भरे स्तन, सख्त निप्पल्स, गीली चूत, गोल गांड। सबकी साँसें रुक गईं। शिवानी ने खुद को छुआ – स्तनों को दबाया, चूत पर हाथ फेरा। “आओ… चोदो मुझे… सब मिलकर… मैं तुम सबकी रंडी हूँ।”
पहला आदमी – एक मोटा बिजनेसमैन। उसने शिवानी को सोफे पर पटका। लंड निकाला – मोटा, लेकिन छोटा। शिवानी ने मुँह में लिया, चूसा। फिर चूत में डाला। धक्के मारने लगा। शिवानी चिल्लाई, “आह… जोर से… फाड़ दो… पैसा दो… और चोदो…” वो झड़ गई। आदमी ने स्पर्म अंदर छोड़ा। 50 हजार नोट्स फेंके।
दूसरा – एक पॉलिटिशियन। उसने शिवानी को घुटनों पर बिठाया। मुँह में लंड डाला। गले तक। शिवानी गैगिंग कर रही थी। “चूस… रंडी… अच्छे से…” शिवानी ने तेज चूसा। फिर वो शिवानी को डॉगी में किया। गांड में लंड डाला। शिवानी चीखी, “आह… गांड फाड़ दो… जोर से… हाँ… पैसा और दो…” वो धक्के मारता रहा। शिवानी की गांड लाल हो गई। स्पर्म अंदर। 1 लाख नोट्स।
तीसरा – एक युवा बिजनेसमैन। उसने शिवानी को गोद में उठाया। स्टैंडिंग में चोदा। शिवानी उछल रही थी। “हाँ… गहरा… मेरी चूत… भर दो…” नेहा और रिया जैसी लड़कियाँ भी थीं – वो सबको चाट रही थीं। लेकिन शिवानी सेंटर में थी। चौथा आदमी ने शिवानी की चूत में लंड डाला, पाँचवें ने मुँह में। डबल। शिवानी चीख रही थी, “आह… दोनों… फाड़ दो… मेरी चूत… मुँह… सब भर दो…” छठा आदमी ने गांड में। ट्रिपल पेनेट्रेशन। शिवानी पागल हो गई। “उफ्फ… तीन लंड… मेरे अंदर… आह… जोर से… धक्के दो… मैं शहर की रंडी हूँ… चोदो मुझे… पैसा दो…”
सब मिलकर – एक के बाद एक। शिवानी की चूत, गांड, मुँह – सब भरे रहे। पानी बहता रहा। स्पर्म बहता रहा। वो कई बार झड़ी – इतनी बार कि गिनती नहीं। क्लब में तालियाँ। विक्रम देख रहा था। “ये लड़की… गोल्ड माइन है।”
आखिर में विक्रम खुद आया। उसका लंड सबसे बड़ा। शिवानी को स्टेज पर लिटाया। सब देख रहे थे। विक्रम ने लंड चूत में डाला – पूरा। शिवानी चीखी, “आआह्ह… विक्रम… फाड़ दो… मेरी चूत… शहर की सबसे महंगी रंडी… तेरी है…” विक्रम धक्के मारने लगा – जंगली, बेरहम। शिवानी की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। “जोर से… गांड भी… दोनों… ट्रिपल… हाँ… स्पर्म अंदर… भर दो…” विक्रम ने चूत में झड़ा। फिर गांड में। फिर मुँह में। शिवानी सब पी गई।
रात खत्म हुई। शिवानी पसीने, स्पर्म और पानी से तर। नोट्स बिखरे हुए। विक्रम ने कहा, “तू अब मेरी हो। हर हफ्ते 10 क्लाइंट। 10 लाख महीना।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “ठीक है… लेकिन मेरी शर्त – कोई नाम नहीं। बस चोदो और पैसे दो।”
घर लौटी। प्रिंस सो रहा था। शिवानी बाथरूम में गई। नहाई। लेकिन उसकी आँखों में अब नई चमक थी। “ये जिंदगी… ये प्यास… ये पैसा… अब यही मेरी जिंदगी है।”
अगले दिन विक्रम ने नया क्लाइंट दिया – एक बड़ा पॉलिटिशियन। शिवानी तैयार हुई। लेकिन मन में एक छोटा सा डर – प्रिंस को पता चलेगा तो? आरव को? लेकिन वो डर अब मजा बन चुका था।
शिवानी अब पटना की सबसे महंगी रंडी बन चुकी थी। शहर की गलियाँ उसकी कहानी सुनातीं। लेकिन प्रिंस को अभी भी पता नहीं था। या पता था… और वो चुप था?


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