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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#71
रिशा...दीदी अगर आप कहें तो ये पेटीकोट निकाल के अच्छे से सिकाई कर दूँ!

सरिता.."हां निकल दे बहू..अब तेरे से कैसी शर्म। हम दोनों तो पहले भी इक दूजे को नंगी देख चुकी हैं!

रिशा ने हाथ बढ़ा कर पेटीकोट का नाडा खोला और पेटीकोट जांघों से निकाल दिया। सरिता नीचे से पूरी नंगी थी। अपनी पेंटी शायद वो राजू के कमरे में ही भूल आई थी! राजू का वीर्य उसकी गांड और चूत से निकल जांघों तक बह रहा था

रिशा ने देखा सरिता की चूत पहले से अधिक खुली लग रही थी। राजू के लंड ने सरिता की चूत का मुँह खोल दिया था और चूत पहले से अधिक फुली हुई लग रही थी। रिशा एक हाथ आगे कर चूत को ऊपर से सहलाने लगी. अपनी एक उंगली उसकी चूत की लकीर में फिराने लगी। रिशा जितना उंगली सहलाती उतना ही सरिता के मुंह से आअह्ह ... आअह्ह ... अह्ह की सिसकारी निकलती। चूत सहलाते सहलाते रिशा ने एक उंगली सरिता की चूत के अंदर घुसेड़ दी। राजू के लंड का माल अभी भी सरिता की चूत में भरा हुआ था. रिशा ने अपनी उंगली में राजू का माल लपेटा और घप्प से वही उंगली अपने मुंह में घुसा कर राजू की मलाई चाटने लगी! राजू की गाढ़ी मलाई और अपनी सास के चूत के रस के मिश्रण का स्वाद उसे काफी अच्छा लगा!

सरिता उसे ऐसा करते देख मुस्कुराने लगी और बोली कि कितनी बड़ी छिनार है तू रिशा.

रिशा.." अरे वाह खुद तो लंड मूंह में लाकर आइसक्रीम के जैसे चूस रही थी और मैंने जरा सा उंगली से स्वाद ले लिया तो मैं छिनार? इतना बोल दोनों खिलखिला कर हंसने लगी!

सरिता.."तो उंगली से काहे चाट रही है सीधे मुंह लगा कर चूत पर सारी मलाई चाट ले!




रिशा ने भी एक शैतानी मुस्कान चेहरे पर लाते हुए सरिता की जांघों को अपने हाथ से चौड़ा किया और अपना मुंह उसकी जांघों के बीच घुसा दिया। पहले तो वो हल्के हल्के से चूत के आस पास किस करती रही और फिर अपनी जीभ निकाल कर उसकी गिल्ली चूत के अंदर घुसा दी। ताजी चुदाई की महक और वीर्य की तीखी गंध उसके दिमाग में हलचल मचाने लगी.

थोड़ी देर में सरिता की चूत पनिया गई और चूतरस उसकी चूत से टपकने लगा। रिशा ने अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पर रख दी। दाने पर जीभ पड़ते ही सरिता ने रिशा के सर को पूरी ताकत से अपनी चूत के ऊपर दबा लिया. रिशा भी अपनी जीभ से चूत के हर कोने को चाटने में लगी हुई थी। सरिता की चूत चाटते हुए रिशा उसके चूतड़ों से भी खेल रही थी दोनों को अब अब इस में मजा आने लगा था। थोड़ी देर बाद दोनों अपनी जगह बदलने की सोची. सरिता ने रिशा का हाथ पकड़ा और उसे अपने ऊपर से धक्का दे बिस्तर पर लिटा दिया. धक्का लगते ही रूपाली बेड पर धम्म से पसर गई। सरिता घुटनों के बल चलते हुए उसके बदन पर हावी होने लगी। पहले उसने अपनी बहू रिशा के होंठ को चूम लिया। फिर रिशा के दोनों हाथ ऊपर किए और पसीने से भीगी उसकी बगलों को नाक लगा कर सूंघने लगी. अपनी जीभ से उसकी एक बगल को चाटने लगी। जितना वो रिशा की बगलें चाटती, रिशा उतनी ही जोर से खिलखिला कर हंस रही थी। फिर वह रिशा की चूचियों को दोनों हाथों में लेकर तोलने लगी जैसे वो ये देखना चाह रही थी कि उसकी और रिशा की चूचियों में से किसकी ज्यादा उन्नत हैं। जब सरिता पूरी तरह से आश्वस्त हो गई कि उसकी चूचियां रिशा से ज्यादा बड़ी ज्यादा ठोस और ज्यादा सुडौल हैं तो इस बात पर सरिता मुस्कुरा दी। फिर सरिता आगे झुकी और उसने रिशा की एक चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगी। वो रिशा के निप्पल ऐसे चूस रही थी जैसे छोटा बच्चा भूख लगने पर अपनी माँ के स्तन चूसता है। रिशा ने सरिता के मुंह से अपनी एक चूची निकाली और दूसरी वाली उसको दे दी चूसने को! सरिता चूचियां चूसने में मग्न थी और रिशा उसकी पीठ पर हाथ फेर रही थी।




कुछ देर बाद दोनों सास और बहू 69 की पोज़िशन मैं आ गयी। रिशा की आवाज़ काफ़ी तेज़ हो गयी थी। इतने में रिशा ने अपने पैरों से सरिता का सर जकड़ लिया और उसका मुँह अपनी चूत पर दबाने लगी.

रिशा- दीदी, प्लीज़ कुछ करो! और चाटो! और अंदर डालो आआहह!

सरिता...”अब जीभ से तो इतना ही हो पाएगा बहू। अब तेरे लिए लंड कहाँ से लाऊ जो तुझे चोद कर ठंडा कर दे”.

अचानक रिशा के दिमाग में एक विचार आया।

रिशा झट से अपने कमरे में गई और वापस आई तो उसके हाथ में एक छोटा पर्स था ! रिशा ने पर्स खोला और उसमें से एक डिल्डो और हथकड़ी निकाली जो वो अक्सर यूज किया करती थी।
सरिता ये देख के बोली- साली छीनाल, तू भी मुझसे बड़ी रण्डी है। ये क्या क्या जमा कर रखा है?

“क्या करूं सासू माँ…आपका बेटा तो शादी करके परदेस चला गया , मुझ जैसी जवान और अकेली औरत को जरूरत पड़ती है इन सबकी कभी कभी”’ “40 की उमर में आप कहर बरपा रही हो, तो मैं तो ठीक से 25 की भी नहीं हूं।” रिशा ने जवाब दिया।
सरिता ने कहा- “बात तो सही है तेरी, तेरा मर्द शहर से दूर है और मेरा मर्द घर में रह कर भी मेरे किसी काम का नहीं. ऐसे में शरीर की भूख या तो कोई गैर मर्द ही बुझा सकता है ये फिर तेरा ये खिलोना”

रिशा..”नहीं सासु माँ जो मजा असली लंड में है वो इस रबर के लंड में कहाँ। हां जब उंगली करने का मन ना हो और कोई मर्द पास ना हो तो ये खिलोना कुछ समय के लिए शांति जरूर दे देता है”

रिशा ने हथकड़ी से सरिता के हाथ बांध दिए और डिल्डो को बेल्ट के जरिए अपने कमर पर फिट किया।
रिशा ने सरिता को कहा- आज मैं आपको यह डिल्डो से चोदुगी. देखती हूं कितनी आग है आप के अंदर जो राजू के लंड का अकेला अकेला मजा ले रही है! बातो बातो में रिशा ने सरिता को अपनी पीड़ा बयां कर दी!!

“हां रिशा मेरी जान, जो जी चाहे कर आज। मैं कुछ नहीं बोलूंगी।


रिशा ने डिल्डो बांध कर सरिता को उठाया और उसे चूसने को कहा।

सरिता ने भी उसे किसी असली लन्ड की तरह थूक लगा कर चूसा।

रिशा ने सरिता को कहा- चलो दीदी अब कुतिया बन जाओ!

सरिता जल्द से पलटी और कुतिया बन गई. सरिता की गांड का हाल देख रिशा की हंसी छूट गई। गांड सूज के बंदर की पिछवाड़े जैसी लाल हुई पड़ी थी और गांड का छेद होज़ पाइप की तरह खुला था. देखने से ही पता चल रहा था कि राजू ने बुरी तरह मारी है गांड.


रिशा ने सरिता की चूत पर डिल्डो घिस दिया।
सरिता को लगा कि रिशा चूत में डालने वाली है

मगर अगले ही पल रिशा ने इरादा बदला और एक झटके में डिल्डो सरिता की गांड में पेल दिया।

सरिता इस अचानक हमले से दर्द के मारे बिलबिला उठी- रिशा साली इतनी बेरहमी से पेलता है कोई? बता तो देती!

रिशा ने डिल्डो को अंदर बाहर करना शुरू किया।
सरिता सिसकारियां भरने लगी।

“अह्ह्ह … उह्ह …आराम से रिशा. पहली बार आज गांड में लंड लिया था और अब ये खिलोना.


रिशा 8 इंच लम्बा डिल्डो सरिता की गांड में डालकर बेरहमी से उसे चोद रही थी। लगभग 10 मिनट तक चोदने बाद रिशा ने डिल्डो बाहर निकाला और अब सरिता को डिल्डो बांध कर उसे चोदने को बोला.

सरिता ने डिल्डो बांध रिशा को बिस्तर पर लिटाया और उसकी पीठ के नीचे एक तकिया लगाया.
अब रिशा की चूत फूल कर सरिता के सामने थी।

सरिता ने जल्द से रिशा के ऊपर सवार होकर डिल्डो उसकी चूत के मुंह पर रखा और जोरदार धक्का लगाया।
चूत का हलका गीलापन होने की वजह से पहले धक्के में ही 4 इंच डिल्डो रिशा की चूत की गहराई तक पहुंच गया।

रिशा मादक आहें भर रही थी। सरिता ने एक बार फिर से डिल्डो बाहर निकाला और इस बार पूरी ताकत से अंदर पेल दिया। 8 इंच का रबर का लंड पूरा जड़ तक रिशा की चूत में घुस चुका था। रिशा की हल्की से चीख निकल गई...ओह सासू मां ये आपका भोसड़ा नहीं मेरी कमसिन चूत है..जरा आराम से.

सरिता ने अब रिशा की चुचियों को मुँह में ले कर चूसना चालू कर दिया और नीचे से धक्के दे रिशा की चूत चोदने लगी. कुछ देर की धमाकेदार चूदाई के बाद रिशा की चूत ने एक बार फिर पानी छोड़ा। रिशा निढाल और संतुष्ट हो गई थी।

दोनों सास और बहू पसीने से लथपथ हुई थी। सरिता रिशा के ऊपर ही लेटी हुई उसे किस करने लगी। रिशा एकदम निश्चिन्त सी थी, उनके चेहरे पर चरम सुख का भाव था। उसने भी सरिता को बेतहाशा चूम लिया।

सरिता फिर धीरे से रिशा के कान में बोली...परसो मैं लाला जी के साथ 2 दिन के लिए अपने मायके जाने का सोच रही हूं। राजू यहीं रहेगा..तेरे पास और ऐसा बोल उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी सी मुस्कान थी। रिशा ने एक बार फिर से सरिता को चूम लिया और गले लग कर बोली...धन्यवाद दीदी
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 13-02-2026, 06:53 PM



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