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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#70
रिशा गरम पानी से सरिता के बदन की सिकाई करने लगी! कुछ समय के बाद रिशा सरिता के बदन को हल्के हाथों से सहला और दबा रही थी। चालीस की उम्र में भी सरिता ने अपना ख्याल रखा था !

[Image: FB-IMG-1604828673765.jpg]

चमकती त्वचा, सुराही सी गर्दन, कठौर वक्ष और उभरी हुई गांड। राजू तो क्या, कोई भी मर्द उसे भोगने को लालायित हो जाएगा ! फिर रिशा को ना जाने क्या सूझा.. रिशा ने धीरे से सरिता की गर्दन को चाट लिया; पहले एक बार, फिर दूसरी बार, फिर तीसरी ... और बाद में तो उसे जहाँ खुली जगह मिली वहां वो जीभ फिराती रही। जाने अंजाने अब फोरप्ले की शुरुआत हो गई थी.:बस ये देखना था की ये फोरप्ले कितना कामुक हो सकता है। फिर रिशा ने धीरे से सरिता के एक गाल चूम लिया और दूसरे पर अपनी उँगलियाँ घुमाने लगी जैसे वो कुछ लिखने की कोशिश कर रही हो। रिशा सरिता के गाल चूमती जा रही थी और सरिता आँखें खोलकर सब देख रही थी। सरिता की आँखें खुली थी और उसके होंठ बुरी तरह काँप रहे थे। रिशा ने एक बार सरिता के होंठ पर अपनी उंगलियाँ फेरी तो उसकी उंगली पर सरिता के होंठों के लाली के कुछ अंश आ गये; जिसे रिशा ने बड़ी अदा से अपने मुंह डाल लिया और चूसने लगी. फिर अपनी लार से गीली उंगली सरिता के मुंह में घुसेड़ दी जिसे सरिता ने एक बार अपनी जीभ से छू लिया। जैसे ही रिशा ने अपने होंठ सरिता के होंठ पर रखे वैसे ही सरिता आँखें बंद हो गई और उसकी सांसें रुक गई। बड़ी हिम्मत करके रिशा ने उसके होंठ चूमने शुरू किये। राजू के वीर्य का स्वाद सरिता के होठों से रिशा के मुँह में घुलने लगा!

[Image: 20250106-075734.jpg]

रिशा ने सरिता को हाथों को उठा कर अपने उरोजों पर रखवा लिए और अपने हाथों पर दबाव बनाते हुए उसके हाथ से चुचे दबवाने लगी। सरिता भी आखिर कब तक शांत रहती ... उसने रिशा का साथ देना शुरू किया। पहले सरिता ने रिशा के होंठ को एक बार चूमा फिर धीरे से अपने मुंह को खोलकर अपने मुंह में रिशा की जीभ को प्रवेश की अनुमति दे दी। दोनों एक दूसरे को चूमने में व्यस्त थी. कभी सरिता रिशा का ऊपर वाला होंठ पकड़ लेती तो रिशा उसका निचला होंठ अपने दांतों से दबा देती। रिशा ने सरिता के गालों को चूमा और फिर क्लीवेज को चाटते हुए नाभि की तरफ बढ़ने लगी। सरिता के पूरे तन बदन पर राजू की चुदाई के निशान थे !

जैसे ही रिशा ने सरिता की नाभि को चूमा, सरिता ने रिशा के सर को अपनी नाभि में घुसा लिया और खुद अपनी कमर घुमाती हुई नाभि चटवाने का मजा लेने लगी। रिशा उसकी नाभि चाट रही थी .
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 13-02-2026, 06:50 PM



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