13-02-2026, 02:28 PM
अब आगे............
राजासाहब ने अपनी बहू के होठों को छोड़ दिया और उसके गाल चूमते हुए उसकी लंबी गर्दन पर आ गये। वहा से उनके होठ मेनका के क्लीवेज पर पहुँच गये और राजासाहब ने उस पर किसिज की झड़ी लगा दी। अपना हाथ पीछे ले जाते हुए उन्होने मेनका की नाइटी का ज़िप खोला, और उसे उसके कंधों से नीचे सरकाते हुए उसके सीने से हटा दिया। काले रंग के स्ट्रेप्लेस्स ब्रा मे कसा उसका सीना उसकी तेज़ साँसों के साथ उपर-नीचे हो रहा था। छातियो का उपरी हिस्सा खुला था और निपल्स और नीचे का हिस्सा ब्रा ने छुपा रखा था। राजासाहब ने उसकी चूचियों के उस खुले उपरी हिस्से को चूमना शुरू कर दिया। मैत्री की प्रस्तुति।
"एयेए..आहह..!",मेनका कराही, उसका बदन एक कमान की तरह उपर उठ गया, उसके हाथ अपने ससुर के सर को कस के पकड़े हुए थे। राजासाहब अब उसी जगह पर चूसने लगे थे,मेनका की हालत बुरी हो गयी,चूत तो पहले से ही गीली थी और राजासाहब की इस हरकत ने उसे और पागल कर दिया। राजासाहब वैसे ही चूस्ते रहे और मेनका की चूत ने पानी छोड़ दिया। वो झड़ गयी थी और अभी तक उसके ससुर ने उसकी चूत को तो छुआ तक नही था। राजासाहब ने उसकी नाइटी को ओर नीचे सरका कर कमर तक कर दिया।
अब वो उसके पेट को चूम रहे थे,मेनका वैसे ही उनके सर पर हाथ रखे हुए थी। चूमते-2 वो उसके सपाट पेट के बीचो-बीच गोल,गहरी नाभि तक पहुँच गये, और अपनी जीभ उसमे फिराने लगे। मेनका फिर से मज़े मे कसमसने लगी। उसके ससुर अपनी जीभ से उसकी नाभि ऐसे चाट रहे थे जैसे वो उसकी चूत हो। यह ख़याल आते ही वो फिर गरम होने लगी। राजासाहब की जीभ उसकी नाभि से निकल कर नाभि और पेंटी के बीच के हिस्से पर थी ,और तभी राजासाहब ने पेंटी के उपर से ही उसकी चूत पर चुंबन ठोक दिया। मेनका ने लाज के मारे करवट ले अपने चेहरे को हाथों मे छुपा लिया।
अब राजासाहब के सामने उसकी पीठ थी। वो थोड़ी देर तक उसकी पतली कमर और चौड़ी गांड को निहारते रहे। फिर उन्होने अपना दाया हाथ उसकी कमर पर रख दिया और पीछे से उस से चिपक गये। उनका पायजामा मे क़ैद लंड मेनका की गांड से सटा था, और उनका सीना मेनका की पीठ से। उनका हाथ उसकी कमर से फिसलता हुआ उसके पेट पे पहुँचा और उस हाथ की एक उंगली उसकी नाभि को कुरेदने लगी। मेनका अपनी गांड पे राजासाहब के लंड को महसूस कर रही थी और उसने अपनी गांड पीछे कर के उस दबाव का जवाब दिया। राजासाहब उसकी गर्दन चूम रहे थे ,और उनका हाथ अब नाभि छोड़ मेनका की ब्रा मे कसी चूचियों को दबा रहा था। मेनका ने अपना दाया हाथ पीछे ले जाकर अपने ससुर के सर को पकड़ लिया। तब राजासाहब ने अपना हाथ उसके सीने से हटा लिया और उसमे उसके प्यारे चेहरे को भर कर अपनी तरफ घुमाया और उसे चूमने लगे। काफ़ी देर तक वो ऐसे ही अपनी बहू के होठों का रसपान करते रहे और नीचे से अपना लंड उसकी गांड पे रगड़ते रहे। मैत्री की लिखनी।
राजासाहब ने उसके होठों को आज़ाद किया और उसे पेट के बल लिटा दिया और उसकी पीठ के एक-एक हिस्से को चूमने लगे। अपने दातों से उन्होने उसके ब्रा के हुक को खोल दिया और चूमते हुए नीचे उसकी गांड तक पहुँच गये। फिर उन्होने उसकी कमर पकड़ कर उसे घुमा कर सीधा पीठ के बल लिटा दिया। मेनका का खुला ब्रा उसके सीने पर अब भी पड़ा था,राजासाहब ने उसे किनारे फेंक दिया। मेनका की दूधिया रंग की बड़ी-2 सुडोल चूचिया और उन पर बने हल्के गुलाबी निपल्स अब उनके सामने थे। मेनका की आँखें शर्म के मारे बंद थी और साँसें और तेज़ हो गयी थी,जिसके कारण उसके उरोज़ उपर-नीचे हो रहे थे और राजासाहब को पागल किए दे रहे थे।
आज के लिए बस यही तक।
मीर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ।
तब तक के लिए मैत्री पटेल की तरफ से जय भारत ।।
राजासाहब ने अपनी बहू के होठों को छोड़ दिया और उसके गाल चूमते हुए उसकी लंबी गर्दन पर आ गये। वहा से उनके होठ मेनका के क्लीवेज पर पहुँच गये और राजासाहब ने उस पर किसिज की झड़ी लगा दी। अपना हाथ पीछे ले जाते हुए उन्होने मेनका की नाइटी का ज़िप खोला, और उसे उसके कंधों से नीचे सरकाते हुए उसके सीने से हटा दिया। काले रंग के स्ट्रेप्लेस्स ब्रा मे कसा उसका सीना उसकी तेज़ साँसों के साथ उपर-नीचे हो रहा था। छातियो का उपरी हिस्सा खुला था और निपल्स और नीचे का हिस्सा ब्रा ने छुपा रखा था। राजासाहब ने उसकी चूचियों के उस खुले उपरी हिस्से को चूमना शुरू कर दिया। मैत्री की प्रस्तुति।
"एयेए..आहह..!",मेनका कराही, उसका बदन एक कमान की तरह उपर उठ गया, उसके हाथ अपने ससुर के सर को कस के पकड़े हुए थे। राजासाहब अब उसी जगह पर चूसने लगे थे,मेनका की हालत बुरी हो गयी,चूत तो पहले से ही गीली थी और राजासाहब की इस हरकत ने उसे और पागल कर दिया। राजासाहब वैसे ही चूस्ते रहे और मेनका की चूत ने पानी छोड़ दिया। वो झड़ गयी थी और अभी तक उसके ससुर ने उसकी चूत को तो छुआ तक नही था। राजासाहब ने उसकी नाइटी को ओर नीचे सरका कर कमर तक कर दिया।
अब वो उसके पेट को चूम रहे थे,मेनका वैसे ही उनके सर पर हाथ रखे हुए थी। चूमते-2 वो उसके सपाट पेट के बीचो-बीच गोल,गहरी नाभि तक पहुँच गये, और अपनी जीभ उसमे फिराने लगे। मेनका फिर से मज़े मे कसमसने लगी। उसके ससुर अपनी जीभ से उसकी नाभि ऐसे चाट रहे थे जैसे वो उसकी चूत हो। यह ख़याल आते ही वो फिर गरम होने लगी। राजासाहब की जीभ उसकी नाभि से निकल कर नाभि और पेंटी के बीच के हिस्से पर थी ,और तभी राजासाहब ने पेंटी के उपर से ही उसकी चूत पर चुंबन ठोक दिया। मेनका ने लाज के मारे करवट ले अपने चेहरे को हाथों मे छुपा लिया।
अब राजासाहब के सामने उसकी पीठ थी। वो थोड़ी देर तक उसकी पतली कमर और चौड़ी गांड को निहारते रहे। फिर उन्होने अपना दाया हाथ उसकी कमर पर रख दिया और पीछे से उस से चिपक गये। उनका पायजामा मे क़ैद लंड मेनका की गांड से सटा था, और उनका सीना मेनका की पीठ से। उनका हाथ उसकी कमर से फिसलता हुआ उसके पेट पे पहुँचा और उस हाथ की एक उंगली उसकी नाभि को कुरेदने लगी। मेनका अपनी गांड पे राजासाहब के लंड को महसूस कर रही थी और उसने अपनी गांड पीछे कर के उस दबाव का जवाब दिया। राजासाहब उसकी गर्दन चूम रहे थे ,और उनका हाथ अब नाभि छोड़ मेनका की ब्रा मे कसी चूचियों को दबा रहा था। मेनका ने अपना दाया हाथ पीछे ले जाकर अपने ससुर के सर को पकड़ लिया। तब राजासाहब ने अपना हाथ उसके सीने से हटा लिया और उसमे उसके प्यारे चेहरे को भर कर अपनी तरफ घुमाया और उसे चूमने लगे। काफ़ी देर तक वो ऐसे ही अपनी बहू के होठों का रसपान करते रहे और नीचे से अपना लंड उसकी गांड पे रगड़ते रहे। मैत्री की लिखनी।
राजासाहब ने उसके होठों को आज़ाद किया और उसे पेट के बल लिटा दिया और उसकी पीठ के एक-एक हिस्से को चूमने लगे। अपने दातों से उन्होने उसके ब्रा के हुक को खोल दिया और चूमते हुए नीचे उसकी गांड तक पहुँच गये। फिर उन्होने उसकी कमर पकड़ कर उसे घुमा कर सीधा पीठ के बल लिटा दिया। मेनका का खुला ब्रा उसके सीने पर अब भी पड़ा था,राजासाहब ने उसे किनारे फेंक दिया। मेनका की दूधिया रंग की बड़ी-2 सुडोल चूचिया और उन पर बने हल्के गुलाबी निपल्स अब उनके सामने थे। मेनका की आँखें शर्म के मारे बंद थी और साँसें और तेज़ हो गयी थी,जिसके कारण उसके उरोज़ उपर-नीचे हो रहे थे और राजासाहब को पागल किए दे रहे थे।
आज के लिए बस यही तक।
मीर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ।
तब तक के लिए मैत्री पटेल की तरफ से जय भारत ।।


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