9 hours ago
शिवानी और प्रिंस की कहानी – अगला भाग (लंबी, गहरी और ट्विस्ट से भरी)
अहमद की गिरफ्तारी के बाद पटना की हवा में एक अजीब सी खामोशी छा गई थी। सिक्युरिटी स्टेशन से निकलते वक्त अहमद ने शिवानी की ओर देखा था – वो नजरें अब भी शिवानी के सपनों में आतीं। उसकी आँखों में नफरत नहीं थी, बल्कि एक ठंडा वादा था: “ये खत्म नहीं हुआ। मैं लौटूँगा।” शिवानी ने उसकी नजरें टाल दीं, लेकिन अंदर से वो काँप रही थी। प्रिंस ने उसे अस्पताल से घर ले जाया। बच्चा – एक छोटा सा लड़का – अब अस्पताल के क्रिब में सो रहा था। नाम रखा गया था आरव। प्रिंस ने उसे गोद में लिया, उसकी छोटी-छोटी उँगलियाँ पकड़ीं। “ये हमारा बेटा है, शिवानी। बस यही सच है।” शिवानी ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसकी आँखों में आँसू थे। वो जानती थी – आरव का खून अहमद का था। लेकिन प्रिंस की बाहों में वो सुरक्षित महसूस कर रही थी… या कम से कम कोशिश कर रही थी।
पहले कुछ हफ्ते सब कुछ सामान्य लग रहा था। प्रिंस ने अपनी कंपनी से छुट्टी ली। वो घर पर रहता, आरव को गोद में लेकर घुमाता, शिवानी के लिए खाना बनाता। रातें अब धीमी हो गई थीं। सेक्स की वो जंगली रातें याद बन चुकी थीं। शिवानी की बॉडी अभी भी रिकवर कर रही थी – स्तन दूध से भरे, पेट पर स्ट्रेच मार्क्स, चूत में हल्का दर्द। प्रिंस उसे छूता तो बहुत प्यार से। कभी-कभी वो शिवानी के स्तनों से दूध चूसता, धीरे-धीरे। शिवानी सिसकारी भरती, “प्रिंस… हल्के से…” लेकिन प्रिंस रुक जाता। “बच्चा सो रहा है।” वो कहकर सो जाता। शिवानी को लगता – प्रिंस अब उसे पहले जैसा नहीं चाहता। या शायद वो बच्चे को देखकर अहमद याद आता है।
एक रात शिवानी को नींद नहीं आ रही थी। आरव रोया। वो उठी, उसे गोद में लिया। खिड़की के पास खड़ी होकर उसे झुलाती रही। बाहर बारिश हो रही थी। अचानक मोबाइल वाइब्रेट हुआ। अननोन नंबर। मैसेज:
“आरव अच्छा सो रहा है? उसकी आँखें मेरी जैसी हैं। – A”
शिवानी का हाथ काँप गया। फोन गिरते-गिरते बचा। वो आरव को बिस्तर पर लिटाकर बाथरूम में गई। दरवाजा बंद किया, रोने लगी। “वो जेल में है… फिर भी…” वो जानती थी – अहमद के कनेक्शन पटना में अभी भी थे। सिक्युरिटी ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन जमानत मिल गई थी। केस चल रहा था, लेकिन अहमद बाहर था। वो छिपकर रह रहा था – दिल्ली में नहीं, पटना के आसपास ही कहीं। शिवानी ने प्रिंस को जगाया नहीं। वो खुद ही सोच रही थी – “मुझे प्रिंस को सब बताना चाहिए। लेकिन वो फिर टूट जाएगा।”
अगले दिन प्रिंस कंपनी गया। शिवानी घर पर अकेली। आरव सो रहा था। दरवाजे की घंटी बजी। शिवानी ने झाँका – कोई नहीं। लेकिन बाहर एक लिफाफा पड़ा था। अंदर एक फोटो – शिवानी और अहमद की, दुकान वाले कमरे में, जब अहमद उसे चोद रहा था। पीछे लिखा: “ये फोटो प्रिंस को मिल जाएगी तो क्या होगा? या सिक्युरिटी को? इंटरफेथ, बच्चा, किडनैप का केस… सब उलट जाएगा।” शिवानी का दिल बैठ गया। वो फोटो फाड़कर फेंकना चाहती थी, लेकिन हाथ नहीं चले। वो उसे जलाने के लिए माचिस जलाई, लेकिन फिर रुक गई। “अगर ये बाहर आया… तो आरव की जिंदगी बर्बाद।”
शाम को प्रिंस लौटा। खुश था। “जान, आज कंपनी में प्रमोशन की बात हुई। सब ठीक हो रहा है।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “बहुत अच्छा।” लेकिन उसकी आँखें झूठ बोल रही थीं। रात को प्रिंस ने उसे छुआ। धीरे से। शिवानी की नाइट गाउन ऊपर की। उसके स्तनों को सहलाया। दूध निकला। प्रिंस ने चूसा। शिवानी की सिसकारी निकली, लेकिन मन कहीं और था। प्रिंस ने उसकी चूत पर हाथ रखा। गीली थी। वो उँगली अंदर डाली। शिवानी चीखी, “प्रिंस… हाँ…” लेकिन उसकी आँखें बंद थे, और दिमाग में अहमद की तस्वीर। प्रिंस ने लंड निकाला। साइड से डाला। धक्के धीमे। शिवानी चिल्लाई, “जोर से… प्रिंस… जैसे पहले…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई। लेकिन शिवानी का मन नहीं लगा। वो झड़ गई, लेकिन खुशी नहीं थी। प्रिंस अंदर झड़ा। दोनों लेटे। प्रिंस बोला, “आई लव यू।” शिवानी ने कहा, “आई लव यू टू।” लेकिन वो झूठ था।
अगले हफ्ते अहमद ने फिर कदम बढ़ाया। शिवानी को कॉल आया – अननोन। वो उठाई। अहमद की आवाज। “शिवानी… मैं पटना में हूँ। आरव को देखना चाहता हूँ। एक बार।” शिवानी चीखी, “नहीं! तू जेल में था!” अहमद हँसा। “जमानत मिल गई। और सिक्युरिटी मेरे पीछे है, लेकिन मैं छिपा हूँ। बस एक मुलाकात। पार्क में। शाम को।” शिवानी ने मना किया। लेकिन अहमद बोला, “अगर नहीं आई… तो वो फोटो प्रिंस के ऑफिस में भेज दूँगा। सबको।” शिवानी टूट गई।
शाम को वो पार्क गई। आरव को घर पर छोड़कर। प्रिंस को कहा – “दोस्त के घर जा रही हूँ।” पार्क में अहमद बेंच पर बैठा था। दाढ़ी बढ़ी हुई, आँखें लाल। वो शिवानी को देखकर उठा। “शिवानी…” वो पास आया। शिवानी पीछे हटी। “आरव कहाँ है?” अहमद ने पूछा। शिवानी बोली, “घर पर। मैं अकेली आई हूँ।” अहमद ने उसका हाथ पकड़ा। “मुझे दिखा।” शिवानी ने हाथ छुड़ाया। “नहीं। तू दूर रह।”
अहमद ने उसे एक सुनसान कोने में खींच लिया। “तू मेरी है। बच्चा मेरा है। प्रिंस सिर्फ नाम का बाप है।” वो शिवानी को दीवार से सटाया। चुंबन करने लगा। शिवानी विरोध कर रही थी। “छोड़… लोग देख लेंगे।” लेकिन अहमद ने उसकी साड़ी ऊपर की। हाथ चूत पर। गीली थी। “देख… तेरा शरीर अभी भी मेरा जवाब देता है।” शिवानी रो रही थी। “अहमद… मत कर… मैं प्रिंस से प्यार करती हूँ।” लेकिन अहमद ने लंड निकाला। पैंट नीचे। शिवानी की टाँग उठाई। एक झटके में अंदर। शिवानी चीखी, “आह… नहीं…” लेकिन उसकी चूत ने लंड को निचोड़ा। अहमद धक्के मारने लगा। पार्क में अंधेरा था। कोई नहीं था। शिवानी चिल्ला रही थी, “प्रिंस… सॉरी…” लेकिन मजा आ रहा था। अहमद ने जोर-जोर से पेला। स्पर्म अंदर।
शिवानी रोती हुई भागी। घर आई। प्रिंस इंतजार कर रहा था। “कहाँ थी?” शिवानी ने झूठ बोला। लेकिन प्रिंस को शक हो गया। वो शिवानी की साड़ी पर देखा – गीले निशान। “ये क्या है?” शिवानी रो पड़ी। सब बता दिया – अहमद की धमकी, मुलाकात, सब। प्रिंस का चेहरा सफेद पड़ गया। वो चुप रहा। फिर बोला, “अब बस। मैं सिक्युरिटी जाऊँगा।” लेकिन शिवानी बोली, “नहीं… वो आरव को ले जाएगा। वो पागल है।”
प्रिंस ने फैसला किया। वो शिवानी और आरव को लेकर पटना छोड़ने वाला था – दिल्ली। नई जिंदगी। लेकिन अहमद को पता चल गया। उसके कनेक्शन से। वो ट्रेन स्टेशन पर इंतजार कर रहा था। जब प्रिंस, शिवानी और आरव प्लेटफॉर्म पर आए – अहमद ने आकर आरव को छीनने की कोशिश की। प्रिंस ने उसे धक्का दिया। झगड़ा हुआ। लोग इकट्ठे हो गए। सिक्युरिटी आई। अहमद भागा। लेकिन प्रिंस ने उसे पकड़ लिया। “तू कभी नहीं छूटेगा।”
ट्रेन छूट गई। वो तीनों वापस घर लौटे। लेकिन अब शिवानी और प्रिंस का रिश्ता और मजबूत हो गया था। रात को प्रिंस ने शिवानी को बेड पर लिटाया। “अब कोई डर नहीं।” वो शिवानी की साड़ी उतारी। उसके स्तनों को चूसा। दूध निकला। शिवानी सिसकारी। प्रिंस ने चूत चाटी। शिवानी चीखी। फिर लंड अंदर। जोरदार धक्के। “प्रिंस… हाँ… फाड़ दो… मैं सिर्फ तेरी हूँ…” दोनों झड़े।
अहमद अब जेल में था – इस बार पक्का। लेकिन शिवानी जानती थी – कहानी कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती। आरव बड़ा होगा। एक दिन सवाल पूछेगा। तब क्या होगा? लेकिन अभी… वो प्रिंस की बाहों में थी। पटना की गलियाँ अब शांत थीं। लेकिन दिल में एक छोटा सा डर हमेशा रहेगा
अहमद की गिरफ्तारी के बाद पटना की हवा में एक अजीब सी खामोशी छा गई थी। सिक्युरिटी स्टेशन से निकलते वक्त अहमद ने शिवानी की ओर देखा था – वो नजरें अब भी शिवानी के सपनों में आतीं। उसकी आँखों में नफरत नहीं थी, बल्कि एक ठंडा वादा था: “ये खत्म नहीं हुआ। मैं लौटूँगा।” शिवानी ने उसकी नजरें टाल दीं, लेकिन अंदर से वो काँप रही थी। प्रिंस ने उसे अस्पताल से घर ले जाया। बच्चा – एक छोटा सा लड़का – अब अस्पताल के क्रिब में सो रहा था। नाम रखा गया था आरव। प्रिंस ने उसे गोद में लिया, उसकी छोटी-छोटी उँगलियाँ पकड़ीं। “ये हमारा बेटा है, शिवानी। बस यही सच है।” शिवानी ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसकी आँखों में आँसू थे। वो जानती थी – आरव का खून अहमद का था। लेकिन प्रिंस की बाहों में वो सुरक्षित महसूस कर रही थी… या कम से कम कोशिश कर रही थी।
पहले कुछ हफ्ते सब कुछ सामान्य लग रहा था। प्रिंस ने अपनी कंपनी से छुट्टी ली। वो घर पर रहता, आरव को गोद में लेकर घुमाता, शिवानी के लिए खाना बनाता। रातें अब धीमी हो गई थीं। सेक्स की वो जंगली रातें याद बन चुकी थीं। शिवानी की बॉडी अभी भी रिकवर कर रही थी – स्तन दूध से भरे, पेट पर स्ट्रेच मार्क्स, चूत में हल्का दर्द। प्रिंस उसे छूता तो बहुत प्यार से। कभी-कभी वो शिवानी के स्तनों से दूध चूसता, धीरे-धीरे। शिवानी सिसकारी भरती, “प्रिंस… हल्के से…” लेकिन प्रिंस रुक जाता। “बच्चा सो रहा है।” वो कहकर सो जाता। शिवानी को लगता – प्रिंस अब उसे पहले जैसा नहीं चाहता। या शायद वो बच्चे को देखकर अहमद याद आता है।
एक रात शिवानी को नींद नहीं आ रही थी। आरव रोया। वो उठी, उसे गोद में लिया। खिड़की के पास खड़ी होकर उसे झुलाती रही। बाहर बारिश हो रही थी। अचानक मोबाइल वाइब्रेट हुआ। अननोन नंबर। मैसेज:
“आरव अच्छा सो रहा है? उसकी आँखें मेरी जैसी हैं। – A”
शिवानी का हाथ काँप गया। फोन गिरते-गिरते बचा। वो आरव को बिस्तर पर लिटाकर बाथरूम में गई। दरवाजा बंद किया, रोने लगी। “वो जेल में है… फिर भी…” वो जानती थी – अहमद के कनेक्शन पटना में अभी भी थे। सिक्युरिटी ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन जमानत मिल गई थी। केस चल रहा था, लेकिन अहमद बाहर था। वो छिपकर रह रहा था – दिल्ली में नहीं, पटना के आसपास ही कहीं। शिवानी ने प्रिंस को जगाया नहीं। वो खुद ही सोच रही थी – “मुझे प्रिंस को सब बताना चाहिए। लेकिन वो फिर टूट जाएगा।”
अगले दिन प्रिंस कंपनी गया। शिवानी घर पर अकेली। आरव सो रहा था। दरवाजे की घंटी बजी। शिवानी ने झाँका – कोई नहीं। लेकिन बाहर एक लिफाफा पड़ा था। अंदर एक फोटो – शिवानी और अहमद की, दुकान वाले कमरे में, जब अहमद उसे चोद रहा था। पीछे लिखा: “ये फोटो प्रिंस को मिल जाएगी तो क्या होगा? या सिक्युरिटी को? इंटरफेथ, बच्चा, किडनैप का केस… सब उलट जाएगा।” शिवानी का दिल बैठ गया। वो फोटो फाड़कर फेंकना चाहती थी, लेकिन हाथ नहीं चले। वो उसे जलाने के लिए माचिस जलाई, लेकिन फिर रुक गई। “अगर ये बाहर आया… तो आरव की जिंदगी बर्बाद।”
शाम को प्रिंस लौटा। खुश था। “जान, आज कंपनी में प्रमोशन की बात हुई। सब ठीक हो रहा है।” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “बहुत अच्छा।” लेकिन उसकी आँखें झूठ बोल रही थीं। रात को प्रिंस ने उसे छुआ। धीरे से। शिवानी की नाइट गाउन ऊपर की। उसके स्तनों को सहलाया। दूध निकला। प्रिंस ने चूसा। शिवानी की सिसकारी निकली, लेकिन मन कहीं और था। प्रिंस ने उसकी चूत पर हाथ रखा। गीली थी। वो उँगली अंदर डाली। शिवानी चीखी, “प्रिंस… हाँ…” लेकिन उसकी आँखें बंद थे, और दिमाग में अहमद की तस्वीर। प्रिंस ने लंड निकाला। साइड से डाला। धक्के धीमे। शिवानी चिल्लाई, “जोर से… प्रिंस… जैसे पहले…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई। लेकिन शिवानी का मन नहीं लगा। वो झड़ गई, लेकिन खुशी नहीं थी। प्रिंस अंदर झड़ा। दोनों लेटे। प्रिंस बोला, “आई लव यू।” शिवानी ने कहा, “आई लव यू टू।” लेकिन वो झूठ था।
अगले हफ्ते अहमद ने फिर कदम बढ़ाया। शिवानी को कॉल आया – अननोन। वो उठाई। अहमद की आवाज। “शिवानी… मैं पटना में हूँ। आरव को देखना चाहता हूँ। एक बार।” शिवानी चीखी, “नहीं! तू जेल में था!” अहमद हँसा। “जमानत मिल गई। और सिक्युरिटी मेरे पीछे है, लेकिन मैं छिपा हूँ। बस एक मुलाकात। पार्क में। शाम को।” शिवानी ने मना किया। लेकिन अहमद बोला, “अगर नहीं आई… तो वो फोटो प्रिंस के ऑफिस में भेज दूँगा। सबको।” शिवानी टूट गई।
शाम को वो पार्क गई। आरव को घर पर छोड़कर। प्रिंस को कहा – “दोस्त के घर जा रही हूँ।” पार्क में अहमद बेंच पर बैठा था। दाढ़ी बढ़ी हुई, आँखें लाल। वो शिवानी को देखकर उठा। “शिवानी…” वो पास आया। शिवानी पीछे हटी। “आरव कहाँ है?” अहमद ने पूछा। शिवानी बोली, “घर पर। मैं अकेली आई हूँ।” अहमद ने उसका हाथ पकड़ा। “मुझे दिखा।” शिवानी ने हाथ छुड़ाया। “नहीं। तू दूर रह।”
अहमद ने उसे एक सुनसान कोने में खींच लिया। “तू मेरी है। बच्चा मेरा है। प्रिंस सिर्फ नाम का बाप है।” वो शिवानी को दीवार से सटाया। चुंबन करने लगा। शिवानी विरोध कर रही थी। “छोड़… लोग देख लेंगे।” लेकिन अहमद ने उसकी साड़ी ऊपर की। हाथ चूत पर। गीली थी। “देख… तेरा शरीर अभी भी मेरा जवाब देता है।” शिवानी रो रही थी। “अहमद… मत कर… मैं प्रिंस से प्यार करती हूँ।” लेकिन अहमद ने लंड निकाला। पैंट नीचे। शिवानी की टाँग उठाई। एक झटके में अंदर। शिवानी चीखी, “आह… नहीं…” लेकिन उसकी चूत ने लंड को निचोड़ा। अहमद धक्के मारने लगा। पार्क में अंधेरा था। कोई नहीं था। शिवानी चिल्ला रही थी, “प्रिंस… सॉरी…” लेकिन मजा आ रहा था। अहमद ने जोर-जोर से पेला। स्पर्म अंदर।
शिवानी रोती हुई भागी। घर आई। प्रिंस इंतजार कर रहा था। “कहाँ थी?” शिवानी ने झूठ बोला। लेकिन प्रिंस को शक हो गया। वो शिवानी की साड़ी पर देखा – गीले निशान। “ये क्या है?” शिवानी रो पड़ी। सब बता दिया – अहमद की धमकी, मुलाकात, सब। प्रिंस का चेहरा सफेद पड़ गया। वो चुप रहा। फिर बोला, “अब बस। मैं सिक्युरिटी जाऊँगा।” लेकिन शिवानी बोली, “नहीं… वो आरव को ले जाएगा। वो पागल है।”
प्रिंस ने फैसला किया। वो शिवानी और आरव को लेकर पटना छोड़ने वाला था – दिल्ली। नई जिंदगी। लेकिन अहमद को पता चल गया। उसके कनेक्शन से। वो ट्रेन स्टेशन पर इंतजार कर रहा था। जब प्रिंस, शिवानी और आरव प्लेटफॉर्म पर आए – अहमद ने आकर आरव को छीनने की कोशिश की। प्रिंस ने उसे धक्का दिया। झगड़ा हुआ। लोग इकट्ठे हो गए। सिक्युरिटी आई। अहमद भागा। लेकिन प्रिंस ने उसे पकड़ लिया। “तू कभी नहीं छूटेगा।”
ट्रेन छूट गई। वो तीनों वापस घर लौटे। लेकिन अब शिवानी और प्रिंस का रिश्ता और मजबूत हो गया था। रात को प्रिंस ने शिवानी को बेड पर लिटाया। “अब कोई डर नहीं।” वो शिवानी की साड़ी उतारी। उसके स्तनों को चूसा। दूध निकला। शिवानी सिसकारी। प्रिंस ने चूत चाटी। शिवानी चीखी। फिर लंड अंदर। जोरदार धक्के। “प्रिंस… हाँ… फाड़ दो… मैं सिर्फ तेरी हूँ…” दोनों झड़े।
अहमद अब जेल में था – इस बार पक्का। लेकिन शिवानी जानती थी – कहानी कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती। आरव बड़ा होगा। एक दिन सवाल पूछेगा। तब क्या होगा? लेकिन अभी… वो प्रिंस की बाहों में थी। पटना की गलियाँ अब शांत थीं। लेकिन दिल में एक छोटा सा डर हमेशा रहेगा


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