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Incest खेल ससुर बहु का
#80
पर किसी तरह दोनो ने अपने दिलों को काबू मे रखा और सोने की कोशिश करने लगे।बहुत सवेरे से जागे होने के कारण और दिन भर की थकान ने असर दिखाया और थोड़ी देर बाद दोनो नींद की गोद मे थे।


क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।


अब आगे..............

मस्त मेनका पार्ट 4


गतान्क से आगे।


रात अचानक राजासाहब को गर्मी महसूस हुई तो वो उठ बैठे, अपने बदन से चादर हटा दी, और साइड टेबल पे रखा लॅंप ऑन कर दिया। फिर अपना कुर्ता उतार कर किनारे रख दिया और टेबल से बॉटल उठा कर पानी पीने लगे।घड़ी मे देखा तो एक बज रहा था। उन्हे मेनका का ध्यान आया तो घूम कर उसकी ओर देखा, वो उनकी तरफ ही करवट कर लेटी हुई थी। मैत्री की भेंट.

अपनी बहू को देखते ही राजासाहब के होठ फिर सूख गये, नाइटी के गले से मेनका की चूचियो का काफ़ी हिस्सा नज़र आ रहा था, बाहों के दबाव के कारण चूचियो का  कटाव और बड़ा हो कर उभर रहा था। नींद मे चादर भी उसके शरीर से हट गयी थी, और नाइटी उठ कर घुटनो के उपर तक आ गयी थी। उसकी गोरी टांगे और जांघों का थोड़ा सा हिस्सा लॅंप की रोशनी मे चमक रहे थे। राजासाहब का लंड पायजामा मे सुगबुगाने लगा। उनकी नज़रे मेनका के जिस्म से हट ही नही रही थी। उनकी आँखों ने उसके पैरों से उसका मुआयना करना शुरू किया और जैसे ही उसके चेहरे तक पहुँची तो उनके माथे पर सलवटें पड़ गयी। मेनका नींद मे थी पर कुछ  बुदबुदा रही थी,चेहरे पर घबराहट भी झलक रही थी।

चारों तरफ घोर अंधेरा था और मेनका उस वीराने मे अकेली पूरी नंगी भाग रही थी। वो दैत्याकार आदमी काला लिबास पहने था और चेहरे पर भी काला मुखौटा था। वो हाथों मे तलवार ले उसका पीचछा कर रहा था। मेनका बदहवास सी बहुत तेज़ी से दौड़ रही थी पर तब भी उस हैवान को पीछे नही छोड़ पा रही थी। तभी उसका पैर कही फँसता है, और वो गिर जाती है। वो काला इंसान उसके पास पहुँच कर तलवार उठाता है,मेनका ज़ोर से चिल्लती है,"बचाओ!बचाओ!"

"
दुल्हन...दुल्हन...आँखे खोलो",कही दूर से उसके कानो मे आवाज़ आती है। वो अपनी आँखे खोलती है और वो इंसान जिसे वो ज़रूरत के वक़्त हमेशा अपने पास पाती है-उसका ससुर, उसे अपने उपर झुका पाती है,"आ गये आप।"


राजासाहब मेनका के उपर झुके हुए उसे जगाने की कोशिश कर रहे थे। मेनका ने उचक कर उनके गले मे बाँहें डाल दी और उनसे चिपक गयी,"मेरे पास रहिए।प्लीज़,मुझे छोड़ कर मत जाइए।" मैत्री की पेशकश

राजासाहब संभाल नही पाए और उसे पकड़ते हुए उसके उपर गिर गये। मेनका उनके गले से लगी हुई थी और उनका नंगा सीना मेनका की छातियो पे दबा हुआ था। राजासाहब का चेहरा उसके बालों मे था, और उसकी खुश्बू उन्हे मदहोश कर रही थीमेनका को भी बहुत भला लग रहा था। जिस इंसान के सपने वो देखने लगी थी,आज वो उसकी बाहों मे था। उसने अपना गाल हौले से राजासाहब के गाल पे रगड़ा। उसकी इस हरकत से राजासाहब  और  नशे मे आ गये और  उसे वैसे ही थामे हुए अपना सर उठा कर मेनका को देखा।

मेनका की नशीली आंखें और अधखुले होंठ उसे बुला रहे थे। जिसे उन्होने खुशी के साथ कबूल किया ,और अपने होठ उसके तपते होठों पे रख दिए और अपनी बहू को चूमने लगे। मेनका भी उनकी किस का जवाब देने लगी , और  दोनो काफ़ी देर तक एक-दूसरे के होठों का मज़ा उठाते रहे। फिर राजासाहब ने धीरे से अपनी जीभ मेनका के मुँह मे डाल दी,वो तो जैसे इसी इंतेज़ार मे थी ,और उसने भी अपनी जीभ उनकी जीभ से टकरा दी। अब दोनो पूरे जोश के साथ एक-दूसरे को चूमने लगे। राजासाहब का लंड पायजामा मे पूरा तन चुका था, और नीचे मेनका उसे अपनी कमर की साइड मे महसूस कर रही थी। उसकी चूत भी गीली हो गयी थी। दोनो की टांगे भी नीचे मिल रही थी और राजासाहब अपने पैर से उसके पैरों को सहला रहे थे।


जय भारत
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 13-02-2026, 02:19 PM



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