10 hours ago
(This post was last modified: 10 hours ago by Shivani4u. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
शिवानी की रातें अब नींद से दूर हो गई थीं। अहमद का चेहरा हर सपने में आता, उसकी धमकी वाली मुस्कान, वो पेन ड्राइव जो प्रिंस की जिंदगी बर्बाद कर सकती थी। पटना की बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी, जैसे शहर भी शिवानी के दिल के तूफान में डूबा हो। वो प्रिंस के बगल में लेटी रहती, लेकिन उसका दिमाग कहीं और। “अगर मैं अहमद को हाँ कह दूँ… तो प्रिंस क्या होगा? जेल? इज्जत बर्बाद? और अगर नहीं… तो वो फोटोज… वो वीडियो… सब बाहर आ जाएगा। इंटरफेथ अफेयर, बच्चा… समाज हमें जीने नहीं देगा।” शिवानी का पेट भारी था, बच्चा अंदर हिलता, जैसे वो भी महसूस कर रहा हो माँ की परेशानी।
सुबह हुई। प्रिंस कंपनी के लिए तैयार हो रहा था। वो शिवानी को देखता, उसके माथे पर किस करता। “जान, आज डॉक्टर का अपॉइंटमेंट है। मैं जल्दी लौटूँगा।” शिवानी मुस्कुराने की कोशिश करती, लेकिन उसकी आँखें बता रही थीं – कुछ गलत है। प्रिंस बाहर निकला, कार स्टार्ट की। लेकिन वो नहीं जानता था कि कार के नीचे लगा GPS ट्रैकर अहमद को उसकी हर मूवमेंट बता रहा था। अहमद अपनी दुकान में बैठा था, फोन पर ऐप खोला – प्रिंस की कार कंपनी की ओर जा रही थी। अहमद मुस्कुराया। “आज से शुरू… प्रिंस का अंत।”
अहमद ने इंस्पेक्टर को फोन किया। “भाई, वो फेक डॉक्यूमेंट्स तैयार हैं? प्रिंस की कंपनी में फ्रॉड का केस बनाओ। बस इतना कि वो ट्रैप हो जाए।” इंस्पेक्टर ने हाँ कहा। “हो जाएगा। लेकिन तू क्यों कर रहा है ये सब?” अहमद ने ठंडी आवाज में कहा, “मोहब्बत… और बदला। वो लड़की मेरी है। बच्चा मेरा है। प्रिंस सिर्फ रुकावट है।”
उधर शिवानी घर में अकेली थी। उसने अहमद को मैसेज किया: “मिलना है। आज शाम। गंगा घाट पर।” अहमद का रिप्लाई तुरंत आया: “आना। और फैसला ले आना।” शिवानी का दिल तेज धड़क रहा था। वो तैयार हुई – लाल साड़ी, जो अब उसके बड़े पेट पर टाइट लग रही थी। स्तन भरे हुए, निप्पल्स दर्द कर रहे थे। वो आईने में देखती, “मैं क्या करूँ? प्रिंस को बचाना है… लेकिन कैसे?”
शाम हुई। गंगा घाट पर बादल घने थे, हवा तेज। शिवानी वहाँ पहुँची। अहमद पहले से खड़ा था, हाथ में एक बैग। वो शिवानी को देखकर पास आया। “शिवानी… तू आई। अच्छा है।” शिवानी ने डरते हुए कहा, “अहमद… मैं हाँ कहती हूँ। लेकिन प्रिंस को मत छुओ। मैं तुम्हारे साथ दिल्ली चलूँगी। लेकिन बच्चा होने तक रुको।” अहमद की आँखें चमक उठीं। वो शिवानी का हाथ पकड़ लिया। “वादा? तू मेरी हो जाएगी?” शिवानी ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी आँखें झूठ बोल रही थीं। वो सोच रही थी – “मैं प्रिंस को बताऊँगी। सिक्युरिटी से मदद लूँगी। लेकिन अभी… अहमद को रोकना है।”
अहमद ने उसे गले लगाया। उसकी दाढ़ी शिवानी के गाल पर रगड़ी। वो कान में फुसफुसाया, “आज रात… मेरे साथ। दुकान पर। आखिरी बार पटना में।” शिवानी का शरीर सिहर उठा। “नहीं… बच्चा…” लेकिन अहमद ने कहा, “बच्चे को कुछ नहीं होगा। मैं जानता हूँ कैसे।” शिवानी मना नहीं कर पाई – डर से, और कहीं पुरानी चाहत से।
रात हुई। शिवानी प्रिंस को मैसेज किया: “माँ के घर जा रही हूँ। रात रुकूँगी।” प्रिंस ने ओके कहा। शिवानी अहमद की दुकान पर पहुँची। दुकान बंद थी, पीछे का कमरा मंद रोशनी में। अगरबत्ती जल रही थी, कुरान की आयतें दीवार पर। अहमद ने दरवाजा बंद किया। वो शिवानी को देख रहा था – उसकी साड़ी, बड़ा पेट, भरे स्तन। “शिवानी… तू कितनी सेक्सी लग रही है… गर्भावस्था में और ज्यादा।”
अहमद ने शिवानी को बाहों में लिया। चुंबन शुरू – गहरा, जंगली। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई। शिवानी की साँसें तेज। अहमद ने साड़ी का पल्लू सरकाया, ब्लाउज खोला। ब्रा उतारी। शिवानी के स्तन बाहर – दूध टपक रहा था। अहमद ने मुँह में लिया, चूसने लगा। “उफ्फ… अहमद… दूध… जोर से चूसो…” शिवानी सिसकारी। दूध उसके मुँह में आ रहा था, अहमद और पागल हो गया। वो दोनों स्तनों को बारी-बारी चूस रहा था, काट रहा था।
अहमद ने शिवानी को दीवार से सटाया। साड़ी नीचे सरकाई। पैंटी उतारी। शिवानी की चूत गीली, गुलाबी। अहमद घुटनों पर बैठा, जीभ से चाटने लगा। क्लिटोरिस चूस रहा था। शिवानी चीखी, “आह… अहमद… हाँ… वहाँ… बच्चा हिल रहा है… लेकिन रुको मत…” अहमद ने उँगलियाँ अंदर डालीं, तेज-तेज। शिवानी झड़ गई – पानी निकला।
अहमद ने पैंट उतारी। लंड बाहर – मोटा, 9 इंच का, नसें फूली हुईं। वो शिवानी को बेड पर लिटाया, साइड में। पीछे से लिपटा, लंड चूत में डाला। शिवानी चीखी, “आह… इतना बड़ा… धीरे… पेट…” लेकिन अहमद धक्के मारने लगा – गहरे, तेज। “तेरी चूत… मेरे बच्चे की वजह से और टाइट… फक यू… मेरी रानी…” शिवानी चिल्ला रही थी, “अहमद… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह… यस…” कमरा सिसकारियों से भर गया।
अहमद ने पोजीशन बदली। शिवानी ऊपर – वो उछल रही थी, लंड अंदर-बाहर। पेट हिल रहा था, स्तन उछल रहे थे। अहमद नीचे से धक्के मार रहा था, स्तनों से दूध चूस रहा था। “मेरा बच्चा… तेरे अंदर… और मैं तुझे चोद रहा हूँ…” शिवानी फिर झड़ गई। अहमद ने स्पर्म अंदर छोड़ दिया।
रात भर चुदाई चली। अहमद ने शिवानी को बाँधा – रस्सी से, ब्लाइंडफोल्ड। वो उसके शरीर पर आइसक्यूब रगड़ता, फिर चाटता। शिवानी तड़पती, “अहमद… प्लीज… चोदो मुझे…” अहमद ने पहले मुँह में लंड डाला, गले तक। शिवानी गैगिंग कर रही थी। फिर चूत में, फिर गांड में ट्राई किया – धीरे, लेकिन जोरदार। शिवानी दर्द से चीखी, “आह… मेरी गांड… उफ्फ… डीपर…” अहमद पेलता रहा।
सुबह हुई। शिवानी थक कर लेटी थी। अहमद ने कहा, “कल रात… हमारी नई शुरुआत। अब तू मेरी है। प्रिंस को छोड़।” शिवानी ने सिर हिलाया, लेकिन मन में प्लान बना रही थी। वो घर लौटी। प्रिंस इंतजार कर रहा था। “माँ के घर कैसा रहा?” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “अच्छा।” लेकिन उसकी बॉडी पर निशान थे – थप्पड़ के, काटने के। वो बाथरूम में गई, रोती रही। “मैंने फिर धोखा दिया… लेकिन प्रिंस को बचाने के लिए।”
दोपहर में अहमद ने अपना प्लान आगे बढ़ाया। उसने इंस्पेक्टर को फोन किया – “काम शुरू करो। प्रिंस की कंपनी में रेड डालो। फेक डॉक्यूमेंट्स प्लांट कर दो।” इंस्पेक्टर ने हाँ कहा। शाम को प्रिंस की कंपनी में सिक्युरिटी आई। रेड। प्रिंस शॉक्ड। “क्या हुआ सर?” इंस्पेक्टर ने कहा, “फ्रॉड का केस। डॉक्यूमेंट्स में गड़बड़ी।” प्रिंस की दुनिया उजड़ गई। वो घर लौटा, शिवानी को बताया। “जान… मैं ट्रैप हो गया। कोई साजिश है।”
शिवानी रो पड़ी। वो जानती थी – अहमद। लेकिन कह नहीं पाई। रात को प्रिंस तनाव में था। वो शिवानी को गले लगाया। “मैं ठीक हो जाऊँगा। लेकिन अब तू और बच्चा… कैसे?” शिवानी ने उसे सांत्वना दी। लेकिन मन में फैसला किया – अहमद को रोकना है। वो चुपके से सिक्युरिटी स्टेशन गई – दूसरे इंस्पेक्टर से मिली। “सर… कोई मुझे ब्लैकमेल कर रहा है। अहमद नाम का। वो प्रिंस को फँसा रहा है।” इंस्पेक्टर ने कहा, “सबूत?” शिवानी ने पेन ड्राइव दी। “यहाँ सब है।”
लेकिन अहमद को शक हो गया। उसके GPS से पता चला – शिवानी सिक्युरिटी गई है। अहमद गुस्से से पागल हो गया। “शिवानी… तूने धोखा दिया?” वो रात को शिवानी के घर के बाहर पहुँचा। लेकिन प्रिंस घर पर था। अहमद ने इंतजार किया। सुबह प्रिंस कंपनी गया। अहमद घर में घुस गया – चुपके से, पीछे के दरवाजे से। शिवानी किचन में थी। अहमद ने उसे पकड़ा, मुँह दबाया। “शिवानी… तू सिक्युरिटी गई? अब देख… क्या होता है।”
शिवानी डर गई। “अहमद… छोड़…” लेकिन अहमद ने उसे बेडरूम में ले जाकर बाँध दिया। “अब तू मेरे साथ चलेगी। दिल्ली। अभी।” वो शिवानी की साड़ी फाड़ने लगा। शिवानी चीखी, लेकिन मुँह बंद था। अहमद ने उसके स्तनों को दबाया, चूसा। “तेरा दूध… मेरा है…” वो लंड निकाला, शिवानी की चूत में डाला। धक्के मारने लगा – जंगली, क्रूर। शिवानी दर्द से तड़प रही थी, “आह… मत… बच्चा…” लेकिन अहमद नहीं रुका। “तू मेरी है… अब हमेशा।” वो चोदता रहा, स्पर्म अंदर।
फिर अहमद ने शिवानी को कार में डाला – किडनैप। वो पटना से बाहर निकल रहा था। लेकिन शिवानी के फोन से प्रिंस को लोकेशन शेयर हो गई थी – वो पहले से तैयार थी। प्रिंस सिक्युरिटी के साथ आया। हाईवे पर चेज। अहमद की कार तेज, लेकिन सिक्युरिटी की जीप ने ब्लॉक कर दिया। अहमद ने गन निकाली – इंस्पेक्टर से चुराई। “रुक जाओ… वरना शिवानी को मार दूँगा।”
सस्पेंस चरम पर। प्रिंस चिल्लाया, “अहमद… छोड़ उसे। बच्चा…” अहमद हँसा, “बच्चा मेरा है।” लेकिन शिवानी ने हिम्मत की – उसने अहमद के हाथ से गन छीनी। गोली चली – अहमद के कंधे पर। सिक्युरिटी ने अहमद को पकड़ा। किडनैप, ब्लैकमेल, फ्रॉड – सब केस।
शिवानी अस्पताल में। प्रिंस उसके पास। “जान… तू ठीक है?” शिवानी रो पड़ी। “प्रिंस… मैंने सब बता दिया। सॉरी…” प्रिंस ने गले लगाया। “मैं जानता था… लेकिन तूने मुझे बचाया।” बच्चा समय से पहले आ गया – लड़का, स्वस्थ। प्रिंस ने उसे गोद लिया। अहमद जेल में। लेकिन कहानी खत्म नहीं – अहमद जेल से मैसेज भेजता, “मैं लौटूँगा… बच्चा मेरा है।”
सुबह हुई। प्रिंस कंपनी के लिए तैयार हो रहा था। वो शिवानी को देखता, उसके माथे पर किस करता। “जान, आज डॉक्टर का अपॉइंटमेंट है। मैं जल्दी लौटूँगा।” शिवानी मुस्कुराने की कोशिश करती, लेकिन उसकी आँखें बता रही थीं – कुछ गलत है। प्रिंस बाहर निकला, कार स्टार्ट की। लेकिन वो नहीं जानता था कि कार के नीचे लगा GPS ट्रैकर अहमद को उसकी हर मूवमेंट बता रहा था। अहमद अपनी दुकान में बैठा था, फोन पर ऐप खोला – प्रिंस की कार कंपनी की ओर जा रही थी। अहमद मुस्कुराया। “आज से शुरू… प्रिंस का अंत।”
अहमद ने इंस्पेक्टर को फोन किया। “भाई, वो फेक डॉक्यूमेंट्स तैयार हैं? प्रिंस की कंपनी में फ्रॉड का केस बनाओ। बस इतना कि वो ट्रैप हो जाए।” इंस्पेक्टर ने हाँ कहा। “हो जाएगा। लेकिन तू क्यों कर रहा है ये सब?” अहमद ने ठंडी आवाज में कहा, “मोहब्बत… और बदला। वो लड़की मेरी है। बच्चा मेरा है। प्रिंस सिर्फ रुकावट है।”
उधर शिवानी घर में अकेली थी। उसने अहमद को मैसेज किया: “मिलना है। आज शाम। गंगा घाट पर।” अहमद का रिप्लाई तुरंत आया: “आना। और फैसला ले आना।” शिवानी का दिल तेज धड़क रहा था। वो तैयार हुई – लाल साड़ी, जो अब उसके बड़े पेट पर टाइट लग रही थी। स्तन भरे हुए, निप्पल्स दर्द कर रहे थे। वो आईने में देखती, “मैं क्या करूँ? प्रिंस को बचाना है… लेकिन कैसे?”
शाम हुई। गंगा घाट पर बादल घने थे, हवा तेज। शिवानी वहाँ पहुँची। अहमद पहले से खड़ा था, हाथ में एक बैग। वो शिवानी को देखकर पास आया। “शिवानी… तू आई। अच्छा है।” शिवानी ने डरते हुए कहा, “अहमद… मैं हाँ कहती हूँ। लेकिन प्रिंस को मत छुओ। मैं तुम्हारे साथ दिल्ली चलूँगी। लेकिन बच्चा होने तक रुको।” अहमद की आँखें चमक उठीं। वो शिवानी का हाथ पकड़ लिया। “वादा? तू मेरी हो जाएगी?” शिवानी ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी आँखें झूठ बोल रही थीं। वो सोच रही थी – “मैं प्रिंस को बताऊँगी। सिक्युरिटी से मदद लूँगी। लेकिन अभी… अहमद को रोकना है।”
अहमद ने उसे गले लगाया। उसकी दाढ़ी शिवानी के गाल पर रगड़ी। वो कान में फुसफुसाया, “आज रात… मेरे साथ। दुकान पर। आखिरी बार पटना में।” शिवानी का शरीर सिहर उठा। “नहीं… बच्चा…” लेकिन अहमद ने कहा, “बच्चे को कुछ नहीं होगा। मैं जानता हूँ कैसे।” शिवानी मना नहीं कर पाई – डर से, और कहीं पुरानी चाहत से।
रात हुई। शिवानी प्रिंस को मैसेज किया: “माँ के घर जा रही हूँ। रात रुकूँगी।” प्रिंस ने ओके कहा। शिवानी अहमद की दुकान पर पहुँची। दुकान बंद थी, पीछे का कमरा मंद रोशनी में। अगरबत्ती जल रही थी, कुरान की आयतें दीवार पर। अहमद ने दरवाजा बंद किया। वो शिवानी को देख रहा था – उसकी साड़ी, बड़ा पेट, भरे स्तन। “शिवानी… तू कितनी सेक्सी लग रही है… गर्भावस्था में और ज्यादा।”
अहमद ने शिवानी को बाहों में लिया। चुंबन शुरू – गहरा, जंगली। उसकी जीभ शिवानी के मुँह में घुस गई। शिवानी की साँसें तेज। अहमद ने साड़ी का पल्लू सरकाया, ब्लाउज खोला। ब्रा उतारी। शिवानी के स्तन बाहर – दूध टपक रहा था। अहमद ने मुँह में लिया, चूसने लगा। “उफ्फ… अहमद… दूध… जोर से चूसो…” शिवानी सिसकारी। दूध उसके मुँह में आ रहा था, अहमद और पागल हो गया। वो दोनों स्तनों को बारी-बारी चूस रहा था, काट रहा था।
अहमद ने शिवानी को दीवार से सटाया। साड़ी नीचे सरकाई। पैंटी उतारी। शिवानी की चूत गीली, गुलाबी। अहमद घुटनों पर बैठा, जीभ से चाटने लगा। क्लिटोरिस चूस रहा था। शिवानी चीखी, “आह… अहमद… हाँ… वहाँ… बच्चा हिल रहा है… लेकिन रुको मत…” अहमद ने उँगलियाँ अंदर डालीं, तेज-तेज। शिवानी झड़ गई – पानी निकला।
अहमद ने पैंट उतारी। लंड बाहर – मोटा, 9 इंच का, नसें फूली हुईं। वो शिवानी को बेड पर लिटाया, साइड में। पीछे से लिपटा, लंड चूत में डाला। शिवानी चीखी, “आह… इतना बड़ा… धीरे… पेट…” लेकिन अहमद धक्के मारने लगा – गहरे, तेज। “तेरी चूत… मेरे बच्चे की वजह से और टाइट… फक यू… मेरी रानी…” शिवानी चिल्ला रही थी, “अहमद… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह… यस…” कमरा सिसकारियों से भर गया।
अहमद ने पोजीशन बदली। शिवानी ऊपर – वो उछल रही थी, लंड अंदर-बाहर। पेट हिल रहा था, स्तन उछल रहे थे। अहमद नीचे से धक्के मार रहा था, स्तनों से दूध चूस रहा था। “मेरा बच्चा… तेरे अंदर… और मैं तुझे चोद रहा हूँ…” शिवानी फिर झड़ गई। अहमद ने स्पर्म अंदर छोड़ दिया।
रात भर चुदाई चली। अहमद ने शिवानी को बाँधा – रस्सी से, ब्लाइंडफोल्ड। वो उसके शरीर पर आइसक्यूब रगड़ता, फिर चाटता। शिवानी तड़पती, “अहमद… प्लीज… चोदो मुझे…” अहमद ने पहले मुँह में लंड डाला, गले तक। शिवानी गैगिंग कर रही थी। फिर चूत में, फिर गांड में ट्राई किया – धीरे, लेकिन जोरदार। शिवानी दर्द से चीखी, “आह… मेरी गांड… उफ्फ… डीपर…” अहमद पेलता रहा।
सुबह हुई। शिवानी थक कर लेटी थी। अहमद ने कहा, “कल रात… हमारी नई शुरुआत। अब तू मेरी है। प्रिंस को छोड़।” शिवानी ने सिर हिलाया, लेकिन मन में प्लान बना रही थी। वो घर लौटी। प्रिंस इंतजार कर रहा था। “माँ के घर कैसा रहा?” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “अच्छा।” लेकिन उसकी बॉडी पर निशान थे – थप्पड़ के, काटने के। वो बाथरूम में गई, रोती रही। “मैंने फिर धोखा दिया… लेकिन प्रिंस को बचाने के लिए।”
दोपहर में अहमद ने अपना प्लान आगे बढ़ाया। उसने इंस्पेक्टर को फोन किया – “काम शुरू करो। प्रिंस की कंपनी में रेड डालो। फेक डॉक्यूमेंट्स प्लांट कर दो।” इंस्पेक्टर ने हाँ कहा। शाम को प्रिंस की कंपनी में सिक्युरिटी आई। रेड। प्रिंस शॉक्ड। “क्या हुआ सर?” इंस्पेक्टर ने कहा, “फ्रॉड का केस। डॉक्यूमेंट्स में गड़बड़ी।” प्रिंस की दुनिया उजड़ गई। वो घर लौटा, शिवानी को बताया। “जान… मैं ट्रैप हो गया। कोई साजिश है।”
शिवानी रो पड़ी। वो जानती थी – अहमद। लेकिन कह नहीं पाई। रात को प्रिंस तनाव में था। वो शिवानी को गले लगाया। “मैं ठीक हो जाऊँगा। लेकिन अब तू और बच्चा… कैसे?” शिवानी ने उसे सांत्वना दी। लेकिन मन में फैसला किया – अहमद को रोकना है। वो चुपके से सिक्युरिटी स्टेशन गई – दूसरे इंस्पेक्टर से मिली। “सर… कोई मुझे ब्लैकमेल कर रहा है। अहमद नाम का। वो प्रिंस को फँसा रहा है।” इंस्पेक्टर ने कहा, “सबूत?” शिवानी ने पेन ड्राइव दी। “यहाँ सब है।”
लेकिन अहमद को शक हो गया। उसके GPS से पता चला – शिवानी सिक्युरिटी गई है। अहमद गुस्से से पागल हो गया। “शिवानी… तूने धोखा दिया?” वो रात को शिवानी के घर के बाहर पहुँचा। लेकिन प्रिंस घर पर था। अहमद ने इंतजार किया। सुबह प्रिंस कंपनी गया। अहमद घर में घुस गया – चुपके से, पीछे के दरवाजे से। शिवानी किचन में थी। अहमद ने उसे पकड़ा, मुँह दबाया। “शिवानी… तू सिक्युरिटी गई? अब देख… क्या होता है।”
शिवानी डर गई। “अहमद… छोड़…” लेकिन अहमद ने उसे बेडरूम में ले जाकर बाँध दिया। “अब तू मेरे साथ चलेगी। दिल्ली। अभी।” वो शिवानी की साड़ी फाड़ने लगा। शिवानी चीखी, लेकिन मुँह बंद था। अहमद ने उसके स्तनों को दबाया, चूसा। “तेरा दूध… मेरा है…” वो लंड निकाला, शिवानी की चूत में डाला। धक्के मारने लगा – जंगली, क्रूर। शिवानी दर्द से तड़प रही थी, “आह… मत… बच्चा…” लेकिन अहमद नहीं रुका। “तू मेरी है… अब हमेशा।” वो चोदता रहा, स्पर्म अंदर।
फिर अहमद ने शिवानी को कार में डाला – किडनैप। वो पटना से बाहर निकल रहा था। लेकिन शिवानी के फोन से प्रिंस को लोकेशन शेयर हो गई थी – वो पहले से तैयार थी। प्रिंस सिक्युरिटी के साथ आया। हाईवे पर चेज। अहमद की कार तेज, लेकिन सिक्युरिटी की जीप ने ब्लॉक कर दिया। अहमद ने गन निकाली – इंस्पेक्टर से चुराई। “रुक जाओ… वरना शिवानी को मार दूँगा।”
सस्पेंस चरम पर। प्रिंस चिल्लाया, “अहमद… छोड़ उसे। बच्चा…” अहमद हँसा, “बच्चा मेरा है।” लेकिन शिवानी ने हिम्मत की – उसने अहमद के हाथ से गन छीनी। गोली चली – अहमद के कंधे पर। सिक्युरिटी ने अहमद को पकड़ा। किडनैप, ब्लैकमेल, फ्रॉड – सब केस।
शिवानी अस्पताल में। प्रिंस उसके पास। “जान… तू ठीक है?” शिवानी रो पड़ी। “प्रिंस… मैंने सब बता दिया। सॉरी…” प्रिंस ने गले लगाया। “मैं जानता था… लेकिन तूने मुझे बचाया।” बच्चा समय से पहले आ गया – लड़का, स्वस्थ। प्रिंस ने उसे गोद लिया। अहमद जेल में। लेकिन कहानी खत्म नहीं – अहमद जेल से मैसेज भेजता, “मैं लौटूँगा… बच्चा मेरा है।”


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