Yesterday, 07:31 AM
शिवानी अब हर पल डर में जी रही थी। अहमद का मैसेज, वो पुरानी फोटो, और उसकी धमकी – सब कुछ उसके दिमाग में घूम रहा था। वो प्रिंस से कुछ कहना चाहती थी, लेकिन हर बार गला रुक जाता। प्रिंस बाहर से खुश दिखता, लेकिन वो भी बदल गया था – अब वो शिवानी को देखता तो आँखों में प्यार के साथ एक हल्का सा शक भी होता। बच्चे का जन्म नजदीक आ रहा था, और शिवानी का पेट अब इतना बड़ा हो चुका था कि चलना भी मुश्किल हो रहा था।
एक दोपहर शिवानी अकेली घर पर थी। प्रिंस कंपनी गया हुआ था। दरवाजे की घंटी बजी। शिवानी ने झाँका – अहमद खड़ा था। सफेद कुर्ता, दाढ़ी सँवारी हुई, लेकिन आँखों में वो ठंडी चमक। शिवानी का दिल धड़क उठा। वो दरवाजा नहीं खोलना चाहती थी, लेकिन अहमद ने धीरे से कहा, “शिवानी… बस 2 मिनट। बच्चे के लिए।”
शिवानी ने काँपते हाथों से दरवाजा खोला। अहमद अंदर आया। वो घर को देख रहा था – प्रिंस और शिवानी की फोटोज, शादी की तैयारियाँ। अहमद मुस्कुराया, लेकिन वो मुस्कान दर्द भरी थी। “ये सब… मेरे बच्चे के लिए है?” वो बोला। शिवानी ने पेट पर हाथ रखा। “अहमद… प्लीज चला जा। प्रिंस कभी भी आ सकता है।”
अहमद पास आया। वो इतना करीब कि शिवानी उसकी साँस महसूस कर रही थी। “मैं नहीं जाऊँगा। तू जानती है मेरा प्लान क्या है।” शिवानी की आँखें नम हो गईं। “क्या प्लान? तू मुझे ब्लैकमेल कर रहा है… ये प्यार नहीं है।”
अहमद ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “प्यार है… लेकिन अब बदला भी है। प्रिंस ने जो मेरा लिया… मैं वो वापस लूँगा।” उसने जेब से एक पेन ड्राइव निकाली। “यहाँ सब है – प्रिंस की कंपनी के कुछ फेक डॉक्यूमेंट्स। मैंने इंस्पेक्टर से बनवाए। अगर मैंने सिक्युरिटी को दिए… तो प्रिंस जेल जाएगा। फ्रॉड का केस। जॉब जाएगी, इज्जत जाएगी। और तू… अकेली रह जाएगी बच्चे के साथ।”
शिवानी काँप उठी। “तू… तू इतना गिर सकता है?” अहमद ने कहा, “गिरा नहीं… मजबूर हूँ। तू मेरी थी। बच्चा मेरा है। मैं दिल्ली में सब तैयार कर चुका हूँ – घर, दुकान, नई जिंदगी। बस तू हाँ कर दे। प्रिंस को मैं खुद संभाल लूँगा। वो टूट जाएगा… लेकिन वो टूटने लायक है।”
शिवानी रो पड़ी। वो घुटनों पर बैठ गई। “अहमद… मैं प्रिंस से प्यार करती हूँ। वो ने मुझे माफ किया… सब सह लिया। तू मुझे क्यों नहीं छोड़ देता?” अहमद उसके सामने घुटनों पर बैठ गया। उसने शिवानी का पेट छुआ – बच्चा हिला। अहमद की आँखें नम हो गईं। “क्योंकि मैं तुझे भूल नहीं पाया। हर रात तेरी याद आती है… तेरी वो सिसकारियाँ… वो रातें कार में… दुकान में। और अब ये बच्चा… मेरा खून।”
अहमद ने शिवानी को उठाया, बेडरूम की ओर ले गया। शिवानी विरोध नहीं कर पाई – डर और पुरानी चाहत दोनों थीं। अहमद ने उसे बेड पर लिटाया। उसने धीरे से शिवानी की साड़ी का पल्लू सरकाया। शिवानी के स्तन भरे हुए, दूध टपक रहे थे। अहमद ने ब्रा उतारी, एक स्तन मुँह में लिया। दूध चूसने लगा – धीरे, लेकिन गहराई से। शिवानी सिसकारी, “अहमद… मत… प्रिंस…” लेकिन उसका शरीर जवाब दे रहा था।
अहमद ने साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी लेटी थी – पेट बड़ा, चूत गीली। अहमद ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड सख्त था – मोटा, लंबा। वो शिवानी की टाँगों के बीच बैठा। “शिवानी… आज आखिरी बार… अगर तू मना करेगी तो मैं चला जाऊँगा… और प्लान रुक जाएगा। लेकिन अगर तूने जवाब दिया… तो तू मेरी हो जाएगी।”
अहमद ने लंड चूत पर रगड़ा। शिवानी चीखी, “आह… अहमद… नहीं…” लेकिन उसकी चूत गीली थी। अहमद ने धीरे से अंदर डाला। शिवानी की चूत टाइट थी – गर्भावस्था की वजह से और ज्यादा संवेदनशील। अहमद धक्के मारने लगा – धीमे, लेकिन गहरे। शिवानी चिल्ला रही थी, “उफ्फ… अहमद… बच्चा… धीरे… लेकिन… और…” अहमद ने स्पीड बढ़ाई। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, दूध निकाल रहा था।
डॉगी स्टाइल में – शिवानी घुटनों पर, पेट नीचे। अहमद पीछे से पेल रहा था। बाल खींच रहा था, गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “तेरी चूत… अभी भी मेरी है… प्रिंस कभी इतना नहीं दे सकता…” शिवानी रो रही थी मजा और अपराधबोध से, “आह… अहमद… जोर से… फाड़ दो… लेकिन प्लीज… प्रिंस को मत…” अहमद ने जोर का धक्का मारा, स्पर्म अंदर छोड़ दिया।
दोनों थक कर लेटे। अहमद ने शिवानी को गले लगाया। “अब फैसला तेरा है। कल तक जवाब दे। हाँ… तो मैं प्लान रोक दूँगा। नहीं… तो प्रिंस की जिंदगी बर्बाद।” वो उठा, चला गया।
शिवानी रोती रही। शाम को प्रिंस आया। शिवानी ने उसे देखा – उसकी मासूम मुस्कान। वो प्रिंस के गले लग गई। “प्रिंस… मुझे कुछ बताना है।” लेकिन शब्द नहीं निकले। वो बस रो रही थी। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ जान?” शिवानी ने कहा, “बस… डर लग रहा है… बच्चा आने वाला है।”
लेकिन अंदर से वो जान रही थी – कल फैसला करना होगा। अहमद का प्लान अब उसके हाथ में था। क्या वो प्रिंस को बचाएगी… या अहमद के साथ भाग जाएगी?
एक दोपहर शिवानी अकेली घर पर थी। प्रिंस कंपनी गया हुआ था। दरवाजे की घंटी बजी। शिवानी ने झाँका – अहमद खड़ा था। सफेद कुर्ता, दाढ़ी सँवारी हुई, लेकिन आँखों में वो ठंडी चमक। शिवानी का दिल धड़क उठा। वो दरवाजा नहीं खोलना चाहती थी, लेकिन अहमद ने धीरे से कहा, “शिवानी… बस 2 मिनट। बच्चे के लिए।”
शिवानी ने काँपते हाथों से दरवाजा खोला। अहमद अंदर आया। वो घर को देख रहा था – प्रिंस और शिवानी की फोटोज, शादी की तैयारियाँ। अहमद मुस्कुराया, लेकिन वो मुस्कान दर्द भरी थी। “ये सब… मेरे बच्चे के लिए है?” वो बोला। शिवानी ने पेट पर हाथ रखा। “अहमद… प्लीज चला जा। प्रिंस कभी भी आ सकता है।”
अहमद पास आया। वो इतना करीब कि शिवानी उसकी साँस महसूस कर रही थी। “मैं नहीं जाऊँगा। तू जानती है मेरा प्लान क्या है।” शिवानी की आँखें नम हो गईं। “क्या प्लान? तू मुझे ब्लैकमेल कर रहा है… ये प्यार नहीं है।”
अहमद ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “प्यार है… लेकिन अब बदला भी है। प्रिंस ने जो मेरा लिया… मैं वो वापस लूँगा।” उसने जेब से एक पेन ड्राइव निकाली। “यहाँ सब है – प्रिंस की कंपनी के कुछ फेक डॉक्यूमेंट्स। मैंने इंस्पेक्टर से बनवाए। अगर मैंने सिक्युरिटी को दिए… तो प्रिंस जेल जाएगा। फ्रॉड का केस। जॉब जाएगी, इज्जत जाएगी। और तू… अकेली रह जाएगी बच्चे के साथ।”
शिवानी काँप उठी। “तू… तू इतना गिर सकता है?” अहमद ने कहा, “गिरा नहीं… मजबूर हूँ। तू मेरी थी। बच्चा मेरा है। मैं दिल्ली में सब तैयार कर चुका हूँ – घर, दुकान, नई जिंदगी। बस तू हाँ कर दे। प्रिंस को मैं खुद संभाल लूँगा। वो टूट जाएगा… लेकिन वो टूटने लायक है।”
शिवानी रो पड़ी। वो घुटनों पर बैठ गई। “अहमद… मैं प्रिंस से प्यार करती हूँ। वो ने मुझे माफ किया… सब सह लिया। तू मुझे क्यों नहीं छोड़ देता?” अहमद उसके सामने घुटनों पर बैठ गया। उसने शिवानी का पेट छुआ – बच्चा हिला। अहमद की आँखें नम हो गईं। “क्योंकि मैं तुझे भूल नहीं पाया। हर रात तेरी याद आती है… तेरी वो सिसकारियाँ… वो रातें कार में… दुकान में। और अब ये बच्चा… मेरा खून।”
अहमद ने शिवानी को उठाया, बेडरूम की ओर ले गया। शिवानी विरोध नहीं कर पाई – डर और पुरानी चाहत दोनों थीं। अहमद ने उसे बेड पर लिटाया। उसने धीरे से शिवानी की साड़ी का पल्लू सरकाया। शिवानी के स्तन भरे हुए, दूध टपक रहे थे। अहमद ने ब्रा उतारी, एक स्तन मुँह में लिया। दूध चूसने लगा – धीरे, लेकिन गहराई से। शिवानी सिसकारी, “अहमद… मत… प्रिंस…” लेकिन उसका शरीर जवाब दे रहा था।
अहमद ने साड़ी पूरी उतार दी। शिवानी नंगी लेटी थी – पेट बड़ा, चूत गीली। अहमद ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड सख्त था – मोटा, लंबा। वो शिवानी की टाँगों के बीच बैठा। “शिवानी… आज आखिरी बार… अगर तू मना करेगी तो मैं चला जाऊँगा… और प्लान रुक जाएगा। लेकिन अगर तूने जवाब दिया… तो तू मेरी हो जाएगी।”
अहमद ने लंड चूत पर रगड़ा। शिवानी चीखी, “आह… अहमद… नहीं…” लेकिन उसकी चूत गीली थी। अहमद ने धीरे से अंदर डाला। शिवानी की चूत टाइट थी – गर्भावस्था की वजह से और ज्यादा संवेदनशील। अहमद धक्के मारने लगा – धीमे, लेकिन गहरे। शिवानी चिल्ला रही थी, “उफ्फ… अहमद… बच्चा… धीरे… लेकिन… और…” अहमद ने स्पीड बढ़ाई। वो शिवानी के स्तनों को दबा रहा था, दूध निकाल रहा था।
डॉगी स्टाइल में – शिवानी घुटनों पर, पेट नीचे। अहमद पीछे से पेल रहा था। बाल खींच रहा था, गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “तेरी चूत… अभी भी मेरी है… प्रिंस कभी इतना नहीं दे सकता…” शिवानी रो रही थी मजा और अपराधबोध से, “आह… अहमद… जोर से… फाड़ दो… लेकिन प्लीज… प्रिंस को मत…” अहमद ने जोर का धक्का मारा, स्पर्म अंदर छोड़ दिया।
दोनों थक कर लेटे। अहमद ने शिवानी को गले लगाया। “अब फैसला तेरा है। कल तक जवाब दे। हाँ… तो मैं प्लान रोक दूँगा। नहीं… तो प्रिंस की जिंदगी बर्बाद।” वो उठा, चला गया।
शिवानी रोती रही। शाम को प्रिंस आया। शिवानी ने उसे देखा – उसकी मासूम मुस्कान। वो प्रिंस के गले लग गई। “प्रिंस… मुझे कुछ बताना है।” लेकिन शब्द नहीं निकले। वो बस रो रही थी। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ जान?” शिवानी ने कहा, “बस… डर लग रहा है… बच्चा आने वाला है।”
लेकिन अंदर से वो जान रही थी – कल फैसला करना होगा। अहमद का प्लान अब उसके हाथ में था। क्या वो प्रिंस को बचाएगी… या अहमद के साथ भाग जाएगी?


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