Yesterday, 07:28 AM
अहमद पटना वापस आया था, लेकिन वो अब पहले जैसा नहीं था। वो चुपके-चुपके शिवानी को देखता रहता – कॉफी शॉप के पास से गुजरता, गंगा घाट पर दूर से नजर रखता। उसकी आँखों में अब सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि एक ठंडी साजिश थी। वो जानता था कि बच्चा उसका है। वो जानता था कि प्रिंस ने शिवानी को माफ कर दिया है। लेकिन अहमद का दिल अब बदला लेने और हासिल करने के बीच झूल रहा था।
अहमद ने पटना में अपनी पुरानी ज्वेलरी शॉप फिर से खोल ली थी, लेकिन वो सिर्फ दिखावा था। असल में वो एक छोटा सा प्लान बना रहा था – गुप्त, धीमा, और खतरनाक। वो शिवानी को वापस लेना चाहता था, लेकिन जबरदस्ती नहीं। वो चाहता था कि शिवानी खुद आए। और इसके लिए वो बच्चे का इस्तेमाल करेगा।
एक शाम अहमद ने एक पुराने दोस्त से बात की – वो दोस्त पटना सिक्युरिटी में इंस्पेक्टर था, और अहमद के साथ पुराना कर्ज था। अहमद ने उसे बताया, “भाई… मुझे एक काम है। शिवानी नाम की लड़की… उसका प्रिंस नाम का बॉयफ्रेंड है। मुझे उनके बारे में सब कुछ चाहिए – उनके घर का पता, प्रिंस की कंपनी, उनके रोज के रूटीन। और हाँ… कोई भी कदम उठाने से पहले मुझे बता देना।”
इंस्पेक्टर ने पूछा, “क्यों भाई? क्या बात है?” अहमद ने मुस्कुरा कर कहा, “बस… पुरानी मोहब्बत है। लेकिन अब मैं इसे सही तरीके से हासिल करना चाहता हूँ।” असल में अहमद का प्लान था – प्रिंस को बदनाम करना। वो प्रिंस के खिलाफ कुछ फर्जी केस बनवाना चाहता था – शायद कोई छोटा सा फ्रॉड का इल्जाम, या कुछ और जो प्रिंस की जॉब और इज्जत पर असर डाले। जब प्रिंस परेशान होगा, तब शिवानी टूटेगी। और टूटे हुए दिल को अहमद संभालेगा। बच्चे का नाम अहमद के नाम पर करवाएगा। शिवानी को समझाएगा कि प्रिंस अब उसके लिए सुरक्षित नहीं रहा।
अहमद ने शिवानी को एक अननोन नंबर से मैसेज भेजा:
“शिवानी… मैं जानता हूँ तू प्रिंस के साथ खुश होने की कोशिश कर रही है। लेकिन सच जान ले – प्रिंस की कंपनी में कुछ गड़बड़ चल रही है। जल्दी पता चलेगा। बच्चे के लिए… सोच ले। मैं तेरे लिए हूँ। हमेशा। – A”
शिवानी ने मैसेज पढ़ा और फोन गिरा दिया। उसका दिल धड़क रहा था। वो प्रिंस से पूछना चाहती थी, लेकिन डर रही थी। प्रिंस घर आया तो शिवानी ने उसे गले लगाया, लेकिन उसकी आँखें डरी हुई थीं। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ जान?” शिवानी ने कहा, “कुछ नहीं… बस बच्चा हिल रहा है।”
उसी रात अहमद ने अपना अगला कदम उठाया। वो प्रिंस की कंपनी के बाहर गया। प्रिंस की कार पार्क में थी। अहमद ने एक छोटा सा GPS ट्रैकर कार के नीचे चिपका दिया। अब वो प्रिंस की हर मूवमेंट ट्रैक कर सकता था। वो जानता था कि प्रिंस रोज शाम 7 बजे घर लौटता है, लेकिन कभी-कभी लेट होता है। अहमद ने सोचा, “अगर मैं प्रिंस को किसी लड़की के साथ फोटो में कैद कर लूँ… या कोई फेक स्कैंडल… तो शिवानी खुद आएगी मेरे पास।”
अगले दिन अहमद ने शिवानी को फिर मैसेज किया:
“कल शाम गंगा घाट पर आ। सिर्फ 5 मिनट। बच्चे की एक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिखाऊँगा – डॉक्टर ने कहा है कि बच्चा हेल्दी है… लेकिन कुछ स्पेशल है। प्लीज… आ जाना।”
शिवानी का मन डोल गया। वो जानती थी कि ये गलत है, लेकिन बच्चे की बात सुनकर वो नहीं रोक पाई। शाम को वो घाट पर गई। अहमद वहाँ था – अकेला, हाथ में एक फाइल। शिवानी पास आई। अहमद ने उसे देखा, उसका पेट देखा। “शिवानी… तू कितनी खूबसूरत लग रही है… मेरा बच्चा तेरे अंदर।”
शिवानी ने फाइल माँगी। अहमद ने उसे दी – लेकिन अंदर अल्ट्रासाउंड नहीं था। एक पुरानी फोटो थी – शिवानी और अहमद की कार वाली रात की, जहाँ वो किस कर रहे थे। शिवानी की आँखें फैल गईं। “ये… ये कहाँ से?” अहमद बोला, “मैंने रखा था… यादों के लिए। लेकिन अब… अगर तू नहीं मानी तो… प्रिंस को दिखा दूँगा। या सिक्युरिटी को। इंटरफेथ अफेयर… बच्चा… सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।”
शिवानी काँप उठी। “अहमद… तू… तू ब्लैकमेल कर रहा है?” अहमद ने उसका हाथ पकड़ा। “नहीं ब्लैकमेल… बस… तुझे याद दिला रहा हूँ कि तू मेरी है। बच्चा मेरा है। प्रिंस सिर्फ नाम का बाप बनेगा। लेकिन मैं असली हूँ। आ जा मेरे साथ… दिल्ली… नई जिंदगी।”
शिवानी रो पड़ी। वो भागकर घर आई। प्रिंस इंतजार कर रहा था। शिवानी ने उसे गले लगाया, लेकिन अब उसकी आँखों में डर था। प्रिंस ने पूछा, “कहाँ गई थी?” शिवानी बोली, “बस… घूमने।” लेकिन अंदर से वो टूट रही थी। अहमद का प्लान काम कर रहा था – शिवानी अब डर गई थी। वो सोच रही थी, “अगर प्रिंस को पता चला… तो सब खत्म। लेकिन अगर मैं अहमद के साथ चली गई… तो प्रिंस का दिल टूट जाएगा।”
अहमद घर लौटा, मुस्कुरा रहा था। वो जानता था – अब शिवानी खुद आएगी। और जब आएगी… तो वो उसे पूरी तरह अपना बना लेगा – बच्चे के साथ, जुनून के साथ, और बदले के साथ।
अहमद ने पटना में अपनी पुरानी ज्वेलरी शॉप फिर से खोल ली थी, लेकिन वो सिर्फ दिखावा था। असल में वो एक छोटा सा प्लान बना रहा था – गुप्त, धीमा, और खतरनाक। वो शिवानी को वापस लेना चाहता था, लेकिन जबरदस्ती नहीं। वो चाहता था कि शिवानी खुद आए। और इसके लिए वो बच्चे का इस्तेमाल करेगा।
एक शाम अहमद ने एक पुराने दोस्त से बात की – वो दोस्त पटना सिक्युरिटी में इंस्पेक्टर था, और अहमद के साथ पुराना कर्ज था। अहमद ने उसे बताया, “भाई… मुझे एक काम है। शिवानी नाम की लड़की… उसका प्रिंस नाम का बॉयफ्रेंड है। मुझे उनके बारे में सब कुछ चाहिए – उनके घर का पता, प्रिंस की कंपनी, उनके रोज के रूटीन। और हाँ… कोई भी कदम उठाने से पहले मुझे बता देना।”
इंस्पेक्टर ने पूछा, “क्यों भाई? क्या बात है?” अहमद ने मुस्कुरा कर कहा, “बस… पुरानी मोहब्बत है। लेकिन अब मैं इसे सही तरीके से हासिल करना चाहता हूँ।” असल में अहमद का प्लान था – प्रिंस को बदनाम करना। वो प्रिंस के खिलाफ कुछ फर्जी केस बनवाना चाहता था – शायद कोई छोटा सा फ्रॉड का इल्जाम, या कुछ और जो प्रिंस की जॉब और इज्जत पर असर डाले। जब प्रिंस परेशान होगा, तब शिवानी टूटेगी। और टूटे हुए दिल को अहमद संभालेगा। बच्चे का नाम अहमद के नाम पर करवाएगा। शिवानी को समझाएगा कि प्रिंस अब उसके लिए सुरक्षित नहीं रहा।
अहमद ने शिवानी को एक अननोन नंबर से मैसेज भेजा:
“शिवानी… मैं जानता हूँ तू प्रिंस के साथ खुश होने की कोशिश कर रही है। लेकिन सच जान ले – प्रिंस की कंपनी में कुछ गड़बड़ चल रही है। जल्दी पता चलेगा। बच्चे के लिए… सोच ले। मैं तेरे लिए हूँ। हमेशा। – A”
शिवानी ने मैसेज पढ़ा और फोन गिरा दिया। उसका दिल धड़क रहा था। वो प्रिंस से पूछना चाहती थी, लेकिन डर रही थी। प्रिंस घर आया तो शिवानी ने उसे गले लगाया, लेकिन उसकी आँखें डरी हुई थीं। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ जान?” शिवानी ने कहा, “कुछ नहीं… बस बच्चा हिल रहा है।”
उसी रात अहमद ने अपना अगला कदम उठाया। वो प्रिंस की कंपनी के बाहर गया। प्रिंस की कार पार्क में थी। अहमद ने एक छोटा सा GPS ट्रैकर कार के नीचे चिपका दिया। अब वो प्रिंस की हर मूवमेंट ट्रैक कर सकता था। वो जानता था कि प्रिंस रोज शाम 7 बजे घर लौटता है, लेकिन कभी-कभी लेट होता है। अहमद ने सोचा, “अगर मैं प्रिंस को किसी लड़की के साथ फोटो में कैद कर लूँ… या कोई फेक स्कैंडल… तो शिवानी खुद आएगी मेरे पास।”
अगले दिन अहमद ने शिवानी को फिर मैसेज किया:
“कल शाम गंगा घाट पर आ। सिर्फ 5 मिनट। बच्चे की एक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिखाऊँगा – डॉक्टर ने कहा है कि बच्चा हेल्दी है… लेकिन कुछ स्पेशल है। प्लीज… आ जाना।”
शिवानी का मन डोल गया। वो जानती थी कि ये गलत है, लेकिन बच्चे की बात सुनकर वो नहीं रोक पाई। शाम को वो घाट पर गई। अहमद वहाँ था – अकेला, हाथ में एक फाइल। शिवानी पास आई। अहमद ने उसे देखा, उसका पेट देखा। “शिवानी… तू कितनी खूबसूरत लग रही है… मेरा बच्चा तेरे अंदर।”
शिवानी ने फाइल माँगी। अहमद ने उसे दी – लेकिन अंदर अल्ट्रासाउंड नहीं था। एक पुरानी फोटो थी – शिवानी और अहमद की कार वाली रात की, जहाँ वो किस कर रहे थे। शिवानी की आँखें फैल गईं। “ये… ये कहाँ से?” अहमद बोला, “मैंने रखा था… यादों के लिए। लेकिन अब… अगर तू नहीं मानी तो… प्रिंस को दिखा दूँगा। या सिक्युरिटी को। इंटरफेथ अफेयर… बच्चा… सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।”
शिवानी काँप उठी। “अहमद… तू… तू ब्लैकमेल कर रहा है?” अहमद ने उसका हाथ पकड़ा। “नहीं ब्लैकमेल… बस… तुझे याद दिला रहा हूँ कि तू मेरी है। बच्चा मेरा है। प्रिंस सिर्फ नाम का बाप बनेगा। लेकिन मैं असली हूँ। आ जा मेरे साथ… दिल्ली… नई जिंदगी।”
शिवानी रो पड़ी। वो भागकर घर आई। प्रिंस इंतजार कर रहा था। शिवानी ने उसे गले लगाया, लेकिन अब उसकी आँखों में डर था। प्रिंस ने पूछा, “कहाँ गई थी?” शिवानी बोली, “बस… घूमने।” लेकिन अंदर से वो टूट रही थी। अहमद का प्लान काम कर रहा था – शिवानी अब डर गई थी। वो सोच रही थी, “अगर प्रिंस को पता चला… तो सब खत्म। लेकिन अगर मैं अहमद के साथ चली गई… तो प्रिंस का दिल टूट जाएगा।”
अहमद घर लौटा, मुस्कुरा रहा था। वो जानता था – अब शिवानी खुद आएगी। और जब आएगी… तो वो उसे पूरी तरह अपना बना लेगा – बच्चे के साथ, जुनून के साथ, और बदले के साथ।


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